आर्य समाज बोरीवली द्वारा आयोजित पर्यावरण शुद्धि महायज्ञ संपन्न
मुंबई। आर्य समाज बोरीवली द्वारा आयोजित पर्यावरण शुद्धि महायज्ञ रविवार 31मई 2026 को सुबह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।जिसमें 11 विद्वान वैदिक पुरोहितों ने मंत्र उच्चारण किया। महायज्ञ के ब्रह्म आचार्य प्रभारंजन पाठक ने कहा कि यज्ञ से वातावरण की शुद्धि तो होती ही है इसके अतिरिक्त होने वाली वर्षा के जल की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट होती है।इस अवसर पर अरविंद पटेल ने पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरक संदेश दिया तथा कवि कल्पेश आर्य ने आर्य समाज के विचारों को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया।इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। अजीत पटेल,परेश भाई पटेल, कांतिभाई ढोलू,मगन भाई दीवानी,विनय भाई,श्रीमती रीना परमार,श्रीमती अनीता गोठवाल, श्रीमती शालिनी जोशी आदि अनेक महिला- पुरुषों तथा बच्चों ने यज्ञ में आहुति देकर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया।पर्यावरण शुद्धि महायज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न होने पर आचार्य प्रभारंजन पाठक ने आए हुए मान्यवरों के प्रति आभार प्रकट किया।
नागरिकों को होने वाली असुविधा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं  : मंगल प्रभात लोढ़ा
मुंबई। गिरगांव क्षेत्र में हाल ही में बार-बार हो रही बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं के मद्देनज़र, कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने नगरसेविका श्रीमती स्नेहल तेंडुलकर एवं BEST के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण किया। चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने तत्काल मरम्मत के स्पष्ट निर्देश दिए। कार्य में हो रही देरी, समन्वय की कमी और लापरवाही को लेकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कड़े शब्दों में जवाब मांगा और स्पष्ट किया कि नागरिकों को होने वाली असुविधा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, तो वे स्वयं धरना आंदोलन करेंगे। प्रभाग 218 की नगरसेविका श्रीमती स्नेहल तेंडुलकर ने भी नागरिकों के मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने की भूमिका स्पष्ट की। मरीन लाइन्स पुल के पास स्थित BEST स्टेशन के निकट 33,000 वोल्ट की वायरिंग में खराबी पाई गई है। यह लाइन रेलवे पटरियों के नीचे से गुजरती है, जिसके कारण मरम्मत प्रक्रिया में कुछ समय लगने की संभावना अधिकारियों ने व्यक्त की है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में फिलहाल विभिन्न स्थानों से 11,000 वोल्ट की बिजली आपूर्ति डायवर्ट की गई है। श्री लोढ़ा के निर्देशानुसार, नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए गिरगांव गायवाड़ी में BEST की एक विशेष बस तैनात की जाएगी, जिससे स्थानीय निवासियों को अपनी समस्याएं दर्ज कराने और उन पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने में सुविधा होगी। साथ ही, मरम्मत कार्य के लिए किए गए खुदाई के कारण सड़कों पर बने गड्ढों को तत्काल भरने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। श्रीमती स्नेहल तेंडुलकर ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, आने वाले कुछ महीनों में पूरे गिरगांव क्षेत्र में बढ़ती बिजली मांग का आकलन करने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सबस्टेशनों की स्थापना पर भी चर्चा की गई है। भविष्य में ऐसी समस्याएं उत्पन्न न हों, इसके लिए दीर्घकालिक योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस बीच, BEST प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान बिजली कटौती पूर्व-नियोजित नहीं है, बल्कि बढ़े हुए लोड के कारण उत्पन्न परिस्थितिजन्य समस्या है। इसके बावजूद, आधुनिक तकनीक के माध्यम से नागरिकों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। वर्तमान में फाटकवाड़ी से फॉल्ट मरम्मत वाहन कार्यरत हैं, लेकिन उनके व्यापक कार्यक्षेत्र के कारण सभी स्थानों पर समय पर पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए, लगभग एक सप्ताह के भीतर D और C विभागों के लिए ताड़देव BEST डिवीजन से समर्पित मरम्मत वाहन तैनात किए जाएंगे। संबंधित संपर्क नंबर भी शीघ्र ही नागरिकों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
श्री लोढ़ा और श्रीमती तेंडुलकर ने विश्वास व्यक्त किया कि गिरगांववासियों को पूर्ण राहत मिलने तक इस मुद्दे पर लगातार फॉलो-अप जारी रहेगा।
मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के कार्यक्रम में बोले मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता की लड़ाई में हिंदी का बड़ा योगदान

मुंबई। भाषा विवाद का माध्यम नहीं हो सकती हिंदी इस देश की संपर्क सूत्र है। भाषाओं के नाम पर विवाद पैदा कर वोट और सत्ता तो हासिल की जा सकती है लेकिन इससे देश का ज्ञान समाप्त हो जाएगा और इसे हम आने वाली पीढ़ियों तक नहीं पहुंचा पाएंगे। इसलिए विशेष रूप से हिंदी जैसी भाषा का सम्मान होना चाहिए जिसने हमारी स्वतंत्रता की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान दिया है। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह बात कही। हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस सामारोह में उन्होंने कहा कि  बहुभाषी होना एक योग्यता है हमें अपनी भाषा तो सीखनी ही चाहिए क्योंकि मातृभाषा छोड़ने पर हम एक बहुत ही नैसर्गिक ज्ञान प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। लेकिन अगर मातृभाषा के अलावा अगर हम देश की कोई और भाषा सीखेंगे तो देश का ज्ञान बटोर पाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया के जिन देशों ने विकास किया है उन्होंने अपनी मातृभाषाओं में ही पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के सामने आज बड़ी चुनौतियां हैं क्योंकि खबरों की विश्वसनीयता को लेकर संकट है। खासकर डिजिटल मीडिया आने के बाद हालात चुनौती पूर्ण हुए हैं मैं मानता हूं कि यह अस्थायी है और इसे पीछे थोड़कर पत्रकारिता पुराने मूल्यों पर स्थापित होगी।  कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि मौजूद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हिंदी और देश की दूसरी भाषाओ में कोई टकराव नहीं है और हिंदी तभी आगे बढ़ेगी जब क्षेत्रीय भाषाएं आगे बढ़ेगी। उन्होंने भी मातृभाषा में पढ़ाई की वकालत की। मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने कहा कि हिंदी एक धागा है जो पूरे देश को को बांधता है लेकिन इसका विरोध कुछ लोगों के लिए फैशन बन गया है जबकि उनके बच्चे फ्रेंच, जर्मन जैसी भाषाएं पढ़ते हैं। मंत्री और विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि अब मुंबई के किसी भी कोने में खड़े होकर हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान का नारा लगाया का सकता है। हिंदी जोड़ने वाली भाषा है तोड़ना हमारे संस्कारों में नहीं है। कार्यक्रम में सम्मानित किए गए अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने कहा कि जब माला बनती है तो उसमें एक सूत्र लगता है मुझे लगता है कि भारत के लिए यह सूत्र हिंदी भाषा ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का रिश्ता बहुत पुराना है। फिल्म छावा में मैंने जिस कवि कलश की भूमिका निभाई थी वे भी उत्तर प्रदेश के थे। उन्होंने कवि कलश की कविता भी लोगों के सामने प्रस्तुत की। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता प्रोफेसर राम मोहन पाठक ने कहा कि एआई भले ही चुनौतीपूर्ण लगती है लेकिन यह संपादक जैसा दिमाग नहीं चला सकती। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के महासचिव विजय सिंह कौशिक ने कहा कि हिंदी की पहला समाचार पत्र एक गैर हिंदी भाषा प्रदेश कोलकाता से शुरू हुआ और हम इस उपलब्धि के 200 साल पूरे होने का समारोह एक मराठी भाषी राज्य में मना रहे हैं यह विविधता में एकता की हमारी परंपरा बयान करता है। उन्होंने पत्रकारिता के शुरुआती दौर में मराठी भाषा पत्रकारों के योगदान को भी याद किया।
प्रभादेवी स्थित रविंद्र नाट्यमंदिर में आयोजित समारोह में हिंदी भाषा, पत्रकारिता और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त समिति, लखनऊ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी, सुप्रसिद्ध अभिनेता विनीत कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अवधेश व्यास, गंगाधर ढोबले और कुमुद संघवी चावरे को सम्मानित किया गया। इस मौके पर पत्रकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गई गणमान्यों ने हाजिरी लगाई। कार्यक्रम में मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम, विधायक राजहंस सिंह, संजय उपाध्याय, मुरजी पटेल, सिद्धविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आर्चाय पवन त्रिपाठी, योगायतन ग्रुप ऑफ कंपनी के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रताप सिंह, उद्योगपति ज्ञान प्रकाश सिंह, प्रदेश भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष संजय पांडेय, उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह, समरस फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह, मीरा भायंदर परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा, मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र, कार्यकारणी सदस्य हरीगोविन्द विश्वकर्मा, अखिलेश मिश्र, अखिलेश तिवारी, अशोक शुक्ला, सैयद सलमान आदि मौजूद थे।
श्रुतज्ञान की रक्षा हेतु आरंभ हुआ भगीरथ महायज्ञ
मुंबई। जैन शासन का अविचल प्राण और चौबीसों तीर्थंकर परमात्माओं का साक्षात अक्षरदेह अर्थात ‘श्रुतज्ञान’ (आगम भगवंत) है। समय के प्रभाव से क्षीण हो रहे इस अमूल्य ज्ञानभंडार को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के परम पुण्य और भगीरथ कार्य में 'श्री वर्धमान श्रुतगंगा' संस्था आज संपूर्ण जैन समाज में अग्रणी एवं प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। श्रुतरक्षा के क्षेत्र में यह संस्था एक सशक्त स्तंभ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है। जैन इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब श्रुतज्ञान पर संकट आया, तब-तब महान आचार्यों और महापुरुषों ने आगे बढ़कर इसे सुरक्षित एवं अमर बनाने का कार्य किया। लगभग 1500 वर्ष पूर्व वल्लभीपुर में पड़े भीषण अकाल के समय जब श्रुतज्ञान के लुप्त होने का भय उत्पन्न हुआ था, तब पूज्य देवर्धिगणि क्षमाश्रमणजी ने जिनागमों को ताड़पत्रों पर लिपिबद्ध करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उसी महान परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करते हुए 'श्री वर्धमान श्रुतगंगा' दुर्लभ हस्तलिपियों एवं आगम ग्रंथों के संरक्षण का महाअभियान चला रही है। शास्त्रकारों के अनुसार पंचम आरे के अंत तक जैन शासन का आधार केवल श्रुतज्ञान ही रहेगा। इसी शाश्वत सत्य को आत्मसात करते हुए संस्था आज के अंधकारमय समय में आत्माओं को सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाशस्तंभ बनकर कार्य कर रही है।संस्था के अध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, उपाध्यक्ष सुरेश देवचंद संघवी तथा मंत्री अशोक नरसी चरला के कुशल मार्गदर्शन में संस्था अनेक ऐतिहासिक एवं अनूठे कार्य कर रही है। परमात्मा की ज्ञानवाणी को शास्त्रोक्त एवं पारंपरिक पद्धति से पुनः हस्तलिखित किया जा रहा है। सांगानेरी कागज तथा विशेष पारंपरिक स्याही द्वारा तैयार किए जा रहे ये ग्रंथ प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं। संस्था का उद्देश्य केवल ग्रंथों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि घर-घर तक जिनागम के प्रति श्रद्धा, ज्ञानभक्ति और संस्कार पहुंचाना भी है। पाठशालाओं एवं संस्कार केंद्रों के माध्यम से नई पीढ़ी में धर्म, संस्कृति और जिनवाणी के प्रति गहरा अनुराग जागृत किया जा रहा है।
इसी क्रम में जैन समाज के लिए एक और गौरवपूर्ण समाचार सामने आया है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध 'वेलकम कलेक्शन' द्वारा संरक्षित लगभग 2,000 दुर्लभ जैन पांडुलिपियों को पुनः जैन समाज को लौटाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई है। वर्ष 1919 में अविभाजित भारत के एक जैन मंदिर से प्राप्त ये पांडुलिपियां लंबे समय तक लंदन स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई थीं। अब एक सदी बाद इनकी वापसी को सांस्कृतिक न्याय और विरासत संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इन दुर्लभ पांडुलिपियों में प्राकृत, संस्कृत और गुजराती भाषाओं में लिखित धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का विशाल संग्रह मौजूद है। कई ग्रंथों में प्राकृतिक रंगों और स्वर्ण अलंकरण का अद्भुत प्रयोग भारतीय कला, संस्कृति और जैन परंपरा की समृद्धि को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल पांडुलिपियों की वापसी नहीं, बल्कि जैन समाज की आस्था, इतिहास और पहचान की पुनर्प्रतिष्ठा है। इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अमूल्य अवसर प्राप्त होगा। जैन समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इस ऐतिहासिक निर्णय का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया है। समाज के अग्रणियों के अनुसार यह पहल विश्वभर में भारतीय संस्कृति, जैन दर्शन और श्रुतज्ञान के प्रति बढ़ते सम्मान का प्रतीक है
हिंदी प्रचार एवं शोध संस्थान ने किया एड. राजकुमार मिश्रा का सम्मान
भायंदर। मीरा भायंदर की साहित्यिक संस्था हिंदी प्रचार एवं शोध संस्थान द्वारा 31 मई को भायंदर पूर्व के न्यू रविराज कॉम्प्लेक्स स्थित कार्यालय में नवनिर्वाचित परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा और मानव निर्माण के संपादक महावीर शर्मा का सम्मान किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए एड मिश्रा ने कहा कि  संस्था के लिए जमीन और भवन उपलब्ध कराने की दिशा में समर्पित भावना के साथ लगे हुए हैं और जल्द ही हम सब का यह सपना साकार होगा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ सुधाकर मिश्र, डॉ उमेश चंद्र शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, भाजपा के जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, डॉ कृपाशंकर मिश्र, प्रभाकर मिश्र, रामलीला समिति के अध्यक्ष मनोज मिश्र, अजीत सिंह ,आरपी सिंह, प्रदीप सिंह, अजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, अजीत शुक्ला, राकेश प्रताप सिंह, डॉ ओमप्रकाश तिवारी, भोलानाथ तिवारी, प्रवक्ता अनिल पांडे, मारकंडे त्रिपाठी , अजीत कुमार मिश्रा, विनोद मिश्रा, डॉ अशोक पांडे, विमलेश कुमार झा, अरुण दुबे समेत अनेक प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे।
भायंदर के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों के लिए लगाया गया कूलर
भायंदर। विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर , वाराणसी की तर्ज पर भायंदर पूर्व के आरएनपी पार्क में प्रख्यात समाजसेवी तथा राहुल एजुकेशन के चेयरमैन पंडित लल्लन तिवारी द्वारा अपने माता-पिता की स्मृति में बनाए गए काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए कूलर लगाया गया। आज पंडित लल्लन तिवारी ने मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए इसका शुभारंभ किया। इस अवसर पर समाजसेवी सुनील तावड़े, श्री राम सेवा समिति के अध्यक्ष श्रीराम दुबे, संतोष मिश्रा, विवेक मिश्रा समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। ज्ञातव्य है कि यह मंदिर यहां के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां पर भगवान शंकर के अलावा अन्य देवी देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित की गई है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि, स्थापना दिवस, होली तथा अन्य त्योहारों पर यहां धूमधाम से भजन कीर्तन तथा भंडारा का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक शनिवार को सुंदरकांड पाठ तथा खिचड़ी वितरण का कार्यक्रम किया जाता है।
आम नागरिकों के लिए जल्द खुलेगा कुर्ला स्कायवॉक
मुंबई। कुर्ला (पश्चिम) स्थित टैक्सीमेन कॉलोनी से श्रीकृष्ण चौक तक सीताराम भैरू मार्ग पर बनाए जा रहे स्कायवॉक का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जून 2026 के प्रथम सप्ताह में यह स्कायवॉक आम नागरिकों के लिए खोल दिया जाएगा।
इस परियोजना के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने लगातार पत्राचार एवं अनुवर्ती कार्रवाई कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उनके प्रयासों के चलते परियोजना की प्रगति और शेष कार्यों की जानकारी सार्वजनिक हुई तथा संबंधित विभागों को लंबित कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
स्कायवॉक शुरू होने के बाद प्रतिदिन हजारों की संख्या में पैदल यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। विशेष रूप से बारिश के मौसम में इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों को सड़क पार करने और आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में यह स्कायवॉक नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प साबित होगा। इसके अलावा, पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग उपलब्ध होने से सड़क पर भीड़ कम होगी और यातायात व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी तथा वाहन चालकों और आम नागरिकों दोनों को राहत मिलेगी। अनिल गलगली ने मांग की है कि स्कायवॉक के साथ दोनों ओर के एस्केलेटर भी जल्द से जल्द चालू किए जाएं, ताकि नागरिकों को परियोजना का पूर्ण लाभ मिल सके।
दुर्गा माता मंदिर के वर्धापन दिवस पर माता की चौकी का आयोजन
वसई। वर्तक कॉलेज के सामने, वसई पश्चिम में स्थित दुर्गा माता मंदिर के वर्धापन दिवस के अवसर पर 28 मई को माता की चौकी का भव्य आयोजन किया गया,जिसमें प्रख्यात भजन गायिका उषा शर्मा और देवेंद्र राणा ने अपने गए मधुर भजनों द्वारा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। समाजसेवी उषा धुरी और उनके परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित रहने वाले प्रमुख लोगों में नगरसेविका अर्पणा पाटिल, नगरसेवक छोटू आनंद, समाजसेविका  रीता इस्सर आदि का समावेश रहा।
मीरा रोड में जैन मुनिश्री जिन रत्न विजय महाराज की प्रेरणा से गुरुकुल बोर्डिंग स्कूल

मीरा-भायंदर। जैन मुनिश्री जिन रत्नविजयजी म.सा. की प्रेरणा से मुस्कान संस्था एवं फ्लोरा फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से भारत भर में गुरुकुलों के निर्माण का संकल्प लिया गया है। इस अभियान की शुभ शुरुआत मीरारोड, महाराष्ट्र में हुई, जहां जिन भक्ति मानव सेवा आश्रम ट्रस्ट एवं प्लेजेंट पैलेस जैन संघ द्वारा परम पूज्य गणिवर्य क्रांतिकारी जैन मुनिश्री जिन रत्न विजय महाराज साहेब, की प्रेरणा तथा दानदाताओं के सहयोग से दो मंजिला गुरुकुल विद्यालय (बोर्डिंग) की स्थापना की गई, जो शुरू भी हो गया है। इस गुरुकुल में लगभग 100 बच्चों के लिए शिक्षा, भोजन एवं रहने की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस गुरुकुल विद्यालय का उद्घाटन महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा स्थानीय विधायक नरेंद्र मेहता, महापौर डिंपल विनोद मेहता, मुंबई मनपा के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी की विशेष उपस्थिति एवं सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में किया गया। उद्घाटन समारोह के दौरान संस्था द्वारा घोषणा की गई कि एक बच्चे का वार्षिक पालन-पोषण एवं शिक्षा खर्च दो लाख सात हजार रुपए होगा। यह घोषणा सुनते ही उपस्थित दानदाताओं ने आगे बढ़कर पहले वर्ष का संपूर्ण खर्च वहन करने हेतु सहयोग प्रदान किया और अपने धन का सदुपयोग किया। संस्था का उद्देश्य जहां-जहां देवालय, वहां-वहां गुरुकुल विद्यालय एवं गौशाला का निर्माण करना है। इसके साथ ही अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को संस्कार, इंसानियत, देशभक्ति, स्वरोजगार (स्किल डेवलपमेंट) एवं सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण भी प्रदान करना है। यह जानकारी फ्लोरा फाउंडेशन के चेयरमैन व ट्रस्टी बाबूभाई भवानजी तथा मुस्कान संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी भरत नागड़ा (जैन) ने दी। फ्लोरा फाउंडेशन के चेयरमैन तथा मुंबई महानगर पालिका के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने आगे कहा कि अब जैन एवं हिंदू समाज संगठित होकर संकल्प लिया है कि जहां देवालय वहां गुरुकुल विद्यालय, में संस्कार, देशभक्ति, इंसानियत सेवा, और शास्त्र के पाठ के साथ - शस्त्र विद्या, स्वरोजगार, सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देकर और गौशाला का निर्माण कराया जाएगा।
लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ
मुंबई । देश की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था "लोढ़ा फाउंडेशन" द्वारा भारत के एक मात्र निजी वित्त पोषित सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारम्भ बुधवार, 27 मई, 2026 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किया गया। यह जानकारी देते हुए लोढ़ा डेवलपर्स के CEO एवं प्रबंध निदेशक और लोढ़ा फाउंडेशन के ट्रस्टी अभिषेक लोढ़ा ने बताया कि भारत आने वाले वर्षों में एक वैश्विक लीडर बनने के लिए तैयार है। इसलिए लोढ़ा फाउंडेशन का मानना है कि एक विकासशील राष्ट्र से एक विकसित राष्ट्र बनने की इस यात्रा में हम सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन में हम 'उत्कृष्टता के परोपकार' (Philanthropy of Excellence) का अभ्यास करते हैं और इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। इसी क्रम में अत्यंत विचार पूर्वक तैयार की गई और विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में अहम योगदान देने वाली सबसे नई पहल  है, जिसे 27 मई, 2026 को मुंबई स्थित लोढ़ा वर्ल्ड टॉवर में लॉन्च किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं डॉ मंजू लोढ़ा ने लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उपस्थित महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार सबसे बड़ी शक्ति हैं और ऐसे संस्थान आने वाले समय में भारत को वैश्विक एवं वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने बताया कि वुल्फ प्राइज विजेता प्रोफेसर जैनेंद्र जैन के नेतृत्व में LTPI, मौलिक भौतिकी में साहसिक विचारों को प्रोत्साहित करेगा। लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट की परिकल्पना भारत में सैद्धांतिक भौतिकी में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में की गई है। यह संस्थान भारत और दुनिया भर के अग्रणी वैज्ञानिकों के बीच केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सार्थक सहयोग के लिए एक शैक्षणिक वातावरण तैयार करके निरंतर और दीर्घकालिक अनुसंधान की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करेगा। अभिषेक लोढ़ा ने कहा कि लोढ़ा फाउंडेशन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें उत्कृष्टता के प्रयास करना, सबसे बड़ा प्रभाव पैदा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चाहे देश भर से प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान  और उन्हें त्वरित कार्यक्रमों में शामिल करना हो, या शहरी स्थिरता के समाधानों में निवेश करना हो। या फिर 'लोढ़ा मैथमैटिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट' और अब 'लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को सहायता व बढ़ावा देना हो, हम भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के इस महत्वपूर्ण सफर में सार्थक योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत विज्ञान में क्रांति के बाद ही परिवर्तनकारी तकनीकी युगों की शुरुआत होती है। इसी विजन पर LTPI की स्थापना की गई है । यह भारत में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ दिमागों को आकर्षित करेगा और बौद्धिक जिज्ञासा की संस्कृति को बढ़ावा देगा । असाधारण फैकल्टी, पोस्ट डॉक्टरल फेलो और दीर्घकालिक आगंतुकों को एक साथ लाकर, यह संस्थान बौद्धिक स्वतंत्रता, स्थिरता, सहयोग की भावना और गहरे प्रश्नों व साहसिक विचारों को तलाशने का साहस प्रदान करेगा, जिससे ऐसी खोज संभव होंगी, जिनका गहरा प्रभाव आने वाले दशकों में दिखाई देगा। लोढ़ा फाउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक आशीष कुमार सिंह ने कहा कि LTPI का उद्देश्य दुनिया भर के सबसे असाधारण बुद्धिमानों को एक साथ लाना और बिना किसी बाधा के भौतिकी के बारे में खुलकर सोचने में समय बिताना है। उन्होंने कहा कि जब असाधारण दिमाग एक साथ आते हैं, तो वे असाधारण परिणाम देते हैं और यह एक ऐसा दाॅंव है, जो हम भारत के लिए लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि LTPI (Lodha Theoretical Physics Insititute) का नेतृत्व संस्थापक निदेशक प्रो. जैनेंद्र के. जैन करेंगे, जो एक प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं और उन्हें 'ऑलिवर ई. बकली प्राइज' एवं भौतिकी में 'वुल्फ प्राइज' मिल चुका है । उन्होंने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' नामक उभरते कणों की खोज की। इसका वर्णन करने वाले उनके सिद्धांत ने correlated quantum matter की समझ को बेहद समृद्ध किया है और आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी को आकार देना जारी रखा है। प्रो. जैन ने कहा कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रकृति के प्रति हमारी समझ के केंद्र में है। सैद्धांतिक भौतिकी में प्रगति ने ऐतिहासिक रूप से वैज्ञानिक सोच को आकार दिया है और विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी विकास की नींव रखी है।2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए, भारत को विश्व स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे के साथ मजबूत संस्थानों का निर्माण करना अनिवार्य होगा। LTPI इसी दिशा में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रयास होगा, क्योंकि यह भारत में पूरी तरह से निजी तौर पर वित्त पोषित पहला भौतिकी संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि एक बड़ी शुरुआत के साथ, LTPI 'इमर्जेंट फेनोमेना इन क्वांटम हॉल सिस्टम्स' (EPQHS-10) पर 10वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक की मेजबानी कर रहा है । यह तीन दिवसीय कार्यशाला श्रृंखला दुनिया भर के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की मेजबानी करेगी, जो रोमांचक हालिया खोजों की घोषणा करेंगे और भौतिकी के क्षेत्र में भविष्य की आशाजनक दिशाओं पर चर्चा करेंगे । संस्थान की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में कार्य करते हुए, EPQHS-10 की मेजबानी करना यह दर्शाता है कि LTPI में पहले दिन से ही तैयार किया जा रहा शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र कितना गम्भीर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक और विश्व स्तरीय गुणवत्ता का है। समारोह के दौरान, नोबेल पुरस्कार विजेता और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सॉलिड स्टेट रिसर्च के डायरेक्टर एमेरिटस क्लाउस वॉन क्लिट्जिंग ने 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' (TIFR) के सहयोग से आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में बताया गया कि कैसे "क्वांटम हॉल इफेक्ट" की खोज अत्यधिक परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर बुनियादी, जिज्ञासा-संचालित अनुसंधान से उभरी। और कैसे इस अप्रत्याशित खोज ने अंततः माप मानकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में क्रांति ला दी । इस अवसर पर डॉ मंजू लोढ़ा द्वारा एक विशेष काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई, जो इस प्रकार है:- आज सजा है ज्ञान का मंदिर, आज जली है नई मशाल, जहाँ विज्ञान के पंख लगाकर, सपने छू लेंगे हर आकाश। यह केवल एक मंच नहीं है, यह भविष्य की पहचान है, जहाँ जिज्ञासा बनती शक्ति, और शोधों से बढ़ता मान है। गिरते सेब से प्रेरित होकर, न्यूटन ने ज्ञान जगाया, गति और गुरुत्वाकर्षण का सुंदर नियम समझाया। समय, प्रकाश और ब्रह्मांड का जिसने नया विज्ञान दिया, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सोच को नया आसमान दिया। दूरबीन से नभ को देखा, सत्य की राह अपनाई, गैलीलियो ने नई चेतना जग में लाई। विद्युत की अद्भुत धारा से दुनिया को जिसने सजाया, निकोला टेस्ला ने नवयुग का दीप जलाया। असंख्य प्रयोगों की तपस्या से अंधियारा दूर भगाया, थॉमस एडीसन ने बल्ब का उजियारा लाया। रेडियम की खोज में जिसने जीवन अपना खपा दिया, मैरी क्यूरी ने नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया। ब्लैक होल के गहरे रहस्य दुनिया को समझाने वाले, स्टीफेन हॉकिंग  थे, जिन्होंने हौसलों से जग जीता। भारत माँ भी गर्वित हुई, जब सी वी रमन ने कमाल दिखाया, प्रकाश की किरणों के बदलते रंगों का अद्भुत रहस्य समझाया। ज्ञान और गणित की शक्ति से नया सिद्धांत बनाया,सत्येन्द्र नाथ बोस ने आइंस्टीन संग इतिहास रचाया। परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भारत को जिसने बढ़ाया, होमी जहांगीर भाभा ने विज्ञान का मान बढ़ाया। अंतरिक्ष के सपनों को भी जिसने साकार बनाया, विक्रम साराभाई ने भारत का गौरव बढ़ाया। मिसाइल मैन कहलाकर भी मन से रहे महान, एपीजे अब्दुल कलाम ने युवाओं को दिए ऊँचे अरमान। ये वैज्ञानिक दीप समान हैं, ज्ञान जिनसे जगमगाता है, इनकी मेहनत और खोजों से मानव आगे बढ़ पाता है। विज्ञान हमें यह सिखलाता, हर मुश्किल आसान बने, जिज्ञासा और कर्म के बल पर मानव चाँद समान बने। कभी रसायन की प्रयोगशाला में, तत्वों ने मिलकर रंग भरे, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ने, जीवन के जल के दीप धरे। कार्बन की छोटी सी रचना ने, हीरे जैसा रूप लिया, विज्ञान ने मिट्टी के कण को, सोने से बढ़कर मूल्य दिया।कभी अम्ल और क्षार मिले तो, संतुलन का संदेश मिला, हर क्रिया ने यह सिखलाया संघर्षों से नव जीवन खिला। आज इसी प्रेरणा की धरती पर, ज्ञान के दीप प्रज्वलित होंगे, प्रो. जैनेंद्र जैन की शोधों से, विज्ञान के नये पथ निर्मित होंगे। “कॉम्पोज़िट फर्मियॉन” की खोज ने, दुनिया को नई दिशा दिखाई, वुल्फ प्राइज़ जैसे महान सम्मान ने, भारत की प्रतिभा चमकाई। दूर विदेशी धरती से आए, नोबेल विजेता वैज्ञानिक महान,प्रो. क्लॉस वॉन क्लिट्जिंग ने, बढ़ाया विज्ञान का गौरवमान। “क्वांटम हॉल इफेक्ट” की खोज ने, भौतिकी को नया विस्तार दिया, सूक्ष्म कणों की अद्भुत दुनिया का, मानव को नया आधार दिया। यहाँ सूत्र केवल अक्षर नहीं, हर सूत्र जीवन गाता है, विज्ञान वही है जो मानव को, अज्ञान से ऊपर उठाता है। लोढ़ा फाउंडेशन की प्रेरणा ने, शिक्षा का नव दीप जलाया है, अभिषेक लोढ़ा के संकल्पों ने, हर युवा को आगे बढ़ाया है। मंगल प्रभात लोढ़ा  जैसे, सेवा जिनकी पहचान बनी, समाज और संस्कृति के संग, जनहित की सुंदर शान बनी। आईएएस आशीष सिंह के प्रयासों ने, कर्तव्य का मान बढ़ाया है।