अन्नपूर्णा योजना पर ममता के आरोपों को मुख्यमंत्री शुभेंदु ने किया खारिज*

*कोलकाता:* अन्नपूर्णा योजना का पैसा नहीं मिलने और आम लोगों से धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खारिज कर दिया।

सोमवार को पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक राज्य की 1 करोड़ 46 लाख से अधिक योग्य महिलाओं के बैंक खातों में सीधे अन्नपूर्णा योजना की राशि भेजी जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि यह राशि बिना किसी राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव के बांटी गई है।

इससे पहले सोमवार शाम को सोशल मीडिया पर लाइव आकर ममता बनर्जी ने नई भाजपा सरकार की अन्नपूर्णा योजना पर नाराजगी जताई थी। उनका आरोप था कि चुनाव से पहले भत्ते का लालच देकर वोट लेने के बाद अब कई तरह की शर्तें लगाकर महिलाओं को वंचित किया जा रहा है।

इस पर पलटवार करते हुए शुभेंदु ने कहा, "हमारी सरकार किसी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती। इस योजना के तहत करीब 19 लाख मुस्लिम परिवारों के खातों में भी पैसा पहुंच चुका है।" पात्र-अपात्र के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार ही स्क्रूटनी की जा रही है। करीब साढ़े 4 लाख आवेदनों से जुड़ी शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

साथ ही मतुआ और हिंदू शरणार्थियों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि CAA के तहत नागरिकता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस संबंध में जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया गया है। वर्तमान में लंबित 2 लाख 7 हजार आवेदनों के साथ-साथ नए आवेदनों का भी तेजी से निपटारा कर सभी योग्य शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता का आधिकारिक सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

#indiancitizenshipproofpassportvoteridaadhaar_citizenship

विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

अन्नपूर्णा योजना पर ममता के आरोपों को मुख्यमंत्री शुभेंदु ने किया खारिज*

*कोलकाता:* अन्नपूर्णा योजना का पैसा नहीं मिलने और आम लोगों से धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खारिज कर दिया।

सोमवार को पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक राज्य की 1 करोड़ 46 लाख से अधिक योग्य महिलाओं के बैंक खातों में सीधे अन्नपूर्णा योजना की राशि भेजी जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि यह राशि बिना किसी राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव के बांटी गई है।

इससे पहले सोमवार शाम को सोशल मीडिया पर लाइव आकर ममता बनर्जी ने नई भाजपा सरकार की अन्नपूर्णा योजना पर नाराजगी जताई थी। उनका आरोप था कि चुनाव से पहले भत्ते का लालच देकर वोट लेने के बाद अब कई तरह की शर्तें लगाकर महिलाओं को वंचित किया जा रहा है।

इस पर पलटवार करते हुए शुभेंदु ने कहा, "हमारी सरकार किसी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती। इस योजना के तहत करीब 19 लाख मुस्लिम परिवारों के खातों में भी पैसा पहुंच चुका है।" पात्र-अपात्र के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार ही स्क्रूटनी की जा रही है। करीब साढ़े 4 लाख आवेदनों से जुड़ी शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

साथ ही मतुआ और हिंदू शरणार्थियों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि CAA के तहत नागरिकता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस संबंध में जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया गया है। वर्तमान में लंबित 2 लाख 7 हजार आवेदनों के साथ-साथ नए आवेदनों का भी तेजी से निपटारा कर सभी योग्य शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता का आधिकारिक सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

#indiancitizenshipproofpassportvoteridaadhaar_citizenship

विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।