कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

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आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का एलान, जानें पीस डील की अहम बातें

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फारस की खाड़ी में जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा।

ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार की ओर से समझौते की पुष्टि कर दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "सभी को समझौते की बधाई देते हुए मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं।"

ईरान ने क्या कहा है

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि की है। गरीबाबादी ने कहा है कि डील हो गई है लेकिन शुक्रवार को हस्ताक्षर होने तक तेहरान इसे लागू करना शुरू नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता तेहरान में कतर के प्रतिनिधि के साथ 14 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के बाद हुआ है। पाकिस्तान के अलावा कतर एक और अहम मध्यस्थ है।

समझौते के बाद शहबाज शरीफ का पोस्ट

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।"

US-ईरान शांति डील में क्या-क्या शामिल है?

1- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना

2- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा

3- दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा

4- अमेरिका ने यह वादा किया है कि वह ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना हटा लेगा

5- ईरान की 'व्यवस्थाओं' के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा

6- तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और उनसे होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी

7- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के वास्ते कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करना जरूरी होगा।

8- परमाणु मुद्दों और अमेरिका के प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों, साथ ही UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को पूरी तरह से हटाने के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत।

9- NPT के तहत परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे को ईरान का फिर से दोहराना।

10- बातचीत के दौरान अमेरिका ने वादा किया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

11- अंतिम बातचीत की 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस राशि का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाएगा।

12- समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।

13- अंतिम समझौते को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।

14- अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी नहीं हो जाता ईरान पर तेल प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।अंतिम समझौता केवल संवर्धित यूरेनियम और संवर्धन, प्रतिबंधों से राहत और ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहोंको समर्थन देने के बारे में चर्चा को एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

Empowering the Next Generation: Why Global Mentorship Matters for Women in MediaTech

The MediaTech sector is witnessing a transformation, and mentorship is at its heart.The Rise Mentoring Programme—headquartered in the UK with a global presence across North America, India, APAC, and the Middle East—is at the forefront of this shift. Jaswinder ‘Jassi’ Arora, founder of RVJ Media Tech LLP, recently highlighted the impact of this global initiative after completing the 2025 programme.

"The mentorship journey is about more than just skills; it's about building resilience and a global mindset," says Jassi. Her recent appearance on the Rise panel at the Amazon Gurgaon office showcased how mentorship from industry giants like AWS and Sony empowers women to take ownership of their professional trajectories. Having navigated diverse roles in media across West Bengal and the Northeast, Jassi is now paying it forward, encouraging women to break self-limitations. Her story proves that when global infrastructure meets individual ambition, the potential for women in technology is limitless.

Visit for more : https://linkedin.com/in/jaswinder-arora-088606168

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From Stories to Authority: Why Writing a Book Matters in Today’s Knowledge Economy

In a world overflowing with content, few mediums still carry the credibility, depth, and lasting influence of a book. While blogs, videos, and social media posts may capture attention momentarily, a book remains one of the most powerful ways to establish authority, share knowledge, and leave a meaningful impact. For professionals, entrepreneurs, and thought leaders, writing a book has evolved beyond a creative pursuit—it has become a strategic tool for personal and professional growth.

Few people understand this transformation better than Rajnish G. Shirsat, a publishing professional with over three decades of experience in the print and publishing industry. Having worked across global markets including India, Africa, Australia, Europe, the United States, and the United Kingdom, Shirsat has witnessed firsthand how books have continued to shape ideas, influence industries, and build reputations.

Over the years, his career has taken him across some of the world’s most prominent publishing events, including the London Book Fair, Frankfurt Buchmesse, BookExpo America, and the Bologna Children’s Book Fair. His exposure also extends to emerging publishing markets through book fairs and industry interactions in Kenya, Ghana, South Africa, and Nigeria. These experiences have allowed him to observe how publishing technologies have evolved—from traditional print production to digital publishing, global distribution, and eBook ecosystems.

Today, Shirsat channels this global experience through BookMyStory Publishing, a young but rapidly growing publishing house dedicated to helping individuals transform their ideas and experiences into professionally published books. Built on years of industry expertise and driven by a passionate team, BookMyStory provides end-to-end publishing services including manuscript formatting, editing, cover design, publishing, and distribution. Books published through the platform are made available across major marketplaces such as Amazon, Flipkart, Kindle, and even physical bookstores, with global visibility.

What makes BookMyStory particularly unique is the diversity of authors it serves. The platform works with corporate leaders from HR and marketing, CEOs, entrepreneurs from the SME sector, business coaches, consultants, trainers, and professionals from various industries who wish to share their insights with a wider audience. At the same time, the publishing house also welcomes storytellers, poets, and creative writers across genres including fiction, non-fiction, biographies, and self-help.

But why has writing a book become such a powerful tool in today’s professional landscape?

According to Shirsat, a book does something no other medium can—it creates curiosity while simultaneously building credibility. When someone publishes a book, it immediately elevates their perception in the eyes of readers, clients, and professional peers. A book positions the author as someone who has not only knowledge but also the clarity and discipline to organize and present that knowledge meaningfully.

In many ways, a book becomes a personal brand statement. It signals expertise, communicates values, and demonstrates thought leadership in a particular field. For entrepreneurs and professionals, this can translate into greater visibility, stronger credibility, and increased opportunities for speaking engagements, consulting, or business growth.

A book also serves as a powerful differentiator. In competitive industries where many professionals offer similar services, authorship creates distinction. When someone writes a book on their subject of expertise, they are no longer simply another professional—they become a recognized voice in their domain. This often allows them to stand apart from competitors and establish a stronger connection with their audience.

Beyond professional benefits, books also leave a legacy. They capture ideas, stories, and experiences that can influence readers long after the author has written them. In that sense, a book becomes both a personal milestone and a lasting contribution.

Recognizing that many people have the desire to write but do not know where to begin, BookMyStory has also developed a number of free tools on its website to guide aspiring authors. These include assessments designed to help individuals discover whether they have the potential to write a book, identify topics worth developing, and even learn how to craft a compelling preface—the first step in beginning the writing journey.

As the publishing industry continues to evolve, one thing remains clear: stories still matter, and books remain one of the most powerful ways to share them. Through BookMyStory Publishing, Rajnish G. Shirsat continues to help individuals transform their ideas into books that not only tell stories but also build influence, credibility, and lasting impact.

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक समझौता, तनावपूर्ण होते रिश्तों के बीच दोनों देशों में 10 साल की डिफेंस डील

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भारत और अमेरिका के बीच एक 10 वर्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस) में शामिल होने के लिए मलेशिया पहुंचे हैं। कुआलालंपुर में राजनाथ सिंह की अमेरिका के वॉर सचिव पीट हेगसेथ से मुलाकात हुई। इस दौरान वार्ता में अमेरिका और भारत के बीच प्रमुख रक्षा एग्रीमेंट पर मुहर लगी। इस वार्ता के दौरान डिफेंस एग्रीमेंट की रूपरेखा पर एक समझौते का आदान-प्रदान भी किया गया।

अमेरिका के युद्ध मंत्री ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि दोनों देशों के रक्षा संबंध इतने मजबूत कभी नहीं रहे। अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में बताया कि उनकी भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात हुई और एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ समझौता क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करेगा।

भारत-अमेरिका संबंध और सशक्त होंगे- राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ आज एक नया अध्याय शुरू होगा। मुझे विश्वास है कि भारत-अमेरिका संबंध और सशक्त होंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा स्तर के संवादों का प्रतीक है, जो बीते कुछ वर्षों में लगातार गहराते गए हैं।

भारत-अमेरिका में सुधर रहे रिश्ते

हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण नजर आए। पहले टैरिफ विवाद और फिर रूस से कच्चे तेल की खरीद के मुद्दे पर दोनों देश आमने-सामने आते दिखे। हालांकि, अब स्थितियां बदल रही हैं। अमेरिका और भारत के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए कई तरह के समझौते और बातचीत जारी है। माना जा रहा कि बढ़े हुए टैरिफ पर भी कोई फैसला हो सकता है। इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका के वॉर सेकेट्री पीट हेगसेथ के साथ वार्ता की। इस दौरान अहम समझौतों पर भी मुहर लगी है।

आज से शुरू हो गई ट्रंप के 50% टैरिफ की वसूली, जानें किस सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्‍त टैरिफ भी आज यानी बुधवार सुबह से लागू हो गया। अमेरिका ने पहले ही भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो 7 अगस्‍त से प्रभावी हो चुका है. इस तरह आज 27 अगस्‍त से भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लागू हो जाएगा। ट्रंप ने भारत पर यह 25 फीसदी का अतिरिक्‍त टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से लगाया है। ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से बार-बार धमकी दिए जाने के बावजूद भारत ने रूस से तेल की खरीद बंद नहीं की और यही वजह है कि 27 अगस्‍त से अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया है।

ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद भारत के कई उत्पादों का अमेरिका को होने वाला निर्यात महंगा हो जाएगा। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप के 50 फीसदी आयात शुल्क का भारत पर क्या असर पड़ेगा? देश के कौन से क्षेत्र इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं? इस फैसले से भारत से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले अधिकतर उत्पादों का वहां महंगा होना तय है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय निर्यातकों को झटका लग सकता है, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों का बड़ा खरीदार है। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी नागरिक भारतीय उत्पादों की जगह दूसरे देशों से कम टैरिफ दर पर आने वाले सामान को तरजीह दे सकते हैं।

कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्‍यादा मार पड़ेगी

ट्रंप के इस टैरिफ की मार से भारत को करीब 48.2 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा असर उन उद्योगों पर पड़ेगा जिनमें ज्यादा लोगों को काम मिलता है। इनमें कपड़ा, झींगा, चमड़ा, हीरे-जवाहरात, कारपेट और फर्नीचर शामिल हैं। इन चीजों का निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है। माना जा रहा है कि इस टैरिफ से कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्‍यादा मार पड़ेगी। भारत से हर साल अमेरिका को 10 अरब डॉलर (करीब 86 हजार करोड़ रुपये) के कपड़े का निर्यात होता है। भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका को निर्यात में अब उसे बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों का मुकाबला करना होगा। दूसरी तरफ दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों पर इस टैरिफ का कोई असर नहीं होगा।

भारत से होने वाला दो-तिहाई निर्यात होगा प्रभावित

जानकारों का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ से अमेरिका को होने वाले मर्केंडाइज एक्सपोर्ट की वैल्यू पिछले साल की तुलना में 40 से 45% कम हो सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। पिछले साल भारत ने अमेरिका को 87 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया था जो इस साल गिरकर $49.6 अरब रह सकता है। इसकी वजह यह है कि भारत से होने वाला दो-तिहाई निर्यात नए टैरिफ से प्रभावित होगा। कुछ मामलों में तो प्रभावी टैरिफ 60% तक होगा।

कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

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आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का एलान, जानें पीस डील की अहम बातें

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फारस की खाड़ी में जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा।

ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार की ओर से समझौते की पुष्टि कर दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "सभी को समझौते की बधाई देते हुए मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं।"

ईरान ने क्या कहा है

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि की है। गरीबाबादी ने कहा है कि डील हो गई है लेकिन शुक्रवार को हस्ताक्षर होने तक तेहरान इसे लागू करना शुरू नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता तेहरान में कतर के प्रतिनिधि के साथ 14 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के बाद हुआ है। पाकिस्तान के अलावा कतर एक और अहम मध्यस्थ है।

समझौते के बाद शहबाज शरीफ का पोस्ट

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।"

US-ईरान शांति डील में क्या-क्या शामिल है?

1- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना

2- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा

3- दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा

4- अमेरिका ने यह वादा किया है कि वह ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना हटा लेगा

5- ईरान की 'व्यवस्थाओं' के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा

6- तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और उनसे होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी

7- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के वास्ते कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करना जरूरी होगा।

8- परमाणु मुद्दों और अमेरिका के प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों, साथ ही UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को पूरी तरह से हटाने के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत।

9- NPT के तहत परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे को ईरान का फिर से दोहराना।

10- बातचीत के दौरान अमेरिका ने वादा किया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

11- अंतिम बातचीत की 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस राशि का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाएगा।

12- समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।

13- अंतिम समझौते को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।

14- अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी नहीं हो जाता ईरान पर तेल प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।अंतिम समझौता केवल संवर्धित यूरेनियम और संवर्धन, प्रतिबंधों से राहत और ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहोंको समर्थन देने के बारे में चर्चा को एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

Empowering the Next Generation: Why Global Mentorship Matters for Women in MediaTech

The MediaTech sector is witnessing a transformation, and mentorship is at its heart.The Rise Mentoring Programme—headquartered in the UK with a global presence across North America, India, APAC, and the Middle East—is at the forefront of this shift. Jaswinder ‘Jassi’ Arora, founder of RVJ Media Tech LLP, recently highlighted the impact of this global initiative after completing the 2025 programme.

"The mentorship journey is about more than just skills; it's about building resilience and a global mindset," says Jassi. Her recent appearance on the Rise panel at the Amazon Gurgaon office showcased how mentorship from industry giants like AWS and Sony empowers women to take ownership of their professional trajectories. Having navigated diverse roles in media across West Bengal and the Northeast, Jassi is now paying it forward, encouraging women to break self-limitations. Her story proves that when global infrastructure meets individual ambition, the potential for women in technology is limitless.

Visit for more : https://linkedin.com/in/jaswinder-arora-088606168

Empowering the Next Generation: Why Global Mentorship Matters for Women in MediaTech

Body: The MediaTech sector is witnessing a transformation, and mentorship is at its heart.The Rise Mentoring Programme—headquartered in the UK with a global presence across North America, India, APAC, and the Middle East—is at the forefront of this shift. Jaswinder ‘Jassi’ Arora, founder of RVJ Media Tech LLP, recently highlighted the impact of this global initiative after completing the 2025 programme.

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From Stories to Authority: Why Writing a Book Matters in Today’s Knowledge Economy

In a world overflowing with content, few mediums still carry the credibility, depth, and lasting influence of a book. While blogs, videos, and social media posts may capture attention momentarily, a book remains one of the most powerful ways to establish authority, share knowledge, and leave a meaningful impact. For professionals, entrepreneurs, and thought leaders, writing a book has evolved beyond a creative pursuit—it has become a strategic tool for personal and professional growth.

Few people understand this transformation better than Rajnish G. Shirsat, a publishing professional with over three decades of experience in the print and publishing industry. Having worked across global markets including India, Africa, Australia, Europe, the United States, and the United Kingdom, Shirsat has witnessed firsthand how books have continued to shape ideas, influence industries, and build reputations.

Over the years, his career has taken him across some of the world’s most prominent publishing events, including the London Book Fair, Frankfurt Buchmesse, BookExpo America, and the Bologna Children’s Book Fair. His exposure also extends to emerging publishing markets through book fairs and industry interactions in Kenya, Ghana, South Africa, and Nigeria. These experiences have allowed him to observe how publishing technologies have evolved—from traditional print production to digital publishing, global distribution, and eBook ecosystems.

Today, Shirsat channels this global experience through BookMyStory Publishing, a young but rapidly growing publishing house dedicated to helping individuals transform their ideas and experiences into professionally published books. Built on years of industry expertise and driven by a passionate team, BookMyStory provides end-to-end publishing services including manuscript formatting, editing, cover design, publishing, and distribution. Books published through the platform are made available across major marketplaces such as Amazon, Flipkart, Kindle, and even physical bookstores, with global visibility.

What makes BookMyStory particularly unique is the diversity of authors it serves. The platform works with corporate leaders from HR and marketing, CEOs, entrepreneurs from the SME sector, business coaches, consultants, trainers, and professionals from various industries who wish to share their insights with a wider audience. At the same time, the publishing house also welcomes storytellers, poets, and creative writers across genres including fiction, non-fiction, biographies, and self-help.

But why has writing a book become such a powerful tool in today’s professional landscape?

According to Shirsat, a book does something no other medium can—it creates curiosity while simultaneously building credibility. When someone publishes a book, it immediately elevates their perception in the eyes of readers, clients, and professional peers. A book positions the author as someone who has not only knowledge but also the clarity and discipline to organize and present that knowledge meaningfully.

In many ways, a book becomes a personal brand statement. It signals expertise, communicates values, and demonstrates thought leadership in a particular field. For entrepreneurs and professionals, this can translate into greater visibility, stronger credibility, and increased opportunities for speaking engagements, consulting, or business growth.

A book also serves as a powerful differentiator. In competitive industries where many professionals offer similar services, authorship creates distinction. When someone writes a book on their subject of expertise, they are no longer simply another professional—they become a recognized voice in their domain. This often allows them to stand apart from competitors and establish a stronger connection with their audience.

Beyond professional benefits, books also leave a legacy. They capture ideas, stories, and experiences that can influence readers long after the author has written them. In that sense, a book becomes both a personal milestone and a lasting contribution.

Recognizing that many people have the desire to write but do not know where to begin, BookMyStory has also developed a number of free tools on its website to guide aspiring authors. These include assessments designed to help individuals discover whether they have the potential to write a book, identify topics worth developing, and even learn how to craft a compelling preface—the first step in beginning the writing journey.

As the publishing industry continues to evolve, one thing remains clear: stories still matter, and books remain one of the most powerful ways to share them. Through BookMyStory Publishing, Rajnish G. Shirsat continues to help individuals transform their ideas into books that not only tell stories but also build influence, credibility, and lasting impact.

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक समझौता, तनावपूर्ण होते रिश्तों के बीच दोनों देशों में 10 साल की डिफेंस डील

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भारत और अमेरिका के बीच एक 10 वर्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस) में शामिल होने के लिए मलेशिया पहुंचे हैं। कुआलालंपुर में राजनाथ सिंह की अमेरिका के वॉर सचिव पीट हेगसेथ से मुलाकात हुई। इस दौरान वार्ता में अमेरिका और भारत के बीच प्रमुख रक्षा एग्रीमेंट पर मुहर लगी। इस वार्ता के दौरान डिफेंस एग्रीमेंट की रूपरेखा पर एक समझौते का आदान-प्रदान भी किया गया।

अमेरिका के युद्ध मंत्री ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि दोनों देशों के रक्षा संबंध इतने मजबूत कभी नहीं रहे। अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में बताया कि उनकी भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात हुई और एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ समझौता क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करेगा।

भारत-अमेरिका संबंध और सशक्त होंगे- राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ आज एक नया अध्याय शुरू होगा। मुझे विश्वास है कि भारत-अमेरिका संबंध और सशक्त होंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा स्तर के संवादों का प्रतीक है, जो बीते कुछ वर्षों में लगातार गहराते गए हैं।

भारत-अमेरिका में सुधर रहे रिश्ते

हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण नजर आए। पहले टैरिफ विवाद और फिर रूस से कच्चे तेल की खरीद के मुद्दे पर दोनों देश आमने-सामने आते दिखे। हालांकि, अब स्थितियां बदल रही हैं। अमेरिका और भारत के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए कई तरह के समझौते और बातचीत जारी है। माना जा रहा कि बढ़े हुए टैरिफ पर भी कोई फैसला हो सकता है। इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका के वॉर सेकेट्री पीट हेगसेथ के साथ वार्ता की। इस दौरान अहम समझौतों पर भी मुहर लगी है।

आज से शुरू हो गई ट्रंप के 50% टैरिफ की वसूली, जानें किस सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्‍त टैरिफ भी आज यानी बुधवार सुबह से लागू हो गया। अमेरिका ने पहले ही भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो 7 अगस्‍त से प्रभावी हो चुका है. इस तरह आज 27 अगस्‍त से भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लागू हो जाएगा। ट्रंप ने भारत पर यह 25 फीसदी का अतिरिक्‍त टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से लगाया है। ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से बार-बार धमकी दिए जाने के बावजूद भारत ने रूस से तेल की खरीद बंद नहीं की और यही वजह है कि 27 अगस्‍त से अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया है।

ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद भारत के कई उत्पादों का अमेरिका को होने वाला निर्यात महंगा हो जाएगा। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप के 50 फीसदी आयात शुल्क का भारत पर क्या असर पड़ेगा? देश के कौन से क्षेत्र इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं? इस फैसले से भारत से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले अधिकतर उत्पादों का वहां महंगा होना तय है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय निर्यातकों को झटका लग सकता है, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों का बड़ा खरीदार है। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी नागरिक भारतीय उत्पादों की जगह दूसरे देशों से कम टैरिफ दर पर आने वाले सामान को तरजीह दे सकते हैं।

कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्‍यादा मार पड़ेगी

ट्रंप के इस टैरिफ की मार से भारत को करीब 48.2 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा असर उन उद्योगों पर पड़ेगा जिनमें ज्यादा लोगों को काम मिलता है। इनमें कपड़ा, झींगा, चमड़ा, हीरे-जवाहरात, कारपेट और फर्नीचर शामिल हैं। इन चीजों का निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है। माना जा रहा है कि इस टैरिफ से कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्‍यादा मार पड़ेगी। भारत से हर साल अमेरिका को 10 अरब डॉलर (करीब 86 हजार करोड़ रुपये) के कपड़े का निर्यात होता है। भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका को निर्यात में अब उसे बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों का मुकाबला करना होगा। दूसरी तरफ दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों पर इस टैरिफ का कोई असर नहीं होगा।

भारत से होने वाला दो-तिहाई निर्यात होगा प्रभावित

जानकारों का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ से अमेरिका को होने वाले मर्केंडाइज एक्सपोर्ट की वैल्यू पिछले साल की तुलना में 40 से 45% कम हो सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। पिछले साल भारत ने अमेरिका को 87 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया था जो इस साल गिरकर $49.6 अरब रह सकता है। इसकी वजह यह है कि भारत से होने वाला दो-तिहाई निर्यात नए टैरिफ से प्रभावित होगा। कुछ मामलों में तो प्रभावी टैरिफ 60% तक होगा।