भारत-चीन अच्छे पड़ोसी और साझेदार” शी जिनपिंग ने गणतंत्र दिवस पर भारत को दी बधाई

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भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया के देश बधाई दे रहे हैं। इस मौके पर अमेरिका और चीन ने भारत को बधाई देकर खास संदेश दिया है।अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को शुभकामनाएँ देते हुए अमेरिका-भारत संबंधों की सराहना की। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को ‘अच्छा पड़ोसी, दोस्त और साझेदार’ बताया।

चीन ने कहा- दोनों देशों के रिश्ते सुधारे

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और चीन ‘अच्छे पड़ोसी, अच्छे दोस्त और अच्छे साझेदार’ हैं। उन्होंने कहा कि बीते एक साल में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आया है और यह पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए जरूरी है।

ड्रैगन और हाथी साथ-साथ-जिनपिंग

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन की हमेशा से यही सोच रही है कि भारत और चीन का अच्छे पड़ोसी, दोस्त और साझेदार बनकर साथ चलना ही दोनों देशों के हित में है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाते हुए कहा कि भारत और चीन का रिश्ता ऐसा होना चाहिए जैसे ड्रैगन और हाथी साथ-साथ नाच रहे हों यानी दोनों मिलकर आगे बढ़ें।

आगे भी आपसी बातचीत बढ़ाने की उम्मीद

चीन के राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देश आपसी बातचीत बढ़ाएंगे, एक-दूसरे से ज्यादा जुड़ेंगे और मिलकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझकर उनका समाधान करें, तो भारत-चीन रिश्ते और ज्यादा मजबूत, संतुलित और स्थिर बन सकते हैं।

अमेरिका ने क्या कहा?

वहीं, अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ठोस नतीजे दे रहे हैं। रुबियो ने कहा, ‘अमेरिका के लोगों की ओर से मैं भारत के लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं। अमेरिका और भारत का रिश्ता ऐतिहासिक है। रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और नई तकनीक में हमारा सहयोग, और क्वाड के जरिए हमारी साझेदारी, दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के लिए मजबूत आधार बन रही है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका आने वाले साल में भारत के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों पर काम करने को उत्सुक है।

इमैनुअल मैक्रों ने भी दी भारत को बधाई

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी भारत को बधाई दी और 2024 के गणतंत्र दिवस को याद किया, जब वे मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य में सहयोग जारी रखने की बात कही।

ड्रैगन और हाथी साथ आएं…” पीएम मोदी से बोले शी जिनपिंग, क्या हैं चीनी राष्ट्रपति के बयान के मायने?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन में हैं। भारत-चीन रिश्तों में बने हालात के बीच ये यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2.8 अरब लोगों का कल्याण भारत-चीन सहयोग से जुड़ा हुआ है। वहीं चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रैगन और हाथी को एक साथ आने की जरूरत है।

सात साल बाद चीन पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों के बीच 50 मिनट बातचीत हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात तियानजिन में हुई, जहां चीनी राष्ट्रपति शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। मोदी ने बातचीत के दौरान कहा, पिछले साल कजान में हमारी बहुत उपयोगी चर्चा हुई थी, जिससे हमारे संबंध बेहतर हुए। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना है। सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हो गई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं। वहीं, चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) को साथ आना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति ने बैठक के दौरान अपने संबोधन में कहा कि भारत और चीन के लिए सही विकल्प यह है कि दोनों दोस्त और साझेदार बनें।

ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं-जिनपिंग

मीटिंग में जिनपिंग ने कहा कि पीएम मोदी से मिलकर खुशी हुई। जिनपिंग ने कहा, प्रधानमंत्री महोदय, आपसे फिर मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं शंघाई सहयोग संगठन शिर सम्मेलन के लिए चीन में आपका स्वागत करता हूं। उन्होंने आगे कहा, दोनों देशों के लिए यह सही है कि ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों। ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं। चीन और भारत दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम विश्व के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। हम ग्लोबल साउथ के भी अहम सदस्य हैं। हम दोनों अपने लोगों की भलाई के लिए जरूरी सुधार लाने और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं।

पीएम मोदी ने कही ये बात

इससे पहले पीएम मोदी ने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार जताते हुए कहा, मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पिछले वर्ष कजान में हमारी बहुत ही सार्थक चर्चा हुई थी। हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा मिली। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है। सीमा मुद्दे पर हमारे विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है। दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट भी फिर से शुरू की जा रही है।

गलवान झड़प के बाद मोदी का पहला चीन दौरा

बता दें कि मोदी शनिवार शाम 2 दिन के जापान दौरे के बाद चीन पहुंचे थे। जून 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद भारत-चीन के संबंध खराब हो गए थे। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को कम करना भी है।

पीएम मोदी-जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता, 7 साल बाद कितना अहम है प्रधानमंत्री का चीन दौरा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय चीन के दौरे पर हैं। मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन पहुंचे हैं, जहां वे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में भाग लेंगे। चीन के तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले एससीओ समिट में कई देशों के नेता भाग ले रहे हैं। इससे पहले पीएम मोदी रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। चीनी राष्ट्रपति और पीएम मोदी की मुलाकात 7 सालों बाद हुई।

10 महीनों में पहली मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को तियानजिन में अहम मुलाकात की। अमेरिकी टैरिफ से जूझ रही दुनिया की नजर इस बैठक पर रही। पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच करीब 10 महीनों में यह पहली मुलाकात है। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्तूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी।

सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल बना-पीएम मोदी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई थी, जिससे हमारे संबंधों को सकारात्मक दिशा मिली। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है। हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर समझौता हो गया है।

हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल की जा रही हैं। हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हुए हैं। इससे पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

7 साल चीन पहुंचे पीएम मोदी

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे 7 सालों के बाद चीन दौरे पर गए हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे। हालांकि हाल के दिनों में चीन और भारत के संबंध एक बार फिर ठीक करने की कवायद की जा रही है। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को कम करना भी है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले एस जयशंकर, जानें क्यों खास है ये मुलाकात?

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भारत और चीन के बीच बीते कुछ वर्षों से चले आ रहे के बाद हालात सुधरते नजर आ रहे हैं। इस बीच दोनों देशों को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के मौके पर हुई। शी जिनपिंग ने सोमवार 15 जुलाई को एससीओ के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री की चीनी नेता के साथ मुलाकात हुई।

जयशंकर ने इस मुलाकात की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, आज सुबह बीजिंग में अपने साथी एससीओ विदेश मंत्रियों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन पहुंचाया। साथ ही उन्होंने भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों में हाल के सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि दोनों देशों के नेताओं का मार्गदर्शन इस संबंध में काफी अहम रहा है और रिश्तों को नई दिशा देने में मदद कर रहा है।

चीनी विदेश मंत्री से भी मिले जयशंकर

जयशंकर ने इससे पहले सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से भी द्विपक्षीय चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले 9 महीनों में भारत और चीन के बीच संबंधों में ‘अच्छी प्रगति’ हुई है। खासकर सीमा पर तनाव कम हुआ है और शांति की स्थिति बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि अब दोनों पक्षों को डि-एस्केलेशन और अन्य लंबित मुद्दों को हल करने की जरूरत है।

गलवान हिंसा के बाद सुधर रहे संबंध

2020 में गलवान हिंसा के बाद यह जयशंकर का पहला चीन दौरा है। माना जा रहा है कि इससे चीन और भारत के रिश्तों में और सुधार होगा। गलवान हिंसा के बाद भारत और चीन के संबंध रसातल में चले गए थे। मगर पिछले साल कजान में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी की मुलाकात के बाद रिश्तों में जमी बर्फ पिघली है। दोनों देशों के कदम अब सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं।

अमेरिका-चीन में 'सीजफायर', टैरिफ पर ट्रंप और जिनपिंग में बनी बात

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भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया के दो और ताकतवर देशों के बीच का गतिरोध कम होता दिख रहा है। यहां बात हो रही है- अमेरिका और चीन की। दरअसल, अमेरिका और चीन में आखिरकार ‘व्यापार युद्ध’ को कम करने के लिए सहमति बन गई है। वाशिंगटन और बीजिंग दोनों ने रेसिप्रोकल टैरिफ को कम करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देश अलगे 90 दिनों के लिए एक-दूसरे पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 115% कम करेंगे।

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने कहा है कि चीन से आने वाले ज्यादातर सामान पर टैरिफ 145% से घटाकर 30% कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था 14 मई से लागू होगी और शुरुआत में 90 दिन के लिए रहेगी। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दो दिन तक बैठक चली थी। चीन ने कहा है कि वह अमेरिकी सामान पर पहले लगाए गए 91% के अतिरिक्त टैक्स को भी हटा देगा। दोनों देशों के बीच हुई इस डील से उन उद्योगों को राहत मिलेगा जो टैरिफ की वजह से बहुत परेशान थे।

दुनियाभर के बाजारों में उछाल

अमेरिका और चीन के ट्रेड वॉर पर इस ‘सीजफायर’ से दुनिया में खुशी की लहर देखी जा सकती है। इस ऐलान के बाद हांगकांग के शेयर मार्केट इंडेक्स हेंगशेंग में 3 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। जबकि चीन के शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में भी तेजी का रुख रहा है। भारत में भी सोमवार को शेयर बाजारों में काफी तेज गति देखी गई। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में कमी आने, सीमा पर सीजफायर होने से जहां बाजार को ताकत मिली। वहीं चीन और अमेरिका की डील से ग्लोबल ट्रेड मार्केट पर छाए संकट के बादल छंटने से बाजार को उम्मीद मिली और उसने दमभर कर उछाल मारा। अमेरिका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वॉर से ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर एक बड़ा संकट पैदा हो गया था। इसकी वजह से दोनों देशों के बीच होने वाला करीब 600 अरब डॉलर (करीब 50,969 अरब रुपये) का ट्रेड रुक गया था।

यूएस-चीन के बीच कम हो सकता है तनाव कम

चूंकि अमेरिका ने अबतक चीन से आने वाले सामानों पर 145% का टैरिफ लगा रखा था, वो अब 90 दिनों के लिए कम होकर 30% ही रह जाएगा। वहीं चीन ने अमेरिकी सामानों पर 125% का टैरिफ लगा रखा था जो कम होकर केवल 10% पर आ जाएगा। टैरिफ में यह कमी चीन की तरफ से आर्थिक तनाव को कम करने और अमेरिका के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश है। इस घोषणा से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है। पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर काफी तनातनी चल रही थी।

ट्रंप के टैरिफ पर शी जिनपिंग ने तोड़ी चुप्पी, बोले-चीन डरता नहीं है

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चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ के जवाब में अमेरिका से आने वाले सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 84% से बढ़ाकर 125% कर दिया है। वहीं, बढ़ते टैरिफ तनाव के बीच आखिरकार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने पहले ऑफिशियल बयान में कहा कि चीन किसी से नहीं डरता'

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बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच इस समय टैरिफ वॉर चल रही है। दोनों देश एक दूसरे पर लगातार टैरिफ बढ़ा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को चीन के ऊपर 145% का टैरिफ लगा दिया है। इस वॉर को आगे बढ़ाते हुए चीन ने अमेरिका पर 125% टैरिफ लगा दिया है। इसके साथ ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पहली बार इस मसले पर बयान दिया। जिनपिंग ने कहा, एक ट्रेड वार में कोई भी विजेता नहीं होता है और दुनिया के खिलाफ जाने से केवल अकेलापन मिलेगा। शुक्रवार को स्‍पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के साथ मुलाकात के बाद चीन के राष्‍ट्रपति ने यह बयान दिया।

आत्‍मनिर्भरता और कठोर पर‍िश्रम पर विश्वास- शी

चीन के सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी ने शी के हवाले से कहा, पिछले 70 साल से चीन का विकास आत्‍मनिर्भरता और कठोर पर‍िश्रम पर आधारित है। यह किसी का दिया हुआ नहीं है। चीन किसी भी अन्‍यायपूर्ण दमन से डरता नहीं है। उन्‍होंने कहा कि बाहरी माहौल में बदलाव के अनुसार ही चीन आत्‍मविश्‍वास से लबरेज रहेगा और अपने मामलों को पूरा फोकस बनाए रखेगा और उनका प्रबंधन करेगा।

यूएस के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रयास

बता दें कि अमेरिका द्वारा शुल्क बढ़ाए जाने के बाद चीन भारत समेत अन्य देशों से संपर्क साध रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि बीजिंग अमेरिका को कदम पीछे हटाने के लिए मजबूर करने के वास्ते संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहा है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ से “एकतरफा डराना-धमकाना” का विरोध करने में बीजिंग के साथ शामिल होने का आग्रह किया

अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी आयात पर टैरिफ 145% बढ़ा कर चीन के साथ ट्रेड वॉर को शुरू किया है। जनवरी में सत्ता संभालने के बाद से ट्रंप अब तक चीनी सामानों पर पांच बार टैरिफ बढ़ा चुके हैं। चीन की जवाबी कार्रवाई के बाद, ट्रंप ने चीन से आने वाले सामानों पर 50% टैरिफ जोड़ दिया और कहा कि बातचीत समाप्त हो गई है। इससे पहले टैरिफ 104% तक। फिलहाल चीन ने अमेरिका के सामान पर 84% टैरिफ लगाया हुआ था, लेकिन शुक्रवार को चीन ने यह टैरिफ बढ़ा कर 125% कर दिया है।

ट्रंप के टैरिफ के बीच जिनपिंग को आई भारत की याद, चीनी राष्ट्रपति ने क्यों किया ड्रैगन और हाथी का जिक्र?


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हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच फिर से रिश्तों में गरमाहट बढ़ती दिख रही है। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर भी दोनों देशों के बीच दूरियां मिटती दिखीं। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भारत में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने दोनों देशों के भविष्य के बारे में सकारात्मक आशा व्यक्त की। इस दौरान चीनी राजदूत जू ने कहा कि चीन और भारत के नेताओं ने इस खास मौके पर बधाई संदेशों का आदान-प्रदान किया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 75 साल के राजनयिक रिश्तों पर एक लेटर लिखा। अपने संदेश में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन और भारत के संबंधों को "ड्रैगन-हाथी टैंगो" का रूप लेना चाहिए। टैंगो इन दोनों प्रतीकात्मक जानवरों के बीच का एक चीनी नृत्य है।

भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही। भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति मुर्मु को बधाई दी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आपसी विश्वास और आपसी लाभ की दिशा में आम विकास के लिए साथ आने के तरीके तलाशने चाहिए। 

भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताएं बताते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश प्रमुख विकासशील देश हैं और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने-अपने आधुनिकीकरण प्रयासों के महत्वपूर्ण चरण में हैं।

शी जिनपिंग और द्रौपदी मुर्मू के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी एक दूसरे को बधाई और शुभकामना संदेश भेजे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों देश प्राचीन सभ्यताएं हैं और वैश्विक दक्षिण के भीतर महत्वपूर्ण विकासशील देश हैं, जो वर्तमान में महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण चरणों से गुजर रहे हैं।

बता दें कि चीन को अक्सर ड्रैगन से जोड़ा जाता है, क्योंकि चीनी संस्कृति में ड्रैगन को एक शक्तिशाली, भाग्यशाली और शुभ जीव माना जाता है, जो शक्ति, भाग्य और सफलता का प्रतीक है।

दूसरी ओर, हाथी को भारत से धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वजहों से जोड़ा जाता है। वहीं, टैंगो एक अंग्रेजी शब्द है। जिसका मतलब दोस्ताना रिश्ता या नृत्य होता है। शी जिनपिंग का कहना था कि वो भारत के साथ रिश्तों को बेहतर करना चाहते हैं।

चीन ने पाकिस्तान को बताया अपना स्थायी मित्र, पाक राष्ट्रपति जरदारी से मुलाकात के बाद बोले शी जिनपिंग

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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन के दौरे पर हैं। बीजिंग में जरदारी ने बेहद गर्मजोशी के साथ चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात की है। दोनों पक्षों में कई अहम समझौते हुए हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी जरदारी के साथ हैं। उनकी भी जिनपिंग के साथ लंबी बैठक हुई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान के स्थायी मित्र बताया है।जरदारी ऐसे समय में चीन दौरे पर गए हैं जब चीन ने पाकिस्तान में अपने प्रोजेक्ट और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से पाकिस्तान के साथ रिश्ते में गर्मजोशी की कमी दिख रही है।

पाकिस्तान में चीनी नागरिकों और चीनी प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाकर लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं। जिसने बीजिंग को काफी नाराज कर दिया है। चीन लगातार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान पर प्रेशर बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान में अपने प्रोजेक्ट्स को रोकने तक की धमकी दी है। दोनों देशों के बीच संबंधों में आई खटास के बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन को मनाने के लिए बीजिंग के दौरे पर हैं। जहां उन्होंने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक की है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, बैठक के दौरान जरदारी ने चीनी राष्ट्रपति को आश्वस्त किया है, कि आतंकी हमले पाकिस्तान के अपने सदाबहार दोस्त चीन के साथ संबंधों को पटरी से उतार नहीं पाएंगे।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक के दौरान पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने इस बात को स्वीकार किया है, कि आतंकी हमलों की वजह से चीन और पाकिस्तान के संबंधों में 'उतार-चढ़ाव' आए हैं। लेकिन, जरदारी ने द्विपक्षीय साझेदारी के लिए अटूट समर्थन जताया है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा, कि पाकिस्तान और चीन हमेशा दोस्त रहेंगे। उन्होंने कहा, कि चाहे दुनिया में कितने भी आतंक, कितने भी मुद्दे क्यों न उठें, मैं खड़ा रहूंगा और पाकिस्तानी लोग चीन के लोगों के साथ खड़े रहेंगे।

इसके अलावा दोनों नेताओं ने सीपीईसी पार्ट-2 पर चर्चा की है, जिसे सीपीईसी 2.0 के नाम से जाना जाता है। सीपीईसी 2.0 में परिवहन बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं से आगे बढ़कर औद्योगीकरण, कृषि आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय साझेदारी को शामिल किया गया है। आपको बता दें, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) का हिस्सा है।

चीन और पाक के बीच पाकिस्तान में चीनियों की सुरक्षा का ही मुद्दा नहीं है। चीन और पाकिस्तान के बीच एक मुद्दा अमेरिका का है। चीन-पाकिस्तान के सैन्य और आर्थिक सहयोग के अलावा जरदारी का ये दौरा इसीलिए अहम है क्योंकि अमेरिका ने इस्लामाबाद से नजदीकी कम की है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और जापानी पीएम शिगेरू इशिबा से मिल चुके हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी 12-13 फरवरी को अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप से मुलाकातक होनी है। वहीं ट्रंप प्रशासन ने अब तक पाकिस्तान के साथ कोई औपचारिक संपर्क स्थापित नहीं किया है। ऐसे में अमेरिका से उपेक्षित महसूस कर रहे पाकिस्तान के लिए चीन एकमात्र सहारा बन गया है। चीन भी इस स्थिति का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान की विदेश नीति पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है।

हाल के वर्षों में बदलते भूराजनीतिक हालात में अमेरिका का ध्यान दूसरे क्षेत्रीय सहयोगियों पर ज्यादा है। ऐसे में कभी अमेरिका का करीबी दोस्त रहा पाकिस्तान अब चीन की तरफ झुकल गया है। पाकिस्तान के पास अब चीन के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है, उसे अपने 'खास दोस्त' बीजिंग की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है।

पांच साल बाद मिले मोदी और शी जिनपिंग, क्या पटरी पर लौटे रिश्ते?

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रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। कजान में ब्रिक्स देशों के नेताओं के बीच मुलाकातें भी हुईं। हालांकि, इन मुलाकातों में अगर किसी की सबसे ज्यादा चर्चा रही तो वो है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की, जो लगभग 5 साल बाद पहली औपचारिक बैठक है। दोनों देशों के बीच साल 2020 में गलवान झड़प के बाद पहली बार आमने-सामने बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग ने इस मुलाकात के दौरान ईस्टर्न लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध खत्म करने को लेकर बनी सहमति पर भी बात की। पीएम मोदी ने इसका स्वागत किया। हालांकि यह सहमति मुलाकात से पहली ही बन गई थी।

पीएम मोदी ने बुधवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक की तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि कजान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत-चीन संबंध हमारे देशों के लोगों के लिए और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध न केवल हमारे लोगों बल्कि दुनिया की शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'हम सीमा पर पिछले 4 वर्षों में उठे मुद्दों पर बनी सहमति का स्वागत करते हैं। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आपसी सम्मान, आपसी विश्वास और संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बनी रहनी चाहिए।'

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत को आपसी मदभेदों को ठीक से मैनेज करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं। बड़े विकासशील देश और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वे दोनों अपने-अपने देशों में आधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण दौर में हैं।'

शी ने पीएम मोदी से कहा, 'चीन और भारत द्विपक्षीय संबंधों के विकास की ऐतिहासिक प्रवृत्ति और दिशा को सही ढंग से समझते हैं जो दोनों देशों और उसके लोगों के हित में है। दोनों पक्षों को संचार और सहयोग को मजबूत करना चाहिए। मतभेदों को ठीक से संभालना चाहिए और एक-दूसरे के विकास के सपनों को हासिल करना चाहिए।'

शी ने कहा, 'दोनों पक्षों को अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां नभानी चाहिए। बड़ी संख्या में विकासशील देशों को एकजुट होने और खुद को मजबूत करने के लिए एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए और बहुध्रुवीय दुनिया को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण में योगदान देना चाहिए।'

दोनों नेताओं के बीच ये मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि पड़ोसी होने के बावजूद दोनों देशों के नेता आपस में 5 साल तक नहीं मिले। साल 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हो गई थी जिसमें भारत के 20 सैनिक मारे गए थे जबकि चीन के कई सैनिक हताहत हुए थे। इसके बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। इसके क़रीब साढ़े चार साल बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध सामान्य करने को लेकर पहल के संकेत तब मिले जब बीते सोमवार को भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने को लेकर दोनों देशों के बीच समझौते की घोषणा की।

कजान से आई डिनर टेबल की तस्वीरें, पुतिन-मोदी और जिनपिंग को साथ देख टिकी दुनिया की निगाहें

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रूस के कजान में ब्रिक्स का 16वीं समिट चल रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार दोपहर कजान पहुंचे। पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच मंगलवार रात मुलाकात हुई। वहीं, पुतिन ने ब्रिक्स देशों के नेताओं के लिए डिनर होस्ट किया। डिनर के दौरान पुतिन के साथ मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग म्यूजिकल कन्सर्ट का लुत्फ उठाते दिखे। इस दौरान बीच में पुतिन बैठे थे और दोनों तरफ कुर्सी पर पीएम मोदी और जिनपिंग थे।

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बुधवार यानी 23 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने को लेकर की गई अहम घोषणा के बाद ये पहली मुलाकात हो रही है। लेकिन द्विपक्षीय मुलाकात से पहले पीएम मोदी और जिनपिंग की तस्वीरें सामने आई है जो बहुत कुछ कहती है। 

डिनर कार्यक्रम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन पीएम मोदी और जिनपिंग को अपने साथ ही लेकर चलते नजर आए। डिनर कार्यक्रम की एक और तस्वीर आई, जिसमें पुतिन पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बैठे नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच पुतिन एक दूसरे को जोड़ने वाले पुल की तरह नजर आ रहे हैं। ये तस्वीर बताती है कि पुतिन किस तरह दोनों नेताओं के बीच दोस्ती कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैं, जो भारत के साथ-साथ चीन से भी अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आज होने वाली मुलाकात महत्वपूर्ण हो जाती है। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में बॉर्डर पर संघर्ष के बाद इस तरह की पहली बैठक होगी।20 में लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में झड़प के बाद से दोनों नेताओं के बीच सिर्फ दो बार बहुत ही संक्षिप्त मुलाकात हुई है। इसके पहले साल 2022 में इंडोनेशिया के बाली में जी20 शिखर सम्मलेन और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 2023 में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं का आमना-सामना हुआ था। ऐसे में रूस में पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर होगी

भारत-चीन अच्छे पड़ोसी और साझेदार” शी जिनपिंग ने गणतंत्र दिवस पर भारत को दी बधाई

#jinpingcongratulatedindiaon77threpublicday

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भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया के देश बधाई दे रहे हैं। इस मौके पर अमेरिका और चीन ने भारत को बधाई देकर खास संदेश दिया है।अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को शुभकामनाएँ देते हुए अमेरिका-भारत संबंधों की सराहना की। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को ‘अच्छा पड़ोसी, दोस्त और साझेदार’ बताया।

चीन ने कहा- दोनों देशों के रिश्ते सुधारे

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और चीन ‘अच्छे पड़ोसी, अच्छे दोस्त और अच्छे साझेदार’ हैं। उन्होंने कहा कि बीते एक साल में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आया है और यह पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए जरूरी है।

ड्रैगन और हाथी साथ-साथ-जिनपिंग

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन की हमेशा से यही सोच रही है कि भारत और चीन का अच्छे पड़ोसी, दोस्त और साझेदार बनकर साथ चलना ही दोनों देशों के हित में है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाते हुए कहा कि भारत और चीन का रिश्ता ऐसा होना चाहिए जैसे ड्रैगन और हाथी साथ-साथ नाच रहे हों यानी दोनों मिलकर आगे बढ़ें।

आगे भी आपसी बातचीत बढ़ाने की उम्मीद

चीन के राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देश आपसी बातचीत बढ़ाएंगे, एक-दूसरे से ज्यादा जुड़ेंगे और मिलकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझकर उनका समाधान करें, तो भारत-चीन रिश्ते और ज्यादा मजबूत, संतुलित और स्थिर बन सकते हैं।

अमेरिका ने क्या कहा?

वहीं, अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ठोस नतीजे दे रहे हैं। रुबियो ने कहा, ‘अमेरिका के लोगों की ओर से मैं भारत के लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं। अमेरिका और भारत का रिश्ता ऐतिहासिक है। रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और नई तकनीक में हमारा सहयोग, और क्वाड के जरिए हमारी साझेदारी, दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के लिए मजबूत आधार बन रही है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका आने वाले साल में भारत के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों पर काम करने को उत्सुक है।

इमैनुअल मैक्रों ने भी दी भारत को बधाई

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी भारत को बधाई दी और 2024 के गणतंत्र दिवस को याद किया, जब वे मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य में सहयोग जारी रखने की बात कही।

ड्रैगन और हाथी साथ आएं…” पीएम मोदी से बोले शी जिनपिंग, क्या हैं चीनी राष्ट्रपति के बयान के मायने?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन में हैं। भारत-चीन रिश्तों में बने हालात के बीच ये यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2.8 अरब लोगों का कल्याण भारत-चीन सहयोग से जुड़ा हुआ है। वहीं चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रैगन और हाथी को एक साथ आने की जरूरत है।

सात साल बाद चीन पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों के बीच 50 मिनट बातचीत हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात तियानजिन में हुई, जहां चीनी राष्ट्रपति शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। मोदी ने बातचीत के दौरान कहा, पिछले साल कजान में हमारी बहुत उपयोगी चर्चा हुई थी, जिससे हमारे संबंध बेहतर हुए। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना है। सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हो गई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं। वहीं, चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) को साथ आना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति ने बैठक के दौरान अपने संबोधन में कहा कि भारत और चीन के लिए सही विकल्प यह है कि दोनों दोस्त और साझेदार बनें।

ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं-जिनपिंग

मीटिंग में जिनपिंग ने कहा कि पीएम मोदी से मिलकर खुशी हुई। जिनपिंग ने कहा, प्रधानमंत्री महोदय, आपसे फिर मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं शंघाई सहयोग संगठन शिर सम्मेलन के लिए चीन में आपका स्वागत करता हूं। उन्होंने आगे कहा, दोनों देशों के लिए यह सही है कि ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों। ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं। चीन और भारत दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम विश्व के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। हम ग्लोबल साउथ के भी अहम सदस्य हैं। हम दोनों अपने लोगों की भलाई के लिए जरूरी सुधार लाने और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं।

पीएम मोदी ने कही ये बात

इससे पहले पीएम मोदी ने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार जताते हुए कहा, मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पिछले वर्ष कजान में हमारी बहुत ही सार्थक चर्चा हुई थी। हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा मिली। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है। सीमा मुद्दे पर हमारे विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है। दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट भी फिर से शुरू की जा रही है।

गलवान झड़प के बाद मोदी का पहला चीन दौरा

बता दें कि मोदी शनिवार शाम 2 दिन के जापान दौरे के बाद चीन पहुंचे थे। जून 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद भारत-चीन के संबंध खराब हो गए थे। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को कम करना भी है।

पीएम मोदी-जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता, 7 साल बाद कितना अहम है प्रधानमंत्री का चीन दौरा

#meetingwithchinesepresidentxijinpingpmnarendramodi

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय चीन के दौरे पर हैं। मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन पहुंचे हैं, जहां वे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में भाग लेंगे। चीन के तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले एससीओ समिट में कई देशों के नेता भाग ले रहे हैं। इससे पहले पीएम मोदी रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। चीनी राष्ट्रपति और पीएम मोदी की मुलाकात 7 सालों बाद हुई।

10 महीनों में पहली मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को तियानजिन में अहम मुलाकात की। अमेरिकी टैरिफ से जूझ रही दुनिया की नजर इस बैठक पर रही। पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच करीब 10 महीनों में यह पहली मुलाकात है। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्तूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी।

सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल बना-पीएम मोदी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई थी, जिससे हमारे संबंधों को सकारात्मक दिशा मिली। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है। हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर समझौता हो गया है।

हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल की जा रही हैं। हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हुए हैं। इससे पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

7 साल चीन पहुंचे पीएम मोदी

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे 7 सालों के बाद चीन दौरे पर गए हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे। हालांकि हाल के दिनों में चीन और भारत के संबंध एक बार फिर ठीक करने की कवायद की जा रही है। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को कम करना भी है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले एस जयशंकर, जानें क्यों खास है ये मुलाकात?

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भारत और चीन के बीच बीते कुछ वर्षों से चले आ रहे के बाद हालात सुधरते नजर आ रहे हैं। इस बीच दोनों देशों को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के मौके पर हुई। शी जिनपिंग ने सोमवार 15 जुलाई को एससीओ के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री की चीनी नेता के साथ मुलाकात हुई।

जयशंकर ने इस मुलाकात की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, आज सुबह बीजिंग में अपने साथी एससीओ विदेश मंत्रियों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन पहुंचाया। साथ ही उन्होंने भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों में हाल के सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि दोनों देशों के नेताओं का मार्गदर्शन इस संबंध में काफी अहम रहा है और रिश्तों को नई दिशा देने में मदद कर रहा है।

चीनी विदेश मंत्री से भी मिले जयशंकर

जयशंकर ने इससे पहले सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से भी द्विपक्षीय चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले 9 महीनों में भारत और चीन के बीच संबंधों में ‘अच्छी प्रगति’ हुई है। खासकर सीमा पर तनाव कम हुआ है और शांति की स्थिति बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि अब दोनों पक्षों को डि-एस्केलेशन और अन्य लंबित मुद्दों को हल करने की जरूरत है।

गलवान हिंसा के बाद सुधर रहे संबंध

2020 में गलवान हिंसा के बाद यह जयशंकर का पहला चीन दौरा है। माना जा रहा है कि इससे चीन और भारत के रिश्तों में और सुधार होगा। गलवान हिंसा के बाद भारत और चीन के संबंध रसातल में चले गए थे। मगर पिछले साल कजान में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी की मुलाकात के बाद रिश्तों में जमी बर्फ पिघली है। दोनों देशों के कदम अब सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं।

अमेरिका-चीन में 'सीजफायर', टैरिफ पर ट्रंप और जिनपिंग में बनी बात

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भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया के दो और ताकतवर देशों के बीच का गतिरोध कम होता दिख रहा है। यहां बात हो रही है- अमेरिका और चीन की। दरअसल, अमेरिका और चीन में आखिरकार ‘व्यापार युद्ध’ को कम करने के लिए सहमति बन गई है। वाशिंगटन और बीजिंग दोनों ने रेसिप्रोकल टैरिफ को कम करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देश अलगे 90 दिनों के लिए एक-दूसरे पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 115% कम करेंगे।

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने कहा है कि चीन से आने वाले ज्यादातर सामान पर टैरिफ 145% से घटाकर 30% कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था 14 मई से लागू होगी और शुरुआत में 90 दिन के लिए रहेगी। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दो दिन तक बैठक चली थी। चीन ने कहा है कि वह अमेरिकी सामान पर पहले लगाए गए 91% के अतिरिक्त टैक्स को भी हटा देगा। दोनों देशों के बीच हुई इस डील से उन उद्योगों को राहत मिलेगा जो टैरिफ की वजह से बहुत परेशान थे।

दुनियाभर के बाजारों में उछाल

अमेरिका और चीन के ट्रेड वॉर पर इस ‘सीजफायर’ से दुनिया में खुशी की लहर देखी जा सकती है। इस ऐलान के बाद हांगकांग के शेयर मार्केट इंडेक्स हेंगशेंग में 3 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। जबकि चीन के शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में भी तेजी का रुख रहा है। भारत में भी सोमवार को शेयर बाजारों में काफी तेज गति देखी गई। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में कमी आने, सीमा पर सीजफायर होने से जहां बाजार को ताकत मिली। वहीं चीन और अमेरिका की डील से ग्लोबल ट्रेड मार्केट पर छाए संकट के बादल छंटने से बाजार को उम्मीद मिली और उसने दमभर कर उछाल मारा। अमेरिका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वॉर से ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर एक बड़ा संकट पैदा हो गया था। इसकी वजह से दोनों देशों के बीच होने वाला करीब 600 अरब डॉलर (करीब 50,969 अरब रुपये) का ट्रेड रुक गया था।

यूएस-चीन के बीच कम हो सकता है तनाव कम

चूंकि अमेरिका ने अबतक चीन से आने वाले सामानों पर 145% का टैरिफ लगा रखा था, वो अब 90 दिनों के लिए कम होकर 30% ही रह जाएगा। वहीं चीन ने अमेरिकी सामानों पर 125% का टैरिफ लगा रखा था जो कम होकर केवल 10% पर आ जाएगा। टैरिफ में यह कमी चीन की तरफ से आर्थिक तनाव को कम करने और अमेरिका के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश है। इस घोषणा से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है। पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर काफी तनातनी चल रही थी।

ट्रंप के टैरिफ पर शी जिनपिंग ने तोड़ी चुप्पी, बोले-चीन डरता नहीं है

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चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ के जवाब में अमेरिका से आने वाले सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 84% से बढ़ाकर 125% कर दिया है। वहीं, बढ़ते टैरिफ तनाव के बीच आखिरकार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने पहले ऑफिशियल बयान में कहा कि चीन किसी से नहीं डरता'

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बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच इस समय टैरिफ वॉर चल रही है। दोनों देश एक दूसरे पर लगातार टैरिफ बढ़ा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को चीन के ऊपर 145% का टैरिफ लगा दिया है। इस वॉर को आगे बढ़ाते हुए चीन ने अमेरिका पर 125% टैरिफ लगा दिया है। इसके साथ ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पहली बार इस मसले पर बयान दिया। जिनपिंग ने कहा, एक ट्रेड वार में कोई भी विजेता नहीं होता है और दुनिया के खिलाफ जाने से केवल अकेलापन मिलेगा। शुक्रवार को स्‍पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के साथ मुलाकात के बाद चीन के राष्‍ट्रपति ने यह बयान दिया।

आत्‍मनिर्भरता और कठोर पर‍िश्रम पर विश्वास- शी

चीन के सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी ने शी के हवाले से कहा, पिछले 70 साल से चीन का विकास आत्‍मनिर्भरता और कठोर पर‍िश्रम पर आधारित है। यह किसी का दिया हुआ नहीं है। चीन किसी भी अन्‍यायपूर्ण दमन से डरता नहीं है। उन्‍होंने कहा कि बाहरी माहौल में बदलाव के अनुसार ही चीन आत्‍मविश्‍वास से लबरेज रहेगा और अपने मामलों को पूरा फोकस बनाए रखेगा और उनका प्रबंधन करेगा।

यूएस के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रयास

बता दें कि अमेरिका द्वारा शुल्क बढ़ाए जाने के बाद चीन भारत समेत अन्य देशों से संपर्क साध रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि बीजिंग अमेरिका को कदम पीछे हटाने के लिए मजबूर करने के वास्ते संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहा है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ से “एकतरफा डराना-धमकाना” का विरोध करने में बीजिंग के साथ शामिल होने का आग्रह किया

अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी आयात पर टैरिफ 145% बढ़ा कर चीन के साथ ट्रेड वॉर को शुरू किया है। जनवरी में सत्ता संभालने के बाद से ट्रंप अब तक चीनी सामानों पर पांच बार टैरिफ बढ़ा चुके हैं। चीन की जवाबी कार्रवाई के बाद, ट्रंप ने चीन से आने वाले सामानों पर 50% टैरिफ जोड़ दिया और कहा कि बातचीत समाप्त हो गई है। इससे पहले टैरिफ 104% तक। फिलहाल चीन ने अमेरिका के सामान पर 84% टैरिफ लगाया हुआ था, लेकिन शुक्रवार को चीन ने यह टैरिफ बढ़ा कर 125% कर दिया है।

ट्रंप के टैरिफ के बीच जिनपिंग को आई भारत की याद, चीनी राष्ट्रपति ने क्यों किया ड्रैगन और हाथी का जिक्र?


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#china_india_should_strengthen_ties_in_dragon_elephant_tango_says_jinping 

हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच फिर से रिश्तों में गरमाहट बढ़ती दिख रही है। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर भी दोनों देशों के बीच दूरियां मिटती दिखीं। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भारत में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने दोनों देशों के भविष्य के बारे में सकारात्मक आशा व्यक्त की। इस दौरान चीनी राजदूत जू ने कहा कि चीन और भारत के नेताओं ने इस खास मौके पर बधाई संदेशों का आदान-प्रदान किया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 75 साल के राजनयिक रिश्तों पर एक लेटर लिखा। अपने संदेश में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन और भारत के संबंधों को "ड्रैगन-हाथी टैंगो" का रूप लेना चाहिए। टैंगो इन दोनों प्रतीकात्मक जानवरों के बीच का एक चीनी नृत्य है।

भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही। भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति मुर्मु को बधाई दी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आपसी विश्वास और आपसी लाभ की दिशा में आम विकास के लिए साथ आने के तरीके तलाशने चाहिए। 

भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताएं बताते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश प्रमुख विकासशील देश हैं और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने-अपने आधुनिकीकरण प्रयासों के महत्वपूर्ण चरण में हैं।

शी जिनपिंग और द्रौपदी मुर्मू के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी एक दूसरे को बधाई और शुभकामना संदेश भेजे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों देश प्राचीन सभ्यताएं हैं और वैश्विक दक्षिण के भीतर महत्वपूर्ण विकासशील देश हैं, जो वर्तमान में महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण चरणों से गुजर रहे हैं।

बता दें कि चीन को अक्सर ड्रैगन से जोड़ा जाता है, क्योंकि चीनी संस्कृति में ड्रैगन को एक शक्तिशाली, भाग्यशाली और शुभ जीव माना जाता है, जो शक्ति, भाग्य और सफलता का प्रतीक है।

दूसरी ओर, हाथी को भारत से धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वजहों से जोड़ा जाता है। वहीं, टैंगो एक अंग्रेजी शब्द है। जिसका मतलब दोस्ताना रिश्ता या नृत्य होता है। शी जिनपिंग का कहना था कि वो भारत के साथ रिश्तों को बेहतर करना चाहते हैं।

चीन ने पाकिस्तान को बताया अपना स्थायी मित्र, पाक राष्ट्रपति जरदारी से मुलाकात के बाद बोले शी जिनपिंग

#asif_ali_zardari_meeting_with_xi_jinping_and_china_pakistan_relation

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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन के दौरे पर हैं। बीजिंग में जरदारी ने बेहद गर्मजोशी के साथ चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात की है। दोनों पक्षों में कई अहम समझौते हुए हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी जरदारी के साथ हैं। उनकी भी जिनपिंग के साथ लंबी बैठक हुई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान के स्थायी मित्र बताया है।जरदारी ऐसे समय में चीन दौरे पर गए हैं जब चीन ने पाकिस्तान में अपने प्रोजेक्ट और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से पाकिस्तान के साथ रिश्ते में गर्मजोशी की कमी दिख रही है।

पाकिस्तान में चीनी नागरिकों और चीनी प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाकर लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं। जिसने बीजिंग को काफी नाराज कर दिया है। चीन लगातार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान पर प्रेशर बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान में अपने प्रोजेक्ट्स को रोकने तक की धमकी दी है। दोनों देशों के बीच संबंधों में आई खटास के बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन को मनाने के लिए बीजिंग के दौरे पर हैं। जहां उन्होंने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक की है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, बैठक के दौरान जरदारी ने चीनी राष्ट्रपति को आश्वस्त किया है, कि आतंकी हमले पाकिस्तान के अपने सदाबहार दोस्त चीन के साथ संबंधों को पटरी से उतार नहीं पाएंगे।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक के दौरान पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने इस बात को स्वीकार किया है, कि आतंकी हमलों की वजह से चीन और पाकिस्तान के संबंधों में 'उतार-चढ़ाव' आए हैं। लेकिन, जरदारी ने द्विपक्षीय साझेदारी के लिए अटूट समर्थन जताया है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा, कि पाकिस्तान और चीन हमेशा दोस्त रहेंगे। उन्होंने कहा, कि चाहे दुनिया में कितने भी आतंक, कितने भी मुद्दे क्यों न उठें, मैं खड़ा रहूंगा और पाकिस्तानी लोग चीन के लोगों के साथ खड़े रहेंगे।

इसके अलावा दोनों नेताओं ने सीपीईसी पार्ट-2 पर चर्चा की है, जिसे सीपीईसी 2.0 के नाम से जाना जाता है। सीपीईसी 2.0 में परिवहन बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं से आगे बढ़कर औद्योगीकरण, कृषि आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय साझेदारी को शामिल किया गया है। आपको बता दें, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) का हिस्सा है।

चीन और पाक के बीच पाकिस्तान में चीनियों की सुरक्षा का ही मुद्दा नहीं है। चीन और पाकिस्तान के बीच एक मुद्दा अमेरिका का है। चीन-पाकिस्तान के सैन्य और आर्थिक सहयोग के अलावा जरदारी का ये दौरा इसीलिए अहम है क्योंकि अमेरिका ने इस्लामाबाद से नजदीकी कम की है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और जापानी पीएम शिगेरू इशिबा से मिल चुके हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी 12-13 फरवरी को अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप से मुलाकातक होनी है। वहीं ट्रंप प्रशासन ने अब तक पाकिस्तान के साथ कोई औपचारिक संपर्क स्थापित नहीं किया है। ऐसे में अमेरिका से उपेक्षित महसूस कर रहे पाकिस्तान के लिए चीन एकमात्र सहारा बन गया है। चीन भी इस स्थिति का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान की विदेश नीति पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है।

हाल के वर्षों में बदलते भूराजनीतिक हालात में अमेरिका का ध्यान दूसरे क्षेत्रीय सहयोगियों पर ज्यादा है। ऐसे में कभी अमेरिका का करीबी दोस्त रहा पाकिस्तान अब चीन की तरफ झुकल गया है। पाकिस्तान के पास अब चीन के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है, उसे अपने 'खास दोस्त' बीजिंग की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है।

पांच साल बाद मिले मोदी और शी जिनपिंग, क्या पटरी पर लौटे रिश्ते?

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रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। कजान में ब्रिक्स देशों के नेताओं के बीच मुलाकातें भी हुईं। हालांकि, इन मुलाकातों में अगर किसी की सबसे ज्यादा चर्चा रही तो वो है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की, जो लगभग 5 साल बाद पहली औपचारिक बैठक है। दोनों देशों के बीच साल 2020 में गलवान झड़प के बाद पहली बार आमने-सामने बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग ने इस मुलाकात के दौरान ईस्टर्न लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध खत्म करने को लेकर बनी सहमति पर भी बात की। पीएम मोदी ने इसका स्वागत किया। हालांकि यह सहमति मुलाकात से पहली ही बन गई थी।

पीएम मोदी ने बुधवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक की तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि कजान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत-चीन संबंध हमारे देशों के लोगों के लिए और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध न केवल हमारे लोगों बल्कि दुनिया की शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'हम सीमा पर पिछले 4 वर्षों में उठे मुद्दों पर बनी सहमति का स्वागत करते हैं। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आपसी सम्मान, आपसी विश्वास और संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बनी रहनी चाहिए।'

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत को आपसी मदभेदों को ठीक से मैनेज करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं। बड़े विकासशील देश और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वे दोनों अपने-अपने देशों में आधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण दौर में हैं।'

शी ने पीएम मोदी से कहा, 'चीन और भारत द्विपक्षीय संबंधों के विकास की ऐतिहासिक प्रवृत्ति और दिशा को सही ढंग से समझते हैं जो दोनों देशों और उसके लोगों के हित में है। दोनों पक्षों को संचार और सहयोग को मजबूत करना चाहिए। मतभेदों को ठीक से संभालना चाहिए और एक-दूसरे के विकास के सपनों को हासिल करना चाहिए।'

शी ने कहा, 'दोनों पक्षों को अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां नभानी चाहिए। बड़ी संख्या में विकासशील देशों को एकजुट होने और खुद को मजबूत करने के लिए एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए और बहुध्रुवीय दुनिया को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण में योगदान देना चाहिए।'

दोनों नेताओं के बीच ये मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि पड़ोसी होने के बावजूद दोनों देशों के नेता आपस में 5 साल तक नहीं मिले। साल 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हो गई थी जिसमें भारत के 20 सैनिक मारे गए थे जबकि चीन के कई सैनिक हताहत हुए थे। इसके बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। इसके क़रीब साढ़े चार साल बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध सामान्य करने को लेकर पहल के संकेत तब मिले जब बीते सोमवार को भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने को लेकर दोनों देशों के बीच समझौते की घोषणा की।

कजान से आई डिनर टेबल की तस्वीरें, पुतिन-मोदी और जिनपिंग को साथ देख टिकी दुनिया की निगाहें

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रूस के कजान में ब्रिक्स का 16वीं समिट चल रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार दोपहर कजान पहुंचे। पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच मंगलवार रात मुलाकात हुई। वहीं, पुतिन ने ब्रिक्स देशों के नेताओं के लिए डिनर होस्ट किया। डिनर के दौरान पुतिन के साथ मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग म्यूजिकल कन्सर्ट का लुत्फ उठाते दिखे। इस दौरान बीच में पुतिन बैठे थे और दोनों तरफ कुर्सी पर पीएम मोदी और जिनपिंग थे।

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बुधवार यानी 23 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने को लेकर की गई अहम घोषणा के बाद ये पहली मुलाकात हो रही है। लेकिन द्विपक्षीय मुलाकात से पहले पीएम मोदी और जिनपिंग की तस्वीरें सामने आई है जो बहुत कुछ कहती है। 

डिनर कार्यक्रम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन पीएम मोदी और जिनपिंग को अपने साथ ही लेकर चलते नजर आए। डिनर कार्यक्रम की एक और तस्वीर आई, जिसमें पुतिन पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बैठे नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच पुतिन एक दूसरे को जोड़ने वाले पुल की तरह नजर आ रहे हैं। ये तस्वीर बताती है कि पुतिन किस तरह दोनों नेताओं के बीच दोस्ती कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैं, जो भारत के साथ-साथ चीन से भी अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आज होने वाली मुलाकात महत्वपूर्ण हो जाती है। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में बॉर्डर पर संघर्ष के बाद इस तरह की पहली बैठक होगी।20 में लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में झड़प के बाद से दोनों नेताओं के बीच सिर्फ दो बार बहुत ही संक्षिप्त मुलाकात हुई है। इसके पहले साल 2022 में इंडोनेशिया के बाली में जी20 शिखर सम्मलेन और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 2023 में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं का आमना-सामना हुआ था। ऐसे में रूस में पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर होगी