ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन रवीन्द्र भवन में संपन्न
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आज भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाना तथा आमजन से सीधा संवाद स्थापित करने की रणनीति को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के आगमन एवं स्थान ग्रहण के साथ हुई, जिसके पश्चात राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् प्रस्तुत किया गया। अतिथिगण द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात अतिथियों का सूत की माला से स्वागत किया गया।
सम्मेलन में ब्लॉक अध्यक्षों की भूमिका, उनके कार्य एवं दायित्वों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। डॉ. संजय कामले द्वारा आगामी “जनसंवाद सम्मेलनों” की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी द्वारा प्रदेश स्तरीय ब्लॉक “जनसंवाद सम्मेलन” कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले 25 वर्षों से सत्ता से बाहर है, ऐसे में कार्यकर्ताओं को और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बूथ एवं ब्लॉक स्तर पर कम से कम 30 हजार परिवारों को जोड़कर संगठन को मजबूत करना होगा।
श्री पटवारी ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य किसी पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करना है। आज मध्य प्रदेश कर्ज, क्राइम और करप्शन के कैंसर से जूझ रहा है और इसे बचाने के लिए हमें अपनी आहुति देनी होगी।
25 अप्रैल से लेकर 25 मई तक बनाए गए विधानसभा प्रभारी अपने विधानसभा क्षेत्र में जाएंगे और कार्यकारिणी का सत्यापन करेंगे और 25 मई के बाद पार्टी के हर ब्लॉक पर एक अधिवेशन होगा जिसे जन संवाद कार्यक्रम का नाम दिया जाएगा जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता प्रदेश प्रभारी एवं सह प्रभारी सहित एक-एक ब्लॉक में जाएंगे।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हमारी पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं। जिनकी जिम्मेदारी सभी के साथ समन्वय बनाकर संगठन को आगे बढ़ाना है।
- संगठन विस्तार एवं जनसंवाद को प्रभावी बनाने पर व्यापक चर्चा
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने बताया कि पार्टी में एक प्रस्ताव विचाराधीन है, जिसके तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए का सहयोग लिया जाएगा। यह राशि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर ही संगठन निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यों में उपयोग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से पार्टी किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रहकर कार्यकर्ताओं के सामूहिक योगदान से सशक्त बनेगी और आमजन के साथ सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा।
श्री चौधरी ने ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे मंडल, ब्लॉक, ग्राम एवं वार्ड स्तर पर संगठन का सुदृढ़ गठन सुनिश्चित करें तथा गांव-गांव जाकर इकाइयों एवं बीएलए-2 का सत्यापन कर उनकी सक्रियता का आकलन करें। उन्होंने यह भी बताया कि जिला अध्यक्षों के कार्यों का मूल्यांकन जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा, जबकि ब्लॉक अध्यक्षों के कार्यों का आकलन भी आगामी छह माह में किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रगान जन गण मन के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी, प्रदेश सह प्रभारी संजय दत्त एवं श्रीमती उषा नायडू, रणविजय लोचन, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एवं गोविंद सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, सीईसी सदस्य ओमकार मरकाम एवं cwc सदस्य कमलेश्वर पटेल , विधायक आरिफ मसूद, एवं आतिफ अकील पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पी.सी. शर्मा, महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा, पूर्व मंत्री श्रीमती विजयलक्ष्मी साधौ, विधायक झूमा सोलंकी, फुंदेलाल मार्को, संगठन महामंत्री डॉ संजय कामले, संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे, प्रशिक्षण प्रभारी महेंद्र जोशी सहित समस्त विधायकगण,जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, मोर्चा संगठन, प्रकोष्ठ एवं विभागों के अध्यक्षगण तथा मध्यप्रदेश कांग्रेस के समस्त ब्लॉक अध्यक्षगण उपस्थित रहे।






















1 hour and 18 min ago
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, और इस दिशा में श्रीमती सोनिया गांधी जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हम महिला सशक्तिकरण के विरोधी नहीं, बल्कि उसके सच्चे समर्थक हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर पर्दे के पीछे जनगणना और परिसीमन को क्यों जोड़ रही है? क्या यह राजनीतिक रणनीति है या वास्तविक सशक्तिकरण का प्रयास?
श्री सिंघार ने आगे कहा कि देश की 50% से अधिक महिलाएं और लगभग 55% ओबीसी वर्ग से आती हैं क्या उनके लिए इस आरक्षण में स्पष्ट प्रावधान है? सरकार को यह साफ करना चाहिए कि किन वर्गों की महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा। यदि सरकार की मंशा ईमानदार है, तो महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए, बिना किसी शर्त के। सीटों की संख्या, परिसीमन और जनगणना के नाम पर इसे टालना महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि नारी सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और ठोस निर्णयों से सुनिश्चित होता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में लगातार इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां भाजपा के जनप्रतिनिधियों के परिजन कानून को चुनौती देते नजर आते हैं। पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने परिवार को भी संस्कार और मर्यादा का उदाहरण देना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जब सत्ता का प्रभाव इस तरह दुरुपयोग में बदल जाए, तो यह सरकार की कार्यशैली और कानून के प्रति उसके रवैये पर सवाल खड़े करता है। मेरा मानना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और नैतिक आधार पर संबंधित जनप्रतिनिधियों को स्वयं आगे आकर जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
श्री सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की पीड़ा पर राज्यपाल महोदय की चिंता स्वागतयोग्य है, वे स्वयं आदिवासी कार्यमंत्रणा परिषद के अध्यक्ष हैं। राज्यपाल महोदय द्वारा मुख्यमंत्री को दी गई सलाह पर क्या वास्तव में अमल होगा? आवश्यकता इस बात की है कि केवल सलाह नहीं, बल्कि ठोस समीक्षा और प्रभावी कार्यवाही हो। उन्होंने कहा आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए स्पष्ट नीति, संवेदनशील दृष्टिकोण और मजबूत क्रियान्वयन जरूरी है, सिर्फ घोषणाएं नहीं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना जैसी किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य केवल ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि लोगों का जीवन बेहतर बनाना होना चाहिए। लेकिन अक्सर इन परियोजनाओं के साथ कई परिवार उजड़ जाते हैं क्या उनके अधिकार सुरक्षित हैं? क्या उन्हें पूर्ण और न्यायसंगत मुआवजा मिल रहा है?
उन्होंने आगे कहा कि सरकार कागजों पर योजनाएं बना लेती है, लेकिन जब वे धरातल पर लागू होती हैं, तो ग्रामीण, आदिवासी और दलित समाज सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जरूरी है कि किसी भी परियोजना से पहले प्रभावित परिवारों से संवाद किया जाए, उनकी सहमति ली जाए और उनके पुनर्वास व मुआवजे को प्राथमिकता दी जाए। विकास तभी सार्थक है, जब वह न्यायपूर्ण और समावेशी हो।
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