गरीबों के निवाले पर डाका: प्रशासन और चावल माफिया की मिलीभगत से सच हारा, इंसानियत हुई शर्मसार
रांची/धुर्वा: राजधानी और इसके आस-पास के इलाकों में गरीबों के हक के राशन की कालाबाजारी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी तंत्र और रसूखदार चावल माफियाओं के गठजोड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चंद रुपयों के लालच में प्रशासनिक ईमानदारी को कैसे ताक पर रख दिया जाता है। क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 22 मई को सिलसिलवार से ट्रको में सरकारी सील पैक बोरी चावल लोड होकर धुर्वा गोलचक्कर बस स्टैंड के पास जा रहे P.D.S. (जन वितरण प्रणाली) के सरकारी चावल को पकड़ा गया था। इस कार्रवाई को धुर्वा थाना और विधानसभा थाना ने संयुक्त रूप से मिलकर अंजाम दिया और छापेमारी की। इस रेड के दौरान लगभग 600 बोरा सरकारी चावल जब्त किया गया, जो सीधे तौर पर गरीबों का अनाज था और जिसे कालाबाजारी के उद्देश्य से बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब इस जब्त अनाज को विधानसभा थाना में न ले जाकर, भी इसके बाद 25 मई तक अनाज को वहां रखने के बाद बिना किसी पुख्ता कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। मामले को दबाने के लिए न तो कोई F.I.R. दर्ज की गई, न ही किसी की गिरफ्तारी हुई। इसके बजाय कागजी खानापूर्ति करते हुए जब्ती सूची बनाकर चावल को कड़क I गोदाम में स्टॉक दिखा दिया गया। इस पूरे खेल के पीछे कौन हैं मुख्य किरदार?सूत्रों और स्थानीय दावों के अनुसार, इस पूरे काले कारोबार को एक सुनियोजित सिंडिकेट चला रहा है। इस पूरे प्रकरण में
सहायक गोदाम प्रबंधक:- मनोज कुमार
ठेकेदार:- अजीत कुमार, परमानंद प्रसाद, विकाश राय
दलाल (Brokers):- मुकेश यादव, रंजीत यादव, यशवंत यादव के नाम सामने आ रहे है
दावा है कि इन्हीं लोगों की मिलीभगत से लगभग 3000 से 5000 क्विंटल सरकारी अनाज का गबन कर उसे कालाबाजार में बेचा जाता है।
जानकारी मुताबिक राशन डीलर विकास गुप्ता हटिया में पीडीएस दुकान चलाते है जबकि सरकारी अनाज की कालाबाजारी की नीयत से धुर्वा इलाके में निजी गोदाम रखे हुए है ।
इस पूरी घटना का मुख्य सूत्रधार मुकेश यादव, रंजीत यादव और यशवंत यादव नाम के तीन दलालों को बताया जा रहा है, जो सारा राशन इन्हीं माध्यमों से बेचते हैं। इसी बीच दिनांक 22.05.2026 को कडरू II से 600 बोरियां चावल कालाबाजारी के लिए निकाला गया था।अधिकारियों पर 'मोटे रकम' लेकर केस रफा-दफा करने का आरोपअनाज पकड़े जाने और रेड होने के बावजूद इस मामले में कोई कानूनी केस दर्ज नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि इस मामले को दबाने के लिए थाने से लेकर ऊपर तक पैसे मैनेज किए गए हैं।आरोप है कि M.O., SOR, DSO, SDO, DC, SP और DySP समेत कई बड़े अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर इस पूरे केस को रफा-दफा कर दिया। नतीजतन, इतने बड़े 'चावल माफिया' की जीत हो गई, सच्चाई हार गई और इंसानियत एक बार फिर शर्मसार हो गई। समाजसेवियों ने दागे तीखे सवाल, प्रशासन मौनइस पूरे घटनाक्रम से आक्रोशित कुछ समाजसेवियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने कुछ बुनियादी सवाल उठाए हैं, जिनका जवाब देने से फिलहाल हर कोई बच रहा है:
1. चावल आखिर किस तरह और किसकी अनुमति से धुर्वा गया?
2. इस चावल को कौन लेकर गया था?
3. यह चावल किस गोदाम का था और इस चावल का असली मालिक कौन है?सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह चावल गलत नहीं था, तो इसे पहले जब्त क्यों किया गया? और अगर गलत था, तो इसकी उचित जब्ती सूची और F.I.R. क्यों नहीं बनी?
फिलहाल इन सवालों का जवाब न तो संबंधित विभाग के पास है और न ही स्थानीय प्रशासन के पास। कड़ी कार्रवाई की मांगसमाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले पर प्रशासन और विभाग को तत्काल संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक ऐसे अधिकारियों और कालाबाजारियों के मनोबल को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक गरीबों के हक का अनाज उनके थाली तक नहीं पहुंच पाएगा। हालांकि इस बाबत रांची जिला आपूर्ति पर अधिकारी रामगोपाल पांडेय ने कहा कि मामला बहुत ही संगीन है गरीबों के सरकारी अनाज पर इस तरह ढाका नहीं डाला जा सकता है दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



कोडरमा से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहाँ एक पत्रकार खुद मिसाल बनकर समाज को यातायात नियमों का महत्व समझा रहे हैं। आज के दौर में जहाँ लोग अक्सर नियमों की अनदेखी करते हैं, वहीं ये पत्रकार हर किसी के लिए एक सीख बन गए हैं। दरअसल, पेशे से एक चैनल के पत्रकार आर्यन श्रीवास्तव यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं। वे जब भी मोटरसाइकिल लेकर सड़क पर निकलते हैं, तो खुद हेलमेट जरूर पहनते हैं और साथ ही अपने 3 वर्षीय बच्चे को भी हेलमेट पहनाकर ही घर से निकलते हैं। आज के समय में जहाँ कई लोग छोटी दूरी का बहाना बनाकर हेलमेट नहीं पहनते, वहीं आर्यन श्रीवास्तव का यह कदम लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है कि सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। “मैंने सड़क दुर्घटना में अपने पिता को खोया है। उस दर्द को मैं अच्छी तरह समझता हूँ। इसलिए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि खुद भी सुरक्षित रहूँ और दूसरों को भी जागरूक करूँ। हेलमेट पहनना बहुत जरूरी है, चाहे दूरी कितनी भी कम क्यों न हो।” आर्यन श्रीवास्तव के लिए यह सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। वे मानते हैं कि एक छोटी-सी सावधानी न सिर्फ आपकी, बल्कि आपके पूरे परिवार की जिंदगी को सुरक्षित रख सकती है। सड़क पर चलते हुए आर्यन अपने बच्चे को हेलमेट पहनाते नजर आते हैं, जो यह दर्शाता है कि सुरक्षा की आदत बचपन से ही डालना कितना जरूरी है। “मैं सभी लोगों से अपील करता हूँ कि यातायात नियमों का पालन करें, हेलमेट जरूर पहनें और सुरक्षित यात्रा करें। आपकी एक गलती आपके परिवार को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।” एंकर आउट्रो: तो अगर आप भी अपने परिवार से प्यार करते हैं, तो सड़क पर निकलते समय नियमों का पालन जरूर करें। क्योंकि आपकी सुरक्षा ही आपके अपनों की खुशी है।
निरीक्षण के दौरान वार्ड संख्या 24 की पार्षद ज्योति शुक्ला, वार्ड प्रतिनिधि विजय शुक्ला, वार्ड 22 के पार्षद प्रतिनिधि बबलू पांडेये सहित नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अंकित गुप्ता, सिटी मैनेजर रणधीर कुमार, लिमांसु कुमार एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आगामी बरसात में लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




झुमरीतिलैया नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। मैदान में चार प्रमुख उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है, लेकिन चुनावी चर्चा में ‘शोले’ वाले को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। रमेश सिप्पी निर्देशित शोले फिल्म में धर्मेंद्र के यादगार अभिनय को लेकर काफी चर्चा होती है ठीक उसी तरह से लोग बीरू की चर्च कर रहे है ।समर्थकों का दावा है कि क्षेत्र में मिल रहे व्यापक जनसमर्थन के कारण ‘शोले’ अव्वल स्थिति में है।

1 hour and 18 min ago
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