भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला खिलाड़ियों का दिखा दम, 21 गोल्ड मेडल में 11 किया अपने नाम

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जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार परफॉर्मेंस किया और कुल 85 मेडल जीते। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।भारत इस बार एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रहा है। हालांकि, भारत पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका

21 गोल्ड मेडल में 11 महिला खिलाड़ियों ने जीते

भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते।महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।

युवा एथलीटों ने दिखाया दम

इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है। युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं।

अनुभवी खिलाड़ियों का भी दिखा दम

शियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों के अलावा मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव का जलाव दिखाया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा

महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

एशियन गेम्स में भारत की गोल्डन हैट्रिक, आर्चरी में पुरुष कंपाउंड टीम ने चीन को हरा जीता सोना

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भारतीय तीरंदाजों ने एशियन गेम्स में बुधवार की सुबह भारत को शानदार रहा। कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीत लिया। भारतीय आर्चरी की पुरुष कंपाउंड टीम ने बेहद रोमांचक मुकाबले में चीन को पछाड़कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया है।

तीरंदाजी में ट्रिपल गोल्ड

पुरुष टीम ने फाइनल में चीन को 238-237 से हराकर दिन का तीसरा तीरंदाजी गोल्ड अपने नाम किया। साहिल राजेश, कुशल दलाल और मणि रत्नम गणेश की भारतीय तिकड़ी ने चीन के खिलाफ फाइनल में शानदार जुझारूपन दिखाया। 21 वर्षीय कुशल दलाल, 25 वर्षीय साहिल राजेश और 20 वर्षीय मणि रत्नम गणेश थिरुमुरु की तिकड़ी ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और भारत को गोल्ड दिलाया।

आखिरी राउंड में बाजी पलटी

तीन राउंड यानी 18 शॉट के बाद भारत एक अंक से पीछे चल रहा था। तब चीन का स्कोर 179 और भारत का 178 था। इसके बाद आखिरी राउंड में भारतीय टीम ने मुकाबला पलट दिया। आखिरी छह शॉट में चीन के एक तीरंदाज ने आठ अंक का निशाना लगाया। इसका फायदा भारत को मिला और भारतीय टीम एक अंक की बढ़त पर पहुंच गई। अंत में भारत ने 238 अंक बनाए, जबकि चीन 237 अंक ही हासिल कर सका। इस तरह भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण

बता दें कि भारत ने आज कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण जीता। सबसे पहले चिकिथा तानिपर्थी, पृथिका प्रदीप और ज्योति सुरेखा वेन्नम की महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर गोल्ड अपने नाम किया था। इसके बाद चिकिथा और साहिल जाधव की मिश्रित टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया। पुरुष टीम ने भी चीन के खिलाफ फाइनल में जीत दर्ज कर तीरंदाजी में भारत का गोल्डन हैट्रिक पूरा कर दिया।

अमेरिका में स्टील प्लांट लगाएगा भारत का एस्सार ग्रुप, डोनाल्‍ड ट्रंप सरकार के साथ बड़ी डील

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भारतीय कारोबारी समूह एस्सार ग्रुप अमेरिका में बड़ा निवेश करने जा रहा है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने भारत के एस्सार ग्रुप के 18 अरब डॉलर के अमेरिकी स्टील प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा दावा किया है। यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा स्टील संयंत्र बताया जा रहा है। इस घोषणा से अमेरिकी उद्योग को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा की उम्मीद बढ़ गई है।

दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में से होगा एक

जानकारी के अनुसार, भारतीय कारोबारी समूह एस्सार ग्रुप की अमेरिकी सब्सिडियरी कंपनी मेसाबी मेटालिक्स अमेरिका के आयोवा में करीब 18 अरब डॉलर के निवेश से स्टील प्लांट स्थापित करेगी। प्‍लांट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 1 करोड़ टन स्टील होगी। ट्रंप ने कहा कि यह परियोजना अमेरिका के आयोवा राज्य में स्थापित की जाएगी और यह दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक होगी। उनके अनुसार, परियोजना के निर्माण चरण में करीब 6,000 नौकरियां पैदा होंगी, जबकि प्‍लांट और खनन गतिविधियों से लगभग 2,000 स्थायी रोजगार मिलेंगे।

मिनेसोटा की खदान से सप्लाई

इस प्रोजेक्ट की खास बात इसका इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन मॉडल है। एस्सार मिनेसोटा में अपनी आयरन-ओर माइन से कच्चा माल निकालेगा और उसी का इस्तेमाल आयोवा के नए स्टील प्लांट में किया जाएगा। इस तरह खनन से लेकर स्टील निर्माण तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला अमेरिका में ही विकसित की जाएगी।

प्रोजेक्‍ट को विकसित होने में लगेगा करीब एक दशक

एस्सार के चेयरमैन रेवंत रुइया ने बताया कि उनका परिवार मिनेसोटा में एक नई आयरन-ओर माइन के लिए करीब 3 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह अमेरिका में करीब 50 वर्षों में शुरू होने वाली पहली नई आयरन-ओर माइन होगी। प्रोजेक्‍ट को विकसित होने में करीब एक दशक लगने की उम्मीद है।

स्टील टैरिफ से जोड़ा निवेश

ट्रंप प्रशासन ने इस निवेश को अमेरिका की व्यापार नीतियों, खासकर आयातित स्टील पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क, से भी जोड़ा है। अमेरिका के कॉमर्स मिनिस्‍टर हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि टैरिफ के बिना यह खदान और स्टील संयंत्र नहीं बनता। ट्रंप ने भी कहा कि कंपनियां अमेरिका में उत्पादन स्थापित कर रही हैं, क्योंकि वे आयात पर शुल्क का भुगतान नहीं करना चाहतीं। हालांकि, अमेरिकी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ने मिनेसोटा की खदान के लिए फाइनेंसिंग में मदद की है।

From Heritage to Modern Living: The ASANG Design Studio Approach to Architecture

Architecture has always been a reflection of how people live, what they value and the environments they inhabit. ASANG Design Studio brings this perspective into contemporary practice by connecting Indian heritage and craftsmanship with the needs of modern living.A Contemporary Interpretation of Indian Design

Indian architecture offers a rich vocabulary of materials, climate-responsive ideas, craft traditions and spatial experiences. ASANG draws from this broader heritage while avoiding a purely nostalgic interpretation. Instead, traditional influences are translated into contemporary architecture and interiors suited to present-day lifestyles.

Designing for Experience

The studio's approach considers how a space is experienced over time. Morning light, changing shadows, tactile surfaces, movement through rooms and connections to greenery can all contribute to the atmosphere of a project. These seemingly subtle elements become important components of the overall design.

The Role of Craft

Craftsmanship gives architecture a human quality. ASANG integrates artisanal thinking into contemporary spaces through material choices and detailed execution. This relationship between designer, material and maker helps create interiors that feel individual and connected to place.

Residential and Diverse Project Experiences

ASANG's portfolio extends across luxury residences, penthouses, commercial spaces and serviced apartments. Working across different project types allows the studio to explore how its principles of context, materiality, functionality and timelessness can be adapted to different requirements.

A Philosophy of Better Living

At the centre of the practice is the idea that architecture should improve everyday experience. Beautiful spaces matter, but so do comfort, usability, natural light, ventilation and a sense of connection. This balance gives contemporary design a more lasting purpose.

Explore the ASANG Perspective

To see the studio's projects and learn more about its approach to architecture and interior design, visit ASANG Design Studio to explore its portfolio, services and design philosophy.

www.asangdesignstudio.in

भारत के युद्धपोत से भिड़ा पाक नौसेना का जहाज, पाकिस्तानी अफसर तलब

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भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी जगजाहिर है। दोनों देशों के बीच तकरार कब शुरू हो जाए ये कहना मुश्किल है। एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव दिखाई दिया है। अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक तेज रफ्तार जहाज ने भारतीय नेवी के युद्धपोत को टक्कर मार दी है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच टेंशन बढ़ गई है।

पाक नौसेना का गैर-पेशेवर रवैया

भारत के विदेश मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के बेहद करीब पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से पहुंचा और बेहद गैर-पेशेवर एवं असुरक्षित तरीके से उसकी दिशा में तेजी से चलने लगा। इस दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई। हालांकि, इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

कैसे हुई टक्कर?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी जहाज तेज गति से उसके करीब पहुंचा और सुरक्षित दूरी बनाए रखने के बजाय असुरक्षित तरीके से दिशा बदलता रहा। इसी दौरान दोनों जहाज संपर्क में आए। किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। दोनों जहाजों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

पाकिस्तान के प्रभारी राजदूत तलब

भारत ने इस मसले पर एक्शन लिया है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी राजनयिक को तलब किया। उन्हें पाकिस्तान की नौसेना इकाइयों के समुद्र में किए गए अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे घटनाक्रम दोबारा न हों, इसके लिए दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन जरूरी है।

1991 के समझौते का आया जिक्र

भारत ने इस घटना को अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते से भी जोड़ा है। इस समझौते का मकसद सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच गलतफहमी और दुर्घटना का खतरा कम करना था। इसके अनुच्छेद 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित दूरी बनाए रखने की बात कही गई है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों देशों के जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील के भीतर नहीं आना चाहिए। यानी इस तरह के समझौते का मकसद ही यह है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयां समुद्र में इस तरह की स्थिति पैदा न करें, जिससे टक्कर या किसी बड़े सैन्य विवाद का खतरा पैदा हो।

मिस्टर सिंह हमारी सड़कों से हटिए', अमेरिका में भारतीय ड्राइवरों पर नस्लीय टिप्पणी

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अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया एक एआई-जनरेटेड पोस्टर से विवाद बढ़ गया है। पोस्टर को आलोचक 'नस्लवादी' तथा 'भारत विरोधी' बता रहे हैं। जिसमें ‘मिस्टर सिंह’ से खुद देश छोड़कर जाने के लिए कहा गया। भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले इस पोस्टर में 'सेल्फ-डिपोर्ट या परिणाम भुगतने' जैसी चेतावनी दी गई है।

विज्ञापन में क्या

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के हालिया इमिग्रेशन लागू करने वाले विज्ञापन में ट्रांसफॉर्मर्स फिल्म की पैरोडी वाले पोस्टर में एक रोबोट, सिर पर कपड़ा बांधे गोरे (वाइट) का सामना करता हुआ दिखाया गया है, जिसे मिस्टर सिंह कहा गया है। विज्ञापन में 'ट्रांसफॉर्मर्स' फ्रैंचाइजी के मुख्य किरदार 'ऑप्टिमस प्राइम' को DHS का आर्म पैच पहने हुए दिखाया गया है। वह भूरी दाढ़ी वाले आदमी का सामना करते हुए कहता है, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह।'

एक वीडियो क्लिप भी किया गया पोस्ट

एक्स पर इससे संबंधित पोस्ट में एक छोटा वीडियो क्लिप दिखाया गया है जिसमें ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी का मुख्य खलनायक मेगाट्रॉन, एलियंस की रिहाई के लिए बातचीत कर रहा है। यह शब्द अमेरिकी प्रशासन विदेशी नागरिकों के लिए इस्तेमाल करता है। मेगाट्रॉन को ट्रक ड्राइवरों हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकजान बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह की रिहाई की कोशिश करते हुए दिखाया गया है, जो सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों में शामिल थे।

'खुद देश छोड़ने या अंजाम भुगतने की धमकी

डीएचएस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अगर आप इस देश के खिलाफ दुश्मनी भरी नीयत से आते हैं, तो यह जान लें हम अपना बचाव करेंगे। हम अमेरिकन मूल्यों की रक्षा करेंगे। हम अपने देश की रक्षा करेंगे। एक अन्य पोस्ट में ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी के मुख्य नायक ऑप्टिमस प्राइम को दिखाया गया है, जिसके हाथ पर डीएचएस का एक बैज लगा है। वह भूरी दाढ़ी वाले व्यक्ति का सामना करते हुए संदेश दे रहा है। 'खुद देश छोड़ दें या अंजाम भुगतें'

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन में नाराजगी

सिंह सरनेम हिंदू और सिख धर्म मानने वाले बहुत से लोगों का होता है। यह समूह अमेरिकी ट्रकिंग वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है। इससे साफ है कि पोस्टर में सिंह लिखा जाना भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाने की ओर इशाका करती है। विज्ञापन में मिस्टर सिंह के जिक्र की हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और सिख कोएलिशन जैसे संगठनों ने आलोचना की है। संगठन ने एक्स पर लिखा कि 'सिंह' हिंदू होते हैं, सिख होते हैं, अमेरिकी होते हैं और वे गाड़ी चलाते हैं। इस नस्लवादी, भारत-विरोधी प्रोफाइलिंग से अमेरिका की सामूहिक अंतरात्मा को झटका लगना चाहिए।

Nature Hospitality Expands Reach With New International Tour Packages

INDIA — Nature Hospitality, a travel and hospitality provider that has spent over a decade building its name around domestic getaways in Delhi, Bangalore, Mumbai, Chennai, Ahmedabad, Hyderabad and other Indian destinations, has now widened its portfolio to include a full lineup of international tour packages.The company, established in 2014, built its early reputation on curated trips to the Himalayan belt, Wayanad, Munnar, and island destinations such as Lakshadweep. Its move into international travel marks a shift for a brand that has largely been associated with domestic holidays until now.

The new offering includes Paris tour packages built around the Eiffel Tower, the Louvre Museum, and the Seine River, along with broader Europe tour packages covering France, Switzerland, Italy, Germany, and Spain. Travelers looking specifically at the Alps and lake country can also choose dedicated Switzerland tour packages.

Beyond Europe, Nature Hospitality has added USA tour packages featuring New York, Las Vegas, Los Angeles, and Miami, as well as Australia tour packages built around Sydney, Melbourne, and the Gold Coast. The company has also introduced Japan tour packages covering Tokyo, Kyoto, Osaka, and Mount Fuji, giving travelers a route into a market that combines modern cities with traditional culture.

For travelers drawn to desert landscapes and city luxury, the company has rolled out Dubai tour packages that include desert safaris, shopping, and sightseeing alongside stays at upscale hotels. South Africa tour packages round out the list, taking travelers through Cape Town, Johannesburg, and wildlife safaris across the country's landscapes.

"Our clients have been asking for the same kind of planning and support they got on their India trips, but for international destinations," the company said. "This expansion is our way of answering that demand without changing how we work with people."

That approach includes honeymoon and family packages, which the company has customized for couples, families, and groups traveling together. Nature Hospitality is also continuing its practice of building personalized itineraries from scratch, based on a traveler's destination, budget, travel dates, and specific preferences, rather than relying only on fixed departures.

Industry watchers have pointed to a broader trend behind this kind of expansion. Indian travelers have increasingly moved from domestic weekend trips toward longer international holidays over the past few years, a shift that has pushed many established domestic operators to add global destinations to their catalogs.

Nature Hospitality's past reviews, many tied to its Himalayan and Kerala tours, have often highlighted the hands-on support its team provides during a trip, including arranging local transport and adjusting plans on short notice. The company says it intends to carry that same level of involvement into its international bookings, from visa guidance to on-ground coordination at each destination.

The company has not limited its international packages to a single style of travel. Its catalog spans romantic city breaks in Paris, adventure-driven safaris in South Africa, beach and city combinations in Australia, and cultural circuits through Japan, giving it a spread that can serve very different types of travelers under one brand.

With this expansion, Nature Hospitality positions itself to compete for a segment of travelers who previously would have booked international trips through separate specialist agencies for each region. By keeping planning, budgeting, and support under one roof, the company is betting that convenience will be as strong a draw as the destinations themselves.

Nature Hospitality says more destinations and packages are expected to be added to its international lineup in the coming months, as it continues building out this side of the business alongside its existing domestic operations.

For those interested in Paris, Europe, USA, Australia, South Africa, Japan, Dubai, Switzerland, honeymoon and family holidays, or a fully customized international itinerary, Nature Hospitality can be reached through its official website and customer support channels.

Media Contact: Nature Hospitality Email: www.naturehospitality.net

 

नेपाल में आई बाढ़ में 288 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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नेपाल ने बुधवार को एक बार फिर से विनाश का मंजर देखा। यहां बड़ी संख्या में लोग तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में बह गए। बाढ़ में कम से कम 270 लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। इस प्राकृतिक आपदा में कई देशों के लोग लापता है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय शामिल हैं।

नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय लापता

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। इनके अलावा 37 और 39 लोगों के दो समूह तमिलनाडु के हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा तीसरा समूह 32 लोगों का है, जो पश्चिम बंगाल के हैं, वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा 61 लोग विभिन्न राज्यों के हैं, जो नेपाल में लापता हैं। साथ ही केरलम के 33 लोगों का भी एक समूह नेपाल में लापता है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूह लापता हैं।

भारत ने भेजी 47 टन राहत सामग्री

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेपाल को इस मुश्किल समय में मदद के लिए भारत ने दो विमान भेजे हैं। जिनमें से एक सी-130 जे विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर बुधवार को नेपाल हुआ था। इनमें अस्थायी शेल्टर, दवाईयां आदि लेकर गया है। आज भी एक सी-17 विमान 37 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इनमें से आठ टन दवाईयां हैं और एक टन खाद्य पदार्थ हैं। इस तरह दो दिनों में नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जो भी राहत सामग्री भेजी गई है, वह नेपाल की मांग के आधार पर ही भेजी गई है।

नेपाल के हालात को लेकर जयशंकर ने की समीक्षा बैठक*

इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेपाल बाढ़ के हालात पर समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इस बैठक में काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए। विदेश मंत्री ने बताया कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर्स और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। जयशंकर ने कहा कि हम इस मामले के साथ-साथ राहत कार्यों को लेकर भी नेपाल के अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय में काम कर रहे हैं।

भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला खिलाड़ियों का दिखा दम, 21 गोल्ड मेडल में 11 किया अपने नाम

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जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार परफॉर्मेंस किया और कुल 85 मेडल जीते। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।भारत इस बार एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रहा है। हालांकि, भारत पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका

21 गोल्ड मेडल में 11 महिला खिलाड़ियों ने जीते

भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते।महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।

युवा एथलीटों ने दिखाया दम

इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है। युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं।

अनुभवी खिलाड़ियों का भी दिखा दम

शियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों के अलावा मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव का जलाव दिखाया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा

महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

एशियन गेम्स में भारत की गोल्डन हैट्रिक, आर्चरी में पुरुष कंपाउंड टीम ने चीन को हरा जीता सोना

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भारतीय तीरंदाजों ने एशियन गेम्स में बुधवार की सुबह भारत को शानदार रहा। कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीत लिया। भारतीय आर्चरी की पुरुष कंपाउंड टीम ने बेहद रोमांचक मुकाबले में चीन को पछाड़कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया है।

तीरंदाजी में ट्रिपल गोल्ड

पुरुष टीम ने फाइनल में चीन को 238-237 से हराकर दिन का तीसरा तीरंदाजी गोल्ड अपने नाम किया। साहिल राजेश, कुशल दलाल और मणि रत्नम गणेश की भारतीय तिकड़ी ने चीन के खिलाफ फाइनल में शानदार जुझारूपन दिखाया। 21 वर्षीय कुशल दलाल, 25 वर्षीय साहिल राजेश और 20 वर्षीय मणि रत्नम गणेश थिरुमुरु की तिकड़ी ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और भारत को गोल्ड दिलाया।

आखिरी राउंड में बाजी पलटी

तीन राउंड यानी 18 शॉट के बाद भारत एक अंक से पीछे चल रहा था। तब चीन का स्कोर 179 और भारत का 178 था। इसके बाद आखिरी राउंड में भारतीय टीम ने मुकाबला पलट दिया। आखिरी छह शॉट में चीन के एक तीरंदाज ने आठ अंक का निशाना लगाया। इसका फायदा भारत को मिला और भारतीय टीम एक अंक की बढ़त पर पहुंच गई। अंत में भारत ने 238 अंक बनाए, जबकि चीन 237 अंक ही हासिल कर सका। इस तरह भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण

बता दें कि भारत ने आज कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण जीता। सबसे पहले चिकिथा तानिपर्थी, पृथिका प्रदीप और ज्योति सुरेखा वेन्नम की महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर गोल्ड अपने नाम किया था। इसके बाद चिकिथा और साहिल जाधव की मिश्रित टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया। पुरुष टीम ने भी चीन के खिलाफ फाइनल में जीत दर्ज कर तीरंदाजी में भारत का गोल्डन हैट्रिक पूरा कर दिया।

अमेरिका में स्टील प्लांट लगाएगा भारत का एस्सार ग्रुप, डोनाल्‍ड ट्रंप सरकार के साथ बड़ी डील

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भारतीय कारोबारी समूह एस्सार ग्रुप अमेरिका में बड़ा निवेश करने जा रहा है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने भारत के एस्सार ग्रुप के 18 अरब डॉलर के अमेरिकी स्टील प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा दावा किया है। यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा स्टील संयंत्र बताया जा रहा है। इस घोषणा से अमेरिकी उद्योग को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा की उम्मीद बढ़ गई है।

दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में से होगा एक

जानकारी के अनुसार, भारतीय कारोबारी समूह एस्सार ग्रुप की अमेरिकी सब्सिडियरी कंपनी मेसाबी मेटालिक्स अमेरिका के आयोवा में करीब 18 अरब डॉलर के निवेश से स्टील प्लांट स्थापित करेगी। प्‍लांट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 1 करोड़ टन स्टील होगी। ट्रंप ने कहा कि यह परियोजना अमेरिका के आयोवा राज्य में स्थापित की जाएगी और यह दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक होगी। उनके अनुसार, परियोजना के निर्माण चरण में करीब 6,000 नौकरियां पैदा होंगी, जबकि प्‍लांट और खनन गतिविधियों से लगभग 2,000 स्थायी रोजगार मिलेंगे।

मिनेसोटा की खदान से सप्लाई

इस प्रोजेक्ट की खास बात इसका इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन मॉडल है। एस्सार मिनेसोटा में अपनी आयरन-ओर माइन से कच्चा माल निकालेगा और उसी का इस्तेमाल आयोवा के नए स्टील प्लांट में किया जाएगा। इस तरह खनन से लेकर स्टील निर्माण तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला अमेरिका में ही विकसित की जाएगी।

प्रोजेक्‍ट को विकसित होने में लगेगा करीब एक दशक

एस्सार के चेयरमैन रेवंत रुइया ने बताया कि उनका परिवार मिनेसोटा में एक नई आयरन-ओर माइन के लिए करीब 3 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह अमेरिका में करीब 50 वर्षों में शुरू होने वाली पहली नई आयरन-ओर माइन होगी। प्रोजेक्‍ट को विकसित होने में करीब एक दशक लगने की उम्मीद है।

स्टील टैरिफ से जोड़ा निवेश

ट्रंप प्रशासन ने इस निवेश को अमेरिका की व्यापार नीतियों, खासकर आयातित स्टील पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क, से भी जोड़ा है। अमेरिका के कॉमर्स मिनिस्‍टर हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि टैरिफ के बिना यह खदान और स्टील संयंत्र नहीं बनता। ट्रंप ने भी कहा कि कंपनियां अमेरिका में उत्पादन स्थापित कर रही हैं, क्योंकि वे आयात पर शुल्क का भुगतान नहीं करना चाहतीं। हालांकि, अमेरिकी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ने मिनेसोटा की खदान के लिए फाइनेंसिंग में मदद की है।

From Heritage to Modern Living: The ASANG Design Studio Approach to Architecture

Architecture has always been a reflection of how people live, what they value and the environments they inhabit. ASANG Design Studio brings this perspective into contemporary practice by connecting Indian heritage and craftsmanship with the needs of modern living.A Contemporary Interpretation of Indian Design

Indian architecture offers a rich vocabulary of materials, climate-responsive ideas, craft traditions and spatial experiences. ASANG draws from this broader heritage while avoiding a purely nostalgic interpretation. Instead, traditional influences are translated into contemporary architecture and interiors suited to present-day lifestyles.

Designing for Experience

The studio's approach considers how a space is experienced over time. Morning light, changing shadows, tactile surfaces, movement through rooms and connections to greenery can all contribute to the atmosphere of a project. These seemingly subtle elements become important components of the overall design.

The Role of Craft

Craftsmanship gives architecture a human quality. ASANG integrates artisanal thinking into contemporary spaces through material choices and detailed execution. This relationship between designer, material and maker helps create interiors that feel individual and connected to place.

Residential and Diverse Project Experiences

ASANG's portfolio extends across luxury residences, penthouses, commercial spaces and serviced apartments. Working across different project types allows the studio to explore how its principles of context, materiality, functionality and timelessness can be adapted to different requirements.

A Philosophy of Better Living

At the centre of the practice is the idea that architecture should improve everyday experience. Beautiful spaces matter, but so do comfort, usability, natural light, ventilation and a sense of connection. This balance gives contemporary design a more lasting purpose.

Explore the ASANG Perspective

To see the studio's projects and learn more about its approach to architecture and interior design, visit ASANG Design Studio to explore its portfolio, services and design philosophy.

www.asangdesignstudio.in

भारत के युद्धपोत से भिड़ा पाक नौसेना का जहाज, पाकिस्तानी अफसर तलब

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भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी जगजाहिर है। दोनों देशों के बीच तकरार कब शुरू हो जाए ये कहना मुश्किल है। एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव दिखाई दिया है। अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक तेज रफ्तार जहाज ने भारतीय नेवी के युद्धपोत को टक्कर मार दी है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच टेंशन बढ़ गई है।

पाक नौसेना का गैर-पेशेवर रवैया

भारत के विदेश मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के बेहद करीब पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से पहुंचा और बेहद गैर-पेशेवर एवं असुरक्षित तरीके से उसकी दिशा में तेजी से चलने लगा। इस दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई। हालांकि, इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

कैसे हुई टक्कर?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी जहाज तेज गति से उसके करीब पहुंचा और सुरक्षित दूरी बनाए रखने के बजाय असुरक्षित तरीके से दिशा बदलता रहा। इसी दौरान दोनों जहाज संपर्क में आए। किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। दोनों जहाजों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

पाकिस्तान के प्रभारी राजदूत तलब

भारत ने इस मसले पर एक्शन लिया है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी राजनयिक को तलब किया। उन्हें पाकिस्तान की नौसेना इकाइयों के समुद्र में किए गए अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे घटनाक्रम दोबारा न हों, इसके लिए दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन जरूरी है।

1991 के समझौते का आया जिक्र

भारत ने इस घटना को अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते से भी जोड़ा है। इस समझौते का मकसद सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच गलतफहमी और दुर्घटना का खतरा कम करना था। इसके अनुच्छेद 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित दूरी बनाए रखने की बात कही गई है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों देशों के जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील के भीतर नहीं आना चाहिए। यानी इस तरह के समझौते का मकसद ही यह है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयां समुद्र में इस तरह की स्थिति पैदा न करें, जिससे टक्कर या किसी बड़े सैन्य विवाद का खतरा पैदा हो।

मिस्टर सिंह हमारी सड़कों से हटिए', अमेरिका में भारतीय ड्राइवरों पर नस्लीय टिप्पणी

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अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया एक एआई-जनरेटेड पोस्टर से विवाद बढ़ गया है। पोस्टर को आलोचक 'नस्लवादी' तथा 'भारत विरोधी' बता रहे हैं। जिसमें ‘मिस्टर सिंह’ से खुद देश छोड़कर जाने के लिए कहा गया। भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले इस पोस्टर में 'सेल्फ-डिपोर्ट या परिणाम भुगतने' जैसी चेतावनी दी गई है।

विज्ञापन में क्या

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के हालिया इमिग्रेशन लागू करने वाले विज्ञापन में ट्रांसफॉर्मर्स फिल्म की पैरोडी वाले पोस्टर में एक रोबोट, सिर पर कपड़ा बांधे गोरे (वाइट) का सामना करता हुआ दिखाया गया है, जिसे मिस्टर सिंह कहा गया है। विज्ञापन में 'ट्रांसफॉर्मर्स' फ्रैंचाइजी के मुख्य किरदार 'ऑप्टिमस प्राइम' को DHS का आर्म पैच पहने हुए दिखाया गया है। वह भूरी दाढ़ी वाले आदमी का सामना करते हुए कहता है, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह।'

एक वीडियो क्लिप भी किया गया पोस्ट

एक्स पर इससे संबंधित पोस्ट में एक छोटा वीडियो क्लिप दिखाया गया है जिसमें ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी का मुख्य खलनायक मेगाट्रॉन, एलियंस की रिहाई के लिए बातचीत कर रहा है। यह शब्द अमेरिकी प्रशासन विदेशी नागरिकों के लिए इस्तेमाल करता है। मेगाट्रॉन को ट्रक ड्राइवरों हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकजान बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह की रिहाई की कोशिश करते हुए दिखाया गया है, जो सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों में शामिल थे।

'खुद देश छोड़ने या अंजाम भुगतने की धमकी

डीएचएस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अगर आप इस देश के खिलाफ दुश्मनी भरी नीयत से आते हैं, तो यह जान लें हम अपना बचाव करेंगे। हम अमेरिकन मूल्यों की रक्षा करेंगे। हम अपने देश की रक्षा करेंगे। एक अन्य पोस्ट में ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी के मुख्य नायक ऑप्टिमस प्राइम को दिखाया गया है, जिसके हाथ पर डीएचएस का एक बैज लगा है। वह भूरी दाढ़ी वाले व्यक्ति का सामना करते हुए संदेश दे रहा है। 'खुद देश छोड़ दें या अंजाम भुगतें'

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन में नाराजगी

सिंह सरनेम हिंदू और सिख धर्म मानने वाले बहुत से लोगों का होता है। यह समूह अमेरिकी ट्रकिंग वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है। इससे साफ है कि पोस्टर में सिंह लिखा जाना भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाने की ओर इशाका करती है। विज्ञापन में मिस्टर सिंह के जिक्र की हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और सिख कोएलिशन जैसे संगठनों ने आलोचना की है। संगठन ने एक्स पर लिखा कि 'सिंह' हिंदू होते हैं, सिख होते हैं, अमेरिकी होते हैं और वे गाड़ी चलाते हैं। इस नस्लवादी, भारत-विरोधी प्रोफाइलिंग से अमेरिका की सामूहिक अंतरात्मा को झटका लगना चाहिए।

Nature Hospitality Expands Reach With New International Tour Packages

INDIA — Nature Hospitality, a travel and hospitality provider that has spent over a decade building its name around domestic getaways in Delhi, Bangalore, Mumbai, Chennai, Ahmedabad, Hyderabad and other Indian destinations, has now widened its portfolio to include a full lineup of international tour packages.The company, established in 2014, built its early reputation on curated trips to the Himalayan belt, Wayanad, Munnar, and island destinations such as Lakshadweep. Its move into international travel marks a shift for a brand that has largely been associated with domestic holidays until now.

The new offering includes Paris tour packages built around the Eiffel Tower, the Louvre Museum, and the Seine River, along with broader Europe tour packages covering France, Switzerland, Italy, Germany, and Spain. Travelers looking specifically at the Alps and lake country can also choose dedicated Switzerland tour packages.

Beyond Europe, Nature Hospitality has added USA tour packages featuring New York, Las Vegas, Los Angeles, and Miami, as well as Australia tour packages built around Sydney, Melbourne, and the Gold Coast. The company has also introduced Japan tour packages covering Tokyo, Kyoto, Osaka, and Mount Fuji, giving travelers a route into a market that combines modern cities with traditional culture.

For travelers drawn to desert landscapes and city luxury, the company has rolled out Dubai tour packages that include desert safaris, shopping, and sightseeing alongside stays at upscale hotels. South Africa tour packages round out the list, taking travelers through Cape Town, Johannesburg, and wildlife safaris across the country's landscapes.

"Our clients have been asking for the same kind of planning and support they got on their India trips, but for international destinations," the company said. "This expansion is our way of answering that demand without changing how we work with people."

That approach includes honeymoon and family packages, which the company has customized for couples, families, and groups traveling together. Nature Hospitality is also continuing its practice of building personalized itineraries from scratch, based on a traveler's destination, budget, travel dates, and specific preferences, rather than relying only on fixed departures.

Industry watchers have pointed to a broader trend behind this kind of expansion. Indian travelers have increasingly moved from domestic weekend trips toward longer international holidays over the past few years, a shift that has pushed many established domestic operators to add global destinations to their catalogs.

Nature Hospitality's past reviews, many tied to its Himalayan and Kerala tours, have often highlighted the hands-on support its team provides during a trip, including arranging local transport and adjusting plans on short notice. The company says it intends to carry that same level of involvement into its international bookings, from visa guidance to on-ground coordination at each destination.

The company has not limited its international packages to a single style of travel. Its catalog spans romantic city breaks in Paris, adventure-driven safaris in South Africa, beach and city combinations in Australia, and cultural circuits through Japan, giving it a spread that can serve very different types of travelers under one brand.

With this expansion, Nature Hospitality positions itself to compete for a segment of travelers who previously would have booked international trips through separate specialist agencies for each region. By keeping planning, budgeting, and support under one roof, the company is betting that convenience will be as strong a draw as the destinations themselves.

Nature Hospitality says more destinations and packages are expected to be added to its international lineup in the coming months, as it continues building out this side of the business alongside its existing domestic operations.

For those interested in Paris, Europe, USA, Australia, South Africa, Japan, Dubai, Switzerland, honeymoon and family holidays, or a fully customized international itinerary, Nature Hospitality can be reached through its official website and customer support channels.

Media Contact: Nature Hospitality Email: www.naturehospitality.net

 

नेपाल में आई बाढ़ में 288 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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नेपाल ने बुधवार को एक बार फिर से विनाश का मंजर देखा। यहां बड़ी संख्या में लोग तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में बह गए। बाढ़ में कम से कम 270 लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। इस प्राकृतिक आपदा में कई देशों के लोग लापता है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय शामिल हैं।

नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय लापता

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। इनके अलावा 37 और 39 लोगों के दो समूह तमिलनाडु के हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा तीसरा समूह 32 लोगों का है, जो पश्चिम बंगाल के हैं, वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा 61 लोग विभिन्न राज्यों के हैं, जो नेपाल में लापता हैं। साथ ही केरलम के 33 लोगों का भी एक समूह नेपाल में लापता है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूह लापता हैं।

भारत ने भेजी 47 टन राहत सामग्री

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेपाल को इस मुश्किल समय में मदद के लिए भारत ने दो विमान भेजे हैं। जिनमें से एक सी-130 जे विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर बुधवार को नेपाल हुआ था। इनमें अस्थायी शेल्टर, दवाईयां आदि लेकर गया है। आज भी एक सी-17 विमान 37 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इनमें से आठ टन दवाईयां हैं और एक टन खाद्य पदार्थ हैं। इस तरह दो दिनों में नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जो भी राहत सामग्री भेजी गई है, वह नेपाल की मांग के आधार पर ही भेजी गई है।

नेपाल के हालात को लेकर जयशंकर ने की समीक्षा बैठक*

इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेपाल बाढ़ के हालात पर समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इस बैठक में काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए। विदेश मंत्री ने बताया कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर्स और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। जयशंकर ने कहा कि हम इस मामले के साथ-साथ राहत कार्यों को लेकर भी नेपाल के अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय में काम कर रहे हैं।