आज जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, बढ़ाई गई सुरक्षा

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने गांधी जयंती के मौके पर जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। जंतर मंतर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज जंतर मंतर पर प्रदर्शन होना है। सीजेपी के साथ ही AISA, SFI और DYFI से जुड़े छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन बुलाया है। पुलिस सूत्रों ने अनुमान जताया है कि प्रदर्शन में करीब 3,000 से 4,000 लोग जुट सकते हैं। इस प्रदर्शन का सीधा फोकस एसआईआर और चुनावी मतदाता सूचियों को लेकर उठ रहे सवालों पर है। आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी लोगों से सुबह 10 बजे जंतर मंतर पहुंचने की अपील की है।

छात्र संगठन निकालेंगे मार्च

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर तक मार्च निकालेंगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। संगठन के एक सदस्य ने बताया कि प्रस्तावित मार्च के लिए दोनों संगठनों को अनुमति नहीं मिली है। इसके बावजूद वे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर की ओर बढ़ेंगे। मार्च में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

पुलिस के साथ सीएपीएफ भी तैनात

इस दौरान किसी भी संभावित भीड़ से निपटने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को भी तैनात किया गया है। जंतर मंतर को चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। आसपास के मेट्रो स्टेशन पर भी जवानों को तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से भी पूरे नई दिल्ली इलाके में नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरे से भी लगातार निगरानी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की कोशिश होगी कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर आने से पहले ही रोक लिया जाए।

11 मेट्रो स्टेशन बंद

जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने शुक्रवार को 11 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। डीएमारसी के मुताबिक, अगले आदेश तक जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट बंद रहेगी. हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार

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*नई दिल्ली:* नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई लताड़*

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नई दिल्ली: नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।

कौन है निशु आजाद जिसके पिता को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी सीजेपी, संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन

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कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर सड़क पर उतरी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जून को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए निशु आजाद के पिता को न्याय दिलाने के लिए सीजेपी संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए गाजियाबाद के संजय कुमार (38) की बेटी निशु ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर निशु का एक वीडियो आया है, जिसमें वह कह रही हैं कि अब दिल्ली पुलिस से उनकी आशा और उम्मीद टूटने लगी है।

वीडियो आने के बाद बवाल बढ़ा

निशु का वीडियो आने के बाद इसे लेकर बवाल बढ़ गया है। निशु वीडियो में कह रही हैं कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह साफ कह रहा कि उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होना चाहिए था। निशु ने कहा कि जब मेरे पापा का सिर फोड़ा था। तब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है। निशु ने अपना वीडियो राहुल गांधी को भी टैग किया है। उनका कहना है कि अब पुलिस से उम्मीद नहीं है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कानून का डर नहीं है। अब मुझे बस राहुल गांधी से उम्मीद है।

सौरव दास का थाने के सामने धरना-प्रदर्शन

निशु दिल्ली पुलिस से एक्शन की मांग कर रही हैं। साथ ही वह स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही हैं। इसे लेकर आज संसद थाने के बाहर काफी गहमागहमी है। निशु मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और कुछ लोग पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे हैं। थाने के सामने सड़क पर बैठ गए हैं।

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थक के पिता पर हुए हमले में कार्रवाई न करने की बात कही। रांका के अनुसार, सौरभ और उनके पूरे दल ने दिल्ली पुलिस से हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। उन्होंने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की भी मांग की थी। हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। आज, घटना में शामिल लोग खुले तौर पर संजय पर हमला करने की बात स्वीकार कर रहे हैं। वे यह भी मान रहे हैं कि उन्होंने संजय को जान से मारने का प्रयास किया था। इसके बावजूद, दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर कोई कदम नहीं उठाया है। यह आरोप कपिल मिश्रा और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रभाव में कार्रवाई न करने का है।

स्वतंत्र भारद्वाज के वीडियो में क्या?

इस बीच कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि उसने सीजेपी के एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, उसे 60 टांके लगे थे और उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह मौत के करीब पहुंच गया था। वह यह भी कहता है कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। वीडियो में उसने आगे कहा 'मैं अगले दिन ही पुलिस हिरासत से बाहर आ गया। मुझे जेल भी नहीं जाना पड़ा। मैंने पुलिस को यह कहते सुना कि कपिल मिश्रा का फोन आया था। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।

झारखंड में छात्रों का आंदोलन खत्म, सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम, जांच नहीं होने पर फिर होगा जुटान

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झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। सरकार की ओर से छात्रों की लगभग सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 25 जुलाई से जारी आंदोलन खत्म हो गया।

सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। इससे एक दिन पहले सोमवार देर शाम देवेंद्रनाथ गुट ने भी अपना आंदोलन खत्म कर दिया था। अब छात्रों ने राज्य सरकार को मामले की उच्चस्तरीय जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। मंच ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हुई, तो छात्र फिर बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और इस बार सीबीआई जांच उनकी मुख्य मांग होगी।

जांच पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल खत्म करने का फैसला लिया गया। छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं, इसलिए उसे मामले की जांच पूरी करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि सरकार को दो महीने के भीतर जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो मंच दोबारा बड़ी संख्या में छात्रों को एकजुट करेगा और राजधानी रांची में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उस समय सीबीआई जांच की मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा होगी।

25 जुलाई से धरने पर बैठे थे छात्र

बता दें कि छात्र पिछले 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा था। लगातार कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला और सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।

रांची में जारी छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, बोले- खुद जाकर मिलिए

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आंदोलनरत छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी चिंताओं का समाधान निकालने की अपील की है।

प्रदर्शनकारी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने की सलाह

राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सोरेन को लिखे पत्र में कहा कि झारखंड में छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध शांतिपूर्ण है और मांगें जायज हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजे पत्र में कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि संविधान में दिया गया शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र के मुख्य स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कांग्रेस ने अपना पूरा समर्थन दिया है।

राहुल गांधी की सीएम हेमंत सोरेन से खास अपील

राहुल गांधी ने आगे कहा कि कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं; मेरी सलाह है कि आप प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। विरोध कर रहे छात्रों की बात सुनने और समस्या के समाधान के लिए कृपया उचित कदम उठाने की पूरी कोशिश करें। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की मुलाकात से छात्रों को भरोसा मिलेगा। उनकी बाकी मांगों का हल निकालने में भी मदद मिलेगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा उसका भविष्य हैं। ऐसे समय में उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

झारखंड सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच वार्ता आज, फैसला नहीं होने पर 20 अगस्त को सीएम आवास का घेराव

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी छात्रों ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई है। इसी बीच राज्य सरकार ने छात्रों से बातचीत की पहल की है।

सरकार ने बातचीत के लिए फिर भेजा न्योता

राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों को सोमवार को फिर से बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। प्रशासन के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उन्हें सरकार के साथ बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक आज 17 अगस्त को दोपहर 2 बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में प्रस्तावित की गई है। सरकार की ओर से उच्चस्तरीय मंत्रियों के समूह के बैठक में शामिल होने की बात सामने आई है। छात्रों को बातचीत के दौरान अपने कानूनी सलाहकारों को साथ रखने का विकल्प भी दिया गया है।

पहले भी हो चुकी है कई दौर की बातचीत

इस विवाद को लेकर सरकार और छात्रों के बीच पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। रिपोर्टों के मुताबिक छह दौर की बातचीत के बाद भी छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जरूरत पड़ने पर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग शामिल है।

20 अगस्त को सीएम आवास घेराव की चेतावनी

इधर, छात्र नेताओं ने कहा है कि यदि 18 अगस्त तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जाएगा। इससे पहले 10 अगस्त को विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी। उस घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की खबर सामने आई थी।

झारखंड विधानसभा घेराव पर बड़ा एक्शन, 600 लोगों पर एफआईआर, 100 को किया गया नामजद

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झारखंड में परिक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इसी दौरान हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने झारखंड विधानसभा घेराव किया था। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल करीब 100 लोगों को नामजद करते हुए 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी और हंगामा किया था। पुलिस ने बैरीकेडिंग तोड़ने, हंगामा करने, पुलिस पर हमला करने सहित कई बिंदुओं पर मामला दर्ज किया है। विधानसभा थाना में दर्ज प्राथमिकी में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

आरोपियों की पहचान करने में जुटी पुलिस

पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आगे और लोगों के नाम जोड़े जा सकते हैं। वहीं, छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच पीएम मोदी ने सीएम हेमंत सोरेन को दी बधाई, जानें क्या लिखा

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झारखंड में इन दिनों छात्रों का प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शन के बीच आज राज्यभर से हजारों की संख्या में आए छात्र विधानसभा का घेराव कर रहे हैं। छात्र प्रदर्शन के बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है।

हेमंत सोरेन को दी बधाई

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा- झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।

रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू

इधर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू हो गया है। पुराने विधानसभा मैदान से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च के दौरान छात्र पहले बैरियर तक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों ने पहला बैरियर तोड़ दिया। छात्रों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है।

25 जुलाई है जारी है धरना-प्रदर्शन

बता दें कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्र अब सरकार के साथ आर-पार के मूड में हैं। सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बार बातचीत का दौर चल चुका है, हालांकि दोनों के बीच हुई चर्चा बेनतीजा निकली है। दरअसल, छात्र अनियमितताओं के खिलाफ CBI जांच की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर छात्र अड़ गए हैं।

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।

आज जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, बढ़ाई गई सुरक्षा

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने गांधी जयंती के मौके पर जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। जंतर मंतर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज जंतर मंतर पर प्रदर्शन होना है। सीजेपी के साथ ही AISA, SFI और DYFI से जुड़े छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन बुलाया है। पुलिस सूत्रों ने अनुमान जताया है कि प्रदर्शन में करीब 3,000 से 4,000 लोग जुट सकते हैं। इस प्रदर्शन का सीधा फोकस एसआईआर और चुनावी मतदाता सूचियों को लेकर उठ रहे सवालों पर है। आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी लोगों से सुबह 10 बजे जंतर मंतर पहुंचने की अपील की है।

छात्र संगठन निकालेंगे मार्च

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर तक मार्च निकालेंगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। संगठन के एक सदस्य ने बताया कि प्रस्तावित मार्च के लिए दोनों संगठनों को अनुमति नहीं मिली है। इसके बावजूद वे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर की ओर बढ़ेंगे। मार्च में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

पुलिस के साथ सीएपीएफ भी तैनात

इस दौरान किसी भी संभावित भीड़ से निपटने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को भी तैनात किया गया है। जंतर मंतर को चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। आसपास के मेट्रो स्टेशन पर भी जवानों को तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से भी पूरे नई दिल्ली इलाके में नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरे से भी लगातार निगरानी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की कोशिश होगी कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर आने से पहले ही रोक लिया जाए।

11 मेट्रो स्टेशन बंद

जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने शुक्रवार को 11 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। डीएमारसी के मुताबिक, अगले आदेश तक जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट बंद रहेगी. हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार

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*नई दिल्ली:* नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद नोएडा प्रशासन फिर निशाने पर, CJI सूर्यकांत ने लगाई लताड़*

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नई दिल्ली: नोएडा जिला प्रशासन एक बार फिर अदालत के निशाने पर है। आकृति चौधरी केस के बाद अब अक्षत त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई है।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। 20 साल के छात्र पर आरोप था कि उसने यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों को CJP द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। साथ ही उस पर 'सरकार विरोधी और भ्रामक' बातें फैलाने और अशांति भड़काने का भी आरोप लगाया गया।

इसी आरोप के आधार पर 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 130 के तहत उसे शोकॉज नोटिस जारी किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कैसे, किस हिम्मत से, कोई मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी कर सकता है!'

बताया जा रहा है कि सिविल सुरक्षा कानून की धारा 130 के तहत छात्र के खिलाफ जारी किया गया नोटिस अब वापस ले लिया गया है।

कौन है निशु आजाद जिसके पिता को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी सीजेपी, संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन

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कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर सड़क पर उतरी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जून को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए निशु आजाद के पिता को न्याय दिलाने के लिए सीजेपी संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए गाजियाबाद के संजय कुमार (38) की बेटी निशु ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर निशु का एक वीडियो आया है, जिसमें वह कह रही हैं कि अब दिल्ली पुलिस से उनकी आशा और उम्मीद टूटने लगी है।

वीडियो आने के बाद बवाल बढ़ा

निशु का वीडियो आने के बाद इसे लेकर बवाल बढ़ गया है। निशु वीडियो में कह रही हैं कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह साफ कह रहा कि उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होना चाहिए था। निशु ने कहा कि जब मेरे पापा का सिर फोड़ा था। तब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है। निशु ने अपना वीडियो राहुल गांधी को भी टैग किया है। उनका कहना है कि अब पुलिस से उम्मीद नहीं है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कानून का डर नहीं है। अब मुझे बस राहुल गांधी से उम्मीद है।

सौरव दास का थाने के सामने धरना-प्रदर्शन

निशु दिल्ली पुलिस से एक्शन की मांग कर रही हैं। साथ ही वह स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही हैं। इसे लेकर आज संसद थाने के बाहर काफी गहमागहमी है। निशु मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और कुछ लोग पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे हैं। थाने के सामने सड़क पर बैठ गए हैं।

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थक के पिता पर हुए हमले में कार्रवाई न करने की बात कही। रांका के अनुसार, सौरभ और उनके पूरे दल ने दिल्ली पुलिस से हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। उन्होंने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की भी मांग की थी। हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। आज, घटना में शामिल लोग खुले तौर पर संजय पर हमला करने की बात स्वीकार कर रहे हैं। वे यह भी मान रहे हैं कि उन्होंने संजय को जान से मारने का प्रयास किया था। इसके बावजूद, दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर कोई कदम नहीं उठाया है। यह आरोप कपिल मिश्रा और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रभाव में कार्रवाई न करने का है।

स्वतंत्र भारद्वाज के वीडियो में क्या?

इस बीच कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि उसने सीजेपी के एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, उसे 60 टांके लगे थे और उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह मौत के करीब पहुंच गया था। वह यह भी कहता है कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। वीडियो में उसने आगे कहा 'मैं अगले दिन ही पुलिस हिरासत से बाहर आ गया। मुझे जेल भी नहीं जाना पड़ा। मैंने पुलिस को यह कहते सुना कि कपिल मिश्रा का फोन आया था। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।

झारखंड में छात्रों का आंदोलन खत्म, सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम, जांच नहीं होने पर फिर होगा जुटान

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झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। सरकार की ओर से छात्रों की लगभग सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 25 जुलाई से जारी आंदोलन खत्म हो गया।

सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। इससे एक दिन पहले सोमवार देर शाम देवेंद्रनाथ गुट ने भी अपना आंदोलन खत्म कर दिया था। अब छात्रों ने राज्य सरकार को मामले की उच्चस्तरीय जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। मंच ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हुई, तो छात्र फिर बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और इस बार सीबीआई जांच उनकी मुख्य मांग होगी।

जांच पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल खत्म करने का फैसला लिया गया। छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं, इसलिए उसे मामले की जांच पूरी करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि सरकार को दो महीने के भीतर जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो मंच दोबारा बड़ी संख्या में छात्रों को एकजुट करेगा और राजधानी रांची में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उस समय सीबीआई जांच की मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा होगी।

25 जुलाई से धरने पर बैठे थे छात्र

बता दें कि छात्र पिछले 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा था। लगातार कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला और सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।

रांची में जारी छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, बोले- खुद जाकर मिलिए

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आंदोलनरत छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी चिंताओं का समाधान निकालने की अपील की है।

प्रदर्शनकारी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने की सलाह

राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सोरेन को लिखे पत्र में कहा कि झारखंड में छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध शांतिपूर्ण है और मांगें जायज हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजे पत्र में कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि संविधान में दिया गया शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र के मुख्य स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कांग्रेस ने अपना पूरा समर्थन दिया है।

राहुल गांधी की सीएम हेमंत सोरेन से खास अपील

राहुल गांधी ने आगे कहा कि कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं; मेरी सलाह है कि आप प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। विरोध कर रहे छात्रों की बात सुनने और समस्या के समाधान के लिए कृपया उचित कदम उठाने की पूरी कोशिश करें। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की मुलाकात से छात्रों को भरोसा मिलेगा। उनकी बाकी मांगों का हल निकालने में भी मदद मिलेगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा उसका भविष्य हैं। ऐसे समय में उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

झारखंड सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच वार्ता आज, फैसला नहीं होने पर 20 अगस्त को सीएम आवास का घेराव

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी छात्रों ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई है। इसी बीच राज्य सरकार ने छात्रों से बातचीत की पहल की है।

सरकार ने बातचीत के लिए फिर भेजा न्योता

राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों को सोमवार को फिर से बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। प्रशासन के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उन्हें सरकार के साथ बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक आज 17 अगस्त को दोपहर 2 बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में प्रस्तावित की गई है। सरकार की ओर से उच्चस्तरीय मंत्रियों के समूह के बैठक में शामिल होने की बात सामने आई है। छात्रों को बातचीत के दौरान अपने कानूनी सलाहकारों को साथ रखने का विकल्प भी दिया गया है।

पहले भी हो चुकी है कई दौर की बातचीत

इस विवाद को लेकर सरकार और छात्रों के बीच पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। रिपोर्टों के मुताबिक छह दौर की बातचीत के बाद भी छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जरूरत पड़ने पर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग शामिल है।

20 अगस्त को सीएम आवास घेराव की चेतावनी

इधर, छात्र नेताओं ने कहा है कि यदि 18 अगस्त तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जाएगा। इससे पहले 10 अगस्त को विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी। उस घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की खबर सामने आई थी।

झारखंड विधानसभा घेराव पर बड़ा एक्शन, 600 लोगों पर एफआईआर, 100 को किया गया नामजद

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झारखंड में परिक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इसी दौरान हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने झारखंड विधानसभा घेराव किया था। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल करीब 100 लोगों को नामजद करते हुए 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी और हंगामा किया था। पुलिस ने बैरीकेडिंग तोड़ने, हंगामा करने, पुलिस पर हमला करने सहित कई बिंदुओं पर मामला दर्ज किया है। विधानसभा थाना में दर्ज प्राथमिकी में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

आरोपियों की पहचान करने में जुटी पुलिस

पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आगे और लोगों के नाम जोड़े जा सकते हैं। वहीं, छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच पीएम मोदी ने सीएम हेमंत सोरेन को दी बधाई, जानें क्या लिखा

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झारखंड में इन दिनों छात्रों का प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शन के बीच आज राज्यभर से हजारों की संख्या में आए छात्र विधानसभा का घेराव कर रहे हैं। छात्र प्रदर्शन के बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है।

हेमंत सोरेन को दी बधाई

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा- झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।

रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू

इधर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू हो गया है। पुराने विधानसभा मैदान से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च के दौरान छात्र पहले बैरियर तक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों ने पहला बैरियर तोड़ दिया। छात्रों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है।

25 जुलाई है जारी है धरना-प्रदर्शन

बता दें कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्र अब सरकार के साथ आर-पार के मूड में हैं। सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बार बातचीत का दौर चल चुका है, हालांकि दोनों के बीच हुई चर्चा बेनतीजा निकली है। दरअसल, छात्र अनियमितताओं के खिलाफ CBI जांच की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर छात्र अड़ गए हैं।

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।