22 साल पहले संसद में घुसकर आतंकियों ने बरसाई थी गोलियां, शहीदों को मोदी-शाह समेत राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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भारत के संसद पर हमले के 22 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के कई अन्य शीर्ष नेता और मंत्री आज बुधवार को पुराने संसद भवन पहुंचे और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 दिसंबर, 2001 को संसद हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों के परिवार के सदस्यों से भी बातचीत की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी और अन्य नेता भी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद थे।

बता दें कि 13 दिसंबर 2001 को, जगदीश, मातबर, कमलेश कुमारी; नानक चंद और रामपाल, सहायक उप-निरीक्षक, दिल्ली पुलिस; दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल ओम प्रकाश, बिजेंदर सिंह और घनश्याम; और सीपीडब्ल्यूडी के माली देशराज ने आतंकवादी हमले के खिलाफ संसद की रक्षा करते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया था। अपराधी लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से संबंधित थे, जिन्होंने 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमला किया था, जिसमें पांच दिल्ली पुलिसकर्मी, दो संसद सुरक्षा सेवा कर्मी, एक CRPF कांस्टेबल और एक माली की जान चली गई थी। इसके भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप 2001-2002 भारत-पाकिस्तान गतिरोध हुआ।

13 दिसंबर, 2001 के हमले में गृह मंत्रालय और संसद लेबल वाली कार में संसद में घुसपैठ करने वाले कुल पांच आतंकवादी मारे गए थे। उस समय प्रमुख राजनेताओं सहित 100 से अधिक लोग संसद भवन के अंदर थे। बंदूकधारियों ने अपनी कार पर एक नकली पहचान स्टिकर का इस्तेमाल किया और इस तरह संसदीय परिसर के आसपास तैनात सुरक्षा को आसानी से तोड़ दिया। आतंकियों के पास एके47 राइफलें, ग्रेनेड लॉन्चर और पिस्तौलें थीं। बंदूकधारियों ने अपना वाहन भारतीय उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत (जो उस समय इमारत में थे) की कार में घुसा दिया, बाहर निकले और गोलीबारी शुरू कर दी। 

उपराष्ट्रपति के गार्ड और सुरक्षाकर्मियों ने आतंकवादियों पर जवाबी गोलीबारी की और फिर परिसर के द्वार बंद करना शुरू कर दिया। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि बंदूकधारियों को पाकिस्तान से निर्देश मिले थे और ऑपरेशन पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंसी के मार्गदर्शन में किया गया था।

कर्नाटक में आतंकी ठिकानों पर NIA की रेड, हाल ही में पुणे से पकड़ाए थे 'इस्लामिक स्टेट' के 15 दहशतगर्द, अब भी छापेमारी जारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आज बुधवार (13 दिसंबर) को आतंकी साजिश मामले में बेंगलुरु में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर तलाशी ली। NIA की कई टीमों ने मिले इनपुट के आधार पर राज्य पुलिस बल के साथ निकट समन्वय में बेंगलुरु में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की। उन संदिग्धों के परिसरों पर छापेमारी अभी भी जारी है, जिनके आतंकी संबंध हैं और वे अपने विदेशी आकाओं के निर्देश पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, संदिग्ध विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।

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यह कदम NIA द्वारा आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें 9 दिसंबर को महाराष्ट्र और कर्नाटक में कई और व्यापक छापेमारी के दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन के 15 गुर्गों को अरेस्ट कर लिया गया था। मामले में, NIA की टीमों ने पडघा-बोरीवली, ठाणे, मीरा रोड, महाराष्ट्र के पुणे और कर्नाटक के बेंगलुरु में 44 स्थानों पर छापेमारी की और आतंक और आतंक से संबंधित कृत्यों और गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 15 आरोपियों को पकड़ लिया था। 

इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) की नापाक साजिशों को ध्वस्त करने के NIA के चल रहे प्रयासों के हिस्से के रूप में की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी, आग्नेयास्त्र, तेज धार वाले हथियार, आपत्तिजनक दस्तावेज, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। ये सभी आतंकी, देश में आतंक के हिंसक कृत्यों को अंजाम देने और निर्दोष लोगों की जान लेने के लिए काम कर रहे थे। मामले में NIA की जांच से यह भी पता चला है कि आरोपी, ISIS महाराष्ट्र मॉड्यूल के सभी सदस्य, पडघा-बोरीवली से काम कर रहे थे, जहां उन्होंने पूरे भारत में आतंक फैलाने और हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रची थी। 

आरोपियों ने हिंसक जिहाद, खिलाफत और ISIS का रास्ता अपनाते हुए देश की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का लक्ष्य रखा था। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरफ्तार आरोपियों ने ग्रामीण ठाणे के पडघा गांव को 'मुक्त क्षेत्र' और 'अल-शाम' (सीरिया का इस्लामिक क्षेत्र यानी इस्लामी शासन) के रूप में स्वयं घोषित किया था। वे पद्घा आधार को मजबूत करने के लिए प्रभावशाली मुस्लिम युवाओं को अपने निवास स्थान से पद्घा में स्थानांतरित होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। मुख्य आरोपी और ISIS मॉड्यूल का नेता और प्रमुख साकिब नाचन प्रतिबंधित संगठन में शामिल होने वाले व्यक्तियों को 'बायथ' (ISIS के खलीफा के प्रति निष्ठा की शपथ) भी दिला रहा था।

बता दें कि, ISIS एक वैश्विक आतंकवादी संगठन है, जिसे इस्लामिक स्टेट (IS), इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवंत (ISIL), दाएश, इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (ISKP), ISIS विलायत खोरासन (ISIS-K), इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड शाम के नाम से भी जाना जाता है। यह संगठन देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय ISIS मॉड्यूल और सेल स्थापित करके भारत में अपना आतंकी नेटवर्क फैला रहा है। NIA ने हाल के महीनों में संगठन के जघन्य और हिंसक भारत विरोधी एजेंडे को विफल करने के लिए ISIS आतंकी साजिश मामले में कई आतंकी गुर्गों को गिरफ्तार करके बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और विभिन्न ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।

इस दिशा में अपने प्रयासों के तहत, एजेंसी ने इस साल की शुरुआत में ISIS महाराष्ट्र मॉड्यूल के खिलाफ मामला दर्ज किया और तब से, देश भर में सक्रिय विभिन्न ISIS मॉड्यूल और नेटवर्क को नष्ट करने के लिए मजबूत और ठोस कार्रवाई की है।

मध्य प्रदेश में अब 'मोहन' राज, जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्‍ला बने डिप्‍टी CM, शीर्ष नेताओं की उपस्थिति में ताजपोशी सम्पन्न

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मध्यप्रदेश में मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नेड्डा, यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित तमाम नेता रहे। 

वही मध्य प्रदेश के पश्चात् छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नेड्डा, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री एवं तमाम केंद्रीय मंत्री शपथ ग्रहण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। मध्य प्रदेश में मोहन यादव के साथ-साथ राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जबकि छत्तीसगढ़ में विजय शर्मा तथा अरुण साव को उपमुख्यमंत्री की शपथ दिलाई जाएगी। 

बता दे कि भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 163 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, कांग्रेस 66 सीट पर सिमट गई। भारतीय जनता पार्टी की विधायक दल की बैठक में सोमवार को मोहन यादव को विधायक दल का नेता चुना गया। तत्पश्चात, उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। मोहन यादव पहली बार 2013 में उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक चुने गए। तत्पश्चात, वे 2018 और 2023 में भी जीतने में सफल रहे। वे शिवराज सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे। मोहन यादव को संघ का नजदीकी माना जाता है तथा ओबीसी समाज से आते हैं।

मेरे घर तो कोई पूछने नहीं आया..', CM सिद्धारमैया की कराई गई जातिगत जनगणना पर डिप्टी सीएम शिवकुमार को भरोसा नहीं !

 कर्नाटक में जातिगत जनगणना कांग्रेस पार्टी के लिए गले की फांस बन गई है। देश के 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रचार के दौरान जातिगत जनगणना करवाने का वादा किया था, लेकिन जहाँ कांग्रेस सालों पहले जातिगत जनगणना करवा चुकी है, वहां रिपोर्ट ही जारी नहीं कर रही है। कर्नाटक भी ऐसा ही एक राज्य है, जहाँ जातिगत जनगणना पर भाजपा को घेरने वाली कांग्रेस सत्ता में है। किन्तु सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार में इस मुद्दे पर टकराव दिख रहा हैं। 

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दरअसल, दरअसल सिद्धारमैया की पहले वाली सरकार ने ही 170 करोड़ रुपए खर्च कर 2015 में जाति जनगणना करवाई थी। इसके बाद 2018 तक कांग्रेस सत्ता में रही, लेकिन उसकी रिपोर्ट जारी नहीं की गई। अब राज्य में फिर से कांग्रेस के हाथ में सत्ता है, किन्तु डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार नहीं चाहते हैं कि रिपोर्ट जारी की जाए। इसी बात पर कर्नाटक में टकराव चल रहा है। लेकिन, ये मसला अब केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रह गया है। संसद में इस पर गहमागहमी देखी गई। दरअसल, जम्मू-कश्मीर से संबंधित दो बिल पर राज्यसभा में चर्चा चल रही थी। भाजपा सांसद सुशील मोदी ने संसद में कहा कि कांग्रेस कभी भी पिछड़ों की हितैशी नहीं रही। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार का ही उदाहरण दे डाला। सदन में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से पुछा कि ''खरगे जी सदन को बताएं कि कर्नाटक में आपकी सरकार जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट कब सार्वजनिक करने वाली है, क्योंकि आपके डिप्टी सीएम (शिवकुमार) रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के खिलाफ हैं। 

इस पर जवाब देते हुए कांग्रेस सुप्रीमो खड़गे ने कहा कि सारे 'ऊंची जाति' वाले इस मसले में एक ही ओर हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार को ही घेर लिया। उन्होंने कहा कि 'वो (शिवकुमार) भी विरोध कर रहे हैं। आप (भाजपा) भी विरोध कर रहे हैं। इस मामले में दोनों एक ही साइड हैं। ये जाति से संबंधित मामला है। और ऊंची जाति के लोग आंतरिक रूप से मिले हुए होते हैं।' अब इसपर डीके शिवकुमार की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि वो जातिगत जनगणना के खिलाफ नहीं है। 

शिवकुमार ने कहा कि, ''मैं एक सिस्टमैटिक जनगणना चाहता हूं। जनगणना वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए। मेरे घर तो कोई नहीं आया मुझसे पूछने।'' हालाँकि, ऐसा कहकर शिवकुमार ने अपनी ही सरकार द्वारा कराई गई जातिगत जनगणना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए कि, जनगणना सही तरीके से नहीं कराई गई और उनके घर ही कोई पूछने नहीं आया। डीके शिवकुमार ने कहा कि वो भी पिछड़े वर्ग (OBC) से आते हैं और जातिगत जनगणना पर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में हैं।

बता दें कि, बिहार में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सामने आने के बाद से कर्नाटक में भी रिपोर्ट सामने आने की बात चल रही थी। हाल ही में सीएम सिद्धारमैया ने कर्नाटक के स्टेट कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लास के अध्यक्ष के जयप्रकाश हेगड़े का कार्यकाल बढ़ा दिया था। हेगड़े का तीन वर्ष का कार्यकाल इस साल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा था। इसके बाद सिद्धरमैया ने उन्हें जातिगत जनगणना की रिपोर्ट तैयार होने तक एक्सटेंशन दिया था, अब रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है, लेकिन जारी नहीं हो पा रही। क्योंकि, राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को ही सिद्धारमैया सरकार द्वारा कराइ गई जातिगत जनगणना पर भरोसा नहीं है।

अननैचरल सेक्स और एडल्ट्री सरकार ने नहीं मानी संसदीय पैनल की बात, पेश की नई भारतीय न्याय संहिता

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संसद के शीतकालीन सत्र के सातवें दिन (12 दिसंबर) गृह मंत्री अमित शाह ने मानूसन सत्र में पेश किए तीनों क्रिमिनल बिल वापस ले लिए। इनकी जगह कुछ सुधारों के साथ तीनों नए विधेयक फिर लोकसभा में पेश किए। विधेयक के नए संस्करण में भी संसदीय समिति की सिफारिश को दरकिनार करते हुए अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है।केंद्र सरकार ने संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक, 2023 से धारा 377 और धारा 497 को बाहर रखने का फैसला किया है।धारा 377 अप्राकृतिक यौन संबंध यानी अननेचुरल सेक्स से संबंधित है, इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में व्यभिचार यानी एडल्ट्री को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था, इसके आधार पर तलाक होते रहे हैं। उसी साल कोर्ट ने समलैंगिक कपल के बीच सहमति से सेक्स को भी अपराध से मुक्त कर दिया था। हालांकि भारतीय न्याय संहिता विधेयक में रेप और यौन अपराधों से पीड़ित लोगों की पहचान जाहिर होने से रोकने के लिए एक नई धारा 73 जोड़ी गई है। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित मामलों से निपटने के लिए प्रावधान किए गए हैं।

भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता को पहली बार 11 अगस्त को संसद में पेश किया गया था। बाद में इन बिलों को संसदीय पैनल के पास भेजा गया। शाह ने कहा कि संसदीय पैनल ने विधेयकों में सुधार की सिफारिश की थी। सरकार ने संशोधन लाने के बजाय बदलावों को शामिल करते हुए नए विधेयक लाने का फैसला किया। ये नए बिल भारतीय न्याय (सेकेंड) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (सेकेंड) संहिता और भारतीय साक्ष्य (सेकेंड) संहिता हैं। इनमें सरकार ने अननेचुरल सेक्स और एडल्ट्री (व्यभिचार) को अपराध नहीं माना। वहीं मॉब लिंचिंग में मौत की सजा बरकरार रखी है।

महादेव गेमिंग ऐप केस में बड़ी कार्रवाई, ऐप का मालिक रवि उप्पल दुबई से गिरफ्तार

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महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में भारतीय जांच एजेंसी को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है।मुख्य आरोपियों में से एक रवि उप्पल को दुबई में हिरासत में लिया गया है। इंटरपोल की तरफ से जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया है। उसे जल्द ही डिपोर्ट किया जाएगा।रवि उपप्ल के अलावा 2 अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, महादेव ऐप के दूसरे प्रमोटर और आरोपी सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं।

रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर ने एक बयान में महादेव ऐप और सट्टेबाजी घोटाले में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इन लोगों ने इसके लिए शुभम सोनी नाम के शख्स को जिम्मेवार ठहराया है। इसको लेकर ईडी ने यूएई में भारतीय दूतावास से शुभम सोनी का बयान लिया है।कथित सट्टेबाजी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के साथ-साथ मुंबई पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने उप्पल और एक अन्य प्रमोटर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसके बाद ईडी ने इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया था।

ईडी ने अक्टूबर में छत्तीसगढ़ के रायपुर में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत के समक्ष उप्पल और इंटरनेट-आधारित प्लेटफॉर्म के एक अन्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग आरोप पत्र दायर किया था। 

बता दें कि दुबई में बैठे प्रमोटर्स पर 60 से ज्यादा अवैध ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। ईडी ने दावा किया कि ये तकरीबन 6 हजार करोड़ का घोटाला है। इस मामले में ईडी ने 14 लोगों को आरोपी बनाया है, जिसमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, विकास छाबडि़या, चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, अनिल दम्मानी, सुनिल दम्मानी, विशाल आहूजा, नीरज आहूजा, सृजन एसोसिएट के संचालक पूनाराम वर्मा और शिवकुमार वर्मा, यशोदा वर्मा, पवन नत्थानी है।

दरअसल, भारत में छत्तीसगढ़ समेत कई अलग-अलग राज्यों के बड़े शहरों में महादेव बेटिंग ऐप के करीब 30 कॉल सेंटर खोले गए थे। इन कॉल सेंटर को बाकायदा एक चेन बनाकर बेहद शातिर तरीके से चलाया जा रहा था।महादेव बेटिंग ऐप में रवि उप्पल न केवल सौरभ चंद्राकर का राइट हैंड है, बल्कि पार्टनर भी है। पूरे देश भर में इसके 1200 ब्रांच हैं और दावा किया जा रहा है कि हर महीने दोनों आरोपी की कमाई 90 करोड़ है। कहा जा रहा है कि महादेव ऐप को प्रमोट करने के लिए कई बड़े बिजनेसमैन और बॉलीवुड स्टार्स इनके संपर्क में थे। आरोपी रवि उप्पल महादेव ऐप का पूरा हवाला का काम संभालता था।

दरअसल, इसी साल फरवरी महीने में दुबई में महादेव ऑनलाइन गेमिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की शादी थी, जिसमें चार्टर्ड प्लेन से तकरीबन 17 बॉलीवुड हस्तियों को बुलाया गया था, जहां पर उनका स्टेज परफॉर्मेंस भी था। आरोप है कि इस परफॉर्मेंस के बदले में तमाम कलाकारों को हवाला के जरिए उन्हें परफॉर्मेंस के बदले करोड़ों रुपए दिया गया। साथ ही रणबीर कपूर पर आरोप है कि उन्होंने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप की एक सपोर्टिंग ऐप को प्रमोट किया था। यही वजह है कि उन तमाम कलाकारों को, जो वहां परफॉर्मेंस में शामिल थे, जांच के दायरे में शामिल किया है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आज नए सीएम की ताजपोशी, पीएम मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह में होंगे शामिल

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 प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का नया सीएम चुन लिया है। इन तीन राज्यों में से मध्य प्रदेश के नए सीएम मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आईज शपथ लेंगे। मध्य प्रदेश में मोहन यादव सुबह साढ़े 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय शाम 4 बजे सीएम पद की शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दोनों समारोह में मौजूद रहेंगे। 

मध्‍य प्रदेश के लाल परेड ग्राउंड के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आज दोपहर शपथ ग्रहण समारोह होगा। नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ दोनों डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला भी शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। कई राज्यों के मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं।

वहीं छत्तीसगढ़ की बात करें तो विष्णुदेव साय के साथ उनके मंत्रिमंडल के सदस्य भी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में शपथ ग्रहण करेंगे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी ऩड्डा सहित कई नेताओं के शामिल होन की संभावना है।

दोनों ही राज्यों में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बीजेपी की ओर जानकारी दी गई है कि दोनों ही राज्यों में आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे।

सियाचिन ऑपरेशनल पोस्ट पर तैनात होने वाली पहली मेडिकल ऑफिसर बनीं फातिमा वसीम, 15 हजार फीट की ऊंचाई पर पोस्टिंग

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महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से कम नहीं हैं, बशर्ते उन्हें मौका मिला। सियाचिन ग्लेशियर में सेना की ऑपरेशनल पोस्ट तैनात होने वाली कैप्टन फातिमा वसीम ने ऐसी ही एक उपलब्धियां हासिल की है। सियाचिन ग्लेशियर में सेना की ऑपरेशनल पोस्ट पर पहली बार महिला मेडिकल ऑफिसर की तैनाती की गई है। कैप्टन फातिमा वसीम को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी पोस्टिंग 15 हजार 200 फीट की ऊंचाई पर होगी। सियाचिन ग्लेशियर को दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई वाले युद्ध स्थल के रूप में जाना जाता है और यह भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास स्थित है। 

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने एक्स पर एक वीडियो शेयर कर इस बात की जानकारी दी है। वीडियो में सियाचिन बैटल स्कूल में फातिमा ट्रेनिंग लेती दिखीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "उन्हें (कैप्टन फातिमा वसीम) सियाचिन बैटल स्कूल में कठोर प्रशिक्षण के बाद 15,200 फीट की ऊंचाई पर एक पद पर शामिल किया गया था, जो उनकी अदम्य भावना और उच्च प्रेरणा को दर्शाता है।" भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर ने कैप्टन फातिमा वसीम की उपलब्धि को बताया। साथ ही इसका जश्न मनाने के लिए पोस्ट में एक वीडियो भी अपलोड किया।

स्नो लेपर्ड ब्रिगेड की पहली मेडिकल ऑफिसर बनी थीं कैप्टन गीतिका

इससे पहले 5 दिसंबर 2023 को सेना ने बताया कि स्नो लेपर्ड ब्रिगेड की कैप्टन गीतिका कौल पहली महिला मेडिकल ऑफिसर बनीं थीं। उन्हें सियाचिन की बैटलफील्ड पर तैनात किया गया है, जिसकी ऊंचाई 15,600 फीट है। कैप्टेन गीतिका ने अपनी तैनाती को लेकर सेना का आभार जताया था। उन्होंने कहा कि वे देश के लिए अपना हर कर्तव्य निभाएंगी। जान दांव पर लगा कर देश की हिफाजत करेंगी।

गणतंत्र दिवस पर भारत नहीं आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जनवरी में होने वाली क्वाड की बैठक भी टली, जानें किया है वजह

#s_president_joe_biden_not_travelling_to_india_for_republic_day

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए भारत नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा भारत में जनवरी में होने वाली क्वाड समिट भी टाल दी गई है। ये बैठक 26 जनवरी के आस पास होने वाली थी। ये जानकारी भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने दी थी।बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें चीफ गेस्ट के तौर पर आमंत्रित किया था।भारत ने अगले वर्ष जनवरी में क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के तहत गणतंत्र दिवस समारोह के लिए राष्ट्रपति बाइडन को आमंत्रित किया था।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक क्वाड की मीटिंग के लिए भारत ने जो शेड्यूल बनाया है उस पर बाकी देश सहमत नहीं हैं। भारत पहले 27 जनवरी को शिखर सम्मेलन आयोजित करने की संभावना तलाश रहा था।क्वाड के मेंबर देश ऑस्ट्रेलिया का नेशनल डे भी 26 जनवरी को होता है। इसके चलते एंथनी अल्बनीज उस वक्त क्वाड की मीटिंग अटेंड नहीं कर सकते। इसके चलते अब जापान के प्रधानमंत्री फुमिया किशिदा के भारत आने की भी ज्यादा उम्मीद नहीं है।

आखिरी बार 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस के समारोह में शामिल हुए थे। अपनी 3 दिन की यात्रा में ओबामा ने PM मोदी के साथ मन की बात कार्यक्रम में भी शिरकत की थी।

2023 की क्वाड मीटिंग जापान के हिरोशिमा शहर में हुई थी। पहले ये समिट ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में होनी थी। हालांकि, उस वक्त अमेरिका में कर्ज के संकट के चलते बाइडेन के कहने पर इसे टाल दिया था। इसे बाद में G7 देशों की बैठक के साथ शेड्यूल किया गया। हिरोशिमा में पीएम मोदी ने 2024 की बैठक भारत में होने की घोषणा की थी। इसके लिए सभी सदस्य देशों के प्रमुखों को भारत आना होगा। क्वाड की अध्यक्षता हर साल सभी सदस्य देशों के बीच रोटेट होती है। 2023 में इसकी अध्यक्षता जापान के पास रही।

उमर अब्दुल्ला को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, पत्नी से तलाक की मांग वाली याचिका खारिज

#high_court_refuses_omar_abdullah_divorce_plea

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मंगलवार को अब्दुल्ला की अलग रह रही पत्नी से तलाक की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी।अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि क्रूरता के आरोप अस्पष्ट और अस्वीकार्य हैं। पारिवारिक अदालत के इस विचार में हमें कोई खामी नहीं मिली है। अपीलकर्ता ऐसे किसी भी कार्य को साबित करने में विफल रहे हैं।

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उमर अब्दुल्ला ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी।दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के सामने उन्होंने क्रूरता का हवाला देकर अपनी पत्नी से तलाक की अर्जी दायर की थी। लेकिन निचली अदालत ने भी उनकी अर्जी को खारिज कर दी थी। उसके बाद उमर ने ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिसने उमर अब्दुल्ला को अपनी पत्नी से तलाक देने से इनकार कर दिया था।

हाई कोर्ट फैमिली कोर्ट के आदेश से सहमत था कि उमर अब्दुल्ला द्वारा पायल अब्दुल्ला के खिलाफ क्रूरता के आरोप अस्पष्ट हैं। हाई कोर्ट ने कहा, उमर अब्दुल्ला पायल अब्दुल्ला द्वारा क्रूरता के किसी भी कृत्य को साबित करने में विफल रहे, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। हमें अपील में कोई योग्यता नहीं मिली। इसे खारिज किया जाता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई खामी नहीं। क्रूरता के आरोप भी साफ नहीं थे कि आखिर पायल किस तरह से उन्हें परेशान करती थीं।

उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला की शादी सन 1994 में हुई थी। उमर के मुताबिक, वे साल 2009 से अलग रह रहे हैं। इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने तलाक की याचिका दी थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने अगस्त 2016 में खारिज कर दिया था। फैमिली कोर्ट के उसे फैसले को उमर अब्दुल्ला ने सितंबर 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।