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नेशनल हेराल्ड केसः ईडी की चार्जशीट पर आने वाला फैसला टला, अब इस दिन सुनाया जाएगा निर्णय

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नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने पर सुनवाई टल गई है। कोर्ट का फैसला अब 16 दिसंबर को आएगा। पहले यह फैसला आज सुनाया जाना था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ा दिया गया है।

मामला 1938 से चलने वाले ऐतिहासिक अखबार नेशनल हेराल्ड से जुड़ा है, जिसकी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नेहरू-युग की विरासत है। ईडी का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की 2000 करोड़ की संपत्ति को मात्र 50 लाख में हथिया ली गई। ईडी ने यह भी दावा किया है कि फर्जी लेन-देन के जरिए सालों तक एडवांस रेंट पेमेंट दिखाए गए और कथित तौर पर नकली किराया रसीदों का इस्तेमाल किया गया, ताकि पैसे को संदिग्ध तरीकों से एक दिशा में ले जाया जा सके

सोनिया-राहुल समेत ये हैं आरोपी

ईडी ने इस मामले में अप्रैल में चार्जशीट दाखिल की थी। ईडी ने इस मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, सांसद राहुल गांधी, दिवंगत नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के साथ-साथ सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और कंपनी यंग इंडियन को आरोपी बनाया है।

ऐसे शुरू हुआ था मामला

नेशनल हेराल्ड केस मूल रूप से पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत की वजह से शुरू हुआ था, जिसमें कांग्रेस नेताओं और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से जुड़ी कंपनियों द्वारा पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।

दिल्‍ली ब्‍लास्‍ट: आतंकी डॉ. शाहीन की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अलमारी, जहां से मिले 18 लाख कैश

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दिल्ली में हुए ब्लास्ट केस की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को एक के बाद एक बड़े खुलासे हाथ लग रहे हैं। एनआईए ने अब दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी और जैश-ए-मोहम्मद की कथित महिला कमांडर डॉ. शाहीन के ठिकाने से 18 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि बकामद की गई इतनी बड़ी रकम आतंकी फंडिंग का हिस्सा हो सकता है।

देश की राजधानी दिल्‍ली के ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए कार ब्‍लास्‍ट के जांच की जिम्मेदारी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई है। एनआईए की टीम कार ब्‍लास्‍ट की आरोपी डॉ. शाहीन शाहिद को लेकर मौका मुआयना करने के लिए फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी ले गई थी। शाहीन यूनिवर्सिटी के हॉस्‍टल के जिस रूम नंबर-22 में रहती थी, उसकी छानबीन गई। इस दौरान आलमारी से 18 लाख रुपये नकद मिले।

शाहीन के पास कहां से आई इतनी बड़ी रकम?

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी राशि शाहीन के पास कहां से आई? सूत्रों के मुताबिक यह पैसा आतंकी फंडिंग का हिस्सा हो सकता है। अलमारी में मिले इन भारी भरकम अंदेशा है कि इन पैसों का इस्‍तेमाल टेरर मॉड्यूल की गतिविधियों को फंड करने में किया जाना था। यह पैसा विश्वविद्यालय के भीतर से संचालित हो रहे ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ को वित्तपोषित करने के लिए रखा गया होगा।

डॉक्टर मुजम्मिल अहमद ने खोले राज

यह कार्रवाई आतंक मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई को फरीदाबाद लाकर पूछताछ के एक दिन बाद हुई। डॉक्टर मुजम्मिल ने पूछताछ में उन दो दुकानों की पहचान की जहां से उसने अमोनियम नाइट्रेट खरीदा था। जांच में पता चला है कि मुजम्मिल ने यूनिवर्सिटी से कुछ किलोमीटर दूर दो अलग-अलग कमरों में करीब 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट जमा कर रखा था। इसके अलावा उसने इस विस्फोटक सामग्री का एक बड़ा हिस्सा पास के गांव के खेतों में छुपाया था, जिसे बाद में वह फतेहपुर टैगा में किराये पर लिए एक मौलवी के घर में ले गया। एनआईए को आशंका है कि अभी और भी विस्फोटक सामग्री छुपाई गई हो सकती है, जिसके लिए तलाशी अभियान जारी है।

शाहीन ने जांच एजेंसियों के सामने किया बड़ा खुलासा

इधर, आतंकी डॉक्टर शाहीन ने जांच एजेंसियों को बताया कि वह आतंकी मॉड्यूल में डॉक्टर मुजम्मिल के कहने पर शामिल हुई थी और वही करती थी जो मुजम्मिल उसे निर्देश देता था। इसके अलावा, एजेंसियों को डॉक्टर अबू उकाशाह नाम के हैंडलर का टेलीग्राम अकाउंट भी मिला है। इसी अकाउंट के माध्यम से डॉक्टर मुजफ्फर, डॉक्टर उमर और डॉक्टर आदिल साल 2022 में तुर्किए गए थे।

नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की चार्जशीट पर फैसला आज, सोनिया-राहुल गांधी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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दिल्ली में राऊज ऐवन्यू कोर्ट आज नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की चार्जशीट पर महत्वपूर्ण आदेश सुनाएगा। कोर्ट यह तय करेगा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य आरोपियों को जारी किए जाने वाले समन पर क्या फैसला लिया जाए। बता दें कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे सहित अन्य को मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई के बाद आदेश को 29 नवंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। पिछली सुनवाई में स्पेशल सीबीआई जज विशाल गोगने ने कहा था कि ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट के निर्देश पर केस फाइल का निरीक्षण करने के बाद अतिरिक्त स्पष्टीकरण और दलीलें पेश की हैं। अदालत अब इस पर अपना आदेश शनिवार (29 नवंबर) को सुनाएगी।

क्या है आरोप?

ईडी का आरोप है कि इन नेताओं ने साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था, जो पहले नेशनल हेराल्ड अखबार चलाती थी। आरोप है कि इसके लिए ‘यंग इंडियन' नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी बहुमत के हिस्सेदार हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, गांधी परिवार की हिस्सेदारी यंग इंडियन में 76 प्रतिशत है, जिसने कथित रूप से सिर्फ 90 करोड़ रुपये के लोन के बदले एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया।

2012 में सामने आया था विवाद

नेशनल हेराल्ड के एसेट्स पर विवाद 2012 में तब सामने आया जब बीजेपी लीडर सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्रायल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस लीडर्स ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को खरीदने के प्रोसेस में धोखाधड़ी और भरोसा तोड़ने में हिस्सा लिया था।

पुतिन के भारत दौरे का शेड्यूल जारी, जानें क्यों खास है रूसी राष्ट्रपति की यात्रा

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का शेड्यूल घोषित हो गया है। पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दो दिनों के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार दिसंबर को भारत आ रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन का दौरा पाँच दिसंबर तक रहेगा।

पीएम मोदी के निमंत्रण पर पुतिन का दौरा

भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर 2025 को भारत के दौरे पर आएंगे। राष्ट्रपति पुतिन भारत-रूस की 23वीं सालाना शिखर बैठक में शामिल होंगे। इस दौरे में राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता करेंगे। साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी उनकी मुलाकात होगी।

रणनीतिक संबंधों की प्रगति पर होगी चर्चा

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि यह यात्रा भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने, रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। साथ ही दोनों नेताओं के बीच वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

अमेरिका समेत दुनियाभर की निगाहें दिल्ली पर

रूसी राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। भारत ने इस बीच रूस से तेल खरीद में कमी भी की है। पुतिन की इस यात्रा पर अमेरिका-चीन समेत दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

डिफेंस डील को लेकर चर्चा

भारत और रूस के बीच डिफेंस डील की लेकर काफी चर्चा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम मोदी पुतिन के साथ मुलाकात में S-400 की खरीद को लेकर डिफेंस डील कर सकते हैं। जबकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खर्च हुई S-400 की मिसाइलों की खरीद पर भी डील हो सकती है। इसके अलावा पुतिन पीएम मोदी से रूस के पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 लड़ाकू विमानों के बारे में बातचीत कर सकते हैं।

बंगाल की खाड़ी में उठा एक और तूफान, 'दित्वाह' का दक्षिणी राज्यों में दिखाई दे सकता है असर

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बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान 'सेन्यार' के बाद एक और तूफान उठ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि चक्रवाती तूफान 'दित्वाह' श्रीलंका के तटीय क्षेत्र और दक्षिण–पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय है। तूफान पिछले 6 घंटों में 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है।

तूफान का केंद्र त्रिंकोमाली से 50 किमी दक्षिण, बैटिकलोआ से 70 किमी उत्तर-पश्चिम और हंबनटोटा से 220 किमी उत्तर में स्थित था, जबकि यह भारत के पुडुचेरी से 460 किमी दक्षिण-पूर्व और चेन्नई से 560 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित था।

30 नवंबर की सुबह इन राज्यों में होगी दस्तक

मौसम विभाग ने बताया कि तूफान तेजी से आगे बढ़ रहा है और 30 नवंबर की सुबह तक उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के पास बंगाल की खाड़ी में पहुंच जाएगा। आईएमडी ने कई राज्यों के लिए बारिश और हवा के खतरे की चेतावनी जारी की है।

दो बार लैंडफॉल करेगा 'दित्वाह'

मौसम विभाग ने बताया कि चक्रवाती तूफान दित्वाह दो बार लैंडफॉल (कर सकता है, इसका पहला लैंडफॉल श्रीलंका में और दूसरा तमिलनाडु में होने की संभावना है। इसके सिस्टम को लगातार ट्रैक किया जा रहा है और समय-समय पर अपडेट जारी किए जा रहे हैं। इस दौरान अचानक बाढ़, भूस्खलन, पेड़ गिरना, बिजली लाइनों में खराबी, और सड़क-रेल-हवाई यातायात में व्यवधान जैसे हालात बन सकते हैं। इन अवरोधों के कारण सामान्य जीवन प्रभावित होगा।

दक्षिणी राज्यों में होगा असर

तमिलनाडु और पुडुचेरी में शुक्रवार और शनिवार को भारी से अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान है, जबकि कुछ जगहों पर 20 सेमी से अधिक बरसात हो सकती है। 30 नवंबर को बारिश थोड़ा कम होने की संभावना है, लेकिन कहीं-कहीं भारी वर्षा भी हो सकती है। केरल और लक्षद्वीप क्षेत्र में भी भारी बारिश की संभावना है। तेलंगाना में 30 नवंबर और 1 दिसंबर को भारी बारिश के आसार हैं

60-100 किमी प्रति घंटा की हवा चलने की संभावना

तूफान के असर से विभिन्न तटीय क्षेत्रों में 60-100 किमी प्रति घंटा की हवा चलने की संभावना है। दक्षिण तमिलनाडु, पुडुचेरी, श्रीलंका और दक्षिण आंध्र तटों पर गेल-फोर्स हवाएं चलेंगी। आईएमडी ने 1 दिसंबर तक समुद्र में मछली पकड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। पहले से समुद्र में मौजूद नावों को तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है। लोगों को घरों में सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।

अमेरिका में 19 देशों के ग्रीन कार्ड होल्डर्स की फिर होगी जांच, नेशनल गार्ड पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला

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वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड पर हुए हमले के बाद अब अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि 19 देशों से आने वाले सभी लोगों के ग्रीन कार्ड की दोबारा गहन जांच की जाएगी। यह फैसला वॉशिंगटन में नेशनल गार्ड सैनिकों पर हुए हमले के बाद आया है, जिसमें एक महिला सैनिक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल है।

अमेरिकी नागरिकता एवं इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर यह जांच ‘पूरी तरह कठोर और फुल-स्केल’ होगी। सीएनएन के मुताबिक, जिन 19 देशों को ‘कंट्रीज ऑफ कंसर्न’ की सूची में रखा गया है, उन्हें ट्रंप प्रशासन ने जून में ही चिन्हित किया थ। जिसमें अफगानिस्तान, क्यूबा, हैती, ईरान, सोमालिया और वेनेजुएला, बर्मा, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो और लीबिया शामिल थे। अमेरिका ने अफगानिस्तान से सभी इमिग्रेशन रिक्वेस्ट को प्रोसेस करना भी रोक दिया है।

अफगान नागरिकों की बढ़ी मुश्किलें

वहीं, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने भी कहा है कि बाइडेन प्रशासन के दौरान मंजूर किये गये सभी आश्रय मामलों की समीक्षा की जा रही है। DHS ने बताया कि अफगान नागरिकों के इमिग्रेशन अनुरोधों की प्रोसेसिंग तात्कालिक रूप से रोक दी गयी है जब तक सुरक्षा और वेटिंग प्रोटोकॉल की समीक्षा पूरी नहीं होती। प्रशासन ने यह कदम ‘बैकलॉग और संभावित गलत वेटिंग’ का हवाला देकर लिया है।

एफबीआई कर रही हमले की जांच

हमले की जांच अब एफबीआई संभाल रही है। एफबीआई निदेशक कश पटेल ने कहा कि यह हमला ‘आतंक की घटना’ के रूप में जांचा जा रहा है और कई राज्यों में सर्च वारंट जारी किए गए हैं। उन्होंने इसे ‘कोस्ट-टू-कोस्ट इन्वेस्टिगेशन’ बताया।

कहां हैं इमरान खान? पूर्व पाकिस्तानी पीएम के बेटे ने मांगा जिंदा होने का सबूत

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में बंद हुए दो साल से भी ज्यादा हो चुके हैं। वो करीब 845 दिन से सलाखों के पीछे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के परिवार को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है और न ही पीटीआई के ही किसी नेता को उनसे मिलने की इजाजत है। इस बीच इमरान खान के बेटे के एक पोस्ट ने मामले में हलचल मचाकर रख दी है।

पिता के जिंदा होने के सबूत मांग रहे इमरान के बेटे

कासिम ने ट्विटर पर गुरुवार शाम को एक लंबा पोस्ट किया। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के छोटे बेटे कासिम खान ने सरकार से अपने पिता की जिंदगी का सबूत मांगा है। कासिम ने कहा है कि पाकिस्तानी सरकार उनके पिता को जेल में आइसोलेशन में रख रही है। परिवार से किसी को भी खान से मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही है। कासिम ने कहा कि उनके पास इमरान खान के जिंदा होने का कोई सबूत नहीं है। पाकिस्तान से बाहर और राजनीति से दूर रहने वाले कासिम ने कहा कि उनके पिता को कुछ हुआ तो पाक सरकार इसकी जिम्मेदार होगी।

छह हफ्तों से मृत्युदंड सेल में हैं इमरान

कासिम ने बताया कि इमरान खान 845 दिन से गिरफ्तार रहे हैं। पिछले छह हफ्तों से उन्हें मृत्युदंड सेल में एकांत कारावास में रखा गया है, जहां कोई पारदर्शिता नहीं है। अदालत के आदेश के बावजूद उनकी बहनों को मुलाकात नहीं दी गई। न फोन कॉल, न विजिट, न ही इस बात का कोई प्रमाण कि इमरान खान जीवित और सुरक्षित हैं।

पिता की वास्तविक स्थिति छुपाने का आरोप

कासिम ने आरोप लगाया कि यह ‘सिक्योरिटी प्रोटोकॉल’ नहीं बल्कि उनके पिता की वास्तविक स्थिति छुपाने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने साफ कहा कि ‘मेरे पिता की सुरक्षा और इस अमानवीय एकांतवास से होने वाले हर परिणाम के लिए पाकिस्तानी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दखल का अनुरोध

इमरान खान के बेटे ने वैश्विक मानवाधिकार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय नेताओं और लोकतांत्रिक देशों से अपील की कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें। इमरान खान के जीवित होने का प्रमाण मांगें, अदालत के आदेश लागू करवाएं, एकांत कारावास खत्म करवाएं और पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक नेता की रिहाई की मांग करें।

इमरान की सेहत को लेकर तमाम तरह की अफवाहें

बता दें कि क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। बीते कुछ दिनों से पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर तमाम तरह की अफवाहें चल रही हैं। कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने दावा किया है कि इमरान खान की जेल में मौत हो चुकी है। इससे उनके परिवार और समर्थकों में बेचैनी है।

वहीं, दूसरी ओर जेल प्रशासन ने इमरान खान की सेहत ठीक होने का दावा किया है और अफवाहों का खंडन किया है। हालांकि उनके परिवार से कोई मिल नहीं पाया है। इमरान खान की बहनों को उनसे मिलने नहीं दिया गया है। ऐसे में इमरान खान की सेहत के बारे में चल रही तमाम अफवाहों को ताकत मिल रही है।

विदेशों से संचालित हो रहे कांग्रेस नेताओं के 'X' अकाउंट, बीजेपी नेता संबित पात्रा का चौंकाने वाला दावा

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एलन मस्क की सोशल मीडिया कंपनी एक्स ने हाल ही में अपने प्लेटफॉर्म पर एक नया फीचर लॉन्च किया है, जो किसी भी अकाउंट की लोकेशन, उपयोगकर्ता नाम बदलने की हिस्ट्री और ऐप डाउनलोड लोकेशन दिखाता है। इस फीचर ने भारत में राजनीतिक हलचल मचा दी है। दरअसल, भाजपा ने कांग्रेस पर विदेश से संचालित होने वाले खातों के जरिए भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस पर बीजेपी का गंभीर आरोप

संबित पात्रा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस देश के बाहर बैठे लोगों के साथ मिलकर भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि एक्स प्लेटफॉर्म के फीचर के आधार पर यह पता चला है कि कई कांग्रेस नेताओं और संगठनात्मक अकाउंट्स की लोकेशन भारत में नहीं, बल्कि विदेशों में दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक पवन खेड़ा का अकाउंट अमेरिका में बेस्ड दिख रहा है, जबकि महाराष्ट्र कांग्रेस का अकाउंट आयरलैंड से जुड़ा हुआ था जिसे बाद में बदलकर भारत कर दिया गया। हिमाचल कांग्रेस का अकाउंट थाईलैंड से जुड़ा बताया गया।

पीएम मोदी और भारत के अपमान की कोशिश

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस, राहुल गांधी और वामपंथी दलों के जाने-माने चेहरों ने 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

विदेश से भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने का आरोप

संबित पात्रा ने दावा किया कि कई लेफ्ट और कांग्रेस समर्थक इन्फ्लुएंसर्स पाकिस्तान, बांग्लादेश और साउथ ईस्ट एशिया में बैठे हुए हैं और भारत के खिलाफ एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस का काम देश को बांटना है और इसलिए विदेशों से मिलकर भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है

राहुल गांधी गलत नरेटिव सेट करने का आरोप

संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश में गलत नरेटिव सेट करने के लिए विदेशों में गलत बयानबाजी करते हैं। वे केवल जेन-Z से मिलकर देश के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश नहीं करते हैं बल्कि देश के खिलाफ माहौल सेट करते हैं। पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि भारत में कुछ ऐसे नैरेटिव जो राहुल गांधी, कांग्रेस और लेफ्ट इकोसिस्टम के कहने पर सेट किए गए, ऐसे तीन नैरेटिव के उदाहरण मैं दूंगा। पहला - वोट चोरी का नैरेटिव सेट किया गया। दूसरा - ऑपरेशन सिंदूर में जो मोदी जी और भारत की सेना को एक तरह से दुर्बल दिखाने की कोशिश की गई, उसके पीछे भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और पश्चिम एशिया में बैठे कुछ कांग्रेसी और उनके शुभचिंतकों के हैंडल हैं। तीसरा- संघ, संघ परिवार और मोदी जी पर व्यक्तिगत हमला करने का नैरेटिव भी विदेश से ही संचालित हुआ।

2014 के चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ रची गई साजिश! पूर्व सांसद का सीआईए-मोसाद को लेकर चौंकाने वाला दावा

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद कुमार केतकर ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार को लेकर बड़ा बयान दिया है। कुमार केतकर ने दावा का है कि सीआईए और मोसाद, जो अमेरिका और इजराइल की जासूसी एजेंसियां हैं, ने 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार की साजिश रची थी।

कांग्रेस की हार सीआईए और मोसाद की साजिश!

मुंबई में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम में बुधवार को कांग्रेस नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य कुमार केतकर ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की भारी हार किसी सामान्य राजनीतिक परिवर्तन का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए और इजराइल की मोसाद की कथित साजिश थी।

केतकर ने समझाया आंकड़ों का गणित

केतकर ने कहा कि दोनों एजेंसियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया था कि कांग्रेस का सीट संख्या 206 से आगे न बढ़े और पार्टी सत्ता से बाहर हो जाए। केतकर ने याद दिलाया कि 2004 में कांग्रेस ने 145 सीटें जीती थीं और 2009 में यह आंकड़ा बढ़कर 206 हो गया था। उन्होंने कहा कि अगर यही ट्रेंड जारी रहता तो 2014 में कांग्रेस को 250 से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए थीं और वह आराम से सत्ता में वापस आ जाती। लेकिन अचानक सीटें घटकर सिर्फ 44 रह गईं। यह सामान्य जनादेश नहीं था।

भारत के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने की रणनीति

केतकर ने कहा कुछ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने तय किया था कि किसी भी हाल में कांग्रेस को 206 सीटों से ज्यादा नहीं मिलने दी जाए। सीआईए और मोसाद ने डेटा इकट्ठा किया, रणनीति बनाई और ऐसा माहौल बनाया कि कांग्रेस सत्ता में न लौट सके। केतकर के मुताबिक, इन एजेंसियों को डर था कि यदि यूपीए दोबारा स्थिर सरकार बनाती, तो भारत की नीतियों पर उनका प्रभाव सीमित हो जाता और वे अपनी इच्छानुसार हस्तक्षेप नहीं कर पाते।

अपने अनुकूल सरकार बनाने की साजिश का आरोप

पूर्व पत्रकार रहे केतकर ने दावा किया कि इन विदेशी खुफिया एजेंसियों का उद्देश्य भारत में ऐसी सरकार तैयार करना था जो उनके लिए अनुकूल हो और उनकी नीतियों को आसानी से लागू कर सके। केतकर के मुताबिक, अगर कांग्रेस की स्थिर सरकार लौटती या गठबंधन सरकार मजबूत स्थिति में आती, तो विदेशी एजेंसियों के लिए भारत में हस्तक्षेप करना मुश्किल हो जाता है।

एंटीबायोटिक्स का मकड़जाल

प्रदीप श्रीवास्तव

किसी भी बीमारी के लिए, एंटीबायोटिक्स यानी रोग प्रतिरोधी दवाएँ बहुत कारगर मानी जाती है, शायद यही वजह है कि बाज़ार में सबसे ज़्यादा एंटीबायोटिक दवाएँ बिकती हैं। हालाँकि, इनके अंधाधुंध प्रयोग से हमारे देश में “सुपरबग्स” जैसी खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ दवाएँ बेअसर हो जाती हैं और सामान्य बीमारी भी जल्दी ठीक नहीं होती है और उनके इलाज पर बहुत ज़्यादा खर्च करना पड़ता है। चिंता की बात यह है कि पोल्ट्री और डेयरी फार्मिंग में भी एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है। नतीजतन, अगर हम खुद एंटीबायोटिक्स कम लें तो भी यह समस्या दूसरे रूप में हमें घेरे ही रहेगी। इसलिए सरकार ने एंटीबायोटिक्स के प्रयोग को लेकर गाइडलाइन जारी की है, जिसमें इनके इस्तेमाल को लेकर कई तरह के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 

सन 1928 में लंदन के सेंट मैरी हॉस्पिटल मेडिकल स्कूल में कार्यरत स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक अलेक्ज़ेंडर फ़्लेमिंग ने जीवाणुओं (बैक्टीरिया) पर शोध करते हुए एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज की। दूसरे विश्वयुद्ध में जब लाखों घायल सैनिक संक्रमण से मर रहे थे, तब पेनिसिलिन एक वरदान साबित हुई। इससे अनगिनत सैनिकों की जान बचाई गई। पेनिसिलिन ने चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदल दी और इसे आधुनिक एंटीबायोटिक युग की शुरुआत माना जाता है। 

हालाँकि, 1945 के बाद से ही फ़्लेमिंग ने खुद चेतावनी दी कि “एंटीबायोटिक के बहुत ज़्यादा प्रयोग से प्रतिरोध पैदा होगा”। और यही हुआ, एंटीबायोटिक का अंधाधुंध प्रयोग शुरू हो गया, जिससे बीमारी एक बार ठीक होने बाद, दोबारा होने पर उससे कई तरह की परेशानियाँ शुरू होने लगी। 

अब यह समस्या और बड़ी बनने लगी है, क्योंकि भारत जैसे देशों में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना, अधूरा कोर्स करना और छोटी-मोटी बीमारी में भी इस्तेमाल करना आम बात है। ज़्यादा एंटीबायोटिक के प्रयोग से हमारे शरीर के बैक्टीरिया, दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक विकसित कर लेते है इसे एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस कहा जाता है और यह स्थिति “सुपरबग्स” के रूप में उभरकर सामने आती है, यानी ऐसी स्थिति जिसमें ताकतवर जीवाणु, दवाओं से नहीं मरते और उन पर साधारण एंटीबायोटिक काम नहीं करती। ऐसे में न सिर्फ, मरीजों पर दवाओँ का खर्च बढ़ता जाता है, बल्कि भविष्य में वह कई बीमारियों को न्योता देता है और सामान्य संक्रमण यानी खाँसी, बुखार, घाव का इन्फेक्शन होने पर इसका इलाज भी मुश्किल हो जाता है। 

पहले जिन बीमारियों का इलाज ₹100 की दवा से हो जाता था, उनके लिए अब लाखों रुपये की नई और महँगी दवाएँ या इंजेक्शन लगते हैं। क्योंकि वह छोटी या सामान्य बीमारी पर दवाएँ बेअसर होती है, उन्हें ठीक करने के लिए कई तरह की जाँचें करानी पड़ती है और नए किस्म की दवाएँ देनी पड़ती है और मरीज को अस्पताल में ज़्यादा दिन भर्ती रहना पड़ता है। 

बार-बार एंटीबायोटिक लेने से डायरिया, एलर्जी, त्वचा पर दाने जैसी समस्याएँ भी आने लगती हैं और लंबे समय में किडनी, लीवर और पेट पर असर पड़ता है। सबसे बड़ी बात है कि एंटीबायोटिक हानिकारक बैक्टीरिया के साथ-साथ अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देते हैं। इससे खराब पाचन, इम्युनिटी कमज़ोर और बार-बार संक्रमण की समस्या हो सकती है। 

भारत पहले से ही एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस का हॉटस्पॉट बन चुका है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 7 लाख लोग एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि अगर इस समस्या पर रोक नहीं लगी तो 2050 तक भारत समेत विश्व में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस के कारण 1 करोड़ मौतें प्रति वर्ष हो सकती हैं। 

भारत में एंटीबायोटिक्स का बाज़ार बहुत बड़ा है, क्योंकि यहाँ संक्रमण संबंधी बीमारियाँ आम हैं। 2023 में भारत में एंटीबायोटिक्स का बाज़ार करीब 49,000 करोड़ रूपये का था। अनुमान है कि 2024–2030 के बीच यह बाज़ार लगभग 6–7% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगा और 2030 तक यह बाज़ार 83,000 करोड़ रूपये तक पहुँच सकता है। मालूम हो कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा एंटीबायोटिक उत्पादक देश है। यहाँ बनने वाले जेनेरिक एंटीबायोटिक्स का एक बड़ा हिस्सा अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका को निर्यात होता है। भारतीय फ़ार्मा कंपनियाँ दुनिया भर के 20% से अधिक जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करती हैं। 

द लैंसेट की 2022 रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति एंटीबायोटिक खपत दुनिया में सबसे अधिक है। अनुमान है कि हर साल भारत में लगभग 1,300 करोड़ से अधिक की खुराक एंटीबायोटिक की ली जाती हैं। इसमें से भी ग्रामीण और छोटे शहरों व कस्बों में एंटीबायोटिक का उपयोग बड़े शहरों की अपेक्षा बहुत अधिक होता है। भारत सरकार ने शेड्यूल एच1 लागू किया है, जिसके तहत कई एंटीबायोटिक दवाएँ केवल पर्चे पर ही मिल सकती हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से एंटीबायोटिक स्टीवर्डशिप प्रोग्राम को लागू किया जा रहा है ताकि दुरुपयोग कम हो, फिर भी समस्या जस की तस है। 

2025 में भारत की जनसंख्या लगभग 1.40 अरब है, यानी भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। देश में करीब लगभग 93 करोड़ आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, जबकि शहरों में लगभग 50 करोड़ लोग निवास करते हैं। 

वहीं, सर्दी-खाँसी-जुकाम, बुखार, डायरिया जैसी बीमारियाँ से हर साल भारत में करीब 30–35 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित होते हैं और लगभग 6.2 करोड़ डायबिटीज और 7.7 करोड़ हृदय रोग से पीड़ित हैं। 2024 तक हमारे देश में कुल पंजीकृत डॉक्टरों की संख्या लगभग 13 लाख हैं, इनमें से 10.4 लाख एलोपैथिक डॉक्टर और 4.5 लाख आयुष डाक्टर (आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी आदि) हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार 1,000 की जनसंख्या पर कम से कम 1 डॉक्टर होना चाहिए। जबकि भारत में 1,000 की आबादी पर मात्र 0.7 डॉक्टर उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात और भी कम है और कई राज्यों में 1000 की आबादी पर मात्र 0.2 डाक्टर हैं। 

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी, 2023 की रिपोर्ट की माने तो देश में 1.55 लाख सब-सेंटर, 25,000 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 5,600 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से लगभग 65–70% स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण इलाकों में स्थित हैं। 

भले ही देश में करीब एक लाख से ज़्यादा स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण इलाकों में हों, लेकिन अभी भी यहाँ डाक्टरों और स्वास्थ्य केंद्रों की भारी कमी है। देश में साधारण बीमारियों से हर साल करीब 30 करोड़ लोग प्रभावित हैं, जिनका इलाज कुछ लाख डाक्टरों या स्वास्थ्य केंद्रों के भरोसे संभव नहीं है। 

हालाँकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और स्वास्थ्य मंत्रालय ने एंटीबायोटिक उपयोग पर नियंत्रण के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें ज़ोर दिया गया है कि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमण में ही दी जाए और साधारण सर्दी-जुकाम या फ्लू में नहीं। डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होगी और अस्पतालों को एंटीबायोटिक स्टीवर्डशिप प्रोग्राम अपनाना होगा। साथ ही, दवा की अवधि को कम से कम रखने और मरीजों को पूरी जानकारी देने पर ज़ोर दिया गया है। 

मालूम हो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एंटीबायोटिक को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, पहला एक्सेस यानी वे एंटीबायोटिक जो सामान्य संक्रमण के लिए सुरक्षित हैं और इनका कोई ज़्यादा साइड इफ़ेक्ट नहीं है। दूसरी श्रेणी है वॉच की, इनका उपयोग सीमित परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए और इनके लिए निगरानी ज़रूरी है। तीसरी श्रेणी है रिज़र्व की, ये अंतिम विकल्प की दवाइयाँ हैं, जिन्हें केवल जीवन-रक्षक स्थिति में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। भारत भी इसी गाइडलाइन का पालन करता है और डॉक्टरों को सलाह भी दी गई है कि वे केवल ज़रूरत पड़ने पर ही एंटीबायोटिक लिखें और मरीजों को पूरी जानकारी दें। 

एंटीबायोटिक की समस्या इसलिए भी बड़ी होती जा रही है क्योंकि इंसानों के साथ ही कृषि और पशुपालन क्षेत्र में भी एंटीबायोटिक का अंधाधुंध उपयोग होना शुरू हो चुका है, खासतौर पर मुर्गीपालन और डेयरी फार्मिंग में। 

खाद्य और कृषि संगठन (संयुक्त राष्ट्र), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में कुल एंटीबायोटिक खपत का 50% से अधिक हिस्सा पशुपालन में होता है। पोल्ट्री सेक्टर (मुर्गीपालन) का अनुमान है कि भारत में हर साल लगभग 70–75% मुर्गीपालकों द्वारा चारे में एंटीबायोटिक का प्रयोग किया जाता है। 

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की एक रिपोर्ट में बताया गया कि बाजार में बिकने वाले 40% से अधिक चिकन में एंटीबायोटिक रेज़िड्यू पाए गए। डेयरी फार्मिंग डेयरी सेक्टर में, दूध देने वाली गायों और भैंसों में संक्रमण रोकने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक का बार-बार प्रयोग किया जाता है। 2022 के एक सर्वे में पाया गया कि 10–12% दूध के सैंपल्स में एंटीबायोटिक अवशेष मौजूद थे। 

ईयू और अमेरिका जैसे देशों ने एंटीबायोटिक-युक्त मीट और डेयरी उत्पादों के आयात पर कड़ी पाबंदी लगा रखी है। 2017 में ईयू ने भारत से निर्यात किए गए 26% पोल्ट्री उत्पादों को अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि उनमें एंटीबायोटिक अवशेष पाए गए। एंटीबायोटिक्स को ग्रोथ प्रमोटर के रूप में प्रयोग करने पर रोक लगा दी गई है। पशुपालन में केवल चिकित्सकीय ज़रूरत पर ही डॉक्टर या वैटरनरी प्रिस्क्रिप्शन से उपयोग की सिफ़ारिश है। 

एंटीबायोटिक न सिर्फ जनस्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक है, बल्कि निर्यात और खाद्य सुरक्षा पर भी सीधा असर डालता है। नई गाइडलाइन का उद्देश्य एंटीबायोटिक का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना और भविष्य में गंभीर संक्रमणों के इलाज के लिए उनकी प्रभावशीलता बनाए रखना है। यदि मरीज, डॉक्टर, अस्पताल और किसान सभी मिलकर इन नियमों का पालन करें, तो “सुपरबग्स” की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता, सख्त नियम और सतत निगरानी बेहद आवश्यक है। 

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं )