*পুজো পরিক্রমা* *কলকাতা*
*পুজো পরিক্রমা* *কলকাতা*
রাজ্যে স্ট্যাম্প পেপারের আকাল, অভিযোগে জনস্বার্থ মামলা হাই কোর্টে
*কলকাতা:* রাজ্যে এই মুহূর্তে মিলছে না ১০ টাকা ও ২০ টাকার স্ট্যাম্প পেপার। যাঁদের প্রয়োজন এখন এই স্ট্যাম্প পেপারের, তাঁরা পড়ছেন সমস্যায়। এই অভিযোগে জনস্বার্থ মামলা দায়ের হল কলকাতা হাই কোর্টে। আগামী ১৯ অক্টোবর, অষ্টমীর দিন এই মামলার শুনানির সম্ভাবনা রয়েছে হাই কোর্টের প্রধান বিচারপতি বিচারপতি রবীন্দ্র ভি ঘুগের ডিভিশন বেঞ্চে। অভিযোগ, অনুমোদন রয়েছে যে সব স্ট্যাম্প পেপার ভেন্ডারদের, তাদের প্রশাসনের তরফে একটা অলিখিত নির্দেশ দেওয়া হয়েছে। আর সেই নির্দেশ অনুযায়ী ইতিমধ্যেই নাকি বাজার থেকে ২৫ হাজারের বেশি স্ট্যাম্প পেপার তুলে নেওয়া হয়েছে বলেই অভিযোগ। অভিযোগকারীর দাবি, এই সব স্ট্যাম্প পেপার নাকি পাঠনো হচ্ছে রাজ্যের থানাগুলোতে। অভিযোগ, সাধারণ তৃণমূল কর্মীদের বাড়ি গিয়ে স্ট্যাম্প পেপারে সই করানো হয়েছে। কলকাতা হাই কোর্টে আবেদনকারী বলেছেন, পুলিশ যেন এই কাজে বিরত থাকে, এমন নির্দেশ দিক কলকাতা হাইকোর্ট। এ ছাড়াও তাঁর আরও আবেদন এই সব স্ট্যাম্প পেপার বাজেয়াপ্ত করা হোক। মামলায় অভিযোগকারী আরও দাবি, কোনও স্ট্যাম্প পেপার তুলতে হলে নির্দিষ্ট কিছু আইন মেনে সেই কাজ করতে হয়। সেই স্ট্যাম্প পেপারের একটা নির্দিষ্ট রেজিস্ট্রেশনও হয়। কিন্তু অভিযোগকারী যে ভাবে কাজ হচ্ছে বলে অভিযোগ করছেন, সেখানে কোনও রেজিস্ট্রেশনও হচ্ছে না। আবার কোনও আইন মেনে সেই কাজ করা হচ্ছে না। আর এই মর্মেই কলকাতা হাই কোর্টে দায়ের হয়েছে এই জনস্বার্থ মামলা।

মামলাকারির দাবি, তৃণমূলের প্রতীক সংক্রান্ত মামলায় সুপ্রিম কোর্ট নির্দেশ দিয়েছে হলফনামা জমা দেওয়ার। সেই হলফনামা জমা করতে হবে গণতান্ত্রিক তৃণমূল অর্থাৎ তৃণমূলের ঋতব্রত গোষ্ঠীকে। অভিযোগকারী দাবি করছেন যে, গণতান্ত্রিক তৃণমূলের হয়ে ওই স্ট্যাম্প পেপারে সই করাচ্ছে পুলিশ। ঋতব্রত গোষ্ঠীর হয়ে তৃণমূল কর্মীদের বাড়ি বাড়ি গিয়ে এই স্ট্যাম্প পেপারে সই করাচ্ছে পুলিশই।
চ্যাম্পিয়ন হিসেবে খেতাব রক্ষার লড়াই শুরু ইস্টবেঙ্গলের, প্রতিপক্ষ আত্মবিশ্বাসী চার্চিল
*খেলা*

*আইএসএল*


*মারগাও, ১৭ অক্টোবর:* এমজি ইন্ডিয়ান সুপার লিগ ২০২৬-২৭-এ রবিবার ফতোরদা স্টেডিয়ামে মুখোমুখি হচ্ছে দুই চিরপ্রতিদ্বন্দ্বী চার্চিল ব্রাদার্স এসসি গোয়া এবং ইস্টবেঙ্গল এফসি। মুম্বই সিটি এফসি-কে ২-১ গোলে হারিয়ে আইএসএলে ঐতিহাসিক অভিষেক জয় নিয়ে মাঠে নামবে চার্চিল, অন্যদিকে মহাদেশীয় এবং কাপের ব্যস্ত সূচির পর ঘরোয়া লিগে অভিযান শুরু করছে গতবারের চ্যাম্পিয়ন ইস্টবেঙ্গল।

শীর্ষ লিগে প্রথম ম্যাচেই নিজেদের জাত চিনিয়ে দিয়েছে চার্চিল ব্রাদার্স। গৌরব বোরার গোলে এগিয়ে যাওয়ার পর কলম্বিয়ান স্ট্রাইকার সেবাস্তিয়ান গুতিয়েরেজের শেষ মুহূর্তের গোলে আইল্যান্ডার্সদের বিরুদ্ধে তিন পয়েন্ট নিশ্চিত করে গোয়ার ক্লাবটি। তবে হেড কোচ দিমিত্রিস দিমিত্রিউ মনে করছেন, টানা দ্বিতীয় হোম ম্যাচের আগে আরও উন্নতির জায়গা রয়েছে।

দিমিত্রিউ বলেন, “অবশ্যই আমরা জিতেছি, প্রথম তিন পয়েন্ট পেয়েছি। কিন্তু নিশ্চিতভাবেই উন্নতির অনেক জায়গা আছে। আমরা খুব কঠোর পরিশ্রম করেছি এবং আমাদের খেলা বিশ্লেষণ করেছি। আমি বিশ্বাস করি রবিবার আমরা আরও ভাল ফুটবল খেলব।”

ইস্টবেঙ্গলের জন্য রবিবারের ম্যাচটি লিগে খেতাব রক্ষার লড়াইয়ের শুরু। গোলরক্ষক ফুরবা লাচেনপা, মিডফিল্ডার দানি রামিরেজ, অস্ট্রেলিয়ান অ্যাটাকার ক্রিস ইকোনোমিডিস, ফরোয়ার্ড আকে লোবা এবং পোলিশ স্ট্রাইকার লুকাস জ্বোলিনস্কির মতো নতুন মুখ নিয়ে মাঠে নামবে লাল-হলুদ। ঘরোয়া ও আন্তর্জাতিক মঞ্চে ব্যস্ত সময় কাটাচ্ছে আন্তোনিও লোপেজ হাবাসের দল। সদ্য এএফসি চ্যাম্পিয়ন্স লিগ টু-তে ইরাকের আল-শোরতার কাছে ৩-২ গোলে হেরেছে তারা, দু’টি গোলই করেছেন ডেভিড লালহ্লানসাঙ্গা।

হাবাস কঠিন পরীক্ষার আশা করলেও লক্ষ্য পরিষ্কার — লিগ অভিযান তিন পয়েন্ট দিয়েই শুরু করা। হাবাস বলেন, “এটা আমাদের জন্য বিপজ্জনক ম্যাচ এবং আমাদের বিরুদ্ধে বিপজ্জনক দল। আমাদের লক্ষ্য তিন পয়েন্ট। আমরা তাদের সম্মান করি, কিন্তু আমাদের নিজেদের স্তর আরও বাড়াতে হবে।”

এই লড়াই দুই ক্লাবের ন্যাশনাল ফুটবল লিগ এবং আই-লিগের পুরনো ইতিহাসকে ফিরিয়ে আনে। তাদের শেষ সাক্ষাৎ ২০২০ সালের ফেব্রুয়ারিতে ১-১ ড্র হয়েছিল। রবিবারের ম্যাচটি এমজি আইএসএলের ইতিহাসে তাদের প্রথম সাক্ষাৎ, যা এই দ্বৈরথে নতুন অধ্যায় যোগ করবে।

এই ম্যাচটি প্রভাত লাকরার জন্যও বিশেষ, প্রাক্তন ক্লাব ইস্টবেঙ্গলের বিরুদ্ধে চার্চিলের জার্সিতে নামবেন তিনি। ঘরের মাঠের সুবিধা কাজে লাগাতে মরিয়া স্বাগতিকরা, অন্যদিকে চ্যাম্পিয়ন হিসেবে বার্তা দিতে তিন পয়েন্ট ছাড়া অন্য কিছু ভাবছে না ইস্টবেঙ্গল।ম্যাচ শুরু রবিবার, ১৮ অক্টোবর বিকেল ৫টায়।

ছবি:সঞ্জয় হাজরা।
আগ্নেয়াস্ত্র, কার্তুজ ও চোরাই বাইক সহ মাটিয়ায় পুলিশের জালে ২ দুষ্কৃতী
বসিরহাট : দুর্গাপুজোর আবহে গভীর রাতে নাকা তল্লাশি চালিয়ে আগ্নেয়াস্ত্র, দু’টি তাজা কার্তুজ এবং একটি চোরাই মোটরসাইকেল-সহ দুই যুবককে গ্রেফতার করলো বসিরহাটের মাটিয়া থানার পুলিশ। ধৃতদের নাম শেখ আবদুল্লাহ্ ওরফে প্রিন্স (২৬) এবং শেখ ইমতিয়াজ আলম (৩৬)। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, ধৃত প্রিন্সের আদি বাড়ি নৈহাটির ঠাকুরপাড়ায়। বর্তমানে তিনি মাটিয়া থানার সাংবেড়িয়া এলাকায় থাকতেন। অন্যদিকে, ইমতিয়াজের বাড়ি মাটিয়া থানার চাঁদনগর গ্রামে। ধৃতদের বিরুদ্ধে মাটিয়া সহ একাধিক থানায় বিভিন্ন অপরাধমূলক কাজের অভিযোগ রয়েছে বলে পুলিশ সূত্রে খবর। দীর্ঘদিন ধরেই তাদের খোঁজ চালাচ্ছিল পুলিশ। দুর্গাপুজোর আগে এলাকায় নিরাপত্তা জোরদার করতে রাতের নাকা তল্লাশি চালানোর সময় মাটিয়া থানার আইসি দীনেশচন্দ্র পালের নেতৃত্বাধীন পুলিশের হাতে ধরা পড়ে ওই দুই যুবক। তল্লাশি চালিয়ে তাদের কাছ থেকে একটি দেশীয় পিস্তল, দু’টি তাজা কার্তুজ এবং একটি চোরাই মোটরসাইকেল উদ্ধার হয়।
এই আগ্নেয়াস্ত্র কোথা থেকে এল, মোটরসাইকেলটি কোথা থেকে চুরি করা হয়েছিল এবং এই ঘটনার সঙ্গে আর কারা জড়িত রয়েছে, তা জানতে ধৃতদের জিজ্ঞাসাবাদ শুরু করেছে পুলিশ। উদ্ধার হওয়া অস্ত্র ও মোটরসাইকেলের সূত্র ধরে আরও কোনও অপরাধের যোগ রয়েছে কি না, তাও খতিয়ে দেখা হচ্ছে। ধৃত দু’জনকে গ্রেফতারের পর শনিবার বসিরহাট আদালতে পেশ করে মাটিয়া থানার পুলিশ।

*ছবি:সৌমাভ মণ্ডল।*
*'वी वांट जस्टिस' से सुप्रीम कोर्ट की जमानत तक — RG कर आंदोलन आज कहां खड़ा है?*
*कोलकाता:*  'वी वांट जस्टिस' के नारे ने कभी पूरे बंगाल को हिला दिया था। रात पर महिलाओं ने कब्जा किया था, आम लोग मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरे थे। उस आंदोलन के दो साल बाद, RG कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत ने फिर याद दिला दिया — एक व्यक्ति को सजा होने का मतलब यह नहीं कि सारे सवालों के जवाब मिल गए।

दरअसल, यह मामला शुरू से ही सिर्फ एक बलात्कार और हत्या तक सीमित नहीं था। युवा डॉक्टर की मौत ने कहीं बड़े सवाल खड़े किए थे — कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा कहां है? सरकारी अस्पताल की जवाबदेही क्या है? पुलिस ने शुरुआत में क्या किया? जांच कितनी पारदर्शी थी?

आंदोलन में सभी ने उन्हें 'अभया' कहा। कोलकाता की सड़कों से लेकर जिलों तक, देश भर से लेकर विदेश के कई शहरों तक — विरोध की आवाज एक ही थी।

*दो अलग-अलग तस्वीरें*

*1. संजय की सजा:* जनवरी 2025 में सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आपराधिक न्याय की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इससे आंदोलन के सारे सवालों का जवाब नहीं मिला।

*2. संदीप घोष की दो जमानतें, दो अलग कारण:* यहीं पर कई लोग भ्रमित हो रहे हैं।
- *पहली जमानत (अभया बलात्कार और हत्या मामला):* 13 दिसंबर 2024 को। 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण कानून के तहत सियालदह कोर्ट ने उन्हें और टाला थाने के तत्कालीन ओसी अभिजीत मंडल को जमानत दी।
- *दूसरी जमानत (वित्तीय भ्रष्टाचार मामला):* 15 अक्टूबर 2026 को। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने जमानत मंजूर की। कोर्ट ने नोट किया कि 147 गवाहों में से केवल 7 की गवाही पूरी हुई है और वे दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

*एडिटर्स व्यू: जमानत को गलत न समझें*

यहां दो चीजों को अलग-अलग समझना बहुत जरूरी है:

*जमानत का मतलब बरी होना नहीं है।* जमानत का मतलब यह नहीं कि आरोप झूठे साबित हुए हैं, न ही यह बेगुनाही का प्रमाण पत्र है। यह केवल ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है।

लेकिन साथ ही सवाल बना हुआ है — इतने चर्चित और संवेदनशील मामले में ट्रायल इतना धीमा क्यों है? दो साल में 147 में से सिर्फ 7 गवाहों की गवाही — इस रफ्तार से ट्रायल पूरा होने में और कितने साल लगेंगे? और जांच एजेंसी की जवाबदेही पर आम लोग क्या सोचेंगे?

संजय रॉय को सजा हो चुकी है, संदीप घोष जमानत पर बाहर हैं — लेकिन 'वी वांट जस्टिस' नारे के पीछे जवाबदेही की जो बड़ी मांग थी, उसका जवाब सिर्फ अदालत के फैसले में नहीं मिलेगा। जब तक तीन सवालों — न्याय की गति, जांच की पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी — का जवाब नहीं मिलता, तब तक इस आंदोलन की प्रासंगिकता खत्म नहीं होगी।

*संदीप घोष की जमानत पर CBI को ही कठघरे में खड़ा किया तिलोत्‍तमा के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने*

*कोलकाता:* आरजी कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष की जमानत के बाद सीधे CBI को ही जिम्मेदार ठहराया तिलोत्‍तमा के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने।

शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, *"147 करोड़ लोग जिस संस्था पर भरोसा कर रहे हैं, अगर उसकी तरफ से ऐसी लापरवाही है तो लोग उस पर कैसे भरोसा करेंगे। सरकार जिम्मेदार नहीं है, जिम्मेदार जांच एजेंसी है।"*

उल्लेखनीय है कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में जमानत दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 147 गवाहों में से सिर्फ 7 की गवाही पूरी हुई है और आरोपी दो साल से अधिक समय से जेल में है।

इससे पहले 2024 में अभया बलात्कार और हत्या मामले में भी 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उन्हें जमानत मिली थी।

शेखर रंजन देबनाथ ने CBI की जांच की धीमी गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर चार्जशीट दाखिल न होना और ट्रायल में देरी के कारण ही ऐसे फैसले सामने आ रहे हैं।
*छवि और रिपोर्ट: उत्पल दास*।
*পুজো পরিক্রমা* *কলকাতা*
*পুজো পরিক্রমা* *কলকাতা*
বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসবের ৭৯ তম বর্ষের শুভ সূচনা*
*নিজস্ব সংবাদদাতা, বেলগাছিয়া:* উত্তর কলকাতার অন্যতম ঐতিহ্যবাহী পুজো বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসব এবার ৭৯ তম বর্ষে পদার্পণ করল।

শুক্রবার প্রদীপ প্রজ্জ্বলনের মাধ্যমে এই ঐতিহ্যবাহী সর্বজনীন দুর্গোৎসবের শুভ উদ্বোধন হয়। উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে উপস্থিত ছিলেন পূজ্য শ্রীমৎ স্বামী মধুরূপানন্দ সরস্বতী মহারাজ, অধ্যক্ষ, শ্রী শ্রী নিগমানন্দ সদ্‌গুরু সেবাশ্রম এবং স্থানীয় বিধায়ক অতীন ঘোষ ও রীতেশ তিওয়ারি।

স্থানীয় বাসিন্দা, পুজো উদ্যোক্তা এবং বহু দর্শকের সমাগমে এক বর্ণাঢ্য অনুষ্ঠানের মধ্য দিয়ে উদ্বোধনী পর্ব সম্পন্ন হয়। উদ্যোক্তাদের তরফে জানানো হয়েছে, এবছর ৭৯ তম বর্ষে তাদের পুজোয় ঐতিহ্যের সঙ্গে আধুনিকতার মেলবন্ধন থাকছে। মণ্ডপসজ্জা থেকে আলোকসজ্জায় থাকছে বিশেষ চমক।

পুজো কমিটির সদস্যরা জানান, দীর্ঘ ৭৯ বছর ধরে বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসব এলাকার মানুষের আবেগের সঙ্গে জড়িয়ে। এবারও সকলকে নিয়ে সুষ্ঠুভাবে পুজো আয়োজনের জন্য সব রকম ব্যবস্থা নেওয়া হয়েছে।
*ছবি:সঞ্জয় হাজরা।*
ষষ্ঠীর বিকেলে উপচে পড়া ভিড় চেতলা অগ্রণীতে, কলকাতা পুজো পরিক্রমা শুরু জোর কদমে*
*পুজো পরিক্রমা*

*কলকাতা*


*নিজস্ব সংবাদদাতা, কলকাতা:* ষষ্ঠীর বিকেল থেকেই তিল ধারণের জায়গা নেই দক্ষিণ কলকাতার অন্যতম জনপ্রিয় পুজো চেতলা অগ্রণীতে। ঢাকের বোলে, আলোর মালায় আনুষ্ঠানিকভাবে শুরু হয়ে গেল বাঙালির শ্রেষ্ঠ উৎসবের কাউন্টডাউন। আর শুরুতেই ভিড়ে ভরল চেতলা।

এবছর চেতলা অগ্রণীর থিম নিয়ে ইতিমধ্যেই শহরজুড়ে উন্মাদনা। মণ্ডপে ঢুকতেই চোখ ধাঁধানো আলোকসজ্জা আর শিল্পের ছোঁয়া। সেলফি জোন থেকে শুরু করে শিশুদের ভিড়, সব মিলিয়ে ষষ্ঠীর সন্ধ্যায় উৎসবের মেজাজ একেবারে তুঙ্গে। *পরিক্রমার রুটে যা থাকছে:*

ষষ্ঠী থেকেই যারা ঠাকুর দেখতে বেরিয়েছেন, তাদের জন্য চেতলা অগ্রণী দিয়ে শুরু করাটা বেস্ট রুট।

১. *চেতলা অগ্রণী:* ভিড় সামলাতে মোতায়েন বিশাল পুলিশ বাহিনী। বিকেল ৪টে থেকেই লম্বা লাইন। মণ্ডপের ভেতরে প্রবেশ করতেই এক অন্য জগৎ।

২. *এর পরেই সুরুচি সংঘ:* চেতলা থেকে মাত্র ১০ মিনিটের দূরত্বে। লেজার শো আর থিমের চমক দেখতে ভিড় জমছে সেখানেও।

৩. *কালীঘাট মিলন সংঘ ও বাদামতলা আষাঢ় সংঘ:* একই রুটে পড়বে এই দুই বড় পুজো।

৪. *দেশপ্রিয় পার্ক, ত্রিধারা:* দক্ষিণ থেকে উত্তরমুখী পরিক্রমায় পরবর্তী গন্তব্য। *পুলিশের তরফে বিশেষ ব্যবস্থা:*

ভিড় সামলাতে চেতলা অগ্রণী সংলগ্ন রাস্তায় বিকেল থেকেই যান নিয়ন্ত্রণ শুরু হয়েছে। রাসবিহারী কানেক্টর ও চেতলা সেন্ট্রাল রোডে ব্যারিকেড। দর্শনার্থীদের জন্য করা হয়েছে ‘একমুখী’ প্রবেশ ও বাহির পথ।

এক কথায়, ষষ্ঠীর বিকেলেই বুঝিয়ে দিল চেতলা - এবারের পুজোয় ভিড়ের রেকর্ড ভাঙতে চলেছে কলকাতা। *ছবি:সঞ্জয় হাজরা।*
কাহার সম্প্রদায়ের বেহেরাদের কাঁধে চড়ে বিসর্জনের পথে যায় স্বামী ব্রহ্মানন্দের ঘোষ বাড়ির দেবী
বসিরহাট : সালটা ১৫৮০, হয়তো সেই সময় সবেমাত্র ভারতবর্ষে পদার্পণ হয়েছে ব্রিটিশদের। এই সালেই হুগলির আকনা গ্রামের ঘোষ বংশের সপ্তদশ বংশধর সদানন্দ ঘোষ বৈবাহিক সূত্রে আবদ্ধ হন বসিরহাটের ট্যাঁটরা নিবাসী রায়চৌধুরী বাড়ির কন্যার সঙ্গে। ১৭০০ খ্রিস্টাব্দে যখন জোব চার্ণকের কলকাতা ছিল ক্যালকাটা, যার বয়স ছিল মাত্র ১০বছর, বসিরহাটের শিকড়া কুলিনগ্রামে সেই সালেই গোল পাতায় ছাওয়া মাটির আটচালায় দেবী দুর্গার আরাধনা শুরু করেন ঘোষ বংশেরই বংশধর দেবিদাস ঘোষ। পরবর্তীতে ১৮১০ থেকে ১৮২০ খ্রিস্টাব্দের মধ্যে কালীপ্রসাদ ঘোষ পাঁচ খিলান যুক্ত পাকা দুর্গা দালান নির্মাণ করেন, তারপর থেকে সেই দুর্গাদালানেই দেবী দুর্গার আরাধনা হয়ে যাচ্ছে। ১৮৬৩ খ্রিস্টাব্দ এই ঘোষ বংশেই পিতা আনন্দমোহন ঘোষ ও মাতা হেমাঙ্গিনী দেবীর কোল আলো করে জন্মগ্রহণ করেন রাখালদাস ঘোষ, যিনি পরবর্তীতে ঠাকুর শ্রী শ্রী রামকৃষ্ণ পরমহংসদেবের মানসপুত্র ও স্বামী বিবেকানন্দের গুরুভাই স্বামী ব্রহ্মানন্দ হিসেবে পরিচিত হন। ইতিহাস ঘাটলে জানা যায়, বালক রাখাল দুর্গাদালানের দেবী দুর্গার রূপ দেখে ধ‍্যানস্থ হতেন। অনতিদূরে বোধন তলায় সহপাঠীদের সঙ্গে তিনি মেতে উঠতেন পূজা পূজা খেলায় এবং বোধনতলার চারপাশে ঘুরে ঘুরে তিনি শ্যামাসংগীত গাইতেন। পরবর্তীকালে শিকড়া কুলিন গ্রামে এসে বোধন তলায় মাতা হেমাঙ্গিনী দেবীকে ভূমিষ্ঠ প্রণাম জানিয়েছিলেন। পরবর্তী।কালে ১৯৫৯ খ্রিস্টাব্দে স্বামী ব্রহ্মানন্দের পূণ‍্য জন্মভূমিতে প্রতিষ্ঠিত হয় শিকড়া কুলিন গ্রাম রামকৃষ্ণ মঠ ও মিশন।
স্বামী ব্রহ্মানন্দ তার পরিবারের সদস‍্যদের জানিয়েছিলেন, "দেখিস এই পুজো যেন বন্ধ না হয়।" তার কথা মেনেই এই বংশের উত্তরপুরুষরা এখনো পর্যন্ত সমস্ত রকম প্রথা মেনে এই দুর্গাপুজোর আয়োজন করে থাকেন। এবছর৩২৭ বছরে পদার্পণ করলো।প্রতিবছর পালা করে এই ঘোষ বংশের দুর্গাপুজো হয়ে আসছে বংশপরম্প এই বছর ঘোষ পরিবারের বড় শরীক।রাজ্য তথা দেশের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে এই বংশের সদস্যরা পুজোর সময় ফিরে আসেন বাড়িতে। মহালয়ার পর প্রতিপদে পুজোর সূচনা হিসেবে বসে দেবীঘট। ষষ্ঠীর দিন হয় বোধন। মহাসাড়ম্বরে বংশের প্রথা এনে হয় মহাসপ্তমী, মহাঅষ্টমী ও মহানবমীর পুজো। মহাষ্টমীর দিন ভক্তদের জন্য থাকে লুচি ভোগের আয়োজন। মহাদশমীতে দুর্গাপুজোর সমস্ত রকম রীতি মেনে পুজো সম্পন্ন হওয়ার পর কাহার সম্প্রদায়ের বেহারাদের কাঁধে চেপে মা দুর্গার কৈলাস যাত্রা শুরু হয়। দেবীর মৃন্ময়ী রূপকে স্থানীয় একটি পূণ্যপুকুরে বিসর্জন দেওয়া হয়। প্রাচীন ইতিহাসকে সাক্ষী রেখে সমস্ত রকম রীতিকে পাথেয় করে স্বামী ব্রহ্মানন্দের এই পুজোকে এখনো ঐতিহ্যবাহী করে রেখেছে সমগ্র শিকড়া কুলিন গ্রাম। ছবি:সৌমাভ মণ্ডল।
ইউজিসির নিয়ম ভেঙে অধ্যক্ষ নিয়োগে রাজ্যের এক্তিয়ার নেই, গভর্নমেন্ট আর্ট কলেজের অধ্যক্ষের নিয়োগ বাতিল করল হাইকোর্ট

*কলকাতা:* বিশ্ববিদ্যালয় মঞ্জুরি কমিশনের (ইউজিসি) ২০১০-এর বাধ্যতামূলক নিয়মাবলীর সঙ্গে অসঙ্গতিপূর্ণ কোনও বিকল্প যোগ্যতার ভিত্তিতে কাউকে অধ্যক্ষ পদে নিয়োগের এক্তিয়ার নেই রাজ্যের। এমনটাই জানাল কলকাতা হাইকোর্ট।কলকাতার গভর্নমেন্ট(Government )আর্ট অ্যান্ড ক্রাফট কলেজের অধ্যক্ষ পদে ছত্রপতি দত্তের নিয়োগ খারিজ করে বিচারপতি রাই চ্যাটার্জী জানিয়ে দিয়েছেন পেশাদার শিল্পী বলেই রাজ্য ইউজিসির নিয়ম ভেঙে কাউকে নিয়োগ করতে পারে না।

আদালতের নির্দেশ, ওই পদে থাকার কোনও বৈধ অধিকার ছত্রপতির নেই। আদালতের পর্যবেক্ষণ, রাজ্যের নিয়োগ কাঠামো কোনওভাবেই বাধ্যতামূলক ইউজিসি যোগ্যতা লঙ্ঘন করে নিয়োগের অনুমতি দিতে পারে না। আদালত পাবলিক সার্ভিস কমিশনের সুপারিশ এবং ২০১৭ সালের ২৪ এপ্রিলের নিয়োগ সংক্রান্ত বিজ্ঞপ্তি, যতদূর তা দত্তের সঙ্গে সম্পর্কিত, তাও বাতিল করে দিয়েছে।রায়ে আদালত মন্তব্য করেছে, বাধ্যতামূলক আইনি যোগ্যতা পূরণ করেন না এমন কোনও ব্যক্তিকে নিয়োগ করার অবাধ ক্ষমতা রাজ্য সরকার বা পাবলিক সার্ভিস কমিশনের নেই।