हर हाथ में हुनर, हर परिसर में हरियाली, 12 जुलाई को व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग लगाएगा 2.53 लाख पौधे
-  सभी आईटीआई और कौशल केंद्र होंगे अभियान में शामिल

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 12 जुलाई को आयोजित होने वाले ‘वृक्षारोपण महायज्ञ-2026’ में उत्तर प्रदेश का व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग 2.53 लाख पौधों का रोपण करेगा। इस अभियान के माध्यम से प्रदेशभर के सरकारी एवं निजी आईटीआई तथा कौशल विकास केंद्रों में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा।
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि योगी सरकार ने वृक्षारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने वाले जन-आंदोलन का स्वरूप दिया है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश का प्रत्येक युवा हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण में सहभागी बन रहा है।
उन्होंने बताया कि विभाग के अधीन संचालित सभी राजकीय आईटीआई, निजी आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों को अभियान में सक्रिय भागीदारी के निर्देश दिए गए हैं। लक्ष्य रखा गया है कि प्रत्येक प्रशिक्षु कम से कम एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प भी ले।
मंत्री ने कहा कि संस्थानों के परिसर, खाली भूमि और बाउंड्री के आसपास फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। जिन संस्थानों में बाउंड्री नहीं है, वहां पौधरोपण के माध्यम से हरित बाउंड्री विकसित की जाएगी।
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य ‘हुनर के साथ संस्कार और रोजगार के साथ पर्यावरण’ को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी जिला समन्वयकों, प्रधानाचार्यों और निजी आईटीआई संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभियान से दो दिन पहले वन विभाग से पौधे प्राप्त कर लें तथा 12 जुलाई को जनप्रतिनिधियों, प्रशिक्षुओं और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से वृक्षारोपण महायज्ञ को जन-उत्सव के रूप में आयोजित करें।
महोबा और चित्रकूट में पीपीपी मॉडल पर बनेंगे रोप-वे, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी सुविधा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनपद महोबा के गोरखगिरी मंदिर तथा चित्रकूट के लालापुर स्थित बाल्मीकि आश्रम में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर रोप-वे परियोजनाएं विकसित करने का निर्णय लिया है। परियोजनाओं के विकास एवं संचालन के लिए निजी निवेशकों के माध्यम से आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों स्थलों पर जल्द ही रोप-वे सेवा शुरू की जाएगी। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को दर्शन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी तथा धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि महोबा का गोरखगिरी पर्वत एक प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ ने अपने सातवें शिष्य सिद्धो दीपकनाथ के साथ यहां तपस्या की थी। मंदिर ऊंचाई पर स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं को पहुंचने में कठिनाई होती है, जिसे रोप-वे सेवा से काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
इसी प्रकार चित्रकूट के लालापुर स्थित बाल्मीकि आश्रम भी प्रमुख आस्था केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सरकार का मानना है कि रोप-वे शुरू होने से यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पर्यटन मंत्री ने यह भी बताया कि गोरखपुर स्थित परमहंस योगानंद जन्मस्थली के पर्यटन विकास कार्य पूर्ण होने के बाद उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी योगदा सत्संग सोसायटी ऑफ इंडिया को सौंपने का प्रस्ताव है। इसके लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।
यूपी में नकली दवाओं के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: 25 फर्मों पर छापेमारी, 52 नमूने जांच को भेजे गए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेश में काउंटरफीट (नकली) और स्प्यूरियस (जाली) दवाओं के सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए विशेष प्रवर्तन अभियान चलाते हुए व्यापक कार्रवाई की है। अभियान के तहत प्रदेशभर में 25 दवा फर्मों पर छापेमारी की गई, 52 संदिग्ध दवा नमूने जांच के लिए भेजे गए तथा नियमों के उल्लंघन पर 12 फर्मों के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई।

-  लखनऊ में 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं बरामद
6 जुलाई की रात आलमबाग बस स्टेशन के पास एक गत्ते के कार्टन से लगभग 1.60 लाख रुपये मूल्य की संदिग्ध एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। इनमें Torrent Pharmaceuticals के ब्रांड Chymoral Forte की 4,800 टैबलेट तथा Relax Pharmaceuticals के Gudcef Plus की 2,940 टैबलेट शामिल थीं। जांच में Gudcef Plus की पैकिंग और स्ट्रिप्स में कई प्रिंटिंग त्रुटियां मिलने पर दवाओं के नकली होने की पुष्टि हुई।
मौके से वाराणसी निवासी विमल कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि दवाएं वाराणसी स्थित न्यू सर्जिकल से बिना बिल और लाइसेंस खरीदी गई थीं। मामले में आलमबाग थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

-  वाराणसी में 25 लाख रुपये की दवाएं जब्त
लखनऊ से मिली सूचना के आधार पर वाराणसी के मडुवाडीह क्षेत्र स्थित न्यू सर्जिकल पर पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी की गई। यहां बिना वैध लाइसेंस के बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं भंडारित मिलीं। दुकान संचालक संदीप श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया। मौके से 12 दवाओं के नमूने लिए गए तथा लगभग 25 लाख रुपये मूल्य का शेष स्टॉक जब्त कर सील कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में यह मामला ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाओं के अंतरजनपदीय नेटवर्क से जुड़ा होने की आशंका जताई गई है।

-  प्रदेशव्यापी अभियान में 25 फर्मों पर कार्रवाई
6 और 7 जुलाई को लखनऊ की दवा मंडी अमीनाबाद, ट्रांसपोर्ट नगर तथा अन्य क्षेत्रों में 18 औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। अभियान के दौरान महालक्ष्मी ट्रेडर्स, जय श्री महाकाल फार्मास्युटिकल्स, भगवती एंटरप्राइजेज, न्यू बाबा फार्मा, आरजी फार्मा, ट्रेडमेड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, दुर्गा डिस्ट्रीब्यूटर्स सहित कुल 25 फर्मों का निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान कई प्रतिष्ठान दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। ऐसे मामलों में लगभग 1.77 लाख रुपये मूल्य की दवाओं की बिक्री तत्काल रोक दी गई। साथ ही 52 संदिग्ध औषधियों के नमूने परीक्षण एवं विश्लेषण के लिए एकत्र किए गए।
विभाग ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियमावली, 1945 के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया, उन 12 फर्मों के संचालन पर धारा 22(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। दोनों मामलों में दोषियों के विरुद्ध संबंधित अधिनियम के तहत सक्षम न्यायालय में विधिक कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक को मिला नया नेतृत्व
-  डॉ. विवेक सिंह तोमर सभापति और रविन्द्र सिंह राठौर उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड की प्रबंध समिति के सभापति एवं उपसभापति का चुनाव बुधवार को संपन्न हुआ। चुनाव में डॉ. विवेक सिंह तोमर सभापति तथा रविन्द्र सिंह राठौर उपसभापति पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए।
बैंक की 323 शाखाओं के प्रतिनिधियों का निर्वाचन सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद प्रबंध समिति के 13 सदस्य चुने गए। आगरा निर्वाचन क्षेत्र की अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षित सीट पर कोई प्रतिनिधि निर्वाचित न होने के कारण सहकारिता विभाग ने राकेश कुमार (फिरोजाबाद) को प्रबंध समिति का सदस्य नामित किया।
निर्वाचन प्रक्रिया सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रभारी राम प्रताप सिंह चौहान, सह-संयोजक आलोक सिंह तथा राज्य सरकार द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारियों राकेश कुमार सिंह (अपर जिला अधिकारी, वित्त एवं राजस्व) और ज्ञानचन्द्र गुप्ता (सिटी मजिस्ट्रेट) की उपस्थिति में संपन्न हुई।
12 मार्च 1959 को स्थापित उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक प्रदेश की शीर्ष सहकारी संस्था है, जो किसानों को कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों की विभिन्न योजनाओं के लिए दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराती है। वर्तमान में बैंक के 14.09 लाख से अधिक सदस्य हैं। स्थापना से अब तक बैंक 60.95 लाख से अधिक किसानों को 15,716 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित कर चुका है।
नवनिर्वाचित सभापति डॉ. विवेक सिंह तोमर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता बैंक की व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति देना और प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के अनुरूप बैंक को अधिक प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिनसे किसानों का बैंक से सीधा जुड़ाव बढ़े, बैंक की सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचें और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के माध्यम से बैंक की पहुंच एवं कार्यक्षमता का और विस्तार हो सके।
काशी से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री योगी ने लॉन्च की शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ

वाराणसी/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ की शुरुआत करते हुए प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं उनके आश्रितों को कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने इसी अवसर पर 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति छात्र 1,200 रुपये की धनराशि भी हस्तांतरित की। यह राशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी की खरीद के लिए दी गई है।
कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत 10 लाख शिक्षकों एवं संविदा कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुरक्षा पैकेज में ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर, स्थायी दिव्यांगता कवर, एयर एक्सीडेंट कवर, बच्चों की शिक्षा सहायता तथा पुत्रियों के विवाह के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान शामिल हैं।
इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग थी, जिसे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने पूरा किया है।
संदीप सिंह ने बताया कि 2017 में प्रदेश में स्कूल ड्रॉपआउट दर लगभग 15 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में घटकर 3 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया है। साथ ही सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को इंटरमीडिएट (12वीं) तक उच्चीकृत किया जा चुका है और जिन विकासखंडों में ऐसे विद्यालय नहीं हैं, वहां नए विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।कार्यक्रम के दौरान ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय योजना’ के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं प्रधानाध्यापकों को स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को डीबीटी से भेजेंगे 1200 रूपये
—पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर से मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शुभांरभ करेंगे

लखनऊ /वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों व उनके परिजनों को कैशलेस चिकित्सा योजना की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित कार्यक्रम में कुछ ही देर में प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, स्टेशनरी आदि के लिए प्रति विद्यार्थी 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजेंगे।

इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संदीप सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) की मंत्री गुलाब देवी भी मौजूद रहेगी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 10 लाख शिक्षकों व संविदा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इससे पात्र कार्मिकों को अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ व हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित भी करेंगे।

बताते चले 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' के लागू होते ही प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। इस बड़ी योजना में नियमित शिक्षकों के साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के पात्र कार्मिकों को भी शामिल किया गया है।

बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक हेमंत राव के अनुसार, मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा से वाराणसी मंडल के 7,417 बेसिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 66,205 पात्र कर्मी सीधे लाभांवित होंगे।——शिक्षा, जन-कल्याण और विकास के नए संकल्पों को नई गति मिलेगी

उधर,पंडित दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया के अधिकृत अकाउंट पर लिखा कि

आज, बाबा श्री विश्वनाथ जी की पवित्र नगरी काशी और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट से शिक्षा, जन-कल्याण और विकास के नए संकल्पों को नई गति मिलेगी।

वाराणसी में, 12 लाख शिक्षकों/गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने वाली 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' की शुरुआत,डीबीटी के ज़रिए 1.10 करोड़ छात्रों के अभिभावकों के खातों में प्रति छात्र 1,200 रूपये का ट्रांसफर, 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर और राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए स्वच्छ और हरित स्कूलों के प्रधानाचार्यों/हेडमास्टरों को सम्मानित करने का कार्यक्रम होगा।
यूपी में साइबर अपराधियों पर डीजीपी का बड़ा प्रहार: 7 दिवसीय 'ऑपरेशन साइ-वज्र' का ऐलान, 530 करोड़ रुपये की साइबर ठगी रोकी गई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। डीजीपी ने प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर 7 दिवसीय विशेष अभियान "ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)" चलाने के निर्देश दिए। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक और पीड़ितों को जल्द राहत दिलाना है।

बैठक में पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम बी.के. सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक पवन कुमार, सभी कमिश्नरेट और जनपदों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल, साइबर थानों के प्रभारी तथा साइबर मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

साइबर अपराध नियंत्रण बना डीजीपी की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल

बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप साइबर अपराध नियंत्रण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कार्यभार संभालने के बाद निर्धारित 10 प्रमुख प्राथमिकताओं में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण को प्रमुख स्थान दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर पुलिसिंग, तकनीकी क्षमता, साइबर इंटेलिजेंस और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था को मजबूत करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाई है।

15 महीनों में बड़ी कार्रवाई

बैठक के दौरान 1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 तक की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इस अवधि में प्रदेश पुलिस ने:

2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए।
1,81,405 मोबाइल उपकरण (IMEI) ब्लॉक किए।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में 530 करोड़ रुपये की धनराशि पर Lien/Hold लगाकर उसे साइबर अपराधियों तक पहुंचने से रोका।

डीजीपी ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों को और अधिक तेज, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए।

शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर

डीजीपी ने निर्देश दिए कि साइबर अपराध पीड़ितों की शिकायतों का पंजीकरण पूरी पारदर्शिता और तेजी से किया जाए। तकनीकी कारणों से लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि ठगी की गई धनराशि अपराधियों के खातों तक पहुंचने से पहले सुरक्षित की जा सके।

उन्होंने सभी जिलों और कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी दिए।

संदिग्ध मोबाइल, बैंक खातों और तकनीक पर रहेगा फोकस

बैठक में निर्देश दिए गए कि साइबर अपराध में प्रयुक्त संदिग्ध मोबाइल नंबर, मोबाइल उपकरण, बैंक खाते और अन्य तकनीकी संसाधनों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए। साइबर इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई को और मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया।

पीड़ितों को पैसा लौटाने के लिए MRM व्यवस्था

बैठक में भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित Money Restoration Module (MRM) की विस्तार से जानकारी दी गई।

इस मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ित अपनी होल्ड की गई धनराशि वापस पाने के लिए ऑनलाइन अनुरोध कर सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद बैंक नियमानुसार धनराशि वापस करता है। 50 हजार रुपये तक की राशि की बहाली के लिए एफआईआर या कोर्ट आदेश आवश्यक नहीं है, जबकि इससे अधिक राशि के मामलों में एफआईआर अनिवार्य होगी।

निर्दोष लोगों के बैंक खाते खोलने के लिए GRM

बैठक में Grievance Redressal Module (GRM) की भी समीक्षा की गई। यदि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति का बैंक खाता होल्ड या फ्रीज हो जाता है तो वह बैंक के माध्यम से GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। जांच के बाद उचित पाए जाने पर खाते से प्रतिबंध हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी ने MRM और GRM दोनों व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों पर विशेष फोकस

डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय साइबर अपराधों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए। ऐसे मामलों में साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर संगठित गिरोहों के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रशिक्षण और जनजागरूकता अभियान होंगे तेज

बैठक में साइबर पुलिसकर्मियों के नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता बढ़ाने, नई साइबर अपराध प्रवृत्तियों के अनुरूप क्षमता विकास और आम नागरिकों के लिए व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।

7 दिन चलेगा 'ऑपरेशन साइ-वज्र'

बैठक के अंत में डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रदेशभर में 7 दिवसीय विशेष अभियान 'ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)' चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख कार्रवाई की जाएगी, जिससे साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो और नागरिकों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत हो सके।
बारिश से पहले पूरी करें पंपिंग स्टेशन और नालों की सफाई, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: ए.के. शर्मा

- जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और संक्रमण रोकने के लिए नगर निकायों को युद्धस्तर पर तैयार रहने के निर्देश

लखनऊ। प्रदेश में मानसून के मद्देनजर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने सभी नगर निकायों को बारिश से पहले पंपिंग स्टेशन, सीवर और नालों की सफाई सहित सभी तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि वर्षा ऋतु में जलभराव, सीवर ओवरफ्लो या सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लखनऊ के संगम सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की वर्षा पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जलभराव, सीवर व्यवस्था, नालों की सफाई, कचरा निस्तारण और स्वच्छता अभियान की प्रगति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
ए.के. शर्मा ने कहा कि वर्षा के दौरान आमजन को जलभराव, गंदगी या सीवर बैक फ्लो जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सभी नगर निकाय युद्धस्तर पर कार्य करें और प्रत्येक शिकायत का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ब्लीचिंग पाउडर, एंटी-लार्वा दवाओं और अन्य आवश्यक रसायनों का नियमित छिड़काव किया जाए, ताकि संक्रमण और महामारी की आशंका को रोका जा सके।
नगर विकास मंत्री ने पंपिंग स्टेशनों और पंपिंग सेटों के रखरखाव पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया कि सभी मशीनों की समय रहते मरम्मत कर उनकी ड्रिल के माध्यम से जांच कर ली जाए। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान मशीनों के खराब होने या रखरखाव का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी उपकरण हर समय पूरी तरह क्रियाशील स्थिति में रहने चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद और आगरा सहित कई नगर निगमों तथा मुजफ्फरनगर, मऊ और पीलीभीत समेत विभिन्न नगर निकायों के अधिकारियों से वर्षा पूर्व तैयारियों की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कहीं भी सीवर ओवरफ्लो, नालियों की सफाई में लापरवाही, जलभराव या स्वच्छता व्यवस्था में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नगर आयुक्तों को स्वयं नियमित मॉनिटरिंग करने और सभी व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए।
बैठक में नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव गुरुप्रसाद, निदेशक अनुज कुमार झा, विशेष सचिव सत्य प्रकाश पटेल, मिशन निदेशक ऋतु सुहास सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी नगर आयुक्त एवं संबंधित अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
20 नवंबर तक पूरी हों पर्यटन विकास की सभी परियोजनाएं, गुणवत्ता से समझौता नहीं: जयवीर सिंह
* प्रदेशभर में पर्यटन परियोजनाओं पर तेजी से काम, अधिकांश कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूरी, कई निर्माण शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत पर्यटन विकास परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए सभी कार्यदायी संस्थाओं को 20 नवंबर 2026 तक परियोजनाएं गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास को गति देने के लिए प्रदेशभर में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि एक करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर आम जनता को समर्पित किया जाएगा। सभी कार्यदायी संस्थाओं को पहले ही 20 मई 2026 तक निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, जिनका अधिकांश संस्थाओं ने पालन किया है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को स्वीकृत 305 परियोजनाओं में सभी की निविदाएं प्रकाशित की जा चुकी हैं। इनमें से 247 परियोजनाओं के कार्यादेश जारी हो चुके हैं, जबकि 58 परियोजनाएं अभी निविदा प्रक्रिया में हैं।
यूपीपीसीएल को आवंटित 65 परियोजनाओं में 61 पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, एक परियोजना पूरी भी हो चुकी है और शेष पर निविदा प्रक्रिया जारी है। वहीं, अलग से सौंपे गए 24 कार्यों में 20 पर काम शुरू हो चुका है तथा चार परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं।
सी एंड डीएस को आवंटित 126 नई परियोजनाओं में से 113 पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि 13 परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं।
आवास विकास परिषद को सौंपी गई 75 परियोजनाओं में 41 पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि 32 परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है।
इसी प्रकार राजकीय निर्माण निगम को आवंटित 32 परियोजनाओं में दो पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 30 परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया चल रही है।
जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पर्यटन विकास की परियोजनाओं का उद्देश्य ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे न केवल प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन विभाग समयबद्ध तरीके से योजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और 20 नवंबर 2026 तक सभी परियोजनाएं पूर्ण कर जनता को समर्पित की जाएं।
राम मंदिर चंदा मामले की CBI जांच की मांग को लेकर जेपीआई का लखनऊ में प्रदर्शन
-  शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने ट्रस्ट भंग करने, नार्को टेस्ट और दोषियों की गिरफ्तारी की उठाई मांग; मांगें न मानी गईं तो अयोध्या कूच की चेतावनी

लखनऊ। जनसत्ता पार्टी ऑफ इंडिया (जेपीआई) एवं राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच (एनवाईआरएम) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को  राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर श्रीराम मंदिर चंदा मामले को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष **शशांक शेखर सिंह पुष्कर** के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में केंद्र सरकार से मामले की सीबीआई जांच कराने तथा अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन भी दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने आरोप लगाया कि श्रीराम मंदिर से जुड़ा यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की **सीबीआई अथवा जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति)** से जांच कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट के सभी सदस्यों का नार्को टेस्ट कराने, ट्रस्ट को भंग कर सनातन बोर्ड के गठन तथा चंपत राय, अनिल मिश्रा सहित आरोपित व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो पार्टी प्रदेशभर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या कूच करेगी।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस मामले से जनभावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर जनता का विश्वास कायम किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "सीबीआई जांच कराओ", "चंदा चोरों को गिरफ्तार करो" और "ट्रस्ट भंग कर सनातन बोर्ड का गठन करो" जैसे नारे लगाए।
इस अवसर पर एडवोकेट जेपी सिंह, अशोक पटेल, अजमत उल्ला खां, ममता कश्यप, रबिंदु शुक्ला, राजेश मिश्रा, अरविंद राज, नितेश कुमार, इलियास मंसूरी, अंश सिंह चौहान, विनोद सिंह, अभिषेक पाल सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।