शिवा शर्मा केस: 2200 किमी तक पुलिस को छकाती रही श्रद्धा दुबे
नागपुर में ऐसे बिछाए गए गिरफ्तारी के जाल, सिम निकालकर दूसरे के वाई-फाई से करती रही बातचीत, बुर्का पहनकर बदली पहचान
बहन और ड्राइवर के साथ लखनऊ पहुंची आरोपी मॉडल, अब पूछताछ में खुलेंगे कई राज
लखनऊ। कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में करीब 11 दिनों से फरार चल रही मॉडल श्रद्धा दुबे को आखिरकार उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को भी पकड़ा गया। गुरुवार को तीनों को लखनऊ लाया गया, जहां उन्हें हजरतगंज कोतवाली ले जाया गया। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रद्धा ने कई शहरों में ठिकाने बदले, मोबाइल फोन से सिम निकाल दिए और इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए दूसरे लोगों के नेटवर्क का सहारा लिया। करीब 2200 किलोमीटर की यात्रा के दौरान वह अपनी बहन और ड्राइवर के साथ कई होटल और लॉज में रुकी। पुलिस की टीमें कई बार उसके संभावित ठिकानों तक पहुंचीं, लेकिन आरोपियों के वहां से निकल जाने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। आखिरकार नागपुर में एक टैक्सी चालक के मोबाइल इंटरनेट से जुड़े सुराग के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
नागपुर से लखनऊ लाई गईं श्रद्धा, रश्मि और दानिश
कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और चालक दानिश के खिलाफ हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में आदिल समेत अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए थे। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया गया था। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी। बाद में उत्तर प्रदेश एसटीएफ को भी तलाश में लगाया गया। मंगलवार, 20 अक्टूबर को लखनऊ पुलिस, उत्तर प्रदेश एसटीएफ और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद बुधवार को उन्हें नागपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस उन्हें लेकर लखनऊ रवाना हुई। लखनऊ पहुंचने पर तीनों को हजरतगंज कोतवाली ले जाया गया। यहां पूछताछ के बाद उनका सिविल अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाना था और फिर उन्हें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में पेश करने की प्रक्रिया निर्धारित थी।
दस दिनों तक पुलिस को देती रही चकमा
पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान श्रद्धा ने अपनी बहन और ड्राइवर के साथ लगातार ठिकाने बदले। वह कई शहरों में होटल और लॉज में रुकी। पुलिस को ऐसे आठ से दस ठिकानों की जानकारी मिली, जहां टीमों के पहुंचने से पांच से छह घंटे पहले ही आरोपी निकल चुके थे। जांच के दौरान आरोपियों की लोकेशन कभी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मिली तो कभी नेपाल में होने की जानकारी सामने आई। पुलिस जब किसी संभावित ठिकाने पर पहुंचती, तब तक आरोपी वहां से आगे निकल चुके होते थे। इससे उनकी गिरफ्तारी में देरी हुई। पुलिस के अनुसार, श्रद्धा ने अपनी पहचान छिपाने के लिए बुर्के का भी इस्तेमाल किया। वह टैक्सी और अन्य वाहनों से सफर करती रही तथा किसी एक जगह पर ज्यादा समय तक नहीं ठहरती थी। लगातार बदलते ठिकानों और संचार के अलग-अलग तरीकों के कारण पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
सिम निकालकर दूसरे के वाई-फाई से करती थी बातचीत
इस मामले में सबसे अहम पहलू आरोपियों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका रहा। पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान श्रद्धा, रश्मि और दानिश ने अपने मोबाइल फोन से सिम कार्ड निकाल दिए थे। वे सामान्य कॉल करने से बच रहे थे और फेसटाइम तथा व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों से बातचीत कर रहे थे। पुलिस को कुछ समय बाद आरोपियों के मोबाइल पर इंटरनेट सक्रिय होने के संकेत मिले। इंटरनेट कुछ देर चलता और फिर बंद हो जाता था। जांच टीमें आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल सुरागों के आधार पर उनकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास करती रहीं, लेकिन कई बार संबंधित स्थान पर पहुंचने पर आरोपी वहां नहीं मिलते थे। बताया गया कि आरोपी रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी और कैब में सफर करते समय उपलब्ध इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। इस कारण डिजिटल लोकेशन कई बार उस वाहन के चालक या अस्थायी ठिकाने तक पहुंचा देती थी, जहां आरोपी कुछ समय पहले मौजूद रहे होते थे।
नागपुर जाने वाली टैक्सी बनी गिरफ्तारी का सुराग
पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा ने कानपुर से नागपुर जाने के लिए टैक्सी बुक की थी। यात्रा के दौरान आरोपियों ने टैक्सी चालक के मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल किया। इसी गतिविधि से पुलिस को उनकी संभावित लोकेशन और यात्रा के मार्ग के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
जांच टीमें कानपुर, फतेहपुर और आगे के रास्तों पर मिले संकेतों के आधार पर सक्रिय हुईं। प्रयागराज से एसटीएफ की टीम भी रवाना की गई। पुलिस लगातार डिजिटल सुरागों का मिलान करते हुए नागपुर तक पहुंची।
बताया गया कि जब टैक्सी चालक आरोपियों को छोड़कर वहां से निकला, तब लखनऊ पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर नागपुर पुलिस ने उससे पूछताछ की। इसके बाद चालक पुलिस को उस फ्लैट तक ले गया, जहां श्रद्धा मौजूद थी। संयुक्त कार्रवाई में श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस तरह जिस इंटरनेट कनेक्शन के जरिए आरोपी अपनी लोकेशन छिपाने की कोशिश कर रहे थे, वही उनकी तलाश में अहम कड़ी बन गया।
नेपाल तक पहुंचने की भी सामने आई जानकारी
पुलिस की पड़ताल में आरोपियों के नेपाल जाने की आशंका भी सामने आई थी। जानकारी के मुताबिक, वारदात के बाद श्रद्धा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ लखनऊ से सीतापुर, महमूदाबाद और बहराइच होते हुए रुपईडीहा सीमा तक पहुंची थी। इसके बाद उसके नेपाल जाने की जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार, श्रद्धा नेपाल के बुटवल में एक होटल में भी रुकी थी। हालांकि, जब पुलिस को उसके नेपाल में होने का संकेत मिला और टीमें वहां पहुंचीं, तब तक वह ठिकाना बदल चुकी थी।
जांच में यह भी सामने आया कि 16 अक्टूबर के आसपास आरोपियों ने नेपाल छोड़ दिया था। इसके बाद वे अलग-अलग रास्तों से उत्तर प्रदेश लौटे। पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा ने पहचान छिपाने के लिए कपड़े बदले और यात्रा के दौरान अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया।
आगरा और लखनऊ में भी बदले ठिकाने
नेपाल से लौटने के बाद आरोपियों की गतिविधियों के बारे में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं। बताया गया कि वे गोरखपुर के रास्ते रायबरेली पहुंचे और वहां कुछ समय रुकने के बाद आगे बढ़ गए। इसके बाद 17 अक्टूबर की सुबह उनके आगरा पहुंचने और एक होटल में ठहरने की जानकारी सामने आई। वहां के सीसीटीवी फुटेज मिलने की बात भी कही गई।
18 अक्टूबर को श्रद्धा के लखनऊ पहुंचने और विभूतिखंड क्षेत्र में एक समाचार एजेंसी को बयान देने की जानकारी सामने आई। उसका यह बयान मीडिया में प्रसारित होने के बाद पुलिस की तलाश और तेज हो गई। इसके बाद श्रद्धा ने लखनऊ के कमता क्षेत्र से नागपुर जाने के लिए टैक्सी बुक की और आगे का सफर शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, रास्ते में टैक्सी बदले जाने से उसकी लोकेशन का पता लगाना और चुनौतीपूर्ण हुआ। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े सुरागों के आधार पर पुलिस अंततः नागपुर तक पहुंच गई।
श्रद्धा के व्यवहार और गिरफ्तारी के बाद के घटनाक्रम की चर्चा
लखनऊ पहुंचने के बाद श्रद्धा का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई, जिसमें वह हजरतगंज कोतवाली में दाखिल होते समय हाथ हिलाती नजर आती है। सोशल मीडिया पर उसके इस अंदाज को लेकर चर्चाएं हुईं।
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के हवाले से बताया गया कि श्रद्धा गिरफ्तारी से बचने के लिए बुर्के में रहती थी, टैक्सी का इस्तेमाल करती थी और किसी एक स्थान पर अधिक देर तक नहीं रुकती थी। यह भी बताया गया कि गिरफ्तारी के बाद गाड़ी में बैठने को लेकर उसने आपत्ति जताई थी और आगे की सीट पर बैठना चाहती थी, जबकि पुलिसकर्मियों ने उसे पीछे बैठाया।
इन घटनाक्रमों के बीच पुलिस का मुख्य ध्यान अब आरोपियों से पूछताछ कर उनकी फरारी, यात्रा और कारोबारी शिवा शर्मा की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच करने पर है।
वायरल कॉल रिकॉर्डिंग से उठे सवाल, फोरेंसिक जांच अहम
शिवा शर्मा और श्रद्धा दुबे के बीच बातचीत की कुछ कथित कॉल रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। इन रिकॉर्डिंग में दोनों के बीच तीखी बहस और धमकी भरी बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। एक कथित रिकॉर्डिंग में श्रद्धा के शिवा को प्रताड़ित करने और उसे बदनाम करने की बात कहने का दावा भी किया गया है।
कुछ बातचीत के दौरान तीसरे व्यक्ति के कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े होने और एक अन्य व्यक्ति के लिए ‘सर’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित समाचार रिपोर्ट ने भी रिकॉर्डिंग की पुष्टि नहीं की थी। इसलिए इनकी सत्यता और उनमें सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान को लेकर निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा। पुलिस द्वारा इन रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच कराए जाने और जांच रिपोर्ट को विवेचना में शामिल किए जाने की बात कही गई है।
शिवा शर्मा की मौत का मामला क्या है?
पुलिस के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद अलीगंज निवासी कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर अगले दिन हजरतगंज थाने में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की।
श्रद्धा ने पहले एक साक्षात्कार में शिवा की हत्या करने से इनकार किया था। उसका दावा था कि शिवा उसकी आंखों के सामने इमारत की चौथी मंजिल से कूदा था। दूसरी ओर, मृतक के परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौत की परिस्थितियों और इसमें किसी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
इनाम बढ़ा, पुलिस अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी के बीच पुलिस ने उनकी तलाश तेज की थी। शुरुआती दौर में श्रद्धा और उसके साथियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया गया।
इस दौरान हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया। बाद में डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को पद से हटाए जाने और एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को भी पद से हटाए जाने की जानकारी सामने आई। इन कार्रवाइयों के बीच मामले की जांच और आरोपियों की तलाश पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी रही।
अब पूछताछ पर टिकी निगाहें
श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस के सामने कई सवाल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि वारदात के बाद आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया, फरारी के दौरान उन्हें किसने मदद दी, नेपाल जाने और लौटने की परिस्थितियां क्या थीं तथा कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका रही।
इसके अलावा वायरल कॉल रिकॉर्डिंग, डिजिटल गतिविधियों, सीसीटीवी फुटेज और यात्रा के दौरान सामने आए सुरागों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। इन सभी तथ्यों का सत्यापन होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, तीनों आरोपियों को नागपुर से लखनऊ लाए जाने के बाद पुलिस की पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
शिवा शर्मा मामले की घटनाक्रमवार समयरेखा
9 अक्टूबर 2026: लखनऊ के अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।
10 अक्टूबर: शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर श्रद्धा दुबे, रश्मि, दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
13 अक्टूबर: श्रद्धा और अन्य आरोपियों की तलाश के बीच शुरुआती इनाम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई।
15 अक्टूबर: श्रद्धा के वीडियो सामने आए, जिनमें उसने शिवा की मौत को आत्महत्या बताते हुए खुद को निर्दोष बताया।
16 अक्टूबर: पुलिस ने आरोपियों की तलाश में नेपाल पुलिस से मदद मांगी। इसी दौरान आरोपियों के नेपाल से लौटने की जानकारी भी सामने आई।
17 अक्टूबर: आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया।
18 अक्टूबर: आरोपियों पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये की गई। श्रद्धा के लखनऊ पहुंचकर समाचार एजेंसी को बयान देने की जानकारी सामने आई।
19 अक्टूबर: श्रद्धा की तलाश में पुलिस टीम रायबरेली पहुंची। एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को पद से हटाए जाने की जानकारी सामने आई।
20 अक्टूबर: लखनऊ पुलिस, यूपी एसटीएफ और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश को गिरफ्तार किया गया।
21 अक्टूबर: तीनों आरोपियों को नागपुर की अदालत में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस उन्हें लेकर लखनऊ रवाना हुई। इसी दिन आदिल की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई।
21 अक्टूबर: श्रद्धा, रश्मि और दानिश को लखनऊ लाया गया और हजरतगंज कोतवाली ले जाया गया। आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
Oct 23 2026, 09:49
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0.1k