भारत के पहले हृदय प्रत्यारोपण करने वाले पद्म भूषण से नवाजे गए डॉ. पी. वेणुगोपाल का हुआ निधन

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भारत के पहले हृदय प्रत्यारोपण करने वाले प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. वेणुगोपाल का मंगलवार को निधन हो गया। डॉ. वेणुगोपाल एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक रह चुके थे और उन्होंने अपने करियर में 50,000 से अधिक हृदय शल्य चिकित्सा कीं।

डॉ. वेणुगोपाल का जन्म 1942 में हुआ था, जब देश में भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था। उन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में 1958 में एम्स दिल्ली में छात्र के रूप में प्रवेश लिया। वर्ष 1964 में एम्स की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया। 1967 में वह एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बने और 1970 में उन्होंने देश का पहला पेसमेकर लगाया। डॉ. वेणुगोपाल का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 1994 में आया, जब उन्होंने भारत में पहला हृदय प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया। उनके असाधारण कार्यों के लिए 1998 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2014 में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

2023 में उन्होंने अपने संस्मरण 'हार्टफेल्ट' को प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने अपनी जीवन यात्रा और विभिन्न उल्लेखनीय घटनाओं का वर्णन किया। इसमें उन्होंने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सर्जरी का भी उल्लेख किया, जो उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पल था। यह सर्जरी गोली लगने के बाद करीब चार घंटे चली थी। डॉ. वेणुगोपाल का अंतिम संस्कार बुधवार को लोधी रोड श्मशान घाट पर दोपहर 3:00 बजे किया जाएगा।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, कहा- शराब-मांसाहार का सेवन करने वाले पुलिसवालों की नहीं लगेगी महाकुंभ में ड्यूटी
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प्रयागराज महाकुंभ के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी मुख्यालय ने कहा है कि शराब पीने वाले और मांसाहार का सेवन करने वाले पुलिसकर्मियों की ड्यूटी महाकुंभ में नहीं लगाई जाएगी। इस संबंध में सभी कमिश्नरेट और रेंज से महाकुंभ में भेजे जाने वाले पुलिस बल के चयन में इस बात का खास ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी मुख्यालय की ओर से एडीजी स्थापना संजय सिंघल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि महाकुंभ में तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों की सत्यनिष्ठा, छवि, आम शोहरत और चाल-चलन भी अच्छा होना चाहिए। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों की आयु सीमा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आरक्षियों की आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि मुख्य आरक्षियों की आयु 50 वर्ष से कम और उपनिरीक्षक एवं निरीक्षक की आयु 55 वर्ष से कम होनी चाहिए। महाकुंभ में ड्यूटी के लिए ऐसे पुलिसकर्मियों को नहीं भेजा जाएगा, जो प्रयागराज के मूल निवासी हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि तैनात होने वाले पुलिसकर्मी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, सतर्क और व्यवहार कुशल हों। पुलिसकर्मियों की तैनाती के लिए तीन चरणों में नाम भेजने के निर्देश दिए गए हैं। पहले चरण के लिए 10 अक्टूबर, दूसरे चरण के लिए 10 नवंबर और तीसरे चरण के लिए 10 दिसंबर तक नाम भेजने को कहा गया है। महाकुंभ में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 15 पीपीएस अफसरों को एसपी कुंभमेला क्षेत्र के साथ संबद्ध किया गया है। इनमें तीन एएसपी और 12 डिप्टी एसपी शामिल हैं। इन अफसरों को 15 अक्टूबर तक प्रयागराज में अपनी सेवाएं देने के लिए निर्देशित किया गया है।
आरबीआई गवर्नर का बड़ा एलान, कहा- नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं..., मौद्रिक नीति के टूल्स रहेंगे न्यूट्रल
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 51वीं बैठक में रेपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा है। यह निर्णय तीन दिनों की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया। समिति के सभी सदस्यों ने ब्याज दर को यथावत रखने पर सहमति जताई और मौद्रिक नीति के रुख को 'न्यूट्रल' रखा। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान 7.2% पर स्थिर रहेगा। उन्होंने लचीले मौद्रिक नीति ढांचे की सराहना करते हुए इसे 8 साल का प्रमुख संरचनात्मक सुधार बताया। यह लगातार 10वीं बार है जब रेपो रेट को 6.5% पर बरकरार रखा गया है। महंगाई के संबंध में शक्तिकांत दास ने कहा कि सामान्य मानसून के आधार पर वित्त वर्ष 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति 4.5% रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर में खाद्य कीमतों के कारण मुद्रास्फीति में वृद्धि की आशंका है, लेकिन साल के अंत तक मुद्रास्फीति में कमी आएगी। एमपीसी के फैसले में 5:1 का समर्थन ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में रहा। बैठक के समापन पर, आरबीआई गवर्नर ने महात्मा गांधी की उक्ति "अगर आपके काम करने का तरीका सही है, तो सफलता आनी ही है" का संदर्भ दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि आरबीआई का यह निर्णय देश के आर्थिक विकास के लिए सही दिशा में है।
हरियाणा में कौन होगा मुख्यमंत्री, नायब सैनी ही रहेंगे या किसी और को मिलेगी कमान?*
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#who_will_be_the_chief_minister_of_haryana हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की। उसने 48 सीटों पर जीत हासिल की है। हरियाणा में हैट्रिक लगाने के बाद सभी की निगाहें अगली सरकार के गठन पर टिकी हैं। सवाल है कि पार्टी की तरफ से राज्‍य में मुख्‍यमंत्री कौन होगा, क्‍या नायब सिंह सैनी को राज्य की कमान सौंपी जाएगी या किसी नए चेहरे को सीएम बनाया जाएगा? मीडिया रिपोर्ट की मानें तो हरियाणा में अगली सरकार का नेतृत्व वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ एक या दो उपमुख्यमंत्री कर सकते हैं। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि सरकार का गठन अगले कुछ दिनों में हो जाएगा। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हरियाणा में विधायकों के साथ बैठक करने के लिए पर्यवेक्षकों को भेजेगा, ताकि औपचारिक रूप से पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का चयन किया जा सके। हालांकि, बीजेपी ने नायब सिंह सैनी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा था और नतीजों के बाद सैनी का सीएम बनना तय माना जा रहा है।लेकिन नतीजों के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल विज और दो केंद्रीय मंत्रियों के बयान ट्विस्ट दे रहे हैं। दरअसल, अनिल विज भी सीएम पद चाह रहे हैं। चुनाव नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि आलाकमान ने मुझे सीएम बनाया तो मैं उसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं। नायब सैनी का कोई विरोध नहीं, लेकिन मैं सीनियर मोस्ट हूं। ये आलाकमान तय करे कि मुझे सीएम बनाना है या नहीं। उधर, मोदी सरकार में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इशारों-इशारों में दक्षिण हरियाणा से मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। हरियाणा के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, हमने दक्षिण हरियाणा में 13-14 सीटें जीती हैं। पार्टी ने फैसला कर रखा है कि नायब सिंह को मुख्यमंत्री बनाएंगे। लेकिन यहां से हमारे लोगों को महत्व देने के लिए पार्टी को कुछ न कुछ सोचना चाहिए। दस साल से दक्षिणी हरियाणा पार्टी की मदद कर रहा है तो पार्टी को भी दक्षिणी हरियाणा की मदद करनी चाहिए। वहीं, हरियाणा के पूर्व सीएम और केंद्रीय मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला संसदीय बोर्ड तय करेगा। मनोहर लाल खट्टर ने सीएम के सवाल पर कहा कि ये पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी काम कर रहे हैं। नीतियां काम कर रही हैं। हरियाणा में बीजेपी की शानदार जीत के बाद नायब सिंह सैनी ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
एमपी के उज्जैन में गरबा पंडाल में राहुल बन घुसा फ़िरोज़...जब धराया तो मिला कंडोम, लोगों ने की जमकर धुनाई
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मध्य प्रदेश के उज्जैन में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की अपील के बावजूद एक मुस्लिम युवक ने अपनी पहचान बदलकर पंडाल में प्रवेश किया। यह घटना मक्सी रोड स्थित पंड्याखेड़ी क्षेत्र की है, जहां हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने युवक पर शक होने पर उसे पकड़ लिया। पूछताछ करने पर युवक ने पहले अपना नाम राहुल बताया, लेकिन जब पुलिस के सामने लाया गया, तो उसने अपनी असली पहचान फिरोज बताई। मंगलवार रात को गरबा कार्यक्रम के दौरान हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता रितेश महेश्वरी को पंडाल में एक युवक की गतिविधियों पर शक हुआ। जब उन्होंने उससे नाम पूछा, तो उसने खुद को राहुल बताया और कहा कि वह मक्सी रोड का निवासी है और रोज़ गरबा देखने आता है। कार्यकर्ताओं ने उसे पुलिस के पास ले जाकर उसकी असल पहचान का खुलासा कराया। पुलिस द्वारा पूछताछ में जब युवक ने अपना असली नाम फिरोज बताया, तो कार्यकर्ताओं ने गुस्से में आकर उसे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। इसके बाद युवक किसी को फोन करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन लोगों ने उसका फोन छीन लिया। जब उसकी जेब की तलाशी ली गई, तो उसमें से कंडोम मिले। कंडोम मिलने के बाद युवक ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। हिंदू जागरण मंच की जिला संयोजिका नीलू रानी चौहान ने बताया कि युवक के पास से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है, और उसे पंवासा पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और युवक से पूछताछ कर रही है।
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावी परिणाम के बाद राहुल गांधी ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा?*
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#assembly_election_result_congress_lost_rahul_gandhi_reaction
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुका है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस को हुए नुकसान पर हर तरफ से प्रतिक्रिया आ रही है। यहां तक इंडिया गठबंधन में सहयोगियों ने कांग्रेस की रणनीति और क्षमता पर सवाल उठा दिए हैं। इस बीच राहुल गांधी गायब का ना उनका कोई बयान सामने आया था और ना ही उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किया था। अब रिजल्ट के करीब 24 घंटे बाद राहुल गांधी ने का पहला रिएक्शन सामने आया है। एक तरफ उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को शुक्रिया कहा। तो दूसरी तरफ, हरियाणा में मिली करारी हार पर को अप्रत्याशित बयाता। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘जम्मू-कश्मीर के लोगों का तहे दिल से शुक्रिया- प्रदेश में INDIA की जीत संविधान की जीत है, लोकतांत्रिक स्वाभिमान की जीत है। हम हरियाणा के अप्रत्याशित नतीजे का विश्लेषण कर रहे हैं। अनेक विधानसभा क्षेत्रों से आ रही शिकायतों से चुनाव आयोग को अवगत कराएंगे। सभी हरियाणा वासियों को उनके समर्थन और हमारे बब्बर शेर कार्यकर्ताओं को उनके अथक परिश्रम के लिए दिल से धन्यवाद। हक़ का, सामाजिक और आर्थिक न्याय का, सच्चाई का यह संघर्ष जारी रखेंगे, आपकी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे।’ हरियाणा में वोटिंग के बाद नतीजों से पहले यह लग रहा था कि कांग्रेस चुनाव जीत रही है। लेकिन जब रिजल्ट आए तो एकदम उल्टा हुआ। कांग्रेस चुनाव हार गई। माना जा रहा है कि कांग्रेस की हार के पीछे प्रमुख वजह है पार्टी के अंदर गुटबाजी। वहीं सीट बंटवारे में गड़बड़ी भी एक वजह रही। कांग्रेस के कास्ट फैक्टर कैलकुलेशन में हुई गलती को भी हार की वजह माना जा रहा है। हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा ने न सिर्फ सारे एग्जिट पोल्स को झूठा साबित कर दिया, बल्कि अपने विरोधियों को भी चौंका दिया है। इसके बाद से ही कांग्रेस अपने साथियों के निशाने पर है। हालांकि, कांग्रेस इन नतीजों को मानने के लिए तैयार नहीं है। उसने नतीजों में गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत भी की है। बता दें कि विधानसभा चुनाव में 48 सीट जीतकर भाजपा सत्ता बरकरार रखने और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है। वहीं कांग्रेस को 37 सीटों पर जीत मिली है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने दो सीटें जीतीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों को तीन सीट मिलीं। जननायक जनता पार्टी (जजपा) और AAP दोनों को चुनावों में कोई सफलता नहीं मिली। बीजेपी और कांग्रेस का मत प्रतिशत लगभग बराबर रहा। बीजेपी को 39.94 प्रतिशत मत मिले, जबकि कांग्रेस को 39.09 प्रतिशत मत मिले।
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावी परिणाम के बाद राहुल गांधी ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा?

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हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुका है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस को हुए नुकसान पर हर तरफ से प्रतिक्रिया आ रही है। यहां तक इंडिया गठबंधन में सहयोगियों ने कांग्रेस की रणनीति और क्षमता पर सवाल उठा दिए हैं। इस बीच राहुल गांधी गायब का ना उनका कोई बयान सामने आया था और ना ही उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किया था। अब रिजल्ट के करीब 24 घंटे बाद राहुल गांधी ने का पहला रिएक्शन सामने आया है। एक तरफ उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को शुक्रिया कहा। तो दूसरी तरफ, हरियाणा में मिली करारी हार पर को अप्रत्याशित बयाता।

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘जम्मू-कश्मीर के लोगों का तहे दिल से शुक्रिया- प्रदेश में INDIA की जीत संविधान की जीत है, लोकतांत्रिक स्वाभिमान की जीत है। हम हरियाणा के अप्रत्याशित नतीजे का विश्लेषण कर रहे हैं। अनेक विधानसभा क्षेत्रों से आ रही शिकायतों से चुनाव आयोग को अवगत कराएंगे। सभी हरियाणा वासियों को उनके समर्थन और हमारे बब्बर शेर कार्यकर्ताओं को उनके अथक परिश्रम के लिए दिल से धन्यवाद। हक़ का, सामाजिक और आर्थिक न्याय का, सच्चाई का यह संघर्ष जारी रखेंगे, आपकी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे।’

हरियाणा में वोटिंग के बाद नतीजों से पहले यह लग रहा था कि कांग्रेस चुनाव जीत रही है। लेकिन जब रिजल्ट आए तो एकदम उल्टा हुआ। कांग्रेस चुनाव हार गई। माना जा रहा है कि कांग्रेस की हार के पीछे प्रमुख वजह है पार्टी के अंदर गुटबाजी। वहीं सीट बंटवारे में गड़बड़ी भी एक वजह रही। कांग्रेस के कास्ट फैक्टर कैलकुलेशन में हुई गलती को भी हार की वजह माना जा रहा है। हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा ने न सिर्फ सारे एग्जिट पोल्स को झूठा साबित कर दिया, बल्कि अपने विरोधियों को भी चौंका दिया है। इसके बाद से ही कांग्रेस अपने साथियों के निशाने पर है। हालांकि, कांग्रेस इन नतीजों को मानने के लिए तैयार नहीं है। उसने नतीजों में गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत भी की है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव में 48 सीट जीतकर भाजपा सत्ता बरकरार रखने और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है। वहीं कांग्रेस को 37 सीटों पर जीत मिली है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने दो सीटें जीतीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों को तीन सीट मिलीं। जननायक जनता पार्टी (जजपा) और AAP दोनों को चुनावों में कोई सफलता नहीं मिली। बीजेपी और कांग्रेस का मत प्रतिशत लगभग बराबर रहा। बीजेपी को 39.94 प्रतिशत मत मिले, जबकि कांग्रेस को 39.09 प्रतिशत मत मिले।

जम्मू-कश्मीर से लेकर हरियाणा तक दिखा योगी का ‘जलवा’, जहां-जहां गए, खिला कमल*
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मई में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सहयोगी दलों के साथ से मिलकर सरकार बनाई है। दरअसल, दो बार लगातार लोकसभा में धमाका करने के बाद बीजेपी इस बार 400 पार का सपना पूरा नहीं कर सकी। ऐसे में भाजपा के चेहरे पर मायूसी थी। लेकिन, तीन महीने बाद ही हरियाणा और जम्मू-कश्मीक में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे ने उसे खिलखिलाने का मौका दिया है। भाजपा के स्टार प्रचारक पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई में चले इस चुनावी अभियान में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का प्रचार भी हरियाणा से जम्मू तक भाजपा के प्रसार में काम आया है। हरियाणा और विधानसभा चुनावों में भी सीएम योगी ने धुआं-धार प्रचार किया। भाजपा ने सीएम योगी की लोकप्रियता को देखते हुए दोनों राज्यों में खूब सभाएं करवाईं। सीएम योगी ने हरियाणा में 14 और जम्मू में 4 रैलियां की थीं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जम्मू में चार विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी प्रचार किया था। दिलचस्प बात है कि सीएम योगी ने जम्मू में जहां-जहां प्रचार किया, वहां-वहां भाजपा ने जीत का परचम लहराया है। जम्मू में योगी ने 11 प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया और इनमें 10 सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। एक मात्र छंब विधानसभा में ही भाजपा पिछड़ी है। खराब मौसम के चलते योगी ने यहां मोबाइल फोन से सभा संबोधित की थी। जम्मू में योगी की प्रचार वाली जीती सीटों में कठुआ और किश्तवाड़ जैसी सीटें शामिल हैं। किश्तवाड़ में भाजपा ने शगुन परिहार को अपना उम्मीदवार बनाया था। उनके पिता और चाचा की आंतकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मुस्लिम बहुल इस सीट पर शगुन भाजपा के लिए कमल खिलाने में कामयाब रही हैं। हरियाणा में इन सीटों पर योगी की रैली और ये रहा रिजल्ट: वहीं, हरियाणा में सीएम योगी की 14 रैलियां हुई थीं। सीएम योगी की रैलियों की वजह से भाजपा उन 14 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। नरवाना सीट: भाजपा पंचकुला सीट: कांग्रेस फरीदाबाद एनआईटी सीट: भाजपा कलायत सीट: कांग्रेस सफीदों सीट: भाजपा हांसी सीट: भाजपा शाहबाद सीट: कांग्रेस नारनौंद सीट: कांग्रेस अटेली सीट: भाजपा बवानी खेड़ा सीट: भाजपा जगाधरी सीट: कांग्रेस रादौर सीट: भाजपा राई सीट: भाजपा असंध सीट: भाजपा
जम्मू-कश्मीर सरकार बनाने के बाद एनसी-कांग्रेस की नहीं चलने वाली, जानें गेंद किसके पाले?

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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन की सरकार बनने वाली है।चुनाव के बाद विधानसभा का गठन होगा और वहां मंत्रीपरिषद शपथ लेंगी। आर्टिकल 370 खत्म करके इसका विशेष दर्जा खत्म किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुआ था। मगर ये चुनाव एक राज्य में नहीं बल्कि केंद्रशासित प्रदेश में कराया गया। तो राज्य में अब सरकार बेशक कांग्रेस और कांफ्रेंस मिलकर बना लें लेकिन असल में सारी ताकत को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास होगी।

वर्ष 2019 में जम्मू कश्मीर की अंतिम राज्य सरकार भंग कर दी गई। वर्ष 1952 से चली आ रही ये सरकार देश की दूसरी राज्य सरकारों की तुलना में ज्यादा अधिकार रखती थी। राज्य को देश में आर्टिकल 370 के तहत स्पेशल दर्जा मिला हुआ था। 2019 में सबकुछ खत्म हो गया। राज्य दो केंद्रशासित टुकड़ों टूट गया- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। अब जबकि राज्य में चुनाव खत्म हो गया है और परिणाम के बाद राज्य की सत्ता पर कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस काबिज होने जा रहे हैं तो कहना चाहिए कि अब सबकुछ पिछली राज्य सरकारों जैसा नहीं होगा। नई राज्य सरकार काफी हद तक पॉवरलेस होगी. असल में राज्य में सुपर बॉस तो लेफ्टिनेंट गर्वनर ही होंगे।

जिस तरह दिल्ली में उप राज्यपाल की ताकत निर्वाचित सरकार से ज्यादा है, कुछ वैसा ही जम्मू-कश्मीर में भी देखने को मिलेगा। जम्मू कश्मीर को अभी भी पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है और इसीलिए वहां गर्वनर नहीं हैं। जम्मू-कश्मीर अभी केंद्र शासित प्रदेश है और इस तरह वहां लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) काम करते रहेंगे और विधानसभा अगर कोई बिल पास करती है तो फिर उसे एलजी की सहमति लेनी होगी। इस तरह एलजी चाहें तो बिल को राष्ट्रपति को भी रेफर कर सकते हैं।

किन मामलों में उपराज्यपाल की चलेगी

कानून और व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस कामों सहित विभिन्न प्रशासनिक मामलों में केंद्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल का फैसला अंतिम होगा। मतलब ये है कि निर्वाचित विधानसभा के बावजूद एलजी दैनिक शासन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विवेक का प्रयोग कर सकते हैं। कानून-व्यवस्था और पुलिस पर कंट्रोल पूरी तरह राज्यपाल के पास रहेगा। चूंकि पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था को बाहर करने के लिए विधानसभा की विधायी शक्तियों में कटौती की गई है, इसलिए नई सरकार की कार्यकारी शक्तियां और क्षमता गंभीर रूप से कमजोर और समझौतापूर्ण हो जाएगी। ऐसी व्यवस्था केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल को सर्वशक्तिमान बना देती है। राज्य में सब कुछ गृह विभाग के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें पुलिस, कानून और व्यवस्था, जेल, बंदीगृह आदि शामिल हैं।

केवल पुलिस जैसा अहम महकमा ही चुनी हुई सरकार के नियंत्रण से बाहर नहीं होगा।. यहां तक की पब्लिक ऑर्डर जिसका दायरा बहुत बड़ा होता है, वह भी सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। समवर्ती सूची में दिए गए मामले यानी वैसे विषय जिस पर केन्द्र और राज्य, दोनों को कानून बनाने का अधिकार है, उस पर भी जम्मू कश्मीर विधानसभा कानून नहीं बना पाएगी। ये सारी शक्तियां एलजी या उसके जरिये केंद्र को दे दी गई हैं।

मंत्रियों के कार्यक्रम या बैठकों के एजेंडे की सूचना एलजी को देनी होगी

जम्मू कश्मीर सरकार में मंत्री बनने वालों के अधिकार का अंदाजा इस से भी लगाया जा सकता है कि मंत्रियों के कार्यक्रम या फिर उनके बैठकों के एजेंडे एलजी ऑफिस को देने होंगे और यह कम से दो दिन पहले जमा करा देना होगा। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए बनी प्रदेश की ताकतवर एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो), जम्मू कश्मीर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और जेल जैसे अहम विभाग चुनी हुई सरकार के पास न होकर उपराज्यपाल के पास होंगे।

एलजी के फैसले की समीक्षा नहीं हो सकेगी

एलजी के राजनीतिक ताकत का अंदाजा जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून की धारा 55 से साफ हो जाता है। इसके मुताबिक उपराज्यपाल के फैसले की समीक्षा जम्मू कश्मीर की चुनी गई मंत्रिमंडल नहीं कर सकती। बात यहां तक होती तो भी कोई बात न थी पर एक ओर तो उपराज्यपाल के फैसले की समीक्षा विधानसभा नहीं कर सकती लेकिन इसी के थोड़ा आगे एक प्रावधान ऐसा भी जोड़ दिया गया है जहां एलजी का प्रतिनिधि प्रदेश सरकार की सभी कैबिनेट मीटिंग में बैठेगा।

राज्यपाल करेंगे 5 विधायकों को नोमिनेट

जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल के पास विधानसभा में 5 सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार है, जिनके पास विधायक की पूर्ण विधाई शक्तियां होंगी। ये विधानसभा के भीतर शक्ति संतुलन को बदल सकता है। विधानसभा के मनोनीत सदस्यों को वे सभी अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होंगे, जिनके निर्वाचित सदस्य हकदार होंगे। उन्हें वोट देने का अधिकार है। अब केन्द्र की बीजेपी के सरकार के एलजी अगर किसी को नॉमिनेट करेंगे तो वह वोट किसे करेगा, यह वह भी बता देगा जिससे पूछा न गया हो। इसके अपावा ये पांच विधायक विधानसभा के कामकाज में भाग लेने का अधिकार है और सरकार के गठन में भूमिका का भी।

जम्मू-कश्मीर में एनसी बनी सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन वोटों के मामले में बाजी मार गई बीजेपी
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#nc_won_most_seats_in_jammu_and_kashmir_but_this_party_won_in_terms_of_votes
* जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। फारूक अब्दुल्ला की अगुवाई वाली जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यहां 90 विधानसभा सीटों में से एनसी को 42 और कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत मिली है, जबकि भाजपा 29 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही है। जम्मू-कश्मीर बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत थी। राज्य में एनसी और कांग्रेस के बीच गठबंधन है। दोनों दलों ने साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। ऐसे में सरकार एनसी-कांग्रेस ही बनाने वाली है। भले कांग्रेस पार्टी गठबंधन को बहुमत मिला है, लेकिन चुनावी नतीजों का बारीक अध्ययन करें तो पाएगें कि यहां भी उसकी लुटिया डूब गई है। खासकर, बीजेपी के मुकाबले उसका प्रदर्शन काफी खराब रहा है। जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव की प्रमुख पार्टियों बीजेपी, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन तो यही कहता है। *बीजेपी को सबसे ज्यादा 25.64 फीसदी वोट मिले* नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं, लेकिन कुल वोट पाने के मामले में वह सूबे में दूसरे नंबर पर है। भारतीय जनता पार्टी भले ही कुल सीटों के मामले में दूसरे नंबर पर आई हो, उसने जम्मू-कश्मीर के अपने चुनावी इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने न सिर्फ सूबे की 90 में से 29 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की, बल्कि सबसे ज्यादा 25.64 फीसदी वोट भी हासिल किए। कुल वोटों के मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस दूसरे नंबर पर रही जिसे 23.43 फीसदी वोट मिले। संख्या के हिसाब से देखें तो बीजेपी को 1462225 वोट और NC को 1336147 वोट मिले हैं। वहीं, कांग्रेस को 11.97 और PDP को 8.87 फीसदी वोट मिले और ये दोनों दल क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर पर रहे। इस तरह देखा जाए तो बीजेपी ने कांग्रेस और PDP के कुल वोटों से भी ज्यादा वोट बटोरे। *स्ट्राइक रेट में कांग्रेस से मीलों आगे* जम्मू कश्मीर में 90 सीटों के लिए तीन चरण में चुनाव हुआ। नतीजों में कुल 56 सीटों पर चुनाव लड़ रही नेशनल कांफ्रेंस के हिस्से आई 42 सीट। यानी ओवरऑल एनसी का स्ट्राइक रेट 75 फीसदी के करीब रहा। उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी का स्ट्राइक रेट 15 फीसदी को भी पार नहीं कर सका। 39 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस 6 सीट पर सिमट गई। बीजेपी की बात करें तो, वह जम्मू की सभी 43 और कश्मीर की 47 में से केवल 19 सीट पर चुनाव लड़ रही थी। इस तरह, बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में कुल 62 उम्मीदवार उतारे। जिनमें 29 जीत गए। यानी पार्टी 47 फीसदी के स्ट्राइक रेट के साथ एनसी से काफी पीछे मगर कांग्रेस से कई कोस आगे रही। *बीजेपी का जम्मू में स्ट्राइक रेट 67 फीसदी* अब क्षेत्रवार यानी जम्मू और कश्मीर का अलग-अलग स्ट्राइक रेट देखा। जम्मू को केंद्र में रखकर बीजेपी के प्रदर्शन को देखा जाए तो वह एनसी, कांग्रेस से काफी आगे दिखती है। पार्टी ने जम्मू की सभी 43 सीटों पर अपने कैंडिडेट्स को उतारा था। इनमें 29 जीत गए। यानी बीजेपी का जम्मू में स्ट्राइक रेट 67 फीसदी रहा। वहीं, नेशनल कांफ्रेंस जम्मू की जिन 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। उनमें से 7 सीट जीत गई। मतलब ये कि एनसी जम्मू में 41 फीसदी सीट जीत पाने में वह सफल रही। जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस जम्मू में केवल 1 सीट जीत सकी। कांग्रेस जम्मू के 29 सीट पर चुनाव लड़ रही थी। इस तरह, देश की सबसे पुरानी पार्टी का जम्मू में स्ट्राइक रेट महज 3 फीसदी रहा। वहीं, नेशनल कांफ्रेंस ने कश्मीर की 47 सीटों में से 39 पर चुनाव लड़ा। इनमें से 35 सीट वह जीत गई। इस तरह एनसी का घाटी में स्ट्राइक रेट 90 फीसदी रहा, जिसको क्लीन स्वीप कहा जाना चाहिए। जबकि कश्मीर में 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही उसकी साझेदार कांग्रेस केवल 5 सीट जीत सकी। यानी वादी में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 50 फीसदी रहा।