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राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान जारी, बिहार पर टिकी सबकी नजर

#rajyasabhaelection2026votingresult 

तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान है। जिनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इस चुनाव में देश की राजनीति के हालात पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के समीकरण सीधे केंद्र की नीतियों और विधायी शक्ति पर असर डालते हैं। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं।

इस बार बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में दिलचस्प मुकाबला दिख रहा है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन इन सभी 5 सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। एनडीए की ओर से प्रमुख उम्मीदवारों में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार, बीजेपी नेता नितिन नवीन और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (जेडीयू) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार भी मैदान में हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए समर्थन जुटाने में जुटा है।

ओडिशा की चार सीटों पर मुकाबला

ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है और बीजेडी एक सीट। ऐसे में मुकाबला चौथे सीट को लेकर तेज हो गया है। इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक सदस्य सीपीआई (एम) का है। चुनाव का समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो सत्ताधारी भाजपा और न ही मुख्य विपक्षी बीजद के पास चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक संख्या है। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

हरियाणा में मुकाबला दिलचस्प

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव मैदान में हैं। राज्यसभा पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत है।

जहां बंद होता है कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला, वहां से शुरू होता है हमारा काम”, असम में बोले पीएम मोदी

#pmmoditarget_congress

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को असम के सिलचर में 23500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। पीएम मोदी ने शिलांग-सिचलर कॉरिडोर के भूमि पूजन के बाद कहा कि कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला जहां बंद होता है, वहां से हमारा काम शुरू होता है।

कांग्रेस ने नॉर्थ-ईस्ट को दिल्ली से दूर रखा

असम के सिलचर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ-ईस्ट को दिल्ली से और दिल से, दोनों से ही दूर रखा। कांग्रेस ने नॉर्थ-ईस्ट को एक तरह से भुला दिया था, लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ-ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है।

भाजपा ने नॉर्थ-ईस्ट को कनेक्ट किया

प्रधानमंत्री ने कहा, कांग्रेस ने एक तरह से पूर्वोत्तर को भूला दिया, लेकिन भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने नॉर्थ-ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है। आज नॉर्थ-ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है। दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।

बराक वैली को बेहाल करने में कांग्रेस की बड़ी भूमिका

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही बराक वैली को बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब देश आजाद हुआ तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी, जिसने बराक घाटी का समुद्र से संपर्क कट गया। जो बराक वैली कभी ट्रेड रूट और एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जानी जाती थी, उस बराक वैली से उसकी ताकत ही छीन ली गई। आजादी के बाद भी दशकों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हुआ।

भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका', रूसी तेल खरीद को लेकर ईरान के मंत्री का बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य मोर्चे पर तो लड़ाई जारी है, जुबानी जंग भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन, भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा हैष वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान युद्ध रूस की ऑयल इंडस्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना

अरगची ने अपनी पोस्ट में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान पर 'अवैध युद्ध' का साथ देकर सोचा था कि अमेरिका उसके बदले रूस के खिलाफ उनका साथ देगा, लेकिन अब वे निराश हैं। मंत्री ने लिखा, 'यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से अमेरिका रूस के खिलाफ उसकी मदद करेगा। यह बहुत दयनीय है।'

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने दी छूट

अराघची की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगा प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वित्त विभाग ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की मंजूरी देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यह मंजूरी केवल उस रूसी तेल के लिए होगी जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है। अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी।

सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द, 170 दिन बाद होंगे जेल से रिहा, NSA केस भी हटा

#sonamwangchuknsadetentionrevokedhomeministryannouncesrelease

लद्दाख में भड़की हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को केंद्र सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।सरकार ने अपनी प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस फैसले से सोनम वांगचुक को अब तुरंत रिहाई मिल सकती है।

लद्दाख में शांति और स्थिरता को लेकर सरकार का फैसला

सरकार का कहना है कि यह फैसला लद्दाख में शांति और स्थिरता का माहौल मजबूत करने और सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी हितधारकों के साथ सार्थक बातचीत संभव हो सके। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक की हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार ने यह भी दोहराया कि लद्दाख की सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे।

लेह में हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को हुए गिरफ्तार

24 सितंबर 2025 को लेह हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं। इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। करीब साढ़े पांच महीने हो चुके हैं। करीब 170 दिन बाद रिहा होंगे।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा सुधार और स्थानीय पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अभियान चलाए हैं। पिछले कुछ समय से वे लद्दाख से जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों को लेकर भी मुखर रहे हैं। खास तौर पर लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर उन्होंने कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए थे।

भारत के लिए राहत की खबर, ईरान में होर्मुज से LPG लेकर सुरक्षित निकला शिवालिक

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब एशिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने से भारत समेत पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत तमाम एशियाई देशों में ईंधन की कमी और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ गई है। इस बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। भारत के लोगों को अब एलपीजी गैस की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

कुछ दिनों में शिवालिक जहाज भारत पहुंच जाएगा

ईरान के होर्मुज स्ट्रेट से 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी से लदा भारतीय जहाज, शिवालिक पार कर गया है। भारत के टैंकर शिवालिक ने होर्मुज़ स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर लिया है। टैंकर शिवालिक पर 40 हज़ार मीट्रिक टन LPG लदी है और ये टैंकर अगले कुछ दिनों में भारत पहुंच जाएगा। इसके साथ ही एक और एलपीजी से भरा टैंकर भारत रवाना होगा, इसकी भी अनुमति मिल गई है। इस तरह से दो शिप भारत आएंगे।

पीएम मोदी के ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत के बाद राहत

भारत के लोगों के लिए ये बड़ी राहत की खबर है। इससे पहले पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से इस मुद्दे पर बात की थी। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत सकारात्मक होने के बाद ही ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति दी है।

देश में गैस की किल्लत से सरकार का इनकार

बता दें कि पिछले एक सप्ताह से देश में एलपीजी गैस की किल्लत है। गैस एजेंसी के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतार भी देखी गई। अभी भी देश में कई अलग-अलग जगहों से गैस की किल्लत होन की खबर सामने आ रही है। हालांकि, भारत सरकार ने शुरू से ही गैस की किल्लत होने से इनकार किया है। सरकार ने लोगों को भरोसा दिया कि ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा है कि गलत सूचनाओं के कारण लोग घबराकर बुकिंग और जमाखोरी करने लगे हैं। घरेलू एलपीजी डिलीवरी का औसत चक्र लगभग ढाई दिन का है।

कोई नौकरी नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा', पीरियड्स लीव पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं कर्मचारियों और छात्राओं के लिए देशभर में मासिक धर्म अवकाश नीति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ऐसा करने से अनजाने में रूढ़िवादिता को बढ़ावा मिलेगा, इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं।

सीजेआई सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है।

पीरियड्स लीव को अनिवार्य बनाने को लेकर चेताया

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने दलील दी कि कुछ राज्य सरकारों और संगठनों ने इस दिशा में पहले ही कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि केरल ने स्कूलों में ऐसी छूट दी है और कई निजी कंपनियों ने स्वेच्छा से मासिक धर्म अवकाश नीतियां लागू की हैं। इस दलील के जवाब में, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नियोक्ताओं द्वारा स्वैच्छिक उपाय स्वागत योग्य हैं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने आगाह किया कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य बनाने के अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं।

महिलाओं के विकास क्या होगा असर?

सीजेआई ने कहा, स्वेच्छा से अवकाश दिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन जैसे ही आप कहेंगे कि यह कानून के तहत अनिवार्य है तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देगा। उन्हें न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों में कोई नहीं लेगा; उनका करियर खत्म हो जाएगा। पीठ ने ऐसी व्यवस्थाओं के कार्यस्थल पर प्रभाव और महिलाओं की पेशेवर प्रगति पर पड़ने वाले संभावित असर को भी रेखांकित किया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव, दोनों सदनों में दिया नोटिस

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विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का नोटिस संसद के दोनों सदनों में सौंप दिया है। PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की ओर से महाभियोग प्रस्ताव से संबंधित नोटिस सौंप दिए गए हैं।

लोकसभा के 130, राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा ने सूत्रों के हवाले से बताया कि लोकसभा के 130 सांसदों ने और राज्यसभा के 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष के एक नेता ने बताया कि सांसदों ने नोटिस को लेकर काफी उत्साह दिखाया और आवश्यक संख्या पूरी हो जाने के बाद भी गुरुवार को कई सांसदों हस्ताक्षर किए। नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।

नोटिस में विपक्ष ने क्या आरोप लगाया?

बताया जा रहा है कि करीब 10 पन्नों वाले नोटिस में 7 बिंदु गिनाए गए हैं, जिनके आधार पर ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। विपक्षी दलों ने कई मौकों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मदद करने का आरोप लगाया है। खासकर मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है।

क्या होती है सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया ?

संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है. इस अनुच्छेद के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए वैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की होती है। सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को उसके पद से हटाने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 124 (4) में किया गया है। इसमें साफ किया गया है कि जज को केवल दो आधार पर ही हटाया जा सकता है - दुर्व्यवहार और कार्य निष्पादन में अक्षमता। 124 (5) के मुताबिक संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत के द्वारा एक प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति को किसी जज को हटाने की सिफारिश की जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया का कोई नाम तो नहीं दिया गया है लेकिन आम तौर पर इसे महाभियोग प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है।

पीएम मोदी के मुरीद हुए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम, बोले-एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में, फिर भी अहंकार नहीं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता लगातार शिखर पर है। पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता के रूप में उभरे हैं। मोदी जितने आम जनता के बीच पसंद किए उतने ही वैश्विक स्तर के नेताओं के बीच भी उन्होंने अपना स्थान बनाया है। अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद, पीएम मोदी ने खुद को ‘सत्ता के अहंकार’ (घमंड) से दूर रखा है।

मोदी के नेतृत्व की सराहना

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने दिल्ली में होने वाले 'रायसीना डायलॉग' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कार्यक्रम साल 2016 से हर मार्च में आयोजित हो रहा है। यह एक सोच का शानदार नतीजा है। एबॉट ने इसकी तुलना दुनिया के अन्य बड़े मंचों से की। उन्होंने इसे स्विट्जरलैंड के दावोस और चीन के बोआओ फोरम से बेहतर बताया।

'रायसीना डायलॉग' को बताया दावोस से बेहतर

एबॉट ने कहा, “2016 से हर मार्च में दिल्ली में रायसीना डायलॉग होता आ रहा है। यह नरेंद्र मोदी के लंबे समय तक विदेश मंत्री रहे सुब्रह्मण्यम जयशंकर का विचार है। दूसरे ग्लोबल जमावड़ों की तरह, यह राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स, जाने-माने बिजनेसमैन, जाने-माने पत्रकारों और थिंक टैंक प्रमुखों को जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए एक साथ लाता है; लेकिन यह दावोस से बेहतर है क्योंकि यह असल में मेजबानी करने वाली सरकार की सराहना करने का अभियान नहीं है।”

मोदी में दूसरों को सुनने का बड़ा गुण- एबॉट

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए एबॉट ने कहा, मोदी दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं। इसके बावजूद उनमें दूसरों को सुनने का बड़ा गुण है। वे हर साल मुख्य अतिथि को सुनने के लिए कार्यक्रम में बैठते हैं, लेकिन खुद भाषण नहीं देते। पिछले साल उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति को पूरे धैर्य के साथ सुना। एबॉट ने कहा कि शायद एक हिंदू संन्यासी के रूप में बिताए समय की वजह से मोदी में सत्ता का अहंकार नहीं आया है। वे एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में हैं, फिर भी बहुत विनम्र हैं।

भारत के कम लोकतांत्रिक होने के दावे को किया खारिज

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने कुछ इंटरनेशनल ऑब्जर्वर की इस आलोचना को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के तहत भारत कम लोकतांत्रिक हो गया है। उन्होंने कहा, “जहां तक इस सोच की बात है कि भाजपा के राज में भारत किसी तरह एक तानाशाही देश बन गया है, यह पूरी तरह से बकवास है। जिस देश में आजाद और निष्पक्ष चुनाव, पूरी तरह से आजाद मीडिया और मजबूती से आजाद न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का गंभीर खतरा नहीं है। और कोई भी तानाशाही ऐसी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस नहीं करेगी जहां कुछ भी मना न हो और किसी को चुप न कराया जाए। आखिरकार, इस साल की बातचीत में इजरायली विदेश मंत्री (वर्चुअली) और ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री दोनों ने हिस्सा लिया।”

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, बोले- बातचीत से हो सामाधान

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पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग जारी हैं। ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में खलबली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल संकट भी है। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत की है।

मौजूदा हालात पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर हालात और मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिटीजन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पूरे क्षेत्र की स्थिरता और शांति के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

संवाद और कूटनीति से हल निकालने की अपील

पीएम मोदी ने बताया, 'भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मैंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संवाद, कूटनीति का आग्रह किया।'

पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से की बात

पिछले दस दिनों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से भी बातचीत की है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए संयुक्त हमले के बाद से पश्चिम एशिया में संकट गहरा रहे संकट के बीच ये बातचीत हुई है। गौरतलब है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले करते हुए इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इन हमलों का असर दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्रों के आसपास भी देखा गया है।

संसद के नियम किसी भी व्यक्ति से सर्वोपरि, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों”, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद बोले ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया। इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने वापसी के बाद सदन को संबोधित किया।

सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार रखे-ओम बिरला

स्पीकर ओम बिरला ने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और उम्मीदों को लेकर सदन में आता है और उनकी कोशिश हमेशा रही है कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार खुलकर रख सकें।

स्पीकर ने बताया क्यों लेने पड़े मुश्किल फैसले

इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है। बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े।

यह आसन लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधि-ओम बिरला

उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिन में सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया। हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यही विशेषता है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है, यह लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।