ट्रक और टैक्सी ड्राइवर्स के लिए हाइवेज पर रेस्ट रूम बनाएगी मोदी सरकार, मिलेंगी कई अहम सुविधाएं

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ट्रक और टैक्सी चालकों के लिए, केंद्र सरकार सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर 'नई सुविधाओं के साथ आधुनिक इमारतें' विकसित करेगी, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को घोषणा की। पीएम मोदी ने दिल्ली में भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024 में कहा कि, “लाखों ट्रक और टैक्सी चालक हमारी सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का एक अभिन्न अंग हैं। अक्सर, वे कई घंटों तक काम करते हैं... उनके पास आराम करने का समय नहीं होता है, और इसलिए, सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।'

उन्होंने कहा कि सरकार इन मुद्दों के प्रति 'पूरी तरह से सचेत' है। इसलिए, मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि लंबी यात्रा के दौरान ड्राइवरों को उचित आराम मिले, हम एक पहल लेकर आ रहे हैं। इसके तहत सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर भोजन, पानी, वॉशरूम, पार्किंग, टॉयलेट आदि सुविधाओं वाली आधुनिक इमारतें बनाई जाएंगी। प्रधान मंत्री ने आगे कहा कि योजना के पहले चरण में, देश के विभिन्न हिस्सों में 1000 ऐसी इमारतें बनाई जाएंगी।

इसके अलावा मीडिल क्लास को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में बड़ी तादाद में नियो मिडिल क्लास बना है, जिसकी अपनी उम्मीदें एवं अपनी आकांक्षाएँ हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में मिडिल क्लास का दायरा भी तेज रफ़्तार से बढ़ रहा है। इसके साथ ही मिडिल क्लास की आमदनी भी बढ़ रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने बीते 10 सालों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकला है।

ISI के लिए जासूसी कर रहा सतेंद्र मेरठ से गिरफ्तार, रूस के भारतीय दूतावास में करता है काम

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डेस्क: यूपी ATS ने एक शख्स को मेरठ से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि सतेंद्र सिवाल नाम का शख्स पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी कर रहा था। सत्येंद्र रूस में भारतीय दूतावास में काम कर रहा है। एटीएस ने अपनी विज्ञप्ति में बताया कि संदिग्ध सतेंद्र सिवाल साल 2021 से रूस के भारतीय दूतावास (IBSA) के पद पर कार्यरत है। इस शख्स के पास से एटीएस ने 2 मोबाइल फोन, 1 आधार कार्ड, पैन कार्ड, पहचान पत्र और 600 रुपये नकद बरामद किए हैं।  

छद्म नाम के व्यक्तियों को भेजता था खुफिया जानकारी

उत्तर प्रदेश एटीएस ने अपनी एक अधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि एटीएस को विभिन्न गोपनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हो रही थी कि पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी ISI के हैंडलरों द्वारा कुछ छद्म नाम के व्यक्तियों से विदेश मंत्रालय भारत सरकार के कर्माचारियों को बहला फुसलाकर और धन का लालच देकर भारतीय सेना से संबंधित भारत की सामरिक व रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, गोपनीय सूचनां प्राप्त की जा रही हैं, जिससे भारत की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा को बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न होने की संभावना है। 

सूचना पर कार्रवाई करते हुए यूपी एटीएस ने सिवाल से पूछताछ की तो शुरू में उसने असंतोषजनक जवाब दिए। हालांकि, बाद में उसने जासूसी करने की बात कबूल कर ली और उसे मेरठ में गिरफ्तार कर लिया गया।

जब ताज महल में उर्स की अनुमति नहीं, तो आयोजन कैसे ? कोर्ट पहुंची हिन्दू महासभा, रोक लगाने की मांग

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ताज महल में मुगल बादशाह शाहजहां के 369वें 'उर्स' के आयोजन से तीन दिन पहले एक हिंदू संगठन ने आगरा सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर उर्स के आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ता अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी ताज महल के अंदर 'उर्स' के लिए मुफ्त प्रवेश को चुनौती दी है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई की तारीख 4 मार्च तय की है। हिंदू संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय जाट ने कहा कि उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी, जिसमें यह जानना चाहा था कि क्या 'उर्स' के आयोजन के लिए मुगल, या ब्रिटिश सरकार, या भारतीय सरकार द्वारा कोई अनुमति दी गई थी। 

जिस पर ASI ने जवाब दिया कि 'उर्स' आयोजन समिति को ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई थी। इसलिए, अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए अदालत का रुख किया है। तीन दिवसीय 'उर्स' कार्यक्रम इस साल 6 फरवरी से 8 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। यह अवधि शाहजहाँ की मृत्यु की याद में मनाई जाती है, माना जाता है कि शाहजहां ने ही 1653 में यमुना नदी के तट पर ताज महल बनवाया था, हालाँकि इस पर विवाद होता रहता है। इस कार्यक्रम को 'चादर पोश', 'चंदन', 'गुसुल' और 'कुल' सहित अन्य अनुष्ठानों द्वारा चिह्नित किया जाता है। 'उर्स' के अंतिम दिन 1,880 मीटर या उससे अधिक की 'चादर' चढ़ाई जाती है।

हिंदू महासभा की संभागीय अध्यक्ष मीना दिवाकर और जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा का कहना है कि जब ASI स्मारकों के अंदर कोई धार्मिक कार्यक्रम नहीं हो सकता है, तो 'उर्स' का आयोजन अवैध है। सौरभा शर्मा ने आगे कहा कि हिंदू महासभा काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि के आदेश की तर्ज पर ताज महल परिसर के सर्वेक्षण के लिए याचिका दायर करने का इरादा रखती है। इस बीच, 'उर्स' आयोजन समिति के अध्यक्ष सैयद इब्राहिम जैदी ने दावा किया है कि ASI इस आयोजन के लिए वार्षिक अनुमति जारी करता है और इस साल भी अनुमति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले, 'उर्स' की व्यवस्था पर चर्चा के लिए एएसआई कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई थी।

सैयद इब्राहिम जैदी ने कहा कि मुगल बादशाह शाहजहां का 'उर्स' सदियों से ताज महल में होता रहा है और यह दावा कि इसके लिए कोई अनुमति नहीं थी, पूरी तरह से 'फर्जी' है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार और उसके बाद भारत सरकार ने हमेशा 'उर्स' के लिए अनुमति दी है। अन्य खबरों में, खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ताहिर ने कहा कि कमेटी शाहजहां की कब्र पर 1,507 मीटर लंबी 'चादर' चढ़ाएगी। 'उर्स' के तीन दिनों के दौरान ताज महल में प्रवेश निःशुल्क होगा, और कार्यक्रम जल्द ही एएसआई द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।

13 या 14... कब है बसंत पंचमी? जानिए शुभ मुहूर्त और सनातन धर्म में इसका महत्व


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सनातन धर्म में बसंत पंचमी का खास महत्व है। इसे बसंत पंचमी के साथ श्री पंचमी, ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है यह त्योहार प्रत्येक वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा- अर्चना करने का विधान है। इस दिन बच्चों का उपनयन संस्कार होता था। इसके साथ ही इस दिन गुरुकुलों में शिक्षा देने का आरम्भ भी किया जाता था। इस वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी को मनाया जाएगा। 

बसंत पंचमी 2024 तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 42 मिनट से आरम्भ हो रही है, जो 14 फरवरी 2024 को दोपहर 12 बजकर 08 मिनट पर खत्म हो रही है। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी 2024 को मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी 2024 पूजा का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचम पूजा का शुभ मुहूर्त 14 फरवरी को प्रातः 7 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। बसंत पंचमी के दिन शुभ मुहूर्त 5 घंटे 34 मिनट तक है। 

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा- अर्चना की जाती है। साथ ही इस दिन सभी स्कूल-कॉलेज में मां सरस्वती की आराधना की जाती है। इस दिन मां सरस्वती को पीली मिठाई का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान एवं बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने दिया इस्तीफा, निजी कारणों का दिया हवाला

पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है. बनवारीलाल पुरोहित ने अगस्त 2021 में पंजाब के 36वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि अपने व्यक्तिगत कारणों और कुछ अन्य प्रतिबद्धताओं के कारण मैं पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक के पद से अपना इस्तीफा दे रहा हूं.

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बनवारीलाल पुरोहित ने अपने त्याग पत्र में लिखा कि व्यक्तिगत कारणों और कुछ अन्य प्रतिबद्धताओं की वजह से मैं पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक के पद से इस्तीफा दे रहा हूं, कृपया इसे स्वीकार करें

मेयर का चुनाव चर्चा में

इससे पहले पुरोहित ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. उनकी मुलाकात चंडीगढ़ महापौर चुनाव में बीजेपी की जीत के कुछ दिनों बाद हुई थी. महापौर चुनाव में तीनों पदों पर बीजेपी को जीत मिली है. इन चुनावों में कांग्रेस- आम आदमी पार्टी गठबंधन को झटका लगा और उसने पीठासीन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.

'पुरोहित और पंजाब सरकार के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं थे'

राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि बनवारी लाल पुरोहित और पंजाब सरकार के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं थे. उधर मेयर के चुनाव के बाद भी विपक्षी पार्टियां लगातार निशाना साध रही थीं. इन सबके बीच ही बनवारी लाल पुरोहित ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उनकी जगह कौन लेगा, इसके बारे में जानकारी सामने नहीं आई है. बता दें कि बनवारी लाल पुरोहित तीन बार लोकसभा सांसद रहे हैं और मध्य भारत के सबसे पुराने अंग्रेजी दैनिक 'द हितवाद' के प्रबंध संपादक रहे हैं. बेदाग छवि के पुरोहित की पहचान एक प्रख्यात शिक्षाविद्, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता राष्ट्रवादी विचारक की रही है.

दिल्ली के सीएम केजरीवाल के साथ आतिशी सिंह भी फंसी चंगुल में, घर पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम

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डेस्क: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक टीम रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूदा मंत्री और सत्तारूढ़ आप नेता आतिशी के आवास पर पहुंची है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि आम आदमी पार्टी के द्वारा विधायकों के खरीद-फरोख्त के आरोप के संबंध में दिल्ली के शिक्षा मंत्री को नोटिस देने के लिए टीम आतिशी के आवास पर गई थी। आप ने आरोप लगाया था कि भाजपा अपने 'ऑपरेशन लोटस 2.0' को लेकर विधायकों को पैसे का प्रलोभन देकर खरीदने की कोशिश कर रही है। वह आप विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

केजरीवाल से मांगा है तीन दिन में जवाब

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की मंत्री ने अपने कैंप कार्यालय के अधिकारियों को उनकी अनुपस्थिति में समन प्राप्त करने का निर्देश दिया। इससे पहले, शनिवार को दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के अधिकारियों ने विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप के संबंध में आप संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया था। अपराध शाखा के अधिकारियों ने केजरीवाल की अनुपस्थिति में सीएमओ अधिकारियों को नोटिस दिया और आप सुप्रीमो से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

आतिशी सिंह ने भाजपा पर लगाया है आरोप

आतिशी ने पहले दावा किया था कि भाजपा ने आप के कई विधायकों को अपने पक्ष में करने के लिए रिश्वत और धमकियां देकर उनसे संपर्क किया। आप नेता ने कहा "बीजेपी ने 'ऑपरेशन लोटस 2.0' लॉन्च किया है और दिल्ली में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई AAP सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। AAP के 7 विधायकों से बीजेपी ने संपर्क किया है और कहा है कि अरविंद केजरीवाल को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और फूट पार्टी को खा जाएगी। वे हमारे 21 विधायकों के संपर्क में हैं और वे हमारी सरकार को गिराने के लिए उनका इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।

आतिशी ने कहा कि उन 7 विधायकों में से प्रत्येक को 25 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है। उन्होंने सत्ता में आने के लिए 'ऑपरेशन लोटस' चलाया उन राज्यों में पिछले दरवाजे से जहां वे लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुने गए थे। महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश इसके उदाहरण हैं।'' 

आतिशी ने कहा-ऑडियो है हमारे पास

आतिशी ने आगे दावा किया कि AAP के पास 'ऑपरेशन लोटस 2.0' पर बातचीत का एक कथित ऑडियो क्लिप है और कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो पार्टी इसे सार्वजनिक डोमेन में ला सकती है। आतिशी ने कहा, "अब तक, 7 विधायकों से बीजेपी ने संपर्क किया है। हमारे पास ऐसी बातचीत का एक ऑडियो क्लिप है और जरूरत पड़ने पर इसे जारी किया जाएगा।"

जानिए, आठ अप्रैल को लगने वाले साल 2024 के पहले सूर्य ग्रहण की भारत में क्यों हो रही चर्चा, कहां दिखाई देगा

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साल का पहला सूर्य ग्रहण कई वजहों से खास है। सात साल में यह दूसरी बार पूर्ण सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2024) लगने जा रहा है। यह 8 अप्रैल सोमवार (Surya Grahan 2024) को लगेगा। यह खगोली घटना तब होगी, जब सूर्य अपनी पीक एक्टिविटी पर होगा। साल 2017 में इसके विपरीत सूरज का यह स्तर न्यूनतम था। साल 2024 में दो सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2024) लगेंगे। इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल को लगेगा। अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण नजर आएगा। ऐसा साल 2017 के बाद पहली बार होगा। उत्तरी अमेरिका में बहुत बड़े इलाके में यह दिखाई देगा।

सुबह 11 बजकर 7 मिनट पर सबसे पहले यहां दिखेगा

नासा के मुताबिक, सबसे पहले यह मेक्सिको के प्रशांत तट पर सुबह 11 बजकर 7 मिनट पर दिखेगा। जब चांद पूरी तरह से सूरज को ढंक लेगा, तो दिन में रात जैसा नजारा होगा। अमेरिका के 13 राज्यों में यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। साउथवेस्ट रिसर्च की सौर वैज्ञानिक लिसा अप्टन का कहना है कि साल 2024 में लगने वाला ग्रहण साल 2017 के ग्रहण से बहुत अलग होने वाला है, क्योंकि जो कोरोना हमें दिखाई दे रहा है, उसकी संरचना बहुत ज्यादा होगी।

8 अप्रैल 2024 को लगने वाला सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इसे खग्रास सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है। यह खगोलीय घटना तब होती है, जब सूरज और पृथ्वी के बीच से चंद्रमा गुजरता है। यह इसलिए होता है, क्योंकि धरती सूरज का चक्कर लगाती है, तो चंद्रमा धरती का चक्कर लगाता है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है तो सूर्य के पूरे या कुछ हिस्से के प्रकाश को रोकता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सिर्फ सूर्य का कोरोना नजर आता है। यह दिखाता है कि चंद्रमा के पीछे सूर्य है। आंशिक सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य का कुछ हिस्सा ही ढका होता है।

भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण, यहां आएगा नजर

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। 8 अप्रैल को लगने वाला सूर्य ग्रहण पश्चिमी यूरोप पेसिफिक, अटलांटिक, आर्कटिक मेक्सिको, उत्तरी अमेरिका, कनाडा, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भाग, इंग्लैंड के उत्तर पश्चिम क्षेत्र और आयरलैंड में नजर आएगा।

पुलिस स्टेशन में फायरिंग, बीजेपी विधायक ने शिंदे गुट के नेता को मारी गोली

#bjp_mla_ganesh_gaikwad_arrested_for_opening_fire_at_shinde_man

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भूमि विवाद के चलते मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एक नेता को गोली मारकर घायल करने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक को गिरफ्तार किया गया है। उल्हासनगर में जमीन विवाद के चलते बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ और उनके एक साथी ने शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ को पुलिस स्टेशन के अंदर गोली मार दी। दोनों एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करने के लिए शुक्रवार रात करीब 10 बजे हिल लाइन पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां पहले उनमें बहस हुई। तभी गणपत ने इंस्पेक्टर के सामने महेश पर फायरिंग किए।

अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय शिंदे ने मीडिया को बताया कि भाजपा के कल्याण से विधायक गणपत गायकवाड़ ने शुक्रवार रात उल्हासनगर इलाके में हिल लाइन पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक के कक्ष के अंदर शिवसेना की कल्याण इकाई के प्रमुख महेश गायकवाड़ पर गोलियां चलाईं। बताया जा रहा है ति महेश गायकवाड़ पर कुल 10 गोलियां चलाई गईं। इनमें से छह गोलियां महेश गायकवाड़ को लगीं। अन्य 2 गोलियां महेश गायकवाड़ के साथी राहुल पाटिल को लगीं और दो गोलियां मिसफायर हो गईं।

घटना के बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात में बीजेपी विधायक हिरासत में लिया था। शनिवार (3 जनवरी) की सुबह विधायक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसएआईटी) का गठन किया है।

वारदात के बाद एक चैनल से हुई बातचीत में गणपत गायकवाड़ ने बताया कि उन्होंने सेल्फ डिफेंस में गोली मारी, क्योंकि महेश गायकवाड़ के साथ आए लोग उनके बेटे के साथ बदसलूकी कर रहे थे।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में ‘अपराधियों का साम्राज्य’ स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

गणपत गायकवाड़, कल्याण ईस्ट सीट से भाजपा विधायक हैं। गायकवाड़ तीन बार के विधायक है और साल 2009 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। गणपत गायकवाड़ दो बार निर्दलीय विधायक रहे हैं। वहीं शिवसेना नेता महेश गायकवाड़ कोरपोरेटर हैं और सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाते हैं। महेश गायकवाड़ उल्हासनगर शिवसेना के प्रमुख भी हैं। बता दें कि भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हैं।

पुलिस स्टेशन में फायरिंग, बीजेपी विधायक ने शिंदे गुट के नेता को मारी गोली

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भूमि विवाद के चलते मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एक नेता को गोली मारकर घायल करने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक को गिरफ्तार किया गया है। उल्हासनगर में जमीन विवाद के चलते बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ और उनके एक साथी ने शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ को पुलिस स्टेशन के अंदर गोली मार दी। दोनों एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करने के लिए शुक्रवार रात करीब 10 बजे हिल लाइन पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां पहले उनमें बहस हुई। तभी गणपत ने इंस्पेक्टर के सामने महेश पर फायरिंग किए।

अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय शिंदे ने मीडिया को बताया कि भाजपा के कल्याण से विधायक गणपत गायकवाड़ ने शुक्रवार रात उल्हासनगर इलाके में हिल लाइन पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक के कक्ष के अंदर शिवसेना की कल्याण इकाई के प्रमुख महेश गायकवाड़ पर गोलियां चलाईं। बताया जा रहा है ति महेश गायकवाड़ पर कुल 10 गोलियां चलाई गईं। इनमें से छह गोलियां महेश गायकवाड़ को लगीं। अन्य 2 गोलियां महेश गायकवाड़ के साथी राहुल पाटिल को लगीं और दो गोलियां मिसफायर हो गईं।

घटना के बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात में बीजेपी विधायक हिरासत में लिया था। शनिवार (3 जनवरी) की सुबह विधायक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसएआईटी) का गठन किया है।

वारदात के बाद एक चैनल से हुई बातचीत में गणपत गायकवाड़ ने बताया कि उन्होंने सेल्फ डिफेंस में गोली मारी, क्योंकि महेश गायकवाड़ के साथ आए लोग उनके बेटे के साथ बदसलूकी कर रहे थे।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में ‘अपराधियों का साम्राज्य’ स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

गणपत गायकवाड़, कल्याण ईस्ट सीट से भाजपा विधायक हैं। गायकवाड़ तीन बार के विधायक है और साल 2009 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। गणपत गायकवाड़ दो बार निर्दलीय विधायक रहे हैं। वहीं शिवसेना नेता महेश गायकवाड़ कोरपोरेटर हैं और सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाते हैं। महेश गायकवाड़ उल्हासनगर शिवसेना के प्रमुख भी हैं। बता दें कि भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हैं।

बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी को मिलेगा भारत रत्न, पीएम मोदी ने दी जानकारी

#bharat_ratna_to_lal_krishna_advani 

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भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से नवाजा जाएगा। केंद्र की मोदी सरकार ने लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने का ऐलान किया है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर ये जानकारी साझा की है।आडवाणी बीजेपी के सबसे पुराने और बड़े नेताओं में शामिल रहे हैं।

भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने भी उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी। हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक, भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है। उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनके संसदीय हस्तक्षेप हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं।

मेरा सौभाग्य कि उनसे सीखने के अवसर मिले-पीएम मोदी

पीएम ने आगे कहा, सार्वजनिक जीवन में आडवाणी की दशकों लंबी सेवा को पारदर्शिता और ईमानदारी के प्रति अटूट निष्ठा के रूप में देखा जाता है, जिसने राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानूंगा कि मुझे उनके साथ बातचीत करने और उनसे सीखने के अनगिनत अवसर मिले।

लालकृष्ण आडवाणी के बारे में

भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के सातवें उप-प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के कराची में 8 नवंबर, 1927 को एक हिंदू सिंधी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम किशनचंद आडवाणी और मां का नाम ज्ञानी देवी है। उनके पिता पेशे से एक उद्यमी थे। शुरुआती शिक्षा उन्होंने कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल से ग्रहण की थी। इसके बाद वह हैदराबाद, सिंध के डीजी नेशनल स्कूल में दाखिला लिया। विभाजन के समय उनका परिवार पाकिस्तान छोड़कर मुंबई आकर बस गया। यहां उन्होंने लॉ कॉलेज ऑफ द बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की।

आरएसएस से की राजनीतिक सफर की शुरूआत

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जरिए अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।आडवाणी 2002 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भारत के सातवें उप प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके हैं। इससे पहले वह 1998 से 2004 के बीच भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) में गृहमंत्री रह चुके हैं। वह उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी थी। 10वीं और 14वीं लोकसभा के दौरान उन्होंने विपक्ष के नेता की भूमिका बखूबी निभाई है।