खेतों में सौर ऊर्जा उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय : सूर्य प्रताप शाही
- नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन में बोले कृषि मंत्री
- कृषि भूमि पर सोलर संयंत्र लगाने पर भी जमीन का मालिकाना हक रहेगा किसान के पास सुरक्षित
- बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं; सोलर पैनलों के नीचे होगी दलहन, तिलहन व जैविक खेती
- पीएम-कुसुम योजना के लिए राज्य सरकार ने की भारी बजट व्यवस्था, केंद्र से शीघ्र दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह
नई दिल्ली/लखनऊ- 22 अक्टूबर, 2026।नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन-2026 में उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रतिभाग किया। सम्मेलन में कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वय (एग्रीवोल्टिक्स) पर आधारित अत्याधुनिक तकनीकों, किसानों की आय संवर्धन, टिकाऊ ऊर्जा के विस्तार तथा कृषि के आधुनिकीकरण पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कृषि क्षेत्र में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के कृषक हितार्थ उपयोग तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में उठाए जा रहे अभिनव कदमों की विस्तृत जानकारी दी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की खाद्य सुरक्षा का मुख्य आधार स्तंभ है और खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने एग्रीवोल्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए पारदर्शी और किसान-हितैषी नीति लागू की है। सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए भूमि लीज पर दिए जाने की स्थिति में भी जमीन का मालिकाना हक पूरी तरह किसान के पास सुरक्षित रहेगा। इसके साथ ही निजी नलकूपों को सौर ऊर्जा से जोड़कर किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में सौर विकिरण की प्रचुरता के कारण सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। ऊंचे खंभों पर सोलर पैनल स्थापित कर उसके नीचे दलहन, तिलहन, फूलों की खेती तथा प्राकृतिक व जैविक फसलें सुगमता से उगाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में पीएम-कुसुम योजना एवं पंपों के सोलराइजेशन के लिए भारी बजट का प्रावधान किया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्रालय से कार्ययोजना की अधिसूचना शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया, ताकि योजनाओं को धरातल पर उतारकर अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित किया जा सके। अकेले गाजियाबाद जनपद में भी सैकड़ों किसान सोलर पंपों की स्थापना से लाभान्वित होकर सिंचाई लागत में बचत कर रहे हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, बिहार के उप मुख्यमंत्री/कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों सहित उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अपर कृषि निदेशक डॉ. एल. बी. यादव तथा नेडा के अधिकारी एवं लाभान्वित किसान उपस्थित रहे।
महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए जनपद भर में चलाया गया मिशन शक्ति अभियान
फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण हेतु संचालित मिशन शक्ति फेज-6.0 अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में जनपद के समस्त थाना क्षेत्रों में मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तीकरण के साथ-साथ महिला सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

*इस दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं को शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे विधवा पेंशन, मुख्यमंत्री सुमंगला योजना, बाल कल्याण योजनाओं तथा बाल मजदूरी न कराने के संबंध में जागरूक किया गया। साथ ही साइबर अपराधों से बचाव एवं सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी गई।

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भव्यता के साथ मनाया गया भारत मिलाप, राम-भरत के मिलन को देख लोग हुए भावुक

*संवाददाता कायमगंज*

कायमगंज नगर की पुरानी गल्ला मंडी में भरत मिलाप का भव्य एवं आकर्षक आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था, भाईचारे और आपसी प्रेम के प्रतीक इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा।
भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण के स्वरूपों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के प्रसंग को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
भरत मिलाप का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीराम और उनके छोटे भाई भरत का मिलन रहा। 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर दोनों भाइयों के बीच अगाध प्रेम, त्याग और समर्पण का भावपूर्ण दृश्य देखकर उपस्थित लोग भावविभोर हो उठे। यह प्रसंग भारतीय संस्कृति में पारिवारिक एकता, भाईचारे और मर्यादा के महत्व को दर्शाता है।
पुरानी गल्ला मंडी में आयोजित भारत मिलाप कार्यक्रम में प्रमुख समाजसेवी  सत्य प्रकाश अग्रवाल, डॉक्टर मिथिलेश अग्रवाल,संजय गुप्ता, अमित सेठ, पवन गुप्ता,संजय बंसल, डॉ. शरद गंगवार, डॉ विकास शर्मा, पीयूष अग्रवाल, अमर सिंह खटीक, सीओ अजय वर्मा एवं कोतवाली प्रभारी विनोद शुक्ला सहित अन्य बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान धार्मिक उत्साह और आपसी सौहार्द का माहौल देखने को मिला। भरत मिलाप के माध्यम से भगवान श्रीराम और भरत के आदर्श संबंधों को याद करते हुए लोगों ने पारिवारिक एकता, प्रेम और सामाजिक सद्भाव का संदेश ग्रहण किया।
शिवा शर्मा केस: 2200 किमी तक पुलिस को छकाती रही श्रद्धा दुबे
नागपुर में ऐसे बिछाए गए गिरफ्तारी के जाल, सिम निकालकर दूसरे के वाई-फाई से करती रही बातचीत, बुर्का पहनकर बदली पहचान

बहन और ड्राइवर के साथ लखनऊ पहुंची आरोपी मॉडल, अब पूछताछ में खुलेंगे कई राज

लखनऊ। कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में करीब 11 दिनों से फरार चल रही मॉडल श्रद्धा दुबे को आखिरकार उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को भी पकड़ा गया। गुरुवार को तीनों को लखनऊ लाया गया, जहां उन्हें हजरतगंज कोतवाली ले जाया गया। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रद्धा ने कई शहरों में ठिकाने बदले, मोबाइल फोन से सिम निकाल दिए और इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए दूसरे लोगों के नेटवर्क का सहारा लिया। करीब 2200 किलोमीटर की यात्रा के दौरान वह अपनी बहन और ड्राइवर के साथ कई होटल और लॉज में रुकी। पुलिस की टीमें कई बार उसके संभावित ठिकानों तक पहुंचीं, लेकिन आरोपियों के वहां से निकल जाने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। आखिरकार नागपुर में एक टैक्सी चालक के मोबाइल इंटरनेट से जुड़े सुराग के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

नागपुर से लखनऊ लाई गईं श्रद्धा, रश्मि और दानिश

कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और चालक दानिश के खिलाफ हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में आदिल समेत अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए थे। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया गया था। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी। बाद में उत्तर प्रदेश एसटीएफ को भी तलाश में लगाया गया। मंगलवार, 20 अक्टूबर को लखनऊ पुलिस, उत्तर प्रदेश एसटीएफ और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद बुधवार को उन्हें नागपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस उन्हें लेकर लखनऊ रवाना हुई। लखनऊ पहुंचने पर तीनों को हजरतगंज कोतवाली ले जाया गया। यहां पूछताछ के बाद उनका सिविल अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाना था और फिर उन्हें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में पेश करने की प्रक्रिया निर्धारित थी।

दस दिनों तक पुलिस को देती रही चकमा

पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान श्रद्धा ने अपनी बहन और ड्राइवर के साथ लगातार ठिकाने बदले। वह कई शहरों में होटल और लॉज में रुकी। पुलिस को ऐसे आठ से दस ठिकानों की जानकारी मिली, जहां टीमों के पहुंचने से पांच से छह घंटे पहले ही आरोपी निकल चुके थे। जांच के दौरान आरोपियों की लोकेशन कभी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मिली तो कभी नेपाल में होने की जानकारी सामने आई। पुलिस जब किसी संभावित ठिकाने पर पहुंचती, तब तक आरोपी वहां से आगे निकल चुके होते थे। इससे उनकी गिरफ्तारी में देरी हुई। पुलिस के अनुसार, श्रद्धा ने अपनी पहचान छिपाने के लिए बुर्के का भी इस्तेमाल किया। वह टैक्सी और अन्य वाहनों से सफर करती रही तथा किसी एक जगह पर ज्यादा समय तक नहीं ठहरती थी। लगातार बदलते ठिकानों और संचार के अलग-अलग तरीकों के कारण पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

सिम निकालकर दूसरे के वाई-फाई से करती थी बातचीत

इस मामले में सबसे अहम पहलू आरोपियों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका रहा। पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान श्रद्धा, रश्मि और दानिश ने अपने मोबाइल फोन से सिम कार्ड निकाल दिए थे। वे सामान्य कॉल करने से बच रहे थे और फेसटाइम तथा व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों से बातचीत कर रहे थे। पुलिस को कुछ समय बाद आरोपियों के मोबाइल पर इंटरनेट सक्रिय होने के संकेत मिले। इंटरनेट कुछ देर चलता और फिर बंद हो जाता था। जांच टीमें आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल सुरागों के आधार पर उनकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास करती रहीं, लेकिन कई बार संबंधित स्थान पर पहुंचने पर आरोपी वहां नहीं मिलते थे। बताया गया कि आरोपी रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी और कैब में सफर करते समय उपलब्ध इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। इस कारण डिजिटल लोकेशन कई बार उस वाहन के चालक या अस्थायी ठिकाने तक पहुंचा देती थी, जहां आरोपी कुछ समय पहले मौजूद रहे होते थे।

नागपुर जाने वाली टैक्सी बनी गिरफ्तारी का सुराग

पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा ने कानपुर से नागपुर जाने के लिए टैक्सी बुक की थी। यात्रा के दौरान आरोपियों ने टैक्सी चालक के मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल किया। इसी गतिविधि से पुलिस को उनकी संभावित लोकेशन और यात्रा के मार्ग के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले।

जांच टीमें कानपुर, फतेहपुर और आगे के रास्तों पर मिले संकेतों के आधार पर सक्रिय हुईं। प्रयागराज से एसटीएफ की टीम भी रवाना की गई। पुलिस लगातार डिजिटल सुरागों का मिलान करते हुए नागपुर तक पहुंची।

बताया गया कि जब टैक्सी चालक आरोपियों को छोड़कर वहां से निकला, तब लखनऊ पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर नागपुर पुलिस ने उससे पूछताछ की। इसके बाद चालक पुलिस को उस फ्लैट तक ले गया, जहां श्रद्धा मौजूद थी। संयुक्त कार्रवाई में श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस तरह जिस इंटरनेट कनेक्शन के जरिए आरोपी अपनी लोकेशन छिपाने की कोशिश कर रहे थे, वही उनकी तलाश में अहम कड़ी बन गया।

नेपाल तक पहुंचने की भी सामने आई जानकारी

पुलिस की पड़ताल में आरोपियों के नेपाल जाने की आशंका भी सामने आई थी। जानकारी के मुताबिक, वारदात के बाद श्रद्धा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ लखनऊ से सीतापुर, महमूदाबाद और बहराइच होते हुए रुपईडीहा सीमा तक पहुंची थी। इसके बाद उसके नेपाल जाने की जानकारी मिली।

पुलिस के अनुसार, श्रद्धा नेपाल के बुटवल में एक होटल में भी रुकी थी। हालांकि, जब पुलिस को उसके नेपाल में होने का संकेत मिला और टीमें वहां पहुंचीं, तब तक वह ठिकाना बदल चुकी थी।

जांच में यह भी सामने आया कि 16 अक्टूबर के आसपास आरोपियों ने नेपाल छोड़ दिया था। इसके बाद वे अलग-अलग रास्तों से उत्तर प्रदेश लौटे। पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा ने पहचान छिपाने के लिए कपड़े बदले और यात्रा के दौरान अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया।

आगरा और लखनऊ में भी बदले ठिकाने

नेपाल से लौटने के बाद आरोपियों की गतिविधियों के बारे में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं। बताया गया कि वे गोरखपुर के रास्ते रायबरेली पहुंचे और वहां कुछ समय रुकने के बाद आगे बढ़ गए। इसके बाद 17 अक्टूबर की सुबह उनके आगरा पहुंचने और एक होटल में ठहरने की जानकारी सामने आई। वहां के सीसीटीवी फुटेज मिलने की बात भी कही गई।

18 अक्टूबर को श्रद्धा के लखनऊ पहुंचने और विभूतिखंड क्षेत्र में एक समाचार एजेंसी को बयान देने की जानकारी सामने आई। उसका यह बयान मीडिया में प्रसारित होने के बाद पुलिस की तलाश और तेज हो गई। इसके बाद श्रद्धा ने लखनऊ के कमता क्षेत्र से नागपुर जाने के लिए टैक्सी बुक की और आगे का सफर शुरू किया।

पुलिस के अनुसार, रास्ते में टैक्सी बदले जाने से उसकी लोकेशन का पता लगाना और चुनौतीपूर्ण हुआ। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े सुरागों के आधार पर पुलिस अंततः नागपुर तक पहुंच गई।

श्रद्धा के व्यवहार और गिरफ्तारी के बाद के घटनाक्रम की चर्चा

लखनऊ पहुंचने के बाद श्रद्धा का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई, जिसमें वह हजरतगंज कोतवाली में दाखिल होते समय हाथ हिलाती नजर आती है। सोशल मीडिया पर उसके इस अंदाज को लेकर चर्चाएं हुईं।

एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के हवाले से बताया गया कि श्रद्धा गिरफ्तारी से बचने के लिए बुर्के में रहती थी, टैक्सी का इस्तेमाल करती थी और किसी एक स्थान पर अधिक देर तक नहीं रुकती थी। यह भी बताया गया कि गिरफ्तारी के बाद गाड़ी में बैठने को लेकर उसने आपत्ति जताई थी और आगे की सीट पर बैठना चाहती थी, जबकि पुलिसकर्मियों ने उसे पीछे बैठाया।

इन घटनाक्रमों के बीच पुलिस का मुख्य ध्यान अब आरोपियों से पूछताछ कर उनकी फरारी, यात्रा और कारोबारी शिवा शर्मा की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच करने पर है।

वायरल कॉल रिकॉर्डिंग से उठे सवाल, फोरेंसिक जांच अहम

शिवा शर्मा और श्रद्धा दुबे के बीच बातचीत की कुछ कथित कॉल रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। इन रिकॉर्डिंग में दोनों के बीच तीखी बहस और धमकी भरी बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। एक कथित रिकॉर्डिंग में श्रद्धा के शिवा को प्रताड़ित करने और उसे बदनाम करने की बात कहने का दावा भी किया गया है।

कुछ बातचीत के दौरान तीसरे व्यक्ति के कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े होने और एक अन्य व्यक्ति के लिए ‘सर’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित समाचार रिपोर्ट ने भी रिकॉर्डिंग की पुष्टि नहीं की थी। इसलिए इनकी सत्यता और उनमें सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान को लेकर निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा। पुलिस द्वारा इन रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच कराए जाने और जांच रिपोर्ट को विवेचना में शामिल किए जाने की बात कही गई है।

शिवा शर्मा की मौत का मामला क्या है?

पुलिस के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद अलीगंज निवासी कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर अगले दिन हजरतगंज थाने में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की।

श्रद्धा ने पहले एक साक्षात्कार में शिवा की हत्या करने से इनकार किया था। उसका दावा था कि शिवा उसकी आंखों के सामने इमारत की चौथी मंजिल से कूदा था। दूसरी ओर, मृतक के परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौत की परिस्थितियों और इसमें किसी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

इनाम बढ़ा, पुलिस अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई

आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी के बीच पुलिस ने उनकी तलाश तेज की थी। शुरुआती दौर में श्रद्धा और उसके साथियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया गया।

इस दौरान हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया। बाद में डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को पद से हटाए जाने और एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को भी पद से हटाए जाने की जानकारी सामने आई। इन कार्रवाइयों के बीच मामले की जांच और आरोपियों की तलाश पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी रही।

अब पूछताछ पर टिकी निगाहें

श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस के सामने कई सवाल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि वारदात के बाद आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया, फरारी के दौरान उन्हें किसने मदद दी, नेपाल जाने और लौटने की परिस्थितियां क्या थीं तथा कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका रही।

इसके अलावा वायरल कॉल रिकॉर्डिंग, डिजिटल गतिविधियों, सीसीटीवी फुटेज और यात्रा के दौरान सामने आए सुरागों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। इन सभी तथ्यों का सत्यापन होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल, तीनों आरोपियों को नागपुर से लखनऊ लाए जाने के बाद पुलिस की पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।

शिवा शर्मा मामले की घटनाक्रमवार समयरेखा

9 अक्टूबर 2026: लखनऊ के अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।

10 अक्टूबर: शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर श्रद्धा दुबे, रश्मि, दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

13 अक्टूबर: श्रद्धा और अन्य आरोपियों की तलाश के बीच शुरुआती इनाम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई।

15 अक्टूबर: श्रद्धा के वीडियो सामने आए, जिनमें उसने शिवा की मौत को आत्महत्या बताते हुए खुद को निर्दोष बताया।

16 अक्टूबर: पुलिस ने आरोपियों की तलाश में नेपाल पुलिस से मदद मांगी। इसी दौरान आरोपियों के नेपाल से लौटने की जानकारी भी सामने आई।

17 अक्टूबर: आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया।

18 अक्टूबर: आरोपियों पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये की गई। श्रद्धा के लखनऊ पहुंचकर समाचार एजेंसी को बयान देने की जानकारी सामने आई।

19 अक्टूबर: श्रद्धा की तलाश में पुलिस टीम रायबरेली पहुंची। एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को पद से हटाए जाने की जानकारी सामने आई।

20 अक्टूबर: लखनऊ पुलिस, यूपी एसटीएफ और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश को गिरफ्तार किया गया।

21 अक्टूबर: तीनों आरोपियों को नागपुर की अदालत में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस उन्हें लेकर लखनऊ रवाना हुई। इसी दिन आदिल की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई।

21 अक्टूबर: श्रद्धा, रश्मि और दानिश को लखनऊ लाया गया और हजरतगंज कोतवाली ले जाया गया। आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
विधान परिषद आगरा खण्ड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए पोलिंग पार्टियों की रवानगी सम्पन्न, सभी पार्टियां अपने गंतव्य स्थलों पर सकुशल पहुंच
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक की संयुक्त निगरानी में राजकीय इंटर कॉलेज, फतेहगढ़ से रवाना की गईं पोलिंग पार्टियां*


फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत आगरा खण्ड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदान को सकुशल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराने के लिए आज जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर एवं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की संयुक्त अध्यक्षता में राजकीय इंटर कॉलेज, फतेहगढ़ से मतदान प्रक्रिया में लगे पोलिंग पार्टियों की रवानगी की गई। इस दौरान निर्वाचन संबंधी व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए मतदान कार्मिकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान जिला विकास अधिकारी श्याम कुमार तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि विधान परिषद आगरा खण्ड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए जनपद में कुल 11 मतदान केंद्रों पर 30 बूथ बनाए गए हैं। इन सभी बूथों पर मतदान प्रक्रिया सम्पन्न कराने के लिए 30 पोलिंग पार्टियों को 09 वाहनों के माध्यम से निर्धारित मतदान स्थलों के लिए रवाना किया गया।

उन्होंने बताया कि पोलिंग पार्टियों की रवानगी के उपरांत संबंधित मतदान केंद्रों पर उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेटों के माध्यम से लगातार समन्वय एवं निगरानी की गई। सभी बूथों पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेटों द्वारा अवगत कराया गया कि रवाना की गई सभी पोलिंग पार्टियां सकुशल अपने-अपने निर्धारित गंतव्य स्थलों पर पहुंच गई हैं। इससे निर्वाचन की तैयारियों को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

जिला विकास अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन के दौरान किसी भी आकस्मिक परिस्थिति अथवा आवश्यकता से निपटने के लिए 25 रिजर्व मतदान कार्मिकों की भी तैनाती की गई है। ये रिजर्व कार्मिक मतदान दिवस पर ऑफिसर क्लब में प्रतीक्षारत रहेंगे, जिससे आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल संबंधित दायित्वों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इसके अतिरिक्त रिजर्व कार्मिकों को आवश्यकता के अनुसार निर्धारित मतदान स्थलों तक पहुंचाने के लिए 03 वाहन भी रिजर्व रखे गए हैं।

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर एवं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के नेतृत्व में निर्वाचन प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पोलिंग पार्टियों की सकुशल रवानगी एवं सभी पार्टियों के अपने निर्धारित स्थलों पर पहुंचने के साथ ही मतदान संबंधी तैयारियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया गया है।

जिला प्रशासन द्वारा निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपेक्षा की गई है कि वे निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, सतर्कता एवं जिम्मेदारी के साथ सुनिश्चित करें, ताकि विधान परिषद आगरा खण्ड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन-2026 की मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष वातावरण में सम्पन्न कराई जा सके।
ई-रिक्शा से जा रहे चाचा भतीजे को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, चाचा की मौत, भतीजा घायल

*संवाददाता कायमगंज*

कायमगंज कोतवाली क्षेत्र में अज्ञात वाहन की टक्कर से ई-रिक्शा चालक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका भतीजा घायल हो गया। हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल कर दोनों को अस्पताल पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव मदारपुर निवासी 50 वर्षीय सोबरन अपने भतीजे सत्यम को ई-रिक्शा पर बैठाकर शमशाबाद थाना क्षेत्र के गांव फरीदपुर दूध लेने जा रहे थे। रास्ते में कायमगंज-फर्रुखाबाद मार्ग पर मीरपुर गांव के सामने ई-रिक्शा को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी।
हादसे में सोबरन और सत्यम दोनों गंभीर घायल हो गए हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने दोनों घायलों को पुलिस की सहायता से एंबुलेंस द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज में भर्ती कराया। जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर विपिन कुमार ने सोबरन को मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलते अस्पताल पहुंची सोबरन की पत्नी पिंकी समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक सोबरन रिक्शा चलाता था और उसकी  सात वर्षीय बेटी आशिकी, पांच वर्षीय बेटा हर्षित और तीन वर्षीय बेटी वर्षा हैं। मौत की सूचना पर अस्पताल पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
उप्र विधान परिषद की 11 सीटाें के लिये मतदान 23 अक्टूबर को, मतदान केंद्र के लिये पोलिंग पार्टियां रवाना
-उत्तर प्रदेश विधान परिषद द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के लिये सुरक्षा व्यवस्था सख्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटाें के द्विवार्षिक चुनाव के लिये शुक्रवार 23 अक्टूबर को मतदान होगा। मतदान केंद्रों के लिये पोलिंग पार्टियां रवाना हो गई हैं। इस द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के लिये सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

इस चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रत्याशी दिन- रात किये हैं। भाजपा और सपा ने एक दूसरे पर मतदाता सूची को लेकर आरोप भी लगाए हैं। भाजपा की कोशिश जहां पिछली सीटें बरकरार रखते हुए अन्य सीटें जीतने की है, वहीं सपा भी इसी फार्मूले पर बेहतर प्रदर्शन करने में जुटी हुई है। वहीं 23 अक्टूबर को हाेने वाले मतदान वाले जिलों में मतदान से जुड़ी सभी जरूरी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पोलिंग पार्टियां अपने अपने मतदान केंद्रों की ओर रवाना होने लगी हैं।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हाे रहे चुनाव के मद्देनजर सरगर्मी तेज है। इन सीटाें में आगरा क्षेत्र स्नातक और शिक्षक, मेरठ क्षेत्र स्नातक और शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद क्षेत्र शिक्षक , लखनऊ क्षेत्र स्नातक और शिक्षक, वाराणसी क्षेत्र स्नातक और शिक्षक , इलाहाबाद-झांसी क्षेत्र स्नातक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों ने मतदान केंद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न हाेने पाये। 23 अक्तूबर को सुबह 8 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा ।

उम्मीदवारों का बूथ मैनेजमेंट पर जोर

23 अक्टूबर होने वाले मतदान के मद्देनजर राजनीतिक दल और उम्मीदवार अब अपने-अपने बूथ मैनेजमेंट में लगे हुए हैं ताकि किसी भी समर्थक मतदाता मतदान से वंचित न होने पाए और अधिक से अधिक मतदान अपने पक्ष में करा सकें। बूथाें पर इन दलाें व उम्मीदवाराें के अपने अपने प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

मतदान के मद्देनजर उत्तर प्रदेश शासन ने 23 अक्टूबर को विशेष आकस्मिक अवकाश की घोषणा की है ताकि मतदान में अधिक से अधिक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। मतदाताओं काे यह अवकाश मिलने से अब वे सुविधानुसार मतदान कर सकेंगे। इस संबंध में संबंधित जिलाें से भी निर्देश जारी किये गये हैं।

मतदान से नहीं होगा कोई वंचित

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 05 स्नातक एवं 06 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के दिन मतदाता सूची में मतदाता के विवरण में आंशिक लिपिकीय अथवा मुद्रण संबंधी त्रुटियां होने के आधार पर किसी भी मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में समस्त संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनपद मऊ ग्राम सभा अमारी में मेले का आयोजन, उमड़ी लोगों की भारी भीड़

रामलीला कमेटी और सहयोगियों ने मेले के सफल आयोजन में निभाई अहम भूमिका

अमारी, मऊ। जनपद मऊ के ग्राम सभा अमारी में आज मेले का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं, दुकानदारों एवं क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मेले में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। विभिन्न दुकानों पर लोगों की चहल-पहल बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल नजर आया।

मेले के सफल आयोजन में रामलीला कमेटी एवं रामलीला से जुड़े सहयोगियों ने भरपूर सहयोग प्रदान किया। कमेटी के सदस्यों और सहयोगियों के सामूहिक प्रयास से मेले का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने भी मेले में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।

ग्राम सभा अमारी में आयोजित यह मेला ग्रामीण संस्कृति, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक बना। मेले में लोगों की भागीदारी ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी।

इस प्रकार के आयोजन ग्रामीण परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ लोगों को आपस में जुड़ने और मेल-मिलाप का अवसर भी प्रदान करते हैं।
13 केंद्रों पर होगी पीईटी, प्रत्येक पर एक-एक स्टेटिक और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात

*25 व 30 अक्टूबर और एक नवंबर को होगी परीक्षा*


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। 25 व, 30 अक्तूबर और एक नवंबर को होने वाली परीक्षा जिले में निर्धारित 13 केंद्रों पर होगी। दो-दो पालियों में होने वाली परीक्षा होगी। हर पाली में 5664 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। इस तरह से कुल 33 हजार 984 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। पारदर्शी एवं सुचितापूर्ण परीक्षा कराने के लिए हर केंद्र पर एक-एक स्टेटिक और एक-एक सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है।


उत्तर प्रदेश में कई भर्तियों के लिए प्रारंभिक अर्हता परीक्षा अनिवार्य है। यूपीएसएसएससी की ओर से प्रारंभिक अर्हता परीक्षा 25 अक्तूबर, 30 अक्तूबर और एक नवंबर को कराई जाएगी। परीक्षा में अब सप्ताह भर से भी कम समय बचा है। केंद्र निर्धारण के बाद डीएम शैलेष कुमार की संस्तुति पर शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष, स्टेटिक और सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी है। सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में जिला स्तरीय अधिकारी के साथ तहसीलदार, एसडीएम और स्टेटिक मजिस्ट्रेट के रूप में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस बार भी पीईटी के लिए राजकीय, वित्तपोषित और सीबीएसई के विद्यालयों को ही केंद्र बनाया गया है। पहली पाली की परीक्षा सुबह 10 से 12 बजे और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि एक पाली में 5664 अभ्यर्थियों समेत कुल छह पालियों में 33 हजार 984 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। 13 केंद्रों पर होने वाली परीक्षा की निगरानी के लिए केंद्र व्यवस्थापक, स्टेटिक, सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है।




पीईटी के लिए विद्यालय बनाए गए हैं केंद्र


जिले में पीईटी के लिए कुल 13 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें पीएम श्री विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज, काशी नरेश विश्वविद्यालय में दो केंद्र, जिला पंचायत बालिका इंटर कॉलेज ज्ञानपुर और गोपीगंंज, मदर हलीमा पब्लिक स्कूल भदोही, काशीराज महाविद्यालय इंटर कॉलेज औराई, बुनमैक्स कान्वेंट स्कूल गोधना, सेंट थॉमस स्कूल ज्ञानपुर और गोपीगंज, श्री इंद्र बहादुर सिंह नेशनल इंटर कॉलेज भदोही और गुलाबधर मिश्र इंटर कॉलेज गोपीगंज, टेंडर हर्ट्स स्कूल घोसिया शामिल हैं।
अंकुश चौधरी को गांव जौली का ग्राम अध्यक्ष नियुक्त किया
अंकित जावला ने संगठन को मजबूत बनाने और जनसमस्याओं के समाधान के लिए मिलकर कार्य करने का किया आह्वान

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

जानसठ- मुजफ्फरपुर । मोरना ब्लॉक के गांव जौली में संगठन को मजबूत बनाने और ग्रामीण स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से अंकुश चौधरी को ग्राम अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति से समर्थकों और संगठन से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि अंकुश चौधरी अपनी जिम्मेदारी का निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करते हुए संगठन को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

इस दौरान अंकित जावला ने कहा कि किसी भी संगठन की असली ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। गांव स्तर पर जिम्मेदार पदाधिकारियों की नियुक्ति से संगठन की गतिविधियों को गति मिलती है और ग्रामीणों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि अंकुश चौधरी को ग्राम अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना संगठन को गांव-गांव तक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अंकित जावला ने नवनियुक्त ग्राम अध्यक्ष से अपेक्षा जताई कि वह सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चलेंगे और ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल पदों का विस्तार करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और जरूरत के समय उनकी आवाज बनना है। इसके लिए प्रत्येक पदाधिकारी और कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि युवाओं की भागीदारी से संगठन को नई ऊर्जा मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को सामाजिक कार्यों के प्रति जागरूक करना और उन्हें जनहित के कार्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

अंकुश चौधरी की ग्राम अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद उनसे संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा ग्रामीणों के हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।