मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवादों पर जताई चिंता, बोले-ऐसे आप हिंदुओं के नेता नहीं बन जाएंगे

#rsschiefmohanbhagwatinbetweenmandirmasjidvivad

Image 2Image 3

काशी, मथुरा में मंदिर मस्जिद का विवाद जहां अदालतों में लंबित में है वहीं संभल का प्रकरण सुर्खियों में बना हुआ है। इस बीच ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां धार्मिक ढांचों को लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवादों के फिर से उठने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोग यह मानने लगे हैं कि वे इस तरह के मुद्दों को उठाकर 'हिंदुओं के नेता' बन सकते हैं।

पुणे में हिंदू सेवा महोत्सव के उद्घाटन के मौके पर ‘भारत-विश्वगुरु’ विषय पर बोलते हुए आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोगों को ऐसा लग रहा है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर ‘हिंदुओं के नेता’ बन सकते हैं। संघ प्रमुख ने समावेशी समाज की वकालत करते हुए कहा कि दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि देश सद्भावना के साथ एक साथ रह सकता है।

भारतीय समाज की बहुलता को रेखांकित करते हुए भागवत ने कहा कि रामकृष्ण मिशन में क्रिसमस मनाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘केवल हम ही ऐसा कर सकते हैं क्योंकि हम हिंदू हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम लंबे समय से सद्भावना से रह रहे हैं। अगर हम दुनिया को यह सद्भावना प्रदान करना चाहते हैं, तो हमें इसका एक मॉडल बनाने की जरूरत है। राम मंदिर के निर्माण के बाद, कुछ लोगों को लगता है कि वे नयी जगहों पर इसी तरह के मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं। यह स्वीकार्य नहीं है।’’

राम मंदिर का निर्माण हिंदुओं की आस्था का विषय-भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण इसलिए किया गया क्योंकि यह सभी हिंदुओं की आस्था का विषय था। उन्होंने किसी विशेष स्थल का उल्लेख किए बिना कहा, ‘‘हर दिन एक नया मामला (विवाद) उठाया जा रहा है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है? यह जारी नहीं रह सकता। भारत को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक साथ रह सकते हैं।’’ हाल के दिनों में मंदिरों का पता लगाने के लिए मस्जिदों के सर्वेक्षण की कई मांगें अदालतों तक पहुंची हैं, हालांकि भागवत ने अपने व्याख्यान में किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बाहर से आए कुछ समूह अपने साथ कट्टरता लेकर आए और वे चाहते हैं कि उनका पुराना शासन वापस आ जाए।

कट्टरता सही नहीं- भागवत

हाल के दिनों में मंदिरों का पता लगाने के लिए मस्जिदों के सर्वेक्षण की कई मांगें अदालतों में पहुंची हैं, हालांकि भागवत ने अपने व्याख्यान में किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बाहर से आए कुछ समूह अपने साथ कट्टरता लेकर आए हैं और वे चाहते हैं कि उनका पुराना शासन वापस आए

दिल्ली में फिर स्कूल को बम से उड़ाने की मिली धमकी, पुलिस के लिए बनी चुनौती

#delhischoolbombthreatmail

दिल्ली सहित देशभर में लगातार स्कूलों, अस्पतालों और एयरपोर्ट को उड़ाने की धमकियां में मिल रहा है। लगातार जारी इस तरह की हरकत के बीच शुक्रवार को तड़के भी दिल्ली के स्कूल को धमकी भरा मेल आया है। मेल में स्कूल तो बम से उड़ाने की धमकी मिली है। शुक्रवार तड़के 5.02 बजे द्वारका सेक्टर तीन स्थित डीपीएस स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम तुरंत मौके पर पहुंची। खबर मिलते हीं अलर्ट मिलने पर, अधिकारियों ने तुरंत पुलिस कर्मियों, दमकल टीमों और बम निरोधक दस्तों को खतरे वाले स्थानों पर भेजकर कार्रवाई की गई. हालांकि, जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है।

Image 2Image 3

स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के पेरेंट्स को इन्फॉर्म किया है कि सभी बच्चों की क्लास ऑनलाइन होगी. पुलिस को अभी तक स्कूल से कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है. पुलिस और दमकल विभाग के साथ फायर बिग्रेड, एंबुलेंस, बम स्क्वाड और डॉग स्क्वाड की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं. सभी टीमें स्कूल का चप्पा-चप्पा खंगाल रही हैं. पुलिस एक टीम मेल भेजने वाले आरोपियों का पता लगाने में जुट गई है।

लगातार मिल रही धमकियां

9 दिसंबर को दिल्ली के 44 स्कूलों को इसी तरह के ईमेल मिले थे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने सभी स्कूलों में सर्च अभियान चलाया था। हालांकि, पुलिस को किसी भी स्कूल में कोई भी संदिग्ध चीज नहीं मिली थी। 13 दिसंबर को भी एक दिन के अंदर लगभग 30 स्कूलों को ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। जिसके बाद पुलिस समेत कई एजेंसियों ने इन स्कूलों की तलाशी ली थी। 14 दिसंबर को भी आरके पुरम के डीपीएस स्कूल सहित आठ स्कूलों को एक ईमेल भेजा गया था, जिसमें बम जैकेट के जरिए विस्फोट करने की धमकी दी गई थी।

पुलिस को चुनौती दे रहा ई-मेल भेजने वाला

स्कूलों में बम होने की धमकी भरा ई-मेल भेजने वाला दिल्ली पुलिस के लिए चुनौती बन चुका है। इस मामले में पुलिस आईपी पते से यह पता तो कर लेती है कि ई-मेल किस देश के सर्वर आदि से भेजा गया है। लेकिन इससे आगे जांच नहीं बढ़ पाती हैं।

वन नेशन-वन इलेक्शन पर जेपीसी का गठन, लोकसभा के 21, राज्यसभा के 10 सांसदों का नाम, जानें कौन-कौन शामिल

#one_nation_one_election_jpc_committee_members_name

Image 2Image 3

वन नेशन वन इलेक्शन पर आम सहमति के लिए सरकार ने ज्वॉइंट पार्लियामेंट कमेटी (जेपीसी) के सदस्यों का ऐलान कर दिया है। लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सांसदों को इस JPC के लिए चुना गया है।राजस्थान के पाली से बीजेपी के सांसद पीपी चौधरी जेपीसी की अध्यक्षता करेंगे।

लोकसभा ने अपने 21 नामों की घोषणा भी कर दी है। इन 21 में से 5 सांसदों का पेशा वकालत है। जेपीसी में बीजेपी के 10, कांग्रेस के 3 और टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (शिंदे), एनसीपी (शरद), रालोद, टीडीपी, जनसेना, सपा के एक-एक सांसदों को जगह दी गई है।

कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष तिवारी और सुखदेव भगत सिंह को शामिल किया गया है। भाजपा की तरफ से बांसुरी स्वराज, संबित पात्रा और अनुराग सिंह ठाकुर समेत 10 सांसद हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कल्याण बनर्जी का नाम है। इसके अलावा सपा, डीएमके, टीडीपी समेत 8 अन्य पार्टियों से एक-एक सांसद इस जेपीसी का सदस्य बनाया गया है।

बता दें कि संसद में मंगलवार को पेश हुए 129 वें संविधान (संशोधन) बिल यानी एक देश एक चुनाव बिल की समीक्षा के लिए सरकार ने बनने ज्वॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी नाई है। इस समिति को अगले सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। फिलहाल सिर्फ लोकसभा से जेपीसी में शामिल किए गए सांसदों के नामों का ऐलान किया गया है। राज्यसभा की तरफ से इस जेपीसी के लिए 10 सांसदों के नामों की घोषणा जल्द की जाएगी।

यह संसद की संयुक्त संसदीय कमेटी है, जिसमें बिल और मुद्दों की समीक्षा की जाती है। समीक्षा के बाद जेपीसी कमेटी अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपताी है। वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को इसी कमेटी में भेजा गया है। वन नेशन-वन इलेक्शन का विधेयक संवैधानिक संशोधन से जुड़ा है। इस विधेयक के संसद से पास होने के बाद पूरे देश में चुनाव आयोग की सिफारिश पर विधानसभा और लोकसभा को भंग किया जा सकता है। विधेयक लागू होने के बाद देश में विधानसभा और लोकसभा का चुनाव एक साथ कराया जा सकता है।

कानून मंत्री मेघवाल ने 17 दिसंबर को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव को लेकर संविधान संशोधन बिल रखा था। विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। इसके बाद बिल पेश करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई गई। कुछ सांसदों की आपत्ति के बाद वोट संशोधित करने के लिए पर्ची से दोबारा मतदान हुआ। इस वोटिंग में बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। इसके बाद कानून मंत्री ने बिल दोबारा सदन में रखा।

धक्का-मुक्की विवाद पर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने, दोनों पार्टियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर क दूसरे पर बोला हमला

#bjpcongresspress_conference

Image 2Image 3

संसद में संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद हंगामा मचा हुआ है। गुरुवार को ये हंगामा धक्का-मुक्की में तब्दील हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर बदसलूकी के आरोप लगाए हैं।संसद में गुरुवार सुबह हुई धक्कामुक्की की घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ये उनका अडाणी जैसे जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने का तरीका है। वहीं, भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि अगर खड़गे-राहुल को माफी नहीं मांगनी थी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की।

राज्यसभा में धक्का-मुक्की वाले विवाद के बाद कांग्रेस की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, जयराम रमेश समेत तमाम नेता मौजूद रहे। इस दौरान संविधान पर बहस के दौरान राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री के भाषण पर राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'सरकार और खासकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह डॉ. बीआर अंबेडकर के बारे में जो बयान दे रहे हैं, वह बहुत दुखद है और उन्होंने (अमित शाह) कल तथ्यों को देखे बिना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। जवाहरलाल नेहरू, डॉ. बीआर अंबेडकर को गाली देने से पहले उन्हें तथ्यों को देखना चाहिए।

गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग

खरगे ने आगे कहा कि, आंबेडकर पर बयानबाजी काफी दुखदायक है, गृह मंत्री अमित शाह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। हमारी मांग है कि गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और देश से माफी मांगनी चहिए।

कांग्रेस करेगी देशव्यापी प्रदर्शन

इस दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम संसद में हर रोज धरना प्रदर्शन करते थे, कभी हिंसा नहीं हुई। आज भी हम लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। हमें मकर द्वार पर रोका गया। इस दौरान हमारे ऊपर हमला किया गया। भाजपा के सांसदों ने मुझे धक्का दिया। हमारी महिला सांसदों को भी धक्का दिया गया। वो लोग हमारा मजाक उड़ा रहे थे। हम इस मामले में देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे।

उनका अहंकार उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में झलक रहा था- शिवराज सिंह

वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बीजेपी की ओर से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पीयूष गोयल ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। शिवराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी हमारे सांसदों के बीच पहुंच गए। उन्होंने ऐसा व्यवहार किया, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। खरगे और राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी। इन्होंने संसद में किए कुकृत्य की क्षमा नहीं मांगी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की।शिवराज सिंह ने कहा, उनका अहंकार उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में झलक रहा था।

अशोभनीय और गुंडागर्दी से भरा व्यवहार हुआ

शिवराज सिंह ने आगे कहा कि आज जो कुछ उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। अशोभनीय और गुंडागर्दी से भरा व्यवहार हुआ। विचार से विरोध करना सबका अधिकार है। वो लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब द्वार बदल लेते थे। आज सुरक्षा कर्मियों ने राहुल से कहा कि आप साइड से निकल सकते हैं लेकिन जानबूझकर राहुल गांधी हमारे सांसदों के बीच पहुंच गए। वहां जाकर हमारे सांसदों को धमकाने लगे। शिवराज सिंह ने कहा, हमारे बुजुर्ग और गरीब सांसद प्रताप सारंगी गिर गए, उन्हें गंभीर चोट आई। मुझे कहते हुए शर्म आती है, हमारी एक बहन सांसद कन्याल के साथ अशालीन, असभ्य अमर्यादित व्यवहार किया गया। क्या महिला आदिवासी संसद के साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा।

डेमोक्रेसी को कलंकित करने का पाप किया

कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 2 बजे संसद शुरू हुई तो अध्यक्ष की टेबल पर चढ़ गए। उन्होंने डेमोक्रेसी को कलंकित करने का पाप किया है। लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई गईं। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि क्या भारत की ये सोच और व्यवहार है। ये गैर भारतीय आचरण है। अभी तक संसद में ये चल रहा था कि कौन अच्छे से बात रखेगा। कांग्रेस अब धारा बदलने का काम कर रही है। अब वहां पहलवान और गुंडे जाएं।

विपक्ष को बड़ा झटका, राज्यसभा सभापति के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव खारिज

#no_confidence_motion_against_chairman_jagdeep_dhankhar_rejected

राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को उप-सभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया है।इस तरह अब इसे सदन में पेश नहीं किया जा सकेगा। अनुच्छेद 67(बी) का इस्तेमाल करते हुए उपराष्ट्रपति को हटाने पर विचार करने वाले किसी भी प्रस्ताव के लिए अनिवार्य रूप से कम से कम 14 दिन पूर्व नोटिस देना अनिवार्य होता है, जिसका पालन नहीं किया गया। इस वजह से तकनीकी आधार पर विपक्ष के प्रस्ताव को खारिज किया गया।

Image 2Image 3

उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ नैरेटिव बनाने के उद्देश्य से लाया गया था। उन्होंने बताया कि उस प्रस्ताव में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का नाम भी ठीक से नहीं लिखा गया था। बताया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव में दस्तावेज और वीडियो को जिक्र नहीं किया गया। उपसभापति ने कहा, संसद और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा के लिए चिंताजनक बात ये है कि यह नोटिस मौजूदा उपराष्ट्रपति को बदनाम करने के दावों से भरा हुआ है, जिसमें अगस्त 2022 में उनके पदभार ग्रहण करने के समय की घटनाओं का जिक्र किया गया है। नोटिस में प्रामाणिकता की कमी और बाद में सामने आई घटनाओं से पता चला कि यह राजनीतिक प्रचार को चमकाने का एक प्रयास था।

संसद के शाीतकालीन सत्र के 10वें दिन (10 दिसंबर) विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के जनरल सेक्रेटरी पीसी मोदी को धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। पीसी मोदी ने ही आज उप-सभापति का जवाब सदन में रखा।

राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर INDIA ब्लॉक ने 11 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- सभापति राज्यसभा में स्कूल के हेडमास्टर की तरह व्यवहार करते हैं। विपक्ष का सांसद 5 मिनट भाषण दे तो वे उस पर 10 मिनट तक टिप्पणी करते हैं। सभापति सदन के अंदर प्रतिपक्ष के नेताओं को अपने विरोधी के तौर पर देखते हैं। सीनियर-जूनियर कोई भी हो, विपक्षी नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर अपमानित करते हैं। उनके व्यवहार के कारण हम अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर हुए हैं।

राहुल गांधी के खिलाफ हत्या की कोशिश के तहत शिकायत, थाने पहुंचे बांसुरी और अनुराग

#complaintagainstrahul_gandhi

Image 2Image 3

संसद में बीजेपी सांसदों के साथ ही धक्‍का-मुक्‍की के मामले ने तूल पकड़ लिया है।बीजेपी ने संसद में अपने सांसदों के खिलाफ हुई कथित धक्‍का-मुक्‍की के मामले को लेकर संसद मार्ग थाने में शिकायत दी है। बीजेपी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता के खिलाफ हत्‍या के प्रयास के का मामला दर्ज करने की मांग की है।अनुराग ठाकुर और बांसुरी स्वराज समेत एनडीए के तीन सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत दर्ज कराने के बाद सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी का जिस तरह का रवैया है, उन्हें लगता है की वह कानून से ऊपर हैं। गांधी परिवार अपने आप को कानून से ऊपर समझता है। राहुल गांधी ने नागालैंड की महिला सांसद से भी बेहद अहंकारपूर्ण तरीके से बदसलूकी की थी। शारीरिक हमला करना और उकसाने का काम राहुल गांधी ने किया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की हालत ऐसी हो गई है कि जैसे खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे।

राहुल गांधी के खिलाफ इतनी धाराओं में शिकायत

भीमराव अंबेडकर को लेकर देश के गृहमंत्री अमित शाह के बयान को लेकर आज संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन हो रहा था। इसी दौरान धक्का मुक्की भी हुई जिसमें बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत घायल गए। अब इस मामले में कांग्रेस पार्टी के महासचिव और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर भाजपा ने मामला दर्ज करवा दिया है। संसद में धक्‍का-मुक्‍की के मामले में राहुल गांधी ने के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की गई है।

धारा 109 हत्या का प्रयास के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

धरा 115 स्वेच्छा से चोट पहुंचाना।

धारा 117 स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना।

धारा 125 दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने का काम।

धारा 131 आपराधिक बल का प्रयोग।

धारा 351 आपराधिक धमकी देने का मामला।

बीजेपी के दो सांसद घायल

बता दें कि संसद के दोनों सदनों में गुरूवार को भी हंगामा हुआ। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों दलों के सांसदों के बीच मकर द्वार पर धक्कामुक्की की खबर आई। भाजपा सांसद प्रताप सारंगी के सिर में चोट देखी गई। इस दौरान भाजपा सांसद मुकेश राजपूत भी घायल हो गए। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें आरएमएल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। सारंगी का इलाज भी इसी अस्पताल में चल रहा है। पीएम मोदी ने फोन पर सांसदों का हालचाल जाना है।

राहुल गांधी मेरे बेहद पास आकर चिल्लाने लगे”,बीजेपी महिला सांसद कोन्याक का दावा, सभापति से की शिकायत

#bjp_mp_s_phangnon_konyak_alleges_rahul_gandhi

Image 2Image 3

संसद में हुई धक्का-मुक्की में बीजेपी के दो सांसद घायल हुए हैं। ये मामला यहीं थमता नहीं दिख रहा है।अब नागालैंड की महिला सांसद ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने उनके साथ बदसलूकी की है। बीजेपी की नागालैंड से सांसद एस फैनोंग कोन्याक ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से शिकायत की है कि राहुल गांधी ने उनके साथ मिसविहेब किया है।

संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर के कथित अपमान को लेकर संसद परिसर में विपक्ष और सत्ताधारी एनडीए के सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हुई। बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी घायल हो गए। पार्टी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सारंगी को धक्का देने का आरोप लगाया। इस धक्का-मुक्की में भाजपा सांसद मुकेश राजपूत भी घायल हो गए। अब बीजेपी की राज्यसभा सदस्य एस फैनोंग कोन्याक ने दावा किया कि वह राहुल गांधी के अचानक पास आने और चिल्लाने से असहज महसूस कर रही थीं।

कोन्याक ने सदन में सभापति जगदीप धनखड़ को घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया, विपक्ष के नेता राहुल गांधी करीब आए, मुझे यह पसंद नहीं आया और उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया। आज जो कुछ भी हुआ वह बहुत दुखद है, ऐसा नहीं होना चाहिए। मैंने सभापति से भी शिकायत की है। बीजेपी की राज्यसभा सांसद एस फैनोंग कोन्याक ने सभापति को भेजे अपने शिकायती पत्र में कहा, विपक्षी नेता राहुल गांधी ने मेरी गरिमा और आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा, मैं सदन में सुरक्षा की मांग करती हूं।

धनखड़ को लिखे पत्र में बीजेपी सांसद ने लिखा, "मैं, एस. फागनोन कोन्याक, संसद सदस्य (राज्यसभा) माननीय डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की और से किए गए अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग ले रही थी। मैं अपने हाथ में एक तख्ती लेकर मकर द्वार की सीढ़ी के ठीक नीचे खड़ी थी। सुरक्षा कर्मियों ने अन्य दलों के माननीय सांसदों के प्रवेश के लिए प्रवेश द्वार पर एक रास्ता बना रखा था। अचानक, विपक्ष के नेता राहुल गांधी अन्य पार्टी सदस्यों के साथ मेरे सामने आ गए, जबकि उनके लिए एक रास्ता बनाया गया था। उन्होंने ऊंची आवाज में मेरे साथ दुर्व्यवहार किया और उनकी शारीरिक निकटता इतनी करीब थी कि एक महिला सदस्य होने के नाते मुझे बेहद असहज महसूस हुआय़ मैं भारी मन से और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की निंदा करते हुए एक तरफ हट गई, लेकिन मुझे लगा कि किसी भी संसद सदस्य को इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं नागालैंड के एसटी समुदाय से हूं और मैं एक महिला सदस्य हूं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मेरी गरिमा और आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है। इसलिए माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी सुरक्षा चाहती हूं।"

इससे पहले राज्यसभा में नेता सदन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा तथा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर संसद के प्रवेश द्वार पर बीजेपी की महिला सांसदों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इसके बाद सदन में हंगामा हो गया और हंगामे को देखते हुए राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ गई।

संसद में एक बार के स्थगन के बाद 2 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, बीजेपी की ओर से राहुल गांधी के कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया गया। बीजेपी ने इसके लिए उनसे और कांग्रेस से सदन तथा पूरे देश से माफी की मांग की।

फिर से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, भारत चीन के बीच बनी बात

#india_china_meeting_resumption_of_kailash_mansarovar_yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत और चीन के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। पूरे पांच साल बाद बीजिंग में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देश के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर सहमति बन गई। दोनों देशों के बीच पांच साल के अंतराल के बाद विशेष प्रतिनिधियों की 23वें दौर की बैठक बीजिंग में 6 मुद्दों पर सहमति बनी।भारत की ओर से इस बैठक में राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोभाल तो चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी शामिल थे।

Image 2Image 3

ईस्टर्न लद्दाख में चार साल लंबे गतिरोध के बाद संबंधों की बहाली के मद्दनेजर सभी मुद्दों पर बात करने के लिए बॉर्डर मुद्दे पर बने इस मैकेनिज्म की आखिरी बैठक दिसंबर 2019 के बाद पहली बार हुई है।भारत की ओर से इस बैठक में राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोभाल तो चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी शामिल थे। दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने बॉर्डर एरिया में शांति क़ायम करने को द्विपक्षीय संबंधों की बेहतरी के लिए अहम बताया।

दोनों पक्षों ने इस बात को माना कि ग्राउंड पर शांतिपूर्ण हालात कायम करने ज़रूरी हैं जिससे कि सीमा संबंधी मुद्दे द्विपक्षीय संबंधों की सामान्य गतिविधियों पर असर ना डाले। साल 2020 से सबक़ लेते हुए बॉर्डर पर शांति कायम करने और बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर चर्चा की गई। दोनों देशों ने इस इसे लेकर संबंधित डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनल को निर्देशित करने और इस्तेमाल का भी फ़ैसला किया

कैलाश मानसरोवर यात्रा करने के दौरान चीन की अनुमति जरूरी है क्योंकि यह यात्रा तिब्बत में स्थित है। जो वर्तमान में चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। इसलिए वहां जाने के लिए चीनी पर्यटक वीजा लेना होता है। चीनी सरकार ने इस क्षेत्र में यात्रा के लिए नियम और शर्तें निर्धारित की हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है. अब भारत के समझौते के साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा आसान हो सकती है।

विशेष प्रतिनिधियों की बैठक प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान में हाल ही में हुई बैठक के दौरान लिए गए निर्णय के अनुसार हुई। इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के प्रबंधन की देखरेख करने और सीमा से जुड़े सवालों का निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान तलाशने के लिए शीघ्र बैठक की जानी थी। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की थी। जिसमें मानसवोर यात्रा को दोबारा शुरू करने और भारत और चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई थी।

कैलाश मानसरोवर यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ यात्रा है, जो हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखती है. यह यात्रा तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक जाती है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। यह पर्वत तिब्बत के पश्चिमी क्षेत्र में हिमालय श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर है। जबिक, मानसरोवर झील को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसकी रचना ब्रह्मा जी ने की थी। यह झील तिब्बत के उच्च पठार पर 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और कैलाश पर्वत से लगभग 30 किलोमीटर दूर है।

इस यात्रा के दौरान तीर्थयात्री कैलाश पर्वत की परिक्रमा करते हैं और मानसरोवर झील में स्नान करते हैं, जिसे पवित्र और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम माना जाता है। समुद्र तल से 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे से होकर यात्रा की जाती है।

मुझे धक्का दिया गया”, खरगे ने लगाया बीजेपी सांसदों पर आरोप, ओम बिरला को पत्र भी लिखा

#mallikarjun_kharge_accused_bjp_mp_for_hitting_him

Image 2Image 3

संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद आरोपों का दौर चल रहा है। बीजेपी घटना के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहरा रही है। धक्का-मुक्की में बीजेपी के दो सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। दोनों अस्पताल में भर्ती हैं,आरोप राहुल गांधी पर लगा है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया है कि उनके साथ भी बदसलूकी हुई है। खरगे ने कहा है कि पीएम मोदी बीजेपी सांसदों को प्लेकार्ड वाले डंडे से लैस कराकर इंडिया गठबंधन के सांसदों को रोकने के लिए धक्का-मुक्की करवाते हैं। खरगे ने इसकी जांच के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को बकायदा पत्र भी लिखा है।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा है कि मुझे भाजपा सांसदों ने धक्का दिया, मैं अपना संतुलन खो बैठा और मकर द्वार के सामने जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हो गया। खरगे ने लोकसभा अध्यक्ष से भाजपा सांसदों द्वारा उन्हें 'धक्का' दिए जाने के मामले की जांच का आदेश देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह न केवल उन पर, बल्कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला था।

खरगे ने ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा कि आज सुबह इंडिया गठबंधन के सांसदों ने प्रेरणा स्थल पर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च किया। यह मार्च केंद्रीय गृह मंत्री के 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में दिए गए डॉ. अंबेडकर के अपमानजनक भाषण के विरोध में किया गया था। जब मैं भाजपा सांसदों के साथ मकर द्वार पहुंचा,तो मुझे धक्का दिया गया। इसके बाद मैं अपना संतुलन खो बैठा और मकर द्वार के सामने जमीन पर गिर गया। इससे मेरे घुटनों को चोट लगी,जिनकी पहले ही सर्जरी हो चुकी है।

संसद में प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की, बीजेपी के 2 सांसद घायल, राहुल ने मारा धक्का?

#parliament_opposition_protest_bjp_mp_injured

Image 2Image 3

संसद के दोनों सदनों में आज भी हंगामा हो रहा है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों दलों के सांसदों के बीच मकर द्वार पर धक्कामुक्की की खबर आई। भाजपा सांसद प्रताप सारंगी के सिर में चोट देखी गई। इस दौरान भाजपा सांसद मुकेश राजपूत भी घायल हो गए। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें आरएमएल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। सारंगी का इलाज भी इसी अस्पताल में चल रहा है।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, आज संसद के मुख्य द्वार में भाजपा-एनडीए सांसदों का प्रदर्शन चल रहा था, राहुल गांधी और उनके सांसदों ने जबरदस्ती घुसकर अपना जो शारीरिक प्रदर्शन किया है, वो बहुत गलत है। संसद कोई शारीरिक ताकत दिखाने का प्लैटफ़ॉर्म नहीं है। राहुल गांधी ने भाजपा के 2 सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को जोर से धक्का दिया। राहुल गांधी ने जो धक्का-मुक्की की है, मैं उसका खंडन करता हूं। मैं राहुल गांधी से सवाल करना चाहता हूं कि अगर सब लोग अपनी ताकत दिखाकर मारपीट करने लग जाएंगे, तो संसद कैसे चलेगा? यह लोकतंत्र का मंदिर है, हमारे दोनों सांसद गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनका इलाज चल रहा है।

इन आरोपों पर अब राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया आ गई है।लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मैं संसद के प्रवेश द्वार से अंदर जाने की कोशिश कर रहा था तो भाजपा सासंद मुझे रोकने की कोशिश कर रहे थे। मुझे धमका रहे थे, तो यह हुआ है। यह संसद का प्रवेश द्वार है और हमारा अंदर जाने का अधिकार है। मुख्य मुद्दा यह है कि वे संविधान पर आक्रमण कर रहे हैं।

दरअसल, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर कांग्रेस ने संसद भवन परिसर में मार्च निकाला। जवाब में भाजपा ने कांग्रेस पर झूठ की राजनीति का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान संसद भवन के मकर द्वार पर दोनों दलों के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच धक्का-मुक्की की भी नौबत आई