किसान आईडी ना बनने से आलू किसानों के सामने आ रही समस्या, किसान नेता ने की तिथि बढ़ाने की मांग
फर्रुखाबाद।
किसान आंदोलन के प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में मांग की है कि भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना के अंतर्गत कोल्ड स्टोरेज भंडारण अनुदान की समय-सीमा बढ़ाने, शीतगृह स्वामियों को किसानों के दस्तावेज पूर्ण कराने की जिम्मेदारी सौंपने एवं जिला आलू विकास अधिकारी द्वारा तय समय में धनराशि अंतरित कराने के संबंध में कार्यवाही होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा आलू उत्पादक किसानों के हित में आलू की उचित कीमत न मिलने के कारण “किसान आंदोलन” को देखते हुये शुरू की गई 'भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना' शुरू की गई है।
परंतु, वर्तमान में जमीनी स्तर पर किसानों को इस योजना का लाभ लेने में तीन मुख्य व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके निवारण हेतु आपका ध्यान आकर्षित करना अत्यंत आवश्यक है:
उन्होंने कहा कि समय-सीमा की कमी: तकनीकी कारणों, सर्वर की धीमी गति और एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान आईडी बनने में हो रहे विलंब के कारण बहुत से पात्र किसान समय पर ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाए हैं। यदि आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो हजारों छोटे और सीमांत किसान इस वित्तीय सहायता से वंचित रह जाएंगे।
शीतगृह स्तर पर दस्तावेजों की अपूर्णता: ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण किसानों के पास कोल्ड स्टोरेज से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे गेट पास,किराया शुल्क की रसीद और डिलीवरी ऑर्डर पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हैं। चूंकि यह सारा रिकॉर्ड शीतगृह स्वामियों के पास सुरक्षित रहता है, इसलिए आसानी से पूर्ण करवा सकते हैं।
अनुदान राशि मिलने में देरी: आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जिला स्तर पर फाइलों के लंबित रहने से किसानों के बैंक खातों में अनुदान राशि पहुंचने में काफी समय लग रहा है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में आदेश जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि
• अनुदान के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि को आगे 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया जाए ताकि कोई भी पात्र किसान वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि हर कोल्ड स्टोरेज मालिकों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए कि वे अपने यहाँ आलू भंडारित करने वाले किसानों के गेट पास, किराया शुल्क की रसीद और डिलीवरी ऑर्डर को अपने स्तर पर अनिवार्य रूप से पूर्ण कराकर किसानों को उपलब्ध कराएं या पोर्टल पर अपलोड कराने में सहयोग करें।
जिला आलू विकास अधिकारी / उद्यान अधिकारी को निर्देशित किया जाए कि वे आवेदनों का त्वरित सत्यापन कर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर अनुदान की धनराशि सीधे किसानों के आधार लिंक बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजना सुनिश्चित करें।
इस न्यायसंगत निर्णय से प्रदेश के लाखों आलू उत्पादक किसानों को समय पर आर्थिक लाभ मिलेगा और योजना का वास्तविक उद्देश्य धरातल पर सफल होगा।
Oct 23 2026, 12:58
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