*शिक्षा ही इन्सान को महान बनाती है-मुफ़्ती मुख़्तारुल हसन*
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सम्भल- मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम का सालाना 92 वाँ जलसा बनाम फ़ैज़ाने अजमल कॉन्फ़्रेंस का आयोजन खग्गू सराय में किया गया। प्रोग्राम की शुरुआत क़ुरआने पाक की तिलावत से क़ारी शाहिद अशरफ़ी ने की। दिलकश अजमली ने मुफ़्ती अजमल शाह की लिखी हुई हम्द और वासिफ़ अजमली ने नाते पाक पेश की।
बिहार से आए ग़ुलाम रब्बानी ने तक़रीर करते हुए कहा कि क़ुरआन एक ऐसी किताब है जिसमें सब कुछ दिया गया है, क़ुरआन को पढ़कर समझकर इन्सान सच्चा और ईमानदार और अमनपसंद बनता है। आजकल लोगों ने इसको पढ़ना और समझना छोड़ दिया है।
फ़ैज़ाबाद से आए मुफ़्ती ज़ीशान मिस्बाही ने कहा कि आज का इन्सान नाफ़रमान होता जा रहा है, इन्सान को जो करने को कहा जाता है वह नही करता बल्कि अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ काम करता है, जबकि अल्लाह को यह नापसंद है। अगर लोग अल्लाह की किताब और उसके नबी को सही तरह से फॉलो कर लें तो उनकी दुनिया भी अच्छी होगी और आख़िरत भी अच्छी होगी।
इसके बाद क़ारी वसी अशरफ़ ने 2 बच्चों को एक ही बैठक में मतलब एक ही बार में 30 पारे पूरा क़ुरआन बिना देखे सुनाने पर शील्ड देकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की।
फ़ैज़ाबाद से आए मुख्य अतिथि मुफ़्ती मुख़्तारुल हसन बग़दादी साहब ने कहा कि शिक्षा ज़रूर हासिल करनी चाहिए, शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती है, आज के दौर में लोग यही समझते हैं कि बस बच्चों को ही शिक्षा हासिल करनी चाहिए, जबकि हमारे प्यारे नबी के साथी जिनको सहाबा कहा जाता है उन लोगों ने 30 साल से ज़्यादा की उम्र में इल्म हासिल किया। और आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो उम्र ज़्यादा होने के बाद भी इल्म हासिल करते हैं। आप लोग भी अपने बच्चों की दीनी और दुनियावी तालीम हासिल कराइए। इस्लाम आगे बढ़ने या कोई दूसरी ज़बान या सीखने को मना नहीं करता है। हम भारत में रहते हैं और हमको भारत के संविधान के हिसाब से चलना चाहिए।
आख़िर में जो बच्चे मरकज़ी मदरसा से फ़ारिग़ हुए हैं उनके सर पर दस्तार पगड़ी बाँधकर तथा उनको डिग्री सनद देकर सम्मानित किया गया। क़ारी वसी अशरफ़ ने बताया कि इस बार मरकज़ी मदरसा से फ़ारिग़ होने वाले बच्चों की तादाद 34 है, जिसमें सम्भल के आस पास के बच्चों की तादाद ज़्यादा है।
मुफ़्ती आलम नूरी ने संचालन तथा शहर मुफ़्ती क़ारी अलाउद्दीन अजमली ने मुल्क व क़ौम के लिए तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ करायी। तक़ी अशरफ़ एडवोकेट सरफ़राज़ हुसैन अब्दुल सुब्हान और खग्गू सराय के लोगों ने प्रोग्राम को कामयाब बनाने के लिए काफ़ी मेहनत की।
इन मौके पर फ़ारिग़ होने वाले बच्चों के माँ बाप, रिश्तेदार भारी संख्या में मौजूद रहे। सम्भल और आसपास के सभी मदरसों के ज़िम्मेदार भी शामिल रहे।
Feb 09 2025, 17:24