गौरैया के लिए संवेदनशील पहल, कटका क्लब ने लगाए जलपात्र और घोंसले

सुलतानपुर । कटका क्लब सामाजिक संस्था द्वारा उमरी (नगरहवा) सुदनापुर बाजार में “गौरैया आओ मेरे देश” अभियान के अंतर्गत पक्षियों के संरक्षण हेतु एक सराहनीय पहल की गई। अभियान के तहत बाजार क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों के लिए जलपात्र स्थापित किए गए तथा उनके रहने के लिए घोंसलों की भी व्यवस्था की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व विभु शुक्ल ने किया। इस अवसर पर संस्था के प्रदेश प्रभारी डॉ. ऋषभदेव शुक्ला ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण गौरैया जैसे छोटे पक्षियों की संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में यह अभियान न केवल जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है, बल्कि लोगों को पक्षी संरक्षण के प्रति प्रेरित भी कर रहा है।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. सौरभ मिश्र ‘विनम्र’ ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में जलपात्र अवश्य रखें और पक्षियों के लिए सुरक्षित व अनुकूल वातावरण बनाने में सहयोग करें। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण एवं पक्षियों को बचाने का संकल्प लिया और संस्था के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वही कार्यक्रम के दौरान बृजेंद्र मिश्र,रवि शंकर शुक्ल,राघवेन्द्र शुक्ला,सौम्य शुक्ला,डॉ शिखा शुक्ला, श्रेया शुक्ला,श्रीमती राजकुमारी शुक्ला, सुशांत शुक्ला,शुभांशी शुक्ला, शौर्य शुक्ला, तेजस्व शुक्ला आदि लोग उपस्थित रहे।
देवर ने काटे सागौन के एक दर्जन पेड़, भाभी ने वन विभाग से शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की
गोंडा।जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत पारिवारिक विवाद के चलते हरे सागौन के पेड़ काटने का मामला सामने आया है।एक गांव निवासी महिला ने अपने देवर पर खेत में लगे 12 सागौन के पेड़ कटवाकर ले जाने का आरोप लगाया है।पीड़िता के अनुसार उसके घर के पीछे स्थित खेत में सागौन के पेड़ लगे थे।शनिवार भोर में देवर ने कथित तौर पर चोरी छिपे इन पेड़ों को कटवाकर मौके से हटवा दिया,जिसकी जानकारी परिजनों को सुबह हुई।सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची,जिसने दोनों पक्षों को थाने आने के लिए कहा।इसके बाद भाभी ने वन विभाग को लिखित शिकायत दर्ज कराया है और कार्रवाई की मांग किया है।मामले में क्षेत्रीय वन दरोगा कमल सिंह ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है।उन्होंने आश्वासन दिया कि घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हेमन्त सोरेन ने वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती पर अर्पित की भावपूर्ण श्रद्धांजलि; कहा- झारखंड वीरों की भूमि है

*मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन आज हूल विद्रोह के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है।

झारखंड प्रदेश भारतवर्ष का एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनेक वीर सपूतों ने जन्म लिया। इस राज्य के आदिवासी तथा मूलवासियों ने जल, जंगल, जमीन की संरक्षा एवं अपने हक-अधिकार की लड़ाई तब से लड़ी जब देश के लोगों ने आजादी का सपना नहीं देखा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अन्याय ,शोषण और अत्याचार के विरुद्ध ऐतिहासिक बिगुल फूंका, जो हम सबों को संघर्ष ,साहस और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। झारखंड के वीर सपूतों ने अलग-अलग समय काल में अपने दायित्वों एवं राज्य के प्रति अपने आप को समर्पित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू जयंती का यह शुभ दिन भारत के इतिहास के पन्नों में अमिट रूप से दर्ज है। आज के दिन हम सभी लोग वीर शहीद सिदो-कान्हू के संघर्ष, अदम्य साहस और उनके आदर्श को याद करते हैं। इन महान विभूतियों को उनके जयंती पर आज पूरे आदर और सम्मान के साथ अलग-अलग जगहों पर स्थापित उनकी प्रतिमा, तस्वीर, जन्मस्थली तथा शहादत स्थल पर लाखों की संख्या में लोग भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें शत-शत नमन करते हैं।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज के दिन देश के आदिवासी समुदाय सहित पूरे देशवासी गर्व महसूस करते हैं कि ऐसे वीर सपूतों ने इस धरती पर जन्म लिया और यहां के लोगों के साथ-साथ संपूर्ण व्यवस्था को एक न समाप्त होने वाली दिशा देने का काम किया।

चारधाम यात्रा 2026: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 6 वरिष्ठ अफसरों की निगरानी में पूरी व्यवस्था

* 19 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा के लिए 7 हजार पुलिसकर्मी तैनात, आपदा प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण पर विशेष जोर

देहरादून। उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
यात्रा मार्गों की निगरानी के लिए 2 एडीजी और 4 आईजी रैंक के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गंगोत्री धाम मार्ग का निरीक्षण एडीजी वी. मुरुगेशन, जबकि बद्रीनाथ धाम मार्ग की मॉनिटरिंग एडीजी एपी अंशुमन करेंगे। हरिद्वार पड़ाव की जिम्मेदारी आईजी विमी सचदेवा को दी गई है। वहीं केदारनाथ धाम मार्ग पर आईजी नीलेश आनंद भरणे, यमुनोत्री धाम मार्ग पर आईजी अनंत शंकर ताकवाले और ऋषिकेश-लक्ष्मणझूला-मुनिकीरेती क्षेत्र की निगरानी आईजी सुनील कुमार करेंगे। राज्य के पुलिस महानिदेशक द्वारा इन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
सुरक्षा के लिहाज से यात्रा क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 43 जोन और 149 सेक्टर में विभाजित किया गया है। करीब 7 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। साथ ही सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए एटीएस की टीमें भी प्रमुख धामों में मौजूद रहेंगी।
आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए 80 स्थानों पर आपदा राहत टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा 37 जगहों पर एसईआरएफ और 8 स्थानों पर एनडीआरएफ की टीमें भी मुस्तैद रहेंगी।
यात्रा के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए 118 पार्किंग स्थलों को चिन्हित किया गया है। हालांकि प्रशासन के सामने 52 बॉटलनेक, 109 भूस्खलन संभावित क्षेत्र, 274 दुर्घटना संभावित जोन और 61 ब्लैक स्पॉट बड़ी चुनौती बने हुए हैं।सरकार का दावा है कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए हर स्तर पर ठोस तैयारी की गई है।
दशमेश पब्लिक स्कूल रामराज में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया
मेरठ/बहसुमा/रामराज। दशमेश पब्लिक स्कूल, रामराज में बैसाखी पर्व बड़े ही उत्साह, उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रधानाचार्य आमिर खान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आकर्षक एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। नृत्य प्रस्तुतियों में सीरत, गुरताज, विक्रमवीर, हरजस, हरकिरत, गुनिका, समृद्धि, रोज़लिन, मनप्रीत, प्रभलीन एवं मन्नत ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

वहीं भाषण प्रतियोगिता में भूमि, ऐश्वी एवं शिवांशी ने बैसाखी पर्व के धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार प्रभावी ढंग से व्यक्त किए।

कार्यक्रम को सफल एवं यादगार बनाने में स्वाति अरोड़ा, मनजोत कौर, हर्षिका, गुरजीत, गुरविंदर, ज्योति, स्वाति सुधा, साक्षी, अनिकेत, धनवीर, विजय, निखिल एवं अशोक का विशेष योगदान रहा।

अंत में विद्यालय प्रबंधन ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को बैसाखी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
थारू समाज को बड़ी राहत: मुकदमे वापस होंगे, हजारों परिवारों को मिला जमीन का अधिकार
* लखीमपुर खीरी में ₹817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, सीएम योगी की माफियाओं को कड़ी चेतावनी

लखीमपुर खीरी/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू समाज के लोगों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी कीमत पर थारू समाज पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा और सरकार उनके सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नदियों के कटाव से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भौमिक अधिकार पट्टों का वितरण किया। इसके साथ ही पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला गोकर्णनाथ विधानसभा क्षेत्रों में ₹817 करोड़ लागत की 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से अपने अधिकारों से वंचित इन परिवारों को आज जमीन का मालिकाना हक मिल रहा है, जो “अधिकार से आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान” की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि 4356 थारू परिवारों को 5338 हेक्टेयर और 2350 अन्य परिवारों को 4251 हेक्टेयर भूमि का अधिकार दिया गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले संवेदनशीलता का अभाव था, जबकि वर्तमान सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि माफिया बनने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें “मिट्टी में मिलने” के लिए तैयार रहना होगा।
सीएम ने यह भी कहा कि सरकार थारू समाज को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। खीरी में स्थापित थारू हस्तशिल्प कंपनी के जरिए उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। किसानों के मुद्दे पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और आपदा राहत के तहत मदद दी जाएगी। जनहानि और पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने लखीमपुर खीरी के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि अब जिले की पहचान दुधवा नेशनल पार्क, गोला गोकर्णनाथ कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं से बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” नहीं, बल्कि “वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज” की दिशा में काम हो रहा है। कार्यक्रम में कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” ऐतिहासिक कदम, महिलाओं को मिलेगा निर्णय में भागीदारी का अधिकार: बेबी रानी मौर्य


* 33 प्रतिशत आरक्षण से संसद-विधानसभाओं में बढ़ेगा महिला प्रतिनिधित्व, लोकतंत्र होगा और अधिक समावेशी

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने शनिवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण प्रक्रिया में सशक्त भागीदार और निर्णयकर्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना उपाध्याय और महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री ममता पांडेय भी मौजूद रहीं।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह कानून देश की करोड़ों महिलाओं के सम्मान और अधिकारों का राष्ट्रीय संकल्प है। संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक प्रावधान लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाएगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। “भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं है—इसी अंतर को समाप्त करने के लिए यह कानून आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
मौर्य ने बताया कि वैश्विक अनुभव दर्शाते हैं कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में नीतियां अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनती हैं। साथ ही जेंडर गैप कम होने से आर्थिक विकास को भी गति मिलती है।
उन्होंने पिछले एक दशक में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ाव बढ़ा और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उन्हें मिला। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे कदमों ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है।
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रभावी नेतृत्व देती हैं। अब यही मॉडल संसद और विधानसभाओं में भी लागू होगा, जिससे नीति निर्माण अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनेगा।
मंत्री ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” केवल आरक्षण का प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक व्यापक सुधार है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है।
मैरिजहाल के तारकोल गोदाम में लगी आग,5 ड्रम तारकोल जलकर राख
*आग की चपेट में आने से प्लास्टिक ड्रम भी जले

गोंडा।जिले के इटियाथोक थाना क्षेत्र के इटियाथोक बाजार में स्थित परमजीत सिंह ठेकेदार के मैरिज हाल के गोदाम में भीषण आग लग गई।अज्ञात कारणों से लगी इस आग में पांच तारकोल ड्रम व कई प्लास्टिक ड्रम जलकर राख हो गये,जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।स्थानीय लोगों और फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।यह घटना इटियाथोक कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत हुई।आग लगने के बाद यह देखते ही देखते यह पास रखे अन्य चार तारकोल ड्रमों तक पहुंच गई और फिर इसने विकराल रूप धारण कर लिया।आग की चपेट में आने से मैरिजहाल के अंदर रखा अन्य सामान भी जलकर राख हो गया।बताया जाता है कि परमजीत सिंह लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार हैं।उन्होंने एक साल पहले मैरिजहाल का निर्माण कराया था।लेकिन व्यवसाय न चलने के कारण इसे बंद कर दिया था और इसे अपने गोदाम के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।मामले में इटियाथोक थानाध्यक्ष कमलाकांत त्रिपाठी ने बताया कि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि 4 - 5 तारकोल के ड्रम और कई प्लास्टिक ड्रम पूरी तरह से जल गए हैं।फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाया गया है।परमजीत सिंह द्वारा नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।समय रहते आग बुझा लिया गया है अन्यथा की स्थिति में यदि आसपास आबादी में आग फैल जाती तो बड़ी घटना हो सकती थी।
झारखंड में 'चारा घोटाले' की आहट: बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, ट्रेज़री घोटाले की CBI जाँच की मांग!

झारखंड में पिछले कुछ दिनों से उजागर हो रहा ट्रेज़री घोटाला अब पूरे देश में गंभीर चिंता और चर्चा का विषय बन चुका है। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं प्रतीत होता, बल्कि यह एक व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। परिस्थितियाँ इस प्रकार बनती दिख रही हैं जैसे चारा घोटाला के काले अध्याय की पुनरावृत्ति हो रही हो। जिस प्रकार चारा घोटाले में डोरंडा ट्रेज़री से 140 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई थी, उसी तरह वर्तमान में झारखंड के कई जिलों में, पुलिस विभाग के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ रहे हैं।

अब तक उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, इस घोटाले की पुष्टि बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू जैसे जिलों में हो चुकी है। केवल इन जिलों से ही 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का संकेत मिला है। यह आँकड़ा अपने आप में गंभीर है, लेकिन जिस गति से नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि यह घोटाला कहीं अधिक व्यापक और गहरा हो सकता है। इस संदर्भ में मैं आपका ध्यान निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ :-

1. प्रारंभिक स्तर पर यह मामला केवल बोकारो जिले तक सीमित प्रतीत हो रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ी और परतें खुलती गईं, यह स्पष्ट हो गया कि अवैध निकासी का यह जाल हजारीबाग, गढ़वा, साहिबगंज और पलामू तक फैल चुका है। इससे यह प्रतीत होता है कि यह कोई स्थानीय या सीमित स्तर का घोटाला नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में फैला एक संगठित आर्थिक अपराध है। अतः इसकी जाँच भी राज्यव्यापी स्तर पर, निष्पक्ष और गहन तरीके से कराई जानी आवश्यक है।

2. बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताना वास्तविकता से परे प्रतीत होता है। यह मानना तर्कसंगत नहीं है कि एक अकेला लेखपाल ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ कर, किसी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में बदलाव कर, करोड़ों रुपये की अवैध निकासी जैसे जटिल षड्यंत्र को अपने दम पर अंजाम दे सकता है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क और उच्चस्तरीय मिलीभगत से जुड़ा हुआ है।

3. और भी गंभीर तथ्य यह है कि बोकारो जिले में उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन की राशि अनु पांडे के खाते में 63 बार स्थानांतरित होती रही और पूरे पुलिस महकमे को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। यह स्थिति अत्यंत संदिग्ध है और यह मानना कठिन है कि बिना वरीय पुलिस अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण के ऐसा संभव हो सकता है।

4. इस पूरे प्रकरण में एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कौशल पांडेय जैसे आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, बोकारो के पूर्व पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक पटेल मयूर कनैयालाल तथा पूर्व डीआईजी (बजट) नौशाद आलम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए थे। यह तथ्य इस ओर संकेत करता है कि आरोपी को न केवल संरक्षण प्राप्त था, बल्कि उसे संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन भी मिला हुआ था।

5. घोटाले की राशि भी लगातार बढ़ती जा रही है। बोकारो में जहाँ प्रारंभिक आँकड़ा 3.5 करोड़ रुपये का बताया गया था, वह बढ़कर 4.5 करोड़ और फिर 6 करोड़ तक पहुँच गया। इसी प्रकार हजारीबाग में यह राशि बढ़ते-बढ़ते 28 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। केवल दो जिलों में ही प्रारंभिक जाँच में लगभग 35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि होना अत्यंत गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यदि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच कराई जाए, तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है और चारा घोटाला जैसे चर्चित घोटाले को भी पीछे छोड़ सकता है।

6. यह सर्वविदित है कि विभिन्न जिलों में ट्रेज़री से होने वाली निकासी की निगरानी की जिम्मेदारी डीडीओ, अर्थात् संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की होती है, जिसे सामान्यतः डीएसपी (मुख्यालय) को सौंप दिया जाता है। ऐसे में इस पूरे घोटाले में जिला स्तर के डीएसपी और एसपी की भूमिका की निष्पक्ष और गहन जाँच होना अत्यंत आवश्यक है।

7. इसके अतिरिक्त, इस पूरे घोटाले में JAP-IT की भूमिका की जाँच भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि तकनीकी स्तर पर किस प्रकार की हेराफेरी की गई और किन लोगों की इसमें संलिप्तता रही।

8. यह भी उल्लेखनीय है कि झारखंड में ट्रेज़री से अवैध निकासी की घटनाएँ कोई नई बात नहीं हैं। आपके कार्यकाल में इससे पूर्व भी ऊर्जा विभाग से लगभग 100 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग से लगभग 10 करोड़ रुपये तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से लगभग 23 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मामले में तो माननीय न्यायालय को हस्तक्षेप करते हुए जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपनी पड़ी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस विभाग में हुआ यह ट्रेज़री घोटाला किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि एक बड़े और संगठित रैकेट की कड़ी है, जिसमें पूरे राज्य में सुनियोजित तरीके से सरकारी धन की लूट की जा रही है।

ऐसी स्थिति में, जब इस पूरे मामले में ऊपर से लेकर नीचे तक कई पुलिस अधिकारी संदेह के घेरे में हों, तब उसी विभाग द्वारा जाँच कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन होगा। निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि इस पूरे मामले की जाँच किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी द्वारा कराई जाए।

अतः आपसे आग्रह है कि इस बहुचर्चित और गंभीर ट्रेज़री महाघोटाले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से अथवा झारखंड उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जाँच के माध्यम से कराई जाए, ताकि सत्य उजागर हो सके और दोषियों को कठोरतम दंड मिल सके।

राजकोष कंगाल,सिस्टम बेहाल,अधिकारी कर्मचारी के भुगतान पर सवाल - प्रतुल शाह देव


भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने आज प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन की पराकाष्ठा का आरोप लगाया।प्रतुल ने कहा कि सरकार का पूरा वित्तीय प्रबंधन बैठ गया है। 26 वर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी महीने के ग्यारहवें दिन भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। प्रतुल ने बताया कि सरकार के वेतन पर सीधे तौर पर 2,35,930 अधिकारी और कर्मचारी है। संविदा कर्मी और आउटसोर्स कमी की संख्या लगभग 40,000 से 45,000 के आसपास है।यानी कुल 2,75,000 लोगों को 11 तारीख बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला है।प्रतुल ने कहा करीब कल 15 लाख लोग इन वेतन कर्मियों पर आश्रित है।इनके बीच राशन का लाला पड़ गया है,बच्चों की फीस नहीं दे पा रहे, ईएमआई नहीं भर पा रहे हैं और घर की पूरी अर्थव्यवस्था बैठ गई है। प्रतुल ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर झारखंड की सरकार भी वेतन देने के लिए कर्ज लेने जा रही या किसी एडवांस का इंतजार कर रही है?

प्रतुल ने कहा कि आमतौर पर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में दो-तीन दिनों में बजट को राजपाल की स्वीकृति के बाद 5 अप्रैल तक भुगतान होता रहा है। लेकिन इस बार सरकार के वित्तीय मिसमैनेजमेंट के कारण पैसा ही नहीं है।यह नहीं है कि सरकार को पता नहीं था उसके पास पैसा नहीं है।क्योंकि 31 मार्च को ही सरकार बजट का आवंटित 22,000 करोड़ को इसलिए नहीं खर्च पर कर पाई थी क्योंकि उसके पास कोई पैसा ही नहीं था।यह भी वित्तीय कुप्रबंधन का नतीजा था कि सरकार ने जितने का बजट बनाया था, उस हिसाब से राजस्व की वसूली नहीं हो पाई। 31 मार्च को तो ' वेज एंड मिन्स एडवांस' के जरिए कुछ स्थिति बची। प्रतुल ने कहा कि जो केंद्र सरकार पर सौतेले दर्जे का आरोप लगाते हैं,उन्हें याद रखना चाहिए की 31 मार्च को ही केंद्र सरकार ने राज्य को ₹2300 करोड़ ग्रामीण विकास, पंचायती राज में और ₹392 करोड़ नगर विकास को ट्रांसफर किया।उसके बाद भी खजाना खाली हो गया।

मुख्यमंत्री के शीश महल के लिए 100 करोड़ का बजट,लेकिन कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं 

प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने मुख्यमंत्री आवास के शीश महल के लिए 100 करोड़ के लगभग का बजट का आवंटन कर दिया। कैबिनेट में से पास भी कर दिया ।टेंडर भी निकल गया ।सिर्फ मूल भवन की कीमत 67 करोड़ है। इंटीरियर और डेकोरेशन और टेंडर के लागत में वृद्धि को नहीं जोड़ा गया है ।यानी स्विमिंग पूल ,जकूजी, ऑटोमैटिक मसाज रूम वाले 100 करोड़ के शीश महल के लिए सरकार के पास पैसा है। लेकिन 3,75,000 वेतन भोगी अधिकारी,कर्मचारी और उन पर आश्रित 15 लाख लोगों के पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। यही है अबुआ सरकार की रियलिटी चेक।

गौरैया के लिए संवेदनशील पहल, कटका क्लब ने लगाए जलपात्र और घोंसले

सुलतानपुर । कटका क्लब सामाजिक संस्था द्वारा उमरी (नगरहवा) सुदनापुर बाजार में “गौरैया आओ मेरे देश” अभियान के अंतर्गत पक्षियों के संरक्षण हेतु एक सराहनीय पहल की गई। अभियान के तहत बाजार क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों के लिए जलपात्र स्थापित किए गए तथा उनके रहने के लिए घोंसलों की भी व्यवस्था की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व विभु शुक्ल ने किया। इस अवसर पर संस्था के प्रदेश प्रभारी डॉ. ऋषभदेव शुक्ला ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण गौरैया जैसे छोटे पक्षियों की संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में यह अभियान न केवल जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है, बल्कि लोगों को पक्षी संरक्षण के प्रति प्रेरित भी कर रहा है।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. सौरभ मिश्र ‘विनम्र’ ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में जलपात्र अवश्य रखें और पक्षियों के लिए सुरक्षित व अनुकूल वातावरण बनाने में सहयोग करें। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण एवं पक्षियों को बचाने का संकल्प लिया और संस्था के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वही कार्यक्रम के दौरान बृजेंद्र मिश्र,रवि शंकर शुक्ल,राघवेन्द्र शुक्ला,सौम्य शुक्ला,डॉ शिखा शुक्ला, श्रेया शुक्ला,श्रीमती राजकुमारी शुक्ला, सुशांत शुक्ला,शुभांशी शुक्ला, शौर्य शुक्ला, तेजस्व शुक्ला आदि लोग उपस्थित रहे।
देवर ने काटे सागौन के एक दर्जन पेड़, भाभी ने वन विभाग से शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की
गोंडा।जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत पारिवारिक विवाद के चलते हरे सागौन के पेड़ काटने का मामला सामने आया है।एक गांव निवासी महिला ने अपने देवर पर खेत में लगे 12 सागौन के पेड़ कटवाकर ले जाने का आरोप लगाया है।पीड़िता के अनुसार उसके घर के पीछे स्थित खेत में सागौन के पेड़ लगे थे।शनिवार भोर में देवर ने कथित तौर पर चोरी छिपे इन पेड़ों को कटवाकर मौके से हटवा दिया,जिसकी जानकारी परिजनों को सुबह हुई।सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची,जिसने दोनों पक्षों को थाने आने के लिए कहा।इसके बाद भाभी ने वन विभाग को लिखित शिकायत दर्ज कराया है और कार्रवाई की मांग किया है।मामले में क्षेत्रीय वन दरोगा कमल सिंह ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है।उन्होंने आश्वासन दिया कि घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हेमन्त सोरेन ने वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती पर अर्पित की भावपूर्ण श्रद्धांजलि; कहा- झारखंड वीरों की भूमि है

*मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन आज हूल विद्रोह के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है।

झारखंड प्रदेश भारतवर्ष का एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनेक वीर सपूतों ने जन्म लिया। इस राज्य के आदिवासी तथा मूलवासियों ने जल, जंगल, जमीन की संरक्षा एवं अपने हक-अधिकार की लड़ाई तब से लड़ी जब देश के लोगों ने आजादी का सपना नहीं देखा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अन्याय ,शोषण और अत्याचार के विरुद्ध ऐतिहासिक बिगुल फूंका, जो हम सबों को संघर्ष ,साहस और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। झारखंड के वीर सपूतों ने अलग-अलग समय काल में अपने दायित्वों एवं राज्य के प्रति अपने आप को समर्पित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू जयंती का यह शुभ दिन भारत के इतिहास के पन्नों में अमिट रूप से दर्ज है। आज के दिन हम सभी लोग वीर शहीद सिदो-कान्हू के संघर्ष, अदम्य साहस और उनके आदर्श को याद करते हैं। इन महान विभूतियों को उनके जयंती पर आज पूरे आदर और सम्मान के साथ अलग-अलग जगहों पर स्थापित उनकी प्रतिमा, तस्वीर, जन्मस्थली तथा शहादत स्थल पर लाखों की संख्या में लोग भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें शत-शत नमन करते हैं।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज के दिन देश के आदिवासी समुदाय सहित पूरे देशवासी गर्व महसूस करते हैं कि ऐसे वीर सपूतों ने इस धरती पर जन्म लिया और यहां के लोगों के साथ-साथ संपूर्ण व्यवस्था को एक न समाप्त होने वाली दिशा देने का काम किया।

चारधाम यात्रा 2026: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 6 वरिष्ठ अफसरों की निगरानी में पूरी व्यवस्था

* 19 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा के लिए 7 हजार पुलिसकर्मी तैनात, आपदा प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण पर विशेष जोर

देहरादून। उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
यात्रा मार्गों की निगरानी के लिए 2 एडीजी और 4 आईजी रैंक के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गंगोत्री धाम मार्ग का निरीक्षण एडीजी वी. मुरुगेशन, जबकि बद्रीनाथ धाम मार्ग की मॉनिटरिंग एडीजी एपी अंशुमन करेंगे। हरिद्वार पड़ाव की जिम्मेदारी आईजी विमी सचदेवा को दी गई है। वहीं केदारनाथ धाम मार्ग पर आईजी नीलेश आनंद भरणे, यमुनोत्री धाम मार्ग पर आईजी अनंत शंकर ताकवाले और ऋषिकेश-लक्ष्मणझूला-मुनिकीरेती क्षेत्र की निगरानी आईजी सुनील कुमार करेंगे। राज्य के पुलिस महानिदेशक द्वारा इन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
सुरक्षा के लिहाज से यात्रा क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 43 जोन और 149 सेक्टर में विभाजित किया गया है। करीब 7 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। साथ ही सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए एटीएस की टीमें भी प्रमुख धामों में मौजूद रहेंगी।
आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए 80 स्थानों पर आपदा राहत टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा 37 जगहों पर एसईआरएफ और 8 स्थानों पर एनडीआरएफ की टीमें भी मुस्तैद रहेंगी।
यात्रा के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए 118 पार्किंग स्थलों को चिन्हित किया गया है। हालांकि प्रशासन के सामने 52 बॉटलनेक, 109 भूस्खलन संभावित क्षेत्र, 274 दुर्घटना संभावित जोन और 61 ब्लैक स्पॉट बड़ी चुनौती बने हुए हैं।सरकार का दावा है कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए हर स्तर पर ठोस तैयारी की गई है।
दशमेश पब्लिक स्कूल रामराज में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया
मेरठ/बहसुमा/रामराज। दशमेश पब्लिक स्कूल, रामराज में बैसाखी पर्व बड़े ही उत्साह, उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रधानाचार्य आमिर खान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आकर्षक एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। नृत्य प्रस्तुतियों में सीरत, गुरताज, विक्रमवीर, हरजस, हरकिरत, गुनिका, समृद्धि, रोज़लिन, मनप्रीत, प्रभलीन एवं मन्नत ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

वहीं भाषण प्रतियोगिता में भूमि, ऐश्वी एवं शिवांशी ने बैसाखी पर्व के धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार प्रभावी ढंग से व्यक्त किए।

कार्यक्रम को सफल एवं यादगार बनाने में स्वाति अरोड़ा, मनजोत कौर, हर्षिका, गुरजीत, गुरविंदर, ज्योति, स्वाति सुधा, साक्षी, अनिकेत, धनवीर, विजय, निखिल एवं अशोक का विशेष योगदान रहा।

अंत में विद्यालय प्रबंधन ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को बैसाखी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
थारू समाज को बड़ी राहत: मुकदमे वापस होंगे, हजारों परिवारों को मिला जमीन का अधिकार
* लखीमपुर खीरी में ₹817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, सीएम योगी की माफियाओं को कड़ी चेतावनी

लखीमपुर खीरी/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू समाज के लोगों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी कीमत पर थारू समाज पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा और सरकार उनके सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नदियों के कटाव से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भौमिक अधिकार पट्टों का वितरण किया। इसके साथ ही पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला गोकर्णनाथ विधानसभा क्षेत्रों में ₹817 करोड़ लागत की 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से अपने अधिकारों से वंचित इन परिवारों को आज जमीन का मालिकाना हक मिल रहा है, जो “अधिकार से आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान” की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि 4356 थारू परिवारों को 5338 हेक्टेयर और 2350 अन्य परिवारों को 4251 हेक्टेयर भूमि का अधिकार दिया गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले संवेदनशीलता का अभाव था, जबकि वर्तमान सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि माफिया बनने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें “मिट्टी में मिलने” के लिए तैयार रहना होगा।
सीएम ने यह भी कहा कि सरकार थारू समाज को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। खीरी में स्थापित थारू हस्तशिल्प कंपनी के जरिए उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। किसानों के मुद्दे पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और आपदा राहत के तहत मदद दी जाएगी। जनहानि और पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने लखीमपुर खीरी के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि अब जिले की पहचान दुधवा नेशनल पार्क, गोला गोकर्णनाथ कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं से बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” नहीं, बल्कि “वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज” की दिशा में काम हो रहा है। कार्यक्रम में कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” ऐतिहासिक कदम, महिलाओं को मिलेगा निर्णय में भागीदारी का अधिकार: बेबी रानी मौर्य


* 33 प्रतिशत आरक्षण से संसद-विधानसभाओं में बढ़ेगा महिला प्रतिनिधित्व, लोकतंत्र होगा और अधिक समावेशी

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने शनिवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण प्रक्रिया में सशक्त भागीदार और निर्णयकर्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना उपाध्याय और महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री ममता पांडेय भी मौजूद रहीं।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह कानून देश की करोड़ों महिलाओं के सम्मान और अधिकारों का राष्ट्रीय संकल्प है। संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक प्रावधान लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाएगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। “भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं है—इसी अंतर को समाप्त करने के लिए यह कानून आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
मौर्य ने बताया कि वैश्विक अनुभव दर्शाते हैं कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में नीतियां अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनती हैं। साथ ही जेंडर गैप कम होने से आर्थिक विकास को भी गति मिलती है।
उन्होंने पिछले एक दशक में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ाव बढ़ा और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उन्हें मिला। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे कदमों ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है।
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रभावी नेतृत्व देती हैं। अब यही मॉडल संसद और विधानसभाओं में भी लागू होगा, जिससे नीति निर्माण अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनेगा।
मंत्री ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” केवल आरक्षण का प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक व्यापक सुधार है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है।
मैरिजहाल के तारकोल गोदाम में लगी आग,5 ड्रम तारकोल जलकर राख
*आग की चपेट में आने से प्लास्टिक ड्रम भी जले

गोंडा।जिले के इटियाथोक थाना क्षेत्र के इटियाथोक बाजार में स्थित परमजीत सिंह ठेकेदार के मैरिज हाल के गोदाम में भीषण आग लग गई।अज्ञात कारणों से लगी इस आग में पांच तारकोल ड्रम व कई प्लास्टिक ड्रम जलकर राख हो गये,जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।स्थानीय लोगों और फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।यह घटना इटियाथोक कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत हुई।आग लगने के बाद यह देखते ही देखते यह पास रखे अन्य चार तारकोल ड्रमों तक पहुंच गई और फिर इसने विकराल रूप धारण कर लिया।आग की चपेट में आने से मैरिजहाल के अंदर रखा अन्य सामान भी जलकर राख हो गया।बताया जाता है कि परमजीत सिंह लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार हैं।उन्होंने एक साल पहले मैरिजहाल का निर्माण कराया था।लेकिन व्यवसाय न चलने के कारण इसे बंद कर दिया था और इसे अपने गोदाम के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।मामले में इटियाथोक थानाध्यक्ष कमलाकांत त्रिपाठी ने बताया कि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि 4 - 5 तारकोल के ड्रम और कई प्लास्टिक ड्रम पूरी तरह से जल गए हैं।फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाया गया है।परमजीत सिंह द्वारा नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।समय रहते आग बुझा लिया गया है अन्यथा की स्थिति में यदि आसपास आबादी में आग फैल जाती तो बड़ी घटना हो सकती थी।
झारखंड में 'चारा घोटाले' की आहट: बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, ट्रेज़री घोटाले की CBI जाँच की मांग!

झारखंड में पिछले कुछ दिनों से उजागर हो रहा ट्रेज़री घोटाला अब पूरे देश में गंभीर चिंता और चर्चा का विषय बन चुका है। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं प्रतीत होता, बल्कि यह एक व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। परिस्थितियाँ इस प्रकार बनती दिख रही हैं जैसे चारा घोटाला के काले अध्याय की पुनरावृत्ति हो रही हो। जिस प्रकार चारा घोटाले में डोरंडा ट्रेज़री से 140 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई थी, उसी तरह वर्तमान में झारखंड के कई जिलों में, पुलिस विभाग के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ रहे हैं।

अब तक उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, इस घोटाले की पुष्टि बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू जैसे जिलों में हो चुकी है। केवल इन जिलों से ही 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का संकेत मिला है। यह आँकड़ा अपने आप में गंभीर है, लेकिन जिस गति से नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि यह घोटाला कहीं अधिक व्यापक और गहरा हो सकता है। इस संदर्भ में मैं आपका ध्यान निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ :-

1. प्रारंभिक स्तर पर यह मामला केवल बोकारो जिले तक सीमित प्रतीत हो रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ी और परतें खुलती गईं, यह स्पष्ट हो गया कि अवैध निकासी का यह जाल हजारीबाग, गढ़वा, साहिबगंज और पलामू तक फैल चुका है। इससे यह प्रतीत होता है कि यह कोई स्थानीय या सीमित स्तर का घोटाला नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में फैला एक संगठित आर्थिक अपराध है। अतः इसकी जाँच भी राज्यव्यापी स्तर पर, निष्पक्ष और गहन तरीके से कराई जानी आवश्यक है।

2. बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताना वास्तविकता से परे प्रतीत होता है। यह मानना तर्कसंगत नहीं है कि एक अकेला लेखपाल ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ कर, किसी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में बदलाव कर, करोड़ों रुपये की अवैध निकासी जैसे जटिल षड्यंत्र को अपने दम पर अंजाम दे सकता है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क और उच्चस्तरीय मिलीभगत से जुड़ा हुआ है।

3. और भी गंभीर तथ्य यह है कि बोकारो जिले में उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन की राशि अनु पांडे के खाते में 63 बार स्थानांतरित होती रही और पूरे पुलिस महकमे को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। यह स्थिति अत्यंत संदिग्ध है और यह मानना कठिन है कि बिना वरीय पुलिस अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण के ऐसा संभव हो सकता है।

4. इस पूरे प्रकरण में एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कौशल पांडेय जैसे आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, बोकारो के पूर्व पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक पटेल मयूर कनैयालाल तथा पूर्व डीआईजी (बजट) नौशाद आलम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए थे। यह तथ्य इस ओर संकेत करता है कि आरोपी को न केवल संरक्षण प्राप्त था, बल्कि उसे संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन भी मिला हुआ था।

5. घोटाले की राशि भी लगातार बढ़ती जा रही है। बोकारो में जहाँ प्रारंभिक आँकड़ा 3.5 करोड़ रुपये का बताया गया था, वह बढ़कर 4.5 करोड़ और फिर 6 करोड़ तक पहुँच गया। इसी प्रकार हजारीबाग में यह राशि बढ़ते-बढ़ते 28 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। केवल दो जिलों में ही प्रारंभिक जाँच में लगभग 35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि होना अत्यंत गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यदि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच कराई जाए, तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है और चारा घोटाला जैसे चर्चित घोटाले को भी पीछे छोड़ सकता है।

6. यह सर्वविदित है कि विभिन्न जिलों में ट्रेज़री से होने वाली निकासी की निगरानी की जिम्मेदारी डीडीओ, अर्थात् संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की होती है, जिसे सामान्यतः डीएसपी (मुख्यालय) को सौंप दिया जाता है। ऐसे में इस पूरे घोटाले में जिला स्तर के डीएसपी और एसपी की भूमिका की निष्पक्ष और गहन जाँच होना अत्यंत आवश्यक है।

7. इसके अतिरिक्त, इस पूरे घोटाले में JAP-IT की भूमिका की जाँच भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि तकनीकी स्तर पर किस प्रकार की हेराफेरी की गई और किन लोगों की इसमें संलिप्तता रही।

8. यह भी उल्लेखनीय है कि झारखंड में ट्रेज़री से अवैध निकासी की घटनाएँ कोई नई बात नहीं हैं। आपके कार्यकाल में इससे पूर्व भी ऊर्जा विभाग से लगभग 100 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग से लगभग 10 करोड़ रुपये तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से लगभग 23 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मामले में तो माननीय न्यायालय को हस्तक्षेप करते हुए जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपनी पड़ी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस विभाग में हुआ यह ट्रेज़री घोटाला किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि एक बड़े और संगठित रैकेट की कड़ी है, जिसमें पूरे राज्य में सुनियोजित तरीके से सरकारी धन की लूट की जा रही है।

ऐसी स्थिति में, जब इस पूरे मामले में ऊपर से लेकर नीचे तक कई पुलिस अधिकारी संदेह के घेरे में हों, तब उसी विभाग द्वारा जाँच कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन होगा। निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि इस पूरे मामले की जाँच किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी द्वारा कराई जाए।

अतः आपसे आग्रह है कि इस बहुचर्चित और गंभीर ट्रेज़री महाघोटाले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से अथवा झारखंड उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जाँच के माध्यम से कराई जाए, ताकि सत्य उजागर हो सके और दोषियों को कठोरतम दंड मिल सके।

राजकोष कंगाल,सिस्टम बेहाल,अधिकारी कर्मचारी के भुगतान पर सवाल - प्रतुल शाह देव


भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने आज प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन की पराकाष्ठा का आरोप लगाया।प्रतुल ने कहा कि सरकार का पूरा वित्तीय प्रबंधन बैठ गया है। 26 वर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी महीने के ग्यारहवें दिन भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। प्रतुल ने बताया कि सरकार के वेतन पर सीधे तौर पर 2,35,930 अधिकारी और कर्मचारी है। संविदा कर्मी और आउटसोर्स कमी की संख्या लगभग 40,000 से 45,000 के आसपास है।यानी कुल 2,75,000 लोगों को 11 तारीख बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला है।प्रतुल ने कहा करीब कल 15 लाख लोग इन वेतन कर्मियों पर आश्रित है।इनके बीच राशन का लाला पड़ गया है,बच्चों की फीस नहीं दे पा रहे, ईएमआई नहीं भर पा रहे हैं और घर की पूरी अर्थव्यवस्था बैठ गई है। प्रतुल ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर झारखंड की सरकार भी वेतन देने के लिए कर्ज लेने जा रही या किसी एडवांस का इंतजार कर रही है?

प्रतुल ने कहा कि आमतौर पर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में दो-तीन दिनों में बजट को राजपाल की स्वीकृति के बाद 5 अप्रैल तक भुगतान होता रहा है। लेकिन इस बार सरकार के वित्तीय मिसमैनेजमेंट के कारण पैसा ही नहीं है।यह नहीं है कि सरकार को पता नहीं था उसके पास पैसा नहीं है।क्योंकि 31 मार्च को ही सरकार बजट का आवंटित 22,000 करोड़ को इसलिए नहीं खर्च पर कर पाई थी क्योंकि उसके पास कोई पैसा ही नहीं था।यह भी वित्तीय कुप्रबंधन का नतीजा था कि सरकार ने जितने का बजट बनाया था, उस हिसाब से राजस्व की वसूली नहीं हो पाई। 31 मार्च को तो ' वेज एंड मिन्स एडवांस' के जरिए कुछ स्थिति बची। प्रतुल ने कहा कि जो केंद्र सरकार पर सौतेले दर्जे का आरोप लगाते हैं,उन्हें याद रखना चाहिए की 31 मार्च को ही केंद्र सरकार ने राज्य को ₹2300 करोड़ ग्रामीण विकास, पंचायती राज में और ₹392 करोड़ नगर विकास को ट्रांसफर किया।उसके बाद भी खजाना खाली हो गया।

मुख्यमंत्री के शीश महल के लिए 100 करोड़ का बजट,लेकिन कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं 

प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने मुख्यमंत्री आवास के शीश महल के लिए 100 करोड़ के लगभग का बजट का आवंटन कर दिया। कैबिनेट में से पास भी कर दिया ।टेंडर भी निकल गया ।सिर्फ मूल भवन की कीमत 67 करोड़ है। इंटीरियर और डेकोरेशन और टेंडर के लागत में वृद्धि को नहीं जोड़ा गया है ।यानी स्विमिंग पूल ,जकूजी, ऑटोमैटिक मसाज रूम वाले 100 करोड़ के शीश महल के लिए सरकार के पास पैसा है। लेकिन 3,75,000 वेतन भोगी अधिकारी,कर्मचारी और उन पर आश्रित 15 लाख लोगों के पास घर चलाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। यही है अबुआ सरकार की रियलिटी चेक।