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जाम का नहीं चलेगा बहाना, ऑफिस न आने पर कटेगा वेतन

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। महाकुंभ जाने वाले यात्रियों के कारण जाम है। आज ऑफिस आने में असमर्थ है। अब इस तरह का बहाना नहीं चलेगा। स्वास्थ्यकर्मियों को ड्यूटी पर आना ही होगा।यह कहना है सौ शय्या अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुनील पासवान का। उन्होंने जाम का हवाला देकर नदारद रहने वाले सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल के करीब 20 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को नोटिस जारी किया है।उन्होंने जाम का हवाला देकर घर पर रहने वाले कर्मचारियों को वेतन रोकने की हिदायत दी है। 13 जनवरी से महाकुंभ शुरु हुआ है। इसके बाद से अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों को छुट्टी लेने का मौका मिल गया। उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी स्वास्थ्यकर्मी मनमानी कर रहे हैं। अस्पताल में प्रयागराज से आने वाले छह से सात नर्सें भीड़ और जाम का हवाला देकर ड्यूटी पर आने में असमर्थता जताती हैं।

वे हर दूसरे दिन जाम का हवाला देकर घर पर ही रहती हैं। इसी तरह बनारस से आने वाले 12 से 14 स्वास्थ्यकर्मी भी जाम का हवाला देकर मौज कर रहे हैं। जनपद के एलटी, टेक्नीशियन भी अस्पताल में नियमित नहीं पहुंचते हैं। आश्चर्य की बात है कि उपस्थिति रजिस्टर पर उनके हस्ताक्षर होते हैं। लगातार एक तरह का बहाना मिलते देख सीएमएस ने सभी स्वास्थकर्मियों को चेतावनी नोटिस जारी किया है। हिदायत दी है कि अगर आगे इस तरह का बहाना बनाया तो वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में सरकारी, संविदा मिलाकर कुल 50 कर्मचारियों की तैनाती है। दो चार को छोड़ कर अमूमन कर्मचारी ड्यूटी के नदारद रहते हैं। सौ शय्या अस्पताल में 2022 में ओपीडी सेवा शुरु हुई। तीन साल के बाद भी अब तक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं दिख रही हैं। लापरवाही से अस्पताल की ओपीडी 100 से 150 तक सिमट कर रह गई है।

सीसीटीवी जांच से सच आएगा सामने

सौ शैय्या अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी बीते एक माह 20 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी महाकुंभ का हवाला देकर ड्यूटी नदारद चल रहे हैं ‌। महीने में 12 से 14 दिन ड्यूटी कर पूरे महीने की वेतन ले रहे हैं।‌ स्थानीय कर्मियों का कहना है कि उच्चाधिकारी सीसीटीवी कैमरा देखे तो लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों की हकीकत सामने आ जाएगी। नदारद रहने वालों में ज्यादातर नर्स है‌। करीब 12 से 14 नर्स अमूमन नदारद रहती है। यही हाल दो चिकित्सक, एक वरिष्ठ लिपिक का भी है।

स्वास्थ्य केंद्रों में लापरवाही पर सीएमओ ने की कार्रवाई

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही सीएमओ ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के दौरान प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्र महजूदा और करियाव का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षक के दौरान क‌‌ई अनियमितताएं पाई गई। एक फार्मासिस्ट मुख्यालय पर निवास नहीं कर रहा था। दूसरे फार्मासिस्ट ने औषधि स्टाॅक बुका नहीं रखी थी। इन दोनों स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण सीएमओ ने उनका 7 दिन का वेतन रोक दिया। सीएमओ के अचानक निरीक्षक से स्वास्थ्य केंद्रों में हड़कंप मच गया। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को कड़ी चेतावनी दी। कहा कि सभी कर्मी अपने कार्य में सुधार लाएं। ऐसा न करने पर विभागीय कठोर कार्रवाई की जाएगी।

*टीबी मरीजों को मिला पोषण तोहफा: जिलाधिकारी की मौजूदगी में रेड क्रॉस सोसायटी ने बांटी पोषण पोटली*

रिपोर्ट -नितेश श्रीवास्तव

भदोही- इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी भदोही शाखा द्वारा प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान एवं मुख्यमंत्री के 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत 52 टीबी मरीजों को पोषण आहार का वितरण जिलाधिकारी विशाल सिंह ने किया । विशाल सिंह ने रेडक्रॉस सोसाइटी भदोही के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि रेड क्रॉस सोसायटी जन सामान्य तक पहुंच कर सेवा कार्य कर रहा है।

रेड क्रॉस द्वारा किए जा रहे रक्तदान शिविर, मोतियाबिंद ऑपरेशन तथा स्वास्थ्य शिविर का उल्लेख किया। टी बी मुक्त भारत के अंतर्गत शनिवार को पोषण पोटली का वितरण किया गया । शासन की योजनाओं को सामान्य जन तक पहुंचाने और सफल बनाने में रेड क्रॉस भदोही का प्रयास सराहनीय है। डॉक्टर रितेश पाठक ने मरीजों को आवश्यक निर्देश प्रदान किया । सचिव डॉक्टर भारतेन्दु द्विवेदी ने जिलाधिकारी एवं अतिथि का स्वागत किया।

इस अवसर पर रेडक्रॉस के सदस्य अरविंद भट्टाचार्य,अब्दुल वाहिद अंसारी, डॉ आर एन सिंह, अभय श्रीवास्तव, आनंद तिवारी आनंद गुप्ता, सावित्री श्रीवास्तव विकास नारायण सिंह, मुकेश शुक्ला , प्रशांत पांडे , अखिलेश सिंह, हृदय नारायण, शकील अहमद, राजेंद्र प्रसाद आदि उपस्थित थे। कोषाध्यक्ष हरेंद्र प्रताप सिंह को 39 बार रक्तदान करने पर जिलाधिकारी ने सम्मानित किया। अरविंद भट्टाचार्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

*अमेरिका से कृषि उत्पादों के आयात पर रोक की मांग: भदोही में किसानों ने किया प्रदर्शन, डीएम को सौंपा ज्ञापन*

रिपोर्ट -नितेश श्रीवास्तव

भदोही। उत्तर प्रदेश किसान सभा ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।किसान सभा के जिला अध्यक्ष पंधारी यादव ने कहा कि कृषि उत्पादों का बढ़ता आयात भारतीय किसानों की आजीविका को नष्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय बाजार पर अपना अधिकार स्थापित कर रही हैं।

किसानों की प्रमुख मांगें हैं:

- अमेरिका से कृषि उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जाए

- भारतीय भूमि पर अमेरिकी सैनिक विमानों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाए

- किसानों का आर्थिक शोषण बंद किया जाए प्रदर्शन में जिला मंत्री भूलाल पाल, राजेश कुमार, नंदलाल, शंकर लाल मौर्य, बंसराज सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।

महाकुंभ से जुड़े जेल के कैदी: भदोही जेल में 409 बंदियों ने त्रिवेणी संगम के पवित्र जल से किया स्नान

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जेल की सलाखों में कैद बंदियों को महाकुंभ के आध्यात्मिक समागम से जोड़ने के लिए जेल प्रशासन ने अनूठा प्रयास किया है। कालीन नगरी के रूप में प्रसिद्ध भदोही के जिला कारागार ज्ञानपुर में निरुद्ध बंदियों को त्रिवेणी के पवित्र संगम जल से स्नान कराया गया है। जेल प्रशासन द्वारा संगम से पवित्र जल को जेल में मंगवाया गया था। शुक्रवार को जल भरे कलश की जेल अधीक्षक अभिषेक कुमार सिंह व जेलर आदि द्वारा विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। उसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जेल बंदियों ने संगम के पवित्र जल स्नान किया। स्नान को लेकर बंदियों में बेहद उत्सुकता और आस्था का भाव नजर आया। बंदी 'हर हर गंगे', और 'हर हर महादेव' के नारे लगाते रहे।

जेल अधीक्षक अभिषेक कुमार सिंह ने कहा कि "त्रिवेणी संगम से लाए गए पवित्र जल से सभी बंदियों का स्नान कराया गया है। जिससे वे भी महाकुंभ की आस्था और पुण्य के इस महापर्व और समागम से जुड़ सकें। इसके लिए शासन स्तर से निर्देश प्राप्त हुए थे। ज्ञानपुर की जेल में अभी कुल 409 बंदी निरुद्ध हैं, प्रयास करके सभी को इससे जोड़ा जा रहा है। कहा कि विश्वास है कि इस कार्यक्रम से जेल में एक अच्छा वातावरण निर्मित होगा। और बंदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।"

यूपी के भदोही में मौजूद है अनोखा शिव मंदिर, जहां साल में 3 बार रंग बदलता है शिवलिंग

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भारत में देवी-देवताओं के ऐसे हजारों मंदिर हैं, जो किसी न किसी चमत्कार और रहस्यों के लिए प्रसिद्ध हैं. इसी तरह देश में भगवान शिव के भी ऐसे कई मंदिर हैं, जो उनकी लीलाओं का वर्णन करते है. कहते हैं कि भगवान शिव के कई रूप और कई नाम हैं. अलग-अलग शिवालयों में हमें यह देखने को भी मिलता है. इन शिव मंदिरों का अपना इतिहास है। कई प्राचीन शिव मंदिर अनोखे और बेहद अदभुत हैं. उन्हीं में से एक यूपी के भदोही जिले का तिलेश्वरनाथ मंदिर है. इसका अलग आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. इस मंदिर का अनोखा शिवलिंग मौसम के साथ अपना रंग बदलता है. इतना ही नहीं बल्कि त्वचा का भी विसर्जन करता है. महाशिवरात्रि में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है।

यह अदभुत शिवलिंग भदोही के गोपीगंज स्थित तिलेश्वरनाथ मंदिर का है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग के महाभारत काल में पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान इस शिवलिंग की स्थापना की थी. तभी से रंग बदलने वाले अनोखे रूप के कारण यह शिवलिंग आस्था का केंद्र बना है. मान्यताओं के अनुसार इस शिवलिंग में प्राण-प्रतिष्ठा करते समय अर्जुन ने तीर चलाया था, जिसमें कुबेर ने सोने-चांदी की बारिश की थी. जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंधो में भी मिलता है. जब इस मंदिर का विशाल निर्माण कराने के लिए भक्तों ने खुदाई की थी, उस समय खुदाई में सोने-चांदी के सिक्के भी मिले थे. मान्यता है कि इस शिवलिंग पर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करने से सभी मुरादें पूरी होती हैं. सावन के महीने में दूर-दूर से भक्त यहां तिलेश्वरनाथ की पूजा-अर्चना करने आते हैं।

माना जाता है कि साल भर में यह शिवलिंग तीन बार अपना रंग बदलता है. यह गर्मियों में गेहुंआ, सर्दियों में भूरा और सावन में काले रंग का होता है. बता दें कि यह शिवलिंग साल में एक बार त्वचा भी बदलती है. रंग बदलते तो सबको दिखता है लेकिन त्वचा को बदलते किसी को नहीं दिखता है। इस मंदिर का शिवलिंग तिल के समान बढ़ता है इसीलिए इसका नाम तिलेश्वरनाथ रखा गया है. पांडवों द्वारा निर्मित इस मंदिर के विषय में कहा जाता है।

माता पार्वती के साथ विराजमान हैं महादेव, भदोही नगरवासियों कहते हैं, कुएं वाला बाबा

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। वाराणसी, प्रयागराज और विंध्यक्षेत्र के मध्य विराजमान बाबा सेमराध नाथ धाम में महादेव मां पार्वती के साथ विराजमान हैं। जिला मुख्यालय से 25 किमी दक्षिण जंगीगंज सेमराध गंगातट पर स्वयंभू बाबा सेमराध नाथ जमीन से 17 फीट नीचे कुएं में विराजमान हैं।सेमराधनाथ धाम में हर महीने हजारों श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि में यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। मान्यता है कि इस समय भगवान विष्णु सयन में रहते हैं। इसलिए सृष्टि के संचालन का कार्य भगवान शिव के हाथ में होता है।

जलाभिषेक पूजन दर्शन रुद्राभिषेक आदि का विशेष महत्व है। बाबा सेमराध नाथ अनादीकाल से विराजमान हैं। सेमराध नाथ मंदिर के प्रधान पुजारी सचिन गोस्वामी ने बताया कि एक बार नाव से व्यापार होने के कारण किसी व्यापारी की नाव यहां आकर रात्रि विश्राम के लिए रुक गई। महादेव ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर अपने उपस्थिति का आभास दिया। व्यापारी ने स्वप्न में दिखी इस जगह पर जब खुदाई करवाई तो भगवान शिव की मूर्ति दिखाई पड़ी। मान्यता है कि व्यापारी महादेव के शिवलिंग को अपने साथ ले जाना चाहता था, इसलिए खुदाई शुरू कराई। जैसे-जैसे खुदाई होती, वैसे-वैसे महादेव का शिवलिंग अंदर समाता जाता। जिसके बाद उसने वहीं महादेव की स्थापना की। यहीं कारण है महादेव का यह शिवलिंग जमीन से 17 फीट नीचे कुएं में विराजमान हैं।

केंद्र के प्रस्तावित कानून के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर धरना, पीएम को भेजा ज्ञापन

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिला सत्र न्यायालय के अधिवक्ताओं ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानून का विरोध किया। वकीलों का कहना है कि धारा 33 उन्हें दूसरे स्थानों पर वकालत करने से रोकती है। धारा 35 के जरिए उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। झूठी शिकायतों के आधार पर वकालत का अधिकार छीनने और अनावश्यक जुर्माना लगाने का प्रावधान स्वीकार्य नहीं है।अधिवक्ताओं ने बताया कि उन्हें किसी संस्था से वेतन नहीं मिलता।

ऐसे में उनके खिलाफ शिकायत पर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है। प्रस्तावित बिल में वकीलों के प्रोटेस्ट के अधिकार को सीमित कर छुट्टी के दिनों तक रखा गया है। बिल में अधिवक्ता की परिभाषा में 'लीगल प्रोफेशनल' शब्द जोड़ा गया है। इससे कोई भी लॉ ग्रेजुएट, चाहे वह व्यापारी हो या नौकरीपेशा, बार के चुनाव में भाग ले सकेगा।अधिवक्ताओं ने नारेबाजी के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रस्तावित बिल को वापस लेने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे।

महाशिवरात्रि पर 60 साल बाद बन रहा खास संयोग

-नितेश श्रीवास्तव

भदोही। शिव-शक्ति के मिलन का महापर्व शिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी में 26 फरवरी बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रवण व धनिष्ठा नक्षत्र का युग्म संयोग, परिघ योग एवं शिव योग के विशेष संयोग के साथ मकर राशि के चन्द्रमा की उपस्थिति रहेगी। महाशिवरात्रि पर वर्ष 1965 के बाद सूर्य, बुध व शनि ये तीनों ग्रह के कुंभ राशि में विद्यमान होने से त्रिग्रही योग का संयोग बन रहा है। सात साल बाद बुधवार के दिन का संयोग रहेगा। करीब 31 वर्ष बाद महाशिवरात्रि पर बुधादित्य योग भी रहेगा। ग्रहों-गोचरों का यह संयोग आध्यात्मिक उन्नति और प्रतिष्ठा में वृद्धि प्रदान करेगा। महाशिवरात्रि के दिन शुभ संयोग व शुभ मुहूर्त में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा-आराधना करने से श्रद्धालुओं की मनोवांछित कामना की प्राप्ति होगी।

महादेव की पूजा यथा श्रद्धा, यथा प्रहर, यथा स्थिति व यथा उपचार के अनुसार करना चाहिए। चार प्रहर की साधना से जातक को धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्राप्त होती है। सूर्य व शनि पिता-पुत्र है और सूर्य शनि की राशि कुंभ में रहेंगे। इस प्रबल योग में भगवत साधना करने से आध्यात्मिक, धार्मिक उन्नति होती है।वही सूर्य-बुध के केंद्र त्रिकोण का योग पराक्रम व प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए सहायक सिद्ध होगा।पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए हर वर्ष फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस खास अवसर पर देशभर में शिव मंदिरों में महादेव की पूजा विशेष पूजा-अर्चना होती है। साथ ही महाभिषेक किया जाता है। इसके अलावा शिव भक्त महादेव की बारात निकालते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिव जी की उपासना और व्रत करने से विवाह में आ रही बाधा से छुटकारा मिलता है और जल्द विवाह के योग बनते हैं।

जिले में शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केन्द्र बाबा बड़े शिव मंदिर का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। मंदिर परिसर का सुरम्य वातावरण हर किसी को आकर्षित करता है। शायद यहीं कारण है कि यह मंदिर परिसर निर्माण काल से ही साधकों की साधना स्थली रही है। यहां मोरंग के राजा के साथ ही मौनी स्वामी ने यहां सालों तक साधना की है। वहीं आज भी जनवरी-फरवरी माह के दौरान नागा साधु एक महीने तक यहां रूक कर भोलेनाथ की साधना करते हैं। मान्यता है कि भक्तों की मनोकामना पूरी करने वाले बाबा बड़े शिव के दर्शन से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।मंदिर के मुख्य पुजारी शंकाराचार्य दूबे बताते हैं कि मंदिर का निर्माण कार्य लगभग 16वीं शताब्दी में हुआ था। तब मंदिर के चारों ओर घनघोर जंगल हुआ करता था। जिसमें पलाश के वृक्षों की बहुतायत थी। ऐसा बताया जाता है कि एक बार अयोध्या के राजा शिकार करने जंगल में आये थे। वे भूख प्यास से व्याकुल थे, तो एक साधु ने उनको दर्शन दिया और उनकी क्षुधा शांत करने के बाद अंतर्ध्यान हो गए।

मान्यता है कि जहां साधु ने उन्हें दर्शन दिया था। उसी स्थान पर राजा ने एक शिवलिंग की स्थापना की। कालांतर में शिवलिंग जमीन के अंदर चला गया। एक दिन नगर के एक धार्मिक व्यक्ति के घर सर्प आया। सर्प को देख आसपास के लोग उसे मारने को दौड़ पड़े, लेकिन उस व्यक्ति ने उन्हें रोकते हुए जिस ओर नाग देवता चले। अनायास ही उसी ओर चल पड़े। जंगल में पहुंचने के बाद सर्प एक जगह पर अपना फन पटकने लगा। जहां खुदाई की गई तो भोलेनाथ के शिवलिंग का दर्शन हुआ। उसके बाद से ही यह लोगों की आस्था का प्रमुख केन्द्र हो गया। साधु-संतों को भी आकर्षित करता है। इस मंदिर की एक और खासियत है। मंदिर के चारों तरफ हनुमान जी मूर्ति विराजमान है। मंदिर के ठीक सामने एक प्राचीन तालाब है। जिसमें कमल पुष्प सुशोभित होते हैं। इसके अलावा चारों तरफ घने पेड़ों का परिक्षेत्र है। यह साधकों को भी आकर्षित करती है। लगभग 60 वर्ष पूर्व मोरंग के राजा, जो राजा बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। इस स्थान को अपनी तपस्थली बनाई। इसी तरह मौनी स्वामी ने भी यहीं पर पीपल के वृक्ष के नीचे साधना की। पीपल का वृक्ष आज भी है। जनवरी-फरवरी में महाकुंभ के समय नागा साधु एक महीने तक मंदिर पर प्रवास कर साधना करते हैं।

सौ शैय्या अस्पताल में जल्द जाएंगे विशेषज्ञ डॉक्टर

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। सौ शैय्या अस्पताल में जल्द ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। अस्पताल में सर्जन, ईएनटी, फिजिशियन, स्किन के चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। इससे यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद बढ़ गई है। अस्पताल में कुल 34 चिकित्सक सहित दो पैथोलॉजी तैनात हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को परेशानी होती है। सरपतहां में सौ शैय्या अस्पताल की नींव रखी गई थी। करीब 14 करोड़ की लागत वाला अस्पताल भ्रष्टाचार के कारण समय से पूरा हो सका।

लेकिन शासन के निर्देश पर 2002 में ओपीडी शुरू कर दी गई। यहां हर दिन औसतन 125 से 150 मरीजों की ओपीडी होती है। अस्पताल में ढाई करोड़ की लागत से चार अधूरे बिल्डिंग को पूर्ण कराने का निर्माण कार्य धीमी गति से प्रगति पर है। हालांकि क‌ई विधा के विशेषज्ञ डॉक्टर के न होने के कारण मरीजों को अस्पताल से वापस लौटना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने अब विशेषज्ञों की तैनाती के लिए पहल शुरू कर दी है। इसके लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सौ शैय्या अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी भी लापरवाह है। पिछले दिनों अस्पताल में डीएम विशाल सिंह के निरीक्षण में बड़ी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थकर्मी अनुपस्थित मिले थे। डीएम ने सख्त हिदायत के बाद भी उनकी कार्यशैली नहीं बदली।

अस्पताल में प्रतिदिन सुविधाएं बेहतर हो रही है। सर्जन,ईएनटी फिजिशियन आदि विशेषज्ञ की तैनाती को लेकर प्रशासन को पत्र भेजा गया है।

एसके पासवान सीएमएस सौ शैय्या अस्पताल सरपतहां