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राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका, 37 सीटों में से 22 पर एनडीए का कब्जा

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राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए सोमवार के हुए चुनावों के नतीजों ने विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी को बड़ी टेंशन दे दी है। कुल 10 राज्यों में हुई इस चुनाव प्रक्रिया में 26 सीटें पहले ही निर्विरोध तय हो चुकी थीं, जबकि तीन राज्यों बिहार, ओडिशा, और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार मतदान कराया गया। इन 11 सीटों में से 9 पर एनडीए ने कब्जा कर लिया।

11 सीटों में से 9 एनडीए के खाते में

राज्यसभा के चुनाव के लिए सोमवार को तीन राज्यों ओडिशा, हरियाणा और बिहार की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें ओडिशा में दो बीजेपी और एक बीजेपी समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार और एक बीजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बिहार की सभी पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। जिसमें से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली।

बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस बार देशभर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में भाजपा के सात, कांग्रेस के पांच, तृणमूल कांग्रेस के चार, डीएमके के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना, आरपीआई (ए), एनसीपी, एनसीपी (एसपी), एआईएडीएमके, पीएमके और यूपीपीएल के एक-एक उम्मीदवार भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंच चुके हैं। इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म, महागठबंधन के चार MLA ने नहीं किया मतदान

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बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुका है। शाम 4 बजे तक वोटिंग का समय था, लेकिन विपक्ष के चार विधायक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें तीन कांग्रेस के विधायक और एक आरजेडी का विधायक शामिल है। वहीं, एनडीए के सभी 202 विधायक ने अपना मतदान पूरा कर लिया। इससे महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने डाला वोट

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने अपना मतदान पूरा कर लिया है, जबकि महागठबंधन की ओर से अब तक सिर्फ 37 विधायकों ने ही वोट डाला है। महागठबंधन के चार विधायक अभी तक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें आरजेडी के फैसल रहमान के अलावा कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज बिश्वास शामिल हैं। इनकी अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन में कोई अंदरूनी खींचतान चल रही है।

चार वोट नहीं मिलने से महागठबंधन को हो गया नुकसान

बिहार राज्यसभा में 5 सीटों के लिए मतदान हुआ। पेंच पांचवीं सीट को लेकर ही फंसा हुआ है। इस सीट पर एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के अमरेंद्र सिंह धारी के बीच मुकाबला था। महागठबंधन के 4 विधायकों के वोट नहीं डालने के कारण पूरा समीकरण ही बदल गया है। क्रॉस वोटिंग तो नहीं हुई लेकिन मतदान से दूर रहने का सीधा फायदा एनडीए को होगा। एनडीए के खाते में बिहार की पांचों सीटें आ जाएंगी।

एनडीए का तेजस्वी यादव पर हमला

राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है। तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा और कहा कि उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी और अपनी राजनीति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एनडीए राज्यसभा की सभी पांच सीट पर जीत हासिल करेगा।

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पत्रकारों से कहा, एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीतेंगे। विपक्षी दल क्या दावा कर रहे हैं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।

राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान जारी, बिहार पर टिकी सबकी नजर

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तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान है। जिनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इस चुनाव में देश की राजनीति के हालात पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के समीकरण सीधे केंद्र की नीतियों और विधायी शक्ति पर असर डालते हैं। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं।

इस बार बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में दिलचस्प मुकाबला दिख रहा है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन इन सभी 5 सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। एनडीए की ओर से प्रमुख उम्मीदवारों में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार, बीजेपी नेता नितिन नवीन और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (जेडीयू) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार भी मैदान में हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए समर्थन जुटाने में जुटा है।

ओडिशा की चार सीटों पर मुकाबला

ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है और बीजेडी एक सीट। ऐसे में मुकाबला चौथे सीट को लेकर तेज हो गया है। इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक सदस्य सीपीआई (एम) का है। चुनाव का समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो सत्ताधारी भाजपा और न ही मुख्य विपक्षी बीजद के पास चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक संख्या है। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

हरियाणा में मुकाबला दिलचस्प

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव मैदान में हैं। राज्यसभा पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत है।

शरद पवार, अठावले और सिंघवी समेत 26 नेता निर्विरोध पहुंचे राज्यसभा, अब 11 सीटों पर मुकाबला

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दस राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। अबबिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

इन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

महाराष्ट्र (7)

• शरद पवार (एनसीपी)

• रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)

• विनोद तावड़े (बीजेपी)

• रामराव वडुकुटे (बीजेपी)

• माया इवनाते (बीजेपी)

• ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)

• पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

• तिरुची शिवा (डीएमके)

• जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (डीएमके)

• एम थंबीदुरई (एआईएडीएमके)

• अंबुमणि रामदास (पीएमके)

• एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)

• एल के सुदीश (डीएमडीके)

पश्चिम बंगाल (5)

• राहुल सिन्हा (बीजेपी)

• बाबुल सुप्रियो (टीएमसी)

• पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (टीएमसी)

• सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (टीएमसी)

• कोएल मलिक (टीएमसी)

असम (3)

• जोगेन मोहन (भाजपा)

• तेरोस गोवाला (भाजपा)

• प्रमोद बोरो (यूपीपीएल)

तेलंगाना (2)

• अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)

• वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

• लक्ष्मी वर्मा (भाजपा)

• फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

• अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

किन राज्यों की कितनी सीटों पर होगा चुनाव?

37 में से 26 निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब 11 सीटों पर चुनाव होगा। इन सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान किया जाएगा।

सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की

बाकी बचे सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की हैं। दरअसल बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन चुनावों में राज्यसभा के लिए चुने जाने की संभावना है। बिहार की पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। पांचवीं सीट पर आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के एडी सिंह के बीच टक्कर होगी। वहीं बिहार विधानसभा में विधायकों के गणित के हिसाब से सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राज्यसभा जाना भी सुनिश्चित है। इसके अलावा जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और बीजेपी के शिवेश कुमार का भी राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन, अमित शाह की मौजूदगी में भरा पर्चा

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की सत्ता छोड़कर दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं। नीतीश कुमार ने आज राज्य सभा चुनाव के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर फाइल कर दिया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन पर्चा दाखिल किया है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचे थे।

एक ही गाड़ी से विधानसभा पहुंचे

पटना स्थित विधानमंडल परिसर में उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा नामांकन के मौके पर तीनों दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। खास बात यह रही कि अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन एक ही गाड़ी से बिहार विधानसभा पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। इस दौरान जदयू और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

नामांकन से पहले अमित शाह के साथ बैठक

राज्य सभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में पहले से ही हलचल थी। ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का पटना दौरा इस चर्चा को और तेज कर गया। गुरुवार सुबह अमित शाह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया और उन्हें शॉल भेंट किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य सभा चुनाव के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

भाजपा-जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर मंथन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एनडीए के अंदर नए सत्ता समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर विचार चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन की बैठक में बिहार की भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी बातचीत हुई है। हालांकि इस बैठक में क्या फैसला हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

नीतीश कुमार ने खुद दी राज्यसभा वाली जानकारी

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज घोषणा की कि वो राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। साथ ही उन्होंने ये बी भरोसा दिलाया कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।

राज्यसभा जा रहे नीतीश कुमार, खुद ट्वीट कर किया कन्फर्म, बोले- नई सरकार को मेरा सहयोग रहेगा

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बिहार की सियासत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर हैं। पिछले दो दशक तक बिहार की सत्ता का केन्द्र रहे नीतीश कुमार ने दिल्ली रूख करने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ बिहार में अब बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है।

नीतीश कुमार ने का राज्यसभा जाने का ऐलान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से राज्यसभा जाने की पुष्टि कर दी। उन्होंने कहा कि “पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।”

राज्यसभा जाने की जताई इच्छा

अपने संसदीय जीवन की शुरुआत को याद करते हुए नीतीश ने कहा, “राजनीति में आने के समय से ही उनके मन में एक इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी क्रम में इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं।”

बिहार के विकास और प्रगति का संकल्प जारी रहेगा-नीतीश

नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में यह भी भरोसा दिलाया कि राज्यसभा जाने के बाद भी जनता के साथ उनका संबंध पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि “बिहार के विकास और प्रगति के लिए उनका संकल्प पहले की तरह जारी रहेगा और राज्य की जनता के साथ मिलकर विकसित बिहार के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।”

नई सरकार में सहयोग का दिया भरोसा

नीतीश कुमार ने आगे कहा कि “बिहार में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।” उनके इस ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि उनके राज्यसभा जाने के फैसले से राज्य की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।”

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा? बिहार को मिल सकता है पहला भाजपाई सीएम

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बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। पिछले 21 वर्षों से सूबे की सत्ता के केंद्र रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का मन बना लिया है।बिहार के सीएम नीतीश कमार आज सुबह 11 बजे राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नीतीश का दिल्ली जाना लगभग तय

बुधवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कद्दावर नेता विजय चौधरी मौजूद रहे। बैठक के बाद विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है, लेकिन उनका दिल्ली जाना लगभग तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे समर्थक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैलते ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अपने नेता के दिल्ली जाने की चर्चाओं से व्याकुल और भावुक कार्यकर्ता धीरे-धीरे मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे हैं, जिसके चलते इलाके में हलचल और पुलिस की चौकसी दोनों बढ़ गई है। हुए प्रशासन ने ‘एक अणे मार्ग’ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनी रहे। 

पटना पहुंचे विधायक और बड़े नेता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने जेडीयू के भीतर भारी हलचल पैदा कर दी है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते पार्टी के तमाम विधायक और बड़े नेताओं को आपात स्थिति में पटना तलब किया गया है।

बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा?

नीतीश कुमार अगर राज्यसभा जाते हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न ये होगा कि बाहिर का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सूत्रों के मुताबिक अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है।

बदलेगी बीजेपी और जदयू की भूमिका?

बिहार में सियासी सरगर्मी के बीच वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त ही सबकुछ तय हो चुका था। लेकिन चुनाव में नीतीश कुमार के नाम पर ही एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी, इसलिए उन्हें 10वीं बार सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई। लेकिन अब पावर ट्रांसफर की तैयारी पूरी हो चुकी है।नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए जाने के बाद बिहार में बीजेपी और जदयू की भूमिका पूरी तरह से बदल सकती है। अभी नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी कोटे से दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन किसी बीजेपी नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा, जानें कब वोटिंग और रिजल्ट?

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राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीकों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने आज यानी बुधवार को 10 राज्यों की राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली होने वाली हैं और 10 राज्यों से जुड़ी हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी शाम मतगणना की जाएगी।

चुनाव 16 मार्च को

चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि 10 राज्यों में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होंगे। 37 सीटों के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। अप्रैल महीने की अलग-अलग तारीखों पर कई सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 5 मार्च नामांकन भरने की आखिरी तारीख होगी। 9 मार्च तक कैंडिडेट अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। 16 मार्च को सुबह 9 से 4 के बीच वोटों की गिनती होगी और उसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी।

किन राज्यों की है ये सीटें?

बता दें कि 10 राज्यों से राज्यसभा की कुल 37 सीटें खाली हो रही है। जिसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की सात है। वहीं तमिलनाडु की 6, ओडिशा की 4, पश्चिम बंगाल की 5, असम की 3, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 2, तेलंगाना की 2 और हिमाचल प्रदेश की एक सीट खाली हो रही है।

किस पार्टी के पास कितनी सीट?

छत्तीसगढ़ में जो सीट खाली हो रही है उसमें 1-1 बीजेपी और कांग्रेस के पास है। वहीं बिहार में 2 राजद, 1 जदयू और 1 राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास है। हरियाणा की दोनों सीटों बीजेपी के पास हैं। उधर, महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी से 1, एनसीपी 1, कांग्रेस से 1, शरद गुट वाली एनसीपी से 1 और आरपीआई के पास 1 सीट है। इसके साथ ही हिमाचल में खाली हो रही सीट बीजेपी के पास है।

2020 में एनडीए का रहा दबदबा

2020 में जब इन सीटों पर चुनाव हुआ था तब बीजेपी और उसके सहयोगियों ने असम, बिहार, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों में अच्छी बढ़त हासिल की थी। महाराष्ट्र में सीटें अविभाजित शिवसेना, अविभाजित एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटी थीं। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अधिकतर सीटें जीतीं। वहीं बंगाल में टीएमसी का दबदबा बना रहा। इस बार समीकरण अलग हैं और कई सांसदों के भविष्य पर सवालिया निशान है। शरद पवार ने पहले संन्यास के संकेत दिए थे लेकिन अब माना जा रहा है कि वह दोबारा राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। वहीं प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर भी सवाल है। ओडिशा में बीजू जनता दल के कमजोर होने के बाद अलग समीकरण हैं।

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित हुआ जी राम जी बिल, विरोध में देर रात विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

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लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी ‘द विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) 2025' यानी वीबी-जी राम जी बिल को पारित हो गया है। ये बिल 20 साल पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेगा। ये बिल हर साल 125 दिन के ग्रामीण रोजगार की गारंटी देगा। वहीं, विपक्ष ने बिल को लेकर जमकर हंगामा किया।

विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से किया वॉकआउट

बिल पास होने के दौरान विपक्ष के कई सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया, बिल वापस लेने की मांग की और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने बिल के पन्ने भी फाड़ दिए, जिस पर चेयरमैन सी पी राधाकृष्णन ने उन्हें ट्रेजरी बेंच की तरफ न जाने की चेतावनी दी।

संसद परिसर में धरना

सदन के भीतर विरोध के बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर स्थित संविधान सदन के बाहर धरना दिया। विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति को भेजा जाए, ताकि इसकी गहराई से जांच हो सके। विपक्ष का कहना है कि बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के इस तरह का बड़ा बदलाव ग्रामीण गरीबों के हित में नहीं है।

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन ने इस विधेयक पर विपक्ष के कई सदस्यों की ओर से लाये गये संशोधन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम बनने से लेकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं बनती रही हैं। उन्होंने कहा कि इनसे उद्देश्य पूरा नहीं होता या थोड़ा ही लक्ष्य पूरा होता है तो नयी योजनाएं लाई जाती हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को लागू करने और विकसित गांव की बुनियाद पर विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।

Parvathy Ananthanarayanan Mangala: Spreading Ancient Wisdom for Modern Living

In the sacred city of Ayodhya, where timeless wisdom meets modern aspiration, Parvathy Ananthanarayanan Mangala is crafting a unique literary legacy through her initiative, Ram SwaRajya Library. A writer, thinker, and believer in the transformative power of spirituality, Parvathy has dedicated herself to bridging the gap between ancient Indian values and contemporary life.Through her collection of short spiritual fiction books, written under the pen name Ram SwaRajya, she weaves stories that draw inspiration from Lord Rama’s ideals of truth, compassion, and righteousness. Each story — designed to be read in just 15 to 20 minutes — offers readers a spark of inspiration, reminding them that age-old wisdom still holds the key to peace and purpose in the 21st century.

The vision behind the Ram SwaRajya Library was born from Parvathy’s personal journey through emotional pain and resilience. Despite facing misunderstandings and life’s challenges, she chose not to surrender but to transform her experiences into meaningful stories that could uplift others walking similar paths. Her goal is simple yet profound: to make spirituality accessible and relevant to everyone, regardless of age or background.

Parvathy’s journey is one of courage and conviction. Leaving behind her home in Dombivli, Maharashtra, she moved to Ayodhya in July 2025, funding her dream entirely through personal savings, credit loans, and the generosity of a few well-wishers. In just 60 days, she wrote 11 books, two of which are already available on Amazon. Her dedication stands as a powerful example of what faith and determination can achieve.

Digital technology, including tools like WhatsApp, online publishing, and AI, played a vital role in turning her vision into reality—proving how tradition and technology can coexist harmoniously for a greater purpose.

Looking ahead, Parvathy envisions expanding the Ram SwaRajya Library to include 1,000 books that celebrate Indian culture, spirituality, and human values. Her mission is not just to write books but to build a global repository of wisdom that inspires readers to live more meaningful, compassionate lives.

In every sense, Parvathy’s work embodies the essence of humanity—using words as her instrument to heal, inspire, and elevate the collective consciousness of society.

Readers can visit this link to know about her initiative -

www.wiseom.co.in/2025/10/welcome-to-ram-swarajya-library-journey.html

राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका, 37 सीटों में से 22 पर एनडीए का कब्जा

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राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए सोमवार के हुए चुनावों के नतीजों ने विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी को बड़ी टेंशन दे दी है। कुल 10 राज्यों में हुई इस चुनाव प्रक्रिया में 26 सीटें पहले ही निर्विरोध तय हो चुकी थीं, जबकि तीन राज्यों बिहार, ओडिशा, और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार मतदान कराया गया। इन 11 सीटों में से 9 पर एनडीए ने कब्जा कर लिया।

11 सीटों में से 9 एनडीए के खाते में

राज्यसभा के चुनाव के लिए सोमवार को तीन राज्यों ओडिशा, हरियाणा और बिहार की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें ओडिशा में दो बीजेपी और एक बीजेपी समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार और एक बीजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बिहार की सभी पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। जिसमें से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली।

बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस बार देशभर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में भाजपा के सात, कांग्रेस के पांच, तृणमूल कांग्रेस के चार, डीएमके के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना, आरपीआई (ए), एनसीपी, एनसीपी (एसपी), एआईएडीएमके, पीएमके और यूपीपीएल के एक-एक उम्मीदवार भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंच चुके हैं। इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म, महागठबंधन के चार MLA ने नहीं किया मतदान

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बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुका है। शाम 4 बजे तक वोटिंग का समय था, लेकिन विपक्ष के चार विधायक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें तीन कांग्रेस के विधायक और एक आरजेडी का विधायक शामिल है। वहीं, एनडीए के सभी 202 विधायक ने अपना मतदान पूरा कर लिया। इससे महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने डाला वोट

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने अपना मतदान पूरा कर लिया है, जबकि महागठबंधन की ओर से अब तक सिर्फ 37 विधायकों ने ही वोट डाला है। महागठबंधन के चार विधायक अभी तक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें आरजेडी के फैसल रहमान के अलावा कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज बिश्वास शामिल हैं। इनकी अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन में कोई अंदरूनी खींचतान चल रही है।

चार वोट नहीं मिलने से महागठबंधन को हो गया नुकसान

बिहार राज्यसभा में 5 सीटों के लिए मतदान हुआ। पेंच पांचवीं सीट को लेकर ही फंसा हुआ है। इस सीट पर एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के अमरेंद्र सिंह धारी के बीच मुकाबला था। महागठबंधन के 4 विधायकों के वोट नहीं डालने के कारण पूरा समीकरण ही बदल गया है। क्रॉस वोटिंग तो नहीं हुई लेकिन मतदान से दूर रहने का सीधा फायदा एनडीए को होगा। एनडीए के खाते में बिहार की पांचों सीटें आ जाएंगी।

एनडीए का तेजस्वी यादव पर हमला

राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है। तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा और कहा कि उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी और अपनी राजनीति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एनडीए राज्यसभा की सभी पांच सीट पर जीत हासिल करेगा।

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पत्रकारों से कहा, एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीतेंगे। विपक्षी दल क्या दावा कर रहे हैं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।

राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान जारी, बिहार पर टिकी सबकी नजर

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तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान है। जिनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इस चुनाव में देश की राजनीति के हालात पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के समीकरण सीधे केंद्र की नीतियों और विधायी शक्ति पर असर डालते हैं। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं।

इस बार बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में दिलचस्प मुकाबला दिख रहा है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन इन सभी 5 सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। एनडीए की ओर से प्रमुख उम्मीदवारों में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार, बीजेपी नेता नितिन नवीन और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (जेडीयू) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार भी मैदान में हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए समर्थन जुटाने में जुटा है।

ओडिशा की चार सीटों पर मुकाबला

ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है और बीजेडी एक सीट। ऐसे में मुकाबला चौथे सीट को लेकर तेज हो गया है। इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक सदस्य सीपीआई (एम) का है। चुनाव का समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो सत्ताधारी भाजपा और न ही मुख्य विपक्षी बीजद के पास चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक संख्या है। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

हरियाणा में मुकाबला दिलचस्प

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव मैदान में हैं। राज्यसभा पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत है।

शरद पवार, अठावले और सिंघवी समेत 26 नेता निर्विरोध पहुंचे राज्यसभा, अब 11 सीटों पर मुकाबला

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दस राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। अबबिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

इन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

महाराष्ट्र (7)

• शरद पवार (एनसीपी)

• रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)

• विनोद तावड़े (बीजेपी)

• रामराव वडुकुटे (बीजेपी)

• माया इवनाते (बीजेपी)

• ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)

• पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

• तिरुची शिवा (डीएमके)

• जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (डीएमके)

• एम थंबीदुरई (एआईएडीएमके)

• अंबुमणि रामदास (पीएमके)

• एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)

• एल के सुदीश (डीएमडीके)

पश्चिम बंगाल (5)

• राहुल सिन्हा (बीजेपी)

• बाबुल सुप्रियो (टीएमसी)

• पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (टीएमसी)

• सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (टीएमसी)

• कोएल मलिक (टीएमसी)

असम (3)

• जोगेन मोहन (भाजपा)

• तेरोस गोवाला (भाजपा)

• प्रमोद बोरो (यूपीपीएल)

तेलंगाना (2)

• अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)

• वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

• लक्ष्मी वर्मा (भाजपा)

• फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

• अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

किन राज्यों की कितनी सीटों पर होगा चुनाव?

37 में से 26 निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब 11 सीटों पर चुनाव होगा। इन सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान किया जाएगा।

सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की

बाकी बचे सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की हैं। दरअसल बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन चुनावों में राज्यसभा के लिए चुने जाने की संभावना है। बिहार की पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। पांचवीं सीट पर आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के एडी सिंह के बीच टक्कर होगी। वहीं बिहार विधानसभा में विधायकों के गणित के हिसाब से सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राज्यसभा जाना भी सुनिश्चित है। इसके अलावा जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और बीजेपी के शिवेश कुमार का भी राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन, अमित शाह की मौजूदगी में भरा पर्चा

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की सत्ता छोड़कर दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं। नीतीश कुमार ने आज राज्य सभा चुनाव के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर फाइल कर दिया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन पर्चा दाखिल किया है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचे थे।

एक ही गाड़ी से विधानसभा पहुंचे

पटना स्थित विधानमंडल परिसर में उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा नामांकन के मौके पर तीनों दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। खास बात यह रही कि अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन एक ही गाड़ी से बिहार विधानसभा पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। इस दौरान जदयू और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

नामांकन से पहले अमित शाह के साथ बैठक

राज्य सभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में पहले से ही हलचल थी। ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का पटना दौरा इस चर्चा को और तेज कर गया। गुरुवार सुबह अमित शाह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया और उन्हें शॉल भेंट किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य सभा चुनाव के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

भाजपा-जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर मंथन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एनडीए के अंदर नए सत्ता समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर विचार चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन की बैठक में बिहार की भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी बातचीत हुई है। हालांकि इस बैठक में क्या फैसला हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

नीतीश कुमार ने खुद दी राज्यसभा वाली जानकारी

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज घोषणा की कि वो राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। साथ ही उन्होंने ये बी भरोसा दिलाया कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।

राज्यसभा जा रहे नीतीश कुमार, खुद ट्वीट कर किया कन्फर्म, बोले- नई सरकार को मेरा सहयोग रहेगा

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बिहार की सियासत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर हैं। पिछले दो दशक तक बिहार की सत्ता का केन्द्र रहे नीतीश कुमार ने दिल्ली रूख करने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ बिहार में अब बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है।

नीतीश कुमार ने का राज्यसभा जाने का ऐलान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से राज्यसभा जाने की पुष्टि कर दी। उन्होंने कहा कि “पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।”

राज्यसभा जाने की जताई इच्छा

अपने संसदीय जीवन की शुरुआत को याद करते हुए नीतीश ने कहा, “राजनीति में आने के समय से ही उनके मन में एक इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी क्रम में इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं।”

बिहार के विकास और प्रगति का संकल्प जारी रहेगा-नीतीश

नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में यह भी भरोसा दिलाया कि राज्यसभा जाने के बाद भी जनता के साथ उनका संबंध पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि “बिहार के विकास और प्रगति के लिए उनका संकल्प पहले की तरह जारी रहेगा और राज्य की जनता के साथ मिलकर विकसित बिहार के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।”

नई सरकार में सहयोग का दिया भरोसा

नीतीश कुमार ने आगे कहा कि “बिहार में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।” उनके इस ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि उनके राज्यसभा जाने के फैसले से राज्य की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।”

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा? बिहार को मिल सकता है पहला भाजपाई सीएम

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बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। पिछले 21 वर्षों से सूबे की सत्ता के केंद्र रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का मन बना लिया है।बिहार के सीएम नीतीश कमार आज सुबह 11 बजे राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नीतीश का दिल्ली जाना लगभग तय

बुधवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कद्दावर नेता विजय चौधरी मौजूद रहे। बैठक के बाद विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है, लेकिन उनका दिल्ली जाना लगभग तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे समर्थक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैलते ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अपने नेता के दिल्ली जाने की चर्चाओं से व्याकुल और भावुक कार्यकर्ता धीरे-धीरे मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे हैं, जिसके चलते इलाके में हलचल और पुलिस की चौकसी दोनों बढ़ गई है। हुए प्रशासन ने ‘एक अणे मार्ग’ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनी रहे। 

पटना पहुंचे विधायक और बड़े नेता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने जेडीयू के भीतर भारी हलचल पैदा कर दी है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते पार्टी के तमाम विधायक और बड़े नेताओं को आपात स्थिति में पटना तलब किया गया है।

बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा?

नीतीश कुमार अगर राज्यसभा जाते हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न ये होगा कि बाहिर का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सूत्रों के मुताबिक अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है।

बदलेगी बीजेपी और जदयू की भूमिका?

बिहार में सियासी सरगर्मी के बीच वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त ही सबकुछ तय हो चुका था। लेकिन चुनाव में नीतीश कुमार के नाम पर ही एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी, इसलिए उन्हें 10वीं बार सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई। लेकिन अब पावर ट्रांसफर की तैयारी पूरी हो चुकी है।नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए जाने के बाद बिहार में बीजेपी और जदयू की भूमिका पूरी तरह से बदल सकती है। अभी नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी कोटे से दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन किसी बीजेपी नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा, जानें कब वोटिंग और रिजल्ट?

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राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीकों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने आज यानी बुधवार को 10 राज्यों की राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली होने वाली हैं और 10 राज्यों से जुड़ी हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी शाम मतगणना की जाएगी।

चुनाव 16 मार्च को

चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि 10 राज्यों में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होंगे। 37 सीटों के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। अप्रैल महीने की अलग-अलग तारीखों पर कई सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 5 मार्च नामांकन भरने की आखिरी तारीख होगी। 9 मार्च तक कैंडिडेट अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। 16 मार्च को सुबह 9 से 4 के बीच वोटों की गिनती होगी और उसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी।

किन राज्यों की है ये सीटें?

बता दें कि 10 राज्यों से राज्यसभा की कुल 37 सीटें खाली हो रही है। जिसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की सात है। वहीं तमिलनाडु की 6, ओडिशा की 4, पश्चिम बंगाल की 5, असम की 3, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 2, तेलंगाना की 2 और हिमाचल प्रदेश की एक सीट खाली हो रही है।

किस पार्टी के पास कितनी सीट?

छत्तीसगढ़ में जो सीट खाली हो रही है उसमें 1-1 बीजेपी और कांग्रेस के पास है। वहीं बिहार में 2 राजद, 1 जदयू और 1 राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास है। हरियाणा की दोनों सीटों बीजेपी के पास हैं। उधर, महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी से 1, एनसीपी 1, कांग्रेस से 1, शरद गुट वाली एनसीपी से 1 और आरपीआई के पास 1 सीट है। इसके साथ ही हिमाचल में खाली हो रही सीट बीजेपी के पास है।

2020 में एनडीए का रहा दबदबा

2020 में जब इन सीटों पर चुनाव हुआ था तब बीजेपी और उसके सहयोगियों ने असम, बिहार, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों में अच्छी बढ़त हासिल की थी। महाराष्ट्र में सीटें अविभाजित शिवसेना, अविभाजित एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटी थीं। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अधिकतर सीटें जीतीं। वहीं बंगाल में टीएमसी का दबदबा बना रहा। इस बार समीकरण अलग हैं और कई सांसदों के भविष्य पर सवालिया निशान है। शरद पवार ने पहले संन्यास के संकेत दिए थे लेकिन अब माना जा रहा है कि वह दोबारा राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। वहीं प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर भी सवाल है। ओडिशा में बीजू जनता दल के कमजोर होने के बाद अलग समीकरण हैं।

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित हुआ जी राम जी बिल, विरोध में देर रात विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

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लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी ‘द विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) 2025' यानी वीबी-जी राम जी बिल को पारित हो गया है। ये बिल 20 साल पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेगा। ये बिल हर साल 125 दिन के ग्रामीण रोजगार की गारंटी देगा। वहीं, विपक्ष ने बिल को लेकर जमकर हंगामा किया।

विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से किया वॉकआउट

बिल पास होने के दौरान विपक्ष के कई सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया, बिल वापस लेने की मांग की और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने बिल के पन्ने भी फाड़ दिए, जिस पर चेयरमैन सी पी राधाकृष्णन ने उन्हें ट्रेजरी बेंच की तरफ न जाने की चेतावनी दी।

संसद परिसर में धरना

सदन के भीतर विरोध के बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर स्थित संविधान सदन के बाहर धरना दिया। विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति को भेजा जाए, ताकि इसकी गहराई से जांच हो सके। विपक्ष का कहना है कि बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के इस तरह का बड़ा बदलाव ग्रामीण गरीबों के हित में नहीं है।

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन ने इस विधेयक पर विपक्ष के कई सदस्यों की ओर से लाये गये संशोधन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम बनने से लेकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं बनती रही हैं। उन्होंने कहा कि इनसे उद्देश्य पूरा नहीं होता या थोड़ा ही लक्ष्य पूरा होता है तो नयी योजनाएं लाई जाती हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को लागू करने और विकसित गांव की बुनियाद पर विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।

Parvathy Ananthanarayanan Mangala: Spreading Ancient Wisdom for Modern Living

In the sacred city of Ayodhya, where timeless wisdom meets modern aspiration, Parvathy Ananthanarayanan Mangala is crafting a unique literary legacy through her initiative, Ram SwaRajya Library. A writer, thinker, and believer in the transformative power of spirituality, Parvathy has dedicated herself to bridging the gap between ancient Indian values and contemporary life.Through her collection of short spiritual fiction books, written under the pen name Ram SwaRajya, she weaves stories that draw inspiration from Lord Rama’s ideals of truth, compassion, and righteousness. Each story — designed to be read in just 15 to 20 minutes — offers readers a spark of inspiration, reminding them that age-old wisdom still holds the key to peace and purpose in the 21st century.

The vision behind the Ram SwaRajya Library was born from Parvathy’s personal journey through emotional pain and resilience. Despite facing misunderstandings and life’s challenges, she chose not to surrender but to transform her experiences into meaningful stories that could uplift others walking similar paths. Her goal is simple yet profound: to make spirituality accessible and relevant to everyone, regardless of age or background.

Parvathy’s journey is one of courage and conviction. Leaving behind her home in Dombivli, Maharashtra, she moved to Ayodhya in July 2025, funding her dream entirely through personal savings, credit loans, and the generosity of a few well-wishers. In just 60 days, she wrote 11 books, two of which are already available on Amazon. Her dedication stands as a powerful example of what faith and determination can achieve.

Digital technology, including tools like WhatsApp, online publishing, and AI, played a vital role in turning her vision into reality—proving how tradition and technology can coexist harmoniously for a greater purpose.

Looking ahead, Parvathy envisions expanding the Ram SwaRajya Library to include 1,000 books that celebrate Indian culture, spirituality, and human values. Her mission is not just to write books but to build a global repository of wisdom that inspires readers to live more meaningful, compassionate lives.

In every sense, Parvathy’s work embodies the essence of humanity—using words as her instrument to heal, inspire, and elevate the collective consciousness of society.

Readers can visit this link to know about her initiative -

www.wiseom.co.in/2025/10/welcome-to-ram-swarajya-library-journey.html