एक वर्ष में अपराधियों पर कसा शिकंजा, महिला सुरक्षा से लेकर साइबर अपराध नियंत्रण तक कई बड़ी उपलब्धियां; उत्तर प्रदेश पुलिस ने पेश किया रिपोर्ट का
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते एक वर्ष के दौरान अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों पर अंकुश, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna के नेतृत्व में 31 मई 2025 से 31 मई 2026 तक के कार्यकाल का विस्तृत ब्यौरा जारी किया गया है। इसके साथ ही आगामी वर्षों के लिए पुलिस की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की भी जानकारी दी गई है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पुलिस विभाग ने दस प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाकर कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में देखने को मिले।
अपराधियों के खिलाफ सख्ती, दोषसिद्धि दर 93 प्रतिशत से अधिक
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत व्यापक कार्रवाई की। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 32 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 29 हजार से अधिक मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। इस दौरान 42 हजार से अधिक अपराधियों को सजा दिलाई गई। इनमें 18 अपराधियों को मृत्युदंड और 3,340 अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
गैंगस्टर एक्ट के तहत हजारों अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 788 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की गईं। माफिया और संगठित अपराध से जुड़े तत्वों के खिलाफ अभियान चलाकर 336 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियों को जब्त, ध्वस्त या कब्जामुक्त कराया गया।
लूट, चोरी और डकैती की घटनाओं में कमी
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है। लूट की घटनाओं में लगभग 28 प्रतिशत, चोरी में 14 प्रतिशत और डकैती में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है। हत्या, बलवा और नकबजनी जैसे अपराधों में भी कमी दर्ज की गई है।
महिला सुरक्षा को मिली नई मजबूती
महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति अभियान को और मजबूत किया गया। प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए और हजारों पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। महिला हेल्प डेस्क व्यवस्था को और प्रभावी बनाया गया।
पुलिस के अनुसार मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद महिलाओं से जुड़े अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। बलात्कार के मामलों में करीब 34 प्रतिशत, महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के मामलों में 17 प्रतिशत, दहेज हत्या में लगभग 13 प्रतिशत तथा घरेलू हिंसा के मामलों में लगभग 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
जन शिकायतों के निस्तारण में सुधार
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जन शिकायत पोर्टल और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया गया। लगातार निगरानी और समीक्षा के चलते लंबित शिकायतों में लगभग 28 प्रतिशत की कमी आई।
पूरे वर्ष शांतिपूर्ण रहा प्रदेश
पुलिस के अनुसार समीक्षा अवधि के दौरान प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था सफल रही। इसके अलावा होली, दीपावली, ईद तथा अन्य धार्मिक आयोजनों को भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई
साइबर अपराधों से निपटने के लिए लखनऊ में विशेष साइबर अपराध कॉल सेंटर की क्षमता को बढ़ाया गया। ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से संबंधित मामलों में कार्रवाई करते हुए 400 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई गई। साथ ही एक लाख से अधिक मोबाइल नंबर और बड़ी संख्या में मोबाइल उपकरणों की पहचान संख्या ब्लॉक कराई गई।
साइबर अपराध की जांच और रोकथाम के लिए हजारों पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया तथा प्रत्येक जोन में विशेष साइबर कमांडो तैनात किए गए।
तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा
पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित "यक्ष" नामक विशेष एप विकसित किया गया। इस प्रणाली के माध्यम से फरार अपराधियों की पहचान, गिरोहों की निगरानी, बीट पुलिसिंग और अपराध विश्लेषण जैसे कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर जोर
प्रदेश में 60 हजार से अधिक नव आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों के संबंध में 27 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्य, आर्थिक अपराध और आधुनिक जांच पद्धतियों को विशेष रूप से शामिल किया गया।
पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए कई कदम
पुलिस विभाग ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं। दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। बीमा सुविधाओं का विस्तार किया गया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी बजट में वृद्धि की गई।
मेधावी बच्चों के लिए छात्रावास बनाने की योजना शुरू की गई। पुलिस परिवारों के लिए स्वास्थ्य शिविर, करियर परामर्श और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए गए।
सड़क दुर्घटनाएं कम करने की पहल
सड़क सुरक्षा को लेकर "शून्य मृत्यु जिला योजना" लागू की गई। इसके तहत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष टीमें तैनात की गईं। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी और परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई
आतंकवाद निरोधक दस्ते, विशेष कार्य बल और मादक पदार्थ विरोधी इकाइयों ने आतंकवाद, अवैध घुसपैठ, मादक पदार्थ तस्करी, अवैध हथियार कारोबार, वन्यजीव तस्करी और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए। करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ बरामद किए गए और कई संगठित गिरोहों का पर्दाफाश किया गया।
आगामी कार्ययोजना क्या है?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने भविष्य के लिए भी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल साक्ष्यों का अधिक उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक समन व्यवस्था को मजबूत करना और समयबद्ध विवेचना को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके साथ ही माफिया, संगठित अपराधियों और आर्थिक अपराध से जुड़े लोगों के खिलाफ वित्तीय जांच को और मजबूत किया जाएगा। अवैध संपत्तियों, बेनामी निवेश, हवाला नेटवर्क और फर्जी कंपनियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते एक वर्ष के दौरान अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों पर अंकुश, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna के नेतृत्व में 31 मई 2025 से 31 मई 2026 तक के कार्यकाल का विस्तृत ब्यौरा जारी किया गया है। इसके साथ ही आगामी वर्षों के लिए पुलिस की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की भी जानकारी दी गई है।

लखनऊ। लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद वर्तमान में कार्यवाहक DGP के पद पर तैनात राजीव कृष्ण को प्रदेश का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति राज्य में चार साल बाद हुई स्थायी डीजीपी की पहली तैनाती है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए पैनल पर शासन स्तर पर विचार करने के बाद मुख्यमंत्री ने राजीव कृष्ण को ही स्थायी डीजीपी बनाने की मंजूरी दी। यूपीएससी ने 26 मई को हुई बैठक में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण के नामों की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी। इनमें से राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा था।
लखनऊ। गोमती नगर के छत्रपति शाहूजी महाराज भागीदारी भवन में शनिवार को 'माय होम इंडिया' संस्था के तत्वावधान में 'स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती महोत्सव 2026' का आयोजन हुआ।क्रांतिसूर्य स्वातंत्र्यवीर सावरकर की जयंती पर आयोजित इस वैचारिक संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर पुलिस उपायुक्त जितेंद्र कुमार दुबे उपस्थित रहे। उन्होंने सावरकर के राष्ट्र प्रथम के विचारों को आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया और कहा कि सावरकर का जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है। एडीसीपी दुबे ने मातृभूमि की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य बताते हुए उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सावरकर ने काला पानी की यातनाओं को सहकर भी देश की आजादी का सपना नहीं छोड़ा। उनका सामाजिक समरसता और अखंड भारत का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण रहे। अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह ने की। मुख्य वक्ता 'माय होम इंडिया' के संस्थापक सुनील देवधर ने सावरकर के जीवन दर्शन को विस्तार से साझा किया। पूर्व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. सतीश द्विवेदी भी मंच पर मौजूद रहे। सायं 5 बजे शुरू हुए इस गरिमामय आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने सपरिवार हिस्सा लिया और राष्ट्र निर्माण का संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने सावरकर के हिंदुत्व, इतिहास लेखन और समाज सुधार के योगदान को याद किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राम प्रताप सिंह, आलोक रंजन सिंह और अखिल चतुर्वेदी की अहम भूमिका रही।
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Jun 01 2026, 19:32
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