अयोध्या : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल
* भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की केस स्टडी में पर्यटन, निवेश और रोजगार वृद्धि की पुष्टि

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) की ताजा अध्ययन रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” ने मुहर लगाई है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिला है।
अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है।

* मंदिर से पहले सीमित दायरे में थी अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान तक सीमित थी। आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास थी। अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 तक सीमित थी। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति नगण्य थी, कनेक्टिविटी सीमित थी और युवाओं का पलायन सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था।

* प्राण प्रतिष्ठा के बाद अभूतपूर्व आर्थिक विस्तार
जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया। अब वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है।अयोध्या में लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों ने आधारभूत संरचना को नई दिशा दी है। सतत विकास के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

* कर राजस्व और व्यापार में बड़ी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000–25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही।

* आतिथ्य और निवेश में नया दौर
प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य क्षेत्र में तेजी आई है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं। प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, Marriott International और Wyndham Hotels & Resorts ने अयोध्या में विस्तार योजनाएं घोषित की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है।स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में भी तेज उछाल आया है, जिससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

* रोजगार और उद्यमिता को मिली गति
आईआईएम रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए हैं। अनुमान है कि अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंच गई है। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जहां मंदिर के आसपास संपत्ति मूल्यों में पांच से दस गुना तक उछाल देखा गया है।

* आस्था से अर्थव्यवस्था तक विकास का मॉडल
रिपोर्ट निष्कर्ष देती है कि अयोध्या अब केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं रहा, बल्कि एक उभरता हुआ क्षेत्रीय आर्थिक हब बन चुका है। धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश और दीर्घकालिक दृष्टि से लागू किया जाए, तो वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। अयोध्या का अनुभव दर्शाता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं।
किसानों के AI साथी “भारत विस्तार” 2026 का शुभारंभ

* शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर से किया लोकार्पण, सूर्य प्रताप शाही वर्चुअल रूप से हुए शामिल
लखनऊ। मंगलवार को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर (राजस्थान) से किसानों के समर्पित AI साथी “भारत विस्तार” 2026 का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
यह अभिनव प्लेटफॉर्म आधुनिक तकनीक के समन्वय से खेती-किसानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शाही ने कहा कि “भारत विस्तार” देश की खेती को समृद्ध, सशक्त और सरल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इसके माध्यम से किसानों को उनकी समस्याओं का समाधान अब केवल एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि किसान अपने मोबाइल फोन से 155261 नंबर डायल कर खेती से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के उपयोग से किसानों को स्मार्ट, त्वरित और सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक और लाभकारी बनेगा।
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि यह प्लेटफॉर्म किसानों को मौसम, बीज, खाद तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित तात्कालिक और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इससे न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की इस पहल को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और अधिकतम किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से
* 53.37 लाख परीक्षार्थी होंगे शामिल, 8033 केंद्रों पर कड़ी निगरानी; नकल रोकने को सख्त इंतजाम

लखनऊ/प्रयागराज।उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएंगी। इस वर्ष कुल 53,37,778 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने 17 फरवरी को लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। यह कंट्रोल रूम ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करेगा। राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम, लखनऊ के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001806607 और 18001806608 जारी किए गए हैं। वहीं, यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के टोल-फ्री नंबर 18001805310 और 18001805312 भी सक्रिय रहेंगे।

* संवेदनशील जिलों व केंद्रों पर विशेष नजर
प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों में 596 राजकीय, 3453 अशासकीय सहायता प्राप्त और 3984 स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। 18 जिलों को संवेदनशील घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त 222 केंद्रों को अति संवेदनशील और 683 केंद्रों को संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है।

* हर कक्ष में सीसीटीवी और वेबकास्टिंग
प्रत्येक परीक्षा केंद्र के प्रत्येक कक्ष में वॉयस रिकॉर्डर युक्त दो सीसीटीवी कैमरे, राउटर, डीवीआर तथा हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन लगाए गए हैं। वेबकास्टिंग के माध्यम से परीक्षा की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी।

* व्यापक प्रशासनिक तैनाती
परीक्षा संचालन के लिए 8033 केंद्र व्यवस्थापक, 8033 बाह्य केंद्र व्यवस्थापक, 8033 स्टैटिक मजिस्ट्रेट, 1210 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 427 जोनल मजिस्ट्रेट तथा 69 मंडलीय और 440 जनपदीय सचल दल नियुक्त किए गए हैं।

* प्रश्नपत्रों की सुरक्षित व्यवस्था
प्रश्नपत्रों के अतिरिक्त रिजर्व सेट्स सुरक्षित डबल लॉक अलमारी में सीलबंद रखे जाएंगे। उत्तर पुस्तिकाओं पर परिषद का लोगो और सूक्ष्म आकार में UPMSP अंकन किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

* संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षा की भी ऑनलाइन निगरानी
इस बार राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम द्वारा यूपी संस्कृत शिक्षा परिषद परीक्षा 2026 की भी पहली बार ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी।

* कदाचार पर सख्त कानून लागू
सार्वजनिक परीक्षाओं में कदाचार रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ लागू किया गया है। इसके तहत अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। मंत्री गुलाब देवी ने सभी परीक्षार्थियों को तनावमुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने और श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से भी छात्रों को मार्गदर्शन देने तथा शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा संपन्न कराने की अपील की।
सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ प्रदेश में सशक्त हो रहा स्वास्थ्य ढांचा : केशव प्रसाद मौर्य
* विधान परिषद बजट सत्र 2026-27 में स्वास्थ्य सेवाओं पर उप मुख्यमंत्री ने रखे विचार


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं विधान परिषद में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को विधान परिषद के बजट सत्र 2026-27 के दौरान प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार और सरकार की नीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिन जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेजों में विलय किया गया है, वहां सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही पीएचसी, सीएचसी और अन्य जिला अस्पतालों में भी पूर्व की अपेक्षा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जहां एमआरआई या सीटी स्कैन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, वहां निजी क्षेत्र की सहभागिता से सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सा सहायता न देने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक है और सहायता पात्रता के आधार पर पारदर्शिता के साथ दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-पैनल निजी अस्पतालों के मामलों में सरकारी सहायता संभव नहीं होती।
आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री आरोग्य योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को निःशुल्क या सस्ती चिकित्सा सुविधा मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को नियमानुसार 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
वर्ष 2017 के बाद चिकित्सा शिक्षा और संस्थानों की क्षमता में वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी नागरिकों को चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों—पहले पीएचसी/सीएचसी स्तर पर उपचार, फिर जिला अस्पताल और गंभीर मामलों में मेडिकल कॉलेजों में समुचित इलाज। स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता के तहत स्थानांतरण किए जाते हैं, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में भी डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच का आश्वासन भी दिया गया।
उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए लागू हैं। चाहे कोरोनाकाल में टीकाकरण हो या अन्य स्वास्थ्य सेवाएं, सभी को समान रूप से सुविधा प्रदान की गई है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका अच्छा स्वास्थ्य” की भावना से समाज सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
विधानसभा में दो राजकीय विश्वविद्यालय स्थापना हेतु संशोधन विधेयक पारित: योगेन्द्र उपाध्याय
* भदोही और शाहजहांपुर में नए विश्वविद्यालयों का मार्ग प्रशस्त, ग्रामीण युवाओं को मिलेंगे स्थानीय अवसर


लखनऊ। विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 में योगी सरकार ने उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 को बहुमत से पारित करा लिया। सदन में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत दोनों विधेयक पारित हुए।
सदन में प्रस्ताव रखते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाना है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। सरकार ग्रामीण, पिछड़े और वंचित क्षेत्रों तक विश्वविद्यालय पहुंचाने के लिए ठोस निर्णय ले रही है, ताकि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
संशोधन विधेयक के तहत ज्ञानपुर, जनपद भदोही स्थित काशी नरेश स्नातकोत्तर महाविद्यालय को उन्नत कर विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे आसपास के 23 महाविद्यालयों का संबद्धीकरण संभव होगा और क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार के बेहतर अवसर मिलेंगे। यह निर्णय पूर्वांचल क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
द्वितीय संशोधन विधेयक के माध्यम से शाहजहांपुर स्थित मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट की शैक्षिक इकाइयों को उच्चीकृत कर स्वामी सुखदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया गया है। मंत्री ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा एमओयू के माध्यम से अपनी चल-अचल संपत्ति एवं भूमि सरकार को हस्तांतरित कर विश्वविद्यालय स्थापना में सहयोग दिया गया है। इससे 60 क्षेत्रीय महाविद्यालयों का संबद्धीकरण होगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर शिक्षा व रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं। जहां पहले कई मंडलों में सरकारी विश्वविद्यालयों का अभाव था, वहीं अब निरंतर नए विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार की उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति के तहत हर जिले तक विश्वविद्यालय पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे शिक्षा का संतुलित और विकेंद्रीकृत विकास सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता सुधार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शोध और कौशल आधारित शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश में विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और नए शैक्षणिक अवसर इस परिवर्तन का प्रमाण हैं। सरकार उच्च शिक्षा को रोजगार, नवाचार और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर सशक्त स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अब बट गए हैं कटना बाकी है  : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष
लखनऊ । सवर्ण आर्मी भारत के केंद्रीय कार्यालय गोमतीनगर लखनउ पर आए सवर्ण समाज के लोगों के बीच बोलते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि आज देश में जो माहौल सवर्ण के खिलाफ बनाया जा रहा है वो बड़ा चिंता का विषय है तिलक,तराजू,और तलवार इनको मारो जूते चार , ब्राह्मण,क्षत्रिय,बनिया  को देश निकालने की बात हो रही है और हमारी सरकार,उच्च पदस्थ नेता, संवैधानिक संस्थाएं चुप हैं। देश की एकता के लिए सवर्ण सर्वोच्च बलिदान दिया सरकार आज उन्हीं के खिलाफ यूजीसी कानून ला रही है दिल्ली यूनिवर्सिटी का हालिया निवाद जाती पूछ कर महिला पत्रकार को लिंच करने की कोशिश दिल्ली  यूनिवर्सिटी में हुआ अब सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा अब अन्याय के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है बेटियों पर हमला किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं पूरे समाज की अस्मिता और सम्मान का प्रश्न है । कानून का दुरुपयोग हो या तथाकथित काले कानून का मौन  समर्थन समाज अब जाग चुका है दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जाएगा न्याय समानता और सुरक्षा यही हमारा संकल्प है अब तो बट गया है कटना बाकी है 8 मार्च को जनर मंतर पहुंच कर मजबूती दे यूजीसी काला कानून वापस लेने हेतु धरना प्रदर्शन किया जाएगा दुर्भाग्य है कि इस घटना कवरेज करने पहुंच न्यूज रिपोर्टर रुचिका तिवारी के साथ मार पीट की गई सच दिखाने की कोशिश करने  वाले मीडिया कर्मियों पर हमला लोकतंत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है हमला करने वाले जाती पूछ कर कहे कि ब्राह्मण है मारो जान से मारने को कोशिश की गई यही नहीं उससे कहा गया कि कपड़े निकाल कर नागा परेड कराया जाएगा।
हर व्यक्ति को न्याय दिलाना सरकार की प्रतिबद्धता : केशव प्रसाद मौर्य
* डिप्टी सीएम ने जनता दर्शन में सैकड़ों फरियादियों की सुनी समस्याएं, त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को अपने लखनऊ कैम्प कार्यालय पर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों लोगों की व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को मामलों के त्वरित, प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए।
जनता दर्शन में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, वृद्धजन, दिव्यांगजन एवं युवा उपस्थित रहे। फरियादियों ने भूमि विवाद, राजस्व संबंधी प्रकरण, चिकित्सा सहायता, पेंशन, आवास, सड़क, बिजली-पानी, पुलिस कार्यवाही, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मामलों को सीधे उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता दर्शन आमजन से सीधे संवाद का सशक्त माध्यम है, जिससे जमीनी हकीकत सामने आती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन मामलों में आवश्यक हो, वहां संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर निरीक्षण करें और पीड़ितों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरतमंद एवं पात्र व्यक्तियों को सभी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए। सरकार जनहित को सर्वोपरि मानते हुए आम जनता की भलाई के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
श्री मौर्य ने उपस्थित फरियादियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की हर संभव समस्या का समाधान किया जाएगा और कोई भी पीड़ित निराश होकर वापस नहीं लौटे—यही प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। जनसमस्याओं का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्पीड़न एवं भूमि पर अवैध कब्जों के मामलों को गंभीरता और संवेदनशीलता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता हो, वहां कठोर कार्रवाई की जाए। भूमि संबंधी मामलों में जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर भेजा जाए और सार्थक समाधान कराया जाए।
जनसुनवाई के दौरान उन्होंने महिलाओं, दिव्यांगजनों एवं बुजुर्गों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समस्याओं का समाधान इस प्रकार किया जाए कि पीड़ितों को दोबारा भटकना न पड़े और बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। उप मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार की मंशा है—हर व्यक्ति को न्याय, सम्मान और समय पर समाधान मिले।
लापरवाही का गड्ढा, सिस्टम का मौन: ग्रेटर नोएडा में 3 साल के देवांश की डूबकर मौत
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। गांव दलेलगढ़ में तीन साल का देवांश उस गड्ढे में डूब गया, जिसे लेकर महीनों से हादसे की चेतावनी दी जा रही थी—लेकिन न प्रशासन जागा, न प्राधिकरण।एक महीने के भीतर यह तीसरी दर्दनाक घटना है। पहले नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता, फिर दिल्ली में कमल और अब ग्रेटर नोएडा में तीन साल का मासूम—सवाल वही है: आखिर कब भरे जाएंगे लापरवाही के ये गड्ढे?

धार्मिक आयोजन में मातम

देवांश अपने मामा के घर धार्मिक अनुष्ठान में आया था। बिलासपुर के पास दलेलगढ़ गांव में डालेश्वर बाबा की समाधि पर 41 दिन का अनुष्ठान चल रहा था। शनिवार को अंतिम दिन भंडारा था। इसी दौरान खेलते-खेलते देवांश छह से सात फीट गहरे पानी भरे गड्ढे में गिर गया।काफी देर तक बच्चे का पता नहीं चला। तलाश के दौरान गड्ढे में पानी पर तैरती उसकी टोपी दिखी। ग्रामीण पानी में कूदे, बच्चे को बाहर निकाला और अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कुछ ही मिनटों में भंडारे की खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं।

“पहले चेताया था, अब लाश उठी”

ग्रामीणों का आरोप है कि यह गड्ढा पशुचर भूमि पर है, जहां सालों से धड़ल्ले से मिट्टी निकाली जाती रही। कभी प्राधिकरण ने, कभी ग्रामीणों ने। बारिश और नालियों का पानी भरता गया और यह जगह मौत का कुंड बन गई।ग्रामीणों ने कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से तारबंदी की मांग की थी। हादसे की आशंका जताई गई थी, लेकिन फाइलें चलती रहीं—जमीन पर कुछ नहीं हुआ।

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता सिस्टम

हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया। सदर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल के बाद रविवार को उप जिलाधिकारी आशुतोष गुप्ता मौके पर पहुंचे। प्राधिकरण की टीम भी आई—लेकिन जवाब वही पुराना।
प्राधिकरण के जीएम एके सिंह ने कहा कि यह गड्ढा खसरा संख्या 373 की निजी भूमि पर है, इसलिए प्राधिकरण सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता। यानी जमीन निजी हो तो मासूम की जान भी निजी जिम्मेदारी?
उधर सुधीर सिंह, एडीसीपी ग्रेटर नोएडा ने कहा कि परिवार की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।

बड़ा सवाल

क्या शिकायत से पहले किसी मासूम की मौत जरूरी है? अगर हादसे की आशंका पहले जताई गई थी तो प्रशासन ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए? और अगर जमीन निजी थी, तो सार्वजनिक सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है?देवांश की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रेटर नोएडा में विकास की रफ्तार तेज है, लेकिन सुरक्षा की फाइलें अब भी धीमी।
सीएम योगी की पाती: “यूपी का बजट 2026-27 नवाचार और युवा सशक्तिकरण का ऐतिहासिक दस्तावेज”
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम अपनी पाती में वर्ष 2026-27 के बजट को नवाचार, नवनिर्माण और युवा सशक्तिकरण का ऐतिहासिक बजट बताया है। उन्होंने कहा कि नवनिर्माण के नौ वर्षों की यह यात्रा प्रदेश को निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ा रही है और यह बजट प्रदेश की आकांक्षाओं की पूर्ति का सशक्त माध्यम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में यह बजट निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसके तहत स्टेट डाटा अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जिससे डेटा आधारित नीति निर्माण को मजबूती मिलेगी और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी।
बजट में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश में AI मिशन और AI डेटा लैब की स्थापना की जाएगी, जिससे उत्तर प्रदेश को वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीकों के माध्यम से विकास को नई गति दी जाएगी।
युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 25 लाख युवाओं को नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा, “हम युवाओं के सपनों को आकार दे रहे हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह बजट प्रदेश के समग्र विकास, रोजगार सृजन और तकनीकी प्रगति का आधार बनेगा तथा उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
सियासी करवट: नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल, बसपा में वापसी की कोशिशें नाकाम
लखनऊ । प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ने के बाद आखिरकार समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। वह लंबे समय से बहुजन समाज पार्टी में वापसी की कोशिशों में जुटे थे, लेकिन बात नहीं बन सकी।

सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपने पुराने साथियों के जरिए मायावती तक संदेश पहुंचाया और सार्वजनिक रूप से उनकी प्रशंसा भी की, लेकिन बसपा नेतृत्व ने वापसी की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने चंद्रशेखर आजाद से भी संपर्क साधा, मगर अंततः उन्होंने अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

मुस्लिम राजनीति में बड़ा चेहरा

नसीमुद्दीन सिद्दीकी को प्रदेश की मुस्लिम राजनीति में प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है। बसपा सरकार में उन्हें एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली थी, जिसके चलते उन्हें ‘मिनी मुख्यमंत्री’ तक कहा जाता था। विधानसभा में वह अक्सर आजम खां पर हमलावर रहते थे, ताकि मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखी जा सके।हालांकि 2012 के बाद बसपा से अलग होते समय उन्होंने मायावती के साथ बातचीत की ऑडियो सार्वजनिक कर दी थी। इसी घटनाक्रम के बाद उनके लिए बसपा के दरवाजे लगभग बंद हो गए।

बसपा का बदला रुख

जानकारों का मानना है कि हालिया लोकसभा चुनाव में बसपा द्वारा बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने के बावजूद अपेक्षित समर्थन न मिलने से नेतृत्व सतर्क हो गया है। 21 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे गए थे, लेकिन पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसके बाद मायावती ने संकेत दिया था कि भविष्य में टिकट वितरण में सतर्कता बरती जाएगी।

सपा में सामूहिक एंट्री

रविवार को नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए। उनके साथ पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू ने भी सपा की सदस्यता ली। अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि “उन्होंने सिर्फ मकान बदला है, मोहल्ला नहीं,” यानी वे अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं।

15,718 लोग विभिन्न दलों को छोड़कर सपा में शामिल

इस मौके पर देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, प्रतापगढ़ सदर के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, कन्नौज से एआईएमआईएम प्रत्याशी रहे डॉ. दानिश खान, पूर्व एमएलसी हुस्ना सिद्दीकी, पूनम पाल और ड्रोन पायलट रंजना पाल समेत कई नेताओं ने सपा जॉइन की।नसीमुद्दीन ने दावा किया कि 15,718 लोग विभिन्न दलों को छोड़कर सपा में शामिल हुए हैं और लक्ष्य 2027 में प्रदेश में सपा की सरकार बनाना है।