जिले के 90+ कोचिंग सेंटर में से सिर्फ 12 के पास फायर एनओसी: मानकों की अनदेखी, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
जिले भर में 90 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन डीआईओएस कार्यालय में सिर्फ 15 पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 12 कोचिंग सेंटरों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया है। लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद जिले में कोचिंग सेंटरों के संचालन और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शासन ने कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं। इनमें पंजीकरण, अग्निशमन एनओसी, अग्निशमन उपकरण, योग्य शिक्षक, उचित बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और स्वच्छता जैसे मानक शामिल हैं। इसके बावजूद, जिले के कई सेंटरों पर इन मानकों की अनदेखी देखी गई।
लखनऊ हादसे के बाद एक टीम ने जिले भर में कोचिंग सेंटरों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई सेंटर तंग गलियों या बेसमेंट में संचालित होते मिले। कुछ सेंटरों में तीन से चार कमरों में कई शिफ्टों में कक्षाएं चल रही थीं।
ज्ञानपुर में मिश्रा मार्केट के पीछे संकरी गली और भदोही में ज्ञानदेवी स्कूल के पास बेसमेंट में कोचिंग सेंटर संचालित पाए गए, जहां एक शिफ्ट में 100 से 125 बच्चे पढ़ते हैं। गोपीगंज के वार्ड नंबर एक स्थित महात्मा गांधी लिंक मार्ग पर भी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव दिखा।
भदोही के रजपुरा फेज-टू, चौरी रोड, औराई रोड, मूंसीलाटपुर और स्टेशन रोड स्थित कोचिंग सेंटरों के तीन से चार कमरों में बच्चे पढ़ते मिले। जमुनीपुर में एक शटर के भीतर कोचिंग संचालित होती दिखी। नईबाजार के उत्तरा फाटक, आजादनगर और चांदनी चौक में भी ऐसे सेंटर मिले, जहां केवल एक निकास द्वार था और अग्निशमन व्यवस्था नदारद थी।
डीआईओएस अंशुमान ने बताया कि जिले की तीनों तहसीलों में दो सदस्यीय टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें जिले भर में कोचिंग सेंटरों की जांच करेंगी। मानक के अनुरूप न मिलने पर उन्हें बंद कराया जाएगा और जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
फीस मोटी, लेकिन व्यवस्थाएं शून्य
बच्चों का भविष्य संवारने के नाम पर कोचिंग संचालक विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूल रहे हैं। गणित, साइंस और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये तक शुल्क ले रहे हैं, लेकिन सेंटरों पर व्यवस्थाएं शून्य हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एक माह पहले पंजीकरण के लिए दी थी चेतावनी
जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि एक माह पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संचालकों को पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन केवल 15 कोचिंग सेंटरों ने पंजीकरण कराया। इसी प्रकार अग्निशमन विभाग ने गर्मी शुरू होने से पहले सभी को एनओसी के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन केवल 12 ने एनओसी ली।
कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य
पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।
कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए, जितनी सीटें उपलब्ध हों।
लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम होने चाहिए।
इमरजेंसी अलार्म का होना आवश्यक है।
यदि कोचिंग क्लास बेसमेंट में है, तो वहां दो दरवाजे होना जरूरी है।
प्रत्येक कमरे में दो दरवाजे और सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए।
जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम गठित हो चुकी है। दो टीमें जिले भर के कोचिंग सेंटरों पर पहुंचकर उनकी फायर सेफ्टी की जानकारी लेंगी। ओम प्रकाश, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी
4 hours ago
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