भनियावाला–ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के लिए पेड़ कटान का विरोध तेज, प्रदर्शनकारियों और वन विभाग में टकराव
-  करीब 3,000 पेड़ों की कटाई का विरोध, पुलिस की मौजूदगी में चल रही कार्रवाई; पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी



देहरादून। उत्तराखंड में भनियावाला–ऋषिकेश फोरलेन हाईवे परियोजना के लिए प्रस्तावित करीब 3,000 पेड़ों की कटाई को लेकर विरोध तेज हो गया है। सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की जा रही है, वहां घना वन क्षेत्र है और अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास मौजूद है। उनका आरोप है कि बड़े पैमाने पर पेड़ कटने से जैव विविधता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
वहीं, वन विभाग परियोजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पेड़ कटान की कार्रवाई कर रहा है। विरोध को देखते हुए कटान के दौरान पुलिस बल भी तैनात किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और कार्य में बाधा न आए।
कटान के दौरान प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। मौके पर एक महिला प्रदर्शनकारी ने पेड़ काट रहे कर्मियों से भावुक अपील करते हुए कहा, "तेरी आत्मा मर गई है? अपनी मां पर छुरी चला रहा है?" यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किया जा रहा है।
फिलहाल, एक ओर प्रशासन परियोजना को क्षेत्र की यातायात सुविधा और विकास के लिए आवश्यक बता रहा है, जबकि दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठन पेड़ों की कटाई रोकने और वैकल्पिक समाधान तलाशने की मांग पर अड़े हुए हैं।
देहरादून में राहुल गांधी के कार्यक्रम पर सियासी घमासान, अनुमति रद्द होने पर कांग्रेस का हंगामा

-  'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से पहले आधी रात तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, पुलिस-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प; अब बन्नू स्कूल में होगा आयोजन

ब्यूरो उत्तराखंड

देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 17 जुलाई को प्रस्तावित "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कार्यक्रम स्थल को लेकर जिला प्रशासन और कांग्रेस के बीच विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद देर रात तक हाई-वोल्टेज घटनाक्रम देखने को मिला।
कांग्रेस का कहना है कि जिला प्रशासन ने पहले 15, 16 और 17 जुलाई के लिए कार्यक्रम की अनुमति दी थी और निर्धारित शुल्क भी जमा करा दिया गया था। पार्टी का आरोप है कि अंतिम समय में प्रशासन ने अनुमति निरस्त कर कार्यक्रम को दूसरे स्थान पर आयोजित करने के लिए कहा।
इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार देर रात कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता परेड ग्राउंड पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
बाद में कांग्रेस ने कार्यक्रम को रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में आयोजित करने पर सहमति जताई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राहुल गांधी के कार्यक्रम से घबरा गई है और प्रशासन के माध्यम से कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की गई।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अनुमति बदले जाने के कारणों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आजीविका से जुड़ी पहलों के माध्यम से समग्र सामुदायिक विकास को बढ़ावा दिया

उत्तराखंड सरकार के साथ साझेदारी दीर्घकालिक सामाजिक बुनियादी ढांचे की पहल के माध्यम से सामुदायिक विकास को आगे बढ़ाती है

देहरादून।  टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) ने आज उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक कल्याण और आजीविका से जुड़े कई सामुदायिक विकास पहलों की सफल पूर्णता की घोषणा की। ये हस्तक्षेप राज्य सरकार के साथ किए गए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हिस्सा हैं, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 से उधम सिंह नगर जिले के खटीमा और नैनीताल जिले के हल्द्वानी में समग्र CSR कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सामूहिक रूप से, इन पहलों से 4 लाख से अधिक लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

शैक्षिक परिणामों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) ने उधम सिंह नगर और नैनीताल जिलों के सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में कई अवसंरचना विकास पहलें की हैं। टोयोटा के दर्शन “गुणवत्ता अवसंरचना के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना” से प्रेरित होकर, इन पहलों का उद्देश्य 13,532 छात्रों के लिए सीखने के माहौल और समग्र स्कूल अनुभव को बेहतर बनाना है। इसके तहत बच्चों के अनुकूल शिक्षण सामग्री, उच्च गुणवत्ता वाले कक्षा फर्नीचर, स्वच्छ और समय पर मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए उन्नत रसोई सुविधाएँ तथा बेहतर खेल अवसंरचना उपलब्ध कराई गई है। उन्नत खेल सुविधाएँ छात्रों को शारीरिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं और उन्हें जिला एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रही हैं। TKM के “चाइल्ड टू कम्युनिटी” दर्शन के अनुरूप, ये हस्तक्षेप जीवंत और समावेशी स्कूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास करते हैं, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता, समग्र विकास और सामुदायिक विश्वास को मजबूत करते हैं।

सीखने के परिणामों को और मजबूत करने के लिए, TKM ने खटीमा के सरकारी स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने की परियोजना शुरू की है। सामुदायिक आकलन और जमीनी स्तर पर किए गए अवलोकनों से पता चला कि कई प्रयोगशालाएँ अब भी 15 से 20 साल पुराने वैज्ञानिक उपकरणों और मॉडलों पर निर्भर हैं, जिससे व्यावहारिक शिक्षा के अवसर सीमित हो जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए, TKM खटीमा के नौ सरकारी स्कूलों को आधुनिक विज्ञान उपकरण, यंत्र और मॉडल उपलब्ध कराएगा, जिससे 7,000 से अधिक छात्रों को लाभ होगा। इस पहल से अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा मिलने और विज्ञान शिक्षा में शैक्षणिक परिणामों में सुधार होने की उम्मीद है।

सुलभ स्वास्थ्य अवसंरचना के महत्व को समझते हुए, TKM खटीमा के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक चिकित्सा और गैर-चिकित्सा उपकरणों से सशक्त बना रहा है। इस क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता है, जबकि मौजूदा सुविधाओं में आपातकालीन और मातृत्व देखभाल प्रबंधन में अवसंरचना की कमी है। इस पहल के तहत, TKM खटीमा उप-जिला अस्पताल और देवरी व चकरपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करेगा। इस हस्तक्षेप से 3 लाख से अधिक समुदाय के सदस्यों को लाभ मिलने और हर साल 1,500 से अधिक मातृत्व मामलों के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।

सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देने और सक्रिय जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए, TKM ने खटीमा में तीन स्थानों पर ओपन जिम सुविधाएँ स्थापित की हैं और एक स्थान पर बच्चों के लिए समर्पित खेल क्षेत्र विकसित किया है। यह पहल महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुलभ फिटनेस स्थानों की कमी को दूर करती है, साथ ही बच्चों के लिए मनोरंजन के अवसर भी प्रदान करती है। इन सुविधाओं से लगभग 60,000 समुदाय के सदस्यों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा और स्वास्थ्य से आगे बढ़कर, उत्तराखंड में TKM की CSR पहलें आजीविका को मजबूत करने पर भी केंद्रित हैं। कंपनी ने उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर में एक रजाई बनाने के केंद्र को सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना के माध्यम से सहयोग दिया है। इस पहल से स्थानीय स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 120 से अधिक महिलाओं को लाभ मिलेगा, क्योंकि भारी मशीनरी चलाने के लिए अब उन्हें निर्बाध और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिलेगी। पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करके, इस पहल से उत्पादकता में सुधार, आजीविका के अवसरों को मजबूत करने और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान मिलने की उम्मीद है।

10 जुलाई 2026 को देहरादून, उत्तराखंड में CSR डायलॉग 2026 के दौरान एक औपचारिक हस्तांतरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड सरकार; कैबिनेट मंत्री  गणेश जोशी; विधायक खजान दास; विधायक  उमेश शर्मा काऊ;  विश्वास डबर, उपाध्यक्ष – इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग काउंसिल; आर. के. सुधांशु, प्रमुख सचिव;  विनय शंकर पांडे, सचिव; डॉ. सौरभ गहरवार, प्रबंध निदेशक – सिडकुल;  मनमोहन मैणाली, अतिरिक्त सचिव तथा विक्रम गुलाटी, एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट – कॉर्पोरेट अफेयर्स एवं गवर्नेंस, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, सहित TKM के अन्य वरिष्ठ नेतृत्व उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड सरकार ने कहा, “उत्तराखंड का विकास हमारे बच्चों, महिलाओं और समुदायों के लिए मजबूत अवसर बनाने पर निर्भर करता है। हम सभी कॉरपोरेट्स की प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं जिन्होंने शिक्षा को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने और सतत आजीविका को बढ़ावा देने वाली पहलों के माध्यम से राज्य का सहयोग किया है। ये पहलें महत्वपूर्ण सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करती हैं और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव पैदा करती हैं। सरकार और जिम्मेदार कंपनियों के बीच साझेदारी लचीले समुदाय बनाने और राज्य में समावेशी विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे विकास समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।”
विक्रम गुलाटी, कंट्री हेड एवं एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, कॉर्पोरेट अफेयर्स, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने कहा, “सतत समुदाय शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों से बनते हैं। टोयोटा में, ये विकास के आपस में जुड़े स्तंभ हैं जिन्हें हम अपनी सभी पहलों में प्राथमिकता देते हैं। उत्तराखंड में हमारा काम दीर्घकालिक सामाजिक अवसंरचना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो बच्चों को सशक्त बनाए, महिलाओं का सहयोग करे और सामुदायिक कल्याण को बेहतर बनाए। उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर, हमारा उद्देश्य ऐसे स्केलेबल और सतत मॉडल बनाना है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सार्थक प्रभाव पैदा करें।”

2001 से, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर शिक्षा, पर्यावरण, सड़क सुरक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और स्वच्छता तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में समुदायों को सशक्त बनाने के लिए काम कर रही है। ज़रूरत-आधारित हस्तक्षेपों और सरकारों व सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ साझेदारी के माध्यम से, कंपनी लगातार राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान देती रही है और अपनी वैश्विक दर्शन “क्रिएटिंग मोबिलिटी फॉर ऑल” को आगे बढ़ा रही है।
उत्तराखंड: बद्रीनाथ मंदिर में दान-चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की होगी उच्चस्तरीय जांच

देहरादून। बद्रीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक कार्यालय में निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान शामिल हैं।
जांच के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई करते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है।
सरकार ने समिति को जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ या संबंधित व्यक्ति से जानकारी और तकनीकी सहायता लेने का अधिकार दिया है। साथ ही समिति मंदिर के दान एवं चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी देगी।
रामनगर के रिसॉर्ट में कथित अनैतिक गतिविधियों का भंडाफोड़, 52 लोग गिरफ्तार
रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र में पुलिस ने एक रिसॉर्ट पर छापेमारी कर कथित अनैतिक गतिविधियों के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 52 लोगों को गिरफ्तार किया है और 10 महिलाओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
यह कार्रवाई मंजूनाथ टीसी के निर्देश पर एसओजी और पुलिस लाइन की संयुक्त टीम ने देर रात की। पुलिस के अनुसार, लंबे समय से रिसॉर्ट में अवैध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी, जिसके आधार पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने रिसॉर्ट के अलग-अलग कमरों की तलाशी ली, जहां कई संदिग्ध लोग पाए गए। मौके से अवैध शराब, नकदी और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रिसॉर्ट में बिना लाइसेंस के बार का संचालन किया जा रहा था और कुछ कर्मचारियों की इसमें मिलीभगत हो सकती है। हालांकि, रिसॉर्ट का मैनेजर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है।
पुलिस ने रेस्क्यू की गई महिलाओं को आवश्यक कानूनी सहायता और सुरक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है और पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है।
उत्तराखंड की सूखती 13 नदियों को मिलेगा नया जीवन, बड़े संस्थान करेंगे अध्ययन
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार घटते जल प्रवाह और सूखते जल स्रोतों को देखते हुए राज्य सरकार ने नदियों के पुनर्जीवन के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी ने राज्य की 13 प्रमुख नदियों के वैज्ञानिक अध्ययन की योजना तैयार की है, जिसमें देश के प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के संस्थान शामिल होंगे।
स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी (सारा) की इस पहल के तहत ‘एक जिला-एक नदी’ मॉडल पर हर जिले से एक नदी का चयन किया गया है। इन नदियों के साथ-साथ उनके जलग्रहण क्षेत्र, भूजल पुनर्भरण, झीलों और तालाबों की स्थिति का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
इस परियोजना में आईआईटी रुड़की, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान और भारतीय वन्यजीव संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों को जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञ वैज्ञानिक आधार पर यह आकलन करेंगे कि नदियों का जल प्रवाह क्यों कम हुआ और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए कौन से कदम जरूरी हैं।
अल्मोड़ा की जटा गंगा, बागेश्वर की गरुड़ गंगा, पिथौरागढ़ की पूर्वी रामगंगा, नैनीताल की शिप्रा, चंपावत की गौड़ी, पौड़ी की नयार पूर्वी और नयार पश्चिमी, देहरादून और टिहरी की सोंग, चमोली की चंद्रभागा, रुद्रप्रयाग की पुनार, उत्तरकाशी की कमल गंगा, हरिद्वार की पथरी और उधम सिंह नगर की फीका नदी का अध्ययन किया जाएगा।
अध्ययन के बाद संबंधित संस्थान विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें नदियों के पुनर्जीवन के उपाय, जल संरक्षण के तरीके और आवश्यक सुधार शामिल होंगे। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे की योजनाओं को मंजूरी दी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार इस योजना की निगरानी अगले 10 वर्ष तक की जाएगी और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जल संरक्षण के प्रयास जमीनी स्तर पर सफल हो सकें।
ठेके के बाहर फायरिंग मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार, पुरानी रंजिश में चली गोली
देहरादून। रायपुर क्षेत्र में शराब की कैंटीन के बाहर हुई फायरिंग मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है, जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी।
मामला 3 जुलाई की रात का है, जब बंजारावाला निवासी दिवाकर खंडूरी अपने दोस्तों के साथ रिंग रोड स्थित ठेके के बाहर मौजूद थे। इसी दौरान 3–4 अज्ञात लोगों ने पहुंचकर फायरिंग कर दी। इस हमले में नवीन राणा के कंधे और पास से गुजर रहे कामेंद्र शर्मा के पैर में गोली लग गई, जिससे दोनों घायल हो गए।
घटना के बाद रायपुर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के लिए पांच टीमें गठित की गईं और सीसीटीवी फुटेज व स्थानीय जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई।
पुलिस ने थानो रोड, सोढा सरोली क्षेत्र से अरुण कुमार, सन्नी कुमार और आदर्श सिंह को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी अक्षय प्रधान और पीड़ित पक्ष के बीच बिजनौर में शादी समारोह के दौरान विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों पक्षों में रंजिश चल रही थी।
पुलिस के अनुसार, इसी रंजिश के चलते देहरादून में बुलाकर फायरिंग की गई। हालांकि, इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इलाके में दहशत फैल गई।
एसपी देहात जया बलूनी ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी अक्षय प्रधान और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं का नया रिकॉर्ड, 1.18 लाख से अधिक भक्तों ने किए बाबा केदार के दर्शन
-  यात्रा सत्र में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्थानीय पर्यटन और कारोबार को मिला बड़ा संबल

रुद्रप्रयाग। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक 1,18,381 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं। रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं से जहां धाम में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, वहीं स्थानीय पर्यटन और कारोबार को भी नई गति मिली है।
यात्रा सत्र के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु चोपता से तुंगनाथ तक की पैदल यात्रा कर रहे हैं। हिमालय की बर्फ से आच्छादित चोटियां, मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इन दिनों पूरा पैदल मार्ग श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार है।
बढ़ती तीर्थयात्रा का सीधा लाभ चोपता, बणियाकुंड, दुगलबिट्टा और आसपास के क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। होटल, होम-स्टे, भोजनालय, स्थानीय दुकानें, घोड़ा-खच्चर सेवा तथा पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित समाज, वन विभाग, व्यापार संघ तथा स्वयंसेवी संस्थाएं संयुक्त रूप से स्वच्छता, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटी हैं।
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि अब तक दर्शन करने वालों में 60,962 पुरुष, 50,815 महिलाएं, 6,384 बच्चे, 151 साधु-संत और 69 विदेशी श्रद्धालु शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला जाने वाले पर्यटकों को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में पार्किंग, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सुविधाओं का और विस्तार किया जाए, तो तुंगनाथ धाम धार्मिक एवं पर्वतीय पर्यटन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान स्थापित कर सकता है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि तुंगनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
जसपुर में सरकारी भूमि पर बनी अवैध मजार पर चला बुलडोजर, नोटिस अवधि पूरी होने के बाद प्रशासन की कार्रवाई

*वैध दस्तावेज न मिलने पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने हटाया अतिक्रमण, भूमि को कराया कब्जामुक्त*

रुद्रपुर। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत जसपुर क्षेत्र में प्रशासन ने अवैध रूप से निर्मित एक मजार को ध्वस्त कर दिया। अहमद नगर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी इस संरचना को नोटिस की अवधि समाप्त होने और कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के बाद बुलडोजर की मदद से हटाया गया।
प्रशासन के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश पर सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमणों का व्यापक सर्वे कराया गया था। जांच के दौरान अहमद नगर स्थित उक्त मजार सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण के रूप में चिन्हित हुई। इसके बाद संबंधित पक्ष को लगभग तीन सप्ताह पहले नोटिस जारी कर स्वामित्व एवं निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था।
निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद कोई भी व्यक्ति या संस्था आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकी। इसके बाद राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर से अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के उपरांत भूमि को समतल कर सरकारी कब्जे में ले लिया गया।
उप जिलाधिकारी राहुल शाह ने बताया कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण के दौरान मौके पर किसी प्रकार के धार्मिक अवशेष नहीं मिले।
प्रशासन ने दोहराया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में नोटिस, जांच और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार पिछले कई महीनों से सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रही है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सुरक्षा कार्य मानसून के चलते फिलहाल रुका, सिंचाई विभाग ने मंदिर खोलने की दी संस्तुति; अंतिम फैसला प्रशासन करेगा
5 जुलाई से खुल सकता है गर्जिया देवी मंदिर, प्रशासन की मंजूरी के बाद श्रद्धालुओं को मिलेंगे दर्शन


रामनगर। उत्तराखंड के प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर के कपाट 5 जुलाई 2026 से श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की संभावना है। सिंचाई विभाग ने मंदिर में चल रहे सुरक्षा कार्यों को मानसून के कारण फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लेते हुए प्रशासन को मंदिर खोलने की संस्तुति भेजी है। अब अंतिम निर्णय प्रशासन द्वारा लिया जाएगा।
सिंचाई विभाग, रामनगर के अधिशासी अभियंता अजय कुमार जॉन ने बताया कि मंदिर के मुख्य टीले की सुरक्षा को लेकर दूसरे चरण का निर्माण कार्य जारी था, लेकिन लगातार बारिश और मानसून के चलते फिलहाल कार्य कराना संभव नहीं है। ऐसे में विभाग ने उप जिलाधिकारी रामनगर को पत्र भेजकर वर्तमान स्थिति से अवगत कराया है और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोलने का अनुरोध किया है।
उन्होंने बताया कि यदि प्रशासन से अनुमति मिल जाती है तो 5 जुलाई से श्रद्धालु पुनः मां गर्जिया देवी के दर्शन कर सकेंगे। लंबे समय से मंदिर बंद रहने के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
गौरतलब है कि वर्ष 2010 की भीषण बाढ़ के बाद गर्जिया देवी मंदिर स्थित टीले में दरारें आने लगी थीं। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा और संरचना को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध मरम्मत एवं संरक्षण कार्य शुरू किया गया। वर्तमान में दूसरे चरण का कार्य चल रहा था, जिसे अब मानसून समाप्त होने के बाद अक्टूबर से दोबारा शुरू किया जाएगा।
प्रशासन की अंतिम मंजूरी के बाद मंदिर के कपाट खुलने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। यदि अनुमति मिलती है तो हजारों श्रद्धालु एक बार फिर मां गर्जिया देवी के दर्शन कर सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।