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Sep 09 2019, 10:58

आप की स्वस्थ्य और उसकी देखभाल
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 वायरल फीवर के कारण ,लक्षण और वचाव के उपाय

 आजकल के मौसम में वायरल फीवर आम  बीमारी है, जिससे से लोग परेशान रहते है । यह ऐसा बीमारीं है कि घर मे अगर एक आदमी को हो तो सभी इस से प्रभावित हो जाते हैं । 
     आप अपने चारों तरफ अनेक लोगों को खांसते या छींकते देख रहे हैं। स्कूलों में और ऑफिस में अनुपस्थित होने वाले लोगों की संख्या अचानक बढ़ गई है। वायरल फीवर या फ्लू इंफ्लूएन्जा वायरस से होने वाली एक बीमारी है। यह आमतौर पर हमारे श्वास तंत्र को प्रभावित करती है। अनेक लोगों को बार-वार वाइरल या फ्लू इसलिए होता है, क्योंकि वाइरस समय-समय पर 'म्यूटेशन' करता रहता है। सहज शब्दों में कहें, तो वाइरस अपना स्वभाव व शक्ल बदला करता है।

क्या हैं इसके कारण

वाइरस दूषित हवा या दूषित वस्तुओं के कारण फैलता है। जब कोई बीमार व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो वाइरस ड्रापलेट हवा में फैल जाते हैं और आस-पास के व्यक्ति जब सांस लेते हैं, तो उनको भी बीमारी फैलाने वाले वाइरस प्रभावित कर देते हैं। इसके अलावा जब बीमार व्यक्ति अपनी नाक या मुंह साफ करके अगर अपने हाथ नहीं धोता और मेज, कुर्सी, फोन, कंप्यूटर, दरवाजा आदि को छू लेता है, तो वे चीजें भी वाइरस के कैरियर (वाहक) बन जाती हैं और इन्हें छूने से भी बीमारी फैल जाती है।

वायरल फीवर के लक्षण

-खांसी, जुकाम और नाक बहना।

-बुखार, जो कभी-कभी 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा भी हो सकता है।

-सिर दर्द।

-बदन दर्द।

-गले में दर्द।

-खाने में तकलीफ।

-ठंड लगना और थकान महसूस होना।

वायरल फीवर के बचाव

-बीमार व्यक्ति घर पर आराम करें।

-भीड़ भरी जगहों पर न जाएं।

-खांसते व छींकते वक्त मुंह को ढक कर रखें।

-हाथों को साफ रखें। समय-समय पर धोएं या फिर हैंड सैनीटाइजर का इस्तेमाल करें।

-वैक्सीन का प्रयोग फ्लू से बचने या उसकी तीव्रता घटाने का एक कारगर उपाय है। खासकर वृद्ध व्यक्तियों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दिल व फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों को डॉक्टर की सलाह पर यह टीका अवश्य लगवाना चाहिए।

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Aug 26 2019, 09:11

स्वास्थ्य और देखभाल

परस्थिति और और परिवेश है डिप्रेशन का वजह (भाग-1)

उलझे सवाल, निराश करने वाले जवाब और अनिश्चितता किसी इंसान को नाज़ुक  मोड़ पर ले जाती है, और उस मोड़ पर लोग डिप्रेस हो जाते है.

आज भगमदौर की जिंदगी में लोग जिस  तरह  के मानसिक दवाब से गुज़र रहे है उस परिस्थिति में डिप्रेशन आम बीमारीं बन गयी है । इसके लिए परिस्थिति, परिवेश और जीवन में घटने बाली घटना जिम्मेवार है ।
इस  आलेख को को क्रमबद्ध रीक से कुछ दिन आप स्ट्रीटबज़्ज़ पर पढ़ेंगे जिसको कुछ मनोचिकित्सक, इस बीमारीं को झेल रहे मरीज तथा कुछ सामाजिक अवेयरनस के लिए काम कर रहे लोंगो के बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है ।
आइये सबसे से पहले यह जानें कि डिप्रेशन है किया। 

डिप्रेशन क्या है और उसके कारण--?
   
डिप्रेशन सिर्फ बीमारी नहीं है और न ही दिमागी फितूर। यह एक ऐसी मानसिक हालत है, जिसमें पॉजिटिव सोचने और बेहतर रिजल्ट तक पहुंचने की इंसान की कपैसिटी कम हो जाती है। वक्त पर इलाज और करीबियों का साथ इस बीमारी से निपटने में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स से बात करके डिप्रेशन पर पूरी जानकारी दे रहे हैं ।

उलझे सवाल, निराश करने वाले जवाब और अनिश्चितता किसी इंसान को उस मोड़ पर ले जाती है, जहां उम्मीदें काफी बेहद कम नजर आती हैं। जब स्थिति नाजुक मोड़ पर पहुंच जाती है तो नतीजे खतरनाक हो जाते हैं। जरूरत है तो इस पर वक्त रहते ध्यान देने और सही इलाज की।

केस स्टडी-1 
एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले सुजीत (बदला नाम) का 4 साल तक अपनी सहकर्मी के साथ अफेयर रहा। पावस ने अपने घरवालों से शादी की रजामंदी ले ली, लेकिन दिक्कत यह हो गई कि लड़की के घरवाले शादी के लिए राजी नहीं हुए और ऐसे में लड़की ने भी शादी से इनकार कर दिया। ब्रेकअप के बाद सुजीत डिप्रेशन में चले गए। फिलहाल वह इलाज करा रहे हैं। 

केस स्टडी-2 
पटना की प्रिया (बदला नाम) टीचर थीं। शादी के बाद वह नौकरी छोड़कर पति के साथ दिल्ली सेटल हो गईं। उनका एक बेटा भी है। दो साल पहले पता चला कि उनके पति का ऑफिस में अफेयर है। इस बात को लेकर उनका अपने पति से झगड़ा भी हुआ। फैमिली लेवल पर इसे सुलझाने की कोशिश की गई। अब वह मानसिक तौर पर परेशान हैं। 

बढ़ रहे हैं मामले 

ये केस स्टडीज तो बानगी भर हैं। बदलते लाइफस्टाइल में डिप्रेशन की बीमारी अब आम हो रही है। महानगर से निकलकर यह छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच रही है। इसके शिकार न सिर्फ युवा और बुजुर्ग, बल्कि स्कूल जाने वाले स्टूडेंट भी हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इसका इलाज सिर्फ दवाओं से नहीं हो सकता। इससे उबरने के लिए परिवार, दोस्त और अपनों के साथ की भी दरकार होती है। साइकॉलजिस्ट मानते हैं कि ऐसी मानसिक हालत अचानक नहीं होती। लंबे वक्त में लाइफस्टाइल, रिश्ते, इमोशंस के साथ बुने गए ताने-बाने में जब

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    जब सुराख होता है तो उम्मीदें धरी रह जाती हैं। सपने गायब हो जाते हैं। ऐसे हालात में मानसिक तौर पर टूटना लाजमी है। 
    
    क्रमश:(शेष भाग कल पढ़े....)
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Aug 24 2019, 09:26

आप का स्वास्थ्य और देखभाल 

हाई ब्लडप्रेशर : जरूरत है खान पान में परहेज और जीवनचर्या में बदलाव ! 

 हाई ब्लडप्रेशर को जानलेवा बीमारी माना जाता है । हाई ब्लडप्रेशर के  मरीज  को अपने खान-पान में बदलाव है लेन की जरूरत है । हाई ब्लडप्रेशर होने पर किस तरह का खान-पान अपनाएं, और आपकी दिनचर्या कैसी हो, इस बारे में चिकित्सकों की सलाह इस प्रकार है ।
 
1   हाई ब्लडप्रेशर या उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर, अधिक मात्रा में भोजन न करें। इसके अलावा गरिष्ठ अर्थात तैलीय व मसालेदार भोजन से दूरी बनाएं । 

2  भोजन में फलों और सब्ज‍ियों का जितना हो सके ज्यादा प्रयोग करें इसके अलावा लहसुन, प्याज, साबुत अनाज व सोयाबीन का प्रयोग अधिक करें।

3  नमक का सेवन जितना हो सके कम ही कर करें। ध्यान रखें कि भोजन में पोटेशि‍यम की मात्रा अधि‍क, और सोडि‍यम की मात्रा कम होनी चाहिए। 

4  डेयरी उत्पाद, चीनी, रिफाइंड खाद्य पदार्थ, तली-भुनी चीजें और जंक फूड से हमेशा बचकर रहें। इनका सेवन आपके लिए ठीक नहीं होगा ।

5  चाय और कॉफी का सेवन कम ही करें, क्योंकि इनमें उपस्थि‍त कैफीन आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसके अलावा दिनभर में कम से कम 10 से 12 गि‍लास पानी जरूर पिएं। 

6  कम मात्रा में ही सही, लेकिन बाजरा, ज्वार, मूंग व अंकुरित दालों को सेवन जरूर करें। और भोजन में सोयाबीन के तेल का उपयोग करना आपके लिए बेहतर होगा। 

7  अपने भोजन में पालक, गोभी, बथुआ जैसी हरी व पत्तेदार सब्ज‍ियों को शामिल करें। यह आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक साबित होंगी । 

8  अन्य सब्जि‍यों में लौकी, तोरई, परवल, सहिजना, कद्दू, टिंडे आदि का प्रयोग अधि‍क करें और इनके साथ नींबू और पुदीना को भी अपने भोजन में अनिवार्य तौर पर शामिल करें।

9  बादाम, मुनक्का, अजवायन व अदरक का सेवन आपके लिए लाभप्रद हो सकता है। इसके अलावा आप घी, गुड़, चीनी, शहद व मुरब्बा आदि का सेवन भी कर सकते हैं। 

10  फलों में मौसंबी, अंगूर, अनार, पपीता, सेब, संतरा, अमरूद, अनानास का प्रयोग आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा छाछ, बगैर मलाई का दूध भी आपके लिए लाभदायक होगा।

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Aug 22 2019, 08:18

गतांक से आगे.........


कैंसर-जानकारी और बचाव  (भाग - 2)

त्वचा कैंसर के प्रकार उस से बचाव,और जानकारी

आज कैंसर जैसे जानलेवा बीमारीं की नाम सुनते ही लोंगों का रूह कांप जाती है ।लेकिन इस बीमारीं से वचने के लिए कुछ उपाय है उसे जरूर करना 
चाहिए । ,कैंसर का एक प्रकार है त्वचा कैंसर जिसको लोग आसानी से नही समझ पाते हैं। इस से पीड़ित होने से लोग इसे साधारण बीमारीं समझ कर लापरवाही करते हैं । आपने कल पढ़ा त्वचा कैंसर के प्रकार और अब गतांक से आगे पढ़िए उस से बचाव के रास्ते....

सनस्क्रीन साल भर लगायें,

सर्दियों में या आकाश में बादल छाए रहने पर भी सनस्क्रीन का प्रयोग करें। ये सभी हानिकारक यूवी विकिरण (Radiation) को फिल्टर करते हैं, विशेष रूप से जो मेलेनोमा का कारण बन सकता है।  30 या उच्चतर के एसपीएफ़ वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का प्रयोग करें। ये यूवीए और यूवीबी किरणों दोनों से सुरक्षा प्रदान करता है।

वातावरण में फैल रहे प्रदूषण से खुद को हमेशा बचाने का प्रयास करें।

प्रदूषण आपकी त्वचा को न सिर्फ बाहरी नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि इसकी वजह से आपको त्वचा कैंसर भी हो सकता है।

हमेशा सुरक्षात्मक कपड़े पहनें, 

जैसे कि लंबे बाजू वाली शर्ट, पैंट और धूप में निकलने पर टोपी और धूप चश्में का प्रयोग करे। 
 
टैनिंग बेड से बचें,

टैनिंग बेड से बचें, टैनिंग बेड यूवी किरणों का उत्सर्जन (Emission) करते हैं और आपकी त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

 विटामिन डी का सही मात्रा लें

त्वचा कैंसर से बचाव के लिए विटामिन डी की सही मात्रा लें। यह हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ त्वचा को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से भी बचाकर त्वचा कैंसर के खतरे को भी कम करता है।

त्वचा में बदलाव हो तो चिकित्सक से मिलें


अपनी त्वचा की नियमित रूप से नई त्वचा की वृद्धि या मौजूदा मोल्स, फ्रीकल्स, बम्प्स और बर्थमार्क में बदलाव की जांच करते रहे यदि आपको अपनी त्वचा पर कोई बदलाव दिखता है तो बोर्ड प्रमाणित त्वचा विशेषज्ञ से मिलें।

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Aug 21 2019, 16:44

कैंसर - जानकारी और वचाव भाग - 1

 त्वचा कैंसर के प्रकार, उस से वचाव,और जानकारी
 
त्‍वचा पर लाल पपड़ीदार घाव है स्किन कैंसर के संकेत, जानें इसके प्रकार और बचाव के तरीके 
त्वचा कैंसर के जोखिम को कम करने के दो सबसे अच्छे तरीके हैं, तेज धूप के लंबे संपर्क से बचना और धूप से सुरक्षित रहना। यहां त्वचा कैंसर से बचने के कुछ आसान तरीके दिए गए हैं।


त्वचा का कैंसर (Skin Cancer) दुनिया भर में सबसे आम प्रकार के कैंसरों में से एक है ये बाकी सभी कैंसर की तरह किसी को भी हो सकता है लेकिन कुछ लोगों को इसका जोखिम अधिक होता है। जिन लोगों के बाल व आंखों का रंग हल्का हो उनके लिए ये जोखिम बढ़ जाता है। स्किन कैंसर, अप्राकृतिक त्वचा कोशिकाओं या ऊतकों की असामान्य वृद्धि है। यह आमतौर पर शरीर के उन अंगों में विकसित होते हैं जो सूर्य की रोशनी के संपर्क में ज्यादा होते हैं, लेकिन ये नियमित रूप से सूरज की रोशनी न मिलने के वजह से भी हो सकता है। आंकड़े बताते हैं कि भारतीय पुरुषों में महिलाओं की तुलना में त्वचा कैंसर लगभग 70 प्रतिशत अधिक होता है। 

 

स्किन कैंसर के प्रकार

बेसल सेल कार्सिनोमा त्वचा कैंसर का सबसे सामान्य रूप है इससे हर साल लगभग 90 प्रतिशत लोग पीड़ित होते हैं। ये अक्सर सिर या गर्दन पर ज्यादा होते हैं। 

स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा

 इस प्रकार का त्वचा कैंसर आपकी त्वचा की बाहरी हिस्सों में विकसित होता है, और यह बेसल सेल कार्सिनोमा की तुलना में अधिक नुकसानदेह होता है। यह आपकी त्वचा पर लाल, पपड़ीदार घावों के रूप में दिखाई दे सकता है।

मेलेनोमा त्वचा कैंसर 

सबसे कम होता है, लेकिन ये सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। वास्तव में, यह सिर्फ एक प्रतिशत लोगो को होता है लेकिन यह हर साल त्वचा कैंसर से होने वाली अधिकांश मौतों का कारण बनता है। ज्यादातर त्वचा कैंसर सूरज से सुरक्षा उपायों के जरिये आसानी से रोका जा सकता है।

स्किन कैंसर से बचने के उपाय

दिन में सूरज से बचें, सूरज से बचना सबसे अच्छा उपाय है, इससे आपको उन सनबर्न से बचने में मदद मिलती है जो त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं और त्वचा कैंसर को बढ़ावा देते हैं।

 
शरीर पर तेल की मालिश करने से भी त्वचा कैंसर का खतरा कम हो सकता है। इसके लिए जिस तेल में एसपीएफ की मात्रा होती है उसी तेल से शरीर पर मालिश करें। मालिश करने के लिए बादाम का तेल, नारियल का तेल इस्तेमाल कर सकते है। यह तेल हमारी त्वचा का सूरज की तेज किरणों से भी बचाव करते हैं और त्वचा कैंसर के खतरेको कम करते हैं। 
 (क्रमश ( शेष दूसरी अंक में कल पढ़े)

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Aug 20 2019, 11:04

शुगर की बीमारीं का स्थायी समाधान है मेटाबोलिक उपचार,यह करता है कई बीमारियों से बचाव



डायबिटीज की मुख्य वजह है शरीर की कोशिकाओं के द्वारा एनर्जी / उर्जा का सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाना. मेटाबोलिक उपचार के द्वारा कोशिकाओं के मेटाबोलिज्म को ठीक किया जाता है जिससे कोशिकाओं द्वारा उर्जा का सही इस्तेमाल होने लग जाता है. मेटाबोलिक उपचार से डायबिटीज की मूल समस्या ही ख़त्म हो जाती है. जब कोशिकाएं उर्जा का सही इस्तेमाल करने लगती हैं तो  शरीर में ताकत आती है जिससे सेक्स की समस्या मिट जाती है और आप सुखी जीवन का आनंद ले सकते हैं. क्योंकि आपके भय का अंत हो जाता है इसलिए आप परिवार और समाज के लिए सार्थक जीवन जीते हैं. डायबिटीज में मेटाबोलिक उपचार से किडनी फेलियर जैसे दुष्परिणाम नहीं होते. मेटाबोलिक उपचार से डायबिटीज के दुष्परिणाम जैसे किडनी फेलियर, कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज, नपुंसकता इत्यादि भी ठीक होते हैं.  


डायबिटीज में किडनी फेलियर के भय से बेहतर है मेटाबोलिक उपचार


मेटाबोलिक उपचार के द्वारा डायबिटीज की मूल समस्या ही खत्म हो जाती है, और आप किडनी फेलियर, हृदयाघात, अंधापन जैसे दुष्परिणाम से बच जाते हैं.

यह उपचार डायबिटीज टाइप -1 और टाइप 2 दोनों में सामान रूप से कारगर है.

मेटाबोलिक पद्धति द्वारा डायबिटीज के उपचार के फायदे

  इंजेक्शन से मुक्ति (टाइप-1 और टाइप-2 दोनों में)

डायबिटीज के दुष्परिणाम-

अंधापन, हृदयाघात और किडनी फेलियर की सम्भावना न के बराबर होती है.

असमय बुढापे से मुक्ति : 

डायबिटीज के मरीज की उम्र 20 साल और बढ़ाई जा सकती है.
मरीज़ को मानसिक समस्या जैसे- यादाश्त कम होना, डिप्रेशन, सुस्ती, इत्यादि से मुक्ति.
जोड़ों का दर्द, स्फूर्ति की कमी, इत्यादि से मुक्ति.

पेट की समस्या जैसे- दर्द, कब्जियत, बार-बार पेट ख़राब होना, इत्यादि से मुक्ति.

मेटाबोलिक उपचार से कैंसर होने की सम्भावना ख़त्म हो जाती है.
मेटाबोलिक उपचार से शरीर में रोग प्रतिरक्षण (इम्युनिटी) की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे सर्दी, बुखार, जुकाम, इत्यादि कम होता है.

मेटाबोलिक उपचार से किडनी मजबूत होता है, और उसके ख़राब होने की सम्भावना न के बराबर होती है.

हृदयरोग (Atherosclerosis) से बचाव करता है मेटाबोलिक उपचार.

सेक्स की समस्या भी ठीक होती है.

मेटाबोलिक उपचार की सफलता दर

डायबिटीज के परम्परागत  उपचार जैसे रोज इंजेक्शन लेना अथवा शुगर कण्ट्रोल करने की दवाई इत्यादि से शुगर कभी भी कण्ट्रोल नहीं हो सकता. इस तरह के उपचार से किडनी फेलियर इत्यादि से बचाव भी नहीं होता. यही वजह है  कि गणमान्य लोग  जिसे अच्छी चिकित्सा उपलब्ध है वह ज्यादा किडनी फेलियर का शिकार हो रहे हैं.

मेटाबोलिक उपचार से शुगर तुरंत ही कण्ट्रोल हो जाता है क्योंकि इसमें कोशिकाओं की मुख्य समस्या ही खत्म हो जाती है . क्योंकि बिम

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Aug 19 2019, 07:42

हमारे खून में शुगर का लेबल बढ़ना हमारे लिए जानलेवा हो सकता है आइये इसको संतुलित करने के लिए करें यह पांच उपाय

आज शुगर की बीमारीं एक आम बात हो गयी है । लोंगो की जीवनचर्या और खान -पान के कारण लोग शुगर से ग्रस्त हो जाते हैं , इस बीमारीं को साइलेंट किलर कहा जाता  है जो आहिश्ता -आहिश्ता हमे मौत के करीब ले जाता है ।किडनी फेल,नस डैमेज,आंख डैमेज,हार्ट डैमेज, गैंगरीन और कई तरह की बीमारीं  इसके कारण हमें हमारी पूरी सिस्टम को नष्ट कर देता है। 
इसके लिए हमे कुछ उपाय करना चाहिए।जिस से अपने खून में शुगर का लेबल कम किया जा सके
     
1 पैदल चलना - पैदल चलना यानि टहलना और हल्का फुल्का ही सही लेकिन व्यायाम करना आपके ब्लड शुगर के बढ़ते स्तर को कम कर सकता है। अत: रोजाना सुबह शाम टहलने की आदत डालें।
 
2 हरी सब्जियां - हरी सब्जियां जैसे पालक, करेला, लौकी, गोभी आदि का सेवन करें। इनमें विटामिन्स, बीटा कैरोटीन और मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा होती है जो शुगर में लाभकारी है।
  
3 मेथीदाना - मेथीदाने का सेवन रक्त में शुगर के स्तर को कम करने में बेहद फायदेमंद है। रोजाना इसका सेवन करने से शुगर का स्तर नियंत्रण में रहेगा।
 
4 जौ का सेवन - जौ फाइबर से भरपूर होती है और शरीर में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को लंबे समय तक मेटाबोलइज करने में मददगार है। रोजाना इसे किसी न किसी रूप में आहार में शामिल करें। 

5 विटामिन डी - रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए शरीर में विटामिन डी का स्तर बनाए रखें। विटामिन डी की कमी होने पर शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है।

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Aug 12 2019, 10:03

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के बारे में जरूरी जानकारी रखें और जीवन शैली को बदलें-

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के कारण:

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारीं  जीवन शैली में आये बदलाव और रहन सहन की गड़बड़ियों के के कारण होता है ।इस तरह के रोग बेहिसाब शराब और सिगरेट पीने, फास्ट फूड ज्यादा खाने और काम के वक्त दफ्तर  में तनावपूर्ण स्थितियां बनने से होता हैं.

जेनेटिक कारण

 इस बारे में ताजा अध्ययनों से पता चला है कि जेनेटिक रचना में एकाएक आए किसी तरह के बदलाव के कारण पैंक्रियाइटिस और पित्ताशय की पथरी जैसे रोग अधिक होते हैं.

आसपास का परिवेश और स्वच्छता साफ-सफाई की कमी से हेपेटाइटिस और तपेदिक जैसे संक्रमण होते हैं.

एहतियाती उपाय:

पोषक खुराक लें, कसरत करें, धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें, खुद को साफ रखने के अलावा टीके वगैरह भी जरूरी हैं. पेट, बड़ी आंत, लीवर कैंसर की जांच भी करवाएं.

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Aug 11 2019, 09:40

स्वास्थ्य और उसकी देखभाल  - 1

कुछ परहेज और कुछ चीजो के सेवन से आप प्राकृतिक तरीका से गैस से मुक्ति पा सकते हैं

पेट में गैस एक आम परेशानी है। इसके लिए कई लोग इलाज के लिए डॉक्टरों के पास जाते हैं।। लेकिन पेट में गैस की समस्या को घरेलू नुस्खे और खाद्य पदार्थों से भी दूर किया जा सकता है।

1  पेट में गैस को दूर करने के लिए खाने में मूंग, चना, मटर, अरहर, आलू, सेम, चावल, तथा तेज मिर्च मसाले युक्त आहार अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही जल्दी पचने वाले आहार जैसे सब्जियां, खिचड़ी, चोकर सहित बनी आटें की रोटी, दूध, तोरई, कद्दू, पालक, टिंडा, शलजम, अदरक, आवंला, नींबू आदि का सेवन ज्यादा करना चाहिए।

 
1    फलों की बात करें तो सेब में विटामिन ए और सी के साथ अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। रोजाना खाली पेट एक सेब खाने से गैस, कब्ज व एसिडिटी जैसी पेट की समस्याएं दूर हो जाती हैं। 


3   अदरक पेट की समस्याओं के लिए बेहतरीन औषधि है। इसके नियमित सेवन से गैस, एसिडिटी, भूख न लगना आदि समस्याएं खत्म हो जाती हैं। साथ ही रोजाना सुबह एक कप अदरक की चाय पीने से पाचन दुरुस्त रहता है। अदरक के रस में थोड़ा शहद मिलाकर पीने से भी पेट की समस्याएं दूर हो जाती हैं।


3    पुदीना में एंटी इंफ्लामेंट्री और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं। पेट में दर्द हो तो पुदीने का शर्बत या जूस बनाकर पीने से लाभ होता है। नींबू का सेवन पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। रोजाना खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से कब्ज नहीं होती है। पपीता में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है। यदि आपको पाचन तंत्र से जुड़ी कोई समस्या हो तो खाने के बाद पपीता का सेवन करें। अजवाइन भी पेट के लिए औषधि का काम करता है। अजवाइन को चबाकर खाएं और उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट दर्द ठीक हो जाएगा। साथ ही ग्रीन टी बनाकर पीने से गैस की प्रॉब्लम से तुरंत राहत मिलती है।

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Aug 08 2019, 09:55

स्वास्थ्य और उसकी देखभाल

पेट में गैस बनने के किया है कारण और इसका कैसे कर सकते है निवारण आइये जानते हैं इसे

   आज की दिनचर्या से अधिकांश लोग गैस की समस्या से आए दिन परेशान नज़र आते हैं. लेकिन लोग इस समस्या को मामूली समझकर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं. कई बार पेट में गैस होने की वजह से भूख की कमी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और पेट फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. हालांकि पेट में गैस की समस्या कई कारणों से हो सकती है लेकिन समय रहते अगर इसके सही वजह को जान लिया जाए तो इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है. तो चलिए इस लेख के ज़रिए हम आपको बताने जा रहे हैं पेट में गैस होने के 7 कारण और उसका निवारण, जिसकी मदद से आप गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

1- पहला कारण 

कई बार कब्ज की समस्या के कारण शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स ठीक तरह से बाहर नहीं आ पाते हैं जिसके चलते पेट में गैस बनने लगती है.

निवारण- 

कब्ज के कारण होनेवाली गैस की समस्या से बचने के लिए दिनभर में 8-10 गिलास पानी पिएं और डाइट में फाइबर वाले फूड्स की मात्रा बढ़ाएं.
 
2- दूसरा कारण

 जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे उनका डाइजेशन कमज़ोर होने लगता है. ऐसे में दूध और दूध से बनी चीजें ठीक से डाइजेस्ट नहीं हो पाती हैं और पेट में गैस बनने लगती है. 

निवारण- 

45 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों को दही के अलावा बाकी डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कम कर देना चाहिए.

3- तीसरा कारण

 कई बार पेट में अच्छे और खराब बैक्टीरिया के बीच संतुलन बिगड़ जाने की वजह से भी गैस की समस्या हो जाती है. या फिर कई बार असंतुलन की किसी बीमारी के साइड इफेक्ट्स की वजह से भी पेट में गैस बनती है. निवारण- लहसुन, प्याज और बीन्स जैसी चीजें अच्छे और खराब बैक्टीरिया के बीच संतुलन बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार होती हैं इसलिए इनसे परहेज़ करना ही बेहतर है.

4- चौथा कारण 

कुछ लोग किसी बीमारी के दौरान एंटीबायोटिक्स दवाइयां लेते हैं जिसके साइड इफेक्ट्स के चलते पेट में अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं. जिससे पाचन क्रिया बाधित होती है और पेट में गैस बनने लगती है. निवारण- अगर एंटीबायोटिक्स लेने के बाद आपको गैस की समस्या हो रही है तो फिर डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.

5- पांचवां कारण

कई बार उम्र के साथ-साथ शरीर में हार्मोनल चेंजेस आने लगते हैं जिसके चलते पाचन क्रिया खराब होने लगती है और पेट में गैस बनने की समस्या होने लगती है.

 निवारण-

इससे बचने के लिए बैलेंस डाइट लें और हर रोज़ कम से कम 30 मिनट तक एक्सरसाइज़ जरूर करें.

6- छठा कारण

 कई लोग अक्सर खाने को चबाकर खाने के बजाय जल्दी-जल्दी में उसे निगल जाते हैं. खाना ठीक से न चबाने की वजह से पेट मे