तिसरी में फिर फल-फूल रहा प्रतिबंधित ढिबरा कारोबार, प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
गिरिडीह।
तिसरी प्रखंड में प्रतिबंधित ढिबरा (माइका) का अवैध कारोबार एक बार फिर खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब जिला प्रशासन अवैध खनन पर सख्ती के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर रोजाना लाखों रुपये के इस अवैध कारोबार की भनक संबंधित विभागों को क्यों नहीं लग रही, या फिर सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं? रोज लाखों का कारोबार, फिर भी कार्रवाई नदारद स्थानीय सूत्रों के मुताबिक तिसरी क्षेत्र के कई जंगलों से प्रतिदिन 15 लाख रुपये से अधिक मूल्य के ढिबरा की अवैध निकासी हो रही है। खनन से लेकर भंडारण और तस्करी तक का पूरा नेटवर्क सक्रिय है।
इसके बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्रवाई का सामने नहीं आना कई सवाल खड़े करता है। गांवों में बन गए अवैध गोदाम पचरुखी, मनसाडीह, भोक्ताडीह, चंदवापहरी, बरईपांट, कर्णपुरा, चरकी बलबली, नारोटांड, असुरहड्डी, गड़कुरा, लक्ष्मणिया, दानोखूंटा, लोकाय, बरवाडीह और असनातरी समेत कई गांवों में आदिवासी घरों का इस्तेमाल कथित तौर पर ढिबरा भंडारण केंद्र के रूप में किया जा रहा है। दिनभर माल जमा होता है और रात होते ही पिकअप वाहनों के जरिए बाहर भेज दिया जाता है। माफिया बदले, नहीं बदला कारोबार प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कुछ समय तक शांत पड़ा यह धंधा अब नए तरीकों से संचालित हो रहा है। पहले जहां सीधे गोदामों और फैक्ट्रियों तक माल पहुंचता था, वहीं अब गांवों के घरों को अस्थायी भंडारण केंद्र बनाया जा रहा है। इससे कार्रवाई करने वाली एजेंसियों के लिए नेटवर्क तक पहुंचना और मुश्किल हो गया है।
क्या विभागीय निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित? स्थानीय लोगों का आरोप है कि तस्करी में शामिल लोगों ने पुलिस और वन विभाग की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग व्यवस्था कर रखी है। विभागीय वाहनों की सूचना मिलते ही माइका लदे वाहन रास्ते में रोक दिए जाते हैं और खतरा टलने पर आगे बढ़ा दिए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तस्करों के पास इतनी मजबूत सूचना व्यवस्था है, तो संबंधित विभागों की खुफिया निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? पुराने नाम फिर चर्चा में सूत्र बताते हैं कि पहले भी अवैध ढिबरा कारोबार से जुड़े रहे कई चेहरे दोबारा सक्रिय हो गए हैं। यदि यह सच है तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आखिर जिन लोगों पर पहले कार्रवाई हुई, वे दोबारा कारोबार में कैसे लौट आए? विभाग बोले- होगी जांच गावां रेंजर अनिल कुमार ने कहा कि यदि तिसरी क्षेत्र में ढिबरा का अवैध कारोबार दोबारा शुरू हुआ है तो मामले की जांच कराई जाएगी। छापेमारी अभियान चलाकर दोषियों की पहचान की जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल जब रोजाना कई वाहन प्रतिबंधित ढिबरा लेकर क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं, तब भी यदि विभाग अनजान है तो यह उसकी विफलता है। और यदि जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है, तो मामला और भी गंभीर है। तिसरी में दोबारा पैर पसार रहा यह अवैध कारोबार सिर्फ वन संपदा की लूट नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।
1 hour and 6 min ago
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