আগ্নেয়াস্ত্র, কার্তুজ ও চোরাই বাইক সহ মাটিয়ায় পুলিশের জালে ২ দুষ্কৃতী
বসিরহাট : দুর্গাপুজোর আবহে গভীর রাতে নাকা তল্লাশি চালিয়ে আগ্নেয়াস্ত্র, দু’টি তাজা কার্তুজ এবং একটি চোরাই মোটরসাইকেল-সহ দুই যুবককে গ্রেফতার করলো বসিরহাটের মাটিয়া থানার পুলিশ। ধৃতদের নাম শেখ আবদুল্লাহ্ ওরফে প্রিন্স (২৬) এবং শেখ ইমতিয়াজ আলম (৩৬)। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, ধৃত প্রিন্সের আদি বাড়ি নৈহাটির ঠাকুরপাড়ায়। বর্তমানে তিনি মাটিয়া থানার সাংবেড়িয়া এলাকায় থাকতেন। অন্যদিকে, ইমতিয়াজের বাড়ি মাটিয়া থানার চাঁদনগর গ্রামে। ধৃতদের বিরুদ্ধে মাটিয়া সহ একাধিক থানায় বিভিন্ন অপরাধমূলক কাজের অভিযোগ রয়েছে বলে পুলিশ সূত্রে খবর। দীর্ঘদিন ধরেই তাদের খোঁজ চালাচ্ছিল পুলিশ। দুর্গাপুজোর আগে এলাকায় নিরাপত্তা জোরদার করতে রাতের নাকা তল্লাশি চালানোর সময় মাটিয়া থানার আইসি দীনেশচন্দ্র পালের নেতৃত্বাধীন পুলিশের হাতে ধরা পড়ে ওই দুই যুবক। তল্লাশি চালিয়ে তাদের কাছ থেকে একটি দেশীয় পিস্তল, দু’টি তাজা কার্তুজ এবং একটি চোরাই মোটরসাইকেল উদ্ধার হয়।
এই আগ্নেয়াস্ত্র কোথা থেকে এল, মোটরসাইকেলটি কোথা থেকে চুরি করা হয়েছিল এবং এই ঘটনার সঙ্গে আর কারা জড়িত রয়েছে, তা জানতে ধৃতদের জিজ্ঞাসাবাদ শুরু করেছে পুলিশ। উদ্ধার হওয়া অস্ত্র ও মোটরসাইকেলের সূত্র ধরে আরও কোনও অপরাধের যোগ রয়েছে কি না, তাও খতিয়ে দেখা হচ্ছে। ধৃত দু’জনকে গ্রেফতারের পর শনিবার বসিরহাট আদালতে পেশ করে মাটিয়া থানার পুলিশ।

*ছবি:সৌমাভ মণ্ডল।*
*'वी वांट जस्टिस' से सुप्रीम कोर्ट की जमानत तक — RG कर आंदोलन आज कहां खड़ा है?*
*कोलकाता:*  'वी वांट जस्टिस' के नारे ने कभी पूरे बंगाल को हिला दिया था। रात पर महिलाओं ने कब्जा किया था, आम लोग मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरे थे। उस आंदोलन के दो साल बाद, RG कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत ने फिर याद दिला दिया — एक व्यक्ति को सजा होने का मतलब यह नहीं कि सारे सवालों के जवाब मिल गए।

दरअसल, यह मामला शुरू से ही सिर्फ एक बलात्कार और हत्या तक सीमित नहीं था। युवा डॉक्टर की मौत ने कहीं बड़े सवाल खड़े किए थे — कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा कहां है? सरकारी अस्पताल की जवाबदेही क्या है? पुलिस ने शुरुआत में क्या किया? जांच कितनी पारदर्शी थी?

आंदोलन में सभी ने उन्हें 'अभया' कहा। कोलकाता की सड़कों से लेकर जिलों तक, देश भर से लेकर विदेश के कई शहरों तक — विरोध की आवाज एक ही थी।

*दो अलग-अलग तस्वीरें*

*1. संजय की सजा:* जनवरी 2025 में सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आपराधिक न्याय की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इससे आंदोलन के सारे सवालों का जवाब नहीं मिला।

*2. संदीप घोष की दो जमानतें, दो अलग कारण:* यहीं पर कई लोग भ्रमित हो रहे हैं।
- *पहली जमानत (अभया बलात्कार और हत्या मामला):* 13 दिसंबर 2024 को। 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण कानून के तहत सियालदह कोर्ट ने उन्हें और टाला थाने के तत्कालीन ओसी अभिजीत मंडल को जमानत दी।
- *दूसरी जमानत (वित्तीय भ्रष्टाचार मामला):* 15 अक्टूबर 2026 को। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने जमानत मंजूर की। कोर्ट ने नोट किया कि 147 गवाहों में से केवल 7 की गवाही पूरी हुई है और वे दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

*एडिटर्स व्यू: जमानत को गलत न समझें*

यहां दो चीजों को अलग-अलग समझना बहुत जरूरी है:

*जमानत का मतलब बरी होना नहीं है।* जमानत का मतलब यह नहीं कि आरोप झूठे साबित हुए हैं, न ही यह बेगुनाही का प्रमाण पत्र है। यह केवल ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है।

लेकिन साथ ही सवाल बना हुआ है — इतने चर्चित और संवेदनशील मामले में ट्रायल इतना धीमा क्यों है? दो साल में 147 में से सिर्फ 7 गवाहों की गवाही — इस रफ्तार से ट्रायल पूरा होने में और कितने साल लगेंगे? और जांच एजेंसी की जवाबदेही पर आम लोग क्या सोचेंगे?

संजय रॉय को सजा हो चुकी है, संदीप घोष जमानत पर बाहर हैं — लेकिन 'वी वांट जस्टिस' नारे के पीछे जवाबदेही की जो बड़ी मांग थी, उसका जवाब सिर्फ अदालत के फैसले में नहीं मिलेगा। जब तक तीन सवालों — न्याय की गति, जांच की पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी — का जवाब नहीं मिलता, तब तक इस आंदोलन की प्रासंगिकता खत्म नहीं होगी।

*संदीप घोष की जमानत पर CBI को ही कठघरे में खड़ा किया तिलोत्‍तमा के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने*

*कोलकाता:* आरजी कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष की जमानत के बाद सीधे CBI को ही जिम्मेदार ठहराया तिलोत्‍तमा के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने।

शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, *"147 करोड़ लोग जिस संस्था पर भरोसा कर रहे हैं, अगर उसकी तरफ से ऐसी लापरवाही है तो लोग उस पर कैसे भरोसा करेंगे। सरकार जिम्मेदार नहीं है, जिम्मेदार जांच एजेंसी है।"*

उल्लेखनीय है कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में जमानत दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 147 गवाहों में से सिर्फ 7 की गवाही पूरी हुई है और आरोपी दो साल से अधिक समय से जेल में है।

इससे पहले 2024 में अभया बलात्कार और हत्या मामले में भी 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उन्हें जमानत मिली थी।

शेखर रंजन देबनाथ ने CBI की जांच की धीमी गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर चार्जशीट दाखिल न होना और ट्रायल में देरी के कारण ही ऐसे फैसले सामने आ रहे हैं।
*छवि और रिपोर्ट: उत्पल दास*।
*পুজো পরিক্রমা* *কলকাতা*
*পুজো পরিক্রমা* *কলকাতা*
বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসবের ৭৯ তম বর্ষের শুভ সূচনা*
*নিজস্ব সংবাদদাতা, বেলগাছিয়া:* উত্তর কলকাতার অন্যতম ঐতিহ্যবাহী পুজো বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসব এবার ৭৯ তম বর্ষে পদার্পণ করল।

শুক্রবার প্রদীপ প্রজ্জ্বলনের মাধ্যমে এই ঐতিহ্যবাহী সর্বজনীন দুর্গোৎসবের শুভ উদ্বোধন হয়। উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে উপস্থিত ছিলেন পূজ্য শ্রীমৎ স্বামী মধুরূপানন্দ সরস্বতী মহারাজ, অধ্যক্ষ, শ্রী শ্রী নিগমানন্দ সদ্‌গুরু সেবাশ্রম এবং স্থানীয় বিধায়ক অতীন ঘোষ ও রীতেশ তিওয়ারি।

স্থানীয় বাসিন্দা, পুজো উদ্যোক্তা এবং বহু দর্শকের সমাগমে এক বর্ণাঢ্য অনুষ্ঠানের মধ্য দিয়ে উদ্বোধনী পর্ব সম্পন্ন হয়। উদ্যোক্তাদের তরফে জানানো হয়েছে, এবছর ৭৯ তম বর্ষে তাদের পুজোয় ঐতিহ্যের সঙ্গে আধুনিকতার মেলবন্ধন থাকছে। মণ্ডপসজ্জা থেকে আলোকসজ্জায় থাকছে বিশেষ চমক।

পুজো কমিটির সদস্যরা জানান, দীর্ঘ ৭৯ বছর ধরে বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসব এলাকার মানুষের আবেগের সঙ্গে জড়িয়ে। এবারও সকলকে নিয়ে সুষ্ঠুভাবে পুজো আয়োজনের জন্য সব রকম ব্যবস্থা নেওয়া হয়েছে।
*ছবি:সঞ্জয় হাজরা।*
ষষ্ঠীর বিকেলে উপচে পড়া ভিড় চেতলা অগ্রণীতে, কলকাতা পুজো পরিক্রমা শুরু জোর কদমে*
*পুজো পরিক্রমা*

*কলকাতা*


*নিজস্ব সংবাদদাতা, কলকাতা:* ষষ্ঠীর বিকেল থেকেই তিল ধারণের জায়গা নেই দক্ষিণ কলকাতার অন্যতম জনপ্রিয় পুজো চেতলা অগ্রণীতে। ঢাকের বোলে, আলোর মালায় আনুষ্ঠানিকভাবে শুরু হয়ে গেল বাঙালির শ্রেষ্ঠ উৎসবের কাউন্টডাউন। আর শুরুতেই ভিড়ে ভরল চেতলা।

এবছর চেতলা অগ্রণীর থিম নিয়ে ইতিমধ্যেই শহরজুড়ে উন্মাদনা। মণ্ডপে ঢুকতেই চোখ ধাঁধানো আলোকসজ্জা আর শিল্পের ছোঁয়া। সেলফি জোন থেকে শুরু করে শিশুদের ভিড়, সব মিলিয়ে ষষ্ঠীর সন্ধ্যায় উৎসবের মেজাজ একেবারে তুঙ্গে। *পরিক্রমার রুটে যা থাকছে:*

ষষ্ঠী থেকেই যারা ঠাকুর দেখতে বেরিয়েছেন, তাদের জন্য চেতলা অগ্রণী দিয়ে শুরু করাটা বেস্ট রুট।

১. *চেতলা অগ্রণী:* ভিড় সামলাতে মোতায়েন বিশাল পুলিশ বাহিনী। বিকেল ৪টে থেকেই লম্বা লাইন। মণ্ডপের ভেতরে প্রবেশ করতেই এক অন্য জগৎ।

২. *এর পরেই সুরুচি সংঘ:* চেতলা থেকে মাত্র ১০ মিনিটের দূরত্বে। লেজার শো আর থিমের চমক দেখতে ভিড় জমছে সেখানেও।

৩. *কালীঘাট মিলন সংঘ ও বাদামতলা আষাঢ় সংঘ:* একই রুটে পড়বে এই দুই বড় পুজো।

৪. *দেশপ্রিয় পার্ক, ত্রিধারা:* দক্ষিণ থেকে উত্তরমুখী পরিক্রমায় পরবর্তী গন্তব্য। *পুলিশের তরফে বিশেষ ব্যবস্থা:*

ভিড় সামলাতে চেতলা অগ্রণী সংলগ্ন রাস্তায় বিকেল থেকেই যান নিয়ন্ত্রণ শুরু হয়েছে। রাসবিহারী কানেক্টর ও চেতলা সেন্ট্রাল রোডে ব্যারিকেড। দর্শনার্থীদের জন্য করা হয়েছে ‘একমুখী’ প্রবেশ ও বাহির পথ।

এক কথায়, ষষ্ঠীর বিকেলেই বুঝিয়ে দিল চেতলা - এবারের পুজোয় ভিড়ের রেকর্ড ভাঙতে চলেছে কলকাতা। *ছবি:সঞ্জয় হাজরা।*
কাহার সম্প্রদায়ের বেহেরাদের কাঁধে চড়ে বিসর্জনের পথে যায় স্বামী ব্রহ্মানন্দের ঘোষ বাড়ির দেবী
বসিরহাট : সালটা ১৫৮০, হয়তো সেই সময় সবেমাত্র ভারতবর্ষে পদার্পণ হয়েছে ব্রিটিশদের। এই সালেই হুগলির আকনা গ্রামের ঘোষ বংশের সপ্তদশ বংশধর সদানন্দ ঘোষ বৈবাহিক সূত্রে আবদ্ধ হন বসিরহাটের ট্যাঁটরা নিবাসী রায়চৌধুরী বাড়ির কন্যার সঙ্গে। ১৭০০ খ্রিস্টাব্দে যখন জোব চার্ণকের কলকাতা ছিল ক্যালকাটা, যার বয়স ছিল মাত্র ১০বছর, বসিরহাটের শিকড়া কুলিনগ্রামে সেই সালেই গোল পাতায় ছাওয়া মাটির আটচালায় দেবী দুর্গার আরাধনা শুরু করেন ঘোষ বংশেরই বংশধর দেবিদাস ঘোষ। পরবর্তীতে ১৮১০ থেকে ১৮২০ খ্রিস্টাব্দের মধ্যে কালীপ্রসাদ ঘোষ পাঁচ খিলান যুক্ত পাকা দুর্গা দালান নির্মাণ করেন, তারপর থেকে সেই দুর্গাদালানেই দেবী দুর্গার আরাধনা হয়ে যাচ্ছে। ১৮৬৩ খ্রিস্টাব্দ এই ঘোষ বংশেই পিতা আনন্দমোহন ঘোষ ও মাতা হেমাঙ্গিনী দেবীর কোল আলো করে জন্মগ্রহণ করেন রাখালদাস ঘোষ, যিনি পরবর্তীতে ঠাকুর শ্রী শ্রী রামকৃষ্ণ পরমহংসদেবের মানসপুত্র ও স্বামী বিবেকানন্দের গুরুভাই স্বামী ব্রহ্মানন্দ হিসেবে পরিচিত হন। ইতিহাস ঘাটলে জানা যায়, বালক রাখাল দুর্গাদালানের দেবী দুর্গার রূপ দেখে ধ‍্যানস্থ হতেন। অনতিদূরে বোধন তলায় সহপাঠীদের সঙ্গে তিনি মেতে উঠতেন পূজা পূজা খেলায় এবং বোধনতলার চারপাশে ঘুরে ঘুরে তিনি শ্যামাসংগীত গাইতেন। পরবর্তীকালে শিকড়া কুলিন গ্রামে এসে বোধন তলায় মাতা হেমাঙ্গিনী দেবীকে ভূমিষ্ঠ প্রণাম জানিয়েছিলেন। পরবর্তী।কালে ১৯৫৯ খ্রিস্টাব্দে স্বামী ব্রহ্মানন্দের পূণ‍্য জন্মভূমিতে প্রতিষ্ঠিত হয় শিকড়া কুলিন গ্রাম রামকৃষ্ণ মঠ ও মিশন।
স্বামী ব্রহ্মানন্দ তার পরিবারের সদস‍্যদের জানিয়েছিলেন, "দেখিস এই পুজো যেন বন্ধ না হয়।" তার কথা মেনেই এই বংশের উত্তরপুরুষরা এখনো পর্যন্ত সমস্ত রকম প্রথা মেনে এই দুর্গাপুজোর আয়োজন করে থাকেন। এবছর৩২৭ বছরে পদার্পণ করলো।প্রতিবছর পালা করে এই ঘোষ বংশের দুর্গাপুজো হয়ে আসছে বংশপরম্প এই বছর ঘোষ পরিবারের বড় শরীক।রাজ্য তথা দেশের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে এই বংশের সদস্যরা পুজোর সময় ফিরে আসেন বাড়িতে। মহালয়ার পর প্রতিপদে পুজোর সূচনা হিসেবে বসে দেবীঘট। ষষ্ঠীর দিন হয় বোধন। মহাসাড়ম্বরে বংশের প্রথা এনে হয় মহাসপ্তমী, মহাঅষ্টমী ও মহানবমীর পুজো। মহাষ্টমীর দিন ভক্তদের জন্য থাকে লুচি ভোগের আয়োজন। মহাদশমীতে দুর্গাপুজোর সমস্ত রকম রীতি মেনে পুজো সম্পন্ন হওয়ার পর কাহার সম্প্রদায়ের বেহারাদের কাঁধে চেপে মা দুর্গার কৈলাস যাত্রা শুরু হয়। দেবীর মৃন্ময়ী রূপকে স্থানীয় একটি পূণ্যপুকুরে বিসর্জন দেওয়া হয়। প্রাচীন ইতিহাসকে সাক্ষী রেখে সমস্ত রকম রীতিকে পাথেয় করে স্বামী ব্রহ্মানন্দের এই পুজোকে এখনো ঐতিহ্যবাহী করে রেখেছে সমগ্র শিকড়া কুলিন গ্রাম। ছবি:সৌমাভ মণ্ডল।
ইউজিসির নিয়ম ভেঙে অধ্যক্ষ নিয়োগে রাজ্যের এক্তিয়ার নেই, গভর্নমেন্ট আর্ট কলেজের অধ্যক্ষের নিয়োগ বাতিল করল হাইকোর্ট

*কলকাতা:* বিশ্ববিদ্যালয় মঞ্জুরি কমিশনের (ইউজিসি) ২০১০-এর বাধ্যতামূলক নিয়মাবলীর সঙ্গে অসঙ্গতিপূর্ণ কোনও বিকল্প যোগ্যতার ভিত্তিতে কাউকে অধ্যক্ষ পদে নিয়োগের এক্তিয়ার নেই রাজ্যের। এমনটাই জানাল কলকাতা হাইকোর্ট।কলকাতার গভর্নমেন্ট(Government )আর্ট অ্যান্ড ক্রাফট কলেজের অধ্যক্ষ পদে ছত্রপতি দত্তের নিয়োগ খারিজ করে বিচারপতি রাই চ্যাটার্জী জানিয়ে দিয়েছেন পেশাদার শিল্পী বলেই রাজ্য ইউজিসির নিয়ম ভেঙে কাউকে নিয়োগ করতে পারে না।

আদালতের নির্দেশ, ওই পদে থাকার কোনও বৈধ অধিকার ছত্রপতির নেই। আদালতের পর্যবেক্ষণ, রাজ্যের নিয়োগ কাঠামো কোনওভাবেই বাধ্যতামূলক ইউজিসি যোগ্যতা লঙ্ঘন করে নিয়োগের অনুমতি দিতে পারে না। আদালত পাবলিক সার্ভিস কমিশনের সুপারিশ এবং ২০১৭ সালের ২৪ এপ্রিলের নিয়োগ সংক্রান্ত বিজ্ঞপ্তি, যতদূর তা দত্তের সঙ্গে সম্পর্কিত, তাও বাতিল করে দিয়েছে।রায়ে আদালত মন্তব্য করেছে, বাধ্যতামূলক আইনি যোগ্যতা পূরণ করেন না এমন কোনও ব্যক্তিকে নিয়োগ করার অবাধ ক্ষমতা রাজ্য সরকার বা পাবলিক সার্ভিস কমিশনের নেই।
বনগাঁয় সিপিএমের বুকস্টলে নিষেধাজ্ঞা, নির্দেশ হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চের

*কলকাতা:* টেবিল-ছাতা পেতেও বুকস্টল নয়। বনগাঁয় সিপিএমের বুকস্টল মামলায় বড় নির্দেশ দিল কলকাতা হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চ। পরবর্তী শুনানি ২১ জানুয়ারি। সব পক্ষকে নোটিস দেওয়ার নির্দেশ।

বৃহস্পতিবার বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্য নির্দেশ দেন, দুর্গাপুজোর সময় বনগাঁয় বুকস্টল বসাতে পারবে সিপিএম। পুলিশ সুপার ও আইসিকে অনুমতি দিতে হবে। সিপিএম যেখানে চাইবে তার ১০০ মিটারের মধ্যে স্টলের ব্যবস্থা করতে হবে।

এই নির্দেশকে চ্যালেঞ্জ করে ডিভিশন বেঞ্চে যায় রাজ্য সরকার। ষষ্ঠীর সকালে জরুরি শুনানি হয় প্রধান বিচারপতি রবীন্দ্র ভি ঘুগের বেঞ্চে। শুনানিতে প্রধান বিচারপতি প্রশ্ন করেন, অনুমতি চেয়ে আবেদন করেছেন কি না এবং অনুমতি না পেলে পুলিশ কী করবে। সিপিএমের আইনজীবী শামিম আহমেদ জানান, পিডব্লিউডি এবং হাইওয়ে অথরিটিকে ই-মেল করা হয়েছে এবং পুলিশকেও জানানো হয়েছে। প্রধান বিচারপতি বলেন, রাস্তার ধারে সব স্টল তুলে দিতে হবে, অনুমতি না থাকলে কারোরই স্টলের প্রয়োজন নেই এবং আইনের চোখে সবাই সমান।

সিপিএমের আইনজীবী জানান, দলীয় কার্যালয়ের সামনে অন্য স্টলের মতোই একই লাইনে স্টল রয়েছে। পরিপ্রেক্ষিতে রাজ্যের অতিরিক্ত অ্যাডভোকেট জেনারেল বিল্বদল ভট্টাচার্য বলেন, বাকি স্টলগুলির অনুমতি আছে কি না জানা নেই।

তখন প্রধান বিচারপতি বলেন, হাইকোর্ট নির্দেশ দেবে সরাতে এবং সমতা থাকা দরকার। সিপিএমের তরফে শেষ আবেদন করা হয়, পুজোর আর ৩-৪ দিন বাকি থাকায় মাইক ছাড়া শুধু ৫ ফুট টেবিল আর ছাতা পেতে স্টল করতে দেওয়া হোক।

রাজ্যের তরফে জানানো হয়, বনগাঁ থানার আইসি এজলাসে হাজির রয়েছেন এবং বুকস্টল থেকে বাংলাদেশ সীমান্ত মাত্র ৬ কিলোমিটার দূরে। সব সওয়াল শুনে প্রধান বিচারপতির স্পষ্ট নির্দেশ, টেবিল-ছাতা পেতেও কোনও স্টলে অনুমতি নয়।
পুজোর আগে ধৃত তিন কুখ্যাত দুষ্কৃতী, উদ্ধার আগ্নেয়াস্ত্র
বসিরহাট : কিছুদিন আগে বসিরহাটের কুখ্যাত দুষ্কৃতী বুদ্ধদেব মণ্ডলকে গ্রেফতার করে বসিরহাট থানার পুলিশ ও এসওজি। দক্ষিণ ভারতের একটি রাজ্য থেকে তাকে গ্রেফতার করা হয়। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, বুদ্ধদেবের বিরুদ্ধে বসিরহাট ও পার্শ্ববর্তী একাধিক থানায় তার বিরুদ্ধে খুন এবং আগ্নেয়াস্ত্র মজুত রাখার অভিযোগ ছিল। তাকে জিজ্ঞাসাবাদ করে স্বপন দাস, রামকৃষ্ণ মণ্ডল ও বিশ্বজিৎ মণ্ডল নামে আরও তিনজনকে গ্রেফতার করেন তদন্তকারীরা। ধৃতদের কাছ থেকে দুটি দেশি বন্দুক, একটি ৭ এমএম পিস্তল এবং তিনটি গুলি উদ্ধার হয়েছে। পুজোর প্রাক্কালে এই গ্রেফতারি ও আগ্নেয়াস্ত্র উদ্ধারের ঘটনায় পুলিশের তৎপরতা নিয়ে নতুন করে চর্চা শুরু হয়েছে। বসিরহাট থানায় আয়োজিত এক সাংবাদিক সম্মেলনে এই তথ্য জানান বসিরহাট পুলিশ জেলার পুলিশ সুপার অলকনন্দা ভাওয়াল। সঙ্গে উপস্থিত ছিলেন অতিরিক্ত পুলিশ সুপার ও বসিরহাট থানার আইসি মহম্মদ ফিরোজ আলী। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, ধৃতদের জিজ্ঞাসাবাদ করে এই ঘটনার সঙ্গে আরও কেউ জড়িত রয়েছে কি না, সে বিষয়ে তদন্ত এগিয়ে নিয়ে যাওয়া হচ্ছে।

ছবি:সৌমাভ মণ্ডল।
বনগাঁয় সিপিআইএমের বুক স্টল তৈরিতে অনুমতি হাইকোর্টের, রাজ্যের আপত্তি খারিজ

*কলকাতা:* বনগাঁয় সিপিআইএমের বুক স্টল তৈরির অনুমতি দিল কলকাতা হাইকোর্ট। বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্য এই নির্দেশ দিয়েছেন।

আদালতের নির্দেশ, পার্টি অফিসের ১০০ মিটারের মধ্যে সিপিআইএমকে বুক স্টল তৈরি করতে দিতে হবে। স্টল তৈরির সময় এবং তার পরেও যাতে এলাকায় কোনও অশান্তি না হয়, তা নিশ্চিত করতে হবে পুলিশকে। শান্তি-শৃঙ্খলা বজায় রাখতে পর্যাপ্ত পুলিশ মোতায়েনেরও নির্দেশ দিয়েছে আদালত। জেলার পুলিশ সুপারকে আগামী ২৩ নভেম্বর এ বিষয়ে রিপোর্ট জমা দিতে বলা হয়েছে।

এই নির্দেশের ওপর স্থগিতাদেশ চেয়ে আবেদন জানায় রাজ্য সরকার। সেই আবেদন খারিজ করে দেন বিচারপতি ভট্টাচার্য।

*আদালতের পর্যবেক্ষণ:*

শুনানি চলাকালীন বিচারপতি ভট্টাচার্য একাধিক গুরুত্বপূর্ণ মন্তব্য করেন। তিনি বলেন, আদালত এটা নিয়ে চিন্তিত যে, অন্যরা নিজেদের মর্জিমতো কোনও অনুমতি ছাড়াই স্টল তৈরি করছে, অথচ সিপিআইএমকে আলাদা করে অনুমতি নিয়ে বুক স্টল করতে হচ্ছে।

রাজ্যের তরফে অ্যাডভোকেট জেনারেল সুরজিৎ নাথ মিত্র সওয়াল করেন, হাইওয়ের ওপর কোনও নির্মাণ করতে গেলে হাইওয়ে অথরিটির অনুমতি প্রয়োজন এবং হাইওয়ের ওপর কোনও নির্মাণ করা যায় না। এর উত্তরে বিচারপতি বলেন, "তাহলে হাইওয়ে অথরিটি এসে বলুক সেটা।"

বিচারপতির আরও মন্তব্য, "একেক জনের ক্ষেত্রে একেক রকম নিয়ম থাকতে পারে না। আইন সবার জন্য সমান। কাউকে অনুমতি দিলাম আর কাউকে দিলাম না, এটা করলে ভুল বার্তা যাবে।"

তিনি প্রশ্ন তোলেন, "কেউ স্টল করতে চাইল, আর কেউ এসে বাধা দিল। এটা করলে অস্থিরতা তৈরি হবে না?"

অ্যাডভোকেট জেনারেল যখন বলেন, পুলিশ কোনও নির্মাণের ক্ষেত্রে নিরাপত্তা দিতে বা সহায়তা করতে পারে না, তখন বিচারপতি পাল্টা প্রশ্ন করেন, "কেউ অস্থায়ী কাঠামো বানানোর সময় পুলিশ বাধা দেবে আর কোনও শক্তিশালী পক্ষ অস্থায়ী কাঠামো বানানোর সময় পুলিশ দর্শকের ভূমিকা পালন করবে, এটা কি হতে পারে?"

বিচারপতি আরও বলেন, "আগামীকালের মধ্যে সব ভেঙে দিন, তাহলে আর সমস্যা থাকবে না। আমি রাজ্যকে এক বছর সময় দিচ্ছি। রাজ্য নির্দিষ্ট নীতি তৈরি করুক। রাজ্যকে নিরপেক্ষ অবস্থান গ্রহণ করতে হবে। আমি হাইওয়ে অথরিটিকে বলছি যে ২৪ ঘণ্টার মধ্যে সব নির্মাণ ভেঙে দিক।"

অ্যাডভোকেট জেনারেলকে উদ্দেশ করে তিনি বলেন, "আপনি কি এটা বলতে চান যে সিপিআইএম-এর পার্টি অফিসের সামনে কোনও অস্থায়ী নির্মাণ হয়নি? আপনি যদি বলেন যে হয়নি তাহলে মামলা এখানেই শেষ।"

অন্যদিকে, অ্যাডিশনাল অ্যাডভোকেট জেনারেল বিল্বদল ভট্টাচার্য সওয়াল করেন, PWD-র কাছে সিপিআইএম কোনও অনুমতি চায়নি। যে বাড়িতে সিপিআইএম-এর পার্টি অফিস রয়েছে, সেই বাড়ির মালিক হিন্দু জাগরণ মঞ্চকে স্টল বানানোর অনুমতি দিয়েছেন।

উল্লেখ্য, গতকাল বনগাঁ থানার আইসিকে রিপোর্ট পেশ করার নির্দেশ দিয়েছিলেন বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্য। সেই নির্দেশকে চ্যালেঞ্জ করে প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চে যায় রাজ্য। পরে প্রধান বিচারপতি মামলাটি ফের বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্যর বেঞ্চেই ফেরত পাঠান।