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खड़गे ने एससी-एसटी-ओबीसी और अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति में 'गिरावट' का लगाया आरोप, क्या कहते हैं आंकड़े

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की छात्रवृत्तियां छीन ली हैं। साथ ही खड़गे ने दावा किया कि बीजेपी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ कमजोर वर्गों की आकांक्षाओं का मजाक उड़ाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में ये दावा का।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए पोस्ट में लिखा कि 'देश के एससी, एसटी और ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं की छात्रवृत्तियों को आपकी सरकार ने हथियाने का काम किया है। सरकारी आंकड़े बातते हैं कि सभी वजीफों में मोदी सरकार ने लाभार्थियों की भारी कटौती तो की है, साथ ही साल-दर-साल फंड में औसतन 25 फीसदी कम खर्च किया है।'

लाभार्थियों की संख्या में चार साल में 94% की गिरावट

खरगे के मुताबिक, अल्पसंख्यक छात्रों को मिलने वाले प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या में पिछले चार बरस के दौरान 94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले चार बरस ही में 83 फीसदी तक घटी है। इसके अलावा, मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना, जो अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाती है, उसके लाभार्थियों की संख्या में चार बरस के भीतर 51 फीसदी तक की कमी आई है।

अब अगर सरकार के हवाले ही से सामने आए कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जरूर स्कॉलरशिप के कई स्कीम्स में लाभार्थियों और बजट का आवंटन घटा हैः-

प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप एक साल में 40 फीसदी घटा

संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए आवंटित बजट 1,378 करोड़ रुपये थी। जो 2024-25 में घटकर 326 करोड़ रुपये के करीब रह गई। वहीं, इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने महज 198 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए किया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बार का आवंटन 40 फीसदी तक घट गया है। अगर लाभार्थियों की बात की जाए तो 2021-22 में सरकार ने जहां 28 लाख 90 हजार छात्रों को ये स्कॉलरशिप दिया। तो 2023-24 में सरकार महज 4 लाख 91 हजार छात्रों को ही वजीफा दे सकी। लाभार्थियों और फंड में इतनी बड़ी गिरावट की वजह सरकार का क्लास 1 से लेकर 8 तक के छात्रों के लिए इस स्कीम को बंद करना रहा। अब ये स्कीम केवल नौवीं और दसवीं के छात्रों को दी जाती है। सरकार का कहना है कि 1 से लेकर 8 तक के छात्रों को पहले ही सरकार शिक्षा के अधिकार कानून के जरिये मदद कर रही है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का आवंटन 64 फीसदी घटा

वहीं, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में सरकार ने 2023-24 में इस मद में 1145 करोड़ रुपये का आवंटन किया था मगर सरकार 1065 करोड़ ही खर्च कर पाई। वर्ष 2024-25 में सरकार ने ज्यादा खर्च किया, और यह बढ़कर 1,145 करोड़ रुपये तक पहुंचा। मगर इस 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए बजट का आवंटन पिछले साल के मुकाबले 64 फीसदी तक घट चुका है। सरकार ने इस साल के बजट में महज 414 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। ये पिछले साल के मुकाबले कम से कम सात सौ करोड़ रुपये कम है। इस तरह ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि फंड का आवंटन कम होने से लाभार्थियों की संख्या पर भी इसका असर पड़ेगा।

मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप 78 फीसदी तक घटा

ये वजीफा अल्पसंख्यक समुदाय के उन छात्रों को दिया जाता है जो ग्रैजुएशन या फिर पोस्ट ग्रैजुएशन प्रोफेशनल औऱ टेक्निकल कोर्स में करना चाहते हैं। 2020-21 में इस मद में जहां सरकार का बजट आवंटन 400 करोड़ था, वह अगले अकादमिक वर्ष में 325 करोड़ रुपये रह गया। वहीं ये आवंटन 2023-24 में 44 करोड़ जबकि 2024-25 में आवंटन घटकर महज 34 करोड़ रुपये के करीब रह गया। अगर इस बरस के आवंटन की बात की जाए तो यह पिछले बरस के मुकाबले 78 फीसदी तक घट चुका है। इस साल सरकार ने बजट में इस वजीफे के लिए महज 7 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। पोस्ट-मैट्रिक वजीफे ही की तरह मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप के फंड में आवंटन घटने से इसके लाभार्थियों की संख्या पर भी असर पड़ेगा।

मुझे धक्का दिया गया”, खरगे ने लगाया बीजेपी सांसदों पर आरोप, ओम बिरला को पत्र भी लिखा

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संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद आरोपों का दौर चल रहा है। बीजेपी घटना के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहरा रही है। धक्का-मुक्की में बीजेपी के दो सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। दोनों अस्पताल में भर्ती हैं,आरोप राहुल गांधी पर लगा है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया है कि उनके साथ भी बदसलूकी हुई है। खरगे ने कहा है कि पीएम मोदी बीजेपी सांसदों को प्लेकार्ड वाले डंडे से लैस कराकर इंडिया गठबंधन के सांसदों को रोकने के लिए धक्का-मुक्की करवाते हैं। खरगे ने इसकी जांच के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को बकायदा पत्र भी लिखा है।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा है कि मुझे भाजपा सांसदों ने धक्का दिया, मैं अपना संतुलन खो बैठा और मकर द्वार के सामने जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हो गया। खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष से भाजपा सांसदों द्वारा उन्हें 'धक्का' दिए जाने के मामले की जांच का आदेश देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह न केवल उन पर, बल्कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला था।

खरगे ने ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा कि आज सुबह इंडिया गठबंधन के सांसदों ने प्रेरणा स्थल पर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च किया। यह मार्च केंद्रीय गृह मंत्री के 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में दिए गए डॉ. अंबेडकर के अपमानजनक भाषण के विरोध में किया गया था। जब मैं भाजपा सांसदों के साथ मकर द्वार पहुंचा,तो मुझे धक्का दिया गया। इसके बाद मैं अपना संतुलन खो बैठा और मकर द्वार के सामने जमीन पर गिर गया। इससे मेरे घुटनों को चोट लगी,जिनकी पहले ही सर्जरी हो चुकी है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी को क्या नसीहत दी, भागवत की किस सलाह का दिया हवाला?

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को बड़ी नसीहत दी है। मल्लिकार्जुन खरगे ने इसके लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की सलाह का हवाला भी दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर देश की हर मस्जिद में सर्वेक्षण कराकर समाज को बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाया। खरगे ने कहा कि ऐसा कर सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की सलाह की अवहेलना कर रहा है। खरगे की टिप्पणी उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मद्देनजर आई है। संभल में एक मस्जिद में यह पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है कि क्या वहां कोई मंदिर था।

सर्वे के नाम पर खोद-खोदकर झगड़ा क्यों लगाया जा रहा-खरगे

मल्लिकार्जुन खरगे रविवार को दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के एक महासंघ की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी से मोहन भागवत के 2022 के बयान पर ध्यान देने को कहा। खरगे ने आरएसएस प्रमुख का हवाला दिया जिन्होंने कहा था कि हमारा उद्देश्य राम मंदिर का निर्माण करना था और हमें हर मस्जिद के नीचे शिवालय नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, आज देश में हर जगह सर्वे वाले ये पता लगा रहे हैं कि कहां पहले मंदिर थे और कहां मस्जिद थी, लेकिन 2023 में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हमारा लक्ष्य राम मंदिर बनाने का था, हर मस्जिद के नीचे शिवालय ढूंढना गलत है। जब बीजेपी-आरएसएस वाले ही ये बातें कह रहे हैं, तो फिर सर्वे के नाम पर खोद-खोदकर झगड़ा क्यों लगाया जा रहा है। हम सभी तो एक हैं।

क्या लाल किला, ताजमहल, कुतुब मीनार भी ध्वस्त होगा-खरगे

खरगे ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी कहते हैं 'एक हैं तो सेफ हैं', लेकिन वे किसी को भी सेफ नहीं रहने दे रहे हैं। आप एकता की बात करते हैं, लेकिन आपके कार्य इसे धोखा देते हैं। आपके नेता मोहन भागवत ने कहा है कि अब जब राम मंदिर बन गया है, तो और अधिक पूजा स्थलों की तलाश करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप उनके शब्दों का सम्मान करते हैं, तो और कलह क्यों पैदा करते हैं?' खरगे ने बीजेपी से पूछा कि क्या वह लाल किला, ताजमहल, कुतुब मीनार और चार मीनार जैसी संरचनाओं को भी ध्वस्त कर देगी, जो मुसलमानों की तरफ से बनवाई गई थीं।

आखिर भागवत ने क्या कहा था

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जून 2022 में ज्ञानवापी विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। भागवत ने कहा था कि इतिहास वो है जिसे हम बदल नहीं सकते। उनका कहना था कि इसे न आज के हिंदुओं ने बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने, ये उस समय घटा.... हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना? उनका कहना था कि अब हमको कोई आंदोलन नहीं करना है। संघ प्रमुख नागपुर में संघ शिक्षा वर्ग, तृतीय वर्ष 2022 के समापन समारोह के दौरान बोल रहे थे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का विवादास्पद बयान, ज्योतिर्लिंग से की अपनी तुलना, भड़की भाजपा

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद की तुलना ज्योतिर्लिंगों से की है। मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है। खरगे ने कहा मैं ह‍िंदू हूं, मेरा नाम है मल्लिकार्जुन खरगे, 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग में से एक लिंग मैं हूं। खरगे के बयान पर बीजेपी नेता ने कड़ा विरोध किया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर वोट बैंक के लिए ह‍िंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित सभा में ये विवादास्पद बता कही। खरगे के इस बयान पर विवाद शुरू हो गया है। बीजेपी ने खरगे के इस बयान पर हमला बोला है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने वीडियो जारी कर कहा है कि 'हिंदू आस्था का अपमान करना कांग्रेस पार्टी की पहचान है। कांग्रेस ने पहले श्री राम का अपमान किया। श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में आयोजित समारोह को कांग्रेस ने नाच-गाना करार दिया था। कांग्रेसी लगातार श्री राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं। अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भगवान शिव का अपमान कर रहे हैं। खरगे ने अपनी तुलना 12 ज्योतिर्लिंग से की है।'

शहजाद पूनावाला ने आगे कहा कि उन्होंने कहा है कि 'मैं एक पवित्र ज्योतिर्लिंग हूं। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या किसी दूसरे धर्म के लिए कांग्रेस ऐसी टिप्पणी कर सकती है। वोट बैंक के लिए कांग्रेस का स्तर इतना गिर गया है कि लगातार ह‍िंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है।'

बीजेपी नेता ने खरगे से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष को माफी मांगनी चाहिए। नाम अगर शिव है, तो आप भगवान शिव नहीं बन सकते हैं। ज्योतिर्लिंग से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और वह खुद को ज्योतिर्लिंग बता रहे हैं। यह हिंदू समाज का बहुत बड़ा अपमान है।'

खरगे की खरी-खीरः हरियाणा-महाराष्ट्र की हार पर सीडब्ल्यूसी की बैठक में लगाई क्लास, राहुल गांधी भी लपेटे में

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी को बड़ा झटका लगा है। इससे पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को इसी तरह हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा और महाराष्ट्र में पार्टी और गठबंधन की हुई करारी हार के बाद हुई पहली कांग्रेस वर्किंग कमिटि की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी नेताओं की क्लास लगाई।मल्लिकार्जुन खरगे ने खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने कहा कि दो करारी हार के लिए जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। गुटबाजी को लेकर भी उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है।शुक्रवार को हुई कांग्रेस के सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई की बैठक में खरगे के अलावा तमाम सीनियर नेता, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। हालांकि बैठक खत्म होने से पहले ही राहुल और प्रियंका निकल गए।

पार्टी में अनुशासन की जरूरत पर दिया जोर

मीटिंग में खरगे ने पार्टी के जहां एक ओर इस निराशाजनक प्रदर्शन के लिए तमाम वजहों को गिनाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने विधानसभा चुनाव में मिली हार पर कहा कि अब जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष से सख्त एक्शन लेने की भी बात कही है।

आपसी लड़ाई पर लगाई लताड़

खरगे ने पार्टी में गुटबाजी की ओर इशारा करते हुए कहा कि अनुशासन की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। खरगे का कहना है कि पार्टी में अनुशासन की कमी और पुराने ढर्रे की राजनीति के जरिए जीत नहीं मिल सकती। कांग्रेस के भीतर आपसी गुटबाजी एक स्थायी भाव बन चुकी है। खरगे ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि आपसी एकता की कमी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हमें काफी नुकसान पहुंचाती है।

राहुल गांधी को यूं लपेटा

बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे पूरे फॉर्म में दिखे। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देने के साथ-साथ कई बड़े नेताओं की क्लास लगाई। दरअसल, बैठक में राहुल गांधी ने चुनावी हारों का जिक्र करते हुए कहा कि हार से घबराना नहीं है। कांग्रेस हमेशा पुनर्जन्म लेने वाली पार्टी है और आगे भी रहेगी। इस पर तपाक से खरगे ने मुस्कुराते हुए कहा कि नहीं कांग्रेस अजर अमर है, जो अजर अमर होता है, उसे पुनर्जन्म की जरूरत नहीं होती। इस पर तुरंत राहुल ने कहा कांग्रेस अजर अमर है, ये बात सही है। मैं तो मुद्दे सामने आने पर, हार मिलने पर कांग्रेस नए सिरे से फिर लौटेगी उसकी बात कर रहा था।

सियासी रणनीतिकार सुनील कोनूगोलु को भी धोया

खरगे ने कांग्रेस के सियासी रणनीतिकार और सर्वे करने वाले सर्वे सर्वा पार्टी के पदाधिकारी सुनील कोनूगोलु को धो दिया। राहुल-प्रियंका के सामने खरगे ने कांग्रेस के पदाधिकारी बने सियासी रणनीतिकार सुनील कोनूगोलु को निशाने पर लिया। खरगे ने कहा कि बताते कुछ हो होता कुछ है। कई चुनावों से देख रहा हूं। अब तुम्हारे रिकॉर्ड के साथ बोलूं तो जहां बोलते हो जीत वहां मिलती है हार। ऐसे तो अंदाज लगाकर एक आध सही निकल जाता है, लेकिन सिस्टम तो तुम्हारा कतई ठीक नहीं है।

मणिपुर मुद्दे को सनसनीखेज बना रही है कांग्रेस', मल्लिकार्जुन खरगे की चिट्ठी पर जेपी नड्डा का जवाब

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मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है। मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा था। अपने खत खरगे ने राष्ट्रपति मुर्मू से मणिपुर में तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया था। जिस पर अब बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खरगे को पत्र लिखा है।बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मणिपुर में जारी हिंसा पर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे गए पत्र की आलोचना की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी राज्य में चल रहे तनाव और अशांति के बीच इस मुद्दे को 'सनसनीखेज' बनाने की कोशिश कर रही है।

पत्र में नड्डा ने लिखा, इस साल की शुरुआत में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर में हिंसा के मुद्दे को संबोधित कर रहे थे, तब आप और आपकी पार्टी ने जिस अपमानजक और गैर-जिम्मेदाराना तरीके वॉकआउट किया था, उसे प्रत्यक्ष रूप से देखने के बाद इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को संबोधित आपका पत्र देखना मेरे लिए हैरान करने वाला है। कांग्रेस के नेताओं की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर अनगिनत अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं, फिर भी आपके पत्र को देखकर यह देखकर खुशी हुई कि आपकी पार्टी ने भारत के सर्वोच्च संविधानिक पद और उस पर बैठे प्रतिष्ठित व्यक्ति को कुछ तो सम्मान दिखाया है।

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पत्र में लिखा है कि मणिपुर अभी भी स्थानीय मुद्दों से निपटने में सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस की उस विफलता को महसूस कर रहा है। ऐसा लगता है कि आप आपकी पार्टी और कांग्रेस सरकार दोनों ने 90 के दशक में और यूपीए सरकार के समय किए गए गलत फैसलों को भूल रही है। मैं आपकी पार्टी को याद दिलाना चाहता हूं कि कांग्रेस की इस बड़ी नाकामी के परिणाम आज मणिपुर में महसूस किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस नेता ये भूल गए हैं कि उनकी सरकार ने न सिर्फ बाहरी आतंकियों के भारत में अवैध प्रवास को वैध बनाया, बल्कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने उनके साथ संधि भी की।

नड्डा ने आगे लिखा है कि कांग्रेस नेताओं का मणिपुर पर स्टैंड विदेशी और विभाजनकारी शक्तियों के गठजोड़ को मजबूती देती है। देश को कमजोर करने वाली शक्तियों के प्रयास को हम सफल नहीं होने देंगे। नड्डा ने लिखा है कि यह हमारे देश के लोगों को जानने का हक है, कि सत्ता के लिए कांग्रेस की प्यास या सावधानीपूर्वक तैयार की गई, रणनीति का हिस्सा तो नहीं?, कि लोगों को विभाजित करें और हमारे लोकतंत्र को किनारे कर दें। कांग्रेस नेताओं का यह पैटर्न विदेशी गठजोड़ का समर्थन और प्रोत्साहन करता है। जो ताकतें भारत की प्रगति को पटरी से उतारना चाहती हैं, वह वास्तव में चिंताजनक है।

नड्डा ने कहा कि केंद्र और मणिपुर सरकार हिंसा के बाद से ही हालात को नॉर्मल करने और लोगों की सुरक्षा को लेकर काम कर रही है। पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारे पूर्वोत्तर क्षेत्र ने हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा है, चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा या विकास के अवसरों तक पहुंच हो। हमारे पूर्वोत्तर में गोलीबारी और विस्फोट रोजमर्रा की बात बन गए थे,वहां देश की आजादी के बाद वहां पहली बार शांति, समृद्धि और प्रगति देखी जा रही है।

कांग्रेस में किसने कहा कि आर्टिकल 370 बहाल किया जाएगा', शाह के आरोपों पर भड़के खरगे ने कहा- बीजेपी झूठ फैला रही*
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महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव के बीच अनुच्छेद 370 का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आर्टिकल 370 पर बयान दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस दावे का विरोध किया कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने का इरादा रखती है। यही नहीं, कांग्रेस चीफ ने कहा कि बीजेपी पर समाज में विभाजन पैदा करने के लिए आर्टिकल 370 के मुद्दे को जिंदा रखने चाहती है। पुणे में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कांग्रेस और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अपशब्द कहने का आरोप लगाया। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, अमित शाह अपनी चुनावी रैलियों में कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हैं। (लेकिन) वह (खुद) कह रहे हैं कि कांग्रेस (जम्मू-कश्मीर में) अनुच्छेद 370 वापस लाना चाहती है। मुझे बताइए, यह किसने और कब कहा? आप एक मुद्दा उठा रहे हैं। अगर यह (अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का प्रस्ताव) संसद में पहले ही पारित हो चुका है, तो आप फिर से इस मुद्दे को क्यों उठा रहे हैं? खरगे ने आगे कहा कि इसका मतलब है कि आप इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं ताकि लोग बंट जाएं। अगर आप यह कहना चाहते हैं तो कश्मीर जाकर कहिए। कश्मीर में चुनाव खत्म हो चुके हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में रद्द कर दिया था। अब पिछले हफ़्ते जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र से कहा गया था कि वह पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे की बहाली के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों से बातचीत करें। कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन में है, जो जम्मू-कश्मीर में सरकार का नेतृत्व करती है। ऐसे में बीजेपी ने इस मुद्दे को जर-शोर से भुनाया है।
खरगे की खरी-खरीः 'उतनी ही गारंटी का वादा करें, जितना दे सकें...' कांग्रेस अध्यक्ष को क्यों कहना पड़ा ऐसा?

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कर्नाटक की कांग्रेस सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है। हाल ही में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का एक बयान आया था कि राज्य सरकार ‘शक्ति’ गारंटी योजना की समीक्षा करेगी। इस स्कीम के तहत राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिलती है। ऐसे में खुद कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी ही कांग्रेस सरकार की खिंचाई की है। कर्नाटक में मुफ्त बस योजना पर समीक्षा की बातों पर खरगे ने नाराजगी जताई और कहा कि उतना ही वादा कीजिए, जितनी पूरी हो जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शिवकुमार के इस बयान पर निराशा जाहिर करते हुए कहा था, आपने राज्य के लोगों को कुछ गारंटी दी हैं। उन्हें देखने के बाद मैंने भी महाराष्ट्र में कहा था कि कर्नाटक में 5 गारंटी हैं। अब आपने (शिवकुमार) कह दिया कि आप एक गारंटी छोड़ देंगे। समीक्षा की बात कहकर आपने संदेह पैदा कर दिया है। मैंने उनसे (महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं) कहा कि पांच, छह, सात या आठ गारंटी के वादे मत करते रहो। इसके बजाय ऐसे वादे करो जो आपके बजट के अनुरूप हों। जो लोग आलोचना करना चाहते हैं, उनके लिए इतना ही काफी है। उन्होंने सिद्धारमैया सरकार को अपने वादों पर कायम रहने की हिदायत दी।

खड़ने ने पार्टी नेताओं को चेताया और कहा, यदि आप बजट पर विचार किए बिना वादे करते हैं तो यह दिवालियापन की ओर ले जाएगा।सड़कों पर रेत डालने के भी पैसे नहीं होंगे। अगर यह सरकार असफल हुई तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।इससे बदनामी होगी और सरकार को अगले दस वर्षों तक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए बजट पर सावधानी से विचार करने की जरूरत है।

खरगे के बयान पर बीजेपी ने घेरा

अब खरगे के इसी बयान को भाजपा ने हाथों-हाथ लपका है। नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने खरगे की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि पहली बार कांग्रेस ने यह स्वीकार किया है कि उसकी चुनावी घोषणाएं, जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए होती हैं।

राहुल गांधी के खटाखट योजनाओं का क्या होगा-रविशंकर

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि खरगे साहब को बहुत ज्ञान आ गया है। बहुत कुछ स्वीकार किया है। मन में सवाल आया। पहला पाठ अपने नेता राहुल गांधी को पढ़ाया कि नहीं, गभीर सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी के खटाखट योजनाओं का क्या होगा। राहुल गांधी ने हिमाचल में क्या क्या बोला था, अब देखिये क्या हाल हुआ है। टॉयलेट टैक्स लगा दिया और अब वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं।

एक बार फिर कांग्रेस की कलई खुल गई-रविशंकर

कर्नाटक की तरह हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में कांग्रेस के घोषित चुनावी गारंटियों का जिक्र करते हुए प्रसाद ने कहा, पहले घोषणा करके फिर शुद्ध भाषा में जनता को बेवकूफ बनाकर वोट लेना। बाद में उस योजना को जमीन पर नहीं उतारना। बस, कागज पर ही रहने देना। कांग्रेस का यह आज का इतिहास नहीं है। गरीबी हटाओ की घोषणा कांग्रेस राज में 1971 में की गई थी। गरीबी हटी क्या? घोषणा करो, कोई पूछने वाला नहीं है। एक बार फिर कांग्रेस की कलई खुल गई है और उसकी सच्चाई सामने आ गई है।

कांग्रेस ने किया खड़गे का अपमान! प्रियंका गांधी के नामांकन के दौरान कहां से पार्टी प्रमुख, बीजेपी ने शेयर किया वीडियो

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प्रियंका गांधी ने बुधवार को केरल की वायनाड लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल किया। बुधवार को उनके नॉमिनेशन के लिए भव्य तैयारियां की गईं। कांग्रेस के सभी दिग्गज और राष्ट्रीय स्तर के सीनियर नेता शामिल हुए। हालांकि, नामांकन के दौरान का एक वीडियो बीजेपी ने शेयर किया है और कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है।मल्लिकार्जुन खरगे नॉमिनेशन के दौरान गेट के बाहर से झांकते नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें अंदर एंट्री नहीं दी गई। बीजेपी अब इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा रही है। उन्होंने कहा कि खरगे को नामांकन प्रक्रिया से बाहर इसलिए रखा गया क्योंकि वह दलित हैं।

भाजपा ने अपने सोशल मीडिया पर हैंडल पर एक वीडियो जारी की है। जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कमरे के बाहर इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में भाजपा ने लिखा कि 'आज जिस तरह से मल्लिकार्जुन खरगे जी को प्रियंका वाड्रा के नामांकन के समय कमरे से बाहर रखा गया, ठीक उसी तरह राहुल गांधी आरक्षण हटाने के बाद दलित समाज के लोगों को सम्मान और अवसरों से वंचित रखेंगे। अगर गांधी परिवार खरगे जी को ऐसे अपमानित कर सकता है तो दलित समाज के प्रति इनके मन में कितनी घृणा होगी, ये समझा जा सकता है।'

कांग्रेस पर दलितों के प्रति नफरत रखने का आरोप

वीडियो में खड़गे को उस कमरे के बाहर इंतजार करते हुए दिखाया गया है, जहां प्रियंका गांधी वायनाड उपचुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर रही थीं, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अनादर करने का आरोप लगाया है। वीडियो को कई भाजपा नेताओं के साथ-साथ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी साझा किया और कांग्रेस पर दलितों के प्रति नफरत रखने का आरोप लगाया।

हिमंत बिस्व सरमा बोले- बेहद निराशाजनक

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, 'वायनाड में आज तथाकथित होली ट्रिनिटी के मल्लिकार्जुन खरगे जैसे अनुभवी सांसद और दलित नेता के प्रति दिखाए गए अनादर को देखना बेहद निराशाजनक है। चाहे वह एआईसीसी का अध्यक्ष हो या पीसीसी, क्या परिवार उन लोगों को अपमानित करने में गर्व महसूस करता है जिन्हें वे केवल रबर स्टैंप मानते हैं?'

कांग्रेस का पलटवार

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस नेता प्रणव झा ने कहा कि 'ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि जो लोग बीते 10 वर्षों से सत्ता में हैं, वो सरकार और उसके मंत्री अभी भी झूठ और भ्रम फैला रहे हैं। वायनाड में जिलाधिकारी ने कहा था कि नियमों के तहत पांच से ज्यादा लोग कमरे में नहीं रह सकते। उस दौरान लोग कमरे से बाहर गए और उनमें कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पूरे धैर्य से बाहर इंतजार किया, जैसा आप वीडियो में देख सकते हैं। कुछ समय बाद मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल दोनों कमरे में आ गए थे, लेकिन भाजपा ने कांग्रेस को बदनाम करने और लोगों का असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए झूठ की साजिश रची।'

हरियाणा में हार के बाद एक्शन में कांग्रेस, मल्लिकार्जुन खरगे ने हुड्डा-गहलोत से बाबरिया तक को किया तलब!

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हरियाणा में कांग्रेस बुरी तरह हार गई है। हार के लिए मुख्य रूप से कुमारी सैलजा और भूपिंदर सिंह हुड्डा को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।हरियाणा में हार और सहयोगियों के वार के बाद कांग्रेस एक्शन में है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हार की समीक्षा को लेकर आज बड़ी बैठक बुलाई है।इस बैठक में पहले भूपेन्द्र हुड्डा, पर्यवेक्षक अशोक गहलोत, अजय माकन, प्रताप सिंह बाजवा, प्रभारी दीपक बाबरिया, प्रदेश अध्यक्ष उदय भान शामिल होंगे. राहुल गांधी भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। हरियाणा को लेकर खरगे द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में सैलजा और सुरजेवाला को पहले नहीं बुलाया गया है। इन नेताओं को बाद में बुलाया जा सकता है।

चुनाव से पहले यह तय माना जा रहा था कि हरियाणा में इस बार कांग्रेस की वापसी होगी. एग्जिट पोल के सर्वे ने इस अनुमान को थोड़ा और पुख्ता कर दिया. सर्वे के बाद से हरियाणा कांग्रेस में जबरदस्त उत्साह थी. कांग्रेस वाले इस बात को तय मान चुके थे कि 10 साल बाद प्रदेश में उसकी वापसी हो रही है. कोई भी ऐसा सर्वे नहीं था जिसमें कांग्रेस हारती हुई दिख रही थी लेकिन जब नतीजे आए तो सारे सर्वे फेल हो गए. बीजेपी को हरियाणा में ऐतिहासिक जीत मिली. बीजेपी ने प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाई।

जानकारों के अनुसार, कांग्रेस की अंदरूनी कलह, मौजूदा विधायकों पर अत्यधिक निर्भरता और बागियों की वजह से कांग्रेस एक दशक के बाद हरियाणा में वापसी करने में विफल रही। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा की खींचतान से बीजेपी को बड़ा फायदा मिला। टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक कांग्रेस बंटी नजर आ रही थी। कांग्रेस तीन खेमों में बंट गई थी। इसमें एक खेमा पूर्व सीएम हुड्डा का था तो दूसरा कुमारी सैलजा और तीसरा रणदीप सुरजेवाला का था।

सैलजा-हुड्डा के अलावा इन 4 दिग्गजों का भी हार में हाथ!

सैलजा और हुड्डा के अलावा कांग्रेस के भीतर 4 ऐसे भी दिग्गज हैं, जिनके ऊपर हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन जिस तरह से पार्टी की हार हुई है, उससे कहा जा रहा है कि इन नेताओं की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

1. दीपक बाबरिया- जून 2023 में शक्ति सिंह गोहिल के गुजरात जाने के बाद दीपक बाबरिया को हरियाणा कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया। प्रभारी महासचिव बनने के बाद बाबरिया न तो हरियाणा में कांग्रेस की संगठन तैयार कर पाए और न ही गुटबाजी खत्म कर पाए। इतना ही नहीं, बाबरिया के बयान ने ही कई बार कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी।

2. अजय माकन- कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अजय माकन हरियाणा चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख थे। कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण का काम स्क्रीनिंग कमेटी के पास ही है। कांग्रेस का टिकट वितरण पूरे चुनाव के दौरान विवादों में रहा। आरोप है कि टिकट वितरण में सिर्फ हुड्डा गुट को तरजीह मिली। 89 टिकट में से 72 टिकट कांग्रेस में हुड्डा समर्थकों को दे दी गई। टिकट वितरण के बाद कुमारी सैलजा नाराज होकर प्रचार से दूर हो गई। सैलजा की नाराजगी रिजल्ट पर भी दिखा है।

यही नहीं, राहुल गांधी के कहने पर जब कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन की कवायद शुरू की तो अजय माकन और हुड्डा इसके विरोध में थे। माकन दिल्ली की राजनीति की वजह से शुरू से ही अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी का विरोध कर रहे हैं।

3. अशोक गहलोत- राजस्थान से दिल्ली की तरफ लौटे अशोक गहलोत को कांग्रेस ने हरियाणा का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया था। कांग्रेस के भीतर पर्यवेक्षक का काम सभी को साथ लेकर चलना, क्राइसिस मैनेजमेंट करना और ग्राउंड की रिपोर्ट से हाईकमान को अवगत कराना होता है। अशोक गहलोत पूरे चुनाव में क्राइसिस मैनेज नहीं कर पाए। कांग्रेस के 29 बागी मैदान में उतर गए, जिसमें से एकाध बागी को ही कांग्रेस मना पाई। अंबाला और जींद में तो कांग्रेस के बागी ने ही पार्टी का खेल खराब कर दिया।

गहलोत पर्यवेक्षक थे, लेकिन सार्वजनिक तौर पर सैलजा और हुड्डा की लड़ाई को रोक नहीं पाए। सैलजा ने आखिर दिन तक मीडिया को इंटरव्यू दिया और हर इंटरव्यू में सीएम पद देने की मांग उठाई.

4. सुनील कनुगोलू-अगस्त 2022 में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल होने वाले सुनील कनुगोलू हरियाणा में कांग्रेस की रणनीति देख रहे थे। कहा जाता है कि हरियाणा मांगे हिसाब पदयात्रा का रोडमैप भी कनुगोलू की टीम ने ही तैयार किया था। कनुगोलू के सर्वे को आधार बनाकर ही हुड्डा कैंप ने कई बड़े फैसले हाईकमान से करवाए।

हालांकि, कनुगोलू बीजेपी की रणनीति को समझने में फेल रहे। जमीन पर जिस तरह से बीजेपी ने जाट वर्सेज गैर जाट का फॉर्मूला तैयार किया, उसे भी कनुगोलू की टीम काउंटर नहीं कर पाए।

खड़गे ने एससी-एसटी-ओबीसी और अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति में 'गिरावट' का लगाया आरोप, क्या कहते हैं आंकड़े

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की छात्रवृत्तियां छीन ली हैं। साथ ही खड़गे ने दावा किया कि बीजेपी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ कमजोर वर्गों की आकांक्षाओं का मजाक उड़ाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में ये दावा का।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए पोस्ट में लिखा कि 'देश के एससी, एसटी और ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं की छात्रवृत्तियों को आपकी सरकार ने हथियाने का काम किया है। सरकारी आंकड़े बातते हैं कि सभी वजीफों में मोदी सरकार ने लाभार्थियों की भारी कटौती तो की है, साथ ही साल-दर-साल फंड में औसतन 25 फीसदी कम खर्च किया है।'

लाभार्थियों की संख्या में चार साल में 94% की गिरावट

खरगे के मुताबिक, अल्पसंख्यक छात्रों को मिलने वाले प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या में पिछले चार बरस के दौरान 94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले चार बरस ही में 83 फीसदी तक घटी है। इसके अलावा, मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना, जो अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाती है, उसके लाभार्थियों की संख्या में चार बरस के भीतर 51 फीसदी तक की कमी आई है।

अब अगर सरकार के हवाले ही से सामने आए कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जरूर स्कॉलरशिप के कई स्कीम्स में लाभार्थियों और बजट का आवंटन घटा हैः-

प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप एक साल में 40 फीसदी घटा

संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए आवंटित बजट 1,378 करोड़ रुपये थी। जो 2024-25 में घटकर 326 करोड़ रुपये के करीब रह गई। वहीं, इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने महज 198 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए किया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बार का आवंटन 40 फीसदी तक घट गया है। अगर लाभार्थियों की बात की जाए तो 2021-22 में सरकार ने जहां 28 लाख 90 हजार छात्रों को ये स्कॉलरशिप दिया। तो 2023-24 में सरकार महज 4 लाख 91 हजार छात्रों को ही वजीफा दे सकी। लाभार्थियों और फंड में इतनी बड़ी गिरावट की वजह सरकार का क्लास 1 से लेकर 8 तक के छात्रों के लिए इस स्कीम को बंद करना रहा। अब ये स्कीम केवल नौवीं और दसवीं के छात्रों को दी जाती है। सरकार का कहना है कि 1 से लेकर 8 तक के छात्रों को पहले ही सरकार शिक्षा के अधिकार कानून के जरिये मदद कर रही है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का आवंटन 64 फीसदी घटा

वहीं, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में सरकार ने 2023-24 में इस मद में 1145 करोड़ रुपये का आवंटन किया था मगर सरकार 1065 करोड़ ही खर्च कर पाई। वर्ष 2024-25 में सरकार ने ज्यादा खर्च किया, और यह बढ़कर 1,145 करोड़ रुपये तक पहुंचा। मगर इस 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए बजट का आवंटन पिछले साल के मुकाबले 64 फीसदी तक घट चुका है। सरकार ने इस साल के बजट में महज 414 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। ये पिछले साल के मुकाबले कम से कम सात सौ करोड़ रुपये कम है। इस तरह ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि फंड का आवंटन कम होने से लाभार्थियों की संख्या पर भी इसका असर पड़ेगा।

मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप 78 फीसदी तक घटा

ये वजीफा अल्पसंख्यक समुदाय के उन छात्रों को दिया जाता है जो ग्रैजुएशन या फिर पोस्ट ग्रैजुएशन प्रोफेशनल औऱ टेक्निकल कोर्स में करना चाहते हैं। 2020-21 में इस मद में जहां सरकार का बजट आवंटन 400 करोड़ था, वह अगले अकादमिक वर्ष में 325 करोड़ रुपये रह गया। वहीं ये आवंटन 2023-24 में 44 करोड़ जबकि 2024-25 में आवंटन घटकर महज 34 करोड़ रुपये के करीब रह गया। अगर इस बरस के आवंटन की बात की जाए तो यह पिछले बरस के मुकाबले 78 फीसदी तक घट चुका है। इस साल सरकार ने बजट में इस वजीफे के लिए महज 7 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। पोस्ट-मैट्रिक वजीफे ही की तरह मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप के फंड में आवंटन घटने से इसके लाभार्थियों की संख्या पर भी असर पड़ेगा।

मुझे धक्का दिया गया”, खरगे ने लगाया बीजेपी सांसदों पर आरोप, ओम बिरला को पत्र भी लिखा

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संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद आरोपों का दौर चल रहा है। बीजेपी घटना के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहरा रही है। धक्का-मुक्की में बीजेपी के दो सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। दोनों अस्पताल में भर्ती हैं,आरोप राहुल गांधी पर लगा है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया है कि उनके साथ भी बदसलूकी हुई है। खरगे ने कहा है कि पीएम मोदी बीजेपी सांसदों को प्लेकार्ड वाले डंडे से लैस कराकर इंडिया गठबंधन के सांसदों को रोकने के लिए धक्का-मुक्की करवाते हैं। खरगे ने इसकी जांच के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को बकायदा पत्र भी लिखा है।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा है कि मुझे भाजपा सांसदों ने धक्का दिया, मैं अपना संतुलन खो बैठा और मकर द्वार के सामने जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हो गया। खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष से भाजपा सांसदों द्वारा उन्हें 'धक्का' दिए जाने के मामले की जांच का आदेश देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह न केवल उन पर, बल्कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला था।

खरगे ने ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा कि आज सुबह इंडिया गठबंधन के सांसदों ने प्रेरणा स्थल पर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च किया। यह मार्च केंद्रीय गृह मंत्री के 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में दिए गए डॉ. अंबेडकर के अपमानजनक भाषण के विरोध में किया गया था। जब मैं भाजपा सांसदों के साथ मकर द्वार पहुंचा,तो मुझे धक्का दिया गया। इसके बाद मैं अपना संतुलन खो बैठा और मकर द्वार के सामने जमीन पर गिर गया। इससे मेरे घुटनों को चोट लगी,जिनकी पहले ही सर्जरी हो चुकी है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी को क्या नसीहत दी, भागवत की किस सलाह का दिया हवाला?

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को बड़ी नसीहत दी है। मल्लिकार्जुन खरगे ने इसके लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की सलाह का हवाला भी दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर देश की हर मस्जिद में सर्वेक्षण कराकर समाज को बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाया। खरगे ने कहा कि ऐसा कर सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की सलाह की अवहेलना कर रहा है। खरगे की टिप्पणी उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मद्देनजर आई है। संभल में एक मस्जिद में यह पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है कि क्या वहां कोई मंदिर था।

सर्वे के नाम पर खोद-खोदकर झगड़ा क्यों लगाया जा रहा-खरगे

मल्लिकार्जुन खरगे रविवार को दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के एक महासंघ की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी से मोहन भागवत के 2022 के बयान पर ध्यान देने को कहा। खरगे ने आरएसएस प्रमुख का हवाला दिया जिन्होंने कहा था कि हमारा उद्देश्य राम मंदिर का निर्माण करना था और हमें हर मस्जिद के नीचे शिवालय नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, आज देश में हर जगह सर्वे वाले ये पता लगा रहे हैं कि कहां पहले मंदिर थे और कहां मस्जिद थी, लेकिन 2023 में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हमारा लक्ष्य राम मंदिर बनाने का था, हर मस्जिद के नीचे शिवालय ढूंढना गलत है। जब बीजेपी-आरएसएस वाले ही ये बातें कह रहे हैं, तो फिर सर्वे के नाम पर खोद-खोदकर झगड़ा क्यों लगाया जा रहा है। हम सभी तो एक हैं।

क्या लाल किला, ताजमहल, कुतुब मीनार भी ध्वस्त होगा-खरगे

खरगे ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी कहते हैं 'एक हैं तो सेफ हैं', लेकिन वे किसी को भी सेफ नहीं रहने दे रहे हैं। आप एकता की बात करते हैं, लेकिन आपके कार्य इसे धोखा देते हैं। आपके नेता मोहन भागवत ने कहा है कि अब जब राम मंदिर बन गया है, तो और अधिक पूजा स्थलों की तलाश करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप उनके शब्दों का सम्मान करते हैं, तो और कलह क्यों पैदा करते हैं?' खरगे ने बीजेपी से पूछा कि क्या वह लाल किला, ताजमहल, कुतुब मीनार और चार मीनार जैसी संरचनाओं को भी ध्वस्त कर देगी, जो मुसलमानों की तरफ से बनवाई गई थीं।

आखिर भागवत ने क्या कहा था

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जून 2022 में ज्ञानवापी विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। भागवत ने कहा था कि इतिहास वो है जिसे हम बदल नहीं सकते। उनका कहना था कि इसे न आज के हिंदुओं ने बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने, ये उस समय घटा.... हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना? उनका कहना था कि अब हमको कोई आंदोलन नहीं करना है। संघ प्रमुख नागपुर में संघ शिक्षा वर्ग, तृतीय वर्ष 2022 के समापन समारोह के दौरान बोल रहे थे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का विवादास्पद बयान, ज्योतिर्लिंग से की अपनी तुलना, भड़की भाजपा

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद की तुलना ज्योतिर्लिंगों से की है। मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है। खरगे ने कहा मैं ह‍िंदू हूं, मेरा नाम है मल्लिकार्जुन खरगे, 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग में से एक लिंग मैं हूं। खरगे के बयान पर बीजेपी नेता ने कड़ा विरोध किया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर वोट बैंक के लिए ह‍िंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित सभा में ये विवादास्पद बता कही। खरगे के इस बयान पर विवाद शुरू हो गया है। बीजेपी ने खरगे के इस बयान पर हमला बोला है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने वीडियो जारी कर कहा है कि 'हिंदू आस्था का अपमान करना कांग्रेस पार्टी की पहचान है। कांग्रेस ने पहले श्री राम का अपमान किया। श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में आयोजित समारोह को कांग्रेस ने नाच-गाना करार दिया था। कांग्रेसी लगातार श्री राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं। अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भगवान शिव का अपमान कर रहे हैं। खरगे ने अपनी तुलना 12 ज्योतिर्लिंग से की है।'

शहजाद पूनावाला ने आगे कहा कि उन्होंने कहा है कि 'मैं एक पवित्र ज्योतिर्लिंग हूं। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या किसी दूसरे धर्म के लिए कांग्रेस ऐसी टिप्पणी कर सकती है। वोट बैंक के लिए कांग्रेस का स्तर इतना गिर गया है कि लगातार ह‍िंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है।'

बीजेपी नेता ने खरगे से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष को माफी मांगनी चाहिए। नाम अगर शिव है, तो आप भगवान शिव नहीं बन सकते हैं। ज्योतिर्लिंग से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और वह खुद को ज्योतिर्लिंग बता रहे हैं। यह हिंदू समाज का बहुत बड़ा अपमान है।'

खरगे की खरी-खीरः हरियाणा-महाराष्ट्र की हार पर सीडब्ल्यूसी की बैठक में लगाई क्लास, राहुल गांधी भी लपेटे में

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी को बड़ा झटका लगा है। इससे पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को इसी तरह हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा और महाराष्ट्र में पार्टी और गठबंधन की हुई करारी हार के बाद हुई पहली कांग्रेस वर्किंग कमिटि की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी नेताओं की क्लास लगाई।मल्लिकार्जुन खरगे ने खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने कहा कि दो करारी हार के लिए जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। गुटबाजी को लेकर भी उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है।शुक्रवार को हुई कांग्रेस के सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई की बैठक में खरगे के अलावा तमाम सीनियर नेता, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। हालांकि बैठक खत्म होने से पहले ही राहुल और प्रियंका निकल गए।

पार्टी में अनुशासन की जरूरत पर दिया जोर

मीटिंग में खरगे ने पार्टी के जहां एक ओर इस निराशाजनक प्रदर्शन के लिए तमाम वजहों को गिनाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने विधानसभा चुनाव में मिली हार पर कहा कि अब जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष से सख्त एक्शन लेने की भी बात कही है।

आपसी लड़ाई पर लगाई लताड़

खरगे ने पार्टी में गुटबाजी की ओर इशारा करते हुए कहा कि अनुशासन की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। खरगे का कहना है कि पार्टी में अनुशासन की कमी और पुराने ढर्रे की राजनीति के जरिए जीत नहीं मिल सकती। कांग्रेस के भीतर आपसी गुटबाजी एक स्थायी भाव बन चुकी है। खरगे ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि आपसी एकता की कमी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हमें काफी नुकसान पहुंचाती है।

राहुल गांधी को यूं लपेटा

बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे पूरे फॉर्म में दिखे। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देने के साथ-साथ कई बड़े नेताओं की क्लास लगाई। दरअसल, बैठक में राहुल गांधी ने चुनावी हारों का जिक्र करते हुए कहा कि हार से घबराना नहीं है। कांग्रेस हमेशा पुनर्जन्म लेने वाली पार्टी है और आगे भी रहेगी। इस पर तपाक से खरगे ने मुस्कुराते हुए कहा कि नहीं कांग्रेस अजर अमर है, जो अजर अमर होता है, उसे पुनर्जन्म की जरूरत नहीं होती। इस पर तुरंत राहुल ने कहा कांग्रेस अजर अमर है, ये बात सही है। मैं तो मुद्दे सामने आने पर, हार मिलने पर कांग्रेस नए सिरे से फिर लौटेगी उसकी बात कर रहा था।

सियासी रणनीतिकार सुनील कोनूगोलु को भी धोया

खरगे ने कांग्रेस के सियासी रणनीतिकार और सर्वे करने वाले सर्वे सर्वा पार्टी के पदाधिकारी सुनील कोनूगोलु को धो दिया। राहुल-प्रियंका के सामने खरगे ने कांग्रेस के पदाधिकारी बने सियासी रणनीतिकार सुनील कोनूगोलु को निशाने पर लिया। खरगे ने कहा कि बताते कुछ हो होता कुछ है। कई चुनावों से देख रहा हूं। अब तुम्हारे रिकॉर्ड के साथ बोलूं तो जहां बोलते हो जीत वहां मिलती है हार। ऐसे तो अंदाज लगाकर एक आध सही निकल जाता है, लेकिन सिस्टम तो तुम्हारा कतई ठीक नहीं है।

मणिपुर मुद्दे को सनसनीखेज बना रही है कांग्रेस', मल्लिकार्जुन खरगे की चिट्ठी पर जेपी नड्डा का जवाब

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मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है। मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा था। अपने खत खरगे ने राष्ट्रपति मुर्मू से मणिपुर में तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया था। जिस पर अब बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खरगे को पत्र लिखा है।बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मणिपुर में जारी हिंसा पर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे गए पत्र की आलोचना की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी राज्य में चल रहे तनाव और अशांति के बीच इस मुद्दे को 'सनसनीखेज' बनाने की कोशिश कर रही है।

पत्र में नड्डा ने लिखा, इस साल की शुरुआत में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर में हिंसा के मुद्दे को संबोधित कर रहे थे, तब आप और आपकी पार्टी ने जिस अपमानजक और गैर-जिम्मेदाराना तरीके वॉकआउट किया था, उसे प्रत्यक्ष रूप से देखने के बाद इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को संबोधित आपका पत्र देखना मेरे लिए हैरान करने वाला है। कांग्रेस के नेताओं की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर अनगिनत अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं, फिर भी आपके पत्र को देखकर यह देखकर खुशी हुई कि आपकी पार्टी ने भारत के सर्वोच्च संविधानिक पद और उस पर बैठे प्रतिष्ठित व्यक्ति को कुछ तो सम्मान दिखाया है।

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पत्र में लिखा है कि मणिपुर अभी भी स्थानीय मुद्दों से निपटने में सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस की उस विफलता को महसूस कर रहा है। ऐसा लगता है कि आप आपकी पार्टी और कांग्रेस सरकार दोनों ने 90 के दशक में और यूपीए सरकार के समय किए गए गलत फैसलों को भूल रही है। मैं आपकी पार्टी को याद दिलाना चाहता हूं कि कांग्रेस की इस बड़ी नाकामी के परिणाम आज मणिपुर में महसूस किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस नेता ये भूल गए हैं कि उनकी सरकार ने न सिर्फ बाहरी आतंकियों के भारत में अवैध प्रवास को वैध बनाया, बल्कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने उनके साथ संधि भी की।

नड्डा ने आगे लिखा है कि कांग्रेस नेताओं का मणिपुर पर स्टैंड विदेशी और विभाजनकारी शक्तियों के गठजोड़ को मजबूती देती है। देश को कमजोर करने वाली शक्तियों के प्रयास को हम सफल नहीं होने देंगे। नड्डा ने लिखा है कि यह हमारे देश के लोगों को जानने का हक है, कि सत्ता के लिए कांग्रेस की प्यास या सावधानीपूर्वक तैयार की गई, रणनीति का हिस्सा तो नहीं?, कि लोगों को विभाजित करें और हमारे लोकतंत्र को किनारे कर दें। कांग्रेस नेताओं का यह पैटर्न विदेशी गठजोड़ का समर्थन और प्रोत्साहन करता है। जो ताकतें भारत की प्रगति को पटरी से उतारना चाहती हैं, वह वास्तव में चिंताजनक है।

नड्डा ने कहा कि केंद्र और मणिपुर सरकार हिंसा के बाद से ही हालात को नॉर्मल करने और लोगों की सुरक्षा को लेकर काम कर रही है। पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारे पूर्वोत्तर क्षेत्र ने हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा है, चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा या विकास के अवसरों तक पहुंच हो। हमारे पूर्वोत्तर में गोलीबारी और विस्फोट रोजमर्रा की बात बन गए थे,वहां देश की आजादी के बाद वहां पहली बार शांति, समृद्धि और प्रगति देखी जा रही है।

कांग्रेस में किसने कहा कि आर्टिकल 370 बहाल किया जाएगा', शाह के आरोपों पर भड़के खरगे ने कहा- बीजेपी झूठ फैला रही*
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महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव के बीच अनुच्छेद 370 का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आर्टिकल 370 पर बयान दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस दावे का विरोध किया कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने का इरादा रखती है। यही नहीं, कांग्रेस चीफ ने कहा कि बीजेपी पर समाज में विभाजन पैदा करने के लिए आर्टिकल 370 के मुद्दे को जिंदा रखने चाहती है। पुणे में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कांग्रेस और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अपशब्द कहने का आरोप लगाया। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, अमित शाह अपनी चुनावी रैलियों में कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हैं। (लेकिन) वह (खुद) कह रहे हैं कि कांग्रेस (जम्मू-कश्मीर में) अनुच्छेद 370 वापस लाना चाहती है। मुझे बताइए, यह किसने और कब कहा? आप एक मुद्दा उठा रहे हैं। अगर यह (अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का प्रस्ताव) संसद में पहले ही पारित हो चुका है, तो आप फिर से इस मुद्दे को क्यों उठा रहे हैं? खरगे ने आगे कहा कि इसका मतलब है कि आप इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं ताकि लोग बंट जाएं। अगर आप यह कहना चाहते हैं तो कश्मीर जाकर कहिए। कश्मीर में चुनाव खत्म हो चुके हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में रद्द कर दिया था। अब पिछले हफ़्ते जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र से कहा गया था कि वह पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे की बहाली के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों से बातचीत करें। कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन में है, जो जम्मू-कश्मीर में सरकार का नेतृत्व करती है। ऐसे में बीजेपी ने इस मुद्दे को जर-शोर से भुनाया है।
खरगे की खरी-खरीः 'उतनी ही गारंटी का वादा करें, जितना दे सकें...' कांग्रेस अध्यक्ष को क्यों कहना पड़ा ऐसा?

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कर्नाटक की कांग्रेस सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है। हाल ही में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का एक बयान आया था कि राज्य सरकार ‘शक्ति’ गारंटी योजना की समीक्षा करेगी। इस स्कीम के तहत राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिलती है। ऐसे में खुद कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी ही कांग्रेस सरकार की खिंचाई की है। कर्नाटक में मुफ्त बस योजना पर समीक्षा की बातों पर खरगे ने नाराजगी जताई और कहा कि उतना ही वादा कीजिए, जितनी पूरी हो जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शिवकुमार के इस बयान पर निराशा जाहिर करते हुए कहा था, आपने राज्य के लोगों को कुछ गारंटी दी हैं। उन्हें देखने के बाद मैंने भी महाराष्ट्र में कहा था कि कर्नाटक में 5 गारंटी हैं। अब आपने (शिवकुमार) कह दिया कि आप एक गारंटी छोड़ देंगे। समीक्षा की बात कहकर आपने संदेह पैदा कर दिया है। मैंने उनसे (महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं) कहा कि पांच, छह, सात या आठ गारंटी के वादे मत करते रहो। इसके बजाय ऐसे वादे करो जो आपके बजट के अनुरूप हों। जो लोग आलोचना करना चाहते हैं, उनके लिए इतना ही काफी है। उन्होंने सिद्धारमैया सरकार को अपने वादों पर कायम रहने की हिदायत दी।

खड़ने ने पार्टी नेताओं को चेताया और कहा, यदि आप बजट पर विचार किए बिना वादे करते हैं तो यह दिवालियापन की ओर ले जाएगा।सड़कों पर रेत डालने के भी पैसे नहीं होंगे। अगर यह सरकार असफल हुई तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।इससे बदनामी होगी और सरकार को अगले दस वर्षों तक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए बजट पर सावधानी से विचार करने की जरूरत है।

खरगे के बयान पर बीजेपी ने घेरा

अब खरगे के इसी बयान को भाजपा ने हाथों-हाथ लपका है। नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने खरगे की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि पहली बार कांग्रेस ने यह स्वीकार किया है कि उसकी चुनावी घोषणाएं, जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए होती हैं।

राहुल गांधी के खटाखट योजनाओं का क्या होगा-रविशंकर

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि खरगे साहब को बहुत ज्ञान आ गया है। बहुत कुछ स्वीकार किया है। मन में सवाल आया। पहला पाठ अपने नेता राहुल गांधी को पढ़ाया कि नहीं, गभीर सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी के खटाखट योजनाओं का क्या होगा। राहुल गांधी ने हिमाचल में क्या क्या बोला था, अब देखिये क्या हाल हुआ है। टॉयलेट टैक्स लगा दिया और अब वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं।

एक बार फिर कांग्रेस की कलई खुल गई-रविशंकर

कर्नाटक की तरह हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में कांग्रेस के घोषित चुनावी गारंटियों का जिक्र करते हुए प्रसाद ने कहा, पहले घोषणा करके फिर शुद्ध भाषा में जनता को बेवकूफ बनाकर वोट लेना। बाद में उस योजना को जमीन पर नहीं उतारना। बस, कागज पर ही रहने देना। कांग्रेस का यह आज का इतिहास नहीं है। गरीबी हटाओ की घोषणा कांग्रेस राज में 1971 में की गई थी। गरीबी हटी क्या? घोषणा करो, कोई पूछने वाला नहीं है। एक बार फिर कांग्रेस की कलई खुल गई है और उसकी सच्चाई सामने आ गई है।

कांग्रेस ने किया खड़गे का अपमान! प्रियंका गांधी के नामांकन के दौरान कहां से पार्टी प्रमुख, बीजेपी ने शेयर किया वीडियो

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प्रियंका गांधी ने बुधवार को केरल की वायनाड लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल किया। बुधवार को उनके नॉमिनेशन के लिए भव्य तैयारियां की गईं। कांग्रेस के सभी दिग्गज और राष्ट्रीय स्तर के सीनियर नेता शामिल हुए। हालांकि, नामांकन के दौरान का एक वीडियो बीजेपी ने शेयर किया है और कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है।मल्लिकार्जुन खरगे नॉमिनेशन के दौरान गेट के बाहर से झांकते नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें अंदर एंट्री नहीं दी गई। बीजेपी अब इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा रही है। उन्होंने कहा कि खरगे को नामांकन प्रक्रिया से बाहर इसलिए रखा गया क्योंकि वह दलित हैं।

भाजपा ने अपने सोशल मीडिया पर हैंडल पर एक वीडियो जारी की है। जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कमरे के बाहर इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में भाजपा ने लिखा कि 'आज जिस तरह से मल्लिकार्जुन खरगे जी को प्रियंका वाड्रा के नामांकन के समय कमरे से बाहर रखा गया, ठीक उसी तरह राहुल गांधी आरक्षण हटाने के बाद दलित समाज के लोगों को सम्मान और अवसरों से वंचित रखेंगे। अगर गांधी परिवार खरगे जी को ऐसे अपमानित कर सकता है तो दलित समाज के प्रति इनके मन में कितनी घृणा होगी, ये समझा जा सकता है।'

कांग्रेस पर दलितों के प्रति नफरत रखने का आरोप

वीडियो में खड़गे को उस कमरे के बाहर इंतजार करते हुए दिखाया गया है, जहां प्रियंका गांधी वायनाड उपचुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर रही थीं, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अनादर करने का आरोप लगाया है। वीडियो को कई भाजपा नेताओं के साथ-साथ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी साझा किया और कांग्रेस पर दलितों के प्रति नफरत रखने का आरोप लगाया।

हिमंत बिस्व सरमा बोले- बेहद निराशाजनक

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, 'वायनाड में आज तथाकथित होली ट्रिनिटी के मल्लिकार्जुन खरगे जैसे अनुभवी सांसद और दलित नेता के प्रति दिखाए गए अनादर को देखना बेहद निराशाजनक है। चाहे वह एआईसीसी का अध्यक्ष हो या पीसीसी, क्या परिवार उन लोगों को अपमानित करने में गर्व महसूस करता है जिन्हें वे केवल रबर स्टैंप मानते हैं?'

कांग्रेस का पलटवार

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस नेता प्रणव झा ने कहा कि 'ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि जो लोग बीते 10 वर्षों से सत्ता में हैं, वो सरकार और उसके मंत्री अभी भी झूठ और भ्रम फैला रहे हैं। वायनाड में जिलाधिकारी ने कहा था कि नियमों के तहत पांच से ज्यादा लोग कमरे में नहीं रह सकते। उस दौरान लोग कमरे से बाहर गए और उनमें कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पूरे धैर्य से बाहर इंतजार किया, जैसा आप वीडियो में देख सकते हैं। कुछ समय बाद मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल दोनों कमरे में आ गए थे, लेकिन भाजपा ने कांग्रेस को बदनाम करने और लोगों का असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए झूठ की साजिश रची।'

हरियाणा में हार के बाद एक्शन में कांग्रेस, मल्लिकार्जुन खरगे ने हुड्डा-गहलोत से बाबरिया तक को किया तलब!

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हरियाणा में कांग्रेस बुरी तरह हार गई है। हार के लिए मुख्य रूप से कुमारी सैलजा और भूपिंदर सिंह हुड्डा को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।हरियाणा में हार और सहयोगियों के वार के बाद कांग्रेस एक्शन में है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हार की समीक्षा को लेकर आज बड़ी बैठक बुलाई है।इस बैठक में पहले भूपेन्द्र हुड्डा, पर्यवेक्षक अशोक गहलोत, अजय माकन, प्रताप सिंह बाजवा, प्रभारी दीपक बाबरिया, प्रदेश अध्यक्ष उदय भान शामिल होंगे. राहुल गांधी भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। हरियाणा को लेकर खरगे द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में सैलजा और सुरजेवाला को पहले नहीं बुलाया गया है। इन नेताओं को बाद में बुलाया जा सकता है।

चुनाव से पहले यह तय माना जा रहा था कि हरियाणा में इस बार कांग्रेस की वापसी होगी. एग्जिट पोल के सर्वे ने इस अनुमान को थोड़ा और पुख्ता कर दिया. सर्वे के बाद से हरियाणा कांग्रेस में जबरदस्त उत्साह थी. कांग्रेस वाले इस बात को तय मान चुके थे कि 10 साल बाद प्रदेश में उसकी वापसी हो रही है. कोई भी ऐसा सर्वे नहीं था जिसमें कांग्रेस हारती हुई दिख रही थी लेकिन जब नतीजे आए तो सारे सर्वे फेल हो गए. बीजेपी को हरियाणा में ऐतिहासिक जीत मिली. बीजेपी ने प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाई।

जानकारों के अनुसार, कांग्रेस की अंदरूनी कलह, मौजूदा विधायकों पर अत्यधिक निर्भरता और बागियों की वजह से कांग्रेस एक दशक के बाद हरियाणा में वापसी करने में विफल रही। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा की खींचतान से बीजेपी को बड़ा फायदा मिला। टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक कांग्रेस बंटी नजर आ रही थी। कांग्रेस तीन खेमों में बंट गई थी। इसमें एक खेमा पूर्व सीएम हुड्डा का था तो दूसरा कुमारी सैलजा और तीसरा रणदीप सुरजेवाला का था।

सैलजा-हुड्डा के अलावा इन 4 दिग्गजों का भी हार में हाथ!

सैलजा और हुड्डा के अलावा कांग्रेस के भीतर 4 ऐसे भी दिग्गज हैं, जिनके ऊपर हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन जिस तरह से पार्टी की हार हुई है, उससे कहा जा रहा है कि इन नेताओं की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

1. दीपक बाबरिया- जून 2023 में शक्ति सिंह गोहिल के गुजरात जाने के बाद दीपक बाबरिया को हरियाणा कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया। प्रभारी महासचिव बनने के बाद बाबरिया न तो हरियाणा में कांग्रेस की संगठन तैयार कर पाए और न ही गुटबाजी खत्म कर पाए। इतना ही नहीं, बाबरिया के बयान ने ही कई बार कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी।

2. अजय माकन- कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अजय माकन हरियाणा चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख थे। कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण का काम स्क्रीनिंग कमेटी के पास ही है। कांग्रेस का टिकट वितरण पूरे चुनाव के दौरान विवादों में रहा। आरोप है कि टिकट वितरण में सिर्फ हुड्डा गुट को तरजीह मिली। 89 टिकट में से 72 टिकट कांग्रेस में हुड्डा समर्थकों को दे दी गई। टिकट वितरण के बाद कुमारी सैलजा नाराज होकर प्रचार से दूर हो गई। सैलजा की नाराजगी रिजल्ट पर भी दिखा है।

यही नहीं, राहुल गांधी के कहने पर जब कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन की कवायद शुरू की तो अजय माकन और हुड्डा इसके विरोध में थे। माकन दिल्ली की राजनीति की वजह से शुरू से ही अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी का विरोध कर रहे हैं।

3. अशोक गहलोत- राजस्थान से दिल्ली की तरफ लौटे अशोक गहलोत को कांग्रेस ने हरियाणा का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया था। कांग्रेस के भीतर पर्यवेक्षक का काम सभी को साथ लेकर चलना, क्राइसिस मैनेजमेंट करना और ग्राउंड की रिपोर्ट से हाईकमान को अवगत कराना होता है। अशोक गहलोत पूरे चुनाव में क्राइसिस मैनेज नहीं कर पाए। कांग्रेस के 29 बागी मैदान में उतर गए, जिसमें से एकाध बागी को ही कांग्रेस मना पाई। अंबाला और जींद में तो कांग्रेस के बागी ने ही पार्टी का खेल खराब कर दिया।

गहलोत पर्यवेक्षक थे, लेकिन सार्वजनिक तौर पर सैलजा और हुड्डा की लड़ाई को रोक नहीं पाए। सैलजा ने आखिर दिन तक मीडिया को इंटरव्यू दिया और हर इंटरव्यू में सीएम पद देने की मांग उठाई.

4. सुनील कनुगोलू-अगस्त 2022 में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल होने वाले सुनील कनुगोलू हरियाणा में कांग्रेस की रणनीति देख रहे थे। कहा जाता है कि हरियाणा मांगे हिसाब पदयात्रा का रोडमैप भी कनुगोलू की टीम ने ही तैयार किया था। कनुगोलू के सर्वे को आधार बनाकर ही हुड्डा कैंप ने कई बड़े फैसले हाईकमान से करवाए।

हालांकि, कनुगोलू बीजेपी की रणनीति को समझने में फेल रहे। जमीन पर जिस तरह से बीजेपी ने जाट वर्सेज गैर जाट का फॉर्मूला तैयार किया, उसे भी कनुगोलू की टीम काउंटर नहीं कर पाए।