चक्रवर्ती सम्राट ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर राज किया: संजय जायसवाल

जौनपुर। चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य, मौर्य वंश के तीसरे और भारत के इतिहास के सबसे महान व शक्तिशाली सम्राटों में से एक थे। उन्हें 'अशोक महान' और 'देवानांप्रिय प्रियदर्शी' (देवताओं के प्रिय) के नाम से भी जाना जाता है। उनका शासनकाल लगभग ईसा पूर्व 268 से 232 तक रहा जिसके दौरान उन्होंने लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर राज किया। उक्त बातें नगर पंचायत मछलीशहर के चेयरमैन संजय जायसवाल ने स्थानीय कस्बे के चन्द्रगुप्त मौर्य नगर के छैला मियां का पूरा में बनाये गये सम्राट अशोक मौर्य लाट का उद्घाटन करते हुये उपस्थित लोगों के बीच कही। इसके पहले श्री जायसवाल के पहुंचने पर उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण करके उनका जोरदार स्वागत किया जिसके बाद उन्होंने फीता काटकर उद्घाटन करने के बाद सम्राट लाट के समक्ष शीश नवाया। साथ ही उपस्थित लोगों से सम्राट अशोक के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर पर संस्थापक सालिक राम मौर्य अवकाशप्राप्त शिक्षक, राजेन्द्र प्रसाद मौर्य, राजकुमार मौर्य, विजय मौर्य, कमलेश चन्द्र मौर्य, प्रदीप मौर्य, सुरेश चन्द्र मौर्य एडवोकेट, धर्मेन्द्र मौर्य सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
मिसाइल मैन डॉ. कलाम की 95वीं जयंती पर मदरसा
Sb ब्यूरो रितेश मिश्रा
बेहंदर, हरदोई।* क्षेत्र के मदरसा रहमानुल उलूम सरसंड में बृहस्पति को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 95वीं वर्षगांठ बेहद सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मदरसे के शिक्षकों और अतिथियों ने डॉ. कलाम के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों को संबोधित करते हुए मदरसे के प्रबंधक अशफ़ाक़ुर्रहमान और प्रधानाचार्य मोहयुद्दीन ने डॉ. कलाम के प्रेरक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे डॉ. कलाम का जीवन सादगी और उच्च विचारों का प्रतीक था। देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। शिक्षक इरिंद, सुखविंदर, अम्बरीष कुमार और अर्पिता देवी ने बच्चों को डॉ. कलाम के पदचिह्नों पर चलने और शिक्षा के माध्यम से देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।वक्ताओं ने बच्चों को डॉ. कलाम के अद्वितीय व्यक्तित्व के बारे में बताते हुए कहा कि वे असाधारण सादगी, अदम्य हौसले और सच्चे राष्ट्रप्रेम की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने बच्चों को कलाम साहब के प्रसिद्ध संदेश को याद दिलाते हुए प्रेरित किया कि "सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।" वक्ताओं ने बच्चों को डॉ. कलाम के पदचिह्नों पर चलने और शिक्षा के माध्यम से देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
          इस अवसर पर 'मेरा युवा भारत' युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक आसिम अली भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और युवाओं को देश सेवा का संकल्प दिलाया।
सुरक्षित प्रसव की तैयारी गर्भावस्था से ही, एचआरपी महिलाओं की निगरानी को स्वास्थ्य विभाग ने दी प्राथमिकता
फर्रुखाबाद। गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं को समय रहते पहचानना और प्रसव तक महिला की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखना सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं यानी एचआरपी के प्रबंधन को प्राथमिकता दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देशन में आशा और एएनएम के माध्यम से ऐसी महिलाओं का चिह्नीकरण, लाइन लिस्टिंग तथा नियमित संपर्क सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

जोखिम की पहचान के साथ तय होगी आगे की देखभाल

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद संबंधित महिला का विवरण लाइन लिस्ट में दर्ज करना और उसके स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार आगे की कार्ययोजना बनाना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक चिह्नित महिला को समय पर जांच, चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक दवाएं और जरूरत पड़ने पर रेफरल की सुविधा मिल सके। साथ ही प्रसव कहां और किस प्रकार की चिकित्सकीय निगरानी में कराया जाना है, इसकी तैयारी भी पहले से की जा सके।

निर्धारित तिथियों पर जांच और विशेषज्ञ परामर्श

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों पर गर्भवती महिलाओं की जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था की गई है। एचआरपी महिलाओं की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह और उच्च स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर करने की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आवश्यकता के समय उपचार में देरी न हो।

एनीमिया के उपचार और प्रसव सेवाओं पर भी ध्यान

गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की स्थिति को देखते हुए जरूरत के अनुसार आयरन सुक्रोज और एफसीएम थेरेपी उपलब्ध कराने पर जोर है। गंभीर परिस्थितियों में रक्त की उपलब्धता तथा ब्लड ट्रांसफ्यूजन की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एएनएम और स्टाफ नर्सों का प्रशिक्षण कराया गया है। इसके साथ ही प्रसव सेवाओं को नए केंद्रों तक विस्तारित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रसव तक बना रहेगा फॉलोअप

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में केवल शुरुआती पहचान पर्याप्त नहीं है। महिला की स्थिति के अनुसार लगातार निगरानी और समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है। आशा, एएनएम, स्टाफ नर्स और चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी संभावित जटिलता का समय रहते पता चल सके।

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक एचआरपी महिला को गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक आवश्यक देखभाल मिले। नियमित फॉलोअप, समयबद्ध जांच और जरूरत के अनुसार उपचार एवं रेफरल के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
जनगणना-2027 के द्वितीय चरण की तैयारियां समय से पूर्ण करें अधिकारी: जिलाधिकारी

*मुख्य सचिव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जनगणना-2027 के द्वितीय चरण की तैयारियों एवं कार्ययोजना की मुख्य सचिव द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जनगणना संबंधी तैयारियों, निर्धारित कार्यों की प्रगति तथा जनगणना को व्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संपन्न कराने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपरांत जिलाधिकारी/प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री शैलेष कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनगणना के द्वितीय चरण से जुड़ी सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण कर ली जाएं, ताकि जनगणना का कार्य निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार व्यवस्थित, पारदर्शी एवं सुचारु रूप से संपादित हो सके।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा इसके प्रति जनपदवासियों को जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्व-गणना के माध्यम से नागरिक अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे अधिक से अधिक परिवार इस सुविधा का लाभ उठाते हुए जनगणना के राष्ट्रीय महत्व के कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

16 से 30 नवंबर तक घर बैठे मोबाइल से करें स्व-गणना

जिलाधिकारी श्री शैलेष कुमार ने जनपदवासियों से अपील की कि वे 16 नवंबर से 30 नवंबर, 2026 तक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से घर बैठे स्व-गणना करें। इसके लिए जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट https://se.census.gov.in पर जाकर स्व-गणना (Self Enumeration) विकल्प का चयन करें तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मांगी गई जानकारी दर्ज करें। उन्होंने कहा कि परिवार से संबंधित सभी 40 प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही, स्पष्ट एवं पूर्ण जानकारी भरना आवश्यक है, ताकि जनगणना के आंकड़े विश्वसनीय एवं उपयोगी बन सकें।

पांच प्रमुख श्रेणियों में संकलित की जाएंगी परिवार से संबंधित जानकारियां

जनगणना-2027 के अंतर्गत स्व-गणना के माध्यम से परिवार एवं उसके सदस्यों से संबंधित 40 प्रश्नों के जरिए पांच प्रमुख श्रेणियों में जानकारियां संकलित की जाएंगी। इनमें पहचान एवं परिवार, शिक्षा एवं भाषा, रोजगार, जन्म एवं प्रवास तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि स्व-गणना की प्रक्रिया को जनसामान्य तक सरल एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए, ताकि नागरिक प्रश्नों को समझकर सही जानकारी दर्ज कर सकें।

सटीक जनगणना आंकड़ों से तैयार होंगी बेहतर विकास योजनाएं

जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना के आंकड़े विकास योजनाओं के निर्माण, जनसंख्या की आवश्यकताओं के आकलन, संसाधनों के बेहतर नियोजन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रत्येक परिवार को अपनी जानकारी सही एवं वास्तविक रूप में दर्ज करनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनगणना संबंधी दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित करें तथा स्व-गणना के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि “सही गणना, सशक्त समाज, समृद्ध भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि वे 16 से 30 नवंबर, 2026 तक स्व-गणना की सुविधा का लाभ उठाएं, सभी प्रश्नों के उत्तर सावधानीपूर्वक दर्ज करें और जनगणना-2027 को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
काशी नरेश विश्वविद्यालय में अभ्युदय योजना और कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम:छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हुआ आयोजन,पुलिस अधीक्षक ने किया शुभारं
रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। शारदीय नवरात्रि पर काशी नरेश विश्वविद्यालय, ज्ञानपुर में 'मिशन शक्ति फेज-6.0' के तहत 'मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम' आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य छात्राओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ भदोही के अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने दीप जलाकर किया। छात्राओं को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की मुफ्त कोचिंग, पात्रता और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

UPSC, UPPSC, NEET, JEE, NDA, CDS, SSC और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, पाठ्यक्रम और रणनीति पर मार्गदर्शन मिला। छात्राओं को अपनी रुचि के अनुसार लक्ष्य तय कर आत्मविश्वास से आगे बढ़ने को प्रेरित किया गया।

'मिशन शक्ति फेज-6.0' के तहत महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, सम्मान, अधिकार और स्वावलंबन की जानकारी भी दी गई। छात्राओं को किसी भी उत्पीड़न में बिना डर पुलिस सहायता लेने और महिला सुरक्षा हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करने के प्रति जागरूक किया गया।

भदोही पुलिस महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।
जीरो टॉलरेंस पुलिस की कार्यशैली का हिस्सा बने,अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई करें: डीजीपी राजीव कृष्ण
अपराध समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक ने दिए निर्देश

त्योहारों में डूबने और करंट से होने वाली जनहानि रोकने के लिए शून्य जनहानि का लक्ष्य तय

लखनऊ। पुलिस महानिदेशक यूपी राजीव कृष्ण ने कहा कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस केवल एक नीति नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और दृष्टिकोण का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। किसी भी अपराध या कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना के बाद केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके मूल कारणों का पता लगाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी जरूरी है। उन्होंने चोरी, नकबजनी, चेन स्नेचिंग सहित अन्य अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाने, बीट पुलिसिंग को प्रभावी बनाने और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में प्रदेश के सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशकों, पुलिस आयुक्तों, परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस उपमहानिरीक्षकों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऑनलाइन उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक की। बैठक में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, आगामी त्योहारों की सुरक्षा, लंबित विवेचनाओं, जनशिकायतों, गुमशुदा बच्चों की बरामदगी और यातायात व्यवस्था सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।

बीट पुलिसिंग मजबूत करने और गश्त बढ़ाने पर जोर

डीजीपी ने निर्देश दिया कि बीट पुलिसकर्मियों से प्राप्त सूचनाओं का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए और उनकी जिम्मेदारियों की नियमित समीक्षा हो। क्षेत्राधिकारियों को बीट पुलिसकर्मियों की नियमित बैठक लेकर उन्हें क्षेत्र की संवेदनशील गतिविधियों, मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और स्थानीय स्तर पर इनके निर्माण जैसी गतिविधियों की पहचान के संबंध में स्पष्ट निर्देश देने को कहा गया।

चोरी, नकबजनी, चेन स्नेचिंग और संपत्ति संबंधी अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए प्रमुख बाजारों, संवेदनशील क्षेत्रों और आवश्यक स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। पुलिस गश्त में उपलब्ध वाहनों और तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा निर्धारित जिम्मेदारियों में लापरवाही मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने को कहा गया। अपराधियों, संदिग्ध वाहनों और घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान करने के लिए यक्ष ऐप की विशेष सुविधा का प्रभावी इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया।

थानों पर जनसुनवाई और शिकायतों के निस्तारण को प्राथमिकता

डीजीपी ने थाना और चौकी स्तर पर आम लोगों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनने और उनका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार जनहित के अनुरूप होना चाहिए। जनशिकायतों और जनसुनवाई से जुड़े मामलों की संख्या का विश्लेषण कर उनकी वजहों का पता लगाया जाए। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही मिलने पर पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से जिम्मेदारी तय की जाए।

कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले संवेदनशील मामलों में स्थानीय सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा संभावित विवादों और सामाजिक या जातीय तनाव से संबंधित सूचनाओं का समय पर संकलन एवं विश्लेषण करने के निर्देश भी दिए गए। महत्वपूर्ण सूचनाओं को समयबद्ध तरीके से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने और आवश्यकतानुसार पहले से तैयारी करने पर बल दिया गया।

त्योहारों में डूबने और करंट से होने वाली जनहानि रोकने के निर्देश

आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए डीजीपी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। मूर्ति विसर्जन और स्नान से जुड़े आयोजनों के दौरान डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, सुरक्षित स्थान और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

झांकियों और जुलूसों के दौरान बिजली के तारों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का पालन कराने तथा पुराने विवादों और मार्गों से जुड़ी संवेदनशीलताओं का पहले से आकलन करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने त्योहारों के दौरान डूबने और करंट से होने वाली जनहानि को शून्य तक लाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा।

यक्ष ऐप पर सत्यापन के बाद भी अपराध करने वालों पर कार्रवाई

डीजीपी ने अपराध के साप्ताहिक और अन्य उपलब्ध आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर उन क्षेत्रों तथा अपराधों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां घटनाओं में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि अपराधों के मूल कारणों का पता लगाकर उनका प्रभावी निराकरण किया जाए।

यक्ष ऐप पर सत्यापन के बाद भी अपराध करने वाले अपराधियों की गतिविधियों की विशेष समीक्षा करने को कहा गया। ऐसे अपराधियों द्वारा बार-बार अपराध करने की वजहों का पता लगाकर उनकी निगरानी, निरोधात्मक कार्रवाई और अन्य प्रभावी उपायों के जरिए अपराध की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर दिया गया।

लंबित विवेचनाओं और अनसुलझे गंभीर मामलों की नियमित समीक्षा

पुलिस महानिदेशक ने 60 और 90 दिन से अधिक समय से लंबित विवेचनाओं का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुराने मामलों की वर्षवार समीक्षा कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने तथा विवेचनाओं की नियमित निगरानी करने को कहा गया।

लूट, हत्या, चेन स्नेचिंग सहित अन्य गंभीर अपराधों के ऐसे मामलों, जिनमें अपराधियों का पता नहीं चल सका है, की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। जिन क्षेत्रों में ऐसे मामले अधिक लंबित हैं, वहां विशेष कार्ययोजना बनाकर साक्ष्य संकलन, तकनीकी विश्लेषण और प्रभावी विवेचना के जरिए अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

गुमशुदा बच्चों की बरामदगी सर्वोच्च प्राथमिकता

डीजीपी ने गुमशुदा बच्चों की शीघ्र और सुरक्षित बरामदगी को अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए संबंधित मामलों में त्वरित और समन्वित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिन क्षेत्रों में बच्चों के लापता होने की घटनाएं अधिक हैं, वहां विशेष समीक्षा कर उनके गुमशुदा होने के संभावित कारणों और घटनाओं के सामान्य स्वरूप का विश्लेषण करने को कहा गया।

मानव तस्करी रोधी थानों की टीमों को बच्चों के परिजनों से संपर्क कर विस्तृत जानकारी जुटाने, विभिन्न मामलों के बीच समानताओं का अध्ययन करने और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर बच्चों की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

यातायात सुधार और पुलिस प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर जोर

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और यातायात जाम की घटनाओं में कमी आई है। इसके बावजूद डीजीपी ने शहरी क्षेत्रों में जाम के प्रमुख कारणों और यातायात के दबाव का विश्लेषण कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना बनाने तथा उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।

बैठक में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आई-गॉट मंच के माध्यम से एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करने की उपलब्धि पर डीजीपी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता में लगातार सुधार होना चाहिए। सप्ताहांत में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ऐसे विषयों को प्राथमिकता दी जाए, जिनका लाभ थानों, बीट पुलिसिंग और पुलिसकर्मियों के दैनिक कार्यों में सीधे तौर पर दिखाई दे।

डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराध नियंत्रण, जनशिकायतों के निस्तारण, महिला एवं बाल सुरक्षा, त्योहारों की व्यवस्था और पुलिस के व्यवहार में सुधार जैसे विषयों पर निरंतर निगरानी रखी जाए, ताकि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
मिशन शक्ति 6.0: अपनों ने छोड़ा बेसहारा, पुलिस ने बांटा त्योहार का सहारा
प्रदेश के 314 आश्रय गृहों में रह रहीं 12,870 महिलाओं और बालिकाओं को बांटी गईं जरूरी वस्तुएं

आगरा में बुजुर्ग महिला ने पुलिस के सामने बयां किया अपना दर्द

लखनऊ। अपनों ने साथ छोड़ दिया, लेकिन जिंदगी की मुश्किल घड़ी में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सहारे का हाथ बढ़ाया। मिशन शक्ति 6.0 के तहत प्रदेशभर में पुलिस अधिकारियों ने नारी संरक्षण गृहों और आश्रय गृहों में रह रहीं महिलाओं और बालिकाओं के साथ दशहरा और दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान उन्हें खाद्य सामग्री, साड़ियां, कंबल और अन्य जरूरी वस्तुएं वितरित की गईं।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 11 से 20 अक्टूबर तक चलाए जा रहे मिशन शक्ति 6.0 अभियान के तहत 14 अक्टूबर को प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तालयों और जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। पुलिस के अनुसार, प्रदेश के 314 नारी संरक्षण गृहों और आश्रय गृहों में रह रहीं 12,870 महिलाओं और बालिकाओं को करीब 22 हजार पैकेट सामग्री वितरित की गई।

तीन बेटों ने छोड़ा, पड़ोस के बच्चे ने बढ़ाया मदद का हाथ

आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित रामलाल वृद्धाश्रम में रह रही एक बुजुर्ग महिला की कहानी अपनों की बेरुखी और इंसानियत की मिसाल दोनों को सामने लाती है। महिला ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत के दौरान अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे हैं, लेकिन तीनों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। इसके बाद उन्हें किराये के कमरे में रहना पड़ा, जहां भोजन तक की व्यवस्था नहीं थी।

इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला एक स्कूली बच्चा उनकी परेशानी देखकर अपना टिफिन उन्हें देने लगा। बच्चा कई दिनों तक अपने घरवालों को बताए बिना बुजुर्ग महिला के लिए खाना लेकर जाता रहा। बाद में उसने अपनी मां को इस बारे में बताया। इसके बाद बच्चे की मां ने बुजुर्ग महिला को वृद्धाश्रम पहुंचाया। वह पिछले करीब 15 वर्षों से वहीं रह रही हैं।

पुलिस अधिकारियों से बातचीत के दौरान बुजुर्ग महिला की आंखों से आंसू छलक पड़े। उनकी कहानी ने यह संदेश दिया कि रिश्तों की बेरुखी के बीच भी किसी अनजान व्यक्ति की छोटी-सी मदद किसी जरूरतमंद के लिए बड़ा सहारा बन सकती है।

महिला सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में अभियान

मिशन शक्ति 6.0 के तहत महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य गतिविधियां भी चलाई गईं।

पुलिस के अनुसार, मंदिरों और पूजा पंडालों में 18,866 महिला चौपाल आयोजित की गईं। इनमें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित 7,05,167 पर्चे वितरित किए गए। वाहन जांच के दौरान 2,20,281 वाहनों की जांच की गई और 4,287 वाहनों से काली फिल्म उतरवाई गई। यातायात नियमों के उल्लंघन पर करीब 22 हजार वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

वहीं, एंटी रोमियो दल ने 29,907 स्थानों पर अभियान चलाकर 2,73,935 लोगों की जांच की। इस दौरान 383 मामले दर्ज किए गए, 415 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1,05,524 लोगों को चेतावनी दी गई।

इसके अलावा, भरण-पोषण भत्ते और घरेलू विवादों से संबंधित न्यायालय के 29,026 समन तामील कराए गए। ग्राम पंचायतों और वार्डों में 13,086 चौपाल आयोजित हुईं, जिनमें 5,18,485 लोगों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों में 4,44,583 प्रचार सामग्री वितरित की गई।

पुलिस के मुताबिक, मौके पर मिले 21,056 प्रार्थना पत्रों में से 2,085 का निस्तारण किया गया। साथ ही 98 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1,860 के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई।

सुरक्षा के साथ अपनत्व का संदेश

मिशन शक्ति 6.0 के तहत आश्रय गृहों में रहने वाली महिलाओं और बालिकाओं के साथ त्योहार मनाने की पहल का उद्देश्य उन्हें यह एहसास कराना है कि वे समाज से अलग-थलग नहीं हैं। जरूरत के समय सहयोग, सम्मान और संवेदनशीलता भी सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं।

आगरा की बुजुर्ग महिला की कहानी बताती है कि कभी-कभी अपनों से मिला दर्द गहरा होता है, लेकिन किसी बच्चे की छोटी-सी पहल भी जिंदगी में उम्मीद जगा सकती है। यही संदेश इस अभियान की मानवीय पहल को खास बनाता है।
खेल, शिक्षा और सकारात्मक सोच से संवरेगा युवाओं का भविष्य, नशे से दूरी का दिया संदेश
फर्रुखाबाद । युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से बचाकर स्वस्थ एवं रचनात्मक जीवन की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्पोर्ट्स स्टेडियम, फतेहगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सांसद मुकेश राजपूत की उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए अपनी क्षमता का उपयोग शिक्षा, खेल और अन्य सकारात्मक कार्यों में करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

स्वस्थ आदतों से मजबूत बनेगी युवा पीढ़ी

कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि युवावस्था जीवन निर्माण का महत्वपूर्ण समय है। इस दौरान अपनाई गई आदतें व्यक्ति के स्वास्थ्य, व्यवहार और भविष्य को प्रभावित करती हैं। नशे की लत से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में युवाओं को खेल गतिविधियों, नियमित व्यायाम, पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों से जोड़ना आवश्यक है।

स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए नशे से बचना जरूरी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य केवल बीमारी से मुक्त रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए अनुशासित दिनचर्या और हानिकारक आदतों से दूरी भी जरूरी है। युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगानी चाहिए तथा शारीरिक सक्रियता और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त समाज के निर्माण में जागरूकता के साथ प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता महत्वपूर्ण है।

परिवार और समाज की भूमिका भी अहम

जिला समाज कल्याण अधिकारी ने युवाओं को अपनी प्रतिभा विकसित करने और शिक्षा सहित उपयोगी गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वस्थ सामाजिक वातावरण बनाने में परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशे से मुक्त वातावरण तैयार करने के लिए जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ना होगा। युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
परिवार नियोजन साधनों की उपलब्धता पर डिजिटल नजर, पोर्टेल से जुड़ेगी मांग और आपूर्ति की प्रक्रिया
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन के साधनों की उपलब्धता बनाए रखने और उनकी जरूरत का सही आकलन करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। अब परिवार नियोजन सामग्री की मांग दर्ज करने, इंडेंट तैयार करने और सामग्री जारी किए जाने की प्रक्रिया को पोर्टल के माध्यम से संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय का उद्देश्य है कि संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों की आवश्यकता का पता समय रहते चले और लाभार्थियों को जरूरी साधन उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी न हो।

22 सितंबर तक 1,119 संस्थान पोर्टल पर सक्रिय

एक अप्रैल से 22 सितंबर 2026 तक की ऑपरेशन लाइजेशन रिपोर्ट के अनुसार, 1,998 पंजीकृत स्वास्थ्य संस्थानों में 1,119 संस्थान पोर्टल पर ऑपरेशनल थे। इस श्रेणी में संचालन की स्थिति 56 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं दूसरी श्रेणी में 343 पंजीकृत संस्थानों में 197 संस्थान सक्रिय मिले, जो 57 प्रतिशत है।

सब सेंटरों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने पर जोर

ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सब सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिले के 1,655 पंजीकृत सब सेंटरों में से 922 ऑपरेशनल हो चुके हैं। इस प्रकार यहां संचालन की स्थिति 56 प्रतिशत दर्ज हुई है। पोर्टल के नियमित इस्तेमाल से इन केंद्रों पर सामग्री की जरूरत दर्ज करने और आपूर्ति की स्थिति जानने में सुविधा मिलेगी।

रिपोर्ट में 9,057 आशा कार्यकर्ताओं का पंजीकरण भी दर्ज है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को उपलब्ध साधनों की जानकारी देने का कार्य किया जाता है। स्वास्थ्य इकाइयों और जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों के बीच समन्वय बेहतर होने से सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड से सामने आएगी जरूरत और उपलब्धता की स्थिति

पोर्टल के माध्यम से संबंधित इकाई की मांग, इंडेंट और सामग्री जारी किए जाने की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। इससे यह पहचानने में आसानी होगी कि किस केंद्र को किस साधन की आवश्यकता है और उसकी मांग पर क्या कार्रवाई हुई है। जिन स्वास्थ्य इकाइयों में पोर्टल का संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है या नियमित नहीं है, उन्हें सक्रिय करने की आवश्यकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय का जोर व्यवस्था को केवल पंजीकरण तक सीमित रखने के बजाय उसके नियमित उपयोग पर है। ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित अधिकारियों को सामग्री की मांग और उपलब्धता की समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

व्यवस्था का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना लक्ष्य

परिवार नियोजन कार्यक्रम में गर्भनिरोधक साधनों की समय पर उपलब्धता महत्वपूर्ण है। यदि किसी केंद्र पर जरूरत के अनुरूप सामग्री उपलब्ध नहीं होती, तो वहां आने वाले लाभार्थियों को परेशानी हो सकती है। डिजिटल निगरानी का उद्देश्य ऐसी स्थिति की पहचान कर समय रहते समाधान की दिशा में कदम उठाना है।

स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि सभी संबंधित इकाइया पोर्टल का नियमित उपयोग करें और मांग से लेकर आपूर्ति तक की प्रक्रिया का सही विवरण दर्ज करें। इससे परिवार नियोजन सामग्री के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
खाद विक्रेता के कागजात अपूर्ण मिलने पर तत्काल प्रभाव से लाइसेंस
फर्रुखाबाद। मुख्य विकास अधिकारी के द्वारा दिये गये निर्देश पर  विकास खण्ड कमालगंज क्षेत्र में उर्वरक बिकी केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय मेसर्स छोटे खाद भण्डार खुदागंज के अभिलेख अपूर्ण पाये गये तथा रेटबोर्ड / स्टाकबोर्ड, लगा नहीं पाया गया। 01 सितम्बर 2026 के बिकी रजिस्टर का प्रारूप बदलने पर जनपद के सभी खुदरा विक्रेताओं को नये प्रारूप पर रजिस्टर का रखरखाब किये जाने के निर्देश दिये गये थे, जिसका अनुपालन नहीं किया इस कारण लाइसेन्स निलम्बित किया गया, तथा गौरी खाद भण्डार खुदागंज बिना नोटिस चस्पा किये बन्द कर पालायन कर गये इसलिए लाइसेन्स निलम्बित किया गया। नियमित छापामार कार्यवाही जारी रहेगी। जनपद को आई०पी०एल० कम्पनी की बी०ए०पी० रैक 15 अक्टूबर 2026 को लगने की सम्भावना है, जिससे जनपद को 1500 मै०टन (30000 बोरी) समितियों पर एवं 1000 मै०टन (20000 बोरी) निजी क्षेत्र के बिकी केन्द्रों पर कुल 2500 मै०टन (50000 बोरी) प्राप्त होगी जो सीधे रैक प्वाइन्ट से सहकारी समितियों / निजी बिकी केन्द्रों को आपूर्ति की जायेगी। मेसर्स पी०पी०एल० कम्पनी की डी०ए०पी० रैक भी  16 अक्तूबर 2026 तक लगने की सम्भावना है, जिससे आवश्यकतानुसार डी०ए०पी० मिलेगी। लगातार उर्वरकों की आपूर्ति जारी है। वर्तमान में माह अक्टूबर का यूरिया लक्ष्य 5928 मै०टन के सापेक्ष 27672 मै०टन, डी०ए०पी० लक्ष्य 6578 मै०टन के सापेक्ष 10706 मै०टन, पोटास लक्ष्य 2906 मै०टन के सापेक्ष 8297 मै०टन, एनी०पी०के० लक्ष्य 11142 मै०टन के सापेक्ष 22269 मै०टन, सिंगल सुपर फास्फेट लक्ष्य 12112 मै०टन के सापेक्ष 16905 मै०टन की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है। जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है किसानो को उनकी मॉग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध है और नियमित उर्वरकों की आवक जारी है। किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होने दी जायेगी। जनपद के सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया जाता है कि वे अपनी दुकान पर रेटबोर्ड एवं स्टाकबोर्ड में नियमित दुकान में उपलब्ध उर्वरक स्टाक एवं उसके निर्धारित मूल्य का अंकन करना सुनिश्चित करें, तथा अभिलेखों (स्टाक एवं बिकी रजिस्टर) का नियमित रखरखाव करें, साथ ही किसान भाइयों को उर्वरक बिकी की रसीद भी उपलब्ध करायेंगे। क्षेत्र भ्रमण के समय किसी भी विक्रेता द्वारा दिये गये निर्देशों का अनुपालन ना करने पर उसके ख़िलाफ़ करवाई की जाएगी । उन्होंने कहा कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरकों का विक्रय करता है, तो सम्बन्धित विक्रेता के विरूद्ध उर्वरक नियमों के तहत कार्यवाही की जायेगी। कृषको से अपील है कि उर्वरक कय करते समय अपना आधार कार्ड, खतौनी एवं फार्मर आई०डी० लेकर बिकी केन्द्र पर जायें, यदि किसी कारण से फार्मर आई०डी० नहीं बनी हो तो खतौनी के आधार पर उर्वरक प्राप्त कर सकते है। उर्वरक से सम्बन्धित किसी भी समस्या के आने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में स्थापित कन्ट्रोल रूम नम्बर 05692-297733 पर किसी भी कार्य दिवस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।