विधान सभा सचिवालय में छह अधिकारियों को पदोन्नति
-  सेवानिवृत्ति से रिक्त पदों के सापेक्ष जारी हुए पदोन्नति आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान सभा सचिवालय में छह अधिकारियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। सचिवालय के अधिष्ठान अनुभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह पदोन्नतियां प्रधान निजी सचिव (नि:संवर्गीय) के पद पर कार्यरत देश राज मौर्य के 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त होने से रिक्त हुए पदों के सापेक्ष की गई हैं।
जारी आदेश के मुताबिक संबंधित अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अस्थायी एवं स्थानापन्न आधार पर उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया है।
पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों में जै. किशोर को प्रधान निजी सचिव (नि:संवर्गीय), जय प्रकाश तिवारी को निजी सचिव (श्रेणी-4), राम संहार यादव को निजी सचिव (श्रेणी-3), माता प्रसाद रावत को निजी सचिव (श्रेणी-2), आशीष कुमार तिवारी को विशेष कार्याधिकारी (नि:संवर्गीय) तथा श्याम बहादुर मौर्य को निजी सचिव (श्रेणी-1) के पद पर पदोन्नत किया गया है।
विधान सभा सचिवालय के इस निर्णय से संबंधित अधिकारियों में उत्साह का माहौल है। पदोन्नति के बाद सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, जिससे सचिवालय के कार्यों के संचालन में और अधिक दक्षता आने की उम्मीद है।
यूपी में अभी नहीं मिलेगी गर्मी से राहत, एक सप्ताह तक लू का अलर्ट
-  आज और चढ़ सकता है पारा, बारिश के आसार नहीं; लखनऊ समेत कई जिलों में बढ़ी तपिश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप फिलहाल जारी रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पूर्वी, मध्यवर्ती और दक्षिणी हिस्सों में अगले एक सप्ताह तक लू चलने की संभावना है। इस दौरान तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक और वृद्धि हो सकती है, जबकि बारिश की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सीमित मौसमीय गतिविधियों के कारण प्रदेश में गर्म और शुष्क परिस्थितियां बनी रहेंगी। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन इससे गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
शुक्रवार को प्रदेश का सबसे गर्म जिला बांदा रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रयागराज में 43.6 डिग्री और वाराणसी में 43 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी लखनऊ में भी पारा 40.4 डिग्री से बढ़कर 41.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।

-  लखनऊ में बढ़ी उमस, शनिवार से लू का असर
राजधानी में लगातार तीसरे दिन तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। तेज धूप, गर्म हवाओं और बढ़ी हुई उमस ने लोगों को परेशान कर दिया। दोपहर के समय सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही देखने को मिली।
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार से लखनऊ में भी लू का प्रभाव महसूस किया जाएगा। शुक्रवार को शहर का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते दो दिनों में तापमान में 1.7 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले सप्ताह तक प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ सकता है।
सपा कार्यालय के बाहर लगा राजनीतिक पोस्टर, 2027 में अखिलेश की वापसी का दावा
-  हनुमान जी की पूजा करते दिखाए गए अखिलेश यादव, पोस्टर में योगी सरकार पर साधा गया निशाना

लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर शुक्रवार को एक राजनीतिक पोस्टर चर्चा का विषय बन गया। पोस्टर में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी का दावा किया गया है।
पोस्टर में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हुए दर्शाया गया है। साथ ही पोस्टर में लिखा गया है, "मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हुए नाराज, अब न आएंगे योगी महाराज।" इसके अलावा भाजपा पर निशाना साधते हुए पोस्टर में "महापापियों का खुला भेद, भाजपाइयों से सच्चे सनातनियों को है खेद" जैसे संदेश भी लिखे गए हैं।
बताया जा रहा है कि पोस्टर में सपा विधायक पंकज मलिक तथा पार्टी कार्यकर्ता सोमिल सिंह श्रीनेत्र की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। पोस्टर लगने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई है और इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह पोस्टर राजधानी में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
चकबंदी आयुक्त ने की चकबंदी कार्यों की समीक्षा
-  लम्बित पुराने मुकदमों को गुण-दोष के आधार पर सुनाई करते हुए शीघ्र निस्तारित करने का निर्देश

-  उन्नाव, सीतापुर तथा एटा के बंदोबस्त अधिकारियों से जवाब तबल तथा चेतावनी जारी करने के निर्देश

लखनऊ। चकबंदी आयुक्त डॉ.  हृषिकेश भास्कर यशोद शुक्रवार को इंदिरा भवन स्थित चकबंदी निदेशालय के सभागार में प्रदेश के समस्त जनपदों द्वारा किये जा रहे चकबंदी कार्यों की समीक्षा बैठक की। चकबंदी कार्यों की समीक्षा करते हुए चकबन्दी आयुक्त ने समयबद्ध कार्य योजना बनाते हुए निर्धारित समयावधि में चकबंदी प्रक्रिया को पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी पीठासीन अधिकारी (डीडीसी, एसओसी, सीओ, एसीओ) लम्बित पुराने मुकदमों को गुण-दोष के आधार पर सुनाई करते हुए शीघ्र निस्तारित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपनी कार्यशैली में परिवर्तन लाते हुए शासन की मंशानुरूप जनहित में कार्य करें अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चकबंदी कार्यों में लापरवाही करने वाले कार्मिकों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
चकबंदी आयुक्त ने सभी उप संचालक चकबंदी तथा बंदोबस्त अधिकारियों सहित सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अभियान चलाकर लम्बित मुकदमों की सुनवाई तेजी से प्रारम्भ करें तथा गुणदोष के आधार पर सुनवाई करते हुए मुकदमों का निस्तारण करना सुनिश्चित करें। चकबंदी आयुक्त ने डीडीसी एवं एसओसी को लम्बित मुकदमों की नियमित सुनवायी करते हुए 3 और 5 वर्ष से अधिक के पुराने मुकदमों की सुनवाई प्राथमिकता पर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी मुकदमें ऑनलाइन पंजीकृत किए जाएं। उन्होंने डीडीसी मुख्यालय को इसकी साप्ताहिक समीक्षा करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में धारा 52 की कार्यवाही अपूर्ण है वहां कार्मिकों की संख्या बढ़ाते हुए नियमानुसार कार्यवाही पूर्ण कराने का निर्देश दिया। चकबंदी आयुक्त ने चकबंदी कार्यों में तेजी लाते हुए सीमांकन तथा कब्जा परिवर्तन का कार्य शीघ्र पूर्ण कराने का निर्देश दिया। उन्होंने उप संचालक चकबंदी तथा बंदोबस्त अधिकारियों को तहसील स्तर से उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार से समन्व्य स्थापित कर ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जे से सम्बन्धित बेदखली धारा 67 की कार्यवाही करने का निर्देश दिया। चकबंदी आयुक्त ने समस्त उप संचालक चकबंदी तथा बंदोबस्त अधिकारियों को विभागीय कर्मियों के विरूद्ध प्रचलित विभागीय कार्यवाहियों को एक माह के अंदर पूरा करते हुए मुख्यालय को अवगत कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शासकीय कार्यों के प्रति की गयी लापरवाही किसी भी स्तर पर क्षम्य नहीं होगी। चकबंदी आयुक्त ने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया के तहत चक निर्माण हेतु किसी भी दशा में कृषकों से 3 प्रतिशत से अधिक भूमि की कटौती न की जाए, अपरिहार्य स्थिति में चकबंदी आयुक्त से अनुमति के उपरान्त ही भूमि कटौती के संबंध में अग्रेतर कार्यवाही की जाए।
उन्नाव के बंदोबस्त अधिकारी को चकबंदी कार्य में शिथिलता बरतने पर स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए निदेशालय स्तर से चार सदस्यीय टीम गठित कर जांच करने के निर्देश दिए। सीतापुर के बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को चकबंदी कार्यों में शिथिलता बरतने पर जवाब तलब करने के निर्देश दिए गये। एटा में चकबंदी कार्यों की प्रगति कम होने पर बंदोबस्त अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
इस बैठक में अपर आयुक्त चकबंदी अरूण प्रकाश, उप संचालक चकबंदी संत कुमार, आलोक कुमार, राम किशोर, बंदोबस्त अधिकारी अजय कुमार सहित प्रदेश के समस्त उप संचालक चकबंदी तथा बंदोबस्त अधिकारी उपस्थित थे।
पूर्वांचल को मिली नई रेल सेवाओं की सौगात, मऊ से दिल्ली-वाराणसी की कनेक्टिविटी हुई मजबूत
-  मंत्री ए.के. शर्मा ने दिखाई नई ट्रेनों को हरी झंडी, रेल मंत्री का जताया आभार

लखनऊ/ मऊ। पूर्वांचल की रेल कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने शुक्रवार को मऊ रेलवे स्टेशन से नई रेल सेवाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर क्षेत्र को मिली नई रेल सुविधाओं की शुरुआत कराई और इसे पूर्वांचल के विकास के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
नई रेल सुविधाओं के तहत दोहरीघाट-वाराणसी मेमू ट्रेन सेवा का संचालन प्रारंभ किया गया है। वहीं मऊ-आनंद विहार (दिल्ली) ट्रेन तथा छपरा-आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस का संचालन अब मऊ के रास्ते किया जाएगा। इससे पूर्वांचल के लाखों यात्रियों को राजधानी दिल्ली और वाराणसी तक बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी।
इस अवसर पर मंत्री ए.के. शर्मा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने पूर्वांचल की जनता की वर्षों पुरानी मांगों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें पूरा किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल आज देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ इंजन बन चुकी है और विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में भारतीय रेल नई गति और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है।
मंत्री ने रेल मंत्री से मऊ-आनंद विहार ट्रेन को साप्ताहिक के बजाय दैनिक संचालित किए जाने की मांग भी की, ताकि यात्रियों को और अधिक सुविधा मिल सके। इसके अलावा उन्होंने मऊ जनपद में प्रगति पर चल रहे रेलवे विकास कार्यों, विशेषकर गोठा स्थित 25-सी एवं 27-सी अंडरपास निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि रेल सुविधाओं का विस्तार केवल नई ट्रेनों के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति देने वाला कदम है। इससे व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को बल मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का मुख्य कार्यक्रम छपरा में आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उपस्थित रहे। मऊ रेलवे स्टेशन से मंत्री ए.के. शर्मा ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े और उपस्थित लोगों ने उनका संबोधन वर्चुअल माध्यम से सुना।
नशामुक्त भारत सप्ताह के तहत राज्य स्तरीय पोस्टर-निबंध प्रतियोगिता आयोजित
-  70 प्रतिभागियों ने मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों पर प्रस्तुत किए विचार, 26 जून को होगा विजेताओं का सम्मान

लखनऊ। 'नशामुक्त भारत अभियान–विकसित भारत की पहचान' थीम के अंतर्गत प्रदेश में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मद्यनिषेध विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा शुक्रवार को राज्य स्तरीय पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन क्षेत्रीय मद्यनिषेध कार्यालय, 27 अशोक मार्ग, लखनऊ में हुआ।
देशभर में 17 जून से 26 जून 2026 तक मनाए जा रहे ‘नशामुक्त भारत सप्ताह’ के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों, एनसीसी इकाइयों तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े कुल 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को पोस्टर और निबंध के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा 26 जून 2026 को ‘मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध व्यापार विरोधी अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर की जाएगी। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन चौधरी चरण सिंह सभागार, सहकारिता भवन, लखनऊ में होगा, जहां उत्तर प्रदेश के आबकारी एवं मद्यनिषेध मंत्री नितिन अग्रवाल विजेताओं को सम्मानित करेंगे।
इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाते हुए स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
मृतक भरत तिवारी के परिवार को 50 लाख ,एक सदस्य को सरकारी नौकरी, इनकाउंटर करने वाले पुलिस का सेवा समाप्त के साथ हत्या का मुकदमा दर्ज हो: सूरज प्रस
लखनऊ । आज भारत एक ऐसे मौन असंतोष के दौर से गुजर रहा है,जो न सड़को पर पूरी तरह से दिख रहा है और न ही सत्ता के गलियारों में स्वीकार किया जा रहा है। अह असंतोष किसी एक वर्ग जाति या समुदाय का नहीं है यह उस अन्याय बोध का परिणाम है जो जन्म लेता है जब कानून न्याय का माध्यम न रहकर राजनीतिक स्वार्थ का औजार बन जाए। आज राजनीति ने करुणा को वोट में और न्याय को संख्या गणित में बदल दिया है। यह मार्ग न शांति को ओर ले जाता है न स्थायित्व की ओर।

यह मार्ग समाज को  भीतर से खोखला करता है इतिहास में जब_जब सत्ता ने समाज को बाट कर स्वाँग को सुरक्षित समझा है तब_तब सत्ता तो नहीं बची है लेकिन समाज और सभ्यता को भारी मूल्य चुकाना पड़ा यह बाते सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने उनके आवास पर आए राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा के सदस्यों से कही राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि बिहार आरा शाहपुर बिलौटी में भारत तिवारी का फर्जी एंकाउंटर कर दिया गया,भारत तिवारी को गलती ये थी कि लगातार सरकार नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे थे अपने देश राज्य शहर गांव में विकास चाहते सभी समाज के लोगों का समर्थन था भरत तिवारी का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है वह अपराधी नहीं था गुनाह था कि वह सवर्ण ब्राह्मण था भरत तिवारी ने पुलिस पर भरोसा कर के पिस्तौल फेंका वैसे ही बिहार पुलिस ने इनकाउंटर कर दिया, भरत तिवारी को सरेंडर करने के बाद उन्हें न्यायालय में ले जाना चाहिए न्यायिक प्रक्रिया में जो सजा होती भारत तिवारी पिस्टल रखे थे पुलिस पर तान दिए यह गलत है लेकिन सरेंडर करने के बाद एनकाउनर सही नहीं है मै बिहार सरकार से मांग करता हु कि भारत तिवारी के परिवार को आर्थिक 50 लाख परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा एकाउंटर करने वाले पुलिस को सेवा से बर्खास्त करते हुए हत्या का मुकदमा चलाया जाय।
वन विभाग एवं पुलिस की सह पर टड़ियावां क्षेत्र में फल फूल रहा प्रतिबंधित हरे भरे पेड़ों का अवैध कटान

विनोद गुप्ता 

टड़ियावां हरदोई । वन विभाग के संरक्षण व स्थानीय पुलिस की सह पर क्षेत्र में पनप रहे हरियाली के दुश्मन, थाना टड़ियावां क्षेत्र के गाँव बरौली माइनर की पूरब उत्तर पटरी के किनारे बरौली निवासी दो किसान के खेत मे खड़े हरे भरे पेड़ों को बुधवार की प्रातः काल लकड़ी कटान माफिया ने काट दिए प्रतिबंधित हरे भरे एक गूलर व दो आम के हरे भरे पेड़ बिना परमिट के लकड़ी ठेकेदारों ने आरा चला दिया है। इसके अलावा कुछ दिन पूर्व गाँव भैंसरी में नीम व जामुन के पेड़ों को लकड़कट्टों ने काटा था इसके अलावा थाना टड़ियावां क्षेत्र के विभिन्न गाँव में काटे गए प्रतिबंधित आम व गूलर, पेड़ अब सोचनीय विषय यह है कि प्रशासन की सख्ती होने के बाद भी आख़िर किसके संरक्षण में आये दिन काटे जा रहे हरे भरे प्रतिबंधित पेंड। 

*बोले जिम्मेदार -वन दरोगा अभय पटेल ने बताया कि प्रतिबंधित पेड़ों को काटने की उन्हें जानकारी नही है । मौके की जाँच कर दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।

संभव 6.0 लांच, पाँच विभाग मिलकर करेंगे काम

- महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया शुभारंभ

- इस बार जीवन के पहले 1,000 दिनों पर रहेगा विशेष फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए गुरुवार को ‘संभव अभियान 6.0’ की शुरुआत की। महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने स्थानीय होटल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति व अंतरविभागीय समन्वय के कारण ही प्रदेश ने बीते आठ साल में तकरीबन 15 प्रतिशत कुपोषित बच्चों का उपचार कर उनको सेहतमंद बना दिया है। इस अवसर पर बीते साल ‘संभव अभियान 5.0’ सबसे अच्छा काम करने वाले पांच जिलों कानपुर नगर, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, चंदौली व वाराणसी के जिला कार्यक्रम अधिकारी और मुख्य चिकत्साधिकारी के साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक सीडीपीओ, एक आंगनवाड़ी कार्यकत्री और एक सहायिका को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर मंत्री ने सम्भव पैकेज और सोशल मीडिया पैकेज का विमोचन किया, जिसमें सम्भव अभियान के जिला-स्तरीय क्रियान्वयन से संबंधित योजना उपकरण तथा नवजात शिशुओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण से संबंधित तकनीकी हैंडआउट/सोशल मीडिया सामग्री शामिल हैं। मंत्री ने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, शिशुओं और बच्चों को नए टेक होम राशन (ज्भ्त्) पैकेट भी वितरित किए तथा इस अवसर पर नवीन पोषाहार से बनाये गए विभिन्न रेसिपी के स्टाल का अवलोकन भी किया गया। उन्होंने रणवीर ब्रार जैसे प्रसिद्ध शेफ को प्रदर्शित करने वाली वीडियो श्रृंखला का भी विमोचन किया।

आईसीडीएस निदेशक सुश्री हर्षिता माथुर ने “प्रयास से प्रभाव तक” विषय पर एक सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें वर्ष 2021 से 2025 तक संभव अभियान की यात्रा तथा संभव 6.0 के प्रमुख स्तंभों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में संभव अभियान के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, 14 लाख से अधिक बच्चों का उपचार किया गया तथा गंभीर तीव्र कुपोषण से ग्रस्त 81 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ होने में सफल रहे। इस वर्ष यह अभियान जुलाई से सितंबर तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में संचालित किया जाएगा। 

कैबिनेट मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और छोटे बच्चों में कुपोषण की रोकथाम की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। संभव अभियान अब अपने छठे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष की थीम “गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा” रखी गई है, जो जीवन के पहले 1,000 दिनों-गर्भावस्था के 270 दिन और जन्म के बाद 730 दिन पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है। यही वह महत्वपूर्ण अवधि है, जिसमें बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास होता है और इस समय कुपोषण से होने वाला नुकसान आगे चलकर पूरी तरह सुधारा नहीं जा सकता।

यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों से जिला कार्यक्रम अधिकारी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और पोषण क्षेत्र में कार्यरत विकास साझेदारों ने भाग लिया। अपर मुख्य सचिव (महिला एवं बाल विकास) लीना जौहरी ने कहा कि अब चुनौती केवल सेवाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और लोगों की पोषण संबंधी आदतों में सुधार की है। बड़ी संख्या में महिलाएं गर्भावस्था के समय कुपोषित या कम वजन की होती हैं, जिसके कारण बच्चों का जन्म कम वजन के साथ होता है और उनमें कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। संभव 6.0 इसी अंतर को दूर करने का अहम प्रयास है।

उन्होंने कहा कि सम्भव 6.0 के अंतर्गत इस वर्ष गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण देखभाल, कम वजन के नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल, ‘छह माह, सात बार’ रणनीति के तहत शिशुओं के लिए नियमित गृह भ्रमण, तथा गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही, समुदाय आधारित प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि कुपोषित बच्चों को समय रहते उपचार और उचित देखभाल उपलब्ध हो सके।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ पिंकी जोवेल ने एनएफएचएस के ताजा आंकड़ों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मातृ मत्यु दर बढ़ना इस ओर इंगित करता है कि इसको कम करने के लिए आईसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग का समन्वय जरूरी है। दोनों विभाग बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे तो तीन साल बाद अगले एनएफएचएस सर्वे में मातृ मृत्यु दर के आंकड़े भी कम दिखेंगे।

आईसीडीएस की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि इस वर्ष अभियान में पंचायती राज, योजना विभाग और सूचना विभाग को भी औपचारिक रूप से जोड़ा गया है, जिससे समन्वित प्रयासों को और गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि जहाँ पंचायती राज विभाग गांव स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत करेगा, वहीं योजना विभाग कार्यक्रम की समीक्षा और आंकड़ों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाएगा और सूचना विभाग व्यापक जनजागरूकता तथा व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देगा।

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह ने अपनी प्रस्तुतिकरण में पंचायत सखी को संभव अभियान से जोड़ कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में महिला व बाल विकास विभाग की सचिव मनीषा त्रिघाटिया, महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ एचडी अग्रवाल, एचएचएम के महाप्रबंधक डॉ मिलिंद वर्धन ने भी अपने प्रजेंटेशन दिए।  

यूनिसेफ की ओर से पोषण विशेषज्ञ रबी नारायण ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवसर, समानता, मानव संसाधन के विकास और बच्चों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को स्वस्थ और पोषित जीवन प्रदान करना उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) श्रीमती अनुपमा शांडिल्य द्वारा किया गया तथा संभव अभियान की सहायक नोडल अधिकारी श्रीमती पारुल शुक्ला, संयुक्त परियोजना समन्वयक, पोषण अभियान द्वारा कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया गया। संभव अभियान के राज्य नोडल अधिकारी आईसीडीएस विभाग के उप निदेशक सेराज अहमद द्वारा कार्यक्रम के समापन पर सभी विशिष्ट अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

विभूतियों के सम्मान संग बिखरे संस्कृतियों के रंग
-  भगवान गौतम बुद्ध पर नृत्य नाटिका ने मोहा मन

-  दास्तानगोई संग कान्हा से द्वारिकाधीश नाटक का मंचन

लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, (संस्कृति विभाग), बदलाव: एक कदम शिक्षा की ओर और कला कारवां के संयुक्त तत्वावधान में नारी शक्ति वंदन अभियान के तहत गुरुवार को वीरांगना सम्मेलन एवं लक्ष्मणपुरी फेस्टिवल-2026 का आयोजन किया गया। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों की छाप दिखी।
कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी और अभिनेता डा. अनिल रस्तोगी, वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार, उद्यमी यावर अली शाह और रोटरी क्लब के असिस्टेंट गवर्नर प्रवीण कुमार मित्तल को लक्ष्मणपुरी गौरव सम्मान दिया गया। पद्मश्री विद्या विंदु सिंह, शिक्षाविद रोमा बच्चानी, शिक्षिका डॉ. अनीता मिश्रा और अभिनेत्री मनीषा मेहरा को रानी लक्ष्मीबाई प्रेरणा सम्मान प्रदान किया गया। इन सभी को अतिथि भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रति शंकर त्रिपाठी, राज्य ललित कला अकादमी के डा. सुनील कुमार विश्वकर्मा, उप्र संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, ललित कला अकादमी के सचिव देवेन्द्र त्रिपाठी, भंते शील रतन, संस्थान के सदस्य तरुणेश मिश्र व निदेशक डा. राकेश सिंह, ललित कला अकादमी के निदेशक अमित अग्निहोत्री ने सम्मान चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट किए।
इसके बाद ’’बुद्धम शरणम् गच्छामि’’ नृत्य नाटिका मंचित की गई। इसमें गौतम बुद्ध के जीवन और उनके ज्ञान की यात्रा को भावपूर्ण नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कहानी की शुरुआत कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ के वैभवपूर्ण जीवन से हुई। फिर जीवन के दुखदृदर्द, रोग, वृद्धावस्था और मृत्यु को देखकर उनके मन में उत्पन्न हुए वैराग्य से सत्य की खोज और बोधगया में गहन ध्यान के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति से बुद्ध बनने तक की यात्रा को दिखाया गया। इस नृत्य नाटिका के माध्यम से मानवता को मध्यम मार्ग, अहिंसा और करुणा का संदेश दिया गया। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना और कथक गुरु डा. उपासना दीक्षित के निर्देशन में नृत्य नाटिका को प्रस्तुत किया गया। संगीत संयोजन एवं गायन पंडित आनंद दीक्षित व कृष्ण कुमार मौर्या का रहा। संवाद स्वर पंडित आनन्द दीक्षित, अखंड प्रताप, मानसी गिरी व आकांक्षा श्रीवास्तव का रहा। मंच पर चारू पाण्डेय, आकांक्षा श्रीवास्तव, मानसी गिरी, अनन्या तिवारी, आरोही पाठक, अनन्या अग्रवाल, नेहा श्रीवास्तव, सोनल मिश्रा, अनन्या वर्मा व शिक्षा अग्रवाल ने नृत्य किया।
धनुष-सा तना, वचन-सा अटल, लक्ष्मण का हर एक संकल्प रू लक्ष्मण जी... यानी वह नाम जो साहस, जागरुकता और अटूट समर्पण की मिसाल है। रामायण के इस अद्वितीय पात्र ने अपने जीवन को केवल एक उद्देश्य में ढाल दिया- श्रीराम की सेवा और धर्म की रक्षा। चौदह वर्षों का वनवास, बिना विश्राम के पहरा और हर संकट में अडिग खड़े रहना। उनका जीवन एक मौन तपस्या था। उनका क्रोध भी धर्म के लिए था और उनका प्रेम भी त्याग से भरा। इस भाव को दास्तानगो अरशाना अजमत और प्रतीक भारद्वाज ने लक्ष्मणजी पर केंद्रित दास्तानगोई लक्ष्मणगाथा में प्रस्तुत किया। अरशाना ने उर्मिला की मौन शक्ति और उनके त्याग को संजीदगी से इन भावों में प्रस्तुत किया-
" धनुष-सा तना, वचन-सा अटल, लक्ष्मण का हर एक संकल्प,
छाया बन संग रहे सदा, त्याग बना उनका विकल्प।
उर्मिला की नीरव तपस्या, हर पीड़ा में दीप जली,
दोनों के इस प्रेम-व्रत में, मर्यादा की राह चली।"
अब बारी थी कान्हा से द्वारिकाधीश नाट्य प्रस्तुति की। करीब 50 कलाकारों की इस शानदार प्रस्तुति ने हर दर्शक के मन पर छाप छोड़ी। अमित दीक्षित राम जी के निर्देशन में मंचित यह नाटक भगवान श्रीकृष्ण की उस अद्भुत जीवन-यात्रा को स्वर देती है, जहाँ बाल-लीला से राजधर्म तक का विस्तार होता है। गोकुल की गलियों में नटखट कान्हा, माखन-चोरी और यशोदा के वात्सल्य से मन मोह लेते हैं। उनकी बांसुरी में बसता प्रेम, पूरे वृंदावन को एक सूत्र में बांध देता है। कालिया नाग मर्दन और गोवर्धन धारण से उनका दैवी, रक्षक रूप प्रकट होता है। रास-लीला में राधा-कृष्ण का प्रेम आत्मा के शाश्वत मिलन का प्रतीक बनता है। परंतु इस वैभव के बीच राधा का विरह प्रेम की अमरता का संदेश देता है। किंतु इसी मधुरता के बीच कर्तव्य की पुकार उन्हें विरह के मार्ग पर अग्रसर करती है। मथुरा गमन के साथ ही जीवन का नया अध्याय प्रारंभ होता है। कंस वध के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय का उद्घोष होता है।  कृष्ण अब केवल कान्हा नहीं, युगधर्म के वाहक बनकर उभरते हैं। समय के साथ वह एक कुशल कूटनीतिज्ञ और दूरदर्शी शासक बनते हैं। द्वारका की स्थापना उनके नेतृत्व और नीति का प्रतीक बनती है। “द्वारकाधीश” के रूप में वे कर्तव्य, धर्म और शासन का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।