अश्लील गानों पर रोक लगाने के लिए आगे आए समाज, घर के बुजुर्ग जब नाच देखेंगे तो उनके बच्चे बलात्कारी ही बनेंगे : डीजीपी
डेस्क : आज मंगलवार को बिहार पुलिस मुख्यालय में महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं सम्मान विषय पर संवादात्मक सत्र 'उड़ान' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार पुलिस के महानिदेशक विनय कुमार, अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ, कमजोर वर्ग, सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक अमित जैन, गृह विभाग की एडीजी/विशेष सचिव केएस अनुपम, विशेष शाखा की डीआईजी हरप्रीत कौर तथा कमजोर वर्ग, सीआईडी के पुलिस अधीक्षक आमिर जावेद सहित कई वरीय अधिकारी सहित सैकड़ों महिला पुलिसकर्मी मौजूद रही। इस अवसर सभी ने महिला सशक्तिकरण पर अपनी बात रखी।
वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार पुलिस के महानिदेशक विनय कुमार ने कहा कि अश्लीलता किसी भी रूप में क्षम्य नहीं है, सबको मिलकर आगे आना होगा. तिलक जैसे कार्यक्रम में वल्गर गाने पर नाच हो रहा है, ऐसा इसलिए होता है कि उस क्षेत्र के लोग सुनना चाहते हैं। महिलाएं अगर घर से बाहर निकलकर ऐसे गाने बजाने पर रोक लगाने की बात करें, तो सब बंद हो जाएंगे।
उन्होंने अश्लील गानों पर रोक के लिए सामाजिक पहल को जरूरी बताते हुए कहा कि कहीं स्टेज पर डांस हो रहा है और कोई महिला के गाल पर नोट साट रहा है, ऐसी घटनाएं किसी भी रूप में क्षम्य नहीं है। ऐसी कृत्य पर तो महिलाओं को खुद ही आवाज उठानी चाहिए। अब घर के बूढ़े जब नाच देखेंगे तो उनके बच्चे बलात्कारी बनेंगे ही, इसलिए सबसे जरूरी है सबकी सोच को सही करना है। हाल के दिनों में मेरे पास कई महिलाओं के ऐसे कॉल आए हैं कि मुझे डांस या किसी कार्यक्रम के लिए बुलाया गया है, पर यहां असहज हूं, इसलिए मुझे यहां से निकाला जाए।
डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि जब वर्ष 2007-08 में राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए साइकिल योजना शुरू हुई थी, उस वक्त थानों के द्वारा भी बच्चों को स्कूल जाने लिए प्रोत्साहित किया जाता था, पुलिस के इस सहयोग के कारण स्कूल में उपस्थिति बढ़ी थी। उस दौरान सुरक्षा की भावना के आते ही ग्रामीण परिवेश का पूरा माहौल बदल गया था। उसके बाद हर साल महिलाओं को लेकर सरकार द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में बिहार में कानून व्यवस्था अच्छे से कायम है। राज्य के हर जिले में एक महिला थाना कार्यरत है, ऐसा देश में किसी अन्य राज्य में नहीं है। हमारे यहां महिला पुलिस स्टेशन को महिला अधिकारी लीड कर रही हैं। पहले जहां महिलाएं थाने जाने से डरती थीं, अब महिला थाने खुलने से या महिला पुलिसकर्मी की भागीदारी से वे बेख़ौफ़ जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराती हैं।
Mar 18 2025, 18:53