भारत के लोकतंत्र में 'CJP मॉडल' का आंदोलन अप्रासंगिक, पीछे विदेशी ताकतों की छाया !
अमित दास
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस लोकतंत्र की नींव कोई आयातित सिद्धांत नहीं है, इसकी नींव हजारों साल की सहिष्णुता, सह-अस्तित्व और संवैधानिक मूल्यों पर टिकी है। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में Citizens for Justice and Peace या CJP के नाम पर जिस तरह के आंदोलन, प्रचार और न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है, उस पर गंभीरता से सोचने का समय आ गया है। क्या इस मॉडल का आंदोलन वास्तव में भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के लिए प्रासंगिक है? या इसके पीछे किसी बड़ी विदेशी ताकत की सोची-समझी साजिश काम कर रही है?
सबसे पहले यह समझना होगा कि CJP मॉडल क्या है? इस मॉडल की मुख्य विशेषता है - एक विशेष समुदाय को 'विक्टिम' के रूप में स्थापित करना, राज्य को हमेशा 'अत्याचारी' के रूप में पेश करना, देश की आंतरिक सामाजिक समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाकर भारत की छवि खराब करना और विदेशी अनुदान से पोषित होकर देश की न्याय व्यवस्था और प्रशासन पर लगातार दबाव बनाना। ये सीधे जनता के बीच जाकर काम नहीं करते, ये काम करते हैं कुछ अंग्रेजी जानने वाले एनजीओ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विदेशी लॉबी के माध्यम से।
भारत का लोकतंत्र इस मॉडल के बिल्कुल विपरीत है। यहां 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व है। यहां सुप्रीम कोर्ट से लेकर ग्राम पंचायत तक हर स्तर पर जवाबदेही की व्यवस्था है। यदि किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उसके लिए संविधान द्वारा दिया गया रास्ता है - थाना, अदालत, मानवाधिकार आयोग। CJP जैसे संगठन उस संवैधानिक रास्ते पर भरोसा न करके सीधे विदेशी संसद, अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट या जिनेवा की मानवाधिकार परिषद में भारत के खिलाफ शिकायत करते हैं। क्या यह देश की न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास नहीं है?
दूसरे, इस आंदोलन की अर्थव्यवस्था को देखिए। कई जांचों में सामने आया है कि इस तरह के संगठनों का अधिकांश पैसा फोर्ड फाउंडेशन, ओपन सोसाइटी फाउंडेशन जैसी विदेशी संस्थाओं से आता है, जिनका भारत की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप का इतिहास बहुत पुराना है। जब किसी आंदोलन का खर्च विदेशी ताकतें चलाती हैं, तो उसका एजेंडा भी विदेश में ही तय होता है। भारत जैसे एक संप्रभु राष्ट्र में, जहां चुनावों के माध्यम से सरकार बदलती है, वहां विदेशी पैसे से पोषित होकर सरकार के खिलाफ जनमत बनाने की कोशिश लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
तीसरे, यह CJP मॉडल भारत की सामाजिक वास्तविकता को नकारता है। भारत में समस्याएं हैं, दंगे, जात-पात, भेदभाव है - हम इनकार नहीं करते। लेकिन भारत का समाधान भी भारत की मिट्टी से ही निकलता है। रामकृष्ण-विवेकानंद से लेकर गांधीजी, अंबेडकर से लेकर आज के सुप्रीम कोर्ट तक - भारत ने अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही किया है। बाहर से 'जस्टिस' और 'पीस' का ज्ञान आयात करने की हमें जरूरत नहीं है। CJP मॉडल भारत को हमेशा एक कमजोर, विभाजित राष्ट्र के रूप में दिखाना चाहता है, जो 75 साल के लोकतांत्रिक भारत की सफलता को नकारता है।
याद रखना होगा, भारत के लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार सभी को है। किसान आंदोलन हुआ है, छात्र आंदोलन हुआ है - वे मिट्टी के आंदोलन थे, देश के लोगों के आंदोलन थे। लेकिन CJP का आंदोलन मिट्टी का नहीं है, यह डॉक्यूमेंट और डॉलर का आंदोलन है। ये गांव में जाकर लोगों के साथ खड़े नहीं होते, ये दिल्ली के पांच सितारा होटलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं।
इसलिए, अब यह सवाल उठाने का समय आ गया है - जो लोग भारत के लोकतंत्र को कमजोर दिखाना चाहते हैं, क्या वे ही भारत के उदय से डर रहे हैं? जो भारत आज G-20 की अध्यक्षता कर रहा है, चांद पर जा रहा है, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, उसे रोकने के लिए क्या मानवाधिकारों के मुखौटे के पीछे इस CJP मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है?
भारत की जनता जागरूक है। वह बाहरी उकसावे में भ्रमित नहीं होगी। सरकार को भी चाहिए कि FCRA कानून को और सख्ती से लागू करे और इस तरह के विदेशी अनुदान से चलने वाले संगठनों की पारदर्शिता सुनिश्चित करे। लोकतंत्र में आलोचना तो रहेगी ही, लेकिन वह आलोचना देश के हितों को बेचकर, विदेशी ताकतों की कठपुतली बनकर नहीं की जा सकती।
( यह लेखक के अपने विचार हैं।)
ইন্টার কাশীকে ২-০ গোলে হারিয়ে জয় দিয়ে মরসুম শুরু কেরালা ব্লাস্টার্স এফসি-র*
*খেলা*
*আইএসএল*


*স্পোর্টস ডেস্ক:*  ইন্ডিয়ান সুপার লিগ (আইএসএল) ২০২৬-২৭ অভিযানে জয় দিয়ে শুরু করল কেরালা ব্লাস্টার্স এফসি। রবিবার পুণের শ্রী শিব ছত্রপতি স্পোর্টস কমপ্লেক্সে ইন্টার কাশীকে ২-০ গোলে হারাল ব্লাস্টার্স। ১৮ মিনিটে ভিবিন মোহনন গোল করে দলকে এগিয়ে দেন, আর ইনজুরি টাইমে আন্দ্রে গ্রিনের গোলে ৩ পয়েন্ট নিশ্চিত হয়।

ম্যাচের শুরু থেকেই আক্রমণাত্মক ছিল কেরালা। পঞ্চম মিনিটে দূর থেকে শট মারেন ফ্রেডি লাল্লাওমাওমা, তবে লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়। পরের মিনিটেই পাল্টা আক্রমণে আসে ইন্টার কাশী। রোসেনবার্গ গ্যাব্রিয়েল বাঁ দিক থেকে শট নেন, কিন্তু কেরালার গোলরক্ষক আর্শ শেখ দারুণ সেভ করেন। মানভীর সিংহও সুযোগ পেয়েছিলেন, তবে তাঁর শট ক্রসবারের উপর দিয়ে চলে যায়। দুই দলই শুরুতে নিয়ন্ত্রণ নেওয়ার চেষ্টা করে।

১৮ মিনিটে এগিয়ে যায় ব্লাস্টার্স। কোরৌ সিংহের বাড়ানো বল থেকে বক্সের মাঝখান থেকে ডান পায়ের শটে গোল করেন ভিবিন মোহনন।

সমতা ফেরাতে মরিয়া হয়ে ওঠে ইন্টার কাশী। ৩৫ মিনিটে মানভীর সিংহের শট ফের রুখে দেন শেখ। অন্যদিকে কেরালাও সুযোগ তৈরি করতে থাকে। ফ্রেডি লাল্লাওমাওমার শট বাঁচান আলবিনো গোমস, প্রথমার্ধের ইনজুরি টাইমে কোরৌ সিংহের শটও বাঁচিয়ে দেন তিনি। এক গোলে এগিয়ে থেকেই বিরতিতে যায় ব্লাস্টার্স।

দ্বিতীয়ার্ধেও দ্বিতীয় গোলের খোঁজে থাকে কেরালা। বদলি হিসেবে নেমেই শট নেন মোমো ইয়ানসানে, তবে লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়। পল রামফাংজাউভা ও ফ্রেডি দূর থেকে চেষ্টা করেন ব্যবধান বাড়াতে। ৬৫ মিনিটে আন্দ্রে গ্রিনের শট অল্পের জন্য লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়।

ম্যাচে টিকে ছিল ইন্টার কাশীও। ৬১ মিনিটে মানভীর সিংহের হেডার বাঁচান শেখ। ৭২ মিনিটে আয়ুষ ছিকারা শট মারেন, তবে অল্পের জন্য বাইরে চলে যায়। সমতা ফেরানোর চেষ্টা করেও শেষ পর্যন্ত পারেনি ইন্টার কাশী।

ছবি:সংগৃহীত।
অকাল বোধনের আগে মহিলাদের নিরাপত্তায় সুন্দরবনের বাজারে টহল দিল বসিরহাট পুলিশের 'দুর্গা বাহিনী'

বসিরহাট : আসন্ন দুর্গাপুজোকে কেন্দ্র করে মহিলাদের নিরাপত্তা সুনিশ্চিত করতে বিশেষ উদ্যোগ নিল বসিরহাট পুলিশ জেলা। পুজোর আগে এবং পুজোর দিনগুলিতে মহিলারা যাতে নির্বিঘ্নে রাস্তাঘাটে চলাফেরা করতে পারেন, পুজোর কেনাকাটা করতে পারেন এবং প্রতিমা দর্শনে বেরিয়ে কোনওরকম সমস্যার মুখে না পড়েন, সেই লক্ষ্যেই বসিরহাটের সুন্দরবনের ন্যাজাট থানা এলাকায় টহল দিল পুলিশের বিশেষ মহিলা বাহিনী ‘দুর্গা বাহিনী’। বসিরহাট পুলিশ জেলার পুলিশ সুপার অলকানন্দা ভাওয়ালের নির্দেশে, মিনাখাঁর এসডিপিও দেবাশিস চট্টরাজের নেতৃত্বে ও ন‍্যাজাট থানার ভারপ্রাপ্ত পুলিশ আধিকারিক নির্মাল্য দত্তর সহযোগিতায় দুর্গা বাহিনীর সদস্যরা ন্যাজাট থানা এলাকার বিভিন্ন গুরুত্বপূর্ণ স্থানে ঘোরেন। এলাকার জনবহুল জায়গা, বিভিন্ন দোকানপাট এবং ফেরিঘাট পরিদর্শন করেন তারা। পাশাপাশি, সাধারণ মহিলাদের সঙ্গে কথা বলে তাদের নিরাপত্তা সংক্রান্ত বিভিন্ন সমস্যার কথা জানার চেষ্টা করেন মহিলা পুলিশকর্মীরা। মহিলাদের নিরাপত্তা নিয়ে আশ্বস্ত করার পাশাপাশি, কোনওরকম সমস্যা বা অস্বস্তিকর পরিস্থিতির মুখে পড়লে কীভাবে পুলিশের সাহায্য নেওয়া যায়, সে বিষয়েও সচেতন করার উদ্যোগ নেওয়া হয়। দুর্গাপুজোর সময় বিভিন্ন এলাকায় মানুষের ভিড় বাড়ে। কেনাকাটা, প্রতিমা দর্শন এবং আত্মীয়স্বজনের বাড়িতে যাতায়াতের জন্য বহু মহিলা বাড়ির বাইরে বের হন। বিশেষ করে বাজার, ফেরিঘাট ও অন্যান্য জনবহুল এলাকায় ভিড়ের সুযোগ নিয়ে যাতে কেউ মহিলাদের হেনস্থা করতে না পারে, সেদিকে নজর রাখাই পুলিশের এই বিশেষ উদ্যোগের অন্যতম লক্ষ্য। সেই কারণে পুজোর আগেই বিভিন্ন এলাকায় ঘুরে পরিস্থিতি খতিয়ে দেখছে দুর্গা বাহিনী। সুন্দরবনের ন্যাজাটের মতো নদী ও ফেরিঘাট সংলগ্ন এলাকায় সাধারণ মানুষের যাতায়াতের ক্ষেত্রে ফেরিঘাটের গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা রয়েছে। প্রতিদিন বহু মানুষ নানা প্রয়োজনে এই সমস্ত ঘাট ব্যবহার করেন। পুজোর সময় যাত্রীসংখ্যা বাড়লে নিরাপত্তার বিষয়টিও বিশেষ গুরুত্ব পায়। তাই ফেরিঘাটগুলিতে গিয়ে পরিস্থিতি পর্যবেক্ষণ করার পাশাপাশি সাধারণ মানুষের সঙ্গে যোগাযোগ স্থাপনের উপরেও জোর দেন মহিলা পুলিশকর্মীরা। পুলিশের এই উদ্যোগে মহিলাদের মধ্যে নিরাপত্তা সম্পর্কে সচেতনতা বাড়বে বলে মনে করা হচ্ছে। শুধু পুজোর কয়েকটি দিন নয়, মহিলাদের নিরাপত্তা এবং তাদের মধ্যে পুলিশের প্রতি আস্থা বাড়াতে এই ধরনের উদ্যোগ গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা নিতে পারে। বসিরহাট পুলিশ জেলার উদ্যোগে দুর্গা বাহিনীর এই তৎপরতা পুজোর আগে মহিলাদের নিরাপত্তা সুনিশ্চিত করার প্রচেষ্টারই একটি অংশ। ছবি: সৌমাভ মণ্ডল।
ইডেনে দেবীপক্ষের সূচনায় বর্ণাঢ্য অনুষ্ঠান, মাতৃপক্ষে পুজোর আনুষ্ঠানিক উদ্বোধন করলেন মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী

*কলকাতা, ১০ অক্টোবর:* পিতৃপক্ষ পেরিয়ে মাতৃপক্ষে দেবীপক্ষের সূচনালগ্নে কলকাতার ইডেন গার্ডেন্সে বর্ণাঢ্য অনুষ্ঠানের মধ্য দিয়ে এবারের দুর্গাপুজোর আনুষ্ঠানিক সূচনা করল পশ্চিমবঙ্গ সরকার। সরকারি উদ্যোগে আয়োজিত এই মেগা ইভেন্টেই রাজ্যের পুজো অনুদান, পুজোর সাংস্কৃতিক ও ধর্মীয় মাহাত্ম্য নিয়ে বড় বার্তা দিলেন মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী।

বিকেল ৫ টায় ইডেনে প্রবেশ করেন মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী। তিনি মাঠে পৌঁছতেই সমবেত শঙ্খধ্বনি ও উলুধ্বনিতে মুখর হয়ে ওঠে গোটা স্টেডিয়াম। রেড রোড থেকে হেঁটে তিনি অনুষ্ঠানস্থলে পৌঁছান।

অনুষ্ঠানের বিশেষ অতিথি হিসেবে উপস্থিত ছিলেন রাজ্যপাল আর এন রবি। এছাড়াও মঞ্চে উপস্থিত ছিলেন কেন্দ্রীয় প্রতিমন্ত্রী সুকান্ত মজুমদার, পুরমন্ত্রী অগ্নিমিত্রা পাল, শিল্প মন্ত্রী তাপস রায়,রাজ্য মন্ত্রিসভার সদস্যরা,মুখ্যসচিব মনোজ আগরওয়াল, বিজেপির রাজ্য সভাপতি শমীক ভট্টাচার্য সহ দলের একাধিক সাংসদ ও বিধায়ক। মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় জমানায় কার্নিভালের মঞ্চ আলো করে থাকতেন টলি পাড়ার কুশিলবরা, মাইক থাকত তাঁরই হাতে। তুলনায় এদিনের আয়োজন ছিল অনেক বেশি পেশাদার। মঞ্চ সঞ্চালনার দায়িত্বে ছিলেন অভিনেত্রী সৌরসেনী মৈত্র।

ক্রিকেটের চেনা ইডেন এদিন সেজেছিল উৎসবের সাজে। মাঠের ঠিক মাঝখানে রাখা হয়েছিল দুটি বিশাল শঙ্খের প্রতিরূপ। মাঝের আলপনায় লেখা ছিল ‘দুর্গাপুজো ২০২৬, পশ্চিমবঙ্গ’। ঢাকের বাদ্যি, শঙ্খ ও উলুধ্বনিতে এক অন্য আবহ তৈরি হয়।

*মুখ্যমন্ত্রীর তিন বড় ঘোষণা:*

*১. ২০০-র বেশি পুজো কমিটি অনুদান নেয়নি:*
মুখ্যমন্ত্রী বলেন, “আপনারা শুনলে খুশি হবেন, বিশেষ করে কলকাতাতে ২০০-র বেশি পুজো কমিটি, তারা আমার আবেদনে সাড়া দিয়ে বলেছেন যে এই অর্থ গ্রামীণ পুজো কমিটিগুলোকে দিন, মহিলা পুজো কমিটিগুলোকে দিন, এই অর্থ আমরা নেব না।”

*২. আগামিকাল থেকে পুজোর অনুদান দেওয়া শুরু:*

তিনি জানান, “আমরা দুর্গাপুজোর আয়োজনকারী ক্লাবগুলিকে, সংস্থাকে, গ্রামবাসী এবং ওয়ার্ডবাসী, নগরবাসীকে এক লক্ষ টাকা করে অর্থনৈতিক সাহায্যের কথা ঘোষণা করেছিলাম যারা নিতে ইচ্ছুক। অনেকেই নিয়েছেন, আবেদন করেছেন, তারা আগামিকাল থেকে পাবেন।” সঙ্গে তিনি স্পষ্ট করেন, “আমরা বড় পুজোর বাজেটের কমিটিগুলিকে আবেদন করেছিলাম, তারা যদি চান অনুদান নাও নিতে পারেন। এর জন্য সরকার তাদের প্রতি কোনও বিরূপ মনোভাব প্রকাশ করবে না।”

*৩. পিতৃপক্ষে নয়, মাতৃপক্ষে সূচনা:*
মুখ্যমন্ত্রী বলেন, “মাননীয় কেন্দ্রীয় স্বরাষ্ট্র ও সমবায় মন্ত্রী অমিত শাহ ২০২৩ সালে ভিক্টোরিয়াতে এসে এই কর্মসূচির উদ্বোধন করে দিয়ে গিয়েছিলেন, তার জন্য কৃতজ্ঞচিত্তে আজ শ্রদ্ধা জ্ঞাপন করতে চাই। আমরা রাজ্য মন্ত্রিসভা, রাজ্য সরকার ঠিক করেছিলাম যে পিতৃপক্ষে দুর্গাপূজার সূচনা হতে পারে না। তাই আমরা আজ মাতৃপক্ষে, দেবীপক্ষে সূচনা করলাম।”

তিনি আরও বলেন, “আমরা ঠিক করেছিলাম যে দুর্গাপূজার সাংস্কৃতিক ঐতিহ্য থাকবে, কিন্তু সঙ্গে তার যে ধর্মীয় মাহাত্ম্য, শাস্ত্র, তার যে পঞ্জিকা মতে সূচি, সেটা মেনে এবারের দুর্গাপূজা অনুষ্ঠিত হবে।”

সরকারের দাবি, দুনিয়া জুড়ে বাঙালির আবেগ ও দুর্গাপুজোর বিশ্বজনীন সংযোগ ঘটাতেই এই মেগা আয়োজন।

ছবি সৌজন্যে: তথ্য ও সংস্কৃতি দফতর।
২০০-র বেশি পুজো কমিটি সরকারি অনুদান নেবে না, গ্রামীণ পুজোয় যাবে সেই টাকা: ইডেনের মেগা ইভেন্ট থেকে ঘোষণা শুভেন্দুর

*ইডেনে বর্ণাঢ্য অনুষ্ঠান, রেড রোড ধরে হেঁটে ইডেনে মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী*
*কলকাতা:* শুধু সংস্কৃতিকে ধরে রাখাই নয়, দুর্গাপুজোর ধর্মীয় মাহাত্ম্যকে তুলে ধরতেও এবার বিশেষ গুরুত্ব দেওয়া হয়েছে। কলকাতার ইডেন গার্ডেন্সের মেগা মহালয়া ইভেন্ট থেকে এমনটাই জানালেন মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী।
শনিবার বিকালে ইডেনে রাজ্য সরকার আয়োজিত বর্ণাঢ্য অনুষ্ঠানে যোগ দিতে গাড়ি ছেড়ে রেড রোড ধরে হেঁটে ইডেনে পৌঁছান মুখ্যমন্ত্রী। তাঁর সঙ্গে ছিলেন পুরমন্ত্রী অগ্নিমিত্রা পাল,তাপস রায় সহ মন্ত্রিসভার একাধিক সদস্য। উপস্থিত ছিলেন রাজ্যের মুখ্যসচিব মনোজ আগরওয়াল, টলিউড তারকা ঋতুপর্ণা সেনগুপ্ত, সহ বিশিষ্টজনেরা। *অনুদান নিয়ে বড় ঘোষণা:*

এদিন মঞ্চ থেকে মুখ্যমন্ত্রী বলেন, “২০০-র বেশি পুজো কমিটি আমার আবেদনে সাড়া দিয়েছে। তারা জানিয়েছে, তারা সরকারি অনুদানের টাকা নেবে না।” তিনি জানান, এই পুজো কমিটিগুলির অনুদানের টাকা গ্রামীণ পুজোগুলিকে দেওয়ার কথা বলা হয়েছে।
মুখ্যমন্ত্রী আরও জানান, এবার পুজোর অনুমোদন নিয়ে কোথাও কোনও কমিটিকে হাইকোর্টে যেতে হয়নি। রাজ্যে আগে ৪৫,০০০ পুজোর অনুমোদন ছিল। এবার নতুন করে আরও ১২,৪০০ পুজো কমিটিকে অনুমোদন ও সরকারি অনুদান দেওয়া হয়েছে। *জাঁকজমকের মাঝে টিকিট বণ্টন নিয়ে প্রশ্ন:*

রাজ্য সরকারের উদ্যোগে ঢাকের বাদ্যি, উলুধ্বনি ও শঙ্খধ্বনির সঙ্গে দেবীপক্ষের সূচনায় ইডেনে এই মেগা আয়োজন করা হলেও, টিকিট বণ্টন নিয়ে প্রশ্ন উঠেছে। দুনিয়া জুড়ে বাঙালির আবেগ ও দুর্গাপুজোর বিশ্বজনীন সংযোগ ঘটাতে এই অনুষ্ঠানের আয়োজন করা হয়েছিল, কিন্তু সাধারণ মানুষ কতটা শরিক হতে পারলেন, তা নিয়ে প্রশ্ন থেকেই যাচ্ছে। ইডেনের গ্যালারিতে কারা ছিলেন? তাঁরা কীভাবে স্টেডিয়ামে ঢোকার পাস পেলেন? ‘ফার্স্ট কাম ফার্স্ট সার্ভ’ ভিত্তিতে বিনামূল্যে পাস কোথা থেকে পাওয়া যাবে, সে ব্যাপারে সাধারণ মানুষের কাছে কোনও স্পষ্ট তথ্য ছিল না বলে অভিযোগ। এই প্রতিবেদন লেখা পর্যন্ত সরকারের দুই মন্ত্রীও টিকিট কোথা থেকে পাওয়া গিয়েছে বা কে বণ্টন করেছেন, তা নিয়ে স্পষ্ট করে কিছু বলতে পারেননি। ওয়াকিবহাল মহলের মতে, জাঁকজমকপূর্ণ আয়োজনের মধ্যেও সরকারের সর্বোচ্চ স্তরে সমন্বয়ের অভাব ধরা পড়েছে। এই অনুষ্ঠানের মূল দায়িত্বে ছিলেন তথ্য ও সংস্কৃতি দফতর। ফলে অব্যবস্থার দায় নিয়ে প্রশ্ন উঠছে শীর্ষ আমলাদের ভূমিকা নিয়েও। ছবি: অসীম পাল।
মহালয়ায় গঙ্গার ঘাটে ঘাটে পিতৃতর্পণ, নৌকায় ঘাট পরিদর্শনে ব্যারাকপুরের বিধায়ক কৌস্তভ বাগচী*
*ব্যারাকপুর, উত্তর ২৪ পরগনা:* বাংলা ও বাঙালির আবেগের দিন মহালয়া। এদিন থেকেই পিতৃপক্ষের অবসান এবং দেবীপক্ষের সূচনা হয়। প্রচলিত রীতি অনুযায়ী, পূর্বপুরুষদের উদ্দেশ্যে জলদানের জন্য ভোর থেকেই গঙ্গার ঘাটে ঘাটে ভিড় করেন ধর্মপ্রাণ মানুষ। তর্পণের মাধ্যমে পিতৃপুরুষকে জলদান করেন তাঁরা। রাজ্যের অন্যান্য গঙ্গার ঘাটের মতো উত্তর ২৪ পরগনার পানিহাটি বিধানসভা এলাকার বিভিন্ন ঘাটেও এদিন সকাল থেকেই চলছে পিতৃতর্পণ। নির্বিঘ্নে তর্পণ প্রক্রিয়া সম্পন্ন করতে ঘাটগুলিতে মোতায়েন রয়েছে কঠোর পুলিশি নিরাপত্তা।একই ছবি ব্যারাকপুরেও। ভোর থেকেই ব্যারাকপুরের প্রতিটি ঘাটে পুণ্যার্থীদের ভিড় লক্ষ্য করা গেছে। তর্পণের সময় নিরাপত্তা ব্যবস্থা খতিয়ে দেখতে এবং সাধারণ মানুষের সঙ্গে জনসংযোগ করতে ভোররাত থেকেই নৌকায় করে গঙ্গার ঘাটগুলি পরিদর্শন করেন ব্যারাকপুরের বিধায়ক কৌস্তভ বাগচী। এদিন তিনি মঙ্গলপাণ্ডে ঘাট, অন্নপূর্ণা ঘাট, রাসমণি ঘাট সহ একাধিক ঘাট ঘুরে দেখেন। প্রশাসন সূত্রে জানা গেছে, বিপজ্জনক অবস্থার কারণে এবার গান্ধীঘাটে তর্পণের আয়োজন বন্ধ রাখা হয়েছে। তবে অন্নপূর্ণা ও রাসমণি ঘাটে পুণ্যার্থীদের ঢল ছিল চোখে পড়ার মতো।*এই কর্মসূচি প্রসঙ্গে বিধায়ক কৌস্তভ বাগচী বলেন,*“দেবীপক্ষের সূচনায় বাংলায় আদি অনন্তকাল ধরে চলে আসা মহালয়ার ভোরে বীরেন্দ্রকৃষ্ণ ভদ্রের চণ্ডীপাঠ আর ঘাটে ঘাটে তর্পণ এক অদ্ভুত আলাদা অনুভূতি এনে দেয়। জানান দেয়, সবকিছু ভুলে মা দুর্গার আরাধনার সময় হয়েছে। সময় হয়েছে আনন্দে মেতে ওঠার।” *অন্যদিকে, শ্যামনগর নানাবাবা ঘাটেও* মহালয়া উপলক্ষ্যে পিতৃতর্পণের জন্য ভিড় উপচে পড়ে। সেখানে উপস্থিত ছিলেন জগদ্দলের বিধায়ক রাজেশ কুমার। তিনি পুণ্যার্থীদের সঙ্গে কথা বলেন এবং যাঁরা গঙ্গাস্নান ও তর্পণ সেরে বাড়ি ফিরছিলেন, তাঁদের হাতে লাড্ডু তুলে দেন।ছবি: উৎপল দাস ও প্রবীর রায়।
নন্দীগ্রামে শুভেন্দুর রেকর্ড ভাঙলেন হাসিরানি, রেজিনগরে সংখ্যালঘুদের বন্ধুত্বের বার্তা মুখ্যমন্ত্রীর কাজে লাগলো

*নিউজ ব্যুরো:* মেদিনীপুরের নন্দীগ্রাম ও মুর্শিদাবাদের রেজিনগর উপনির্বাচনে বিজেপির ল্যান্ডস্লাইড জয়।

- *নন্দীগ্রাম:* বিজেপি প্রার্থী হাসিরানি রথ প্রায় ১ লক্ষ ১৫ হাজার ভোটে জয়ী হয়েছেন। তিনি মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারীর নিহত সহকারী চন্দ্রনাথ রথের মা। শুভেন্দু অধিকারী এই আসনে ২০২১ সালে ১,৯৫৬ ভোটে এবং ২০২৬ সালে ৯,৬৬৫ ভোটে জিতেছিলেন। হাসিরানি সেই রেকর্ড ভেঙে দিয়েছেন।নন্দীগ্রামে হাসিরানি পেয়েছেন ১ লক্ষ ৬৪ হাজার ৪২৭ ভোট, কংগ্রেস প্রার্থী পেয়েছেন প্রায় ৪১ হাজার ভোট।

- *রেজিনগর:* প্রায় ৭০% সংখ্যালঘু অধ্যুষিত এই আসনেও বিজেপি প্রায় ৭৫,০০০ ভোটে জয়ী হয়েছে।

ভোটের আগে মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী সংখ্যালঘু ভোটারদের উদ্দেশ্যে বলেছিলেন, "জয় শ্রীরাম বলতে হবে না, ভারত মাতা কি জয় বলুন। ৬ অক্টোবর বন্ধুত্বের হাত বাড়ানোর শুভ দিন।" বিজেপির প্রচার ছিল - মোদী সবার জন্য কাজ করেন, রাজ্য সরকারও সবার জন্য কাজ করবে।

নন্দীগ্রামে প্রায় ৩০-৩৫% এবং রেজিনগরে প্রায় ৭০% সংখ্যালঘু ভোট রয়েছে। এই ফলাফলকে মুখ্যমন্ত্রীর সংখ্যালঘু আউটরিচের সাফল্য হিসেবেই দেখছে রাজনৈতিক মহল।
জেলার মুকুটে পালক, রাজ্য নাট্য উৎসবে চমক দিয়ে সংবর্ধিত উত্তর ২৪ পরগনার ৩ স্কুল

*নিজস্ব সংবাদদাতা:* উত্তর ২৪ পরগনা জেলা প্রশাসনের পক্ষ থেকে আজ জেলার তিনটি স্কুল নাট্যদলকে সংবর্ধিত করা হল। তাদের অসাধারণ অভিনয়ের জন্য এই সম্মান জানানো হয়। সংবর্ধিত দলগুলি হল,ব্যারাকপুর শিক্ষা জেলার শ্যামনগর বালিকা বিদ্যালয়, বারাসাত শিক্ষা জেলার গোপালনগর গিরিবালা বালিকা বিদ্যালয় এবং গণশিক্ষা সম্প্রসারণ ও গ্রন্থাগার পরিষেবা দপ্তরের অধীনস্থ রামকৃষ্ণ বিবেকানন্দ মিশন বধির, মূক ও দৃষ্টিহীন বালিকা বিদ্যালয়। অনুষ্ঠানে উপস্থিত ছিলেন উত্তর ২৪ পরগনার জেলাশাসক শিল্পা গৌরিসারিয়া এবং অতিরিক্ত জেলাশাসক অহিংসা জৈন। জেলা প্রশাসনের এই উদ্যোগে খুশি পড়ুয়া ও শিক্ষক মহল।
ছবি: সৌজন্যে জেলা তথ্য ও সংস্কৃতি দফতর।
।। হাসনাবাদে অবৈধভাবে সাদা বালি তোলার বিরুদ্ধে অভিযান, তিনটি নৌকা বাজেয়াপ্ত, গ্রেফতার ৬ ।।
বসিরহাট : বসিরহাটের হাসনাবাদ থানার ডাঁসা নদীর বাইনারা ফেরিঘাটের কাছে অবৈধভাবে সাদা বালি তোলার বিরুদ্ধে অভিযান চালালো পুলিশ। শুক্রবার সকালে চালানো এই অভিযানে সাদা বালি বোঝাই তিনটি নৌকা বাজেয়াপ্ত করা হয়েছে। ঘটনায় গ্রেফতার করা হয়েছে ছ’জনকে।
পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, ডাঁসা নদীর বাইনারা ফেরিঘাট সংলগ্ন এলাকায় অবৈধভাবে সাদা বালি তোলা হচ্ছে বলে খবর পেয়ে অভিযান চালানো হয়। অভিযানের সময় বালি বোঝাই তিনটি নৌকা আটক করেন পুলিশকর্মীরা। সেই সঙ্গে ঘটনায় জড়িত থাকার অভিযোগে ছ’জনকে গ্রেফতার করা হয়। অবৈধভাবে বালি তোলার সঙ্গে আর কারা জড়িত রয়েছে, তা খতিয়ে দেখা হচ্ছে।
টাকি রোডে গরু পাচারের চেষ্টা, দেগঙ্গায় ১৫টি গরু-সহ গ্রেফতার চালক

*নিজস্ব সংবাদদাতা:*উত্তর ২৪ পরগনার টাকি রোডে ফের সক্রিয় গরু পাচার চক্র আটকালো পুলিশ। নদিয়া থেকে ঘুরপথে বাংলাদেশে পাচারের উদ্দেশ্যে নিয়ে যাওয়ার সময় দেগঙ্গা থানার পুলিশের হাতে ধরা পড়লো ১৫টি গরুবোঝাই গাড়ি। ঘটনায় গ্রেফতার করা হয়েছে গাড়ির চালক শফিকুল ইসলামকে। ধৃতের বাড়ি রাজারহাটে। পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, বৃহস্পতিবার গভীর রাতে একটি গাড়িতে করে গরুগুলি রাজ্য সড়ক ২ (টাকি রোড) ধরে নিয়ে যাওয়া হচ্ছিল। উত্তর ২৪ পরগণার দেগঙ্গা থানার কালিয়ানী বিলের কাছে দেগঙ্গা থানার আইসি তাপস ঘোষের নেতৃত্বাধীন কর্তব্যরত পুলিশকর্মীরা গাড়িটিকে আটক করেন। গাড়িতে তল্লাশি চালিয়ে দেখা যায়, ১৫টি গরুকে ঠাসাঠাসি করে রাখা হয়েছে। গরুগুলির পা বাঁধা ছিল। এমনকী, গাড়ির উপরে পেপারের ছাউনি দিয়ে গরুগুলিকে আড়াল করারও চেষ্টা করা হয়েছিল বলে জানা গিয়েছে। এরপর গাড়িটিকে দেগঙ্গা থানায় নিয়ে যাওয়া হয়। পুলিশ সূত্রে খবর, গরু পরিবহণের জন্য কোনও বৈধ নথিপত্র দেখাতে পারেননি চালক। এরপরই গাড়ির চালক শফিকুল ইসলামকে গ্রেফতার করা হয় এবং গরুগুলিকে বাজেয়াপ্ত করে পুলিশ। ধৃতকে শুক্রবার বারাসাত জেলা আদালতে পেশ করা হয়। নদিয়া থেকে ঘুরপথে টাকি রোড ব্যবহার করে বাংলাদেশে গরু পাচারের চেষ্টা হচ্ছিল কি না, তা খতিয়ে দেখছে পুলিশ। এই ঘটনার পিছনে আরও কেউ জড়িত রয়েছে কি না, তা জানার চেষ্টা করছেন তদন্তকারীরা।

ছবি: সৌমাভ মণ্ডল।