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मुख्यमंत्री ने 1682 मेधावी विद्यार्थियों, अभिभावकों और प्रधानाचार्यों को किया सम्मानित
* सफलता अंत नहीं, नई शुरुआत है; लक्ष्य तय कर आगे बढ़ें विद्यार्थी : गुलाब देवी

लखनऊ। प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि परीक्षा में मिली सफलता जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि नए अवसरों और चुनौतियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने का आह्वान किया।
लोक भवन सभागार, लखनऊ में आयोजित सम्मान समारोह में मंत्री ने कहा कि लाखों परीक्षार्थियों के बीच उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करना विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए समय का सदुपयोग और लक्ष्य के प्रति अडिग प्रतिबद्धता आवश्यक है तथा “संकल्प में विकल्प नहीं होना चाहिए।”
मंत्री ने अभिभावकों की भूमिका को विद्यार्थियों की सफलता की आधारशिला बताते हुए कहा कि बच्चों की उपलब्धियों में माता-पिता के त्याग, संघर्ष और समर्पण का बड़ा योगदान होता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार अपनाने और तकनीक व मोबाइल के संतुलित एवं सकारात्मक उपयोग के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
गुलाब देवी ने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का आचरण, व्यवहार और कार्यशैली विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में माध्यमिक शिक्षा विभाग लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 पूरी तरह नकलविहीन, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। प्रदेश में कहीं भी प्रश्नपत्र लीक या समयपूर्व खोले जाने की घटना सामने नहीं आई, जो शिक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि है।
मंत्री ने बताया कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत राजकीय, सहायता प्राप्त और संस्कृत विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही राजकीय विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा मिल सके। व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 18 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में ड्रीम लैब स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तरीय समारोह में विभिन्न बोर्डों के 223 राज्य स्तरीय मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जबकि जनपद स्तर पर यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले 1459 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस प्रकार कुल 1682 छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों एवं प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया।
समारोह के अंत में मंत्री ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मेधावी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और उनसे अपनी उपलब्धि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणा के रूप में लेने का आह्वान किया।
12 जिलों के 14 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी, 3 गांव चकबंदी से किए गए पृथक

* लंबित मामलों के निस्तारण को तेज़ी, 45 वर्षों से अटकी चकबंदी प्रक्रिया भी हुई पूर्ण


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबित चकबंदी मामलों के निस्तारण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 12 जनपदों के 14 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई है, जबकि 3 गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से पृथक किए जाने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जनपदीय अधिकारियों को लंबित गांवों में अभियान चलाकर चकबंदी कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में विभिन्न जिलों में चौपालों और मौके पर निरीक्षण के माध्यम से लंबित मामलों का समाधान किया जा रहा है।
सोमवार को चकबंदी आयुक्त ने 12 जिलों के 14 गांवों में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 52(1) के तहत स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रक्रिया पूर्ण करने के आदेश जारी किए।चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण करने के प्रस्ताव कन्नौज, बिजनौर, सहारनपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, बरेली, गोरखपुर, सुल्तानपुर और मुरादाबाद जनपदों के जिलाधिकारियों एवं बंदोबस्त अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत किए गए थे, जिन्हें चकबंदी आयुक्त ने प्रख्यापित कर मंजूरी दी।

इनमें कई गांव वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया की प्रतीक्षा में थे। जनपद कन्नौज का अकबरपुर गांव 45 वर्षों से, बिजनौर का कस्बा झालू 37 वर्षों से, सहारनपुर का डालामजरा 37 वर्षों से तथा प्रयागराज का राजेपुर मय सराय अरजानी गांव 34 वर्षों से चकबंदी प्रक्रियाधीन था। सघन निगरानी और प्रशासनिक प्रयासों के चलते इन गांवों में भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी कराई गई। वहीं, जनपद हरदोई के टैनी, चित्रकूट के कौडर (कुन्दर) तथा अयोध्या के माफा रामपुर हलवारा गांवों को चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक कर दिया गया है।
चकबंदी विभाग का कहना है कि लंबित गांवों में अभियान जारी रहेगा और शेष मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रशासनिक स्तर पर सतत निगरानी की जा रही है।
सौर ऊर्जा में यूपी ने रचा नया इतिहास, पीएम सूर्य घर उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित
* मंत्री ए.के. शर्मा के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा उत्तर प्रदेश का गौरव, लखनऊ बना देश का पहला जिला जहां एक लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने सौर एवं अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अग्रणी पहचान मजबूत की है। भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम “पीएम सूर्य घर के दो वर्ष : एक करोड़ रूफटॉप तक सौर ऊर्जा का विस्तार” के दौरान उत्तर प्रदेश को “पीएम सूर्य घर उत्कृष्टता पुरस्कार” के लिए चयनित किया गया है।

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में किए गए सतत प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज अक्षय ऊर्जा विकास के क्षेत्र में देश के लिए मॉडल राज्य बनकर उभरा है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

मंत्री ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में अब तक 9.91 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5.57 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे 5.64 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है तथा प्रदेश में 1,888 मेगावाट से अधिक रूफटॉप सौर क्षमता विकसित हुई है।

उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को अब तक 3,602 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सब्सिडी तथा 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की राज्य सहायता प्रदान की जा चुकी है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने PM Surya Ghar Stakeholders Monitoring State Dashboard विकसित कर योजना की रियल-टाइम निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। प्रदेश में वर्तमान में प्रतिदिन करीब 2,000 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं और 6,000 से अधिक पंजीकृत वेंडरों के साथ उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थिति में है। विशेष उपलब्धि के रूप में लखनऊ देश का पहला जिला बन गया है, जहां योजना के तहत एक लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरे किए गए हैं। ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा कारोबार बढ़कर 36 से 40 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जिससे 70 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। इसके अलावा 9,200 सरकारी भवनों पर 247 मेगावाट, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 900 मेगावाट तथा 691 वाणिज्यिक एवं औद्योगिक भवनों पर 220 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है।

सौर ऊर्जा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अन्य अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों में भी देश में अग्रणी बना हुआ है। सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) क्षेत्र में 38 संयंत्रों के माध्यम से 284 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के साथ प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। वहीं पीएम-कुसुम सी-1 योजना के अंतर्गत 7,821 संयंत्रों की स्थापना कर किसानों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है।मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए यूपीनेडा, ऊर्जा विभाग, विद्युत वितरण निगमों, अधिकारियों, कर्मचारियों और सभी हितधारकों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
एक वर्ष में अपराधियों पर कसा शिकंजा, महिला सुरक्षा से लेकर साइबर अपराध नियंत्रण तक कई बड़ी उपलब्धियां; उत्तर प्रदेश पुलिस ने पेश किया रिपोर्ट का
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते एक वर्ष के दौरान अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों पर अंकुश, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna के नेतृत्व में 31 मई 2025 से 31 मई 2026 तक के कार्यकाल का विस्तृत ब्यौरा जारी किया गया है। इसके साथ ही आगामी वर्षों के लिए पुलिस की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की भी जानकारी दी गई है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पुलिस विभाग ने दस प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाकर कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में देखने को मिले।

अपराधियों के खिलाफ सख्ती, दोषसिद्धि दर 93 प्रतिशत से अधिक

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत व्यापक कार्रवाई की। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 32 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 29 हजार से अधिक मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। इस दौरान 42 हजार से अधिक अपराधियों को सजा दिलाई गई। इनमें 18 अपराधियों को मृत्युदंड और 3,340 अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

गैंगस्टर एक्ट के तहत हजारों अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 788 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की गईं। माफिया और संगठित अपराध से जुड़े तत्वों के खिलाफ अभियान चलाकर 336 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियों को जब्त, ध्वस्त या कब्जामुक्त कराया गया।

लूट, चोरी और डकैती की घटनाओं में कमी

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है। लूट की घटनाओं में लगभग 28 प्रतिशत, चोरी में 14 प्रतिशत और डकैती में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है। हत्या, बलवा और नकबजनी जैसे अपराधों में भी कमी दर्ज की गई है।

महिला सुरक्षा को मिली नई मजबूती

महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति अभियान को और मजबूत किया गया। प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए और हजारों पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। महिला हेल्प डेस्क व्यवस्था को और प्रभावी बनाया गया।

पुलिस के अनुसार मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद महिलाओं से जुड़े अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। बलात्कार के मामलों में करीब 34 प्रतिशत, महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के मामलों में 17 प्रतिशत, दहेज हत्या में लगभग 13 प्रतिशत तथा घरेलू हिंसा के मामलों में लगभग 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

जन शिकायतों के निस्तारण में सुधार

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जन शिकायत पोर्टल और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया गया। लगातार निगरानी और समीक्षा के चलते लंबित शिकायतों में लगभग 28 प्रतिशत की कमी आई।

पूरे वर्ष शांतिपूर्ण रहा प्रदेश

पुलिस के अनुसार समीक्षा अवधि के दौरान प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था सफल रही। इसके अलावा होली, दीपावली, ईद तथा अन्य धार्मिक आयोजनों को भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई

साइबर अपराधों से निपटने के लिए लखनऊ में विशेष साइबर अपराध कॉल सेंटर की क्षमता को बढ़ाया गया। ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से संबंधित मामलों में कार्रवाई करते हुए 400 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई गई। साथ ही एक लाख से अधिक मोबाइल नंबर और बड़ी संख्या में मोबाइल उपकरणों की पहचान संख्या ब्लॉक कराई गई।

साइबर अपराध की जांच और रोकथाम के लिए हजारों पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया तथा प्रत्येक जोन में विशेष साइबर कमांडो तैनात किए गए।

तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा

पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित "यक्ष" नामक विशेष एप विकसित किया गया। इस प्रणाली के माध्यम से फरार अपराधियों की पहचान, गिरोहों की निगरानी, बीट पुलिसिंग और अपराध विश्लेषण जैसे कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर जोर

प्रदेश में 60 हजार से अधिक नव आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों के संबंध में 27 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्य, आर्थिक अपराध और आधुनिक जांच पद्धतियों को विशेष रूप से शामिल किया गया।

पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए कई कदम

पुलिस विभाग ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं। दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। बीमा सुविधाओं का विस्तार किया गया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी बजट में वृद्धि की गई।

मेधावी बच्चों के लिए छात्रावास बनाने की योजना शुरू की गई। पुलिस परिवारों के लिए स्वास्थ्य शिविर, करियर परामर्श और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए गए।

सड़क दुर्घटनाएं कम करने की पहल

सड़क सुरक्षा को लेकर "शून्य मृत्यु जिला योजना" लागू की गई। इसके तहत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष टीमें तैनात की गईं। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी और परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई

आतंकवाद निरोधक दस्ते, विशेष कार्य बल और मादक पदार्थ विरोधी इकाइयों ने आतंकवाद, अवैध घुसपैठ, मादक पदार्थ तस्करी, अवैध हथियार कारोबार, वन्यजीव तस्करी और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए। करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ बरामद किए गए और कई संगठित गिरोहों का पर्दाफाश किया गया।

आगामी कार्ययोजना क्या है?

उत्तर प्रदेश पुलिस ने भविष्य के लिए भी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल साक्ष्यों का अधिक उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक समन व्यवस्था को मजबूत करना और समयबद्ध विवेचना को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके साथ ही माफिया, संगठित अपराधियों और आर्थिक अपराध से जुड़े लोगों के खिलाफ वित्तीय जांच को और मजबूत किया जाएगा। अवैध संपत्तियों, बेनामी निवेश, हवाला नेटवर्क और फर्जी कंपनियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मौत बनकर दौड़ी रफ्तार, कंटेनर में समाई कार; महिला समेत तीन की दर्दनाक मौत, पांच जिंदगी की जंग लड़ रहे

लखनऊ । आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर रविवार देर रात एक ऐसा भयावह सड़क हादसा हुआ, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी। तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर में पीछे से इतनी जोरदार तरीके से टकराई कि वह कंटेनर के पिछले हिस्से में समा गई। टक्कर के बाद कंटेनर चालक करीब 50 मीटर तक कार को घसीटता रहा। हादसे में महिला समेत तीन लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्चे सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह हादसा थाना फतेहाबाद क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 36.700 पर रात करीब दो बजे हुआ। बताया जा रहा है कि राजस्थान के चूरू निवासी सोहेब अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ बिहार से राजस्थान लौट रहे थे। कार में कुल आठ लोग सवार थे। सफर के दौरान अचानक तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर से टकरा गई।
टक्कर इतनी भीषण कि कार के उड़ गए परखच्चे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे की आवाज दूर तक सुनाई दी। टक्कर के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह कंटेनर के नीचे घुस गया और वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कार में बैठे लोग लोहे के ढांचे में फंसकर चीखते रहे। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हाइड्रा मशीन से काटकर निकाले गए घायल
सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक फतेहाबाद विनोद कुमार मिश्र, यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी राधा मोहन द्विवेदी और उनकी टीम मौके पर पहुंची। कार इतनी बुरी तरह फंस चुकी थी कि घायलों को बाहर निकालना चुनौती बन गया। राहत एवं बचाव कार्य के लिए हाइड्रा मशीन बुलानी पड़ी। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कार को काटकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।
लेकिन तब तक एक महिला सहित तीन लोगों की सांसें थम चुकी थीं। वहीं परमिला, पूजा कुमारी, राजू, कार चालक सोहेब और छह वर्षीय अयांश गंभीर रूप से घायल मिले। सभी घायलों को तत्काल सीएचसी फतेहाबाद पहुंचाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रेफर कर दिया गया।
हादसे के बाद कंटेनर चालक फरार
दुर्घटना के बाद कंटेनर चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने कंटेनर को कब्जे में ले लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि हादसा तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
एक ही परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े लोगों के साथ हुए इस हादसे ने खुशियों भरे सफर को मातम में बदल दिया। कुछ ही पलों में तीन जिंदगियां खत्म हो गईं, जबकि पांच लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही मृतकों और घायलों के परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस का बयान
प्रभारी निरीक्षक फतेहाबाद विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि हादसे में महिला समेत तीन लोगों की मौत हुई है और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों का उपचार चल रहा है। फरार कंटेनर चालक की तलाश के लिए टीमों को लगाया गया है।
कुशल नेतृत्व और उत्कृष्ट सेवाओं के साथ उपनिदेशक विद्युत सुरक्षा मनोज कुमार शर्मा हुए सेवानिवृत्त

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश शासन के उपनिदेशक विद्युत सुरक्षा मनोज कुमार शर्मा ने लगभग 40 वर्षों की उल्लेखनीय एवं समर्पित शासकीय सेवा पूर्ण करने के उपरांत 31 मई 2026 को अधिवर्षता आयु पूर्ण कर गोरखपुर रीजन से सेवानिवृत्ति ग्रहण की।

उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर विद्युत सुरक्षा परिवार तथा गोरखपुर के उद्यमियों एवं व्यवसायियों द्वारा एक स्थानीय होटल में भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं गणमान्य लोगों ने श्री शर्मा के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखद जीवन की कामना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।

 मनोज कुमार शर्मा लगभग पांच वर्षों तक गोरखपुर रीजन में तैनात रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कुशल प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल एवं दायित्वों के निर्वहन में विशेष पहचान बनाई। उनके नेतृत्व में वर्ष 2024 में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह तथा वर्ष 2025 के दिव्य एवं भव्य महाकुंभ जैसे अति महत्वपूर्ण आयोजनों में विद्युत सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया गया।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं अन्य वीआईपी/वीवीआईपी हस्तियों के गोरखपुर रीजन में आगमन के दौरान भी उन्होंने अपनी टीम का प्रभावी नेतृत्व करते हुए सभी कार्यक्रमों को विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से सफल एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समारोह में वक्ताओं ने श्री शर्मा की कार्यशैली, अनुशासन, सरल व्यक्तित्व एवं प्रशासनिक दक्षता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सेवाएं विभाग के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।

उत्तर प्रदेश को मिला स्थायी डीजीपी, राजीव कृष्ण को सौंपी गई कमान
लखनऊ। लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद वर्तमान में कार्यवाहक DGP के पद पर तैनात राजीव कृष्ण को प्रदेश का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति राज्य में चार साल बाद हुई स्थायी डीजीपी की पहली तैनाती है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए पैनल पर शासन स्तर पर विचार करने के बाद मुख्यमंत्री ने राजीव कृष्ण को ही स्थायी डीजीपी बनाने की मंजूरी दी। यूपीएससी ने 26 मई को हुई बैठक में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण के नामों की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी। इनमें से राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा था।

राजीव कृष्ण जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण को पुलिस विभाग में उनके प्रशासनिक और मैदानी अनुभव के लिए जाना जाता है। उन्होंने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और जोनों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और यूपीएससी की व्यवस्था के अनुसार स्थायी डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होता है। ऐसे में राजीव कृष्ण 2028 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। वर्ष 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल के हटाए जाने के बाद से प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का इंतजार था। अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में राजीव कृष्ण ने पुलिस विभाग में कई अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। वे शासन के करीबी और भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाते हैं।

कार्यवाहक डीजीपी बनने से पहले वे डीजीपी इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन के पद पर भी रहे। राजीव कृष्ण ने लखनऊ, मथुरा, इटावा, आगरा और नोएडा जैसे कई जिलों में पुलिस कप्तान के रूप में सेवाएं दी हैं। इटावा में उनकी तैनाती के दौरान उन्होंने दस्युओं के गिरोह का सफाया किया। इसके अलावा वे लखनऊ के एडीजी जोन और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बीएसएफ में आईजी ऑपरेशन के पद पर भी रहे हैं।इस नियुक्ति के साथ उत्तर प्रदेश को अब स्थिर और अनुभवी पुलिस नेतृत्व मिलेगा, जो प्रदेश की लॉ एंड आॅडर व्यवस्था को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
वीर सावरकर का राष्ट्र प्रथम विचार युवाओं के लिए प्रेरणा : अपर पुलिस उपायुक्त जितेंद्र कुमार दुबे
लखनऊ। गोमती नगर के छत्रपति शाहूजी महाराज भागीदारी भवन में शनिवार को 'माय होम इंडिया' संस्था के तत्वावधान में 'स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती महोत्सव 2026' का आयोजन हुआ।क्रांतिसूर्य स्वातंत्र्यवीर सावरकर की जयंती पर आयोजित इस वैचारिक संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर पुलिस उपायुक्त जितेंद्र कुमार दुबे उपस्थित रहे। उन्होंने सावरकर के राष्ट्र प्रथम के विचारों को आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया और कहा कि सावरकर का जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है। एडीसीपी दुबे ने मातृभूमि की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य बताते हुए उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सावरकर ने काला पानी की यातनाओं को सहकर भी देश की आजादी का सपना नहीं छोड़ा। उनका सामाजिक समरसता और अखंड भारत का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण रहे। अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह ने की। मुख्य वक्ता 'माय होम इंडिया' के संस्थापक सुनील देवधर ने सावरकर के जीवन दर्शन को विस्तार से साझा किया। पूर्व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. सतीश द्विवेदी भी मंच पर मौजूद रहे। सायं 5 बजे शुरू हुए इस गरिमामय आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने सपरिवार हिस्सा लिया और राष्ट्र निर्माण का संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने सावरकर के हिंदुत्व, इतिहास लेखन और समाज सुधार के योगदान को याद किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राम प्रताप सिंह, आलोक रंजन सिंह और अखिल चतुर्वेदी की अहम भूमिका रही।
ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी, ‘जी-रामजी अधिनियम’ बनेगा विकसित भारत का मजबूत आधार: केशव मौर्य

**ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और आय सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती, गांव-गांव तक पहुंचेगा ‘विकसित भारत’ का संकल्प**

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (जी-रामजी) ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 कार्य दिवस किए जाने से ग्रामीण परिवारों की आय, आर्थिक स्थिरता और आजीविका सुरक्षा को बल मिलेगा। इससे श्रमिकों को अधिक काम, बेहतर आय और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्राप्त होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, कौशल विकास और स्वरोजगार को भी बढ़ावा देगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों में विकास की नई ऊर्जा पैदा होगी और हर ग्रामीण परिवार की विकास प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित होगी।

श्री मौर्य ने कहा कि ‘जी-रामजी अधिनियम, 2025’ विकसित भारत के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा, आय सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और सतत एवं समावेशी विकास के लक्ष्य को गति मिलेगी।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आत्मनिर्भर गांव, सशक्त परिवार और समृद्ध भारत के निर्माण के अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
KGMU में करोड़ों के दवा घोटाले की आशंका, कैंसर मरीजों की दवाओं में भारी अनियमितता

* 6 माह में लगने वाला इंजेक्शन एक महीने में 4-5 बार दर्शाया गया, शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के संकेत


लखनऊ। राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में करोड़ों रुपये के संभावित दवा घोटाले का मामला सामने आया है। कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों की खरीद व खपत में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
जांच में सामने आया है कि कुछ ऐसे इंजेक्शन, जिन्हें मरीजों को सामान्यतः छह माह में एक बार लगाया जाना चाहिए, उन्हें रिकॉर्ड में एक ही महीने के भीतर 4 से 5 बार दिखाया गया। फरवरी और मार्च 2026 के दौरान दवाओं की खपत अचानक बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंचने पर मामला संदेह के घेरे में आया।
बिल, प्रिस्क्रिप्शन और दवा वितरण के ऑडिट के दौरान कई गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं। जांच में दवाओं की खपत, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में अंतर पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं, KGMU प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए कुलपति के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद संभावित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है।