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ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर भारत में प्रदर्शन, लखनऊ से लेकर श्रीनगर तक सड़क पर उतरे लोग

#protestsacrossindiaafterdeathofiransupremeleader_khamenei

इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में भी प्रदर्शन शुरू हो गए है। भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कश्मीर से लेकर लखनऊ में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए।

खामेनेई की हत्या के बाद लाल चौक पर विरोध प्रदर्शन

जम्मू कश्मीर के लाल चौक पर शिया समुदाय के लोगों ने खामेनेई की हत्या के बाद विरोध किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए और ईरान के समर्थन में आवाज उठाई। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हमारे प्रिय नेता अली खामेनेई शहीद हो गए हैं। यह शोक जुलूस शहर के बीचों-बीच शांतिपूर्वक निकाला जा रहा है। इस दौरान लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें, काले झंडे और ईरान के समर्थन वाले बैनर उठाए हुए थे। श्रीनगर की सड़कों पर मातमी गीत (नौहा) भी पढ़े गए।

लखनऊ में शिया समुदाय तीन दिन मनाएंगे शोक

आयतुल्ला खामेनेईई की मौत पर लखनऊ में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। शिया समुदाय के लोगों ने तीन दिवसीय शोक घोषित किया है। इसके तहत शिया समुदाय के लोग अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस संबंध में मौलाना कल्बे जवाद ने तमाम उम्मते मुस्लिमा और इंसानियत परस्त लोगों से शोक में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह बैठक में सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। इसके तहत लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने की चुप ना रहने की अपील

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से अमेरिकी-इजराइली हमले की कड़ी निंदा करने और चुप न रहने की अपील की है। जारी बयान में दूतावास ने खामेनेई की मौत पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के पुष्टि की कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में उनकी मृत्यु हुई। दूतावास ने कहा कि स्वतंत्र और न्यायप्रिय राष्ट्रों को इस खुले अपराध की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए और आक्रामकता के सामने मौन नहीं रहना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजरायल को इस कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

नेपाल में ऐसा क्या हुआ भड़क गई हिंसा? सड़कों पर उतर आए लोग, काठमांडू में सेना तैनात

#nepal_monarchy_protests_becomes_violent

नेपाल में शुक्रवार को राजशाही समर्थकों ने एक बड़ा प्रदर्शन किया था। इस दौरान काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में एक पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं।झड़प के बाद हालात खराब हो गए हैं। नेपाल की राजधानी काठमांडू में सेना को बुलाया गया है और कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है।

नेपाल में साल 2008 में खत्म हुई राजशाही को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र के समर्थक सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने आयोजित किया था जिसे नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का समर्थन प्राप्त है और यह पार्टी देश में राजशाही स्थापित करने की मांग कर रही है। राजशाही की वापसी की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन का नेतृत्व नवराज सुवेदी कर रहे हैं। वे राज संस्था पुनर्स्थापना आंदोलन से जुड़े हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि संवैधानिक राजशाही हिंदू राष्ट्र की बहाली ही देश की समस्याओं का समाधान है।

शुक्रवार को नेपाल में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हुई है, जिनमें से एक प्रदर्शनकारी और एक पत्रकार शामिल है। हिंसा इस कदर नियंत्रण से बाहर हो गई थी कि हिंसा प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा और सेना की तैनाती करनी पड़ी। हिंसा के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को 17 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें राजशाही समर्थक राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के उपाध्यक्ष रबिंद्र मिश्रा, महासचिव धवल शमशेर राना, राजशाही समर्थक कार्यकर्ता स्वागत नेपाल और संतोष तमांग आदि शामिल हैं। इन लोगों पर हिंसा भड़काने का आरोप है। कई नेताओं को नजरबंद किया गया है। अब तक हिंसा के मामले में कुल 51 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। पूर्व पीएम ने ज्ञानेंद्र शाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुष्प कमल दहल प्रचंड ने शनिवार की सुबह हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान वे सोशलिस्ट फ्रंट के कार्यालय भी पहुंचे, जिसे हिंसा के दौरान नुकसान पहुंचाया गया।

पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कहा कि 'अब ये पूरी तरह से साफ हो गया है कि इस सब के पीछे ज्ञानेंद्र शाह हैं। ज्ञानेंद्र शाह की नीयत सही नहीं है। ये पहले भी देखा गया और अब भी देखा जा रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार कड़ी कार्रवाई करे। घटना की पूरी जांच हो और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। ज्ञानेंद्र शाह को अब पूरी आजादी नहीं दी जा सकती। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और नेपाल सरकार को इस मुद्दे पर गंभीर होने की जरूरत है।

दरअसल, राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेपाल में राजशाही को बहाल किए जाने को लेकर कुछ समय से सरगर्मी तेज़ हुई है। बीते कुछ दिनों में कई ऐसी रैलियां और प्रदर्शन हुए जिसमें राजशाही को फिर से स्थापित किए जाने की मांग की गई। हाल ही में नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की सक्रियता भी देखी गई है।

इस महीने 5 मार्च को काठमांडू में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने एक बाइक रैली की थी, जिनमें नेपाल के राष्ट्रध्वज के साथ लोग शामिल हुए। छह मार्च को पोखरा में ज्ञानेंद्र ने पूर्व राजा वीरेंद्र की मूर्ति का अनावरण किया गया और इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने राजशाही व्यवस्था वाला राष्ट्रगान गाया। ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह नेपाल में लोकतंत्र आने के बाद से इस तरह सार्वजनिक रूप से न के बराबर दिखते थे। कुछ खास मौकों पर बहुत ही औपचारिक बयान जारी करते थे।

वहीं, नौ मार्च को वह पोखरा से काठमांडू पहुंचे, जहां हजारों लोगों की भीड़ उनके स्वागत में इकट्ठा हुई थी। इसी भीड़ में एक व्यक्ति, ज्ञानेंद्र की तस्वीर के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लेकर खड़ा था।

नेपाल की छात्रा की आत्महत्या को लेकर भुवनेश्वर के KIIT में विरोध प्रदर्शन, संदिग्ध को हिरासत में लिया गया

#kiit_bhubneshwar_faces_protests_as_a_nepali_student_commits_suicide

KIIT Bhubneshwar

नेपाल की 20 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियरिंग छात्रा का शव रविवार शाम को उसके छात्रावास के कमरे में पंखे से लटका हुआ पाए जाने के बाद सोमवार को भुवनेश्वर के कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन हुआ।

KIIT विश्वविद्यालय (मान्य) के सैकड़ों छात्रों ने सोमवार सुबह कॉलेज के सामने मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने एक महीने पहले मृतक छात्रा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। भुवनेश्वर के डीसीपी पिनाक मिश्रा ने कहा कि कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने में भूमिका निभाने वाले आरोपी लड़के अदविक श्रीवास्तव को हिरासत में लिया गया है। छात्रों ने आरोप लगाया कि पीड़िता को अदविक श्रीवास्तव कई महीनों से परेशान कर रहा था और विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग को मामले की सूचना देने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली।

घटना के बाद विश्वविद्यालय के नेपाली छात्रों ने गहन जांच की मांग की और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। तनाव बढ़ने पर केआईआईटी विश्वविद्यालय ने एक नोटिस जारी कर सभी नेपाली छात्रों को परिसर खाली करने को कहा। बयान में कहा गया, "नेपाल के सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विश्वविद्यालय बंद है। 

उन्हें आज यानी 17 फरवरी को विश्वविद्यालय परिसर खाली करने का निर्देश दिया जाता है।" 

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए केआईआईटी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान रंजन मोहंती ने कहा कि पीड़िता आरोपी के साथ रिलेशनशिप में थी। मोहंती ने कहा, "वह हॉस्टल में रह रही थी और अपने पार्टनर के साथ तनावपूर्ण संबंधों के कारण उसने यह कदम उठाया। उसके कमरे को सील कर दिया गया है और परिवार के सदस्यों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।" पुलिस ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने की शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आरोपी और पीड़िता के बीच बातचीत की एक ऑडियो क्लिप सामने आई है। क्लिप में एक युवक को एक लड़की को गाली देते और परेशान करते हुए सुना जा सकता है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय ने नेपाली छात्रों से तुरंत हॉस्टल खाली करने और घर लौटने को कहा। विश्वविद्यालय ने कहा, "स्थिति को ध्यान में रखते हुए नेपाली छात्रों को उनके संबंधित घरों को भेज दिया गया है। फिलहाल स्थिति शांत है।" नेपाली छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी यात्रा व्यवस्था के अपने घरों की ओर जाने के लिए मजबूर किया गया। 

नेपाल के एक छात्र ने दावा किया, "हमें कोई ट्रेन टिकट या कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। हमें बस हॉस्टल की बसों में भर दिया गया, कटक रेलवे स्टेशन भेज दिया गया और जल्द से जल्द अपने घरों के लिए निकल जाने का आदेश दिया गया। स्टाफ के सदस्य हॉस्टल में घुस गए, हमें खाली करने के लिए मजबूर किया और जो लोग जल्दी से खाली नहीं कर रहे थे, उन्हें पीटा भी।"

श्रीलंका की नौसेना ने भारतीय मछुआरों पर बरसाईं गोलियां, भारत ने जताई नाराजगी
0#india_strongly_protests_sri_lankan_navy_firing_on_fishermen श्रीलंकाई नौसेना ने डेल्फ्ट द्वीप के पास से गुजर रहे भारतीय मछुआरों को पकड़ने के लिए गोलियां चलाई। इस दौरान श्रीलंकाई नौसेना ने 13 भारतीय मछुआरों को पकड़ा है। भारत ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भारत ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में बल का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। भारत में श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

विदेश मंत्रालय ने इस मामले में बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, आज सुबह डेल्फ्ट द्वीप के नजदीक 13 भारतीय मछुआरों को पकड़ने के दौरान श्रीलंकाई नौसेना की ओर से गोलीबारी की घटना की सूचना मिली। मछली पकड़ने वाली नाव पर सवार 13 मछुआरों में से दो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका इलाज जाफना टीचिंग अस्पताल में चल रहा है। तीन अन्य मछुआरों को मामूली चोटें आईं हैं। उनका भी इलाज किया जा रहा है। जाफना में भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने घायल मछुआरों से अस्पताल में मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने मछुआरों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की है।

बयान में आगे कहा गया, नई दिल्ली में श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को आज सुबह विदेश मंत्रालय में बुलाया गया और इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। कोलंबो में हमारे उच्चायोग ने भी इस मामले को श्रीलंका सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया है। भारत सरकार ने हमेशा मछुआरों से जुड़े मुद्दों को मानवीय और मानवीय तरीके से निपटाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसमें आजीविका संबंधी चिंताओं को भी ध्यान में रखा गया है। किसी भी परिस्थिति में बल का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। इस संबंध में दोनों सरकारों के बीच मौजूदा सहमति का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, पुदुचेरी सरकार के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सरकार 13 गिरफ्तार मछुआरों और उनकी मशीनीकृत नौका को छुड़वाने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप करने की मांग करेगी। गिरफ्तार किए गए मछुआरों के नामों का पता लगाया जा रहा हैं। पुडुचेरी के मत्स्य पालन मंत्री के. लक्ष्मीनारायणन ने दावा किया कि नौका सहित मछुआरों की रिहाई के लिए सरकार विदेश मंत्री से संपर्क में है। ये मछुआरे कुछ दिन पहले मछली पकड़ने निकले थे।
आतंक के आका नसरल्लाह की मौत पर भारत में क्यों मचा है बवाल, जम्मू-कश्मीर से लेकर यूपी तक विरोध प्रदर्शन

#srinagar_protests_jammu_kashmir_over_hezbollah_terror_chief_nasralla_death

‘हिजबुल्लाह’ को दुनिया एक आतंकी संगठन के रूप में जानती है। यूरोपीय संघ ने 22 जुलाई 2013 को हिजबुल्लाह के सैन्य विंग को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया था। ‘हिजबुल्लाह’ को संयुक्त राज्य अमेरिका और कई अन्य देशों द्वारा एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्‍हित किया गया है। इसी ‘हिजबुल्लाह’ को इजराइल ने मिटा देने की कसम खाई है और वो लगातार इसपर हमले कर रहा है। इसी क्रम में लेबनान में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह को भी ढेर कर दिया है।

लेबनान में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर में भारी विरोध-प्रदर्शन देखा जा रहै है। जम्मू-कश्मीर के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही लेबनान को अपना पूरा समर्थन देने की अपील कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन कर रही एक लड़की ने कहा कि अब हर घर से हिजबुल्लाह निकलेगा। उन्होंने कहा कि आपने एक हिजबुल्लाह चीफ को मारा है, लेकिन अब हर घर से हिजबुल्लाह निकलेगा। मैं हर उस इंसान से बात कर रही हूं, जो फिलिस्तीन के खिलाफ है।

इजराइल को नहीं पता कि उसने किसे मारा है। हम सभी शिया मुसलमान आतंकवादी नसरल्लाह और हिजबुल्लाह के साथ खड़े हैं।लेबनान के लोगों, डरो मत, इज़राइल से लड़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।फिलिस्तीन का विरोध करने वाले ध्यान से सुन लें, हम सभी शिया मुसलमान हिजबुल्लाह और हमास के साथ खड़े हैं।

दरअसल हिजबुल्लाह शिया मुस्लिमों वाला संगठन है जिसे शिया देश ईरान का समर्थन है।

Gkp में योजनाबद्ध सर्जरी का बैकलॉग: बीआरडी, एम्स में लगभग 900 प्रक्रियाओं में हुई देरी

#surgeries_delayed_due_to_protests

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बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के रेजिडेंट डॉक्टरों ने 11 दिनों की लंबी हड़ताल के बाद शुक्रवार को काम फिर से शुरू कर दिया, लेकिन उन मरीजों की पीड़ा अभी भी दूर नहीं हुई है, जिन्हें सर्जरी करवानी थी, क्योंकि उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना होगा।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि रोजाना 15 इलेक्टिव और 60 माइनर सर्जरी होती थीं और हड़ताल के पहले दिन 12 इलेक्टिव और 45 माइनर सर्जरी टाल दी गईं और यह सिलसिला आठ दिनों तक जारी रहा, जिससे इलेक्टिव सर्जरी का बैकलॉग बढ़ गया।  

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राम कुमार ने कहा कि मामूली सर्जरी के मामले प्रभावित हुए, जबकि वैकल्पिक सर्जरी, गहन चिकित्सा इकाई और इमरजेंसी सामान्य रूप से काम कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ओपीडी में मरीजों की संख्या में काफी गिरावट देखी गई है।

एम्स, गोरखपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप कुमार ने कहा कि सर्जरी के लिए तारीख का इंतजार करना सामान्य बात है, हालांकि, हड़ताल की अवधि के दौरान संकट गहरा गया और 400 से अधिक सर्जरी के मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल खत्म होने को लेकर अनिश्चितता के कारण सर्जरी के लिए भर्ती कई मरीजों को अस्पताल से राहत मिल गई है और शुक्रवार से ही उनसे आपात स्थिति के लिए एम्स पहुंचने के लिए संपर्क किया जा रहा है। 

इसके अलावा, देवरिया के महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज में 150 मामले और बस्ती के महर्षि वशिष्ठ नारायण मेडिकल कॉलेज में 200 सर्जरी स्थगित कर दी गईं।

हजारों मरीज़, जिनमें अधिकतर वंचित वर्ग के थे, डॉक्टरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने से निराश और व्यथित हो गए और घर लौट गए।

बांग्‍लादेश में भारी हिंसा के बाद पीएम शेख हसीना ने दिया इस्‍तीफा, देश छोड़ने का दावा, तख्तापलट की अटकलें
#bangladesh_protests_updates_sheikh_hasina_leaves_country

बांग्लादेश हिंसा की आग में जल रहा है। आरक्षण के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं। वहीं, प्रदर्शनकर्ता देश की प्रधानमंज्ञी शेख हसीना से इस्तीफें की मांग कर रहे हैं। इस बीच बड़ी खबर आ रही है कि  बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस तरह के दावे भी किए जा रहे हैं कि हसीना ढाका पैलेस छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चली गईं हैं।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबित वह हेलीकॉप्टर से भारत के लिए रवाना हो गई हैं।

इससे पहले सेना प्रमुख वकार-उज-जमान हसीना को 45 मिनट के अंदर इस्‍तीफा देने के लिए अल्‍टीमेटम दिया था। इस बीच बांग्लादेश में तख्तापलट की अटकलें भी चल रही हैं। खबर है कि सेना प्रमुख ने सभी दलों के नेताओं से बैठक की है। थोड़ी देर में सेना प्रमुख देश को संबोधित करेंगे।

कहा जा रहा है क‍ि प्रधानमंत्री शेख हसीना लगभग 2:30 बजे एक सैन्य हेलीकॉप्टर से बंगभवन से रवाना हुईं। उनके साथ उनकी छोटी बहन शेख रेहाना भी थीं। इस बीच, सूत्रों के अनुसार, वे भारत के पश्चिम बंगाल जा सकती हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके अगरतला आने की भी बात कही जा रही है। वहीं अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि वह लंदन जा सकती हैं।

बांग्लादेश के हालात बद से बदतर हो गए हैं। यहां के प्रधानमंत्री आवास में प्रदर्शनकारी घुस गए हैं। इससे एक दिन पहले बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में झड़प में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। वहीं, एक महीने में करीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसक झड़पें रविवार की सुबह हुईं जब प्रदर्शनकारी ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ के परचम तले आयोजित ‘असहयोग कार्यक्रम’ में भाग लेने पहुंचे। अवामी लीग, छात्र लीग और जुबो लीग के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया तथा फिर दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारी सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के मुद्दे को लेकर हसीना का इस्तीफा मांग रहे हैं।
यूएन में भारत ने दिया पाक का साथ, स्वीडन में कुरान जलाने पर लाए गए प्रस्ताव का किया समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध

india_backs_pak_resolution_at_unhrc_condemning_quran_burning_protests

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बुधवार को भारत ने पाकिस्तान का समर्थन किया।यहां पाकिस्तान ने एक प्रस्ताव पेश किया। उस प्रस्ताव का कई अमेरिकी और यूरोपीय देश विरोध कर रहे थे, लेकिन भारत ने इस मामले में पाकिस्तान का साथ दिया।

 दरअसल, स्वीडन में बार-बार कुरान जलाए जाने के खिलाफ पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव रखा था। इस पर भारत ने भी पाकिस्तान के समर्थन में वोट किया है। हालांकि, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन समेत कई पश्चिमी देशों ने फ्रीडम ऑफ स्पीच का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।पाकिस्तान ने अपने प्रस्ताव में कुरान जलाने जैसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की थी।

47 में से 12 सदस्यों ने पाक के प्रस्ताव का विरोध किया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कुल 47 सदस्य हैं। इसमें ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सिर्फ 19 देश शामिल हैं। इन सभी ने पाक के प्रस्ताव का समर्थन किया। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ये प्रस्ताव ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक देशों के कहने पर ही लाया था। उइगर मुस्लमानों के मुद्दे पर घिरे रहने वाले चीन ने भी पाक के समर्थन में वोट किया।28 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। इसमें भारत भी शामिल है वहीं 12 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट किया और 7 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। नेपाल समेत 7 देशों ने किसी का समर्थन नहीं करते हुए वोटिंग ही नहीं की।

स्वीडन में ईद पर जलाई गई थी कुरान

स्वीडन में ईद-अल-अजहा के मौके पर स्टॉकहोम की एक मस्जिद के बाहर एक शख्स ने कुरान जलाकर प्रदर्शन किया था। इसके लिए उसे स्वीडिश सरकार से परमिशन मिली थी। CNN के मुताबिक, अभिव्यक्ति की आजादी के तहत एक दिन के प्रदर्शन के लिए ये इजाजत दी गई थी। इस प्रोटेस्ट में सिर्फ एक ही व्यक्ति अपने ट्रांसलेटर के साथ शामिल हुआ था।

रॉयटर्स के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे शख्स ने कुरान के कुछ पन्नों को फाड़कर उसमें आग लगा दी। इसके बाद उसने स्वीडन का झंडा भी लहराया था। प्रोटेस्ट देख रहे 200 लोगों में से कुछ उसके पक्ष में तो कुछ विरोध में नारे लगाए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने अरबी में गॉड इज ग्रेट चिल्लाकर प्रदर्शनकारी पर पत्थर भी फेंका। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था।

ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर भारत में प्रदर्शन, लखनऊ से लेकर श्रीनगर तक सड़क पर उतरे लोग

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इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में भी प्रदर्शन शुरू हो गए है। भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कश्मीर से लेकर लखनऊ में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए।

खामेनेई की हत्या के बाद लाल चौक पर विरोध प्रदर्शन

जम्मू कश्मीर के लाल चौक पर शिया समुदाय के लोगों ने खामेनेई की हत्या के बाद विरोध किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए और ईरान के समर्थन में आवाज उठाई। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हमारे प्रिय नेता अली खामेनेई शहीद हो गए हैं। यह शोक जुलूस शहर के बीचों-बीच शांतिपूर्वक निकाला जा रहा है। इस दौरान लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें, काले झंडे और ईरान के समर्थन वाले बैनर उठाए हुए थे। श्रीनगर की सड़कों पर मातमी गीत (नौहा) भी पढ़े गए।

लखनऊ में शिया समुदाय तीन दिन मनाएंगे शोक

आयतुल्ला खामेनेईई की मौत पर लखनऊ में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। शिया समुदाय के लोगों ने तीन दिवसीय शोक घोषित किया है। इसके तहत शिया समुदाय के लोग अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस संबंध में मौलाना कल्बे जवाद ने तमाम उम्मते मुस्लिमा और इंसानियत परस्त लोगों से शोक में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह बैठक में सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। इसके तहत लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने की चुप ना रहने की अपील

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से अमेरिकी-इजराइली हमले की कड़ी निंदा करने और चुप न रहने की अपील की है। जारी बयान में दूतावास ने खामेनेई की मौत पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के पुष्टि की कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में उनकी मृत्यु हुई। दूतावास ने कहा कि स्वतंत्र और न्यायप्रिय राष्ट्रों को इस खुले अपराध की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए और आक्रामकता के सामने मौन नहीं रहना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजरायल को इस कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

नेपाल में ऐसा क्या हुआ भड़क गई हिंसा? सड़कों पर उतर आए लोग, काठमांडू में सेना तैनात

#nepal_monarchy_protests_becomes_violent

नेपाल में शुक्रवार को राजशाही समर्थकों ने एक बड़ा प्रदर्शन किया था। इस दौरान काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में एक पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं।झड़प के बाद हालात खराब हो गए हैं। नेपाल की राजधानी काठमांडू में सेना को बुलाया गया है और कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है।

नेपाल में साल 2008 में खत्म हुई राजशाही को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र के समर्थक सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने आयोजित किया था जिसे नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का समर्थन प्राप्त है और यह पार्टी देश में राजशाही स्थापित करने की मांग कर रही है। राजशाही की वापसी की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन का नेतृत्व नवराज सुवेदी कर रहे हैं। वे राज संस्था पुनर्स्थापना आंदोलन से जुड़े हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि संवैधानिक राजशाही हिंदू राष्ट्र की बहाली ही देश की समस्याओं का समाधान है।

शुक्रवार को नेपाल में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हुई है, जिनमें से एक प्रदर्शनकारी और एक पत्रकार शामिल है। हिंसा इस कदर नियंत्रण से बाहर हो गई थी कि हिंसा प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा और सेना की तैनाती करनी पड़ी। हिंसा के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को 17 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें राजशाही समर्थक राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के उपाध्यक्ष रबिंद्र मिश्रा, महासचिव धवल शमशेर राना, राजशाही समर्थक कार्यकर्ता स्वागत नेपाल और संतोष तमांग आदि शामिल हैं। इन लोगों पर हिंसा भड़काने का आरोप है। कई नेताओं को नजरबंद किया गया है। अब तक हिंसा के मामले में कुल 51 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। पूर्व पीएम ने ज्ञानेंद्र शाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुष्प कमल दहल प्रचंड ने शनिवार की सुबह हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान वे सोशलिस्ट फ्रंट के कार्यालय भी पहुंचे, जिसे हिंसा के दौरान नुकसान पहुंचाया गया।

पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कहा कि 'अब ये पूरी तरह से साफ हो गया है कि इस सब के पीछे ज्ञानेंद्र शाह हैं। ज्ञानेंद्र शाह की नीयत सही नहीं है। ये पहले भी देखा गया और अब भी देखा जा रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार कड़ी कार्रवाई करे। घटना की पूरी जांच हो और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। ज्ञानेंद्र शाह को अब पूरी आजादी नहीं दी जा सकती। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और नेपाल सरकार को इस मुद्दे पर गंभीर होने की जरूरत है।

दरअसल, राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेपाल में राजशाही को बहाल किए जाने को लेकर कुछ समय से सरगर्मी तेज़ हुई है। बीते कुछ दिनों में कई ऐसी रैलियां और प्रदर्शन हुए जिसमें राजशाही को फिर से स्थापित किए जाने की मांग की गई। हाल ही में नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की सक्रियता भी देखी गई है।

इस महीने 5 मार्च को काठमांडू में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने एक बाइक रैली की थी, जिनमें नेपाल के राष्ट्रध्वज के साथ लोग शामिल हुए। छह मार्च को पोखरा में ज्ञानेंद्र ने पूर्व राजा वीरेंद्र की मूर्ति का अनावरण किया गया और इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने राजशाही व्यवस्था वाला राष्ट्रगान गाया। ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह नेपाल में लोकतंत्र आने के बाद से इस तरह सार्वजनिक रूप से न के बराबर दिखते थे। कुछ खास मौकों पर बहुत ही औपचारिक बयान जारी करते थे।

वहीं, नौ मार्च को वह पोखरा से काठमांडू पहुंचे, जहां हजारों लोगों की भीड़ उनके स्वागत में इकट्ठा हुई थी। इसी भीड़ में एक व्यक्ति, ज्ञानेंद्र की तस्वीर के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लेकर खड़ा था।

नेपाल की छात्रा की आत्महत्या को लेकर भुवनेश्वर के KIIT में विरोध प्रदर्शन, संदिग्ध को हिरासत में लिया गया

#kiit_bhubneshwar_faces_protests_as_a_nepali_student_commits_suicide

KIIT Bhubneshwar

नेपाल की 20 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियरिंग छात्रा का शव रविवार शाम को उसके छात्रावास के कमरे में पंखे से लटका हुआ पाए जाने के बाद सोमवार को भुवनेश्वर के कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन हुआ।

KIIT विश्वविद्यालय (मान्य) के सैकड़ों छात्रों ने सोमवार सुबह कॉलेज के सामने मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने एक महीने पहले मृतक छात्रा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। भुवनेश्वर के डीसीपी पिनाक मिश्रा ने कहा कि कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने में भूमिका निभाने वाले आरोपी लड़के अदविक श्रीवास्तव को हिरासत में लिया गया है। छात्रों ने आरोप लगाया कि पीड़िता को अदविक श्रीवास्तव कई महीनों से परेशान कर रहा था और विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग को मामले की सूचना देने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली।

घटना के बाद विश्वविद्यालय के नेपाली छात्रों ने गहन जांच की मांग की और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। तनाव बढ़ने पर केआईआईटी विश्वविद्यालय ने एक नोटिस जारी कर सभी नेपाली छात्रों को परिसर खाली करने को कहा। बयान में कहा गया, "नेपाल के सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विश्वविद्यालय बंद है। 

उन्हें आज यानी 17 फरवरी को विश्वविद्यालय परिसर खाली करने का निर्देश दिया जाता है।" 

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए केआईआईटी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान रंजन मोहंती ने कहा कि पीड़िता आरोपी के साथ रिलेशनशिप में थी। मोहंती ने कहा, "वह हॉस्टल में रह रही थी और अपने पार्टनर के साथ तनावपूर्ण संबंधों के कारण उसने यह कदम उठाया। उसके कमरे को सील कर दिया गया है और परिवार के सदस्यों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।" पुलिस ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने की शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आरोपी और पीड़िता के बीच बातचीत की एक ऑडियो क्लिप सामने आई है। क्लिप में एक युवक को एक लड़की को गाली देते और परेशान करते हुए सुना जा सकता है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय ने नेपाली छात्रों से तुरंत हॉस्टल खाली करने और घर लौटने को कहा। विश्वविद्यालय ने कहा, "स्थिति को ध्यान में रखते हुए नेपाली छात्रों को उनके संबंधित घरों को भेज दिया गया है। फिलहाल स्थिति शांत है।" नेपाली छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी यात्रा व्यवस्था के अपने घरों की ओर जाने के लिए मजबूर किया गया। 

नेपाल के एक छात्र ने दावा किया, "हमें कोई ट्रेन टिकट या कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। हमें बस हॉस्टल की बसों में भर दिया गया, कटक रेलवे स्टेशन भेज दिया गया और जल्द से जल्द अपने घरों के लिए निकल जाने का आदेश दिया गया। स्टाफ के सदस्य हॉस्टल में घुस गए, हमें खाली करने के लिए मजबूर किया और जो लोग जल्दी से खाली नहीं कर रहे थे, उन्हें पीटा भी।"

श्रीलंका की नौसेना ने भारतीय मछुआरों पर बरसाईं गोलियां, भारत ने जताई नाराजगी
0#india_strongly_protests_sri_lankan_navy_firing_on_fishermen श्रीलंकाई नौसेना ने डेल्फ्ट द्वीप के पास से गुजर रहे भारतीय मछुआरों को पकड़ने के लिए गोलियां चलाई। इस दौरान श्रीलंकाई नौसेना ने 13 भारतीय मछुआरों को पकड़ा है। भारत ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भारत ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में बल का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। भारत में श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

विदेश मंत्रालय ने इस मामले में बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, आज सुबह डेल्फ्ट द्वीप के नजदीक 13 भारतीय मछुआरों को पकड़ने के दौरान श्रीलंकाई नौसेना की ओर से गोलीबारी की घटना की सूचना मिली। मछली पकड़ने वाली नाव पर सवार 13 मछुआरों में से दो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका इलाज जाफना टीचिंग अस्पताल में चल रहा है। तीन अन्य मछुआरों को मामूली चोटें आईं हैं। उनका भी इलाज किया जा रहा है। जाफना में भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने घायल मछुआरों से अस्पताल में मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने मछुआरों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की है।

बयान में आगे कहा गया, नई दिल्ली में श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को आज सुबह विदेश मंत्रालय में बुलाया गया और इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। कोलंबो में हमारे उच्चायोग ने भी इस मामले को श्रीलंका सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया है। भारत सरकार ने हमेशा मछुआरों से जुड़े मुद्दों को मानवीय और मानवीय तरीके से निपटाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसमें आजीविका संबंधी चिंताओं को भी ध्यान में रखा गया है। किसी भी परिस्थिति में बल का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। इस संबंध में दोनों सरकारों के बीच मौजूदा सहमति का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, पुदुचेरी सरकार के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सरकार 13 गिरफ्तार मछुआरों और उनकी मशीनीकृत नौका को छुड़वाने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप करने की मांग करेगी। गिरफ्तार किए गए मछुआरों के नामों का पता लगाया जा रहा हैं। पुडुचेरी के मत्स्य पालन मंत्री के. लक्ष्मीनारायणन ने दावा किया कि नौका सहित मछुआरों की रिहाई के लिए सरकार विदेश मंत्री से संपर्क में है। ये मछुआरे कुछ दिन पहले मछली पकड़ने निकले थे।
आतंक के आका नसरल्लाह की मौत पर भारत में क्यों मचा है बवाल, जम्मू-कश्मीर से लेकर यूपी तक विरोध प्रदर्शन

#srinagar_protests_jammu_kashmir_over_hezbollah_terror_chief_nasralla_death

‘हिजबुल्लाह’ को दुनिया एक आतंकी संगठन के रूप में जानती है। यूरोपीय संघ ने 22 जुलाई 2013 को हिजबुल्लाह के सैन्य विंग को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया था। ‘हिजबुल्लाह’ को संयुक्त राज्य अमेरिका और कई अन्य देशों द्वारा एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्‍हित किया गया है। इसी ‘हिजबुल्लाह’ को इजराइल ने मिटा देने की कसम खाई है और वो लगातार इसपर हमले कर रहा है। इसी क्रम में लेबनान में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह को भी ढेर कर दिया है।

लेबनान में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर में भारी विरोध-प्रदर्शन देखा जा रहै है। जम्मू-कश्मीर के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही लेबनान को अपना पूरा समर्थन देने की अपील कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन कर रही एक लड़की ने कहा कि अब हर घर से हिजबुल्लाह निकलेगा। उन्होंने कहा कि आपने एक हिजबुल्लाह चीफ को मारा है, लेकिन अब हर घर से हिजबुल्लाह निकलेगा। मैं हर उस इंसान से बात कर रही हूं, जो फिलिस्तीन के खिलाफ है।

इजराइल को नहीं पता कि उसने किसे मारा है। हम सभी शिया मुसलमान आतंकवादी नसरल्लाह और हिजबुल्लाह के साथ खड़े हैं।लेबनान के लोगों, डरो मत, इज़राइल से लड़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।फिलिस्तीन का विरोध करने वाले ध्यान से सुन लें, हम सभी शिया मुसलमान हिजबुल्लाह और हमास के साथ खड़े हैं।

दरअसल हिजबुल्लाह शिया मुस्लिमों वाला संगठन है जिसे शिया देश ईरान का समर्थन है।

Gkp में योजनाबद्ध सर्जरी का बैकलॉग: बीआरडी, एम्स में लगभग 900 प्रक्रियाओं में हुई देरी

#surgeries_delayed_due_to_protests

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बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के रेजिडेंट डॉक्टरों ने 11 दिनों की लंबी हड़ताल के बाद शुक्रवार को काम फिर से शुरू कर दिया, लेकिन उन मरीजों की पीड़ा अभी भी दूर नहीं हुई है, जिन्हें सर्जरी करवानी थी, क्योंकि उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना होगा।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि रोजाना 15 इलेक्टिव और 60 माइनर सर्जरी होती थीं और हड़ताल के पहले दिन 12 इलेक्टिव और 45 माइनर सर्जरी टाल दी गईं और यह सिलसिला आठ दिनों तक जारी रहा, जिससे इलेक्टिव सर्जरी का बैकलॉग बढ़ गया।  

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राम कुमार ने कहा कि मामूली सर्जरी के मामले प्रभावित हुए, जबकि वैकल्पिक सर्जरी, गहन चिकित्सा इकाई और इमरजेंसी सामान्य रूप से काम कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ओपीडी में मरीजों की संख्या में काफी गिरावट देखी गई है।

एम्स, गोरखपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप कुमार ने कहा कि सर्जरी के लिए तारीख का इंतजार करना सामान्य बात है, हालांकि, हड़ताल की अवधि के दौरान संकट गहरा गया और 400 से अधिक सर्जरी के मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल खत्म होने को लेकर अनिश्चितता के कारण सर्जरी के लिए भर्ती कई मरीजों को अस्पताल से राहत मिल गई है और शुक्रवार से ही उनसे आपात स्थिति के लिए एम्स पहुंचने के लिए संपर्क किया जा रहा है। 

इसके अलावा, देवरिया के महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज में 150 मामले और बस्ती के महर्षि वशिष्ठ नारायण मेडिकल कॉलेज में 200 सर्जरी स्थगित कर दी गईं।

हजारों मरीज़, जिनमें अधिकतर वंचित वर्ग के थे, डॉक्टरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने से निराश और व्यथित हो गए और घर लौट गए।

बांग्‍लादेश में भारी हिंसा के बाद पीएम शेख हसीना ने दिया इस्‍तीफा, देश छोड़ने का दावा, तख्तापलट की अटकलें
#bangladesh_protests_updates_sheikh_hasina_leaves_country

बांग्लादेश हिंसा की आग में जल रहा है। आरक्षण के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं। वहीं, प्रदर्शनकर्ता देश की प्रधानमंज्ञी शेख हसीना से इस्तीफें की मांग कर रहे हैं। इस बीच बड़ी खबर आ रही है कि  बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस तरह के दावे भी किए जा रहे हैं कि हसीना ढाका पैलेस छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चली गईं हैं।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबित वह हेलीकॉप्टर से भारत के लिए रवाना हो गई हैं।

इससे पहले सेना प्रमुख वकार-उज-जमान हसीना को 45 मिनट के अंदर इस्‍तीफा देने के लिए अल्‍टीमेटम दिया था। इस बीच बांग्लादेश में तख्तापलट की अटकलें भी चल रही हैं। खबर है कि सेना प्रमुख ने सभी दलों के नेताओं से बैठक की है। थोड़ी देर में सेना प्रमुख देश को संबोधित करेंगे।

कहा जा रहा है क‍ि प्रधानमंत्री शेख हसीना लगभग 2:30 बजे एक सैन्य हेलीकॉप्टर से बंगभवन से रवाना हुईं। उनके साथ उनकी छोटी बहन शेख रेहाना भी थीं। इस बीच, सूत्रों के अनुसार, वे भारत के पश्चिम बंगाल जा सकती हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके अगरतला आने की भी बात कही जा रही है। वहीं अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि वह लंदन जा सकती हैं।

बांग्लादेश के हालात बद से बदतर हो गए हैं। यहां के प्रधानमंत्री आवास में प्रदर्शनकारी घुस गए हैं। इससे एक दिन पहले बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में झड़प में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। वहीं, एक महीने में करीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसक झड़पें रविवार की सुबह हुईं जब प्रदर्शनकारी ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ के परचम तले आयोजित ‘असहयोग कार्यक्रम’ में भाग लेने पहुंचे। अवामी लीग, छात्र लीग और जुबो लीग के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया तथा फिर दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारी सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के मुद्दे को लेकर हसीना का इस्तीफा मांग रहे हैं।
यूएन में भारत ने दिया पाक का साथ, स्वीडन में कुरान जलाने पर लाए गए प्रस्ताव का किया समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध

india_backs_pak_resolution_at_unhrc_condemning_quran_burning_protests

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बुधवार को भारत ने पाकिस्तान का समर्थन किया।यहां पाकिस्तान ने एक प्रस्ताव पेश किया। उस प्रस्ताव का कई अमेरिकी और यूरोपीय देश विरोध कर रहे थे, लेकिन भारत ने इस मामले में पाकिस्तान का साथ दिया।

 दरअसल, स्वीडन में बार-बार कुरान जलाए जाने के खिलाफ पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव रखा था। इस पर भारत ने भी पाकिस्तान के समर्थन में वोट किया है। हालांकि, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन समेत कई पश्चिमी देशों ने फ्रीडम ऑफ स्पीच का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।पाकिस्तान ने अपने प्रस्ताव में कुरान जलाने जैसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की थी।

47 में से 12 सदस्यों ने पाक के प्रस्ताव का विरोध किया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कुल 47 सदस्य हैं। इसमें ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सिर्फ 19 देश शामिल हैं। इन सभी ने पाक के प्रस्ताव का समर्थन किया। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ये प्रस्ताव ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक देशों के कहने पर ही लाया था। उइगर मुस्लमानों के मुद्दे पर घिरे रहने वाले चीन ने भी पाक के समर्थन में वोट किया।28 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। इसमें भारत भी शामिल है वहीं 12 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट किया और 7 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। नेपाल समेत 7 देशों ने किसी का समर्थन नहीं करते हुए वोटिंग ही नहीं की।

स्वीडन में ईद पर जलाई गई थी कुरान

स्वीडन में ईद-अल-अजहा के मौके पर स्टॉकहोम की एक मस्जिद के बाहर एक शख्स ने कुरान जलाकर प्रदर्शन किया था। इसके लिए उसे स्वीडिश सरकार से परमिशन मिली थी। CNN के मुताबिक, अभिव्यक्ति की आजादी के तहत एक दिन के प्रदर्शन के लिए ये इजाजत दी गई थी। इस प्रोटेस्ट में सिर्फ एक ही व्यक्ति अपने ट्रांसलेटर के साथ शामिल हुआ था।

रॉयटर्स के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे शख्स ने कुरान के कुछ पन्नों को फाड़कर उसमें आग लगा दी। इसके बाद उसने स्वीडन का झंडा भी लहराया था। प्रोटेस्ट देख रहे 200 लोगों में से कुछ उसके पक्ष में तो कुछ विरोध में नारे लगाए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने अरबी में गॉड इज ग्रेट चिल्लाकर प्रदर्शनकारी पर पत्थर भी फेंका। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था।