पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
अधिवक्ता हत्याकांड, मारपीट में भतीजे ने चढाया था लोगों पर ट्रैक्टर
*9 बीघा जमीन का विवाद, पीट पीट कर की हत्या

गोंडा।जिले के करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत दत्त नगर गांव के सुदाई पुरवा में रविवार को हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा हत्याकांड से जुड़ा एक लाइव वीडियो सामने आया है,यह वीडियो घटना से ठीक पहले का है जिसमें दिखाई दे रहा है कि खेत में जुताई के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो जाती है।इस दौरान अधिवक्ता के भतीजे ने ट्रैक्टर से सबको कुचलने का प्रयास किया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि अधिवक्ता की मौत हो गई।वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दिया है,वहीं गांव में माहौल बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।सारा विवाद 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था।चार मिनट के लाइव वीडियो में अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा को खेत की जुताई करते देखा जा सकता है।इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और गाली गलौज शुरू हो जाती है।मारपीट के दौरान अधिवक्ता खुद भी लाठी लेकर बचाव करते दिखाई दे रहे हैं।घटना के कुछ मिनट बाद पुलिस के भी पहुंचने का दावा किया जा रहा है,जिसके बाद दोनों पक्षों के लोग मौके से फरार हो जाते हैं।घटना में मृतक अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में प्रशासनिक अधिवक्ता रहे हैं तथा अवध बार एसोसिएशन के मंत्री भी रह चुके हैं।उनके दो बेटे हैं जिनमें बड़ा बेटा अभिषेक मिश्रा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है तो वहीं छोटा बेटा अनुराग मिश्रा घर पर रहकर खेती बाड़ी संभालता है।परिजनों के अनुसार, यह विवाद गांव के पूर्व प्रधान हरिशरण मिश्रा से 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था और कोर्ट का फैसला सुभाष चंद्र मिश्रा के पक्ष में आया था,जिसकी प्रति लेकर वह घटना के एक दिन पहले करनैलगंज कोतवाली गए थे और पुलिस को सूचित किया था कि वह अगले दिन जमीन पर कब्जा लेने जाएंगे।मृतक अधिवक्ता के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि सुभाष चंद्र मिश्रा की मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई,जबकि शरीर पर कुल आठ चोट के निशान मिले हैं।सुभाष चंद्र मिश्रा का पोस्टमार्टम दो डाक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ किया गया।रिपोर्ट में बताया गया कि सिर में चोट से खून जम गया था,जिसके कारण नसों ने काम करना बंद कर दिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।मामले में करनैलगंज कोतवाली पुलिस न भतीजे विश्वास मिश्रा की तहरीर पर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है,इसके साथ ही अन्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है।करनैलगंज कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय के अनुसार दो वीडियो सामने आए हैं,जिसमें से एक में कोई विवाद स्पष्ट नहीं है जबकि दूसरे में विवाद और ट्रैक्टर चलाते एक व्यक्ति देखा जा सकता है।पुलिस वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की जांच कर रही है।इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में अत्यधिक आक्रोश है।उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग किया है।मामले की जानकारी होने पर कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंह भी मौके पर पहुंचे,जिसमें वह अधिवक्ताओं से हाईकोर्ट में आंदोलन करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।हालांकि पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के आश्वासन के बाद स्थिति कुछ शांत हुई।अनुराग के अनुसार रविवार को जैसे ही वे लोग खेत पर पहुंचे,आरोपियों ने हमला कर दिया।लाठी डंडों से पिटाई की गई और फायरिंग भी की गई।गोली उनके भाई के कान के पास से निकल गई।परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना में 20 से 30 लोग शामिल थे।उन्होंने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग किया है।अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी राधेश्याम राय ने बताया कि अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा की शिकायत पर चार आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शेरघाटी में आस्था का महासंगम, विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब: भजन, प्रवचन और जयघोष से गूंजा गोला बाजार परिसर

गया: शेरघाटी शहर के तीन शिवाला, गोला बाजार में को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने शहर को पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा परिसर भगवा ध्वज, जयघोष और भक्ति गीतों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक आयोजन का रूप दे दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर रामाशीष सिंह, गोविंदा आचार्य, डॉ. तपेश्वर प्रसाद, कमल सिंह (जिला संघचालक) एवं डॉ. उदय प्रसाद सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने ओजस्वी संबोधन में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

वक्ताओं ने कहा कि जब समाज संगठित होता है तो परिवर्तन स्वतः संभव होता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और संस्कृति व संस्कार को आगे बढ़ाएं। बीच-बीच में “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों से वातावरण ऊर्जावान बना रहा।

सम्मेलन की खास बात रही भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां। स्थानीय कलाकारों ने भक्ति गीतों से माहौल को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु भी तालियों और जयघोष के साथ पूरे जोश में नजर आए। धर्म प्रवचनों के दौरान कई लोग भावुक भी दिखे।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक उदय सिंह यादव सहित चंद्रभानु प्रसाद, ऋषभ जी, सत्यम जी, नौरंगी प्रसाद, विकास जी, राहुल आचार्य और अभिषेक जी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता की सराहना की और इसे समाज को जोड़ने वाला कदम बताया।

श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद वितरण की व्यापक व्यवस्था की गई थी। लंबी कतारों के बावजूद अनुशासन बना रहा। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित रखने में अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

शाम ढलते-ढलते भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी। आयोजन समिति के सदस्यों के चेहरे पर सफलता की संतोष भरी मुस्कान साफ झलक रही थी। सम्मेलन शांतिपूर्ण, भव्य और अत्यंत सफल रहा। अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आगे भी होते रहेंगे, ताकि समाज में एकता और जागरूकता का संदेश फैलता रहे।

मणिशंकर अय्यर ने राहुल के नेतृत्व पर उठाया सवाल, ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता बनाने की सलाह

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पिछले कुछ समय से कांग्रेस विरोधी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। मणिसंकर अय्यर ने एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इंडी गठबंधन की अगुवाई क्षेत्रीय दलों के नेताओं को करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि राहुल गांधी को गठबंधन की ड्राइविंग सीट छोड़ देनी चाहिए।

ममता बनर्जी के बिना इंडी गठबंधन कुछ नहीं रहेगा- अय्यर

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव में अब ज्यादा समय बाकी नहीं है, इससे पहले ही मणिशंकर अय्यर ने नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। रविवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में अय्यर ने कहा, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की नेता हैं। उनके बिना इंडी गठबंधन कुछ नहीं रहेगा।

स्टालिन और अखिलेश यादव का भी लिया नाम

इसके अलावा अय्यर ने कई अन्य बड़े क्षेत्रियों नेताओं का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में ऐसे कई क्षेत्रीय नेता हैं जो नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का भी उल्लेख किया।

राहुल को इंडिया ब्लॉक की बागडोर छोड़ने की सलाह

मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि उनको इंडिया ब्लॉक की बागडोर को छोड़ देना चाहिए और इसे किसी क्षेत्रीय दल को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस जिम्मेदारी को साझा करें।

झारखंड में लोकतंत्र का महापर्व: 48 नगर निकायों में मतदान जारी, सुबह से ही बूथों पर लगी लंबी कतारें

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रांची: झारखंड के 48 नगर निकायों के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो गई है। राज्यभर के 1,042 वार्डों में फैले 4,307 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनाव में कुल 6,124 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके भविष्य का फैसला 43.43 लाख मतदाता करेंगे।

राजधानी का माहौल:

रांची नगर निगम क्षेत्र में मेयर पद के 11 और पार्षद पद के 364 उम्मीदवारों के बीच रोचक मुकाबला है। मोरहाबादी, हरमू, डोरंडा और हिंदपीढ़ी जैसे इलाकों में सुबह से ही मतदाताओं का उत्साह चरम पर है। पहली बार वोट डालने आए युवाओं ने सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी है।

चुनाव आयोग की व्यवस्था:

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, शुरुआती दो घंटों में पूरे राज्य में औसतन 12% के करीब मतदान दर्ज किया गया है। सभी बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और मतदान प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है।

पाकुड़ 12.41%

मधुपुर 10.20%

देवघर 8.50%

रांची 7.28%

चिरकुंडा 7.24%

धनबाद 5.73%

बेल्थरारोड के लाल ने रोशन किया बलिया का मान, डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का एम्स दिल्ली में चयन

संजीव सिंह बेल्थरा रोड (बलिया), 23 फरवरी 2026: क्षेत्र के पिपरौली बड़ा गांव के लिए गौरव का क्षण आ गया है। प्राथमिक विद्यालय चौकियां मोड़ के प्रधानाध्यापक विजय शंकर गुप्ता के सुपुत्र डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का चयन देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में चिकित्सक पद के लिए हो गया है। इस उपलब्धि से पूरे बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।डॉ. अमरेंद्र गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय, बलिया से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद कठिन परिश्रम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। लखनऊ के फातिमा हॉस्पिटल से एमडी करने के बाद अब एम्स दिल्ली में चयनित होकर उन्होंने ग्रामीण परिवेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।डॉ. अमरेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी उच्च मुकाम हासिल कर सकता है।इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सीयर सुनील चौबे, शिक्षक देवेंद्र वर्मा, कृष्णा नन्द सिंह, वीरेंद्र यादव, आशुतोष पाण्डेय, हरेकृष्णा पाण्डेय, अजित सिंह, नन्द लाल शर्मा सहित क्षेत्रीय गणमान्यजनोंने डॉ. अमरेंद्र एवं उनके परिजनों को बधाई दी। बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी का माहौल व्याप्त है और सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं
युवाओं के सपनों पर भारी पड़ रही सियासत.. रामगोविन्द अदालती आदेश के बाद भी समाधान नहीं। न्याय बनाम प्रशासनिक अवरोध
संजीव सिंह बलिया! उत्तर प्रदेश की शैक्षिक राजनीति और विधिक गलियारों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की नियुक्तियों का प्रकरण एक मिसाल बन गया है। यह कहानी केवल एक अध्यादेश की नहीं, बल्कि हज़ारों बेरोजगारों के सपनों और न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका के बीच खिंचती रस्साकशी की है। 1. 2013-14 का ऐतिहासिक निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में सन् 2013-14 में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश लाया गया था। इसका उद्देश्य संस्कृत शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारना और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करना था। उक्त बाते पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा और बताया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों की प्रबंध समितियों को रिक्त पदों पर चयन की शक्ति दी गई। इस विकेंद्रीकरण से प्रक्रिया में तेजी आई और कई उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार मिला, जिससे संस्कृत की पाठशालाओं में रौनक लौटी। 2016-17 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। योगी सरकार के इस कदम ने न केवल नए रोजगारों पर ताला जड़ा, बल्कि कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया। इसके बाद शुरू हुआ अदालती संघर्ष का वह लंबा सिलसिला, जिसमें सरकार को हर मोड़ पर विधिक हार का सामना करना पड़ा अभ्यर्थियों ने सरकार के रोक के फैसले को चुनौती दी और कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हार नहीं मानी और डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहाँ भी न्याय की जीत हुई। अंततः मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँचा। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए नियुक्तियों के पक्ष में मुहर लगा दी। पूर्व नेता विरोधी दल ने कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर' विडंबना यह है कि देश की सर्वोच्च अदालत से आदेश आने के बावजूद योगी सरकार ने शासन स्तर पर विभिन्न तकनीकी पेच फंसाकर इन नियुक्तियों और उनके लाभों को बाधित किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आती है, बल्कि उन युवाओं के साथ भी अन्याय है जो अपनी योग्यता सिद्ध कर चुके हैं। संस्कृत को भारत की आत्मा कहा जाता है, लेकिन जब इसी भाषा के विद्वान और शिक्षक अपनी आजीविका के लिए दर-दर भटकते हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि सरकारें अदालती आदेशों के बाद भी 'हथकंडे' अपनाकर नियुक्तियां रोकती हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। योगी सरकार और प्रशासन को अब हठधर्मिता छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए ताकि संस्कृत शिक्षा का संरक्षण हो सके और युवाओं को उनका उचित हक मिल सके। (रामगोविन्द चौधरी) पूर्व नेता प्रतिपक्ष उoप्र
राष्ट्रीय परशुराम सेना ने बृजेश तिवारी और मिथिलेश तिवारी को दी बड़ी जिम्मेदारी
प्रतापगढ़। राष्ट्रीय परशुराम सेना द्वारा विस्तार की कड़ी में राष्ट्रीय परशुराम सेना रजिस्टर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कृष्णकांत मिश्रा ने पंजाब प्रदेश के अध्यक्ष मिथिलेश तिवारी को लुधियाना (पंजाब ) का तथा बृजेश तिवारी को गुजरात प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इन दोनों चेहरे को जमीनी तथा ऊर्जावान माना जाता है ।
संगठन नेतृत्व का कहना है कि इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य समाज की एकता तथा ब्राह्मण हितों का संरक्षण और संगठन की नीतियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का है। नवनियुक्त पदाधिकारियों ने नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह संगठन की गरिमा तथा विस्तार के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। इन नियुक्तियों के बाद समर्थकों के द्वारा विभिन्न माध्यमों से बधाई देने वालों का तांता लगा है।
यूपी में छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं 42 साल के लिए लीज पर देने की तैयारी, विरोध तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार छह लघु जल विद्युत परियोजनाओं को 42 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को लीज पर देने की तैयारी में है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर के अनुसार निजी कंपनियों को 1.5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट अग्रिम प्रीमियम के आधार पर परियोजनाएं सौंपी जाएंगी, जिसके बाद वे 42 वर्षों तक उनका संचालन करेंगी।

प्रदेश की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं

प्रदेश में पहले से
300 मेगावाट रिहंद,
99 मेगावाट ओबरा,
72 मेगावाट माताटीला (ललितपुर),
72 मेगावाट खारा

जल विद्युत परियोजनाएं संचालित हैं। इसके अतिरिक्त छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं, जिनके पास करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि और अन्य परिसंपत्तियां मौजूद हैं।

लीज पर प्रस्तावित परियोजनाएं

लीज पर दी जाने वाली परियोजनाओं में शामिल हैं –
भोला (2.7 मेगावाट)
सलावा (3 मेगावाट)
निर्गजनी (5 मेगावाट)
चित्तौरा (3 मेगावाट)
पलरा (0.6 मेगावाट)
सुमेरा (1.5 मेगावाट)
ये सभी परियोजनाएं अपर गंगा नहर पर स्थित हैं और लगभग 90 से 97 वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं।

निजीकरण के खिलाफ संगठनों का विरोध

टेंडर जारी होते ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन की आपत्ति

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि अपर गंगा नहर में वर्षभर पानी उपलब्ध रहता है, जिससे इन परियोजनाओं में लगातार बिजली उत्पादन संभव है।उन्होंने दावा किया कि सीमित निवेश से इनके पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण की लागत एक वर्ष में वसूल की जा सकती है। साथ ही आरोप लगाया कि टेंडर में स्थापित क्षमता 15.5 मेगावाट के बजाय 6.3 मेगावाट दर्शाई गई है और परिसंपत्तियों का मूल्य भी कम आंका गया है। उन्होंने टेंडर निरस्त होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

कर्मचारियों पर असर का मुद्दा

पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि यह कदम निजीकरण की नई रणनीति है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।उन्होंने यह भी कहा कि निजी कंपनियां अपनी शर्तों पर नियुक्तियां करेंगी और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। संगठनों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर टेंडर निरस्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
প্রয়াত বিশিষ্ট রাজনীতিবিদ মুকুল রায়


প্রবীর রায়:প্রয়াত হলেন বিশিষ্ট রাজনীতিবিদ মুকুল রায়। মৃত্যু কালে তার বয়স হয়েছিল ৭১বছর। রবিবার রাত প্রায় দেড়টা নাগাদ সল্টলেকের একটি বেসরকারি হাসপাতালে শেষ নিঃশ্বাস ত্যাগ করেন বর্ষীয়ান এই রাজনীতিক। ছেলে শুভ্রাংশু বাবার মৃত্যু সংবাদ নিশ্চিত করেছেন।মুকুল রায়ের প্রয়াণের খবর ছড়িয়ে পড়তেই রাজনৈতিক মহলে শোকের ছায়া নেমে এসেছে। হাসপাতালের বাইরে ভিড় জমাতে শুরু করেছেন অনুরাগীরা।বেশ কয়েক মাস ধরেই গুরুতর অসুস্থতা নিয়ে কলকাতার একটি বেসরকারি হাসপাতালে ভর্তি ছিলেন। তাঁর প্রয়াণে শোকের ছায়া নেমে এসেছে রাজনৈতিক মহলে।মুকুল রায় তৃণমূলে এক সময় মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের পরেই দলের সেকেন্ড ইন কমান্ডের দায়িত্বে ছিলেন। দীর্ঘ কয়েক দশক ধরে রাজ্য এবং জাতীয় রাজনীতিতে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেছেন। দেশের রেল মন্ত্রীর দায়িত্বও সামলেছেন।পরে দলের সঙ্গে মনোমালিন্য হয় ও ঘাসফুল ছেড়ে বিজেপিতে যোগ দেন। শেষ কয়েক বছর ধরে শারীরিক অসুস্থতার কারণে সক্রিয় রাজনীতি থেকে কিছুটা দূরেই ছিলেন। উল্লেখ্য, ২০২১ সালের বিধানসভা নির্বাচনে কৃষ্ণনগর উত্তর কেন্দ্র থেকে বিজেপির টিকিটে জয়ী হয়েছিলেন মুকুল রায়। কিন্তু নির্বাচনের পর তিনি পুনরায় পুরনো দল তৃণমূলে ফিরে যান। এর পরেই দলত্যাগ বিরোধী আইনে তাঁর বিধায়ক পদ খারিজের দাবিতে সরব হন বিরোধী দলনেতা শুভেন্দু অধিকারী ও বিজেপি বিধায়ক অম্বিকা রায়। বিধানসভার স্পিকার মুকুল রায়ের পদ খারিজ করতে অস্বীকার করায় মামলা গড়ায় কলকাতা হাইকোর্টে। হাইকোর্ট মুকুল রায়ের বিধায়ক পদ খারিজের নির্দেশ দিলেও সুপ্রিম কোর্ট মানবিক দিক থেকে বিবেচনা করে হাইকোর্টের দেওয়া বিধায়ক পদ খারিজের নির্দেশের ওপর অন্তর্বর্তী স্থগিতাদেশ জারি করে।বর্ষীয়ান এই নেতার প্রয়াণে শাসক–বিরোধী ভেদাভেদ ভুলে শোকবার্তা দিতে শুরু করেছেন বহু রাজনৈতিক ব্যক্তিত্ব। পশ্চিমবঙ্গের রাজনীতিতে তাঁর ভূমিকা আজ স্মরণ করা হচ্ছে বিভিন্ন মহলে। তাঁর বিদায় নিঃসন্দেহে রাজ্যের রাজনৈতিক ইতিহাসে বড় শূন্যতা তৈরি করল।
पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
अधिवक्ता हत्याकांड, मारपीट में भतीजे ने चढाया था लोगों पर ट्रैक्टर
*9 बीघा जमीन का विवाद, पीट पीट कर की हत्या

गोंडा।जिले के करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत दत्त नगर गांव के सुदाई पुरवा में रविवार को हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा हत्याकांड से जुड़ा एक लाइव वीडियो सामने आया है,यह वीडियो घटना से ठीक पहले का है जिसमें दिखाई दे रहा है कि खेत में जुताई के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो जाती है।इस दौरान अधिवक्ता के भतीजे ने ट्रैक्टर से सबको कुचलने का प्रयास किया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि अधिवक्ता की मौत हो गई।वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दिया है,वहीं गांव में माहौल बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।सारा विवाद 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था।चार मिनट के लाइव वीडियो में अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा को खेत की जुताई करते देखा जा सकता है।इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और गाली गलौज शुरू हो जाती है।मारपीट के दौरान अधिवक्ता खुद भी लाठी लेकर बचाव करते दिखाई दे रहे हैं।घटना के कुछ मिनट बाद पुलिस के भी पहुंचने का दावा किया जा रहा है,जिसके बाद दोनों पक्षों के लोग मौके से फरार हो जाते हैं।घटना में मृतक अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में प्रशासनिक अधिवक्ता रहे हैं तथा अवध बार एसोसिएशन के मंत्री भी रह चुके हैं।उनके दो बेटे हैं जिनमें बड़ा बेटा अभिषेक मिश्रा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है तो वहीं छोटा बेटा अनुराग मिश्रा घर पर रहकर खेती बाड़ी संभालता है।परिजनों के अनुसार, यह विवाद गांव के पूर्व प्रधान हरिशरण मिश्रा से 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था और कोर्ट का फैसला सुभाष चंद्र मिश्रा के पक्ष में आया था,जिसकी प्रति लेकर वह घटना के एक दिन पहले करनैलगंज कोतवाली गए थे और पुलिस को सूचित किया था कि वह अगले दिन जमीन पर कब्जा लेने जाएंगे।मृतक अधिवक्ता के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि सुभाष चंद्र मिश्रा की मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई,जबकि शरीर पर कुल आठ चोट के निशान मिले हैं।सुभाष चंद्र मिश्रा का पोस्टमार्टम दो डाक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ किया गया।रिपोर्ट में बताया गया कि सिर में चोट से खून जम गया था,जिसके कारण नसों ने काम करना बंद कर दिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।मामले में करनैलगंज कोतवाली पुलिस न भतीजे विश्वास मिश्रा की तहरीर पर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है,इसके साथ ही अन्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है।करनैलगंज कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय के अनुसार दो वीडियो सामने आए हैं,जिसमें से एक में कोई विवाद स्पष्ट नहीं है जबकि दूसरे में विवाद और ट्रैक्टर चलाते एक व्यक्ति देखा जा सकता है।पुलिस वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की जांच कर रही है।इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में अत्यधिक आक्रोश है।उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग किया है।मामले की जानकारी होने पर कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंह भी मौके पर पहुंचे,जिसमें वह अधिवक्ताओं से हाईकोर्ट में आंदोलन करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।हालांकि पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के आश्वासन के बाद स्थिति कुछ शांत हुई।अनुराग के अनुसार रविवार को जैसे ही वे लोग खेत पर पहुंचे,आरोपियों ने हमला कर दिया।लाठी डंडों से पिटाई की गई और फायरिंग भी की गई।गोली उनके भाई के कान के पास से निकल गई।परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना में 20 से 30 लोग शामिल थे।उन्होंने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग किया है।अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी राधेश्याम राय ने बताया कि अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा की शिकायत पर चार आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शेरघाटी में आस्था का महासंगम, विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब: भजन, प्रवचन और जयघोष से गूंजा गोला बाजार परिसर

गया: शेरघाटी शहर के तीन शिवाला, गोला बाजार में को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने शहर को पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा परिसर भगवा ध्वज, जयघोष और भक्ति गीतों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक आयोजन का रूप दे दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर रामाशीष सिंह, गोविंदा आचार्य, डॉ. तपेश्वर प्रसाद, कमल सिंह (जिला संघचालक) एवं डॉ. उदय प्रसाद सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने ओजस्वी संबोधन में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

वक्ताओं ने कहा कि जब समाज संगठित होता है तो परिवर्तन स्वतः संभव होता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और संस्कृति व संस्कार को आगे बढ़ाएं। बीच-बीच में “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों से वातावरण ऊर्जावान बना रहा।

सम्मेलन की खास बात रही भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां। स्थानीय कलाकारों ने भक्ति गीतों से माहौल को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु भी तालियों और जयघोष के साथ पूरे जोश में नजर आए। धर्म प्रवचनों के दौरान कई लोग भावुक भी दिखे।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक उदय सिंह यादव सहित चंद्रभानु प्रसाद, ऋषभ जी, सत्यम जी, नौरंगी प्रसाद, विकास जी, राहुल आचार्य और अभिषेक जी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता की सराहना की और इसे समाज को जोड़ने वाला कदम बताया।

श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद वितरण की व्यापक व्यवस्था की गई थी। लंबी कतारों के बावजूद अनुशासन बना रहा। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित रखने में अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

शाम ढलते-ढलते भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी। आयोजन समिति के सदस्यों के चेहरे पर सफलता की संतोष भरी मुस्कान साफ झलक रही थी। सम्मेलन शांतिपूर्ण, भव्य और अत्यंत सफल रहा। अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आगे भी होते रहेंगे, ताकि समाज में एकता और जागरूकता का संदेश फैलता रहे।

मणिशंकर अय्यर ने राहुल के नेतृत्व पर उठाया सवाल, ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता बनाने की सलाह

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पिछले कुछ समय से कांग्रेस विरोधी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। मणिसंकर अय्यर ने एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इंडी गठबंधन की अगुवाई क्षेत्रीय दलों के नेताओं को करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि राहुल गांधी को गठबंधन की ड्राइविंग सीट छोड़ देनी चाहिए।

ममता बनर्जी के बिना इंडी गठबंधन कुछ नहीं रहेगा- अय्यर

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव में अब ज्यादा समय बाकी नहीं है, इससे पहले ही मणिशंकर अय्यर ने नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। रविवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में अय्यर ने कहा, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की नेता हैं। उनके बिना इंडी गठबंधन कुछ नहीं रहेगा।

स्टालिन और अखिलेश यादव का भी लिया नाम

इसके अलावा अय्यर ने कई अन्य बड़े क्षेत्रियों नेताओं का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में ऐसे कई क्षेत्रीय नेता हैं जो नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का भी उल्लेख किया।

राहुल को इंडिया ब्लॉक की बागडोर छोड़ने की सलाह

मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि उनको इंडिया ब्लॉक की बागडोर को छोड़ देना चाहिए और इसे किसी क्षेत्रीय दल को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस जिम्मेदारी को साझा करें।

झारखंड में लोकतंत्र का महापर्व: 48 नगर निकायों में मतदान जारी, सुबह से ही बूथों पर लगी लंबी कतारें

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रांची: झारखंड के 48 नगर निकायों के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो गई है। राज्यभर के 1,042 वार्डों में फैले 4,307 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनाव में कुल 6,124 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके भविष्य का फैसला 43.43 लाख मतदाता करेंगे।

राजधानी का माहौल:

रांची नगर निगम क्षेत्र में मेयर पद के 11 और पार्षद पद के 364 उम्मीदवारों के बीच रोचक मुकाबला है। मोरहाबादी, हरमू, डोरंडा और हिंदपीढ़ी जैसे इलाकों में सुबह से ही मतदाताओं का उत्साह चरम पर है। पहली बार वोट डालने आए युवाओं ने सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी है।

चुनाव आयोग की व्यवस्था:

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, शुरुआती दो घंटों में पूरे राज्य में औसतन 12% के करीब मतदान दर्ज किया गया है। सभी बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और मतदान प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है।

पाकुड़ 12.41%

मधुपुर 10.20%

देवघर 8.50%

रांची 7.28%

चिरकुंडा 7.24%

धनबाद 5.73%

बेल्थरारोड के लाल ने रोशन किया बलिया का मान, डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का एम्स दिल्ली में चयन

संजीव सिंह बेल्थरा रोड (बलिया), 23 फरवरी 2026: क्षेत्र के पिपरौली बड़ा गांव के लिए गौरव का क्षण आ गया है। प्राथमिक विद्यालय चौकियां मोड़ के प्रधानाध्यापक विजय शंकर गुप्ता के सुपुत्र डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का चयन देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में चिकित्सक पद के लिए हो गया है। इस उपलब्धि से पूरे बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।डॉ. अमरेंद्र गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय, बलिया से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद कठिन परिश्रम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। लखनऊ के फातिमा हॉस्पिटल से एमडी करने के बाद अब एम्स दिल्ली में चयनित होकर उन्होंने ग्रामीण परिवेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।डॉ. अमरेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी उच्च मुकाम हासिल कर सकता है।इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सीयर सुनील चौबे, शिक्षक देवेंद्र वर्मा, कृष्णा नन्द सिंह, वीरेंद्र यादव, आशुतोष पाण्डेय, हरेकृष्णा पाण्डेय, अजित सिंह, नन्द लाल शर्मा सहित क्षेत्रीय गणमान्यजनोंने डॉ. अमरेंद्र एवं उनके परिजनों को बधाई दी। बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी का माहौल व्याप्त है और सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं
युवाओं के सपनों पर भारी पड़ रही सियासत.. रामगोविन्द अदालती आदेश के बाद भी समाधान नहीं। न्याय बनाम प्रशासनिक अवरोध
संजीव सिंह बलिया! उत्तर प्रदेश की शैक्षिक राजनीति और विधिक गलियारों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की नियुक्तियों का प्रकरण एक मिसाल बन गया है। यह कहानी केवल एक अध्यादेश की नहीं, बल्कि हज़ारों बेरोजगारों के सपनों और न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका के बीच खिंचती रस्साकशी की है। 1. 2013-14 का ऐतिहासिक निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में सन् 2013-14 में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश लाया गया था। इसका उद्देश्य संस्कृत शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारना और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करना था। उक्त बाते पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा और बताया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों की प्रबंध समितियों को रिक्त पदों पर चयन की शक्ति दी गई। इस विकेंद्रीकरण से प्रक्रिया में तेजी आई और कई उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार मिला, जिससे संस्कृत की पाठशालाओं में रौनक लौटी। 2016-17 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। योगी सरकार के इस कदम ने न केवल नए रोजगारों पर ताला जड़ा, बल्कि कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया। इसके बाद शुरू हुआ अदालती संघर्ष का वह लंबा सिलसिला, जिसमें सरकार को हर मोड़ पर विधिक हार का सामना करना पड़ा अभ्यर्थियों ने सरकार के रोक के फैसले को चुनौती दी और कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हार नहीं मानी और डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहाँ भी न्याय की जीत हुई। अंततः मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँचा। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए नियुक्तियों के पक्ष में मुहर लगा दी। पूर्व नेता विरोधी दल ने कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर' विडंबना यह है कि देश की सर्वोच्च अदालत से आदेश आने के बावजूद योगी सरकार ने शासन स्तर पर विभिन्न तकनीकी पेच फंसाकर इन नियुक्तियों और उनके लाभों को बाधित किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आती है, बल्कि उन युवाओं के साथ भी अन्याय है जो अपनी योग्यता सिद्ध कर चुके हैं। संस्कृत को भारत की आत्मा कहा जाता है, लेकिन जब इसी भाषा के विद्वान और शिक्षक अपनी आजीविका के लिए दर-दर भटकते हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि सरकारें अदालती आदेशों के बाद भी 'हथकंडे' अपनाकर नियुक्तियां रोकती हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। योगी सरकार और प्रशासन को अब हठधर्मिता छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए ताकि संस्कृत शिक्षा का संरक्षण हो सके और युवाओं को उनका उचित हक मिल सके। (रामगोविन्द चौधरी) पूर्व नेता प्रतिपक्ष उoप्र
राष्ट्रीय परशुराम सेना ने बृजेश तिवारी और मिथिलेश तिवारी को दी बड़ी जिम्मेदारी
प्रतापगढ़। राष्ट्रीय परशुराम सेना द्वारा विस्तार की कड़ी में राष्ट्रीय परशुराम सेना रजिस्टर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कृष्णकांत मिश्रा ने पंजाब प्रदेश के अध्यक्ष मिथिलेश तिवारी को लुधियाना (पंजाब ) का तथा बृजेश तिवारी को गुजरात प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इन दोनों चेहरे को जमीनी तथा ऊर्जावान माना जाता है ।
संगठन नेतृत्व का कहना है कि इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य समाज की एकता तथा ब्राह्मण हितों का संरक्षण और संगठन की नीतियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का है। नवनियुक्त पदाधिकारियों ने नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह संगठन की गरिमा तथा विस्तार के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। इन नियुक्तियों के बाद समर्थकों के द्वारा विभिन्न माध्यमों से बधाई देने वालों का तांता लगा है।
यूपी में छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं 42 साल के लिए लीज पर देने की तैयारी, विरोध तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार छह लघु जल विद्युत परियोजनाओं को 42 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को लीज पर देने की तैयारी में है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर के अनुसार निजी कंपनियों को 1.5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट अग्रिम प्रीमियम के आधार पर परियोजनाएं सौंपी जाएंगी, जिसके बाद वे 42 वर्षों तक उनका संचालन करेंगी।

प्रदेश की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं

प्रदेश में पहले से
300 मेगावाट रिहंद,
99 मेगावाट ओबरा,
72 मेगावाट माताटीला (ललितपुर),
72 मेगावाट खारा

जल विद्युत परियोजनाएं संचालित हैं। इसके अतिरिक्त छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं, जिनके पास करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि और अन्य परिसंपत्तियां मौजूद हैं।

लीज पर प्रस्तावित परियोजनाएं

लीज पर दी जाने वाली परियोजनाओं में शामिल हैं –
भोला (2.7 मेगावाट)
सलावा (3 मेगावाट)
निर्गजनी (5 मेगावाट)
चित्तौरा (3 मेगावाट)
पलरा (0.6 मेगावाट)
सुमेरा (1.5 मेगावाट)
ये सभी परियोजनाएं अपर गंगा नहर पर स्थित हैं और लगभग 90 से 97 वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं।

निजीकरण के खिलाफ संगठनों का विरोध

टेंडर जारी होते ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन की आपत्ति

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि अपर गंगा नहर में वर्षभर पानी उपलब्ध रहता है, जिससे इन परियोजनाओं में लगातार बिजली उत्पादन संभव है।उन्होंने दावा किया कि सीमित निवेश से इनके पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण की लागत एक वर्ष में वसूल की जा सकती है। साथ ही आरोप लगाया कि टेंडर में स्थापित क्षमता 15.5 मेगावाट के बजाय 6.3 मेगावाट दर्शाई गई है और परिसंपत्तियों का मूल्य भी कम आंका गया है। उन्होंने टेंडर निरस्त होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

कर्मचारियों पर असर का मुद्दा

पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि यह कदम निजीकरण की नई रणनीति है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।उन्होंने यह भी कहा कि निजी कंपनियां अपनी शर्तों पर नियुक्तियां करेंगी और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। संगठनों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर टेंडर निरस्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
প্রয়াত বিশিষ্ট রাজনীতিবিদ মুকুল রায়


প্রবীর রায়:প্রয়াত হলেন বিশিষ্ট রাজনীতিবিদ মুকুল রায়। মৃত্যু কালে তার বয়স হয়েছিল ৭১বছর। রবিবার রাত প্রায় দেড়টা নাগাদ সল্টলেকের একটি বেসরকারি হাসপাতালে শেষ নিঃশ্বাস ত্যাগ করেন বর্ষীয়ান এই রাজনীতিক। ছেলে শুভ্রাংশু বাবার মৃত্যু সংবাদ নিশ্চিত করেছেন।মুকুল রায়ের প্রয়াণের খবর ছড়িয়ে পড়তেই রাজনৈতিক মহলে শোকের ছায়া নেমে এসেছে। হাসপাতালের বাইরে ভিড় জমাতে শুরু করেছেন অনুরাগীরা।বেশ কয়েক মাস ধরেই গুরুতর অসুস্থতা নিয়ে কলকাতার একটি বেসরকারি হাসপাতালে ভর্তি ছিলেন। তাঁর প্রয়াণে শোকের ছায়া নেমে এসেছে রাজনৈতিক মহলে।মুকুল রায় তৃণমূলে এক সময় মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের পরেই দলের সেকেন্ড ইন কমান্ডের দায়িত্বে ছিলেন। দীর্ঘ কয়েক দশক ধরে রাজ্য এবং জাতীয় রাজনীতিতে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেছেন। দেশের রেল মন্ত্রীর দায়িত্বও সামলেছেন।পরে দলের সঙ্গে মনোমালিন্য হয় ও ঘাসফুল ছেড়ে বিজেপিতে যোগ দেন। শেষ কয়েক বছর ধরে শারীরিক অসুস্থতার কারণে সক্রিয় রাজনীতি থেকে কিছুটা দূরেই ছিলেন। উল্লেখ্য, ২০২১ সালের বিধানসভা নির্বাচনে কৃষ্ণনগর উত্তর কেন্দ্র থেকে বিজেপির টিকিটে জয়ী হয়েছিলেন মুকুল রায়। কিন্তু নির্বাচনের পর তিনি পুনরায় পুরনো দল তৃণমূলে ফিরে যান। এর পরেই দলত্যাগ বিরোধী আইনে তাঁর বিধায়ক পদ খারিজের দাবিতে সরব হন বিরোধী দলনেতা শুভেন্দু অধিকারী ও বিজেপি বিধায়ক অম্বিকা রায়। বিধানসভার স্পিকার মুকুল রায়ের পদ খারিজ করতে অস্বীকার করায় মামলা গড়ায় কলকাতা হাইকোর্টে। হাইকোর্ট মুকুল রায়ের বিধায়ক পদ খারিজের নির্দেশ দিলেও সুপ্রিম কোর্ট মানবিক দিক থেকে বিবেচনা করে হাইকোর্টের দেওয়া বিধায়ক পদ খারিজের নির্দেশের ওপর অন্তর্বর্তী স্থগিতাদেশ জারি করে।বর্ষীয়ান এই নেতার প্রয়াণে শাসক–বিরোধী ভেদাভেদ ভুলে শোকবার্তা দিতে শুরু করেছেন বহু রাজনৈতিক ব্যক্তিত্ব। পশ্চিমবঙ্গের রাজনীতিতে তাঁর ভূমিকা আজ স্মরণ করা হচ্ছে বিভিন্ন মহলে। তাঁর বিদায় নিঃসন্দেহে রাজ্যের রাজনৈতিক ইতিহাসে বড় শূন্যতা তৈরি করল।