राघव चड्डा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए गए, क्या है AAP के एक्शन के पीछे की वजह?

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी दबाव में है। इस बीच राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को सतह पर ला दिया है। दरअसल आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।

अशोक मित्तल को मिली राघव चड्ढा की जगह

आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। पार्टी ने राज्य सभा सचिवालय को इस संदर्भ में एक पत्र भेजा। वहीं अब अशोक मित्तल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से उपनेता होंगे। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उप-नेता नियुक्त करने का आग्रह किया है।

राघव चड्ढा के बोलने पर भी रोक

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे। लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए डाटा रोलओवर की सुविधा की मांग

राघव चड्ढा ने बीते दिनों राज्यसभा में दूरसंचार कंपनियों के डाटा इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जो डाटा उपभोक्ता इस्तेमाल नहीं कर पाते, वह खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले दिन के लिए बचा रहना चाहिए। अभी रोजाना मिलने वाला डाटा रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाता है, जबकि इसके लिए उपभोक्ता पैसे चुका चुके होते हैं। इसलिए इसका फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि ग्राहकों को मिलना चाहिए। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि बचे हुए डाटा के आधार पर अगले महीने रिचार्ज में छूट दी जाए और ग्राहकों को डाटा रोलओवर की सुविधा मिले।

राघव चड्ढा पर एक्शन की वजह क्या?

लगातार जनगित के मुद्दों को उठाने के बाद भी आम आमदी पार्टी की ओर से कुए गए एक्शन पर सवाल उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं। वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है। राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।

बहसूमा थाना को मिले नए प्रभारी, रविंद्र कुमार ने संभाली कमान
मेरठ/बहसूमा। थाना बहसूमा को नए थाना प्रभारी के रूप में रविंद्र कुमार मिले हैं। चार्ज संभालते ही उन्होंने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया है। रविंद्र कुमार ने कहा कि क्षेत्र में अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा और किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

थाना प्रभारी ने साफ शब्दों में कहा कि क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा और अमन-चैन बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि थाना परिसर आम जनता के लिए 24 घंटे खुला रहेगा और हर पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा।

रविंद्र कुमार पहले स्वाट टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई। अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के चर्चित अपराधियों पर सख्त नजर रखी जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चार्ज संभालते ही रविंद्र कुमार एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने पुलिस टीम को निर्देश दिए हैं कि गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। थाना प्रभारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने नए थाना प्रभारी से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद जताई है।
‌।। ফুটবল মাঠের কড়া রেফারি এবার রাজনৈতিক প্রতিযোগিতার মাঠে ‌‌।।
বসিরহাট : ফুটবল মাঠে তিনি পরিচিত কঠোর রেফারি হিসেবে। তার বাঁশির শব্দে থেমে যায় খেলার গতি। তার সিদ্ধান্তে বদলে যায় ম্যাচের রূপরেখা। কিন্তু এবার সেই মানুষটিই নেমেছেন এক ভিন্ন ময়দানে, রাজনীতির মাঠে।
বসিরহাটের মিনাখাঁ বিধানসভা কেন্দ্র থেকে বাম সমর্থিত আইএসএফের প্রার্থী হিসেবে লড়াই করছেন রেফারি প্রতীক মণ্ডল। যিনি এতদিন ফুটবল মাঠে নিরপেক্ষ সিদ্ধান্তের জন্য পরিচিত ছিলেন, তিনিই এখন মানুষের রায় পাওয়ার লড়াইয়ে।
আইএসএলের ম্যাচ পরিচালনার অভিজ্ঞতা রয়েছে প্রতীকের। চলতি মরশুমেও একাধিক গুরুত্বপূর্ণ ম্যাচে দায়িত্ব সামলেছেন তিনি। তবে তার কথায়, ফুটবল মাঠ আর ভোটের ময়দান একেবারেই আলাদা। মাঠে যেখানে তার হাতে থাকে হলুদ-লাল কার্ড, এখানে সেই ক্ষমতা নেই। এখানে চূড়ান্ত সিদ্ধান্ত নেন মানুষই।
মিনাখাঁয় তার প্রতিদ্বন্দ্বী তৃণমূল কংগ্রেসের তিনবারের বিধায়িকা ঊষারানি মণ্ডল এবং বিজেপির রুদ্রেন্দ্র পাত্র। প্রতিযোগিতা যে কঠিন, তা স্বীকার করছেন প্রতীক। তবে চাপের ম্যাচ সামলানোর অভিজ্ঞতা তাকে আত্মবিশ্বাসী করে তুলেছে। রাজনীতিতে আসার কারণ হিসেবে তিনি জানাচ্ছেন, আগে থেকেই সমাজসেবার সঙ্গে যুক্ত ছিলেন। কিন্তু বৃহত্তর পরিসরে কাজ করার সুযোগ খুঁজছিলেন। আইএসএফ নেতৃত্বের সঙ্গে কথা বলার পর তাদের ভাবনা ও লক্ষ্য তাকে আকৃষ্ট করে। সেখান থেকেই রাজনীতিতে আসার সিদ্ধান্ত।
পরিবারে আগে কেউ রাজনীতির সঙ্গে যুক্ত না থাকলেও মানুষের পাশে থাকার ইচ্ছাই তাকে এই পথে এনেছে। বাবার মৃত্যুর পর পারিবারিক ব্যবসা বন্ধ হয়ে যায়, মা এখন ছোটখাটো ব্যবসা সামলান। আর প্রতীকের নিজের জগৎ ছিল সবসময় ফুটবল মাঠকে ঘিরেই।
তিনি মনে করেন, ফুটবলারদের মতো রেফারিরাও সমান পরিশ্রম করেন, অথচ তাদের পরিচিতি অনেক কম। তার এই পদক্ষেপ অন্যদেরও অনুপ্রাণিত করতে পারে বলেই বিশ্বাস। রাজনীতির ময়দানে নেমে তিনি সৌজন্যের রাজনীতির কথা বলছেন। তার মতে, বিরোধীদেরও সম্মান দেওয়া উচিত। এমনকি প্রয়োজনে বিরোধীদের নমিনেশন জমা দিতেও সাহায্য করা উচিত। এটাই সুস্থ গণতন্ত্রের চেহারা।
প্রচারে পুরোপুরি নেমে পড়েছেন প্রতীক। রোদ, বৃষ্টি উপেক্ষা করে মানুষের সঙ্গী হতে চাইছেন তিনি। ফুটবল মাঠে অফসাইড বা ফাউলের স্পষ্ট নিয়ম থাকে, কিন্তু রাজনীতির মাঠে সেই রেখা অদৃশ্য। এখানে শেষ কথা বলেন মানুষই। আর একজন রেফারি হিসেবে প্রতীক মণ্ডল জানেন, এই মাঠে জনগণই আসল বিচারক।
चाय बागान मजदूरों को अधिकार दिलाना हमारी प्राथमिकता: गोसाईंगांव में कल्पना सोरेन का बड़ा वादा।

गोसाईंगांव/असम: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में आज गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में एक विशाल चुनावी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसे मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड की गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने संबोधित किया।

इतिहास बदलने वाला चुनाव

जनसभा को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि असम विधानसभा का यह चुनाव कोई सामान्य राजनीतिक मुकाबला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के वंचितों और आदिवासियों के लिए इतिहास बनाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि असम की जनता अब वर्तमान व्यवस्था से ऊब चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

चाय बागान मजदूरों और आदिवासियों के हितों पर जोर

कल्पना सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जेएमएम इन मजदूरों को उनका उचित हक और अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा:

असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब केवल जेएमएम ही कर सकती है।

आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है, जो असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को राजनीतिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करेगा।

दिग्गज नेताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर जेएमएम की वरिष्ठ नेता और सांसद श्रीमती जोबा माझी तथा विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी जनता को संबोधित किया। नेताओं ने प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा की साफ-सुथरी छवि और सेवा भाव का जिक्र करते हुए उन्हें भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की।

बदलाव की बयार

सभा में उमड़ी भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए कल्पना सोरेन ने दावा किया कि गोसाईंगांव सहित असम की कई सीटों पर जेएमएम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर तीर-धनुष (जेएमएम का चुनाव चिह्न) पर बटन दबाएं और शोषण मुक्त असम के निर्माण में भागीदार बनें।

गैस संकट से जूझा बहसूमा, घंटों लाइन के बाद भी खाली हाथ लौटे लोग

बहसूमा। कस्बे में स्थित इंडियन गैस एजेंसी पर गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सैकड़ों उपभोक्ता गैस सिलेंडर लेने के लिए सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। भीषण गर्मी और घंटों इंतजार के बावजूद अधिकांश लोगों को गैस नहीं मिल सकी, जिससे लोगों में आक्रोश और मायूसी साफ दिखाई दी।

सुबह से ही महिलाओं, बुजुर्गों और पुरुषों की भारी भीड़ एजेंसी पर जुट गई। कई महिलाएं छोटे बच्चों के साथ 3–4 घंटे तक लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन जब उनकी बारी आई तो कर्मचारियों ने “बुकिंग न होने” का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया। इससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कपिल ने बताया कि वह करीब चार घंटे तक लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन अंत में गैस नहीं मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी पर कुछ लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि आम उपभोक्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

लाइन में लगे विनोद कुमार अरुण तोमर सहित अन्य उपभोक्ताओं ने बताया कि एक बार बुकिंग कराने के बाद दूसरा सिलेंडर करीब 45 दिन बाद ही मिल रहा है। इस नई व्यवस्था से परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, क्योंकि एक सिलेंडर इतने लंबे समय तक चल पाना मुश्किल है।

चूल्हे पर लौटने को मजबूर महिलाएं
ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। गांव मोहम्मदपुर सकिस्त निवासी सनम पत्नी कपिल ने बताया कि गैस न मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में जंगल से लकड़ी लाकर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इससे समय और श्रम दोनों अधिक लग रहे हैं।



एजेंसी संचालक ने दी सफाई
इस संबंध में गैस एजेंसी संचालक अनिल सागर ने बताया कि नई गाइडलाइंस के अनुसार एक बुकिंग पर दूसरा सिलेंडर 45 दिन बाद ही दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों को इस नियम की जानकारी नहीं है, जिसके कारण वे बिना बुकिंग के एजेंसी पहुंच जाते हैं। गैस केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को दी जाती है, जिनकी बुकिंग पहले से दर्ज होती है।

निष्कर्ष
लगातार बढ़ती परेशानी और नियमों की जानकारी के अभाव में उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभाग से लोगों ने व्यवस्था सुधारने और आमजन को राहत देने की मांग की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने 3 अप्रैल को मशाल जुलूस,9 अप्रैल को झारखंड बंद को लिया वापस

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू आज देर शाम नई दिल्ली से रांची पहुंचते ही प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता के मीडिया को संबोधित किया।

श्री साहू ने विष्णुगढ़ कुसुंबा में बेटी की निर्मम हत्या को लेकर पार्टी द्वारा घोषित 3 अप्रैल के मशाल जुलूस और 9 अप्रैल की झारखंड बंदी को वायस लेने की घोषणा की।

उन्होंने राज्य सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा के प्रचंड दबाव के बाद कुसुंबा की बेटी की निर्मम हत्या का उद्भेदन हुआ है,लेकिन आगे इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि बलि देने संबंधी बातों की सच्चाई सामने आए। बलि पत्थर से मारकर नहीं दी जाती है। पुलिस ने जो बातें बताई है उसकी और छानबीन की जरूरत है, पोक्सो एक्ट आदि के उल्लंघन संबंधी बातें भी उजागर हो।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार भीम राम कभी भी किसी स्तर का भाजपा कार्यकर्ता नहीं रहा।मीडिया में सत्ता पक्ष के दबाव में भ्रामक खबरें चलाई जा रही है।

कहा कि भाजपा ही जिसके स्वयं प्रदेश अध्यक्ष सहित सांसद विधायकगण,,जिलाध्यक्ष रामनवमी जुलूस त्यौहार के बीच घटना स्थल गए, हजारीबाग बंद और आंदोलन के माध्यम से पुलिस प्रशासन पर दबाव का परिणाम है हत्या के षडयंत्र का उद्भेदन ,गिरफ्तारी।

कहा कि आज जो सड़कों पर झंडा लेकर कांग्रेस झामुमो के लोग नाच रहे,अनर्गल बयानबाजी कर रहे वे 8 दिन तक किस बिल में छुपे थे।क्यों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन,विधायक कल्पना सोरेन ने कोई ट्वीट तक नहीं किया। क्यों नहीं घटना स्थल गए।

कहा कि पिछले 6 वर्षों में राज्य में लगातार लूट,हत्या दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी है। अब तो हिंदू पर्व त्योहारों में पत्थरबाजी ,अड़ंगा आम बात हो गई है।ये सब सरकार के तुष्टीकरण नीति का परिणाम है।

कहा कि राज्य सरकार चेते,विधि व्यवस्था को ठीक करे, पुलिस प्रशासन को बालू कोयला पत्थर चोरों से वसूली कराना बंद करे।

उन्होंने कहा कि भाजपा चेतावनी देती है कि पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में फिर कोई बेटी की इज्जत नहीं लूटी जाए, हत्या नहीं हो, खनिज बालू पत्थर की लूट बंद हो नहीं तो भाजपा कार्यकर्ता झारखंड को ठप करेंगे, सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

सरूपथर में उमड़ा जनसैलाब: मुख्यमंत्री सोरेन बोले—साहिल मुंडा को चुनना मतलब अपने हक-अधिकार को चुनना।

सरूपथर/असम: असम विधानसभा चुनाव के सियासी रण में झारखण्ड के मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन ने पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को असम के सरूपथर विधानसभा क्षेत्र में जेएमएम प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया और क्षेत्र की जनता से 'मिट्टी और जज्बे' के नाम पर वोट मांगा।

साहिल मुंडा: सत्ता नहीं, सामाजिक परिवर्तन का चेहरा

जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि साहिल मुंडा का राजनीति में आना महज एक चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि यह असम की माटी और झारखण्ड के जज्बे का एक ऐतिहासिक संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहिल मुंडा केवल एक प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि वे उस वंचित समाज की आवाज हैं जिसे दशकों तक हाशिए पर रखा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, "साहिल का लक्ष्य विधायक की कुर्सी पाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास सुनिश्चित करना है। वे पद के लालच से ऊपर उठकर जनता के हक के लिए संघर्ष करने वाले नेता हैं।"

स्थानीय अधिकारों और अस्मिता की रक्षा

हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में 'झारखण्डी अस्मिता' और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरूपथर के युवाओं और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए साहिल मुंडा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने जनता को आगाह किया कि उन्हें अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए एक ऐसे नेतृत्व को चुनना होगा जो उनकी भाषा, उनकी संस्कृति और उनकी समस्याओं को गहराई से समझता हो।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि साहिल मुंडा युवाओं को केवल 'वोट बैंक' नहीं समझते, बल्कि उन्हें नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार कर रहे हैं। जेएमएम के नेतृत्व में सरूपथर में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय स्वायत्तता के मुद्दों पर ऐतिहासिक काम करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

विरोधियों पर प्रहार और विकास का संकल्प

विपक्ष पर निशाना साधते हुए सोरेन ने कहा कि जो लोग केवल विभाजन की राजनीति करते हैं, उन्हें जनता इस बार करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में जिस तरह उनकी सरकार जल-जंगल-जमीन और आदिवासियों-मूलवासियों के हितों के लिए काम कर रही है, वही मॉडल अब जेएमएम असम में भी लागू करना चाहती है।

"साहिल मुंडा के रूप में आपके पास एक नई उम्मीद है। इन्हें चुनना मतलब अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है।"

— मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

जनसभा के दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था और "जय झारखण्ड, जय असम" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस सभा के बाद सरूपथर का चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री की इस रैली ने स्थानीय मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दिया है।

नैमिष नगर योजना को रफ्तार: 2500 किसानों की सहमति, 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे की प्रक्रिया तेज

* आईआईएम रोड पर बसने जा रहा आधुनिक उपनगर, 2 लाख लोगों को मिलेगा आवास

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के उत्तरी क्षेत्र में आईआईएम रोड पर प्रस्तावित एलडीए की नैमिष नगर योजना तेजी से आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 150 हेक्टेयर भूमि का बैनामा प्राधिकरण के पक्ष में हो चुका है, जबकि 2500 से अधिक किसानों ने 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे के लिए सहमति पत्र जमा कर दिए हैं।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, योजना के दो सेक्टरों में भूखंडों के लिए पंजीकरण सितंबर 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए विकास कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।
योजना की प्रभारी अधिकारी संगीता राघव ने बताया कि बीकेटी तहसील के 18 गांवों की लगभग 1486 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना में शामिल की जानी है। इनमें भौली, लक्ष्मीपुर, पूरब गांव, पुरवा, सैरपुर, फर्रुखाबाद, कोड़री भौली, कमलाबाद, कमलापुर, पलहरी, गोपरामऊ, बारूमऊ, धतिंगरा, सैदापुर, पश्चिम गांव, धोबैला, उमरभारी और दुग्गौर जैसे गांव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण और रजिस्ट्री प्रक्रिया के साथ लगातार सहमति पत्र मिल रहे हैं। साथ ही, योजना में शामिल गांवों का भी समग्र विकास किया जाएगा। इसके तहत संपर्क मार्ग, जल निकासी, खेल मैदान, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र, तालाब, स्कूल, पार्क और श्मशान जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
करीब 2 लाख लोगों को आवासीय सुविधा देने वाली यह योजना एक आधुनिक उपनगर के रूप में विकसित की जाएगी। इसमें चौड़ी सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और व्यावसायिक केंद्र जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
नैमिष नगर योजना से लखनऊ में उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को भी नई गति मिलेगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
विष्णुगढ़ कांड ने खोला भाजपा का राज: झामुमो का आरोप—साजिश और नफरत की राजनीति कर रही भाजपा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने गुरुवार को प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखंड की आत्मा को झकझोर देने वाली हजारीबाग के विष्णुगढ़ की मासूम 13 वर्षीय बच्ची की नरबलि की घटना ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। यह घटना न केवल अमानवीय और रोंगटे खड़े कर देने वाली है, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को भी उजागर करती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा इस दर्दनाक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करता है और पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता है।

परंतु इस संवेदनशील और दुखद घटना को लेकर जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी ने राजनीति करने की कोशिश की, वह निंदनीय ही नहीं बल्कि अत्यंत खतरनाक भी है। भाजपा ने इस मामले को जानबूझकर साम्प्रदायिक रंग देने की साजिश रची, ताकि राज्य में अशांति फैलाकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। अब जब जांच में सच्चाई सामने आ चुकी है, भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस जघन्य अपराध का मुख्य आरोपी कोई और नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़ा हुआ व्यक्ति भीम राम है, जो पार्टी का बूथ अध्यक्ष और एससी-एसटी प्रकोष्ठ से भी जुड़ा बताया जा रहा है। यह वही लोग हैं जो जनता को गुमराह कर राज्य में मशाल जुलूस और बंद का आह्वान कर रहे थे। आज जब सच्चाई सामने आ गई है, भाजपा नेताओं को जवाब देना चाहिए कि वे झारखंड की जनता से माफी कब मांगेंगे।

झामुमो यह स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। यह पार्टी हर बार समाज में हिन्दू-मुस्लिम का जहर घोलकर लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश करती है। इनके पास न विकास का विजन है, न समाज को जोड़ने की सोच। इनका एकमात्र एजेंडा है – नफरत फैलाओ और सत्ता पाओ।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड की जागरूक जनता भाजपा की इन साजिशों को भलीभांति समझ चुकी है। आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, मजदूर, किसान, महिलाएं और युवा – हर वर्ग भाजपा की विभाजनकारी राजनीति से वाकिफ है। राज्य की जनता जानती है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार सबको साथ लेकर चलने और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विष्णुगढ़ की यह घटना अत्यंत दुखद है, लेकिन उससे भी अधिक खतरनाक है उसका राजनीतिक दुरुपयोग। भाजपा ने इस संवेदनशील मुद्दे पर झूठ फैलाने, भ्रम पैदा करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम किया है। यह उनकी निम्न मानसिकता और गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का प्रमाण है। राज्य सरकार ने इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों, जिनमें बच्ची की मां और कथित तांत्रिक शामिल हैं, को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

झामुमो भाजपा से पूछता है – क्या अब वे अपने द्वारा घोषित झारखंड बंद को वापस लेंगे? क्या वे अपनी गलती स्वीकार करेंगे? या फिर हमेशा की तरह सच्चाई सामने आने के बाद भी चुप्पी साध लेंगे?

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर राजनीति बंद करे और आत्ममंथन करे। हर बार अपराधियों के साथ खड़े होकर और बाद में उसे संयोग बताकर पल्ला झाड़ लेना उनकी पुरानी आदत बन चुकी है। लेकिन जनता सब देख रही है, ये देख रही है कि मुख्य आरोपी भीम राम की तस्वीर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के साथ वायरल है। भीम राम ने अपराध के साथ पुलिस की जांच को भटकाने का भी काम किया है। वह भाजपा के बड़े नेताओं के संपर्क में था तो क्या इस बात से इनकार किया जा सकता है कि उसने अपने आकाओं के इशारे पर यह काम नहीं किया ?

झारखंड मुक्ति मोर्चा एक बार फिर दोहराता है कि वह इस घटना के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राज्य में शांति, सौहार्द और विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता रहेगा।

झारखंड में बिगड़ी कानून-व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का शंखनाद: चुटिया में काला बिल्ला बांध सड़क पर उतरे कार्यकर्ता।

रांची: झारखंड में बदतर होती कानून-व्यवस्था और खनन माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस के खिलाफ अब सत्ता पक्ष के भीतर से ही आवाजें बुलंद होने लगी हैं। इसी कड़ी में आज चुटिया प्रखंड कांग्रेस समिति द्वारा स्थानीय इंदिरा गांधी चौक पर झारखंड सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ एक जोरदार मौन विरोध प्रदर्शन किया गया।

प्रमुख मांगें और प्रदर्शन का स्वरूप

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:

राज्य की कानून-व्यवस्था में अविलंब आमूलचूल सुधार लाया जाए।

खनन माफियाओं की गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।

प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील बनाकर उसे जन-आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करने हेतु बाध्य किया जाए।

यह जुलूस इंदिरा गांधी चौक से शुरू होकर विभिन्न मोहल्लों का भ्रमण करते हुए चुटिया थाना के समक्ष पहुंचकर संपन्न हुआ। गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू एवं प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के आह्वान पर आयोजित यह कार्यक्रम राज्य में अपनी तरह का पहला विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।

नेताओं की उपस्थिति

इस विरोध प्रदर्शन में संगठन के कई दिग्गज और स्थानीय कार्यकर्ता शामिल हुए। मुख्य रूप से:

अरुण चावला (रांची महानगर उपाध्यक्ष सह चुटिया प्रखंड प्रभारी)

प्रशांत गौरव (प्रखंड अध्यक्ष)

उनके साथ दीपेश पाठक, उर्मिला, राखी कौर, अंतरा कच्छप, गोपीचंद अग्रवाल, कृष्णा सहाय, संजीव महतो, प्रदीप, अजीत सिंह, महेश राय, बिरसा तिर्की, अजय महली, विवेक सिंह, सावन, अनुराग, शुभम, ऋषभ सिन्हा, भोला, पवन, और नीतीश तिर्की सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

राघव चड्डा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए गए, क्या है AAP के एक्शन के पीछे की वजह?

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी दबाव में है। इस बीच राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को सतह पर ला दिया है। दरअसल आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।

अशोक मित्तल को मिली राघव चड्ढा की जगह

आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। पार्टी ने राज्य सभा सचिवालय को इस संदर्भ में एक पत्र भेजा। वहीं अब अशोक मित्तल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से उपनेता होंगे। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उप-नेता नियुक्त करने का आग्रह किया है।

राघव चड्ढा के बोलने पर भी रोक

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे। लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए डाटा रोलओवर की सुविधा की मांग

राघव चड्ढा ने बीते दिनों राज्यसभा में दूरसंचार कंपनियों के डाटा इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जो डाटा उपभोक्ता इस्तेमाल नहीं कर पाते, वह खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले दिन के लिए बचा रहना चाहिए। अभी रोजाना मिलने वाला डाटा रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाता है, जबकि इसके लिए उपभोक्ता पैसे चुका चुके होते हैं। इसलिए इसका फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि ग्राहकों को मिलना चाहिए। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि बचे हुए डाटा के आधार पर अगले महीने रिचार्ज में छूट दी जाए और ग्राहकों को डाटा रोलओवर की सुविधा मिले।

राघव चड्ढा पर एक्शन की वजह क्या?

लगातार जनगित के मुद्दों को उठाने के बाद भी आम आमदी पार्टी की ओर से कुए गए एक्शन पर सवाल उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं। वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है। राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।

बहसूमा थाना को मिले नए प्रभारी, रविंद्र कुमार ने संभाली कमान
मेरठ/बहसूमा। थाना बहसूमा को नए थाना प्रभारी के रूप में रविंद्र कुमार मिले हैं। चार्ज संभालते ही उन्होंने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया है। रविंद्र कुमार ने कहा कि क्षेत्र में अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा और किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

थाना प्रभारी ने साफ शब्दों में कहा कि क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा और अमन-चैन बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि थाना परिसर आम जनता के लिए 24 घंटे खुला रहेगा और हर पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा।

रविंद्र कुमार पहले स्वाट टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई। अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के चर्चित अपराधियों पर सख्त नजर रखी जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चार्ज संभालते ही रविंद्र कुमार एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने पुलिस टीम को निर्देश दिए हैं कि गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। थाना प्रभारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने नए थाना प्रभारी से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद जताई है।
‌।। ফুটবল মাঠের কড়া রেফারি এবার রাজনৈতিক প্রতিযোগিতার মাঠে ‌‌।।
বসিরহাট : ফুটবল মাঠে তিনি পরিচিত কঠোর রেফারি হিসেবে। তার বাঁশির শব্দে থেমে যায় খেলার গতি। তার সিদ্ধান্তে বদলে যায় ম্যাচের রূপরেখা। কিন্তু এবার সেই মানুষটিই নেমেছেন এক ভিন্ন ময়দানে, রাজনীতির মাঠে।
বসিরহাটের মিনাখাঁ বিধানসভা কেন্দ্র থেকে বাম সমর্থিত আইএসএফের প্রার্থী হিসেবে লড়াই করছেন রেফারি প্রতীক মণ্ডল। যিনি এতদিন ফুটবল মাঠে নিরপেক্ষ সিদ্ধান্তের জন্য পরিচিত ছিলেন, তিনিই এখন মানুষের রায় পাওয়ার লড়াইয়ে।
আইএসএলের ম্যাচ পরিচালনার অভিজ্ঞতা রয়েছে প্রতীকের। চলতি মরশুমেও একাধিক গুরুত্বপূর্ণ ম্যাচে দায়িত্ব সামলেছেন তিনি। তবে তার কথায়, ফুটবল মাঠ আর ভোটের ময়দান একেবারেই আলাদা। মাঠে যেখানে তার হাতে থাকে হলুদ-লাল কার্ড, এখানে সেই ক্ষমতা নেই। এখানে চূড়ান্ত সিদ্ধান্ত নেন মানুষই।
মিনাখাঁয় তার প্রতিদ্বন্দ্বী তৃণমূল কংগ্রেসের তিনবারের বিধায়িকা ঊষারানি মণ্ডল এবং বিজেপির রুদ্রেন্দ্র পাত্র। প্রতিযোগিতা যে কঠিন, তা স্বীকার করছেন প্রতীক। তবে চাপের ম্যাচ সামলানোর অভিজ্ঞতা তাকে আত্মবিশ্বাসী করে তুলেছে। রাজনীতিতে আসার কারণ হিসেবে তিনি জানাচ্ছেন, আগে থেকেই সমাজসেবার সঙ্গে যুক্ত ছিলেন। কিন্তু বৃহত্তর পরিসরে কাজ করার সুযোগ খুঁজছিলেন। আইএসএফ নেতৃত্বের সঙ্গে কথা বলার পর তাদের ভাবনা ও লক্ষ্য তাকে আকৃষ্ট করে। সেখান থেকেই রাজনীতিতে আসার সিদ্ধান্ত।
পরিবারে আগে কেউ রাজনীতির সঙ্গে যুক্ত না থাকলেও মানুষের পাশে থাকার ইচ্ছাই তাকে এই পথে এনেছে। বাবার মৃত্যুর পর পারিবারিক ব্যবসা বন্ধ হয়ে যায়, মা এখন ছোটখাটো ব্যবসা সামলান। আর প্রতীকের নিজের জগৎ ছিল সবসময় ফুটবল মাঠকে ঘিরেই।
তিনি মনে করেন, ফুটবলারদের মতো রেফারিরাও সমান পরিশ্রম করেন, অথচ তাদের পরিচিতি অনেক কম। তার এই পদক্ষেপ অন্যদেরও অনুপ্রাণিত করতে পারে বলেই বিশ্বাস। রাজনীতির ময়দানে নেমে তিনি সৌজন্যের রাজনীতির কথা বলছেন। তার মতে, বিরোধীদেরও সম্মান দেওয়া উচিত। এমনকি প্রয়োজনে বিরোধীদের নমিনেশন জমা দিতেও সাহায্য করা উচিত। এটাই সুস্থ গণতন্ত্রের চেহারা।
প্রচারে পুরোপুরি নেমে পড়েছেন প্রতীক। রোদ, বৃষ্টি উপেক্ষা করে মানুষের সঙ্গী হতে চাইছেন তিনি। ফুটবল মাঠে অফসাইড বা ফাউলের স্পষ্ট নিয়ম থাকে, কিন্তু রাজনীতির মাঠে সেই রেখা অদৃশ্য। এখানে শেষ কথা বলেন মানুষই। আর একজন রেফারি হিসেবে প্রতীক মণ্ডল জানেন, এই মাঠে জনগণই আসল বিচারক।
चाय बागान मजदूरों को अधिकार दिलाना हमारी प्राथमिकता: गोसाईंगांव में कल्पना सोरेन का बड़ा वादा।

गोसाईंगांव/असम: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में आज गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में एक विशाल चुनावी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसे मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड की गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने संबोधित किया।

इतिहास बदलने वाला चुनाव

जनसभा को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि असम विधानसभा का यह चुनाव कोई सामान्य राजनीतिक मुकाबला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के वंचितों और आदिवासियों के लिए इतिहास बनाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि असम की जनता अब वर्तमान व्यवस्था से ऊब चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

चाय बागान मजदूरों और आदिवासियों के हितों पर जोर

कल्पना सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जेएमएम इन मजदूरों को उनका उचित हक और अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा:

असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब केवल जेएमएम ही कर सकती है।

आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है, जो असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को राजनीतिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करेगा।

दिग्गज नेताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर जेएमएम की वरिष्ठ नेता और सांसद श्रीमती जोबा माझी तथा विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी जनता को संबोधित किया। नेताओं ने प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा की साफ-सुथरी छवि और सेवा भाव का जिक्र करते हुए उन्हें भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की।

बदलाव की बयार

सभा में उमड़ी भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए कल्पना सोरेन ने दावा किया कि गोसाईंगांव सहित असम की कई सीटों पर जेएमएम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर तीर-धनुष (जेएमएम का चुनाव चिह्न) पर बटन दबाएं और शोषण मुक्त असम के निर्माण में भागीदार बनें।

गैस संकट से जूझा बहसूमा, घंटों लाइन के बाद भी खाली हाथ लौटे लोग

बहसूमा। कस्बे में स्थित इंडियन गैस एजेंसी पर गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सैकड़ों उपभोक्ता गैस सिलेंडर लेने के लिए सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। भीषण गर्मी और घंटों इंतजार के बावजूद अधिकांश लोगों को गैस नहीं मिल सकी, जिससे लोगों में आक्रोश और मायूसी साफ दिखाई दी।

सुबह से ही महिलाओं, बुजुर्गों और पुरुषों की भारी भीड़ एजेंसी पर जुट गई। कई महिलाएं छोटे बच्चों के साथ 3–4 घंटे तक लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन जब उनकी बारी आई तो कर्मचारियों ने “बुकिंग न होने” का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया। इससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कपिल ने बताया कि वह करीब चार घंटे तक लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन अंत में गैस नहीं मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी पर कुछ लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि आम उपभोक्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

लाइन में लगे विनोद कुमार अरुण तोमर सहित अन्य उपभोक्ताओं ने बताया कि एक बार बुकिंग कराने के बाद दूसरा सिलेंडर करीब 45 दिन बाद ही मिल रहा है। इस नई व्यवस्था से परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, क्योंकि एक सिलेंडर इतने लंबे समय तक चल पाना मुश्किल है।

चूल्हे पर लौटने को मजबूर महिलाएं
ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। गांव मोहम्मदपुर सकिस्त निवासी सनम पत्नी कपिल ने बताया कि गैस न मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में जंगल से लकड़ी लाकर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इससे समय और श्रम दोनों अधिक लग रहे हैं।



एजेंसी संचालक ने दी सफाई
इस संबंध में गैस एजेंसी संचालक अनिल सागर ने बताया कि नई गाइडलाइंस के अनुसार एक बुकिंग पर दूसरा सिलेंडर 45 दिन बाद ही दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों को इस नियम की जानकारी नहीं है, जिसके कारण वे बिना बुकिंग के एजेंसी पहुंच जाते हैं। गैस केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को दी जाती है, जिनकी बुकिंग पहले से दर्ज होती है।

निष्कर्ष
लगातार बढ़ती परेशानी और नियमों की जानकारी के अभाव में उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभाग से लोगों ने व्यवस्था सुधारने और आमजन को राहत देने की मांग की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने 3 अप्रैल को मशाल जुलूस,9 अप्रैल को झारखंड बंद को लिया वापस

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू आज देर शाम नई दिल्ली से रांची पहुंचते ही प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता के मीडिया को संबोधित किया।

श्री साहू ने विष्णुगढ़ कुसुंबा में बेटी की निर्मम हत्या को लेकर पार्टी द्वारा घोषित 3 अप्रैल के मशाल जुलूस और 9 अप्रैल की झारखंड बंदी को वायस लेने की घोषणा की।

उन्होंने राज्य सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा के प्रचंड दबाव के बाद कुसुंबा की बेटी की निर्मम हत्या का उद्भेदन हुआ है,लेकिन आगे इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि बलि देने संबंधी बातों की सच्चाई सामने आए। बलि पत्थर से मारकर नहीं दी जाती है। पुलिस ने जो बातें बताई है उसकी और छानबीन की जरूरत है, पोक्सो एक्ट आदि के उल्लंघन संबंधी बातें भी उजागर हो।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार भीम राम कभी भी किसी स्तर का भाजपा कार्यकर्ता नहीं रहा।मीडिया में सत्ता पक्ष के दबाव में भ्रामक खबरें चलाई जा रही है।

कहा कि भाजपा ही जिसके स्वयं प्रदेश अध्यक्ष सहित सांसद विधायकगण,,जिलाध्यक्ष रामनवमी जुलूस त्यौहार के बीच घटना स्थल गए, हजारीबाग बंद और आंदोलन के माध्यम से पुलिस प्रशासन पर दबाव का परिणाम है हत्या के षडयंत्र का उद्भेदन ,गिरफ्तारी।

कहा कि आज जो सड़कों पर झंडा लेकर कांग्रेस झामुमो के लोग नाच रहे,अनर्गल बयानबाजी कर रहे वे 8 दिन तक किस बिल में छुपे थे।क्यों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन,विधायक कल्पना सोरेन ने कोई ट्वीट तक नहीं किया। क्यों नहीं घटना स्थल गए।

कहा कि पिछले 6 वर्षों में राज्य में लगातार लूट,हत्या दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी है। अब तो हिंदू पर्व त्योहारों में पत्थरबाजी ,अड़ंगा आम बात हो गई है।ये सब सरकार के तुष्टीकरण नीति का परिणाम है।

कहा कि राज्य सरकार चेते,विधि व्यवस्था को ठीक करे, पुलिस प्रशासन को बालू कोयला पत्थर चोरों से वसूली कराना बंद करे।

उन्होंने कहा कि भाजपा चेतावनी देती है कि पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में फिर कोई बेटी की इज्जत नहीं लूटी जाए, हत्या नहीं हो, खनिज बालू पत्थर की लूट बंद हो नहीं तो भाजपा कार्यकर्ता झारखंड को ठप करेंगे, सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

सरूपथर में उमड़ा जनसैलाब: मुख्यमंत्री सोरेन बोले—साहिल मुंडा को चुनना मतलब अपने हक-अधिकार को चुनना।

सरूपथर/असम: असम विधानसभा चुनाव के सियासी रण में झारखण्ड के मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन ने पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को असम के सरूपथर विधानसभा क्षेत्र में जेएमएम प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया और क्षेत्र की जनता से 'मिट्टी और जज्बे' के नाम पर वोट मांगा।

साहिल मुंडा: सत्ता नहीं, सामाजिक परिवर्तन का चेहरा

जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि साहिल मुंडा का राजनीति में आना महज एक चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि यह असम की माटी और झारखण्ड के जज्बे का एक ऐतिहासिक संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहिल मुंडा केवल एक प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि वे उस वंचित समाज की आवाज हैं जिसे दशकों तक हाशिए पर रखा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, "साहिल का लक्ष्य विधायक की कुर्सी पाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास सुनिश्चित करना है। वे पद के लालच से ऊपर उठकर जनता के हक के लिए संघर्ष करने वाले नेता हैं।"

स्थानीय अधिकारों और अस्मिता की रक्षा

हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में 'झारखण्डी अस्मिता' और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरूपथर के युवाओं और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए साहिल मुंडा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने जनता को आगाह किया कि उन्हें अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए एक ऐसे नेतृत्व को चुनना होगा जो उनकी भाषा, उनकी संस्कृति और उनकी समस्याओं को गहराई से समझता हो।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि साहिल मुंडा युवाओं को केवल 'वोट बैंक' नहीं समझते, बल्कि उन्हें नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार कर रहे हैं। जेएमएम के नेतृत्व में सरूपथर में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय स्वायत्तता के मुद्दों पर ऐतिहासिक काम करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

विरोधियों पर प्रहार और विकास का संकल्प

विपक्ष पर निशाना साधते हुए सोरेन ने कहा कि जो लोग केवल विभाजन की राजनीति करते हैं, उन्हें जनता इस बार करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में जिस तरह उनकी सरकार जल-जंगल-जमीन और आदिवासियों-मूलवासियों के हितों के लिए काम कर रही है, वही मॉडल अब जेएमएम असम में भी लागू करना चाहती है।

"साहिल मुंडा के रूप में आपके पास एक नई उम्मीद है। इन्हें चुनना मतलब अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है।"

— मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

जनसभा के दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था और "जय झारखण्ड, जय असम" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस सभा के बाद सरूपथर का चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री की इस रैली ने स्थानीय मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दिया है।

नैमिष नगर योजना को रफ्तार: 2500 किसानों की सहमति, 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे की प्रक्रिया तेज

* आईआईएम रोड पर बसने जा रहा आधुनिक उपनगर, 2 लाख लोगों को मिलेगा आवास

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के उत्तरी क्षेत्र में आईआईएम रोड पर प्रस्तावित एलडीए की नैमिष नगर योजना तेजी से आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 150 हेक्टेयर भूमि का बैनामा प्राधिकरण के पक्ष में हो चुका है, जबकि 2500 से अधिक किसानों ने 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे के लिए सहमति पत्र जमा कर दिए हैं।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, योजना के दो सेक्टरों में भूखंडों के लिए पंजीकरण सितंबर 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए विकास कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।
योजना की प्रभारी अधिकारी संगीता राघव ने बताया कि बीकेटी तहसील के 18 गांवों की लगभग 1486 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना में शामिल की जानी है। इनमें भौली, लक्ष्मीपुर, पूरब गांव, पुरवा, सैरपुर, फर्रुखाबाद, कोड़री भौली, कमलाबाद, कमलापुर, पलहरी, गोपरामऊ, बारूमऊ, धतिंगरा, सैदापुर, पश्चिम गांव, धोबैला, उमरभारी और दुग्गौर जैसे गांव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण और रजिस्ट्री प्रक्रिया के साथ लगातार सहमति पत्र मिल रहे हैं। साथ ही, योजना में शामिल गांवों का भी समग्र विकास किया जाएगा। इसके तहत संपर्क मार्ग, जल निकासी, खेल मैदान, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र, तालाब, स्कूल, पार्क और श्मशान जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
करीब 2 लाख लोगों को आवासीय सुविधा देने वाली यह योजना एक आधुनिक उपनगर के रूप में विकसित की जाएगी। इसमें चौड़ी सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और व्यावसायिक केंद्र जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
नैमिष नगर योजना से लखनऊ में उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को भी नई गति मिलेगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
विष्णुगढ़ कांड ने खोला भाजपा का राज: झामुमो का आरोप—साजिश और नफरत की राजनीति कर रही भाजपा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने गुरुवार को प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखंड की आत्मा को झकझोर देने वाली हजारीबाग के विष्णुगढ़ की मासूम 13 वर्षीय बच्ची की नरबलि की घटना ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। यह घटना न केवल अमानवीय और रोंगटे खड़े कर देने वाली है, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को भी उजागर करती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा इस दर्दनाक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करता है और पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता है।

परंतु इस संवेदनशील और दुखद घटना को लेकर जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी ने राजनीति करने की कोशिश की, वह निंदनीय ही नहीं बल्कि अत्यंत खतरनाक भी है। भाजपा ने इस मामले को जानबूझकर साम्प्रदायिक रंग देने की साजिश रची, ताकि राज्य में अशांति फैलाकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। अब जब जांच में सच्चाई सामने आ चुकी है, भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस जघन्य अपराध का मुख्य आरोपी कोई और नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़ा हुआ व्यक्ति भीम राम है, जो पार्टी का बूथ अध्यक्ष और एससी-एसटी प्रकोष्ठ से भी जुड़ा बताया जा रहा है। यह वही लोग हैं जो जनता को गुमराह कर राज्य में मशाल जुलूस और बंद का आह्वान कर रहे थे। आज जब सच्चाई सामने आ गई है, भाजपा नेताओं को जवाब देना चाहिए कि वे झारखंड की जनता से माफी कब मांगेंगे।

झामुमो यह स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। यह पार्टी हर बार समाज में हिन्दू-मुस्लिम का जहर घोलकर लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश करती है। इनके पास न विकास का विजन है, न समाज को जोड़ने की सोच। इनका एकमात्र एजेंडा है – नफरत फैलाओ और सत्ता पाओ।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड की जागरूक जनता भाजपा की इन साजिशों को भलीभांति समझ चुकी है। आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, मजदूर, किसान, महिलाएं और युवा – हर वर्ग भाजपा की विभाजनकारी राजनीति से वाकिफ है। राज्य की जनता जानती है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार सबको साथ लेकर चलने और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विष्णुगढ़ की यह घटना अत्यंत दुखद है, लेकिन उससे भी अधिक खतरनाक है उसका राजनीतिक दुरुपयोग। भाजपा ने इस संवेदनशील मुद्दे पर झूठ फैलाने, भ्रम पैदा करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम किया है। यह उनकी निम्न मानसिकता और गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का प्रमाण है। राज्य सरकार ने इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों, जिनमें बच्ची की मां और कथित तांत्रिक शामिल हैं, को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

झामुमो भाजपा से पूछता है – क्या अब वे अपने द्वारा घोषित झारखंड बंद को वापस लेंगे? क्या वे अपनी गलती स्वीकार करेंगे? या फिर हमेशा की तरह सच्चाई सामने आने के बाद भी चुप्पी साध लेंगे?

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर राजनीति बंद करे और आत्ममंथन करे। हर बार अपराधियों के साथ खड़े होकर और बाद में उसे संयोग बताकर पल्ला झाड़ लेना उनकी पुरानी आदत बन चुकी है। लेकिन जनता सब देख रही है, ये देख रही है कि मुख्य आरोपी भीम राम की तस्वीर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के साथ वायरल है। भीम राम ने अपराध के साथ पुलिस की जांच को भटकाने का भी काम किया है। वह भाजपा के बड़े नेताओं के संपर्क में था तो क्या इस बात से इनकार किया जा सकता है कि उसने अपने आकाओं के इशारे पर यह काम नहीं किया ?

झारखंड मुक्ति मोर्चा एक बार फिर दोहराता है कि वह इस घटना के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राज्य में शांति, सौहार्द और विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता रहेगा।

झारखंड में बिगड़ी कानून-व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का शंखनाद: चुटिया में काला बिल्ला बांध सड़क पर उतरे कार्यकर्ता।

रांची: झारखंड में बदतर होती कानून-व्यवस्था और खनन माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस के खिलाफ अब सत्ता पक्ष के भीतर से ही आवाजें बुलंद होने लगी हैं। इसी कड़ी में आज चुटिया प्रखंड कांग्रेस समिति द्वारा स्थानीय इंदिरा गांधी चौक पर झारखंड सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ एक जोरदार मौन विरोध प्रदर्शन किया गया।

प्रमुख मांगें और प्रदर्शन का स्वरूप

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:

राज्य की कानून-व्यवस्था में अविलंब आमूलचूल सुधार लाया जाए।

खनन माफियाओं की गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।

प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील बनाकर उसे जन-आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करने हेतु बाध्य किया जाए।

यह जुलूस इंदिरा गांधी चौक से शुरू होकर विभिन्न मोहल्लों का भ्रमण करते हुए चुटिया थाना के समक्ष पहुंचकर संपन्न हुआ। गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू एवं प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के आह्वान पर आयोजित यह कार्यक्रम राज्य में अपनी तरह का पहला विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।

नेताओं की उपस्थिति

इस विरोध प्रदर्शन में संगठन के कई दिग्गज और स्थानीय कार्यकर्ता शामिल हुए। मुख्य रूप से:

अरुण चावला (रांची महानगर उपाध्यक्ष सह चुटिया प्रखंड प्रभारी)

प्रशांत गौरव (प्रखंड अध्यक्ष)

उनके साथ दीपेश पाठक, उर्मिला, राखी कौर, अंतरा कच्छप, गोपीचंद अग्रवाल, कृष्णा सहाय, संजीव महतो, प्रदीप, अजीत सिंह, महेश राय, बिरसा तिर्की, अजय महली, विवेक सिंह, सावन, अनुराग, शुभम, ऋषभ सिन्हा, भोला, पवन, और नीतीश तिर्की सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।