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विपक्ष के मार्च पर भड़के हरीश साल्‍वे, बोले-सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा

#oppositionseeksappointmentwithcjiharishsalvecallsit_foolish

देश के जाने-माने वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक किए जाने वाले मार्च को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्‍होंने विपक्ष के इस कदम को परम मूर्खता बताते हुए कहा कि न्‍यायपालिका को पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

विपक्ष के इस कदम को बताया ‘सरासर मूर्खता’

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कानूनी मामलों के जानकार और देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्‍वे ने विपक्ष के सीजेपी से मुलाकात की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक के मार्च को ‘सरासर मूर्खता’ बताते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान अधिकार देता है, लेकिन उनका इस्तेमाल कानून और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

विपक्ष के रुख पर कड़ी टिप्पणी

साल्वे ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के बजाय राजनीतिक दलों को स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रुख ऐसा प्रतीत होता है, मानो उसे संविधान और व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वह अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहता है।

अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर किया जाए-साल्वे

विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर साल्वे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही किया जा सकता है। अगर पुलिस प्रदर्शन की अनुमति नहीं देती है, तो उसके फैसले को उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कोई व्यक्ति खुद ही पुलिस के आदेश को गलत मानकर प्रतिबंध तोड़ नहीं सकता और फिर रोके जाने पर अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाता।

विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के ऐलान पर टिप्पणी

पूर्व सॉलिसिटर जनरल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की घोषणा की है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों से भी मार्च में शामिल होने की अपील की थी।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

గణేశ్ నిమజ్జనానికి ఎస్సారెస్పీ నుంచి నీటి విడుదల

కరీంనగర్/కొత్తపల్లి: గణేశ్ విగ్రహాల నిమజ్జనం కోసం ఎస్సారెస్పీ మెయిన్ కెనాల్‌కు సోమవారం నీటిని విడుదల చేశారు. నవరాత్రి ఉత్సవాలు ముగియనున్న నేపథ్యంలో కరీంనగర్ జిల్లాలోని కాకతీయ కాల్వలు, డిస్ట్రిబ్యూటరీ కాల్వల్లో నిమజ్జనానికి ఇబ్బందులు లేకుండా నీటిని విడుదల చేయాలని చొప్పదండి ఎమ్మెల్యే మేడిపల్లి సత్యం ప్రాజెక్టు చీఫ్ ఇంజినీర్‌ను కోరారు.

కొన్నేళ్లుగా గణేశ్ విగ్రహాలను కాకతీయ కాల్వలతో పాటు పలు డిస్ట్రిబ్యూటరీ కాల్వల్లో నిమజ్జనం చేస్తున్నారని, ప్రస్తుతం కాల్వల్లో నీరు లేక భక్తులు ఇబ్బందులు ఎదుర్కొంటున్నారని ఎమ్మెల్యే అధికారుల దృష్టికి తీసుకెళ్లారు. దీంతో ఎమ్మెల్యే సూచన మేరకు నీటిని విడుదల చేస్తామని ప్రాజెక్టు సీఈ తెలిపారు.

సోమవారం ఉదయం 11 గంటలకు తొలుత 500 క్యూసెక్కుల నీటిని విడుదల చేశారు. అనంతరం సాయంత్రం మరో 3 వేల క్యూసెక్కుల నీటిని వదిలారు. కరీంనగర్ నగరంలో పెద్ద సంఖ్యలో గణేశ్ విగ్రహాలను నిమజ్జనం చేసే చింతకుంట కెనాల్‌కు మంగళవారం రాత్రి వరకు నీరు చేరే అవకాశం ఉందని అధికారులు తెలిపారు.

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार

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*नई दिल्ली:* नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई लताड़*

#NoidaNews

नई दिल्ली: नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।

जस्टिस एसपी शर्मा कौन हैं, क्यों हटाने की मांग, जानें क्या बोले-CJI सूर्य कांत?

#justicespsharmarajasthanhighcourtallegationscjisuryakantstand

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के भीतर उठे सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत से राजस्थान हाई कोर्ट में तत्काल किसी दूसरे राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं, मामलों की सेलेक्टिव लिस्टिंग और प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने लगाए गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत को तीन अलग-अलग चिट्ठियां लिखकर जस्टिस शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से लेकर केस लिस्टिंग में हेरफेर तक के आरोप हैं। जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को लिखी चिट्ठियों में जस्टिस शर्मा के कामकाज को लेकर कई चिंताएं जताईं। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ जजों ने उनसे मुलाकात के दौरान जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर की थी। आरोपों में साथी जजों को ट्रांसफर जैसी कार्रवाई की कथित धमकी देने और सीजेआई से करीबी का दावा करने जैसी बातें भी शामिल हैं। एक शिकायत में हाईकोर्ट में नियुक्तियों और केस लिस्टिंग से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने चिंताओं पर ध्यान दिया है। पद पर मौजूद जज के खिलाफ ऐसे आरोपों से “स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए सख्ती से” निपटा जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि कोई भी फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता है।

कौन हैं चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा

जस्टिस शर्मा नवंबर 2016 में राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस बने थे। जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना हाई कोर्ट किया गया। राजस्थान वापसी का उनका अनुरोध मार्च 2023 में कॉलेजियम ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट भेजा गया। बाद में मई 2025 में कॉलेजियम ने उनकी राजस्थान वापसी की सिफारिश की। सितंबर 2025 से न्यायमूर्ति शर्मा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। वह सितंबर 2025 से इस पद पर हैं और अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

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रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

CJI सूर्यकांत ने UAPA कानून पर कही बड़ी बात, उमर खालिद जैसे मामलों मे देरी पर दिया ये जवाब

#cjijusticesuryakantonuapadelhiriotscase

दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है।

यूएपीए मामले पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह संस्थान के रजत जयंती समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी। किसी खास मामले या आरोपी का जिक्र किए बिना, सीजेआई ने कहा कि यूएपीए एक ऐसा मामला है जिस पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत है।

मामलों का शीघ्र निपटारा ही विवाद का प्रभावी समाधान-सीजेआई

देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्‍सर ही सवाल उठते रहते हैं। खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं। इन सबके बीच सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है।

विशेष अदालतों से बढ़ी उम्मीदें

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

विपक्ष के मार्च पर भड़के हरीश साल्‍वे, बोले-सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा

#oppositionseeksappointmentwithcjiharishsalvecallsit_foolish

देश के जाने-माने वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक किए जाने वाले मार्च को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्‍होंने विपक्ष के इस कदम को परम मूर्खता बताते हुए कहा कि न्‍यायपालिका को पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

विपक्ष के इस कदम को बताया ‘सरासर मूर्खता’

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कानूनी मामलों के जानकार और देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्‍वे ने विपक्ष के सीजेपी से मुलाकात की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक के मार्च को ‘सरासर मूर्खता’ बताते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान अधिकार देता है, लेकिन उनका इस्तेमाल कानून और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

विपक्ष के रुख पर कड़ी टिप्पणी

साल्वे ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के बजाय राजनीतिक दलों को स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रुख ऐसा प्रतीत होता है, मानो उसे संविधान और व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वह अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहता है।

अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर किया जाए-साल्वे

विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर साल्वे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही किया जा सकता है। अगर पुलिस प्रदर्शन की अनुमति नहीं देती है, तो उसके फैसले को उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कोई व्यक्ति खुद ही पुलिस के आदेश को गलत मानकर प्रतिबंध तोड़ नहीं सकता और फिर रोके जाने पर अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाता।

विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के ऐलान पर टिप्पणी

पूर्व सॉलिसिटर जनरल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की घोषणा की है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों से भी मार्च में शामिल होने की अपील की थी।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

గణేశ్ నిమజ్జనానికి ఎస్సారెస్పీ నుంచి నీటి విడుదల

కరీంనగర్/కొత్తపల్లి: గణేశ్ విగ్రహాల నిమజ్జనం కోసం ఎస్సారెస్పీ మెయిన్ కెనాల్‌కు సోమవారం నీటిని విడుదల చేశారు. నవరాత్రి ఉత్సవాలు ముగియనున్న నేపథ్యంలో కరీంనగర్ జిల్లాలోని కాకతీయ కాల్వలు, డిస్ట్రిబ్యూటరీ కాల్వల్లో నిమజ్జనానికి ఇబ్బందులు లేకుండా నీటిని విడుదల చేయాలని చొప్పదండి ఎమ్మెల్యే మేడిపల్లి సత్యం ప్రాజెక్టు చీఫ్ ఇంజినీర్‌ను కోరారు.

కొన్నేళ్లుగా గణేశ్ విగ్రహాలను కాకతీయ కాల్వలతో పాటు పలు డిస్ట్రిబ్యూటరీ కాల్వల్లో నిమజ్జనం చేస్తున్నారని, ప్రస్తుతం కాల్వల్లో నీరు లేక భక్తులు ఇబ్బందులు ఎదుర్కొంటున్నారని ఎమ్మెల్యే అధికారుల దృష్టికి తీసుకెళ్లారు. దీంతో ఎమ్మెల్యే సూచన మేరకు నీటిని విడుదల చేస్తామని ప్రాజెక్టు సీఈ తెలిపారు.

సోమవారం ఉదయం 11 గంటలకు తొలుత 500 క్యూసెక్కుల నీటిని విడుదల చేశారు. అనంతరం సాయంత్రం మరో 3 వేల క్యూసెక్కుల నీటిని వదిలారు. కరీంనగర్ నగరంలో పెద్ద సంఖ్యలో గణేశ్ విగ్రహాలను నిమజ్జనం చేసే చింతకుంట కెనాల్‌కు మంగళవారం రాత్రి వరకు నీరు చేరే అవకాశం ఉందని అధికారులు తెలిపారు.

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार

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*नई दिल्ली:* नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई लताड़*

#NoidaNews

नई दिल्ली: नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।

जस्टिस एसपी शर्मा कौन हैं, क्यों हटाने की मांग, जानें क्या बोले-CJI सूर्य कांत?

#justicespsharmarajasthanhighcourtallegationscjisuryakantstand

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के भीतर उठे सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत से राजस्थान हाई कोर्ट में तत्काल किसी दूसरे राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं, मामलों की सेलेक्टिव लिस्टिंग और प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने लगाए गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत को तीन अलग-अलग चिट्ठियां लिखकर जस्टिस शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से लेकर केस लिस्टिंग में हेरफेर तक के आरोप हैं। जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को लिखी चिट्ठियों में जस्टिस शर्मा के कामकाज को लेकर कई चिंताएं जताईं। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ जजों ने उनसे मुलाकात के दौरान जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर की थी। आरोपों में साथी जजों को ट्रांसफर जैसी कार्रवाई की कथित धमकी देने और सीजेआई से करीबी का दावा करने जैसी बातें भी शामिल हैं। एक शिकायत में हाईकोर्ट में नियुक्तियों और केस लिस्टिंग से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने चिंताओं पर ध्यान दिया है। पद पर मौजूद जज के खिलाफ ऐसे आरोपों से “स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए सख्ती से” निपटा जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि कोई भी फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता है।

कौन हैं चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा

जस्टिस शर्मा नवंबर 2016 में राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस बने थे। जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना हाई कोर्ट किया गया। राजस्थान वापसी का उनका अनुरोध मार्च 2023 में कॉलेजियम ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट भेजा गया। बाद में मई 2025 में कॉलेजियम ने उनकी राजस्थान वापसी की सिफारिश की। सितंबर 2025 से न्यायमूर्ति शर्मा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। वह सितंबर 2025 से इस पद पर हैं और अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

CJI सूर्यकांत ने UAPA कानून पर कही बड़ी बात, उमर खालिद जैसे मामलों मे देरी पर दिया ये जवाब

#cjijusticesuryakantonuapadelhiriotscase

दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है।

यूएपीए मामले पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह संस्थान के रजत जयंती समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी। किसी खास मामले या आरोपी का जिक्र किए बिना, सीजेआई ने कहा कि यूएपीए एक ऐसा मामला है जिस पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत है।

मामलों का शीघ्र निपटारा ही विवाद का प्रभावी समाधान-सीजेआई

देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्‍सर ही सवाल उठते रहते हैं। खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं। इन सबके बीच सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है।

विशेष अदालतों से बढ़ी उम्मीदें

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश