ईरान में खामेनेई विरोधी आंदोलन के बीच भारतीय गिरफ्तार? जानें पूरा मामला

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ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं। प्रदर्शनों में हिंसा और मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी का कहना है कि ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 538 हो गई है। मारे गए लोगों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के सदस्य हैं। देशभर में अभी तक 10,670 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

छह भारतीयों को गिरफ्तारी का दावा

इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें दावा किया गया कि ईरान की पुलिस ने कई भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तेहरान सहित देशभर में फैले आंदोलन के बीच दावा किया गया था कि ईरानी पुलिस ने छह भारतीयों को गिरफ्तार किया है। पोस्ट में दावा किया गया कि ईरानी पुलिस ने 10 अफगान और 6 भारतीय नागरिकों सहित कुछ ईरानी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

ईरान ने दावों को किया खारिज

हालांकि ईरान ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत में ईरानी राजदूत ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही ईरानी राजदूत ने लोगों से जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है। एक्‍स पोस्‍ट में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथली ने कहा, 'कुछ विदेशी X खातों पर ईरान के घटनाक्रमों के बारे में जारी खबरें पूरी तरह से झूठी हैं। मैं सभी इच्छुक लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे विश्वसनीय स्रोतों से ही खबरें हासिल करें।

ईरानी सरकार ने नहीं बताई हताहतों की कुल संख्या

पूरे ईरान में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रदर्शन के मद्देनजर इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कटी होने के कारण प्रदर्शनों के जमीन पर असर और हिंसा में नुकसान अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों में हताहतों की कुल संख्या नहीं बताई है। ऐसे में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

दिल्ली में अमित शाह के दफ्तर के बाहर टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन, लिए गए हिरासत में, जानें पूरा मामला

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के बीच टकराव शुक्रवार को और बढ़ गया। कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी के बाद तृणमूल के आठ सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर धरना दिया। जिसके बाद पुलिस ने महुआ मोइत्रा सहित अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया है।

कोलकाता में कई ठिकानों पर गुरुवार को ईडी ने रेड मारी थी। इनमें से दो रेड IPAC कंपनी के खिलाफ भी थीं। यह कंपनी टीएमसी के चुनावी मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल रही है। इस रेड के बाद बंगाल का सियासी पारा चढ़ गया है, जिसका असर दिल्ली तक दिख रहा है। शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के 8 सांसदों ने दिल्ली में होम मिनिस्टर, अमित शाह के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन के लिए डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आजाद और डॉ. शर्मिला सरकार पहुंचे थे। सांसदों ने केंद्र सरकार पर चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और नारे लगाए। इस दौरान वहां पुलिस पहुंची और टीएमसी सांसदों को हिरासत में ले लिया। प्रोटेस्ट का जो वीडियो आया है, उसमें पुलिस, टीएमसी सांसदों को पकड़ती दिख रही है। उन्हें जबरन अपने साथ गाड़ी में बैठाती नजर आ रही है।

महुआ मोइत्रा ने जताई नाराजगी

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'हम भाजपा को हराएंगे, देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस एक चुने हुए सांसद के साथ कैसा बर्ताव कर रही है।' वहीं टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने कहा, 'अमित शाह ने ईडी के अधिकारियों का इस्तेमाल किया और वे हमारे राजनीतिक दस्तावेज छीनने के लिए वहां गए। वे (भाजपा) पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं जीत सकते, इसीलिए वे ऐसा घटिया काम कर रहे हैं।'

यह विवाद गुरुवार को शुरू हुआ था, जब ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े मामले में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और संगठन के कार्यालय पर छापे मारे। छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँचीं और एजेंसी पर तृणमूल से जुड़े अहम दस्तावेज ले जाने का आरोप लगाया।

फिर जल रहा ईरानः बवाल के बाद इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद, सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी

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ईरान में पिछले 12 दिनों से भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। ईरान में महंगाई और गिरती करेंसी को लेकर दो हफ्ते से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। गुरुवार की रात एक बार फिर ईरान धधक उठा। प्रदर्शन की आंच इतनी तेज हो गई कि खामेनेई सरकार सकते में आ गई। आनन-फानन में सरकार ने इंटरनेट और फोन लाइन्स काट दी।

रेजा पहलवी की अपील के बाद उग्र हुई भीड़

गुरुवार की रात प्रदर्शन और उग्र हो गए, जब ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की। रेजा पहलवी की अपील के बाद बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतरे। इसी बीच ईरानी सरकार ने सड़कें खाली कराने के लिए सुरक्षाबलों को उतार दिया है।

50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

सबसे खास बात ये है कि प्रदर्शनों के दौरान रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि अब तक यहां शाह के समर्थन में नारेबाजी करने पर मौत की सजा मिलती थी। बताया जा रहा है कि ईरान के कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर निकलकर ईरानी शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों पर 45 प्रदर्शनकारियों की हत्या का आरोप

ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होने के बाद से देश में सुरक्षाबलों ने 45 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार का दिन अब तक का सबसे बड़ा जानलेवा दिन रहा, जिसमें 13 प्रदर्शनकारी मारे गए। वहीं, सैकड़ों लोग घायल हुए। इसके अलावा, 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान की अर्थव्यवस्था संकट में

रअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। महंगाई से आवाम त्रस्त है। रियाल मुद्रा का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया। 28 दिसंबर 2025 को ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। ये विरोध प्रदर्शन पहले तेहरान बाजार की हड़ताल से चले, मगर जल्दी ही पूरे देश में फैल गए। सरकारी डेटा में 21 मौतें हुई हैं, मगर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसी ने 45 लोगों के मरने का दावा किया है। खामेनेई सरकार ने इसे विदेशी साजिश बता रही है, जबकि प्रदर्शनकारी महंगाई, भ्रष्टाचार और दमन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

संसद के दूसरे दिन भी सत्तापक्ष और विपक्ष का टकराव जारी, SIR पर फिर बवाल

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संसद में एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा जारी है। संसद के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। संसद परिसर में विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों ने आज भी एसआईआर के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा। विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग के साथ-साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में मकर द्वार पर एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन संसद परिसर में एसआईआर के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता प्रदर्शन में मौजूद दिखे।

संसद में व्यवधान पैदा करने की आवश्यकता नहीं- रिजिजू

वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, विपक्ष को ढूंढ-ढूंढकर कर मुद्दे लाने की आवश्यकता नहीं है। शीतकालीन सत्र में बहुत सारे मुद्दे हैं और कई मुद्दे विपक्ष ने भी उठाए हैं, हम उसपर आगे क्या करना है बातचीत करके विचार करेंगे। नए-नए मुद्दे ढूंढकर संसद में व्यवधान पैदा करने की आवश्यकता नहीं है। हर मुद्दा अपनी जगह पर महत्वपूर्ण है लेकिन मुद्दे को हथियार बनाकर संसद में गतिरोध करना ठीक नहीं है। आज हम विपक्ष के प्रमुख नेताओं से बात करेंगे।

संचार साथी एप को लेकर भड़का विपक्ष

इधर, मोबाइल हैंडसेट पर संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करने के संचार विभाग के निर्देशों पर भी विपक्ष ने आपत्ती जताई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, यह एक जासूसी ऐप है। नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है। हर किसी को परिवार, दोस्तों को मैसेज भेजने की प्राइवेसी का अधिकार होना चाहिए। वे इस देश को हर तरह से तानाशाही में बदल रहे हैं। संसद इसलिए काम नहीं कर रही है क्योंकि सरकार किसी भी चीज पर बात करने से मना कर रही है। विपक्ष पर इल्जाम लगाना बहुत आसान है। वे किसी भी चीज पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। एक स्वस्थ लोकतंत्र चर्चा की मांग करता है।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से भड़की सत्ता-विरोधी लहर, अब नए संविधान, प्रतिनिधि सभा भंग करने की उठी मांग

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नेपाल में जेनरेशन जेड (जेन-जी) आंदोलन अब बेकाबू होता जा रहा है। सोशल मीडिया बैन से भड़की युवा-नेतृत्व वाली लहर अब सत्ता-विरोधी सुनामी में बदल चुकी है। संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंहदरबार सचिवालय और कई नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इस बवाल के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अचानक इस्तीफा दे दिया। हालात इतने बिगड़े कि सेना को मंगलवार रात 10 बजे से राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेनी पड़ी। देशभर में कर्फ्यू लागू है और सीमाएं सील कर दी गई हैं। इस बीच जेन जी प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक और सामाजिक मांगें रखी हैं।

सेना ने ली देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी

नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद सेना ने सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। काठमांडू एयरपोर्ट और सरकार के मुख्य सचिवालय सिंहदरबार जैसे अहम ठिकानों पर सेना का नियंत्रण है. वहीं, देश की सीमाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। कर्फ्यू जारी है, हालांकि एंबुलेंस और शववाहन जैसी जरूरी सेवा से जुड़ी गाड़ियों को छूट दी गई है। सेना ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन, तोड़फोड़, लूट, आगजनी या किसी भी व्यक्ति और संपत्ति पर हमला अब दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सेना ने नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर

हालात को शांत करने के लिए नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर हैं। उन्होंने देर रात जेन जी आंदोलन के प्रतिनिधियों को सेना मुख्यालय बुलाकर उनसे बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। उन्होंने मौतों पर शोक जताते हुए युवाओं से संवाद के जरिए समाधान खोजने की अपील की। साथ ही उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा कठिन परिस्थिति को सामान्य करना, सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा करना और आम नागरिकों तथा राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सेना की पहली प्राथमिकता है।

देश के संविधान में संशोधन की मांग

इधर नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों ने शासन में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में राजनेताओं की लूटी गई संपत्तियों की जांच की मांग की है। आंदोलनकारियों ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वाले सभी लोगों को आधिकारिक शहीद का दर्जा दिया जाएगा। उनके परिवारों को राजकीय सम्मान, पहचान और सहायता दी जाएगी। इसकी सबसे प्रमुख मांगों में देश के संविधान में संशोधन या इसे नए तरीके से लिखा जाना शामिल है।

नई राजनीतिक व्यवस्था की बात

आयोजकों ने बेरोजगारी से निपटने, पलायन पर अंकुश लगाने और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का भी वादा किया है। प्रदर्शनकारियों की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 'यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और राष्ट्र के भविष्य के लिए है। शांति आवश्यक है, लेकिन यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है।

नेपाल में प्रदर्शनकारियों का राष्ट्रपति-पीएम के घर में आगजनी, ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

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नेपाल में आक्रोश की आग भड़कती ही जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के आवास को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया है। वहीं इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सूचना एवं संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के आवास में भी आग लगा दी। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के घर के बाहर पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई। 

सड़कें युद्धक्षेत्र बनी

सोमवार को शुरू हुआ छात्रों का ये प्रदर्शन मंगलवार को पूरे देश में फैल गया है। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने बवाल मचा रखा है। शहर की सड़कें युद्धक्षेत्र जैसी नजर आ रही हैं। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने सीपीएन-एमसी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक सहित अन्य के आवास पर पथराव किया और आगजनी की। मकवानपुर में, हेटौडा और पूर्वी मनहारी बाज़ार में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर पूर्व-पश्चिम राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने अशांति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री का घर आग के हवाले

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के आवास को आग के हवाले दिया है। ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने उनके आवास को जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने बालकोट स्थित प्रधानमंत्री ओली के आवास में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह परिसर में घुसने और घर के कुछ हिस्सों में आग लगाने से पहले, घर में मौजूद सामानों को बाहर निकाल लिया था। आग फैलने पर आवास से धुएं का घना गुबार उठता देखा गया। वहीं, देश के ऊर्जा मंत्री और राष्ट्रपति के घर को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने "केपी चोर, देश छोड़" , "भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करो" जैसे नारे लगा रहे हैं। 

सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा

नेपाल में दो दिन से चल रहे बवाल के बाद सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। विकट होते हालात को देखते हुए सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा है। नेपाली आर्मी चीफ ने कहा है कि पीएम ओली अब गद्दी छोड़ देंष

नेपाल में कई जगहों पर लगा कर्फ्यू

काठमांडू में गृह मंत्रालय के अधीन तीन जिला प्रशासन कार्यालयों (डीएओ) ने अलग-अलग नोटिस जारी करके कई स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया, जिसमें शहर के प्रमुख एंट्री प्वाइंट शामिल हैं. काठमांडू डीएओ ने मंगलवार को राजधानी में अनिश्चितकाल तक के लिए कर्फ्यू लागू कर दिया, जिसमें लोगों को आवाजाही, प्रदर्शन, सभाएं या धरने पर रोक है. कर्फ्यू के दौरान जरूरी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन, शव वाहन, स्वास्थ्यकर्मियों, पत्रकारों, पर्यटक वाहनों, हवाई यात्रियों और मानवाधिकार व राजनयिक मिशनों के वाहनों की आवाजाही की अनुमति होगी.

केपी शर्मा ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

देश के बिगड़े हालात के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज शाम एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। मैं स्थिति का आकलन करने और एक सार्थक निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा हूं। इसके लिए, मैंने आज शाम 6 बजे एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। मैं सभी भाइयों और बहनों से विनम्र अनुरोध करता हूं कि इस कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें।

20 की मौत के बाद झुकी नेपाल की ओली सरकार, GEN-Z के आक्रोश के बाद सोशल मीडिया से हटा बैन

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नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बैन हटा लिया है। यह फैसला सोमवार को देश भर में युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए बाद लिया गया। नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन के खिलाफ हजारों Gen-Z युवाओं ने सोमवार को राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शन किया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल सरकार ने देर रात सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटा लिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बैन हटाने से इनकार किया था।

देर रात बेन हटाने की हुई घोषणा

GEN-Z प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। नेपाल के संचार, सूचना एवं प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने देर रात घोषणा की कि सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगान का फैसला वापस ले लिया गया है। एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री ने कहा, सरकार ने GEN-Z की मांग को रखते हुए सोशल मीडिया को खोलने का फैसला पहले ही कर लिया है।

पहले लिए गए फैसले पर सरकार को पछतावा नहीं

हालांकि, मंत्री ने कहा कि सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद करने को लेकर पहले लिए गए फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। गुरुंग ने कहा, 'इस मुद्दे को बहाने के तौर पर इस्तेमाल करके विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे, इसलिए सोशल मीडिया साइटों को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है।' गुरुंग ने जेन-जी प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील की।

नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक का इस्तीफा

इससे पहले सोमवार को नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ युवाओं न जोरदार प्रदर्शन का। विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने से 20 लोगों की मौत हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़पें हुईं। काठमांडो में प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर में घुस गए और तोड़फोड़ की। विरोध प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटाहारी और दमक तक फैल गया। हालात काबू में करने के लिए काठमांडो समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने के साथ सेना को तैनात करना पड़ा। बेकाबू हिंसा के बाद नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक को इस्तीफा दे दिया।

हिंसा की जांच के लिए कमेटी बनेगी

इसके साथ ही कैबिनेट ने हिंसा की जांच के लिए एक जांच समिति का भी गठन किया है। कमेटी को 15 दिनों में रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इन मौतों पर दुख जताया, साथ ही आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए थे। सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया को बंद करना नहीं, बल्कि नियंत्रित करना था।

नेपाल में बवाल, सोशल मीडिया पर रोक से भड़के युवा, संसद भवन में भी घुसे

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पड़ोसी देश नेपाल में विरोध की आग भड़क उठी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ नेपाल में युवाओं ने सोमवार को काठमांडू में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जेनरेशन जेड पीढ़ी के युवाओं ने सड़कों पर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। सोशल मीडिया बैन होने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। प्रदर्शनकारी गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश कर गए। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन चलाई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग भी की, इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई, 70 लोग घायल हैं।

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ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं की बगावत

नेपाल में ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं ने बगावत कर दी है। नेपाल में अचानक शुरू हुए इस भीषण प्रदर्शन के पीछे की वजह ओली सरकार का हालिया फैसला है। सरकार ने नियमों का हवाला देकर अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिए, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर भी शामिल हैं। इस फैसले के विरोध में राजधानी काठमांडू में हजारों छात्र-युवा, सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ भीषण प्रदर्शन कर रहे हैं। कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठिया भांजी हैं, जिसमें एक छात्र की अभी तक मौत की रिपोर्ट है।

'हामी नेपाल' के बैनर तले प्रदर्शन

बताया गया कि सोमवार सुबह 9 बजे से प्रदर्शनकारी काठमांडू के मैतीघर में एकत्रित होने लगे। हाल के दिनों में 'नेपो किड' और 'नेपो बेबीज' जैसे हैशटैग ऑनलाइन ट्रेंड कर रहे हैं। सरकार की ओर से अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने के फैसले के बाद इसमें और तेजी आई है। काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के अनुसार, 'हामी नेपाल' ने इस रैली का आयोजन किया था। इसके लिए पूर्व अनुमति ली गई थी।

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के खिलाफ भी गुस्सा

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की, इसलिए यह कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन छात्रों और युवा वर्ग का आरोप है कि यह फैसला उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। युवाओं का कहना है सरकार अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए उनके आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

चुनाव आयोग तक विपक्षी सांसदों के मार्च को पुलिस ने रोक, हिरासत में राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद

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बिहार एसआईआर और ‘वोट चोरी’ पर अब सियासत गरमा चुकी है. विपक्ष और चुनाव आयोग में ठन गई है। एसआईआर और वोट चोरी पर सड़क से संसद तक संग्राम है। बिहार में मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावों में कथित धांधली के खिलाफ ‘इंडिया’ ब्लॉक आज शक्ति प्रदर्शन कर रहा है।इस बीच सोमवार को संसद से लेकर चुनाव आयोग के भवन तक विपक्ष का मार्च तय था, लेकिन पुलिस ने इजाजत नहीं दी। विपक्षी सांसद के आगे बढ़ रहे मार्च को पुलिस ने रोका और राहुल गांधी समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया है।

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बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए परिवहन भवन में पुलिस बैरिकेड्स लगा दिए। यहां उन्हें चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया गया। पुलिस का कहना है कि विपक्षी सांसदों की ओर से इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा समेत कई सांसदों ने बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश। कुछ सांसद बैरिकेड्स कूदकर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सड़क से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

दरअसल, चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को पत्र लिखकर दोपहर 12.30 बजे मिलने के लिए बुलाया था। चुनाव आयोग ने उनसे 30 सांसदों के साथ आने को कहा था और आनले से पहले उन सांसदों की सूचना देने की बात कही थी। इसी के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों से कहा कि 30 लोग चुनाव आयोग के दफ्तर तक जा सकते हैं। इसके लिए पैदल या वाहन जैसे विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

जयराम रमेश ने कहा कि सिर्फ 30 नहीं पूरा विपक्ष चुनाव आयोग जाएगा। इस पर अखिलेश ने कहा कि जितने जाने दें हम चलने के लिए तैयार हैं। पुलिस जाने दे तो हम लोग चुनाव आयोग जाने के लिए तैयार हैं। पुलिस जाने नहीं दे रही है।

नहीं सुधरने वाला पाकिस्तान! लंदन में पाक अधिकारी की बेशर्मी, भारतीयों को किया गला काटने का इशारा

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पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में पूरे देश में उबाल है। इस आक्रोश का असर विदेशों में भी दिख रहा है। पहलगाम हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है, लेकिन इससे अगर किसी को फर्क नहीं पड़ता है तो वो है पाकिस्तान। वैश्विक मंच पर हो रही बेइज्जती के बाद भी पाकिस्तान ने बेशर्मी की हदें पार दी है। शुक्रवार को लंदन में बड़ी संख्या में भारतीय और भारतीय मूल के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी ने भारतीयों की तरफ आपत्तिजनक इशारा किया।

पाक अधिकारी की शर्मनाक हरकत

पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी कर्नल तैमूर राहत ने ऐसी शर्मनाक हरकत की कि हर तरफ इसकी आलोचना हो रही है। पाकिस्तानी अधिकारी ने भारतीयों की तरफ गला काटने का इशारा किया। इतना ही नहीं इस दौरान उसने अभिनंदन वर्धमान की चाय के साथ एक तस्वीर भी हाथ में ली हुई थी, जिसे वह बार-बार दिखा रहा था। उसकी इस बेशर्म हरकत को वहां मौजूद किसी शख्स ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। अब यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

भारतीयों के प्रदर्शन के दौरान तेज संगीत बजाया

एक तरफ पहलगाम में मासूम पर्यटकों की निर्मम हत्या से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में गम का माहौल है। वहीं लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग ने बेशर्मी की हद पार करते हुए भारतीयों के प्रदर्शन के दौरान तेज संगीत बजाया। ऐसा लगा कि पाकिस्तानी उच्चायोग पहलगाम हमले का जश्न मना रहा है। कई प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की इस हरकत पर नाराजगी भी जताई। भारतीयों के समर्थन में बड़ी संख्या में यहूदी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुआ हमला वैसा ही है, जैसे इस्राइल पर 7 अक्तूबर 2023 को हमला हुआ था। दोनों जगह निर्दोष नागरिकों को मारा गया।

लंदन में पहलगाम हमले के विरोध में प्रदर्शन

बता दें कि पहलगाम हमले के विरोध में ब्रिटिश हिंदुओं ने शुक्रवार को लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और प्लेकार्ड पकड़े हुए थे और प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे और पहलगाम पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और पाकिस्तान पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया।

ईरान में खामेनेई विरोधी आंदोलन के बीच भारतीय गिरफ्तार? जानें पूरा मामला

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ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं। प्रदर्शनों में हिंसा और मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी का कहना है कि ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 538 हो गई है। मारे गए लोगों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के सदस्य हैं। देशभर में अभी तक 10,670 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

छह भारतीयों को गिरफ्तारी का दावा

इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें दावा किया गया कि ईरान की पुलिस ने कई भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तेहरान सहित देशभर में फैले आंदोलन के बीच दावा किया गया था कि ईरानी पुलिस ने छह भारतीयों को गिरफ्तार किया है। पोस्ट में दावा किया गया कि ईरानी पुलिस ने 10 अफगान और 6 भारतीय नागरिकों सहित कुछ ईरानी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

ईरान ने दावों को किया खारिज

हालांकि ईरान ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत में ईरानी राजदूत ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही ईरानी राजदूत ने लोगों से जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है। एक्‍स पोस्‍ट में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथली ने कहा, 'कुछ विदेशी X खातों पर ईरान के घटनाक्रमों के बारे में जारी खबरें पूरी तरह से झूठी हैं। मैं सभी इच्छुक लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे विश्वसनीय स्रोतों से ही खबरें हासिल करें।

ईरानी सरकार ने नहीं बताई हताहतों की कुल संख्या

पूरे ईरान में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रदर्शन के मद्देनजर इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कटी होने के कारण प्रदर्शनों के जमीन पर असर और हिंसा में नुकसान अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों में हताहतों की कुल संख्या नहीं बताई है। ऐसे में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

दिल्ली में अमित शाह के दफ्तर के बाहर टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन, लिए गए हिरासत में, जानें पूरा मामला

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के बीच टकराव शुक्रवार को और बढ़ गया। कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी के बाद तृणमूल के आठ सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर धरना दिया। जिसके बाद पुलिस ने महुआ मोइत्रा सहित अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया है।

कोलकाता में कई ठिकानों पर गुरुवार को ईडी ने रेड मारी थी। इनमें से दो रेड IPAC कंपनी के खिलाफ भी थीं। यह कंपनी टीएमसी के चुनावी मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल रही है। इस रेड के बाद बंगाल का सियासी पारा चढ़ गया है, जिसका असर दिल्ली तक दिख रहा है। शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के 8 सांसदों ने दिल्ली में होम मिनिस्टर, अमित शाह के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन के लिए डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आजाद और डॉ. शर्मिला सरकार पहुंचे थे। सांसदों ने केंद्र सरकार पर चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और नारे लगाए। इस दौरान वहां पुलिस पहुंची और टीएमसी सांसदों को हिरासत में ले लिया। प्रोटेस्ट का जो वीडियो आया है, उसमें पुलिस, टीएमसी सांसदों को पकड़ती दिख रही है। उन्हें जबरन अपने साथ गाड़ी में बैठाती नजर आ रही है।

महुआ मोइत्रा ने जताई नाराजगी

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'हम भाजपा को हराएंगे, देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस एक चुने हुए सांसद के साथ कैसा बर्ताव कर रही है।' वहीं टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने कहा, 'अमित शाह ने ईडी के अधिकारियों का इस्तेमाल किया और वे हमारे राजनीतिक दस्तावेज छीनने के लिए वहां गए। वे (भाजपा) पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं जीत सकते, इसीलिए वे ऐसा घटिया काम कर रहे हैं।'

यह विवाद गुरुवार को शुरू हुआ था, जब ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े मामले में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और संगठन के कार्यालय पर छापे मारे। छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँचीं और एजेंसी पर तृणमूल से जुड़े अहम दस्तावेज ले जाने का आरोप लगाया।

फिर जल रहा ईरानः बवाल के बाद इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद, सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी

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ईरान में पिछले 12 दिनों से भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। ईरान में महंगाई और गिरती करेंसी को लेकर दो हफ्ते से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। गुरुवार की रात एक बार फिर ईरान धधक उठा। प्रदर्शन की आंच इतनी तेज हो गई कि खामेनेई सरकार सकते में आ गई। आनन-फानन में सरकार ने इंटरनेट और फोन लाइन्स काट दी।

रेजा पहलवी की अपील के बाद उग्र हुई भीड़

गुरुवार की रात प्रदर्शन और उग्र हो गए, जब ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की। रेजा पहलवी की अपील के बाद बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतरे। इसी बीच ईरानी सरकार ने सड़कें खाली कराने के लिए सुरक्षाबलों को उतार दिया है।

50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

सबसे खास बात ये है कि प्रदर्शनों के दौरान रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि अब तक यहां शाह के समर्थन में नारेबाजी करने पर मौत की सजा मिलती थी। बताया जा रहा है कि ईरान के कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर निकलकर ईरानी शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों पर 45 प्रदर्शनकारियों की हत्या का आरोप

ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होने के बाद से देश में सुरक्षाबलों ने 45 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार का दिन अब तक का सबसे बड़ा जानलेवा दिन रहा, जिसमें 13 प्रदर्शनकारी मारे गए। वहीं, सैकड़ों लोग घायल हुए। इसके अलावा, 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान की अर्थव्यवस्था संकट में

रअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। महंगाई से आवाम त्रस्त है। रियाल मुद्रा का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया। 28 दिसंबर 2025 को ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। ये विरोध प्रदर्शन पहले तेहरान बाजार की हड़ताल से चले, मगर जल्दी ही पूरे देश में फैल गए। सरकारी डेटा में 21 मौतें हुई हैं, मगर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसी ने 45 लोगों के मरने का दावा किया है। खामेनेई सरकार ने इसे विदेशी साजिश बता रही है, जबकि प्रदर्शनकारी महंगाई, भ्रष्टाचार और दमन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

संसद के दूसरे दिन भी सत्तापक्ष और विपक्ष का टकराव जारी, SIR पर फिर बवाल

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संसद में एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा जारी है। संसद के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। संसद परिसर में विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों ने आज भी एसआईआर के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा। विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग के साथ-साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में मकर द्वार पर एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन संसद परिसर में एसआईआर के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता प्रदर्शन में मौजूद दिखे।

संसद में व्यवधान पैदा करने की आवश्यकता नहीं- रिजिजू

वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, विपक्ष को ढूंढ-ढूंढकर कर मुद्दे लाने की आवश्यकता नहीं है। शीतकालीन सत्र में बहुत सारे मुद्दे हैं और कई मुद्दे विपक्ष ने भी उठाए हैं, हम उसपर आगे क्या करना है बातचीत करके विचार करेंगे। नए-नए मुद्दे ढूंढकर संसद में व्यवधान पैदा करने की आवश्यकता नहीं है। हर मुद्दा अपनी जगह पर महत्वपूर्ण है लेकिन मुद्दे को हथियार बनाकर संसद में गतिरोध करना ठीक नहीं है। आज हम विपक्ष के प्रमुख नेताओं से बात करेंगे।

संचार साथी एप को लेकर भड़का विपक्ष

इधर, मोबाइल हैंडसेट पर संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करने के संचार विभाग के निर्देशों पर भी विपक्ष ने आपत्ती जताई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, यह एक जासूसी ऐप है। नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है। हर किसी को परिवार, दोस्तों को मैसेज भेजने की प्राइवेसी का अधिकार होना चाहिए। वे इस देश को हर तरह से तानाशाही में बदल रहे हैं। संसद इसलिए काम नहीं कर रही है क्योंकि सरकार किसी भी चीज पर बात करने से मना कर रही है। विपक्ष पर इल्जाम लगाना बहुत आसान है। वे किसी भी चीज पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। एक स्वस्थ लोकतंत्र चर्चा की मांग करता है।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से भड़की सत्ता-विरोधी लहर, अब नए संविधान, प्रतिनिधि सभा भंग करने की उठी मांग

#nepalgenzprotestersdemandsnewconstitution

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नेपाल में जेनरेशन जेड (जेन-जी) आंदोलन अब बेकाबू होता जा रहा है। सोशल मीडिया बैन से भड़की युवा-नेतृत्व वाली लहर अब सत्ता-विरोधी सुनामी में बदल चुकी है। संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंहदरबार सचिवालय और कई नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इस बवाल के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अचानक इस्तीफा दे दिया। हालात इतने बिगड़े कि सेना को मंगलवार रात 10 बजे से राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेनी पड़ी। देशभर में कर्फ्यू लागू है और सीमाएं सील कर दी गई हैं। इस बीच जेन जी प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक और सामाजिक मांगें रखी हैं।

सेना ने ली देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी

नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद सेना ने सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। काठमांडू एयरपोर्ट और सरकार के मुख्य सचिवालय सिंहदरबार जैसे अहम ठिकानों पर सेना का नियंत्रण है. वहीं, देश की सीमाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। कर्फ्यू जारी है, हालांकि एंबुलेंस और शववाहन जैसी जरूरी सेवा से जुड़ी गाड़ियों को छूट दी गई है। सेना ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन, तोड़फोड़, लूट, आगजनी या किसी भी व्यक्ति और संपत्ति पर हमला अब दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सेना ने नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर

हालात को शांत करने के लिए नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर हैं। उन्होंने देर रात जेन जी आंदोलन के प्रतिनिधियों को सेना मुख्यालय बुलाकर उनसे बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। उन्होंने मौतों पर शोक जताते हुए युवाओं से संवाद के जरिए समाधान खोजने की अपील की। साथ ही उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा कठिन परिस्थिति को सामान्य करना, सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा करना और आम नागरिकों तथा राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सेना की पहली प्राथमिकता है।

देश के संविधान में संशोधन की मांग

इधर नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों ने शासन में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में राजनेताओं की लूटी गई संपत्तियों की जांच की मांग की है। आंदोलनकारियों ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वाले सभी लोगों को आधिकारिक शहीद का दर्जा दिया जाएगा। उनके परिवारों को राजकीय सम्मान, पहचान और सहायता दी जाएगी। इसकी सबसे प्रमुख मांगों में देश के संविधान में संशोधन या इसे नए तरीके से लिखा जाना शामिल है।

नई राजनीतिक व्यवस्था की बात

आयोजकों ने बेरोजगारी से निपटने, पलायन पर अंकुश लगाने और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का भी वादा किया है। प्रदर्शनकारियों की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 'यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और राष्ट्र के भविष्य के लिए है। शांति आवश्यक है, लेकिन यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है।

नेपाल में प्रदर्शनकारियों का राष्ट्रपति-पीएम के घर में आगजनी, ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

#nepalprotestersburntdownhousesofprimeministerand_president 

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नेपाल में आक्रोश की आग भड़कती ही जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के आवास को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया है। वहीं इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सूचना एवं संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के आवास में भी आग लगा दी। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के घर के बाहर पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई। 

सड़कें युद्धक्षेत्र बनी

सोमवार को शुरू हुआ छात्रों का ये प्रदर्शन मंगलवार को पूरे देश में फैल गया है। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने बवाल मचा रखा है। शहर की सड़कें युद्धक्षेत्र जैसी नजर आ रही हैं। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने सीपीएन-एमसी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक सहित अन्य के आवास पर पथराव किया और आगजनी की। मकवानपुर में, हेटौडा और पूर्वी मनहारी बाज़ार में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर पूर्व-पश्चिम राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने अशांति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री का घर आग के हवाले

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के आवास को आग के हवाले दिया है। ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने उनके आवास को जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने बालकोट स्थित प्रधानमंत्री ओली के आवास में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह परिसर में घुसने और घर के कुछ हिस्सों में आग लगाने से पहले, घर में मौजूद सामानों को बाहर निकाल लिया था। आग फैलने पर आवास से धुएं का घना गुबार उठता देखा गया। वहीं, देश के ऊर्जा मंत्री और राष्ट्रपति के घर को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने "केपी चोर, देश छोड़" , "भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करो" जैसे नारे लगा रहे हैं। 

सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा

नेपाल में दो दिन से चल रहे बवाल के बाद सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। विकट होते हालात को देखते हुए सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा है। नेपाली आर्मी चीफ ने कहा है कि पीएम ओली अब गद्दी छोड़ देंष

नेपाल में कई जगहों पर लगा कर्फ्यू

काठमांडू में गृह मंत्रालय के अधीन तीन जिला प्रशासन कार्यालयों (डीएओ) ने अलग-अलग नोटिस जारी करके कई स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया, जिसमें शहर के प्रमुख एंट्री प्वाइंट शामिल हैं. काठमांडू डीएओ ने मंगलवार को राजधानी में अनिश्चितकाल तक के लिए कर्फ्यू लागू कर दिया, जिसमें लोगों को आवाजाही, प्रदर्शन, सभाएं या धरने पर रोक है. कर्फ्यू के दौरान जरूरी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन, शव वाहन, स्वास्थ्यकर्मियों, पत्रकारों, पर्यटक वाहनों, हवाई यात्रियों और मानवाधिकार व राजनयिक मिशनों के वाहनों की आवाजाही की अनुमति होगी.

केपी शर्मा ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

देश के बिगड़े हालात के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज शाम एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। मैं स्थिति का आकलन करने और एक सार्थक निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा हूं। इसके लिए, मैंने आज शाम 6 बजे एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। मैं सभी भाइयों और बहनों से विनम्र अनुरोध करता हूं कि इस कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें।

20 की मौत के बाद झुकी नेपाल की ओली सरकार, GEN-Z के आक्रोश के बाद सोशल मीडिया से हटा बैन

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नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बैन हटा लिया है। यह फैसला सोमवार को देश भर में युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए बाद लिया गया। नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन के खिलाफ हजारों Gen-Z युवाओं ने सोमवार को राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शन किया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल सरकार ने देर रात सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटा लिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बैन हटाने से इनकार किया था।

देर रात बेन हटाने की हुई घोषणा

GEN-Z प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। नेपाल के संचार, सूचना एवं प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने देर रात घोषणा की कि सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगान का फैसला वापस ले लिया गया है। एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री ने कहा, सरकार ने GEN-Z की मांग को रखते हुए सोशल मीडिया को खोलने का फैसला पहले ही कर लिया है।

पहले लिए गए फैसले पर सरकार को पछतावा नहीं

हालांकि, मंत्री ने कहा कि सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद करने को लेकर पहले लिए गए फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। गुरुंग ने कहा, 'इस मुद्दे को बहाने के तौर पर इस्तेमाल करके विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे, इसलिए सोशल मीडिया साइटों को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है।' गुरुंग ने जेन-जी प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील की।

नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक का इस्तीफा

इससे पहले सोमवार को नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ युवाओं न जोरदार प्रदर्शन का। विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने से 20 लोगों की मौत हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़पें हुईं। काठमांडो में प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर में घुस गए और तोड़फोड़ की। विरोध प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटाहारी और दमक तक फैल गया। हालात काबू में करने के लिए काठमांडो समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने के साथ सेना को तैनात करना पड़ा। बेकाबू हिंसा के बाद नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक को इस्तीफा दे दिया।

हिंसा की जांच के लिए कमेटी बनेगी

इसके साथ ही कैबिनेट ने हिंसा की जांच के लिए एक जांच समिति का भी गठन किया है। कमेटी को 15 दिनों में रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इन मौतों पर दुख जताया, साथ ही आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए थे। सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया को बंद करना नहीं, बल्कि नियंत्रित करना था।

नेपाल में बवाल, सोशल मीडिया पर रोक से भड़के युवा, संसद भवन में भी घुसे

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पड़ोसी देश नेपाल में विरोध की आग भड़क उठी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ नेपाल में युवाओं ने सोमवार को काठमांडू में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जेनरेशन जेड पीढ़ी के युवाओं ने सड़कों पर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। सोशल मीडिया बैन होने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। प्रदर्शनकारी गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश कर गए। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन चलाई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग भी की, इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई, 70 लोग घायल हैं।

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ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं की बगावत

नेपाल में ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं ने बगावत कर दी है। नेपाल में अचानक शुरू हुए इस भीषण प्रदर्शन के पीछे की वजह ओली सरकार का हालिया फैसला है। सरकार ने नियमों का हवाला देकर अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिए, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर भी शामिल हैं। इस फैसले के विरोध में राजधानी काठमांडू में हजारों छात्र-युवा, सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ भीषण प्रदर्शन कर रहे हैं। कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठिया भांजी हैं, जिसमें एक छात्र की अभी तक मौत की रिपोर्ट है।

'हामी नेपाल' के बैनर तले प्रदर्शन

बताया गया कि सोमवार सुबह 9 बजे से प्रदर्शनकारी काठमांडू के मैतीघर में एकत्रित होने लगे। हाल के दिनों में 'नेपो किड' और 'नेपो बेबीज' जैसे हैशटैग ऑनलाइन ट्रेंड कर रहे हैं। सरकार की ओर से अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने के फैसले के बाद इसमें और तेजी आई है। काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के अनुसार, 'हामी नेपाल' ने इस रैली का आयोजन किया था। इसके लिए पूर्व अनुमति ली गई थी।

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के खिलाफ भी गुस्सा

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की, इसलिए यह कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन छात्रों और युवा वर्ग का आरोप है कि यह फैसला उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। युवाओं का कहना है सरकार अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए उनके आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

चुनाव आयोग तक विपक्षी सांसदों के मार्च को पुलिस ने रोक, हिरासत में राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद

#sir_india_alliance_protest

बिहार एसआईआर और ‘वोट चोरी’ पर अब सियासत गरमा चुकी है. विपक्ष और चुनाव आयोग में ठन गई है। एसआईआर और वोट चोरी पर सड़क से संसद तक संग्राम है। बिहार में मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावों में कथित धांधली के खिलाफ ‘इंडिया’ ब्लॉक आज शक्ति प्रदर्शन कर रहा है।इस बीच सोमवार को संसद से लेकर चुनाव आयोग के भवन तक विपक्ष का मार्च तय था, लेकिन पुलिस ने इजाजत नहीं दी। विपक्षी सांसद के आगे बढ़ रहे मार्च को पुलिस ने रोका और राहुल गांधी समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया है।

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बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए परिवहन भवन में पुलिस बैरिकेड्स लगा दिए। यहां उन्हें चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया गया। पुलिस का कहना है कि विपक्षी सांसदों की ओर से इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा समेत कई सांसदों ने बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश। कुछ सांसद बैरिकेड्स कूदकर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सड़क से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

दरअसल, चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को पत्र लिखकर दोपहर 12.30 बजे मिलने के लिए बुलाया था। चुनाव आयोग ने उनसे 30 सांसदों के साथ आने को कहा था और आनले से पहले उन सांसदों की सूचना देने की बात कही थी। इसी के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों से कहा कि 30 लोग चुनाव आयोग के दफ्तर तक जा सकते हैं। इसके लिए पैदल या वाहन जैसे विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

जयराम रमेश ने कहा कि सिर्फ 30 नहीं पूरा विपक्ष चुनाव आयोग जाएगा। इस पर अखिलेश ने कहा कि जितने जाने दें हम चलने के लिए तैयार हैं। पुलिस जाने दे तो हम लोग चुनाव आयोग जाने के लिए तैयार हैं। पुलिस जाने नहीं दे रही है।

नहीं सुधरने वाला पाकिस्तान! लंदन में पाक अधिकारी की बेशर्मी, भारतीयों को किया गला काटने का इशारा

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पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में पूरे देश में उबाल है। इस आक्रोश का असर विदेशों में भी दिख रहा है। पहलगाम हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है, लेकिन इससे अगर किसी को फर्क नहीं पड़ता है तो वो है पाकिस्तान। वैश्विक मंच पर हो रही बेइज्जती के बाद भी पाकिस्तान ने बेशर्मी की हदें पार दी है। शुक्रवार को लंदन में बड़ी संख्या में भारतीय और भारतीय मूल के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी ने भारतीयों की तरफ आपत्तिजनक इशारा किया।

पाक अधिकारी की शर्मनाक हरकत

पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी कर्नल तैमूर राहत ने ऐसी शर्मनाक हरकत की कि हर तरफ इसकी आलोचना हो रही है। पाकिस्तानी अधिकारी ने भारतीयों की तरफ गला काटने का इशारा किया। इतना ही नहीं इस दौरान उसने अभिनंदन वर्धमान की चाय के साथ एक तस्वीर भी हाथ में ली हुई थी, जिसे वह बार-बार दिखा रहा था। उसकी इस बेशर्म हरकत को वहां मौजूद किसी शख्स ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। अब यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

भारतीयों के प्रदर्शन के दौरान तेज संगीत बजाया

एक तरफ पहलगाम में मासूम पर्यटकों की निर्मम हत्या से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में गम का माहौल है। वहीं लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग ने बेशर्मी की हद पार करते हुए भारतीयों के प्रदर्शन के दौरान तेज संगीत बजाया। ऐसा लगा कि पाकिस्तानी उच्चायोग पहलगाम हमले का जश्न मना रहा है। कई प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की इस हरकत पर नाराजगी भी जताई। भारतीयों के समर्थन में बड़ी संख्या में यहूदी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुआ हमला वैसा ही है, जैसे इस्राइल पर 7 अक्तूबर 2023 को हमला हुआ था। दोनों जगह निर्दोष नागरिकों को मारा गया।

लंदन में पहलगाम हमले के विरोध में प्रदर्शन

बता दें कि पहलगाम हमले के विरोध में ब्रिटिश हिंदुओं ने शुक्रवार को लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और प्लेकार्ड पकड़े हुए थे और प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे और पहलगाम पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और पाकिस्तान पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया।