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आलाकमान ने जो कहा वो किया’, पद छोड़ने के बाद बोले सिद्धारमैया

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे।

हाईकमान ने इस्तीफा देने को कहा मैंने दे दिया- सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अभी मैं राज्यपाल भवन गया था। मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यपाल अभी शहर में नहीं है। हमें बताया कि वो बेंगलुरु में नहीं है, इसलिए मेरा इस्तीफे को उनके सचिव को हैंडओवर कर दिया गया है। मैं कई बार ये बात बोल चुका हूं जब भी मुझे हाईकमान इस्तीफा देने के लिए कहेंगे तो मैं उनकी बात मानूंगा। कल हाईकमान ने मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसलिए मैंने आज इस्तीफा दे दिया है।

हमारे पास 135 विधायक- सिद्धारमैया

उन्होंने आगे कहा कि राज्यपाल जब बेंगलुरु लौटेंगे तो मेरा इस्तीफा को मंजूर करेंगे। हमारी पार्टी के 135 विधायक हैं। इसके साथ दो अन्य विधायक ने हमें समर्थन दिया है। ऐसे में हमारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है। हमारे सभी विधायक एकजुट हैं। मुझे कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का दो बार मौका मिला है।

ब्रेकफास्ट मीटिंग में किया इस्तीफा का ऐलान

इससे पहले सिद्धारमैया ने अपनी कैबिनेट के सभी मंत्रियों को ब्रेकफास्ट मीटिंग पर बुलाया थी। इस दौरान उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को धन्यवाद दिया। तीन साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया। सीएम सिद्धारमैया ने इसी मीटिंग में इस्तीफा देने का ऐलान किया था।

डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के अगले सीएम, सिद्धारमैया ने खुद किया ऐलान, आज देंगे इस्तीफा

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कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार में आज बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीएम सिद्धारमैया आज सीएम पद से इस्तीफा देंगे और उनकी जगह डीके शिवकुमार राज्य के अगले सीएम बनाए जाएंगे।विधायकों की बैठक में सिद्धारमैया ने उनके नाम का ऐलान किया। उन्होंने सभी विधायकों से डीके का साथ देने की अपील की।

आज शाम 3 बजे इस्तीफा देंगे सिद्धारमैया

कर्नाटक सरकार के मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज शाम 3 बजे इस्तीफा दे देंगे। सिद्धारमैया ने ही कहा है कि डीके शिवकुमार नए सीएम होंगे। एच के पाटिल ने बताया कि नाश्ते के दौरान हुई बैठक में सिद्धारमैया ने ये बातें कहीं।

इस्तीफे से पहले मंत्रियों का जताया आभार

कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया और इस्तीफा देने से पहले वह सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहते थे। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि सिद्धारमैया को दिल्ली में किसी पद की पेशकश की गई है या नहीं। यह हाई कमान पर निर्भर करता है।

कर्नाटक कांग्रेस के लंबे समय खींचतान

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर खींचतान कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच सत्ता की खींचतान चर्चा में रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी। बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, सिद्धरमैया सरकार की बड़ी घोषणा

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कर्नाटक में सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। कर्नाटक में बच्चे अब फेसबुक-इंस्टाग्राम नहीं चला पाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण के दौरान की।

सोशल मीडिया बैन का क्या मकसद

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने आज 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा, बच्चों पर बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को रोकने के मकसद से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बैन का मकसद मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर पड़ने वाले बुरे असर को रोकना है।

सिद्धारमैया ने कुलपतियों से मांगी थी राय

पिछले महीने सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कुलपति सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कुलपतियों से राय मांगी थी। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की शिक्षा और शारीरिक फिटनेस पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

आंध्र प्रदेश में भी बैन की तैयारी

ऑनलाइन लत, दुरुपयोग और डिजिटल हानि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा कदम उठाए हैं। राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने कहा था कि सोशल मीडिया पर भरोसा “टूट रहा है” और “बच्चे निरंतर उपयोग में फिसलते जा रहे हैं”, इसलिए सरकार कानूनी विकल्पों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। लोकेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने मेटा, गूगल, एक्स और शेयर चैट जैसी प्रमुख कंपनियों को आमंत्रित किया है, ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा कर प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सके।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अल्पसंख्यकों पर मेहरबान, बजट में मिला तोहफा, भड़की बीजेपी

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को राज्य का बजट पेश कर दिया है। इस बजट में राज्य के अल्पसंख्य समुदाय के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। कर्नाटक सरकार के बजट में एक हजार करोड़ रुपये अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही 150 करोड़ रुपये वक्फ संपत्ति सुरक्षा के लिए, 100 करोड़ रुपये ऊर्दू स्कूलों के लिए और साथ ही इमामों को 6 हजार रुपये महीना देने का भी एलान किया गया है। कर्नाटक सरकार ने बजट में चार प्रतिशत सरकारी कामों के ठेके मुस्लिम ठेकेदारों के लिए आरक्षित करने का एलान किया है। कर्नाटक भाजपा ने बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए भारी आवंटन पर नाराजगी जताते हुए इसे हलाला बजट करार दिया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज अपना रिकॉर्ड 16वां बजट पेश किया। कर्नाटक के बजट 2025-26 में अल्पसंख्यकों के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए छात्रों को एसएसएलसी परीक्षा के लिए एआईओएस के माध्यम से तैयारी करने में मदद का फैसला लिया गया है। इसके लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का फैसला किया गया है। साथ ही अल्पसंख्यक युवाओं को कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वक्फ संपत्तियों की मरम्मत और नवीकरण के लिए और मुस्लिम कब्रिस्तानों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण

• वक्फ जमीन के संरक्षण रखरखाव और कब्रिस्तान के लिए 150 करोड़ का आवंटन।

• सीएम अल्पसंख्यक कॉलोनी डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत 1000 करोड़ का एक्शन प्लान वित्तीय वर्ष 25-26 में लागू होगा।

• आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यकों की शादी के लिए हर जोडे को 50 हजार की सहायता।

• हज भवन परिसर में एक और इमारत बनाई जाएगी।

सरकार के अन्य बड़े ऐलान

• कर्नाटक पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर 250 मौलाना आज़ाद मॉडल इंग्लिश मीडियम स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से प्री-प्राइमरी से लेकर पीयू तक की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इस उद्देश्य के लिए 500 करोड़ रुपये की कुल लागत वाला एक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। वर्तमान वर्ष में इस उद्देश्य के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा।"

• मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए, छात्रों को एनआईओएस के माध्यम से एसएसएलसी परीक्षा लिखने के लिए तैयार करने के लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

• कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से अल्पसंख्यक युवाओं को नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

• मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम के तहत 1,000 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कार्य क्रियान्वित किए जाएंगे।

• जैन पुजारियों, सिखों के मुख्य ग्रंथी और मस्जिदों के पेश-इमामों को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा। सहायक ग्रंथी और मुअज्जिन को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।

• अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन के लिए राज्य भर में बहुउद्देश्यीय हॉल बनाए जाएंगे। हॉल का निर्माण होबली और तालुक स्तर पर 50 लाख रुपये और जिला मुख्यालयों और नगर निगम क्षेत्रों में 1 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

• कलबुर्गी जिले के चित्तपुरा तालुका में प्राचीन बौद्ध केंद्र सन्नति में सन्नति विकास प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी।

• सरकार की 5 गारंटी को जारी रखने के लिए 51034 करोड़ रुपये का आवंटन

भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कांग्रेस संसाधनों के आवंटन में मुस्लिमों को प्राथमिकता दे रही है। अमित मालवीय ने लिखा कि 9 दिसंबर 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है।

वहीं, कर्नाटक सरकार के बजट पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, राज्य में कांग्रेस पार्टी ने एक मॉडर्न मुस्लिम लीग बजट पास किया है। इसमें इमामों का पैसा कांग्रेस पार्टी 6000 रुपये तक बढ़ा रही है। बजट में घोषणा की गई है कि वक्फ को 150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग का पैसा सिर्फ अल्पसंख्यक लड़कियों को दिया जा रहा है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा उर्दू स्कूल के लिए 100 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। कल ही सरकार ने हुबली दंगे का केस वापस लेने की बात कही है। भंडारी ने कहा कि साफ है, कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी उसी तरह सरकार चला रही है जिस तरह मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान में सरकार चलाई।

MUDA स्कैम मामले में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया को बड़ी राहत, लोकायुक्त ने दी क्लीनचिट

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बड़ी राहत मिली है। सीएम सिद्धारमैया को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी मुडा लैंड स्कैम केस में एंटी करप्शन वॉचडॉग लोकायुक्त की तरफ से क्लीन चिट मिल गई है। ये मामला मुआवजा के लिए हुए सिद्धारमैया की पत्नी को हुए भूमि आवंटन में कथित गड़बड़ी की शिकायत के बाद सामने आया था। एंटी करप्शन एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया था कि इस गड़बड़ी के कारण राज्य को करीब 45 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

जांच की फाइनल रिपोर्ट 138 दिनों की लंबी जांच के बाद बेंगलुरु मुख्यालय को सौंपी गई। लोकायुक्त ने शिकायतकर्ता स्नेहमयीकृष्ण को नोटिस जारी कर कहा है कि साक्ष्य के अभाव में मामला जांच के लायक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि साक्ष्य के अभाव में भी वो रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। इसमें वे मामले भी शामिल हैं, जिन्हें बिना जांच के खारिज कर दिया जाता है। जांच अधिकारी उन्हें सिविल प्रकृति का और जांच के लिए उपयुक्त नहीं पाया है, या तथ्यों या कानून की गलतफहमी के कारण ऐसा किया जाता है। इसमें साक्ष्य का अभाव है। यह मामला जांच के लायक नहीं है। कहा गया है कि यदि उन्हें इस रिपोर्ट पर कोई आपत्ति है तो वे नोटिस प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

इस मामले में जांच सितंबर 2024 में शुरू हुई थी, जब बेंगलुरु में एक विशेष अदालत ने लोकायुक्त को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी साइट आवंटन मामले की जांच का आदेश दिया था। जांच का नेतृत्व मैसूर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक टीजे उदेश ने किया। इस दौरान 100 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई, जिनमें नौकरशाह, राजनेता, सेवानिवृत्त अधिकारी, मुडा के अधिकारी और स्वयं सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और उनके बहनोई बीएम मल्लिकार्जुन स्वामी शामिल थे। सभी बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और इन्हें रिपोर्ट में शामिल किया गया।

बता दें कि पिछले साल एंटी करप्शन एक्टिविस्ट स्नेहमयी कृष्णा ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को पत्र लिखकर मुकदमा चलाने की मांग की थी। आरोप है कि सिद्दरमैया की पत्नी को मैसूर के एक पॉश इलाके में प्रतिपूरक साइटें आवंटित की गईं, जिनकी संपत्ति का मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था, जिसे मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहीत किया गया था। मुडा ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां इसने एक आवासीय लेआउट विकसित किया था। 3.16 एकड़ जमीन पर पार्वती का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के नाम पर रोड का नामकरण, जेडीएस ने बताया राज्य का अपमान

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मैसूरु नगर निगम द्वारा प्रस्तुत किए गए उस प्रस्ताव की निंदा की जा रही है जिसमें एक सड़क का नाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नाम पर रखने की बात कही गई है। मैसूर नगर निगम परिषद ने चामराजा कांग्रेस विधायक हरीश गौड़ा के सुझाव पर लक्ष्मी वेंकटरमणस्वामी मंदिर से आउटर रिंग रोड जंक्शन तक केआरएस रोड के एक हिस्से का नाम सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखने का प्रस्ताव 22 नवंबर को पारित किया था। जेडीएस ने केआरएस रोड का नाम सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखे जाने के कदम को निंदनीय करार दिया।

जेडीएस ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि सिद्धारमैया मुडा मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ लोकायुक्त जांच चल रही है। मैसूर नगर निगम में कोई निर्वाचित बोर्ड नहीं है। कांग्रेस सरकार की ओर से नगर निगम में नियुक्त किए गए अधिकारियों ने अपना ऋण चुकाने के लिए सिद्धारमैया के नाम पर सड़क का नाम रखने का फैसला किया है। मुडा घोटाले में शामिल मुख्यमंत्री के नाम पर सड़क का नाम रखना ऐतिहासिक शहर मैसूर और पूरे राज्य के साथ विश्वासघात और अपमान है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने कहा कि जिस सड़क का नाम सिद्धरमैया के नाम पर प्रस्तावित है, वह ‘ऐतिहासिक’ है। उन्होंने कहा कि महाराजा नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार ने टीबी रोग के कारण जान गंवाने वाली अपनी बहन राजकुमारी कृष्णजम्मानी तथा उनके बच्चों की याद में यहां भूमि दान की थी और एक तपेदिक अस्पताल की स्थापना की थी।

कृष्णा ने कहा कि अधिकारियों ने सिद्धारमैया के नाम पर एक सड़क का नाम रखने का फैसला किया है, जो मुडा मामले में आरोपी हैं, जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। कई नागरिकों ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति जताई है। मैं इसके खिलाफ कानूनी रूप से भी लड़ रहा हूं। अगर प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता है, तो हम इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया की बढ़ीं मुश्किलें, ईडी ने दर्ज की नई शिकायत, मुडा मामले में सबूत नष्ट करने का आरोप

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मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री मूडा में कथित घोटाले को लेकर लगातार घिरते जा रहे हैं। अब उनके और अन्य लोगों के खिलाफ एक नई शिकायत दर्ज कराई गई है। मुडा मामले में सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगा है। मूडा मामले में सुबूतों को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और उनके बेटे यतीन्द्रा के खिलाफ ईडी ने एक और शिकायत को दर्ज किया है।

प्रदीप कुमार नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सिद्धारमैया एवं अन्य के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ के लिए जांच और मामला दर्ज करने की मांग की।इस शिकायत में दावा किया गया है कि मुडा अधिकारियों की संलिप्तता से साइटों को पुनः प्राप्त करके साक्ष्य नष्ट कर दिए गए हैं। प्रदीप कुमार ने जांच का अनुरोध किया है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के लिए मामला दर्ज करने की मांग की है।

25 सितंबर को विशेष अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को आदेश दिया था। इस आदेश के बाद 27 सितंबर को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम सिद्धरमैया, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी एवं देवराजू सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। ईडी ने भी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ 14 भूखंडों के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में मामला दर्ज किया है। वहीं पार्वती ने भूखंड लौटाने की पेशकश की तो एमयूडीए ने उनको आवंटित 14 भूखंडों को वापस ले लिया है।

कथित मुडा भूमि घोटाला क्या है?

मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री की पत्नी का 50:50 योजना से क्या संबंध?

आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।

मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया था, जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित की गई थीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं।

सिद्धारमैया की बढ़ी मुश्किलें तो पत्नी ने उठाया बड़ा कदम, क्या प्लॉट सरेंडर करने से कम होगी मुश्किल?

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कर्नाटक के चर्चित मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने सिद्धारमैया के खिलाफ केस दर्ज किया है। मुडा स्कैम में सिद्धारमैया और उनके परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में ईडी की जांच शुरू कर दी है। इस बीच सिद्धारमैया की पत्नी ने बड़ा कदम उठाया है। पार्वती ने मुडा को पत्र लिखकर उन्हें आवंटित 14 प्लॉट वापस करने की बात कही है। अब सवाल उठता है कि जमीन लौटाने का दांव कारगर साबित होगा? 

सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण मुडा को पत्र लिखा है। पार्वती ने कहा है कि मुडा से मुझे जो प्लॉट मिले हैं, वो मैं वापस करना चाहती हूं। पार्वती ने मुडा से कहा है कि उनके लिए पति ज्यादा जरूरी है, इसलिए मैं उन 14 साइटों को वापस करना चाहती हूं, जो मुझे आवंटित की गई है। पार्वती के इस फैसले पर मुडा की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं सिद्धारमैया ने पार्वती के इस पत्र पर कहा है कि ये उनका फैसला है, लेकिन मैं लंबी लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार हूं।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुडा भूमि मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पार्वती और अन्य पर मामला दर्ज किया है। एफआईआर में पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी भी शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने जमीन खरीदी थी और बाद में उसे पार्वती को तोहफे में दे दिया था। यह मामला लोकायुक्त की एफआईआर के बाद दर्ज किया गया है। ईडी का मामला इस आरोप पर आधारित है कि पार्वती को मैसूरु के एक प्रमुख स्थान पर मुआवजे के 14 प्लॉट आवंटित किए गए थे। इस प्लॉट आवंटन में लेनदेन की वैधता पर सवाल उठे हैं। 

पिछले हफ्ते बेंगलुरु की एक विशेष अदालत द्वारा मामले में सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस जांच का आदेश देने के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार, सिद्धारमैया को पूछताछ के लिए बुलाने के लिए ईडी अधिकृत है और जांच के दौरान उनकी संपत्ति भी कुर्क कर सकता है। पिछले हफ्ते एक बयान में, सिद्धारमैया ने आरोपों का जवाब देते हुए दावा किया कि राजनीतिक प्रतिशोध के परिणामस्वरूप मामले में उन्हें अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

साल 2020 में मुडा ने एक स्कीम की शुरुआत की। स्कीम में कहा गया कि जिन लोगों की जमीन विकास के काम के लिए लिया जाएगा, उन्हें 50-50 पॉलिसी के तहत मैसूर शहर में प्लॉट और मुआवजा दिया जाएगा। बीजेपी सरकार की तरफ से शुरू की गई इस स्कीम की खूब आलोचना हुई, जिसके बाद 2023 में इसे रद्द कर दिया गया। सिद्धारमैया परिवार पर फर्जी दस्तावेज और पावर का दुरुपयोग कर इस स्कीम का लाभ लेने का आरोप है। सिद्धारमैया की पत्नी पर करीब 55 करोड़ रुपए का लाभ लेने का आरोप है। हालांकि, सिद्धारमैया इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर, MUDA स्कैम मामले में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले मामले में एफआईआर दर्ज की है। कर्नाटक के एक स्पेशल कोर्ट ने लोकायुक्त टीम को जांच का जिम्मा सौंपा है। याचिकाकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए जन प्रतिनिधि कोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक लोकयुक्त से इस मामले की जांच कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद आज मैसूरु लोकयुक्त पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया।

लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम और भूमि कब्जा निवारण अधिनियम के तहत अदालत द्वारा निर्धारित आईपीसी धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की। सीएम सिद्धारमैया पर आरोप A 1 है, पत्नी पार्वती पर आरोप A 2 है। वहीं, मुख्यमंत्री के साले मल्लिकार्जुन स्वामी को आरोपी नम्बर 3 और देवराज को आरोपी नम्बर 4 बनाया गया है। मुख्यमंत्री पर अपने अधिकारों को दुरुपयोग करके उनकी पत्नी के नाम मैसुरु में MUDA साइट आवंटित करने का आरोप लगा है।

सिद्धरमैया ने बीजेपी पर साधा निशाना

वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को दावा किया कि मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि आवंटन मामले में उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि विपक्ष उनसे डरता है। इसके साथ ही, सिद्धरमैया ने कहा कि यह उनके खिलाफ पहला राजनीतिक मामला है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मामले में अदालत द्वारा उनके खिलाफ जांच का आदेश दिये जाने के बाद भी वह इस्तीफा नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेंगे।

केंद्र सरकार पर सीबीआई, ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों और देश भर में विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपाल के कार्यालय का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में राज्यपाल के ‘हस्तक्षेप’ के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस की जरूरत है।

खरगे ने क्या कहा?

इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि MUDA के लोग जो चाहें वे कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह जरूरी नहीं है कि सरकार उसके सभी सवालों का जवाब दें, क्योंकि वह एक स्वायत्त निकाय होने के कारण कार्रवाई कर ही सकता है।

खरगे ने सीएम सिद्धारमैया का समर्थन करते हुए कहा कि उनलोगों निजी तौर पर कोई भी अपराध यदि किया हो तो इसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार हैं, लेकिन वह ऐसा मानते हैं कि उन्होंने ऐसा कोई भी अपराध नहीं किया है। उन्हें बदनाम किया जा रहा है। पार्टी को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीएम सिद्धारमैया की कुर्सी संकट में! बीजेपी मांग रही इस्तीफा*
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में उन्हें हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट की ओर से फैसला आने के बाद अब उन पर बीजेपी हमलावर दिख रही है। विपक्ष लगातार उनसे इस्तीफे की मांग कर रही है। *सिद्धारमैया से इस्तीफे की मांग* केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। सरकार और सिद्धारमैया ने गड़बड़ी की है। उनको सीएम पद से पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था पर वो सच जानते हैं और जांच से बचना चाहते हैं। इसलिए राज्यपाल के फैसले को चैलेंज किया। गवर्नर के फोटो को चप्पल से मारा गया। यह टेरर पैदा करने के लिए किया गया। बिना देरी किए सिद्धारमैया को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसके लिए उनको इस्तीफा देना चाहिए। *बीजेपी का कर्नाटक सरकार गिराने का इराना नहीं-प्रह्लाद जोशी* प्रह्लाद जोशी ने आगे कहा कि बिना पॉलिटिकल पावर के यह नहीं हो सकता। सीबीआई से इसकी जांच कराई जाए। बीजेपी का कर्नाटक सरकार गिराने या अस्थिर करने का न इरादा है और न कोई ऐसी कोशिश कर रहे हैं। यह कांग्रेस को तय करना है कि कौन सीएम बनेगा। किसी और को सीएम बनाए कांग्रेस। बीजेपी विपक्ष में ही बैठेगी। *सिद्धारमैया बोले- सच्चाई जल्द सामने आएगी* वहीं, कोर्ट के इस आदेश के बाद सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बीजेपी और जेडीएस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सियासी लड़ाई है। प्रदेश की जनता मेरे साथ है। मुझे विश्वास है अगले कुछ दिनों में सच्चाई सामने आएगी और जांच रद्द हो जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा, न्यायालय ने धारा 218 के तहत राज्यपाल द्वारा जारी आदेश को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने खुद को राज्यपाल के आदेश की धारा 17ए तक ही सीमित रखा। मैं विशेषज्ञों से परामर्श करूंगा कि क्या कानून के तहत ऐसी जांच की अनुमति है या नहीं। मैं कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा कर लड़ाई की रूपरेखा तय करूंगा। *सिद्दारमैया के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का है विकल्प* हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच को मंजूरी दिए जाने के गवर्नर के फैसले पर मुहर लगाकर सिद्दारमैया को भारी संकट में ला दिया है। अभी तक हाई कोर्ट से स्थगन आदेश की वजह से निचली अदालत से इस मामले में कार्रवाई शुरू नहीं हो रही थी। अब इस स्थगन आदेश से रोक हट गया है और सिद्दारमैया पर कानूनी शिकंजा कसने की आशंका है। विपक्ष पहले से ही उनपर पद छोड़ने का दबाव बना रहा है और कांग्रेस पार्टी के अंदर भी इसको लेकर काफी विवाद रहा है। फिलहाल सिद्दारमैया के सामने सबसे पहला विकल्प यही है कि वह सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस केस में फिर से स्थगन आदेश लेने की कोशिश करें। कथित मुडा भूमि घोटाला क्या है? मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। मुडा क्या है? मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण या मुडा कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी है, जिसका गठन मई 1988 में किया गया था। मुडा का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना, किफायती आवास उपलब्ध कराना, आवास आदि का निर्माण करना है। क्या है आरोप? आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पार्वती को मुडा द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है।
आलाकमान ने जो कहा वो किया’, पद छोड़ने के बाद बोले सिद्धारमैया

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे।

हाईकमान ने इस्तीफा देने को कहा मैंने दे दिया- सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अभी मैं राज्यपाल भवन गया था। मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यपाल अभी शहर में नहीं है। हमें बताया कि वो बेंगलुरु में नहीं है, इसलिए मेरा इस्तीफे को उनके सचिव को हैंडओवर कर दिया गया है। मैं कई बार ये बात बोल चुका हूं जब भी मुझे हाईकमान इस्तीफा देने के लिए कहेंगे तो मैं उनकी बात मानूंगा। कल हाईकमान ने मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसलिए मैंने आज इस्तीफा दे दिया है।

हमारे पास 135 विधायक- सिद्धारमैया

उन्होंने आगे कहा कि राज्यपाल जब बेंगलुरु लौटेंगे तो मेरा इस्तीफा को मंजूर करेंगे। हमारी पार्टी के 135 विधायक हैं। इसके साथ दो अन्य विधायक ने हमें समर्थन दिया है। ऐसे में हमारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है। हमारे सभी विधायक एकजुट हैं। मुझे कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का दो बार मौका मिला है।

ब्रेकफास्ट मीटिंग में किया इस्तीफा का ऐलान

इससे पहले सिद्धारमैया ने अपनी कैबिनेट के सभी मंत्रियों को ब्रेकफास्ट मीटिंग पर बुलाया थी। इस दौरान उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को धन्यवाद दिया। तीन साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया। सीएम सिद्धारमैया ने इसी मीटिंग में इस्तीफा देने का ऐलान किया था।

डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के अगले सीएम, सिद्धारमैया ने खुद किया ऐलान, आज देंगे इस्तीफा

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कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार में आज बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीएम सिद्धारमैया आज सीएम पद से इस्तीफा देंगे और उनकी जगह डीके शिवकुमार राज्य के अगले सीएम बनाए जाएंगे।विधायकों की बैठक में सिद्धारमैया ने उनके नाम का ऐलान किया। उन्होंने सभी विधायकों से डीके का साथ देने की अपील की।

आज शाम 3 बजे इस्तीफा देंगे सिद्धारमैया

कर्नाटक सरकार के मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज शाम 3 बजे इस्तीफा दे देंगे। सिद्धारमैया ने ही कहा है कि डीके शिवकुमार नए सीएम होंगे। एच के पाटिल ने बताया कि नाश्ते के दौरान हुई बैठक में सिद्धारमैया ने ये बातें कहीं।

इस्तीफे से पहले मंत्रियों का जताया आभार

कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया और इस्तीफा देने से पहले वह सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहते थे। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि सिद्धारमैया को दिल्ली में किसी पद की पेशकश की गई है या नहीं। यह हाई कमान पर निर्भर करता है।

कर्नाटक कांग्रेस के लंबे समय खींचतान

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर खींचतान कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच सत्ता की खींचतान चर्चा में रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी। बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, सिद्धरमैया सरकार की बड़ी घोषणा

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कर्नाटक में सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। कर्नाटक में बच्चे अब फेसबुक-इंस्टाग्राम नहीं चला पाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण के दौरान की।

सोशल मीडिया बैन का क्या मकसद

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने आज 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा, बच्चों पर बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को रोकने के मकसद से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बैन का मकसद मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर पड़ने वाले बुरे असर को रोकना है।

सिद्धारमैया ने कुलपतियों से मांगी थी राय

पिछले महीने सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कुलपति सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कुलपतियों से राय मांगी थी। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की शिक्षा और शारीरिक फिटनेस पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

आंध्र प्रदेश में भी बैन की तैयारी

ऑनलाइन लत, दुरुपयोग और डिजिटल हानि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा कदम उठाए हैं। राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने कहा था कि सोशल मीडिया पर भरोसा “टूट रहा है” और “बच्चे निरंतर उपयोग में फिसलते जा रहे हैं”, इसलिए सरकार कानूनी विकल्पों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। लोकेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने मेटा, गूगल, एक्स और शेयर चैट जैसी प्रमुख कंपनियों को आमंत्रित किया है, ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा कर प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सके।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अल्पसंख्यकों पर मेहरबान, बजट में मिला तोहफा, भड़की बीजेपी

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को राज्य का बजट पेश कर दिया है। इस बजट में राज्य के अल्पसंख्य समुदाय के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। कर्नाटक सरकार के बजट में एक हजार करोड़ रुपये अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही 150 करोड़ रुपये वक्फ संपत्ति सुरक्षा के लिए, 100 करोड़ रुपये ऊर्दू स्कूलों के लिए और साथ ही इमामों को 6 हजार रुपये महीना देने का भी एलान किया गया है। कर्नाटक सरकार ने बजट में चार प्रतिशत सरकारी कामों के ठेके मुस्लिम ठेकेदारों के लिए आरक्षित करने का एलान किया है। कर्नाटक भाजपा ने बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए भारी आवंटन पर नाराजगी जताते हुए इसे हलाला बजट करार दिया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज अपना रिकॉर्ड 16वां बजट पेश किया। कर्नाटक के बजट 2025-26 में अल्पसंख्यकों के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए छात्रों को एसएसएलसी परीक्षा के लिए एआईओएस के माध्यम से तैयारी करने में मदद का फैसला लिया गया है। इसके लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का फैसला किया गया है। साथ ही अल्पसंख्यक युवाओं को कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वक्फ संपत्तियों की मरम्मत और नवीकरण के लिए और मुस्लिम कब्रिस्तानों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण

• वक्फ जमीन के संरक्षण रखरखाव और कब्रिस्तान के लिए 150 करोड़ का आवंटन।

• सीएम अल्पसंख्यक कॉलोनी डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत 1000 करोड़ का एक्शन प्लान वित्तीय वर्ष 25-26 में लागू होगा।

• आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यकों की शादी के लिए हर जोडे को 50 हजार की सहायता।

• हज भवन परिसर में एक और इमारत बनाई जाएगी।

सरकार के अन्य बड़े ऐलान

• कर्नाटक पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर 250 मौलाना आज़ाद मॉडल इंग्लिश मीडियम स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से प्री-प्राइमरी से लेकर पीयू तक की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इस उद्देश्य के लिए 500 करोड़ रुपये की कुल लागत वाला एक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। वर्तमान वर्ष में इस उद्देश्य के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा।"

• मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए, छात्रों को एनआईओएस के माध्यम से एसएसएलसी परीक्षा लिखने के लिए तैयार करने के लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

• कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से अल्पसंख्यक युवाओं को नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

• मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम के तहत 1,000 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कार्य क्रियान्वित किए जाएंगे।

• जैन पुजारियों, सिखों के मुख्य ग्रंथी और मस्जिदों के पेश-इमामों को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा। सहायक ग्रंथी और मुअज्जिन को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।

• अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन के लिए राज्य भर में बहुउद्देश्यीय हॉल बनाए जाएंगे। हॉल का निर्माण होबली और तालुक स्तर पर 50 लाख रुपये और जिला मुख्यालयों और नगर निगम क्षेत्रों में 1 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

• कलबुर्गी जिले के चित्तपुरा तालुका में प्राचीन बौद्ध केंद्र सन्नति में सन्नति विकास प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी।

• सरकार की 5 गारंटी को जारी रखने के लिए 51034 करोड़ रुपये का आवंटन

भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कांग्रेस संसाधनों के आवंटन में मुस्लिमों को प्राथमिकता दे रही है। अमित मालवीय ने लिखा कि 9 दिसंबर 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है।

वहीं, कर्नाटक सरकार के बजट पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, राज्य में कांग्रेस पार्टी ने एक मॉडर्न मुस्लिम लीग बजट पास किया है। इसमें इमामों का पैसा कांग्रेस पार्टी 6000 रुपये तक बढ़ा रही है। बजट में घोषणा की गई है कि वक्फ को 150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग का पैसा सिर्फ अल्पसंख्यक लड़कियों को दिया जा रहा है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा उर्दू स्कूल के लिए 100 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। कल ही सरकार ने हुबली दंगे का केस वापस लेने की बात कही है। भंडारी ने कहा कि साफ है, कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी उसी तरह सरकार चला रही है जिस तरह मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान में सरकार चलाई।

MUDA स्कैम मामले में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया को बड़ी राहत, लोकायुक्त ने दी क्लीनचिट

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बड़ी राहत मिली है। सीएम सिद्धारमैया को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी मुडा लैंड स्कैम केस में एंटी करप्शन वॉचडॉग लोकायुक्त की तरफ से क्लीन चिट मिल गई है। ये मामला मुआवजा के लिए हुए सिद्धारमैया की पत्नी को हुए भूमि आवंटन में कथित गड़बड़ी की शिकायत के बाद सामने आया था। एंटी करप्शन एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया था कि इस गड़बड़ी के कारण राज्य को करीब 45 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

जांच की फाइनल रिपोर्ट 138 दिनों की लंबी जांच के बाद बेंगलुरु मुख्यालय को सौंपी गई। लोकायुक्त ने शिकायतकर्ता स्नेहमयीकृष्ण को नोटिस जारी कर कहा है कि साक्ष्य के अभाव में मामला जांच के लायक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि साक्ष्य के अभाव में भी वो रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। इसमें वे मामले भी शामिल हैं, जिन्हें बिना जांच के खारिज कर दिया जाता है। जांच अधिकारी उन्हें सिविल प्रकृति का और जांच के लिए उपयुक्त नहीं पाया है, या तथ्यों या कानून की गलतफहमी के कारण ऐसा किया जाता है। इसमें साक्ष्य का अभाव है। यह मामला जांच के लायक नहीं है। कहा गया है कि यदि उन्हें इस रिपोर्ट पर कोई आपत्ति है तो वे नोटिस प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

इस मामले में जांच सितंबर 2024 में शुरू हुई थी, जब बेंगलुरु में एक विशेष अदालत ने लोकायुक्त को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी साइट आवंटन मामले की जांच का आदेश दिया था। जांच का नेतृत्व मैसूर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक टीजे उदेश ने किया। इस दौरान 100 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई, जिनमें नौकरशाह, राजनेता, सेवानिवृत्त अधिकारी, मुडा के अधिकारी और स्वयं सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और उनके बहनोई बीएम मल्लिकार्जुन स्वामी शामिल थे। सभी बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और इन्हें रिपोर्ट में शामिल किया गया।

बता दें कि पिछले साल एंटी करप्शन एक्टिविस्ट स्नेहमयी कृष्णा ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को पत्र लिखकर मुकदमा चलाने की मांग की थी। आरोप है कि सिद्दरमैया की पत्नी को मैसूर के एक पॉश इलाके में प्रतिपूरक साइटें आवंटित की गईं, जिनकी संपत्ति का मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था, जिसे मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहीत किया गया था। मुडा ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां इसने एक आवासीय लेआउट विकसित किया था। 3.16 एकड़ जमीन पर पार्वती का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के नाम पर रोड का नामकरण, जेडीएस ने बताया राज्य का अपमान

#proposal_to_name_mysuru_road_after_siddaramaiah_opposition_parties_raised_questions

मैसूरु नगर निगम द्वारा प्रस्तुत किए गए उस प्रस्ताव की निंदा की जा रही है जिसमें एक सड़क का नाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नाम पर रखने की बात कही गई है। मैसूर नगर निगम परिषद ने चामराजा कांग्रेस विधायक हरीश गौड़ा के सुझाव पर लक्ष्मी वेंकटरमणस्वामी मंदिर से आउटर रिंग रोड जंक्शन तक केआरएस रोड के एक हिस्से का नाम सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखने का प्रस्ताव 22 नवंबर को पारित किया था। जेडीएस ने केआरएस रोड का नाम सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखे जाने के कदम को निंदनीय करार दिया।

जेडीएस ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि सिद्धारमैया मुडा मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ लोकायुक्त जांच चल रही है। मैसूर नगर निगम में कोई निर्वाचित बोर्ड नहीं है। कांग्रेस सरकार की ओर से नगर निगम में नियुक्त किए गए अधिकारियों ने अपना ऋण चुकाने के लिए सिद्धारमैया के नाम पर सड़क का नाम रखने का फैसला किया है। मुडा घोटाले में शामिल मुख्यमंत्री के नाम पर सड़क का नाम रखना ऐतिहासिक शहर मैसूर और पूरे राज्य के साथ विश्वासघात और अपमान है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने कहा कि जिस सड़क का नाम सिद्धरमैया के नाम पर प्रस्तावित है, वह ‘ऐतिहासिक’ है। उन्होंने कहा कि महाराजा नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार ने टीबी रोग के कारण जान गंवाने वाली अपनी बहन राजकुमारी कृष्णजम्मानी तथा उनके बच्चों की याद में यहां भूमि दान की थी और एक तपेदिक अस्पताल की स्थापना की थी।

कृष्णा ने कहा कि अधिकारियों ने सिद्धारमैया के नाम पर एक सड़क का नाम रखने का फैसला किया है, जो मुडा मामले में आरोपी हैं, जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। कई नागरिकों ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति जताई है। मैं इसके खिलाफ कानूनी रूप से भी लड़ रहा हूं। अगर प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता है, तो हम इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया की बढ़ीं मुश्किलें, ईडी ने दर्ज की नई शिकायत, मुडा मामले में सबूत नष्ट करने का आरोप

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मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री मूडा में कथित घोटाले को लेकर लगातार घिरते जा रहे हैं। अब उनके और अन्य लोगों के खिलाफ एक नई शिकायत दर्ज कराई गई है। मुडा मामले में सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगा है। मूडा मामले में सुबूतों को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और उनके बेटे यतीन्द्रा के खिलाफ ईडी ने एक और शिकायत को दर्ज किया है।

प्रदीप कुमार नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सिद्धारमैया एवं अन्य के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ के लिए जांच और मामला दर्ज करने की मांग की।इस शिकायत में दावा किया गया है कि मुडा अधिकारियों की संलिप्तता से साइटों को पुनः प्राप्त करके साक्ष्य नष्ट कर दिए गए हैं। प्रदीप कुमार ने जांच का अनुरोध किया है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के लिए मामला दर्ज करने की मांग की है।

25 सितंबर को विशेष अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को आदेश दिया था। इस आदेश के बाद 27 सितंबर को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम सिद्धरमैया, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी एवं देवराजू सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। ईडी ने भी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ 14 भूखंडों के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में मामला दर्ज किया है। वहीं पार्वती ने भूखंड लौटाने की पेशकश की तो एमयूडीए ने उनको आवंटित 14 भूखंडों को वापस ले लिया है।

कथित मुडा भूमि घोटाला क्या है?

मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री की पत्नी का 50:50 योजना से क्या संबंध?

आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।

मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया था, जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित की गई थीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं।

सिद्धारमैया की बढ़ी मुश्किलें तो पत्नी ने उठाया बड़ा कदम, क्या प्लॉट सरेंडर करने से कम होगी मुश्किल?

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कर्नाटक के चर्चित मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने सिद्धारमैया के खिलाफ केस दर्ज किया है। मुडा स्कैम में सिद्धारमैया और उनके परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में ईडी की जांच शुरू कर दी है। इस बीच सिद्धारमैया की पत्नी ने बड़ा कदम उठाया है। पार्वती ने मुडा को पत्र लिखकर उन्हें आवंटित 14 प्लॉट वापस करने की बात कही है। अब सवाल उठता है कि जमीन लौटाने का दांव कारगर साबित होगा? 

सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण मुडा को पत्र लिखा है। पार्वती ने कहा है कि मुडा से मुझे जो प्लॉट मिले हैं, वो मैं वापस करना चाहती हूं। पार्वती ने मुडा से कहा है कि उनके लिए पति ज्यादा जरूरी है, इसलिए मैं उन 14 साइटों को वापस करना चाहती हूं, जो मुझे आवंटित की गई है। पार्वती के इस फैसले पर मुडा की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं सिद्धारमैया ने पार्वती के इस पत्र पर कहा है कि ये उनका फैसला है, लेकिन मैं लंबी लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार हूं।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुडा भूमि मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पार्वती और अन्य पर मामला दर्ज किया है। एफआईआर में पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी भी शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने जमीन खरीदी थी और बाद में उसे पार्वती को तोहफे में दे दिया था। यह मामला लोकायुक्त की एफआईआर के बाद दर्ज किया गया है। ईडी का मामला इस आरोप पर आधारित है कि पार्वती को मैसूरु के एक प्रमुख स्थान पर मुआवजे के 14 प्लॉट आवंटित किए गए थे। इस प्लॉट आवंटन में लेनदेन की वैधता पर सवाल उठे हैं। 

पिछले हफ्ते बेंगलुरु की एक विशेष अदालत द्वारा मामले में सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस जांच का आदेश देने के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार, सिद्धारमैया को पूछताछ के लिए बुलाने के लिए ईडी अधिकृत है और जांच के दौरान उनकी संपत्ति भी कुर्क कर सकता है। पिछले हफ्ते एक बयान में, सिद्धारमैया ने आरोपों का जवाब देते हुए दावा किया कि राजनीतिक प्रतिशोध के परिणामस्वरूप मामले में उन्हें अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

साल 2020 में मुडा ने एक स्कीम की शुरुआत की। स्कीम में कहा गया कि जिन लोगों की जमीन विकास के काम के लिए लिया जाएगा, उन्हें 50-50 पॉलिसी के तहत मैसूर शहर में प्लॉट और मुआवजा दिया जाएगा। बीजेपी सरकार की तरफ से शुरू की गई इस स्कीम की खूब आलोचना हुई, जिसके बाद 2023 में इसे रद्द कर दिया गया। सिद्धारमैया परिवार पर फर्जी दस्तावेज और पावर का दुरुपयोग कर इस स्कीम का लाभ लेने का आरोप है। सिद्धारमैया की पत्नी पर करीब 55 करोड़ रुपए का लाभ लेने का आरोप है। हालांकि, सिद्धारमैया इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर, MUDA स्कैम मामले में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले मामले में एफआईआर दर्ज की है। कर्नाटक के एक स्पेशल कोर्ट ने लोकायुक्त टीम को जांच का जिम्मा सौंपा है। याचिकाकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए जन प्रतिनिधि कोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक लोकयुक्त से इस मामले की जांच कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद आज मैसूरु लोकयुक्त पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया।

लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम और भूमि कब्जा निवारण अधिनियम के तहत अदालत द्वारा निर्धारित आईपीसी धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की। सीएम सिद्धारमैया पर आरोप A 1 है, पत्नी पार्वती पर आरोप A 2 है। वहीं, मुख्यमंत्री के साले मल्लिकार्जुन स्वामी को आरोपी नम्बर 3 और देवराज को आरोपी नम्बर 4 बनाया गया है। मुख्यमंत्री पर अपने अधिकारों को दुरुपयोग करके उनकी पत्नी के नाम मैसुरु में MUDA साइट आवंटित करने का आरोप लगा है।

सिद्धरमैया ने बीजेपी पर साधा निशाना

वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को दावा किया कि मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि आवंटन मामले में उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि विपक्ष उनसे डरता है। इसके साथ ही, सिद्धरमैया ने कहा कि यह उनके खिलाफ पहला राजनीतिक मामला है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मामले में अदालत द्वारा उनके खिलाफ जांच का आदेश दिये जाने के बाद भी वह इस्तीफा नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेंगे।

केंद्र सरकार पर सीबीआई, ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों और देश भर में विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपाल के कार्यालय का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में राज्यपाल के ‘हस्तक्षेप’ के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस की जरूरत है।

खरगे ने क्या कहा?

इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि MUDA के लोग जो चाहें वे कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह जरूरी नहीं है कि सरकार उसके सभी सवालों का जवाब दें, क्योंकि वह एक स्वायत्त निकाय होने के कारण कार्रवाई कर ही सकता है।

खरगे ने सीएम सिद्धारमैया का समर्थन करते हुए कहा कि उनलोगों निजी तौर पर कोई भी अपराध यदि किया हो तो इसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार हैं, लेकिन वह ऐसा मानते हैं कि उन्होंने ऐसा कोई भी अपराध नहीं किया है। उन्हें बदनाम किया जा रहा है। पार्टी को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीएम सिद्धारमैया की कुर्सी संकट में! बीजेपी मांग रही इस्तीफा*
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में उन्हें हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट की ओर से फैसला आने के बाद अब उन पर बीजेपी हमलावर दिख रही है। विपक्ष लगातार उनसे इस्तीफे की मांग कर रही है। *सिद्धारमैया से इस्तीफे की मांग* केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। सरकार और सिद्धारमैया ने गड़बड़ी की है। उनको सीएम पद से पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था पर वो सच जानते हैं और जांच से बचना चाहते हैं। इसलिए राज्यपाल के फैसले को चैलेंज किया। गवर्नर के फोटो को चप्पल से मारा गया। यह टेरर पैदा करने के लिए किया गया। बिना देरी किए सिद्धारमैया को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसके लिए उनको इस्तीफा देना चाहिए। *बीजेपी का कर्नाटक सरकार गिराने का इराना नहीं-प्रह्लाद जोशी* प्रह्लाद जोशी ने आगे कहा कि बिना पॉलिटिकल पावर के यह नहीं हो सकता। सीबीआई से इसकी जांच कराई जाए। बीजेपी का कर्नाटक सरकार गिराने या अस्थिर करने का न इरादा है और न कोई ऐसी कोशिश कर रहे हैं। यह कांग्रेस को तय करना है कि कौन सीएम बनेगा। किसी और को सीएम बनाए कांग्रेस। बीजेपी विपक्ष में ही बैठेगी। *सिद्धारमैया बोले- सच्चाई जल्द सामने आएगी* वहीं, कोर्ट के इस आदेश के बाद सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बीजेपी और जेडीएस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सियासी लड़ाई है। प्रदेश की जनता मेरे साथ है। मुझे विश्वास है अगले कुछ दिनों में सच्चाई सामने आएगी और जांच रद्द हो जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा, न्यायालय ने धारा 218 के तहत राज्यपाल द्वारा जारी आदेश को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने खुद को राज्यपाल के आदेश की धारा 17ए तक ही सीमित रखा। मैं विशेषज्ञों से परामर्श करूंगा कि क्या कानून के तहत ऐसी जांच की अनुमति है या नहीं। मैं कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा कर लड़ाई की रूपरेखा तय करूंगा। *सिद्दारमैया के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का है विकल्प* हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच को मंजूरी दिए जाने के गवर्नर के फैसले पर मुहर लगाकर सिद्दारमैया को भारी संकट में ला दिया है। अभी तक हाई कोर्ट से स्थगन आदेश की वजह से निचली अदालत से इस मामले में कार्रवाई शुरू नहीं हो रही थी। अब इस स्थगन आदेश से रोक हट गया है और सिद्दारमैया पर कानूनी शिकंजा कसने की आशंका है। विपक्ष पहले से ही उनपर पद छोड़ने का दबाव बना रहा है और कांग्रेस पार्टी के अंदर भी इसको लेकर काफी विवाद रहा है। फिलहाल सिद्दारमैया के सामने सबसे पहला विकल्प यही है कि वह सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस केस में फिर से स्थगन आदेश लेने की कोशिश करें। कथित मुडा भूमि घोटाला क्या है? मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। मुडा क्या है? मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण या मुडा कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी है, जिसका गठन मई 1988 में किया गया था। मुडा का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना, किफायती आवास उपलब्ध कराना, आवास आदि का निर्माण करना है। क्या है आरोप? आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पार्वती को मुडा द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है।