*'वी वांट जस्टिस' से सुप्रीम कोर्ट की जमानत तक — RG कर आंदोलन आज कहां खड़ा है?*
*कोलकाता:* 'वी वांट जस्टिस' के नारे ने कभी पूरे बंगाल को हिला दिया था। रात पर महिलाओं ने कब्जा किया था, आम लोग मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरे थे। उस आंदोलन के दो साल बाद, RG कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत ने फिर याद दिला दिया — एक व्यक्ति को सजा होने का मतलब यह नहीं कि सारे सवालों के जवाब मिल गए।
दरअसल, यह मामला शुरू से ही सिर्फ एक बलात्कार और हत्या तक सीमित नहीं था। युवा डॉक्टर की मौत ने कहीं बड़े सवाल खड़े किए थे — कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा कहां है? सरकारी अस्पताल की जवाबदेही क्या है? पुलिस ने शुरुआत में क्या किया? जांच कितनी पारदर्शी थी?
आंदोलन में सभी ने उन्हें 'अभया' कहा। कोलकाता की सड़कों से लेकर जिलों तक, देश भर से लेकर विदेश के कई शहरों तक — विरोध की आवाज एक ही थी।
*दो अलग-अलग तस्वीरें*
*1. संजय की सजा:* जनवरी 2025 में सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आपराधिक न्याय की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इससे आंदोलन के सारे सवालों का जवाब नहीं मिला।
*2. संदीप घोष की दो जमानतें, दो अलग कारण:* यहीं पर कई लोग भ्रमित हो रहे हैं।
- *पहली जमानत (अभया बलात्कार और हत्या मामला):* 13 दिसंबर 2024 को। 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण कानून के तहत सियालदह कोर्ट ने उन्हें और टाला थाने के तत्कालीन ओसी अभिजीत मंडल को जमानत दी।
- *दूसरी जमानत (वित्तीय भ्रष्टाचार मामला):* 15 अक्टूबर 2026 को। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने जमानत मंजूर की। कोर्ट ने नोट किया कि 147 गवाहों में से केवल 7 की गवाही पूरी हुई है और वे दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
*एडिटर्स व्यू: जमानत को गलत न समझें*
यहां दो चीजों को अलग-अलग समझना बहुत जरूरी है:
*जमानत का मतलब बरी होना नहीं है।* जमानत का मतलब यह नहीं कि आरोप झूठे साबित हुए हैं, न ही यह बेगुनाही का प्रमाण पत्र है। यह केवल ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है।
लेकिन साथ ही सवाल बना हुआ है — इतने चर्चित और संवेदनशील मामले में ट्रायल इतना धीमा क्यों है? दो साल में 147 में से सिर्फ 7 गवाहों की गवाही — इस रफ्तार से ट्रायल पूरा होने में और कितने साल लगेंगे? और जांच एजेंसी की जवाबदेही पर आम लोग क्या सोचेंगे?
संजय रॉय को सजा हो चुकी है, संदीप घोष जमानत पर बाहर हैं — लेकिन 'वी वांट जस्टिस' नारे के पीछे जवाबदेही की जो बड़ी मांग थी, उसका जवाब सिर्फ अदालत के फैसले में नहीं मिलेगा। जब तक तीन सवालों — न्याय की गति, जांच की पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी — का जवाब नहीं मिलता, तब तक इस आंदोलन की प्रासंगिकता खत्म नहीं होगी।
*संदीप घोष की जमानत पर CBI को ही कठघरे में खड़ा किया तिलोत्तमा के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने*
*कोलकाता:* आरजी कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष की जमानत के बाद सीधे CBI को ही जिम्मेदार ठहराया तिलोत्तमा के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने।
शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, *"147 करोड़ लोग जिस संस्था पर भरोसा कर रहे हैं, अगर उसकी तरफ से ऐसी लापरवाही है तो लोग उस पर कैसे भरोसा करेंगे। सरकार जिम्मेदार नहीं है, जिम्मेदार जांच एजेंसी है।"*
उल्लेखनीय है कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में जमानत दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 147 गवाहों में से सिर्फ 7 की गवाही पूरी हुई है और आरोपी दो साल से अधिक समय से जेल में है।
इससे पहले 2024 में अभया बलात्कार और हत्या मामले में भी 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उन्हें जमानत मिली थी।
शेखर रंजन देबनाथ ने CBI की जांच की धीमी गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर चार्जशीट दाखिल न होना और ट्रायल में देरी के कारण ही ऐसे फैसले सामने आ रहे हैं।![]()
*छवि और रिपोर्ट: उत्पल दास*।

*कोलकाता:* 'वी वांट जस्टिस' के नारे ने कभी पूरे बंगाल को हिला दिया था। रात पर महिलाओं ने कब्जा किया था, आम लोग मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरे थे। उस आंदोलन के दो साल बाद, RG कर के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत ने फिर याद दिला दिया — एक व्यक्ति को सजा होने का मतलब यह नहीं कि सारे सवालों के जवाब मिल गए।

*নিজস্ব সংবাদদাতা, বেলগাছিয়া:* উত্তর কলকাতার অন্যতম ঐতিহ্যবাহী পুজো বেলগাছিয়া সাধারণ দুর্গোৎসব এবার ৭৯ তম বর্ষে পদার্পণ করল।
*পরিক্রমার রুটে যা থাকছে:*
*পুলিশের তরফে বিশেষ ব্যবস্থা:*
*ছবি:সঞ্জয় হাজরা।*
বসিরহাট : সালটা ১৫৮০, হয়তো সেই সময় সবেমাত্র ভারতবর্ষে পদার্পণ হয়েছে ব্রিটিশদের। এই সালেই হুগলির আকনা গ্রামের ঘোষ বংশের সপ্তদশ বংশধর সদানন্দ ঘোষ বৈবাহিক সূত্রে আবদ্ধ হন বসিরহাটের ট্যাঁটরা নিবাসী রায়চৌধুরী বাড়ির কন্যার সঙ্গে। ১৭০০ খ্রিস্টাব্দে যখন জোব চার্ণকের কলকাতা ছিল ক্যালকাটা, যার বয়স ছিল মাত্র ১০বছর, বসিরহাটের শিকড়া কুলিনগ্রামে সেই সালেই গোল পাতায় ছাওয়া মাটির আটচালায় দেবী দুর্গার আরাধনা শুরু করেন ঘোষ বংশেরই বংশধর দেবিদাস ঘোষ। পরবর্তীতে ১৮১০ থেকে ১৮২০ খ্রিস্টাব্দের মধ্যে কালীপ্রসাদ ঘোষ পাঁচ খিলান যুক্ত পাকা দুর্গা দালান নির্মাণ করেন, তারপর থেকে সেই দুর্গাদালানেই দেবী দুর্গার আরাধনা হয়ে যাচ্ছে। ১৮৬৩ খ্রিস্টাব্দ এই ঘোষ বংশেই পিতা আনন্দমোহন ঘোষ ও মাতা হেমাঙ্গিনী দেবীর কোল আলো করে জন্মগ্রহণ করেন রাখালদাস ঘোষ, যিনি পরবর্তীতে ঠাকুর শ্রী শ্রী রামকৃষ্ণ পরমহংসদেবের মানসপুত্র ও স্বামী বিবেকানন্দের গুরুভাই স্বামী ব্রহ্মানন্দ হিসেবে পরিচিত হন। ইতিহাস ঘাটলে জানা যায়, বালক রাখাল দুর্গাদালানের দেবী দুর্গার রূপ দেখে ধ্যানস্থ হতেন। অনতিদূরে বোধন তলায় সহপাঠীদের সঙ্গে তিনি মেতে উঠতেন পূজা পূজা খেলায় এবং বোধনতলার চারপাশে ঘুরে ঘুরে তিনি শ্যামাসংগীত গাইতেন। পরবর্তীকালে শিকড়া কুলিন গ্রামে এসে বোধন তলায় মাতা হেমাঙ্গিনী দেবীকে ভূমিষ্ঠ প্রণাম জানিয়েছিলেন। পরবর্তী।কালে ১৯৫৯ খ্রিস্টাব্দে স্বামী ব্রহ্মানন্দের পূণ্য জন্মভূমিতে প্রতিষ্ঠিত হয় শিকড়া কুলিন গ্রাম রামকৃষ্ণ মঠ ও মিশন।
ছবি:সৌমাভ মণ্ডল।
বসিরহাট : কিছুদিন আগে বসিরহাটের কুখ্যাত দুষ্কৃতী বুদ্ধদেব মণ্ডলকে গ্রেফতার করে বসিরহাট থানার পুলিশ ও এসওজি। দক্ষিণ ভারতের একটি রাজ্য থেকে তাকে গ্রেফতার করা হয়। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, বুদ্ধদেবের বিরুদ্ধে বসিরহাট ও পার্শ্ববর্তী একাধিক থানায় তার বিরুদ্ধে খুন এবং আগ্নেয়াস্ত্র মজুত রাখার অভিযোগ ছিল। তাকে জিজ্ঞাসাবাদ করে স্বপন দাস, রামকৃষ্ণ মণ্ডল ও বিশ্বজিৎ মণ্ডল নামে আরও তিনজনকে গ্রেফতার করেন তদন্তকারীরা। ধৃতদের কাছ থেকে দুটি দেশি বন্দুক, একটি ৭ এমএম পিস্তল এবং তিনটি গুলি উদ্ধার হয়েছে। পুজোর প্রাক্কালে এই গ্রেফতারি ও আগ্নেয়াস্ত্র উদ্ধারের ঘটনায় পুলিশের তৎপরতা নিয়ে নতুন করে চর্চা শুরু হয়েছে। বসিরহাট থানায় আয়োজিত এক সাংবাদিক সম্মেলনে এই তথ্য জানান বসিরহাট পুলিশ জেলার পুলিশ সুপার অলকনন্দা ভাওয়াল। সঙ্গে উপস্থিত ছিলেন অতিরিক্ত পুলিশ সুপার ও বসিরহাট থানার আইসি মহম্মদ ফিরোজ আলী। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, ধৃতদের জিজ্ঞাসাবাদ করে এই ঘটনার সঙ্গে আরও কেউ জড়িত রয়েছে কি না, সে বিষয়ে তদন্ত এগিয়ে নিয়ে যাওয়া হচ্ছে।
Oct 17 2026, 17:21
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