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ब्रेकफास्ट से डिनर तक सब दिल्ली में नहीं होगा…” क्यों तिलमिलाए तारिक रहमान के मंत्री

#bangladeshwantsresetbilateralrelationshipwithindia_says

भारत के न्योते के बाद भी बांग्लादेश ब्रिक्स समिट में शामिल नहीं हुआ। अब नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की धमाकेदार सफलता और भारत के बढ़ते ग्लोबल प्रभाव को देखकर पड़ोसी देश बांग्लादेश के पेट में मरोड़ उठने लगी है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने अजीबोगरीब बयान देकर अपनी भड़ास निकाली है।

बांग्लादेश सरकार भारत से अच्छे संबंध चाहती है लेकिन...

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि उनकी सरकार भारत के साथ अच्छे संबंध चाहती है लेकिन दिल्ली को दूसरे देशों से ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाएगी। बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करना चाहता है। हमारी सरकार एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं और इसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ना कि किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए ये होना चाहिए।

भारत के प्रति आकर्षण से आगे बढ़ना होगा- हुमायूं कबीर

भारत से रिश्ते को लेकर हुए सवाल पर कबीर ने कहा, भारत में ही नाश्ता, भारत में लंच, भारत में ही डिनर होगा तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे। हमें भारत के प्रति इस आकर्षण से आगे बढ़ना होगा। बाकी दुनिया के देशों की तरह भारत भी बस एक और देश है, जिसके साथ बांग्लादेश अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है।

भारत से बना रहा दूरी

हुमायूं कबीर के इस बयान से दो दिन पहले बांग्लादेश की तरफ से ऐलान किया गया था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बजाय उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि, इससे पहले फरवरी में भी तारीक रहमान को एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था। बावजूद इसके बांग्लादेशी सरकार ने निमंत्रण को ठुकरा दिया था।

ब्रिक्स सम्मेलन में नहीं आ रहे तारिक रहमान, बांग्लादेश ने कहा- भारत ने पीएम की हैसियत से नहीं बुलाया

#bangladeshpmtariquerahmanwasnotinvitedinbricshumaiunkobir_claims

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी पुष्टि की है। गुरुवार को पत्रकारों ने रहमान के समिट में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा। कबीर ने कहा, हमारे प्रधानमंत्री को तो न्योता नहीं मिला। न्योता BIMSTEC के चेयरमैन को मिला है।

न रहमान आएंगे और न ही कोई प्रतिनिधि

गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि "भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट में न तो प्रधानमंत्री तारिक रहमान जाएंगे और न ही कोई अन्य प्रतिनिधि। कबीर ने फ़ॉरन सर्विस एकेडमी में पत्रकारों से कहा, "जब माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान बना रहेगा, तब द्विपक्षीय यात्राएं होंगी। इसमें जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है।"

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में न्योता नहीं

कबीर ने आगे कहा कि "भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया था, ना की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं। इसे द्विपक्षीय निमंत्रण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पहली यात्रा बहुपक्षीय नहीं हो सकती। हम द्विपक्षीय यात्राओं और बातचीत को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं।"

तारिक रहमान ने भारत के दो-दो न्योते ठुकराए

भारत ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए निमंत्रण भेजा गया था। इससे पहले फरवरी में तारिक रहमान के शपथग्रहण के दौरान भी भारत ने द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया था। हालांकि, तारिक रहमान अपनी पार्टी बीएनपी के कट्टरपंथी नेताओं के दबाव और प्रमुख विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के भारत विरोधी एजेंडे को साधने के लिए भारत की यात्रा स्थगित कर चुके हैं।

मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने की चाहत

बांग्लादेश उस रक्षा गठबंधन में शामिल होना चाहता है, जिसका उसे न्योता नहीं मिला है और दूसरी तरफ़ भारत के दो-दो न्योते ठुकरा चुका है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने की चाहत बांग्लादेश कई बार सार्वजनिक रूप से प्रकट कर चुका है। तारिक़ रहमान इस साल फरवरी में जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने थे तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नई दिल्ली आने के लिए न्योता भेजा था। रहमान नहीं आए और पहले विदेशी दौरे के लिए मलेशिया को चुना. मलेशिया के बाद रहमान चीन गए।

तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा से पहले बांग्लादेश ने भारत के सामने रखी शर्त, दोनों देशों के बीच बढ़ी कूटनीतिक सरगर्मी

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बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर बड़ा संकेत दिया है। तारिक रहमान के भारत आने से पहले बांग्लादेश ने शर्तें थोपने की कोशिश की। बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा तब तक संभव नहीं है जब तक नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और ढाका द्वारा वांछित अन्य भगोड़ों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाती।

बांग्लादेश ने रखी शर्त

प्रथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम ने इसके लिए भारतीय अधिकारियों से द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य फरार अपराधियों को जल्द वापस करने के साथ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को बांग्लादेश को सौंपने का अनुरोध किया है।

बांग्लादेश ने कहा-अनुकूल माहौल की जरूरत

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी रहमान की नई दिल्ली की द्विपक्षीय यात्रा की संभावना के बारे में कई हफ्तों से संपर्क में हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने कहा कि 5 अगस्त को नई दिल्ली में हसीना की सार्वजनिक बातचीत से चर्चा प्रभावित हुई थी। करीम ने कहा, "हमारा मानना है कि इस यात्रा के लिए अनुकूल वातावरण बनाना आवश्यक है।

शेख हसीना की प्रेस कांफ्रेंस से बढ़ा विवाद

बयान में आगे कहा गया, "हम दोहराते हैं कि हम संप्रभु समानता, राष्ट्रीय गरिमा, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और पारस्परिक लाभ के आधार पर अपने पड़ोसियों सहित अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अपनी 'बांग्लादेश प्रथम' नीति का अनुसरण करना जारी रखेंगे।" बांग्लादेश ने कहा कि रहमान की संभावित यात्रा से जुड़ी प्रक्रिया हसीना द्वारा नई दिल्ली में की गई खुली प्रेस वार्ता से "दूषित" हो गई है, जबकि उन्हें बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तारिक रहमान को न्योता

यह बयान 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है। विदेश मंत्रालय ने 14 अगस्त को कहा था, "हमने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। हमने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के लिए भारत आने का भी निमंत्रण दिया है।"

शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान, बोलीं-मेरी हत्‍या हो सकती है, फ‍िर भी वापस जा रही

#sheikhhasinadecemberreturnbangladeshsurrenderstatement

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल दिसंबर में अपने देश वापस लौटने की योजना बनाई है। वह अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ आत्मसमर्पण कर सकती हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार शेख हसीन के साथ-साथ उनकी पार्टी अवामी लीग के बड़े नेता भी वापस लौटेंगे और सरेंडर करेंगे।

शेख हसीना ने किया अपने देश लौटने का ऐलान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का ऐलान करते हुए कहा कि वह दिसंबर-2026 के आसपास बांग्लादेश वापस जाएंगी और अदालत में सरेंडर करेंगी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोन इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा पता है, लेकिन यह भी पता है कि अब अपने देश लौटने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, ‘वे मेरे लौटते ही मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं। लेकिन मुझे जाना ही होगा।’

किसी विदेशी सरकार से नहीं किया परामर्श

हसीना ने दिल्ली स्थित निर्वासन आवास से कहा कि उन्होंने किसी विदेशी सरकार से परामर्श नहीं किया कि वह कब और कैसे बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा, ढाका के अधिकारी मुझे वापस बुलाना चाहते हैं, वे बार-बार भारत को पत्र भेजकर मुझे वापस भेजने की गुहार लगा रहे हैं। मैं खुद जाऊंगी।

देश की मिट्टी में मौत की तमन्ना

शेख हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनकी मौत होती है तो वह अपने देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं। उन्होंने कहा, मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरदस्त दमन हो रहा है। अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी धरती पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।

हसीना को मिली है मौत की सजा

शेख हसीना करीब 20 साल से सत्ता पर काबिज थीं। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश में हिंसा शुरू हो गई, जिसके बाद हसीना को ढाका छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से हसीना यही हैं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आदेश देने के कारण बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराधों को दोषी मानते हुए उनको और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा दी है। वहीं शेख हसीना की अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस साल हुए संसदीय चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को चुनाव लड़े से रोक दिया गया था।

ब्रेकफास्ट से डिनर तक सब दिल्ली में नहीं होगा…” क्यों तिलमिलाए तारिक रहमान के मंत्री

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भारत के न्योते के बाद भी बांग्लादेश ब्रिक्स समिट में शामिल नहीं हुआ। अब नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की धमाकेदार सफलता और भारत के बढ़ते ग्लोबल प्रभाव को देखकर पड़ोसी देश बांग्लादेश के पेट में मरोड़ उठने लगी है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने अजीबोगरीब बयान देकर अपनी भड़ास निकाली है।

बांग्लादेश सरकार भारत से अच्छे संबंध चाहती है लेकिन...

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि उनकी सरकार भारत के साथ अच्छे संबंध चाहती है लेकिन दिल्ली को दूसरे देशों से ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाएगी। बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करना चाहता है। हमारी सरकार एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं और इसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ना कि किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए ये होना चाहिए।

भारत के प्रति आकर्षण से आगे बढ़ना होगा- हुमायूं कबीर

भारत से रिश्ते को लेकर हुए सवाल पर कबीर ने कहा, भारत में ही नाश्ता, भारत में लंच, भारत में ही डिनर होगा तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे। हमें भारत के प्रति इस आकर्षण से आगे बढ़ना होगा। बाकी दुनिया के देशों की तरह भारत भी बस एक और देश है, जिसके साथ बांग्लादेश अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है।

भारत से बना रहा दूरी

हुमायूं कबीर के इस बयान से दो दिन पहले बांग्लादेश की तरफ से ऐलान किया गया था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बजाय उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि, इससे पहले फरवरी में भी तारीक रहमान को एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था। बावजूद इसके बांग्लादेशी सरकार ने निमंत्रण को ठुकरा दिया था।

ब्रिक्स सम्मेलन में नहीं आ रहे तारिक रहमान, बांग्लादेश ने कहा- भारत ने पीएम की हैसियत से नहीं बुलाया

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी पुष्टि की है। गुरुवार को पत्रकारों ने रहमान के समिट में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा। कबीर ने कहा, हमारे प्रधानमंत्री को तो न्योता नहीं मिला। न्योता BIMSTEC के चेयरमैन को मिला है।

न रहमान आएंगे और न ही कोई प्रतिनिधि

गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि "भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट में न तो प्रधानमंत्री तारिक रहमान जाएंगे और न ही कोई अन्य प्रतिनिधि। कबीर ने फ़ॉरन सर्विस एकेडमी में पत्रकारों से कहा, "जब माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान बना रहेगा, तब द्विपक्षीय यात्राएं होंगी। इसमें जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है।"

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में न्योता नहीं

कबीर ने आगे कहा कि "भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया था, ना की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं। इसे द्विपक्षीय निमंत्रण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पहली यात्रा बहुपक्षीय नहीं हो सकती। हम द्विपक्षीय यात्राओं और बातचीत को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं।"

तारिक रहमान ने भारत के दो-दो न्योते ठुकराए

भारत ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए निमंत्रण भेजा गया था। इससे पहले फरवरी में तारिक रहमान के शपथग्रहण के दौरान भी भारत ने द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया था। हालांकि, तारिक रहमान अपनी पार्टी बीएनपी के कट्टरपंथी नेताओं के दबाव और प्रमुख विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के भारत विरोधी एजेंडे को साधने के लिए भारत की यात्रा स्थगित कर चुके हैं।

मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने की चाहत

बांग्लादेश उस रक्षा गठबंधन में शामिल होना चाहता है, जिसका उसे न्योता नहीं मिला है और दूसरी तरफ़ भारत के दो-दो न्योते ठुकरा चुका है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने की चाहत बांग्लादेश कई बार सार्वजनिक रूप से प्रकट कर चुका है। तारिक़ रहमान इस साल फरवरी में जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने थे तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नई दिल्ली आने के लिए न्योता भेजा था। रहमान नहीं आए और पहले विदेशी दौरे के लिए मलेशिया को चुना. मलेशिया के बाद रहमान चीन गए।

तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा से पहले बांग्लादेश ने भारत के सामने रखी शर्त, दोनों देशों के बीच बढ़ी कूटनीतिक सरगर्मी

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बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर बड़ा संकेत दिया है। तारिक रहमान के भारत आने से पहले बांग्लादेश ने शर्तें थोपने की कोशिश की। बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा तब तक संभव नहीं है जब तक नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और ढाका द्वारा वांछित अन्य भगोड़ों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाती।

बांग्लादेश ने रखी शर्त

प्रथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम ने इसके लिए भारतीय अधिकारियों से द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य फरार अपराधियों को जल्द वापस करने के साथ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को बांग्लादेश को सौंपने का अनुरोध किया है।

बांग्लादेश ने कहा-अनुकूल माहौल की जरूरत

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी रहमान की नई दिल्ली की द्विपक्षीय यात्रा की संभावना के बारे में कई हफ्तों से संपर्क में हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने कहा कि 5 अगस्त को नई दिल्ली में हसीना की सार्वजनिक बातचीत से चर्चा प्रभावित हुई थी। करीम ने कहा, "हमारा मानना है कि इस यात्रा के लिए अनुकूल वातावरण बनाना आवश्यक है।

शेख हसीना की प्रेस कांफ्रेंस से बढ़ा विवाद

बयान में आगे कहा गया, "हम दोहराते हैं कि हम संप्रभु समानता, राष्ट्रीय गरिमा, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और पारस्परिक लाभ के आधार पर अपने पड़ोसियों सहित अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अपनी 'बांग्लादेश प्रथम' नीति का अनुसरण करना जारी रखेंगे।" बांग्लादेश ने कहा कि रहमान की संभावित यात्रा से जुड़ी प्रक्रिया हसीना द्वारा नई दिल्ली में की गई खुली प्रेस वार्ता से "दूषित" हो गई है, जबकि उन्हें बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तारिक रहमान को न्योता

यह बयान 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है। विदेश मंत्रालय ने 14 अगस्त को कहा था, "हमने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। हमने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के लिए भारत आने का भी निमंत्रण दिया है।"

शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान, बोलीं-मेरी हत्‍या हो सकती है, फ‍िर भी वापस जा रही

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बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल दिसंबर में अपने देश वापस लौटने की योजना बनाई है। वह अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ आत्मसमर्पण कर सकती हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार शेख हसीन के साथ-साथ उनकी पार्टी अवामी लीग के बड़े नेता भी वापस लौटेंगे और सरेंडर करेंगे।

शेख हसीना ने किया अपने देश लौटने का ऐलान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का ऐलान करते हुए कहा कि वह दिसंबर-2026 के आसपास बांग्लादेश वापस जाएंगी और अदालत में सरेंडर करेंगी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोन इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा पता है, लेकिन यह भी पता है कि अब अपने देश लौटने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, ‘वे मेरे लौटते ही मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं। लेकिन मुझे जाना ही होगा।’

किसी विदेशी सरकार से नहीं किया परामर्श

हसीना ने दिल्ली स्थित निर्वासन आवास से कहा कि उन्होंने किसी विदेशी सरकार से परामर्श नहीं किया कि वह कब और कैसे बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा, ढाका के अधिकारी मुझे वापस बुलाना चाहते हैं, वे बार-बार भारत को पत्र भेजकर मुझे वापस भेजने की गुहार लगा रहे हैं। मैं खुद जाऊंगी।

देश की मिट्टी में मौत की तमन्ना

शेख हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनकी मौत होती है तो वह अपने देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं। उन्होंने कहा, मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरदस्त दमन हो रहा है। अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी धरती पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।

हसीना को मिली है मौत की सजा

शेख हसीना करीब 20 साल से सत्ता पर काबिज थीं। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश में हिंसा शुरू हो गई, जिसके बाद हसीना को ढाका छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से हसीना यही हैं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आदेश देने के कारण बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराधों को दोषी मानते हुए उनको और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा दी है। वहीं शेख हसीना की अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस साल हुए संसदीय चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को चुनाव लड़े से रोक दिया गया था।