क्या अब जम्मू-कश्मीर में बहाल होगा अनुच्छेद-370, जानें अपने सबसे बड़े मुद्दा क्या बोले उमर अब्दुल्ला?
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में एनसी (नेशनल कॉन्फ्रेंस) को 42 सीटें मिली हैं। गठबंधन में उसकी सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें मिली हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत हासिल कर दस साल बाद फिर सरकार बनाने का जनादेश हासिल कर लिया।पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला का दोबारा मुख्यमंत्री बनना तय है। सत्ता संभालने जा रही एनसी ने जनता से कुछ वादे किए हैं। एनसी सहित कश्मीर घाटी की ज्यादातर पार्टियों ने अनुच्छेद-370 बहाली के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। यहां के मतदाताओं ने एकजुट होकर वोट किया और एनसी को 35 व गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें देकर उनकी झोली भर दी। अब सवाल ये है कि क्या एनसी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 बहाल करेगी?
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत के बाद अनुच्छेद 370 का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 बहाली के सवाल का जवाब खुद उमर अब्दुल्ला ने दिया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमारे राजनीतिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने वक्त की नजाकत की बात करते हुए कहा कि वो जनता को बेवकूफ नहीं बनाना चाहते। अभी इसे वापस पाने की उम्मीद करना मूर्खता होगी।
श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने कहा कि हमारे राजनीतिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। हम कभी भी अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर चुप नहीं रहे हैं और न ही रहेंगे। हमने कभी नहीं कहा कि यह अब हमारे लिए मुद्दा नहीं रहा। लेकिन हम लोगों को बेवकूफ नहीं बनाना चाहते। मैंने हमेशा कहा है कि जिन लोगों ने (बीजेपी) अनुच्छेद 370 को खत्म किया है, उनसे इसे वापस पाने की उम्मीद करना मूर्खता ही होगी।
अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अनुच्छेद 370 के मुद्दे को जिंदा रखेगी। अभी इसे वापस पाने की उम्मीद करना मूर्खता होगी, लेकिन हमें उम्मीद है कि एक दिन सरकार बदलेगी, प्रधानमंत्री बदलेंगे और एक ऐसी सरकार आएगी जिससे हम इस मुद्दे पर बातचीत कर सकेंगे। तब हम इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और प्रयास करेंगे कि इसे वापस लागू कराया जा सके।






हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की। उसने 48 सीटों पर जीत हासिल की है। हरियाणा में हैट्रिक लगाने के बाद सभी की निगाहें अगली सरकार के गठन पर टिकी हैं। सवाल है कि पार्टी की तरफ से राज्य में मुख्यमंत्री कौन होगा, क्या नायब सिंह सैनी को राज्य की कमान सौंपी जाएगी या किसी नए चेहरे को सीएम बनाया जाएगा? मीडिया रिपोर्ट की मानें तो हरियाणा में अगली सरकार का नेतृत्व वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ एक या दो उपमुख्यमंत्री कर सकते हैं। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि सरकार का गठन अगले कुछ दिनों में हो जाएगा। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हरियाणा में विधायकों के साथ बैठक करने के लिए पर्यवेक्षकों को भेजेगा, ताकि औपचारिक रूप से पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का चयन किया जा सके। हालांकि, बीजेपी ने नायब सिंह सैनी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा था और नतीजों के बाद सैनी का सीएम बनना तय माना जा रहा है।लेकिन नतीजों के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल विज और दो केंद्रीय मंत्रियों के बयान ट्विस्ट दे रहे हैं। दरअसल, अनिल विज भी सीएम पद चाह रहे हैं। चुनाव नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि आलाकमान ने मुझे सीएम बनाया तो मैं उसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं। नायब सैनी का कोई विरोध नहीं, लेकिन मैं सीनियर मोस्ट हूं। ये आलाकमान तय करे कि मुझे सीएम बनाना है या नहीं। उधर, मोदी सरकार में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इशारों-इशारों में दक्षिण हरियाणा से मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। हरियाणा के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, हमने दक्षिण हरियाणा में 13-14 सीटें जीती हैं। पार्टी ने फैसला कर रखा है कि नायब सिंह को मुख्यमंत्री बनाएंगे। लेकिन यहां से हमारे लोगों को महत्व देने के लिए पार्टी को कुछ न कुछ सोचना चाहिए। दस साल से दक्षिणी हरियाणा पार्टी की मदद कर रहा है तो पार्टी को भी दक्षिणी हरियाणा की मदद करनी चाहिए। वहीं, हरियाणा के पूर्व सीएम और केंद्रीय मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला संसदीय बोर्ड तय करेगा। मनोहर लाल खट्टर ने सीएम के सवाल पर कहा कि ये पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी काम कर रहे हैं। नीतियां काम कर रही हैं। हरियाणा में बीजेपी की शानदार जीत के बाद नायब सिंह सैनी ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
Oct 09 2024, 16:09
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