मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

पाकिस्तान, अफगानिस्तान-बांग्लादेश से 2024 तक आए लोगों को भारत में रहने की इजाजत, CAA पर केन्द्र का बड़ा फैसला

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केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए पर बड़ा फैसला किया है। भारत में कट-ऑफ तारीख को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 कर दिया है। यानी अब सीएए के तहत 31 दिसंबर 2024 तक भारत में आए उन लोगों को नागरिकता मिल सकती है, जो अपने देश में धार्मिक प्रताड़ना झेल रहे थे। पहले यह तारीख दिसंबर 2014 तय की गई थी। जिसे 10 साल बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 कर दिया गया है।

यह आदेश इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्टर, 2025 के तहत जारी किया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई जो धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत में शरण लेने को मजबूर हुए हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा। ऐसे लोग जिनके पास पासपोर्ट या वीजा नहीं, या फिर उनकी वैलिडिटी खत्म हो गई है। उन्हें भारत की नागरिकता मिल सकेगी।

सुकांतो मजूमदार ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांतो मजूमदार ने इस आदेश के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, भारत में 31 दिसंबर 2024 तक आए गैर-मुसलमानों को देश में CAA के तहत नागरिकता मिल जाएगी। मजूमदार ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद भी दिया। हालांकि बाद में उन्होंने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया और नए कानून का हवाला देते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों भारत में रहने की इजाजत मिल जाएगी।

विस्थापित लोगों के संगठनों ने सरकार से की थी अपील

बता दें कि हाल में ही विस्थापित लोगों के संगठनों ने सरकार से यह अपील की थी। बांग्लादेश के एक रिफ्यूजी संगठन ने पीएम मोदी से सीएए की तारीख को 2014 से बढ़ाकर 2024 करने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि प्रताड़ित अल्पसंख्यकों का आना अभी भी जारी है।

2024 से पहले भारत आए अल्पसंख्यक को मिलेगी नागरिकता

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए एक विशेष प्रावधान मौजूद है। यह विशेष रूप से उन कुछ व्यक्तियों के लिए है जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं और पाकिस्तान या अफगानिस्तान या बांग्लादेश के हिन्दू या सिख या बौद्ध या जैन या पारसी या ईसाई समुदाय से हैं। हालांकि अब यह तारीख को दिसंबर 2014 से बढ़ाकर दिसंबर 2024 कर दिया गया है।

कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति ने भारत को तोड़ा: सीएम योगी

लखनऊ। 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के मौके पर लखनऊ में आयोजित भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने 1947 के विभाजन को कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का काला अध्याय करार देते हुए कहा कि इस भीषण त्रासदी ने सनातन भारत की एकता को तोड़कर देश को पीड़ा दी। उन्होंने कहा कि आज 14 अगस्त 1947 की विभाजन विभीषिका को याद करते हुए पूरा देश शोकाकुल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में इस दिन को स्मृति दिवस घोषित कर इतिहास को जीवंत किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और देशवासियों को इतिहास से सबक लेने का आह्वान किया। प्रदर्शनी में विभाजन के बाद उपजी हिंसा और उससे प्रभावित लोगों से संबंधित डिजिटल आर्काइव फोटो, अखबार कतरनें, राजकीय अभिलेख और विस्थापित परिवारों की संरक्षित सामग्री के जरिए युवाओं को तुष्टिकरण की कीमत उस दौर की वेदना से अवगत कराया गया।

कांग्रेस ने सत्ता लालच में देश का बंटवारा कराया- सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे को गले लगाया, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता लालच में देश का बंटवारा कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी पाकिस्तान के लाहौर, कराची, रावलपिंडी, मुल्तान जैसे क्षेत्रों को हिंदू, सिख और बौद्ध विहीन बनाने का अभियान कांग्रेस की नीति का नतीजा था। इस हिंसा में 15-20 लाख लोगों की जान गई और करोड़ों विस्थापित हुए। सीएम योगी ने कहा कि यह अत्याचारों की पराकाष्ठा थी, जिसे कांग्रेस ने बढ़ावा दिया।

विभीषिका पीड़ित परिवारों को CAA के तहत उचित पुनर्वास देंगी सरकार- मुख्यमंत्री
सीएम ने कांग्रेस पर विस्थापितों के प्रति उदासीनता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई समुदाय के लोग घर-बार छोड़कर आए, उनके लिए तत्कालीन सरकार ने न स्मारक बनाए, न संग्रहालय स्थापित किए। उनकी पीड़ा को भुला दिया गया। इसके विपरीत, उन्होंने पीएम मोदी की सराहना की, जिन्होंने CAA के जरिए शरणार्थियों को नागरिकता और पुनर्वास का अधिकार दिया। सीएम ने कहा कि पहली बार जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में शरणार्थियों को CAA से नागरिकता मिली। ये लोग भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने उनके पुनर्वास के लिए कभी प्रयास नहीं किया। सीएम योगी ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी स्मृतियों को हमारा नमन है। सीएम योगी ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार CAA के तहत पात्र परिवारों को जमीन के पट्टे और उचित पुनर्वास देगी। उन्होंने कहा कि हम उनके हितों की रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

देश के युवाओं को इतिहास से जोड़ना जरूरी- सीएम योगी
सीएम योगी ने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से देश के युवाओं को इतिहास से जोड़ना जरूरी है। इसमें विभाजन की त्रासदी, दंगे, विस्थापन और कत्लेआम की झलकियां दर्शाई गई हैं। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह पहल पीड़ित परिवारों के घावों पर मरहम लगाने का काम कर रही है और आने वाली पीढ़ियों को सच से भी अवगत करा रही है।

इस दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अधिकारी को केंद्र सरकार ने दी बड़ी जिम्मेदारी, कोस्टल एग्रीकल्चर अथॉरिटी चेन्नई के बनाए गए संयुक्त सचिव

नई दिल्ली- भारत सरकार ने एक और छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी दी है. केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने 2007 बैच के आईएएस अधिकारी केसी देवसेनापति को कोस्टल एग्रीकल्चर अथॉरिटी (CAA) चेन्नई में संयुक्त सचिव पद पर पदस्थ किया है.

जारी आदेश के मुताबिक, आईएएस देवसेनापति को पे मैट्रिक्स के लेवल 14 पर नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति 18 अगस्त 2028 तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. यह नियुक्ति मत्स्य पालन विभाग के अंतर्गत कार्यरत कोस्टल एग्रीकल्चर अथॉरिटी (CAA) में की गई है, जिसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है.

बता दें कि केसी देवसेनापति छत्तीसगढ़ कैडर के 2007 बैच के आईएएस अफसर हैं. उन्होंने 18 अगस्त 2007 को आईएएस की सर्विस ज्वाइन की. वे बीजापुर जिला पंचायत सीईओ थे. वे सूरजपुर और दंतेवाड़ा कलेक्टर भी रहे. आईएएस केसी देवासेनापति को राज्य योजना आयोग के सदस्य, सचिव मुख्य कार्यपालन अधिकारी छग इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी यानि चिप्स भी रह चुके हैं. विशेष सचिव इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू अल्पसंख्यकों को मिलेगी राहत, गृह मंत्री विजय शर्मा बोले- CAA के तहत पा सकेंगे भारतीय नागरिकता

रायपुर- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने देश में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों (अलग-अलग वीजा रखने वालों) को देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था। इस बीच छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि राज्य में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू अल्पसंख्यकों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारत की नागरिकता दी जा सकेगी।

गृहमंत्री ने बताया कि जो पाकिस्तानी अल्पसंख्यक छत्तीसगढ़ में रह रहे हैं, उन्हें फिलहाल राज्य में रहने की अनुमति दी गई है और वे केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। शर्मा ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से देख रही है। हम इस प्रक्रिया में उनकी हर संभव मदद करेंगे।”

पाकिस्तानी हिंदुओं ने गृहमंत्री शर्मा से की थी मुलाक़ात.

गौरतलब है कि पाकिस्तानी हिंदुओं के एक समूह ने बीते शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात कर अपनी परेशानियां बताईं और मदद की गुहार लगाई थी। इन पीड़ितों में सिंध के घोटकी ज़िले के खानपुर निवासी सुखदेव लुंद भी शामिल थे। उन्होंने बताया, “हम लौटकर पाकिस्तान नहीं जाएंगे।”

सुखदेव, 45 दिन के विज़िटर वीज़ा पर रायपुर के शदाणी दरबार पहुँचे हैं। उनके साथ उनके परिवार सहित कुल 24 लोगों का समूह भी है। सुखदेव ने बताया कि वे आतंकी हमलों और अत्याचारों से परेशान होकर भारत पहुँचे हैं और रायपुर में शरण की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, आने के बाद बीते 48 घंटों में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले लगभग 100 अन्य पाकिस्तानी हिंदू भी रायपुर पहुँच चुके हैं, जिन्होंने भारत में स्थायी निवास की माँग की है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

पाकिस्तानी नागरिकों पर बढ़ी चिंता

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश में रह रहे कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू हुई है। इस पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं को लेकर स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक हो गया था। गृहमंत्री विजय शर्मा के इस बयान से राज्य के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से भारत में स्थायी रूप से बसने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

क्यों है यह फैसला अहम?

छत्तीसगढ़ में रह रहे ऐसे कई परिवार वर्षों से नागरिकता न मिलने की वजह से नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित रहे हैं। CAA के तहत उन्हें कानूनी मान्यता मिलने से उनके जीवन में स्थिरता और अधिकारों की प्राप्ति संभव हो सकेगी।

क्या है CAA?

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ गए हों और उन्हें वहां धार्मिक आधार पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो।

वक्फ संशोधन बिल के विरोध में सुमैया राणा को पुलिस का नोटिस, दस लाख के मुचलके की मांग

लखनऊ । वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में आवाज उठाना सुमैया राणा को भारी पड़ रहा है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लखनऊ के घंटाघर धरने में सक्रिय रहीं मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी और सामाजिक कार्यकर्ता सुमैया राणा को लखनऊ पुलिस ने दस लाख रुपये के मुचलके के साथ नोटिस भेजा है। यह नोटिस उन्हें वॉट्सऐप पर मिला, जिसे सुमैया ने असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

सुमैया बोलीं- डरने वाली नहीं हूं

सुमैया राणा का कहना है कि वक्फ बिल का शांतिभंग से कोई लेना-देना नहीं, यह एक संविधान विरोधी कानून है, जिसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना उनका अधिकार है। उन्होंने साफ कहा कि "सरकार की किसी भी गलत नीति या संविधान विरोधी कदम से डरने वाली नहीं हूं। वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने की साजिश के खिलाफ मेरा संघर्ष जारी रहेगा।"

दो दिन पहले सुमैया को हाउस अरेस्ट किया गया था

गौरतलब है कि वक्फ संशोधन बिल का विरोध करने के मद्देनज़र दो दिन पहले सुमैया को हाउस अरेस्ट किया गया था। उनके आवास पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन सुमैया का आरोप है कि पुलिस के पास किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं था। उन्होंने इसे भी संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।

उजमा परवीन को भी पुलिस की ओर से नोटिस भेजा गया

इसी तरह समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र यादव और सोशल एक्टिविस्ट उजमा परवीन को भी पुलिस की ओर से नोटिस भेजा गया है। महेन्द्र यादव ने कहा, "नोटबंदी, सीएए, एनआरसी, लॉकडाउन, कृषि कानूनों की तरह ही यह वक्फ संशोधन विधेयक भी एक काला कानून है और हम इसका पुरजोर विरोध करते रहेंगे।"

उनका विरोध संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए

सुमैया राणा समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता वक्फ संपत्तियों को मुस्लिम समुदाय की धरोहर मानते हैं और उनका कहना है कि सरकार इन संपत्तियों को कब्जा करने के लिए यह विधेयक ला रही है। उनका विरोध संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध और सरकारी कार्रवाई के संतुलन पर बहस छेड़ दी है।

वक्फ संशोधन अधिनियम पर PK का बड़ा बयान, समाज को भरोसे में लिए बिना ही कानून बनाने की कोशिश*
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पटना : जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने वक्फ कानून पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज केंद्र सरकार देश के संसद से ऐसे कानून ला रही है जिससे की मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग असहज महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस मुस्लिम कौम ने इस देश की आजादी के लिए अपनी कुर्बानी दी, उस देश की संसद से आज भाजपा सरकार ने CAA NRC का कानून बना दिया, जो की मुस्लिम समाज के साथ अन्याय है। उसी संसद से वक्फ बोर्ड में बड़े बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है, जिसको समाज के लोगों को भरोसे में लिए बिना ही नई कहानी लिखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मॉब लांचिंग पर कहा कि जब किसी गरीब, लाचार, असहाय मुस्लिम की भीड़ द्वारा बेहरमी से हत्या कर दी जाती है तब उसके साथ उस समाज का वोट लेने वाले 10 नेता भी खड़े नहीं होते और आज यह मुस्लिम समाज के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय है।
बिहार की सुमित्रा रानी साहा बनीं पहली महिला, सीएए के तहत मिली भारतीय नागरिकता

सुमित्रा रानी साहा बिहार की ऐसी पहली महिला हो गई है. जिनको भारतीय नागरिकता मिल गई है. सुमित्रा रानी साहा बांग्लादेश से करीब 20 साल की उम्र में 1985 में बिहार आई थी. अब तमाम औपचारिकता और नियम पूरे कर लेने के बाद उनको सीएए के तहत नागरिकता प्रदान कर दी गई है. एक लंबे इंतजार के बाद उन्होंने भारतीय नागरिकता को हासिल कर लिया है. नागरिकता मिलने के बाद रानी साहा का परिवार बहुत ही खुश नजर आ रहा है.

सुमित्रा रानी (60) साहा अपनी बुआ के साथ पांच या छह साल की उम्र में बांग्लादेश गई थी. उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. जिसके कारण वह बांग्लादेश में ही अपनी पढ़ाई करती रही. करीब 20 साल के बाद वह जनवरी 1985 में बांग्लादेश से अपने पिता के साथ अपने घर बिहार में कटिहार आई. सुमित्रा की शादी 1985 में आरा के रहने वाले परमेश्वर प्रसाद से हुई. शादी के बाद तब से लेकर अब तक सुमित्रा वीजा लेकर भारत में रह रही थी.

CAA के तहत मिली नागरिकता

हर साल उनको अपने वीजा के लिए परेशान होना पड़ता था. पिछले साल उन्होंने वीजा के लिए आवेदन किया, तो उन्हें सीएए के बारे में जानकारी मिली. हालांकि उनको करीब तीन साल तक वीजा का एक्सटेंशन भी मिला. सीएए की जानकारी मिलने के बाद सुमित्रा की बेटी ऐश्वर्या ने नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया और इस काम में लग गई. सुमित्रा की बेटी ऐश्वर्या कहती है कि अब हमें नागरिकता मिल गई है, लेकिन पहले आसपास के लोग हमें कई तरह की बातें कहते थे.

लोगों ने किया मानसिक टॉर्चर’

वह यह कहते थे कि हम लोग बांग्लादेश के रहने वाले हैं. आप लोगों को जेल भेज दिया जाएगा. कई प्रकार का मानसिक टॉर्चर किया गया, लेकिन अब हमें नागरिकता मिल गई है. यह हमारे लिए खुशी का लम्हा है. हमें भारत की नागरिकता जब तक नहीं मिली थी, तब तक किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिल पा रही थी. गैस कनेक्शन तक नहीं मिला था. लेकिन अब यह सारी सुविधाएं मिलने लगेगी.

ऐश्वर्या का यह भी कहना था कि सीएए हमारे जैसे लोगों के लिए एक जीवनदान जैसा है. अब हमें नागरिकता मिली है. अब हम सारे डॉक्यूमेंट बनवाएंगे और देश की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे. वहीं सेंसस ऑफ़ डायरेक्टर ऑपरेशन के तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार एम. रामचंद्रुडु, निदेशक, जनगणना- सह- नागरिक निबंधन कार्यालय, पटना की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सशक्त समिति ने भोजपुर जिले की सुमित्रा रानी साहा को नागरिकता प्रदान करने का निर्णय लिया.

40 साल पहले भारत आई थी सुमित्रा

60 वर्षीय सुमित्रा रानी साहा करीब 40 साल पहले बांग्लादेश से भारत आईं थी. उन्हें शुक्रवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई. प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीए पोर्टल पर सुमित्रा रानी साहा जिला- भोजपुर (बिहार) ने आवेदन किया था. आवेदन नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (सीसीए) के आधार संख्या IIIA अनुभाग के अंतर्गत 5(1)(सी) के तहत प्राप्त हुआ था.

बैठक में जारी किया नागरिकता प्रमाण पत्र

इसके बाद जिला स्तरीय समिति ने मूल्य निर्धारण के साथ अग्रसारित की गई थी. आवेदन के साथ उपलब्ध लाइसेंस प्राप्त पुरातत्वविदों की समिति ने एप्लीकेंट को प्रमाणपत्र प्रदान करने का निर्णय लिया. सीएए पोर्टल पर साइटिक्स शास्त्र जनरेट करने के बाद एप्लीकेंट को पोर्टल के माध्यम से ईमेल और एसएमएस से सूचना भेज दी जाती है. निदेशक जनगणना, सह- नागरिक निबंधन रामचन्द्रडु ने राजधानी के सचिवालय में शुक्रवार को निदेशक, नागरिक निबंधन के कार्यालय में बैठक हुई और नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किया गया. बैठक में राज्य के कई बड़े अधिकारी मौजूद रहें.

अमेरिकी रिपोर्ट ने भारत में अल्पसंख्यकों को खतरे में बताया, विदेश मंत्रालय ने कहा-पक्षपाती एजेंडा
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अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर भारत पर एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें भारत की सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वरिष्ठ नीति विश्लेषक सेमा हसन ने लिखा है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों पर हिंसक हमले होते हैं। धार्मिक अशांति फैलाने के लिए गलत जानकारी दी जाती है। इसके अलावा सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि रिपोर्ट में मुस्लिम, वक्फ संशोधन बिल गोहत्या विरोधी कानून की बात की गई है। इन सब के चलते आयोग ने देश को धार्मिक भेद-भाव वाले देशों के लिस्ट में नामित करने का आग्रह किया है। अमेरिकी सरकार के आयोग USCIRF (US Commission on International Religious Freedom) की ओर से 2 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), समान नागरिक संहिता (UCC), राज्यों में धर्मांतरण का विरोध और गोहत्या विरोधी कानून का जिक्र किया गया है। साथ ही कहा गया है कि इन कानूनों का मकसद भारत में अल्पसंख्यकों को टारगेट करना और उन्हें मताधिकार से वंचित रखना है। रिपोर्ट में आगे लिखा है, भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2024 में लगातार बदतर होती जा रही है। खासकर देश में राष्ट्रीय चुनाव होने से पहले और तुरंत बाद के महीनों में। लोगों को मारा गया, पीटा गया और लिंचिंग की गई। धार्मिक नेताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया। घरों और पूजा स्थलों को ध्वस्त कर दिया गया। ये घटनाएं धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन हैं। भारत सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून, गोहत्या कानून और आतंकवाद विरोधी जैसे कानून लागू करके धार्मिक समुदायों का दमन कर रही है। अपनी सलाना रिपोर्ट में USCIRF ने अमेरिकी विदेश विभाग से ये आग्रह किया है कि वो भारत में धार्मिक स्तर पर हो रहे उल्लंघनों को ध्यान में रखते हुए उसे विशेष चिंता वाले देश के रूप में शामिल करें। भारत ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। भारत ने इसे एक राजनीतिक एजेंडा वाला 'पक्षपाती संगठन' करार दिया। भारत ने इस रिपोर्ट को 'दुर्भावनापूर्ण' बताया। विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यूएससीआईआरएफ को अपने समय का ज्यादा इस्तेमाल अमेरिका में मानवाधिकारों के मुद्दे से निपटने में करना चाहिए। बता दें कि, ये पहली बार नहीं है जब अमेरिकी आयोग ने भारत के खिलाफ धर्म संबंधित ऐसा रिपोर्ट जारा किया है। इससे पहले भी उन्होंने ऐसा किया था। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच अच्छे संबंध होने की वजह से जो बाइडेन प्रशासन USCIRF द्वारा किए गए आग्रह को मानने से बचता रहा है।
मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

पाकिस्तान, अफगानिस्तान-बांग्लादेश से 2024 तक आए लोगों को भारत में रहने की इजाजत, CAA पर केन्द्र का बड़ा फैसला

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केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए पर बड़ा फैसला किया है। भारत में कट-ऑफ तारीख को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 कर दिया है। यानी अब सीएए के तहत 31 दिसंबर 2024 तक भारत में आए उन लोगों को नागरिकता मिल सकती है, जो अपने देश में धार्मिक प्रताड़ना झेल रहे थे। पहले यह तारीख दिसंबर 2014 तय की गई थी। जिसे 10 साल बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 कर दिया गया है।

यह आदेश इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्टर, 2025 के तहत जारी किया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई जो धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत में शरण लेने को मजबूर हुए हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा। ऐसे लोग जिनके पास पासपोर्ट या वीजा नहीं, या फिर उनकी वैलिडिटी खत्म हो गई है। उन्हें भारत की नागरिकता मिल सकेगी।

सुकांतो मजूमदार ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांतो मजूमदार ने इस आदेश के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, भारत में 31 दिसंबर 2024 तक आए गैर-मुसलमानों को देश में CAA के तहत नागरिकता मिल जाएगी। मजूमदार ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद भी दिया। हालांकि बाद में उन्होंने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया और नए कानून का हवाला देते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों भारत में रहने की इजाजत मिल जाएगी।

विस्थापित लोगों के संगठनों ने सरकार से की थी अपील

बता दें कि हाल में ही विस्थापित लोगों के संगठनों ने सरकार से यह अपील की थी। बांग्लादेश के एक रिफ्यूजी संगठन ने पीएम मोदी से सीएए की तारीख को 2014 से बढ़ाकर 2024 करने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि प्रताड़ित अल्पसंख्यकों का आना अभी भी जारी है।

2024 से पहले भारत आए अल्पसंख्यक को मिलेगी नागरिकता

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए एक विशेष प्रावधान मौजूद है। यह विशेष रूप से उन कुछ व्यक्तियों के लिए है जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं और पाकिस्तान या अफगानिस्तान या बांग्लादेश के हिन्दू या सिख या बौद्ध या जैन या पारसी या ईसाई समुदाय से हैं। हालांकि अब यह तारीख को दिसंबर 2014 से बढ़ाकर दिसंबर 2024 कर दिया गया है।

कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति ने भारत को तोड़ा: सीएम योगी

लखनऊ। 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के मौके पर लखनऊ में आयोजित भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने 1947 के विभाजन को कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का काला अध्याय करार देते हुए कहा कि इस भीषण त्रासदी ने सनातन भारत की एकता को तोड़कर देश को पीड़ा दी। उन्होंने कहा कि आज 14 अगस्त 1947 की विभाजन विभीषिका को याद करते हुए पूरा देश शोकाकुल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में इस दिन को स्मृति दिवस घोषित कर इतिहास को जीवंत किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और देशवासियों को इतिहास से सबक लेने का आह्वान किया। प्रदर्शनी में विभाजन के बाद उपजी हिंसा और उससे प्रभावित लोगों से संबंधित डिजिटल आर्काइव फोटो, अखबार कतरनें, राजकीय अभिलेख और विस्थापित परिवारों की संरक्षित सामग्री के जरिए युवाओं को तुष्टिकरण की कीमत उस दौर की वेदना से अवगत कराया गया।

कांग्रेस ने सत्ता लालच में देश का बंटवारा कराया- सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे को गले लगाया, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता लालच में देश का बंटवारा कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी पाकिस्तान के लाहौर, कराची, रावलपिंडी, मुल्तान जैसे क्षेत्रों को हिंदू, सिख और बौद्ध विहीन बनाने का अभियान कांग्रेस की नीति का नतीजा था। इस हिंसा में 15-20 लाख लोगों की जान गई और करोड़ों विस्थापित हुए। सीएम योगी ने कहा कि यह अत्याचारों की पराकाष्ठा थी, जिसे कांग्रेस ने बढ़ावा दिया।

विभीषिका पीड़ित परिवारों को CAA के तहत उचित पुनर्वास देंगी सरकार- मुख्यमंत्री
सीएम ने कांग्रेस पर विस्थापितों के प्रति उदासीनता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई समुदाय के लोग घर-बार छोड़कर आए, उनके लिए तत्कालीन सरकार ने न स्मारक बनाए, न संग्रहालय स्थापित किए। उनकी पीड़ा को भुला दिया गया। इसके विपरीत, उन्होंने पीएम मोदी की सराहना की, जिन्होंने CAA के जरिए शरणार्थियों को नागरिकता और पुनर्वास का अधिकार दिया। सीएम ने कहा कि पहली बार जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में शरणार्थियों को CAA से नागरिकता मिली। ये लोग भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने उनके पुनर्वास के लिए कभी प्रयास नहीं किया। सीएम योगी ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी स्मृतियों को हमारा नमन है। सीएम योगी ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार CAA के तहत पात्र परिवारों को जमीन के पट्टे और उचित पुनर्वास देगी। उन्होंने कहा कि हम उनके हितों की रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

देश के युवाओं को इतिहास से जोड़ना जरूरी- सीएम योगी
सीएम योगी ने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से देश के युवाओं को इतिहास से जोड़ना जरूरी है। इसमें विभाजन की त्रासदी, दंगे, विस्थापन और कत्लेआम की झलकियां दर्शाई गई हैं। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह पहल पीड़ित परिवारों के घावों पर मरहम लगाने का काम कर रही है और आने वाली पीढ़ियों को सच से भी अवगत करा रही है।

इस दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अधिकारी को केंद्र सरकार ने दी बड़ी जिम्मेदारी, कोस्टल एग्रीकल्चर अथॉरिटी चेन्नई के बनाए गए संयुक्त सचिव

नई दिल्ली- भारत सरकार ने एक और छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी दी है. केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने 2007 बैच के आईएएस अधिकारी केसी देवसेनापति को कोस्टल एग्रीकल्चर अथॉरिटी (CAA) चेन्नई में संयुक्त सचिव पद पर पदस्थ किया है.

जारी आदेश के मुताबिक, आईएएस देवसेनापति को पे मैट्रिक्स के लेवल 14 पर नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति 18 अगस्त 2028 तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. यह नियुक्ति मत्स्य पालन विभाग के अंतर्गत कार्यरत कोस्टल एग्रीकल्चर अथॉरिटी (CAA) में की गई है, जिसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है.

बता दें कि केसी देवसेनापति छत्तीसगढ़ कैडर के 2007 बैच के आईएएस अफसर हैं. उन्होंने 18 अगस्त 2007 को आईएएस की सर्विस ज्वाइन की. वे बीजापुर जिला पंचायत सीईओ थे. वे सूरजपुर और दंतेवाड़ा कलेक्टर भी रहे. आईएएस केसी देवासेनापति को राज्य योजना आयोग के सदस्य, सचिव मुख्य कार्यपालन अधिकारी छग इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी यानि चिप्स भी रह चुके हैं. विशेष सचिव इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू अल्पसंख्यकों को मिलेगी राहत, गृह मंत्री विजय शर्मा बोले- CAA के तहत पा सकेंगे भारतीय नागरिकता

रायपुर- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने देश में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों (अलग-अलग वीजा रखने वालों) को देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था। इस बीच छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि राज्य में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू अल्पसंख्यकों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारत की नागरिकता दी जा सकेगी।

गृहमंत्री ने बताया कि जो पाकिस्तानी अल्पसंख्यक छत्तीसगढ़ में रह रहे हैं, उन्हें फिलहाल राज्य में रहने की अनुमति दी गई है और वे केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। शर्मा ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से देख रही है। हम इस प्रक्रिया में उनकी हर संभव मदद करेंगे।”

पाकिस्तानी हिंदुओं ने गृहमंत्री शर्मा से की थी मुलाक़ात.

गौरतलब है कि पाकिस्तानी हिंदुओं के एक समूह ने बीते शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात कर अपनी परेशानियां बताईं और मदद की गुहार लगाई थी। इन पीड़ितों में सिंध के घोटकी ज़िले के खानपुर निवासी सुखदेव लुंद भी शामिल थे। उन्होंने बताया, “हम लौटकर पाकिस्तान नहीं जाएंगे।”

सुखदेव, 45 दिन के विज़िटर वीज़ा पर रायपुर के शदाणी दरबार पहुँचे हैं। उनके साथ उनके परिवार सहित कुल 24 लोगों का समूह भी है। सुखदेव ने बताया कि वे आतंकी हमलों और अत्याचारों से परेशान होकर भारत पहुँचे हैं और रायपुर में शरण की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, आने के बाद बीते 48 घंटों में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले लगभग 100 अन्य पाकिस्तानी हिंदू भी रायपुर पहुँच चुके हैं, जिन्होंने भारत में स्थायी निवास की माँग की है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

पाकिस्तानी नागरिकों पर बढ़ी चिंता

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश में रह रहे कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू हुई है। इस पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं को लेकर स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक हो गया था। गृहमंत्री विजय शर्मा के इस बयान से राज्य के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से भारत में स्थायी रूप से बसने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

क्यों है यह फैसला अहम?

छत्तीसगढ़ में रह रहे ऐसे कई परिवार वर्षों से नागरिकता न मिलने की वजह से नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित रहे हैं। CAA के तहत उन्हें कानूनी मान्यता मिलने से उनके जीवन में स्थिरता और अधिकारों की प्राप्ति संभव हो सकेगी।

क्या है CAA?

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ गए हों और उन्हें वहां धार्मिक आधार पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो।

वक्फ संशोधन बिल के विरोध में सुमैया राणा को पुलिस का नोटिस, दस लाख के मुचलके की मांग

लखनऊ । वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में आवाज उठाना सुमैया राणा को भारी पड़ रहा है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लखनऊ के घंटाघर धरने में सक्रिय रहीं मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी और सामाजिक कार्यकर्ता सुमैया राणा को लखनऊ पुलिस ने दस लाख रुपये के मुचलके के साथ नोटिस भेजा है। यह नोटिस उन्हें वॉट्सऐप पर मिला, जिसे सुमैया ने असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

सुमैया बोलीं- डरने वाली नहीं हूं

सुमैया राणा का कहना है कि वक्फ बिल का शांतिभंग से कोई लेना-देना नहीं, यह एक संविधान विरोधी कानून है, जिसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना उनका अधिकार है। उन्होंने साफ कहा कि "सरकार की किसी भी गलत नीति या संविधान विरोधी कदम से डरने वाली नहीं हूं। वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने की साजिश के खिलाफ मेरा संघर्ष जारी रहेगा।"

दो दिन पहले सुमैया को हाउस अरेस्ट किया गया था

गौरतलब है कि वक्फ संशोधन बिल का विरोध करने के मद्देनज़र दो दिन पहले सुमैया को हाउस अरेस्ट किया गया था। उनके आवास पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन सुमैया का आरोप है कि पुलिस के पास किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं था। उन्होंने इसे भी संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।

उजमा परवीन को भी पुलिस की ओर से नोटिस भेजा गया

इसी तरह समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र यादव और सोशल एक्टिविस्ट उजमा परवीन को भी पुलिस की ओर से नोटिस भेजा गया है। महेन्द्र यादव ने कहा, "नोटबंदी, सीएए, एनआरसी, लॉकडाउन, कृषि कानूनों की तरह ही यह वक्फ संशोधन विधेयक भी एक काला कानून है और हम इसका पुरजोर विरोध करते रहेंगे।"

उनका विरोध संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए

सुमैया राणा समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता वक्फ संपत्तियों को मुस्लिम समुदाय की धरोहर मानते हैं और उनका कहना है कि सरकार इन संपत्तियों को कब्जा करने के लिए यह विधेयक ला रही है। उनका विरोध संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध और सरकारी कार्रवाई के संतुलन पर बहस छेड़ दी है।

वक्फ संशोधन अधिनियम पर PK का बड़ा बयान, समाज को भरोसे में लिए बिना ही कानून बनाने की कोशिश*
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पटना : जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने वक्फ कानून पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज केंद्र सरकार देश के संसद से ऐसे कानून ला रही है जिससे की मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग असहज महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस मुस्लिम कौम ने इस देश की आजादी के लिए अपनी कुर्बानी दी, उस देश की संसद से आज भाजपा सरकार ने CAA NRC का कानून बना दिया, जो की मुस्लिम समाज के साथ अन्याय है। उसी संसद से वक्फ बोर्ड में बड़े बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है, जिसको समाज के लोगों को भरोसे में लिए बिना ही नई कहानी लिखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मॉब लांचिंग पर कहा कि जब किसी गरीब, लाचार, असहाय मुस्लिम की भीड़ द्वारा बेहरमी से हत्या कर दी जाती है तब उसके साथ उस समाज का वोट लेने वाले 10 नेता भी खड़े नहीं होते और आज यह मुस्लिम समाज के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय है।
बिहार की सुमित्रा रानी साहा बनीं पहली महिला, सीएए के तहत मिली भारतीय नागरिकता

सुमित्रा रानी साहा बिहार की ऐसी पहली महिला हो गई है. जिनको भारतीय नागरिकता मिल गई है. सुमित्रा रानी साहा बांग्लादेश से करीब 20 साल की उम्र में 1985 में बिहार आई थी. अब तमाम औपचारिकता और नियम पूरे कर लेने के बाद उनको सीएए के तहत नागरिकता प्रदान कर दी गई है. एक लंबे इंतजार के बाद उन्होंने भारतीय नागरिकता को हासिल कर लिया है. नागरिकता मिलने के बाद रानी साहा का परिवार बहुत ही खुश नजर आ रहा है.

सुमित्रा रानी (60) साहा अपनी बुआ के साथ पांच या छह साल की उम्र में बांग्लादेश गई थी. उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. जिसके कारण वह बांग्लादेश में ही अपनी पढ़ाई करती रही. करीब 20 साल के बाद वह जनवरी 1985 में बांग्लादेश से अपने पिता के साथ अपने घर बिहार में कटिहार आई. सुमित्रा की शादी 1985 में आरा के रहने वाले परमेश्वर प्रसाद से हुई. शादी के बाद तब से लेकर अब तक सुमित्रा वीजा लेकर भारत में रह रही थी.

CAA के तहत मिली नागरिकता

हर साल उनको अपने वीजा के लिए परेशान होना पड़ता था. पिछले साल उन्होंने वीजा के लिए आवेदन किया, तो उन्हें सीएए के बारे में जानकारी मिली. हालांकि उनको करीब तीन साल तक वीजा का एक्सटेंशन भी मिला. सीएए की जानकारी मिलने के बाद सुमित्रा की बेटी ऐश्वर्या ने नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया और इस काम में लग गई. सुमित्रा की बेटी ऐश्वर्या कहती है कि अब हमें नागरिकता मिल गई है, लेकिन पहले आसपास के लोग हमें कई तरह की बातें कहते थे.

लोगों ने किया मानसिक टॉर्चर’

वह यह कहते थे कि हम लोग बांग्लादेश के रहने वाले हैं. आप लोगों को जेल भेज दिया जाएगा. कई प्रकार का मानसिक टॉर्चर किया गया, लेकिन अब हमें नागरिकता मिल गई है. यह हमारे लिए खुशी का लम्हा है. हमें भारत की नागरिकता जब तक नहीं मिली थी, तब तक किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिल पा रही थी. गैस कनेक्शन तक नहीं मिला था. लेकिन अब यह सारी सुविधाएं मिलने लगेगी.

ऐश्वर्या का यह भी कहना था कि सीएए हमारे जैसे लोगों के लिए एक जीवनदान जैसा है. अब हमें नागरिकता मिली है. अब हम सारे डॉक्यूमेंट बनवाएंगे और देश की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे. वहीं सेंसस ऑफ़ डायरेक्टर ऑपरेशन के तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार एम. रामचंद्रुडु, निदेशक, जनगणना- सह- नागरिक निबंधन कार्यालय, पटना की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सशक्त समिति ने भोजपुर जिले की सुमित्रा रानी साहा को नागरिकता प्रदान करने का निर्णय लिया.

40 साल पहले भारत आई थी सुमित्रा

60 वर्षीय सुमित्रा रानी साहा करीब 40 साल पहले बांग्लादेश से भारत आईं थी. उन्हें शुक्रवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई. प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीए पोर्टल पर सुमित्रा रानी साहा जिला- भोजपुर (बिहार) ने आवेदन किया था. आवेदन नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (सीसीए) के आधार संख्या IIIA अनुभाग के अंतर्गत 5(1)(सी) के तहत प्राप्त हुआ था.

बैठक में जारी किया नागरिकता प्रमाण पत्र

इसके बाद जिला स्तरीय समिति ने मूल्य निर्धारण के साथ अग्रसारित की गई थी. आवेदन के साथ उपलब्ध लाइसेंस प्राप्त पुरातत्वविदों की समिति ने एप्लीकेंट को प्रमाणपत्र प्रदान करने का निर्णय लिया. सीएए पोर्टल पर साइटिक्स शास्त्र जनरेट करने के बाद एप्लीकेंट को पोर्टल के माध्यम से ईमेल और एसएमएस से सूचना भेज दी जाती है. निदेशक जनगणना, सह- नागरिक निबंधन रामचन्द्रडु ने राजधानी के सचिवालय में शुक्रवार को निदेशक, नागरिक निबंधन के कार्यालय में बैठक हुई और नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किया गया. बैठक में राज्य के कई बड़े अधिकारी मौजूद रहें.

अमेरिकी रिपोर्ट ने भारत में अल्पसंख्यकों को खतरे में बताया, विदेश मंत्रालय ने कहा-पक्षपाती एजेंडा
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अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर भारत पर एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें भारत की सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वरिष्ठ नीति विश्लेषक सेमा हसन ने लिखा है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों पर हिंसक हमले होते हैं। धार्मिक अशांति फैलाने के लिए गलत जानकारी दी जाती है। इसके अलावा सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि रिपोर्ट में मुस्लिम, वक्फ संशोधन बिल गोहत्या विरोधी कानून की बात की गई है। इन सब के चलते आयोग ने देश को धार्मिक भेद-भाव वाले देशों के लिस्ट में नामित करने का आग्रह किया है। अमेरिकी सरकार के आयोग USCIRF (US Commission on International Religious Freedom) की ओर से 2 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), समान नागरिक संहिता (UCC), राज्यों में धर्मांतरण का विरोध और गोहत्या विरोधी कानून का जिक्र किया गया है। साथ ही कहा गया है कि इन कानूनों का मकसद भारत में अल्पसंख्यकों को टारगेट करना और उन्हें मताधिकार से वंचित रखना है। रिपोर्ट में आगे लिखा है, भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2024 में लगातार बदतर होती जा रही है। खासकर देश में राष्ट्रीय चुनाव होने से पहले और तुरंत बाद के महीनों में। लोगों को मारा गया, पीटा गया और लिंचिंग की गई। धार्मिक नेताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया। घरों और पूजा स्थलों को ध्वस्त कर दिया गया। ये घटनाएं धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन हैं। भारत सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून, गोहत्या कानून और आतंकवाद विरोधी जैसे कानून लागू करके धार्मिक समुदायों का दमन कर रही है। अपनी सलाना रिपोर्ट में USCIRF ने अमेरिकी विदेश विभाग से ये आग्रह किया है कि वो भारत में धार्मिक स्तर पर हो रहे उल्लंघनों को ध्यान में रखते हुए उसे विशेष चिंता वाले देश के रूप में शामिल करें। भारत ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। भारत ने इसे एक राजनीतिक एजेंडा वाला 'पक्षपाती संगठन' करार दिया। भारत ने इस रिपोर्ट को 'दुर्भावनापूर्ण' बताया। विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यूएससीआईआरएफ को अपने समय का ज्यादा इस्तेमाल अमेरिका में मानवाधिकारों के मुद्दे से निपटने में करना चाहिए। बता दें कि, ये पहली बार नहीं है जब अमेरिकी आयोग ने भारत के खिलाफ धर्म संबंधित ऐसा रिपोर्ट जारा किया है। इससे पहले भी उन्होंने ऐसा किया था। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच अच्छे संबंध होने की वजह से जो बाइडेन प्रशासन USCIRF द्वारा किए गए आग्रह को मानने से बचता रहा है।