उत्तर प्रदेश में 9 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले, कई को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गईं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं और कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस क्रम में अपर पुलिस महानिदेशक यातायात और सड़क सुरक्षा ए. सतीश गणेश को वर्तमान जिम्मेदारी के साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक अपराध उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी दी गई है।

जय नरायन सिंह को पुलिस महानिदेशक ईओडब्ल्यू यूपी, लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे पुलिस महानिदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के पद पर कार्यरत थे।

ध्रुव कांत ठाकुर को पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड यूपी के साथ ही पुलिस महानिदेशक नागरिक सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं विनोद कुमार सिंह को पुलिस महानिदेशक, सीआईडी यूपी के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम यूपी, लखनऊ और पुलिस महानिदेशक यूपी 112 लखनऊ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

आलोक सिंह को पुलिस महानिदेशक, पीएसी मुख्यालय, यूपी लखनऊ के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक विशेष सुरक्षा बल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अनुपम कुलश्रेष्ठ को अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन नियुक्त किया गया है।

डॉ. आर. के. स्वर्णकार को अपर पुलिस महानिदेशक यूपी पॉवर कारपोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा गीता सिंह को पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण निदेशालय और एस. के. भगत को अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस निर्णय के माध्यम से सरकार ने पुलिस विभाग में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण सुनिश्चित किया है।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
*
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
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लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
यूपी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ड्रेस कोड होगा अनिवार्य
* योगी सरकार का बड़ा फैसला, समानता और अनुशासन को बढ़ावा देने की पहल
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने घोषणा की है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल  के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ड्रेस कोड अनिवार्य किया जाएगा।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में यथासंभव एक समान ड्रेस कोड लागू किया जाएगा, जिससे छात्र-छात्राओं के बीच समानता, अनुशासन और सामाजिक समरसता की भावना को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि छात्र वर्ग एक समरूप वर्ग होता है, जहां किसी भी प्रकार का ऊंच-नीच या भेदभाव नहीं दिखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार पहनावे के कारण सामाजिक और आर्थिक असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिससे कुछ छात्रों में हीन भावना और कुछ में श्रेष्ठता का भाव पैदा हो जाता है। ड्रेस कोड लागू होने से इस तरह की परिस्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण होगा और सभी विद्यार्थियों को समान माहौल में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक, अनुशासित और संस्कारित वातावरण तैयार करना भी है। ड्रेस कोड व्यवस्था से छात्रों का ध्यान पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास पर अधिक केंद्रित रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में एकरूपता के साथ बेहतर शैक्षणिक संस्कृति विकसित होगी, जो विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी।
हाईकोर्ट की सख्ती: लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज

* अदालती आदेश का पालन न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की बड़ी कार्रवाई
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी की मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। अदालत ने यह सख्त कदम अपने पूर्व आदेश के अनुपालन न होने पर उठाया।
जस्टिस आलोक माथुर   और जस्टिस कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नाराजगी जताई कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद निर्वाचित पार्षद को अब तक शपथ नहीं दिलाई गई।
मामला वॉर्ड-73 फैजुल्लागंज से जुड़ा है। पूर्व पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द होने के बाद सत्र न्यायालय/चुनाव न्यायाधिकरण ने 19 दिसंबर 2025 को ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित किया था। इसके बावजूद करीब पांच महीने तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने शपथ दिलाने का निर्देश जारी किया था। लेकिन आदेश के अनुपालन में देरी होने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करने का आदेश दे दिया।
योगी सरकार का खरीफ मिशन: 302.55 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य तय
* मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, किसानों को समय से मिलेगा बीज-उर्वरक
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने का बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राज्य स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में वर्ष 2026-27 के दौरान खरीफ खाद्यान्न एवं तिलहन उत्पादन को 256.22 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 302.55 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स ऑडिटोरियम में आयोजित इस गोष्ठी में कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अध्यक्षता कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की।
राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश आज कृषि उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने मक्का, दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।
वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों तक उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया।
कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की समस्याओं का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही खरीफ सीजन से पहले बीज, उर्वरक और अन्य कृषि निवेश समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में 110.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों का आच्छादन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विभागीय समन्वय, तकनीकी मार्गदर्शन और संसाधनों की समयबद्ध उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान ‘ग्रो सेफ फूड’ अभियान के अंतर्गत कृषि रक्षा रसायनों के सीमित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष चार्ट का विमोचन भी किया गया। इसका उद्देश्य सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
तकनीकी सत्र में कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मूंगफली, तिल, अरहर और मक्का की उन्नत प्रजातियों, रोग नियंत्रण, आधुनिक कृषि यंत्रों, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर किसानों को विस्तृत जानकारी दी। साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने, संतुलित उर्वरक उपयोग, गौ आधारित कृषि, ढैचा खेती, धान की सीधी बुवाई और दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
योगी सरकार के कौशल विकास अभियान को मिली नई रफ्तार
* आईटीओटी लखनऊ में नए वर्कशॉप ब्लॉक का उद्घाटन

* 20 व्यवसायों में मिलेगा प्रशिक्षण, युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के कौशल विकास अभियान को और मजबूत करते हुए प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने गुरुवार को ITOT Aliganj में न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी बिल्डिंग का उद्घाटन किया। नई बिल्डिंग में 10 नए व्यवसायों का संचालन शुरू होने से संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता और रोजगारपरक अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि यह संस्थान केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम है। उन्होंने प्रशिक्षकों से कहा कि छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, ताकि वे अपने हुनर के बल पर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र की नियमित उपस्थिति और प्रगति सुनिश्चित करना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कमजोर और मध्यम वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कौशल प्रशिक्षण जीवन बदलने का अवसर है। प्रशिक्षकों से उन्होंने अभिभावकों के साथ संवाद बढ़ाने की भी अपील की, ताकि प्रशिक्षण के प्रति विश्वास मजबूत हो सके। इस दौरान उन्होंने कहा, “जो तपता है वही कुंदन बनता है”, इसलिए कठिन परिस्थितियों में मेहनत करने वाले विद्यार्थी ही भविष्य में सफल होते हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में विभाग आधुनिक और उद्योग आधारित कोर्सेज, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और बेहतर प्लेसमेंट पर लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थानों का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कितने युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार मिला।
निदेशक प्राविधिक डी.के. सिंह ने बताया कि नई बिल्डिंग बनने से पहले संस्थान में 10 व्यवसाय संचालित हो रहे थे, जो अब बढ़कर 20 हो गए हैं। संस्थान में लगभग 1300 छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीआईपीएस (CIPS) प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक 1338 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि हाल ही में चयनित 1781 नए अनुदेशकों का प्रशिक्षण भी जारी है।
न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी में शुरू किए गए नए व्यवसायों में ड्रेस मेकिंग, ड्राफ्ट्समैन मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मैकेनिक डीजल, मैकेनिक ट्रैक्टर, ऑफिस मैनेजमेंट, पेंटिंग टेक्नोलॉजी, सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस (हिंदी), इलेक्ट्रीशियन पावर डिस्ट्रीब्यूशन और टर्नर शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। साथ ही परिसर में नीम का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
योगी सरकार के कौशल विकास अभियान को मिली नई रफ्तार
* आईटीओटी लखनऊ में नए वर्कशॉप ब्लॉक का उद्घाटन

* 20 व्यवसायों में मिलेगा प्रशिक्षण, युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के कौशल विकास अभियान को और मजबूत करते हुए प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने गुरुवार को ITOT Aliganj में न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी बिल्डिंग का उद्घाटन किया। नई बिल्डिंग में 10 नए व्यवसायों का संचालन शुरू होने से संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता और रोजगारपरक अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि यह संस्थान केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम है। उन्होंने प्रशिक्षकों से कहा कि छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, ताकि वे अपने हुनर के बल पर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र की नियमित उपस्थिति और प्रगति सुनिश्चित करना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कमजोर और मध्यम वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कौशल प्रशिक्षण जीवन बदलने का अवसर है। प्रशिक्षकों से उन्होंने अभिभावकों के साथ संवाद बढ़ाने की भी अपील की, ताकि प्रशिक्षण के प्रति विश्वास मजबूत हो सके। इस दौरान उन्होंने कहा, “जो तपता है वही कुंदन बनता है”, इसलिए कठिन परिस्थितियों में मेहनत करने वाले विद्यार्थी ही भविष्य में सफल होते हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में विभाग आधुनिक और उद्योग आधारित कोर्सेज, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और बेहतर प्लेसमेंट पर लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थानों का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कितने युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार मिला।
निदेशक प्राविधिक डी.के. सिंह ने बताया कि नई बिल्डिंग बनने से पहले संस्थान में 10 व्यवसाय संचालित हो रहे थे, जो अब बढ़कर 20 हो गए हैं। संस्थान में लगभग 1300 छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीआईपीएस (CIPS) प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक 1338 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि हाल ही में चयनित 1781 नए अनुदेशकों का प्रशिक्षण भी जारी है।
न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी में शुरू किए गए नए व्यवसायों में ड्रेस मेकिंग, ड्राफ्ट्समैन मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मैकेनिक डीजल, मैकेनिक ट्रैक्टर, ऑफिस मैनेजमेंट, पेंटिंग टेक्नोलॉजी, सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस (हिंदी), इलेक्ट्रीशियन पावर डिस्ट्रीब्यूशन और टर्नर शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। साथ ही परिसर में नीम का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
‘मौत का बक्सा’ बन गई ट्रेन: पिता ने बेटी की हत्या कर शव के किए टुकड़े, गोमतीनगर एक्सप्रेस में छोड़ा शव

लखनऊ । राजधानी के गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में मिले युवती के कटे शव की गुत्थी सुलझाते हुए जीआरपी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली खौफनाक साजिश थी, जिसमें एक पिता ने ही अपनी 16 वर्षीय बेटी को मौत के घाट उतार दिया।

बेटी के एक युवक से बातचीत करने से नाराज था

पुलिस सूत्रों के मुताबिक कुशीनगर के सेवरही निवासी आरोपी अपनी बेटी के एक युवक से बातचीत करने से नाराज था। परिवार में इसे लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था। आरोपी को डर था कि उसकी बेटी भी अपनी बहनों की तरह प्रेम विवाह न कर ले। इसी आशंका और कथित सामाजिक बदनामी के डर ने उसे इतना बेरहम बना दिया कि उसने बेटी की हत्या की साजिश रच डाली।

आरोपी बहन व बहनोई के साथ मिलकर घटना को दिया अंजाम

बताया जा रहा है कि वारदात से पहले आरोपी ने घर से पत्नी और बेटों को रिश्तेदारी में भेज दिया था। घर में केवल किशोरी और बुजुर्ग दादी मौजूद थीं। इसके बाद आरोपी ने अपनी बहन और बहनोई को बुलाया। देर शाम घर के अंदर ही किशोरी की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को धारदार हथियार से कई हिस्सों में काटा गया। पहचान छिपाने के लिए सिर को अलग कर तालाब में फेंक दिया गया, जबकि हाथ-पैर और धड़ को प्लास्टिक व पुराने कपड़ों में लपेटकर बक्से में भर दिया गया।

शव का सिर गायब था, जिससे नहीं हो पा रही थी पहचान

इसके बाद आरोपी अपने रिश्तेदारों के साथ ई-रिक्शा से तमकुही रोड रेलवे स्टेशन पहुंचा और छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के एस-1 कोच में वह बक्सा छोड़कर फरार हो गया। लेकिन आरोपी यह नहीं जानता था कि स्टेशन और ट्रेन में लगे सीसीटीवी कैमरे उसकी हर हरकत रिकॉर्ड कर रहे हैं।रविवार सुबह जब ट्रेन गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पहुंची तो कोच में पड़े संदिग्ध बक्से को देखकर हड़कंप मच गया। पुलिस ने जब बक्सा खोला तो अंदर युवती के शव के टुकड़े देखकर सभी दंग रह गए। शव का सिर गायब था, जिससे पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया था।

पूछताछ में आरोपी टूट गया और पूरी साजिश कबूल कर ली

जीआरपी और आरपीएफ ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी तक पहुंच बनाई। सख्त पूछताछ में आरोपी टूट गया और पूरी साजिश कबूल कर ली। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तालाब से कटा हुआ सिर और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया।इस खौफनाक हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
बिजली-पानी संकट पर फूटा लोगों का गुस्सा, पारा में मोहान रोड जाम

* घंटों ठप रहा यातायात, महिलाओं-युवाओं ने प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
 
लखनऊ। राजधानी के पारा इलाके में लगातार बनी बिजली कटौती और पानी की समस्या को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। आक्रोशित स्थानीय नागरिकों ने मोहान रोड जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। सड़क पर प्रदर्शन के चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
 
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और स्थानीय निवासी शामिल हुए। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि क्षेत्र में कई दिनों से बिजली और पानी का गंभीर संकट बना हुआ है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही।
 
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही बिजली कटौती से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जिससे आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भीषण गर्मी के बीच हालात और खराब हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
 
रोड जाम की सूचना मिलने के बावजूद मौके पर पुलिस और प्रशासन की देरी से पहुंचने को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली। काफी देर तक चले प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित रही और वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा।