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CJI सूर्यकांत ने UAPA कानून पर कही बड़ी बात, उमर खालिद जैसे मामलों मे देरी पर दिया ये जवाब

#cjijusticesuryakantonuapadelhiriotscase

दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है।

यूएपीए मामले पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह संस्थान के रजत जयंती समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी। किसी खास मामले या आरोपी का जिक्र किए बिना, सीजेआई ने कहा कि यूएपीए एक ऐसा मामला है जिस पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत है।

मामलों का शीघ्र निपटारा ही विवाद का प्रभावी समाधान-सीजेआई

देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्‍सर ही सवाल उठते रहते हैं। खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं। इन सबके बीच सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है।

विशेष अदालतों से बढ़ी उम्मीदें

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

एसआरआई पर विपक्ष एकजुट, 23 पार्टियों ने सीजेआई सूर्यकांत को लिखी चिट्ठी

#sirprocess23oppositionpartieswrittentocjisurya-kant

चुनाव आयोग की तरफ से कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्ष एकजुट नजर आ रहै है। इस मामले में 23 राजनीतिक दलों और 1 निर्दलीय सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।

सीजेआई को विपक्ष का ज्वाइंट लेटर

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। कांग्रेस सांसद ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, '8 जून, 2026 को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में 21 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने हिस्सा लिया था। बैठक में मुख्य न्यायाधीश को एक जाइंट लेटर भेजने का फैसला किया गया था। इस लेटर को भेजने का मकसद चुनाव आयोग की 'एसआईआर' प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों की तरफ ध्यान आकर्षित करना था।'

23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के हस्ताक्षर

जयराम रमेश ने आगे लिखा, 'इसी फैसले के तहत, आज (30 जून) को मुख्य न्यायाधीश को एक संयुक्त पत्र भेज दिया गया है, जिस पर अब 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष के सभी दल एकजुटता, एकता और प्रतिरोध की भावना के साथ मजबूती से एक साथ खड़े हैं।'

इन नेताओं ने किए हस्ताक्षर

जानकारी के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत को विपक्षी दलों की ओर से भेजी गई चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों में, कांग्रेस से राहुल गांधी, टीएमसी से ममता बनर्जी, आरजेडी से तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत के नाम शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष की चिट्ठी में क्या बातें लिखी गई हैं, यह बात अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

एसआईआर के मुद्दे पर एकजुट हुआ विपक्ष

सीजेआई को चिट्ठी लिखने के मामले में विपक्ष एक बार फिर साथ आ गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाकर 2025 में इंडी गठबंधन से किनारा कर लिया था। वहीं हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस जिस तरह से पाला बदलकर सीएम सी जोसेफ विजय की टीवीके के साथ जाकर सरकार में शामिल हो गई, उसके बाद डीएमके ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलकर इंडी अलायंस से दूरी बना ली थी।

हेमन्त सोरेन ने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी, रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

हरदोई के हार्दिक की उड़ान, चेन्नई में किया हरदोई का नाम रोशन
पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की मौजूदगी में हार्दिक गुप्ता को मिली  डिग्री
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रितेश मिश्रा
हरदोई* । जनपद के लिए गर्व का क्षण तब आया जब हरदोई निवासी हार्दिक गुप्ता को देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आईएफएमआर (IFMR)krea यूनिवर्सिटी द्वारा फाइनेंशियल मैनेजमेंट रिसर्च की डिग्री से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल हार्दिक और उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे हरदोई जनपद के लिए गौरव का विषय बन गई है।
चेन्नई स्थित म्यूजिक एकेडमी, टीटीके रोड में 13 जून को आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में हार्दिक को यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार पद्म भूषण से सम्मानित कौशिक बसु, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ सत्यनारायण आर. चक्रवर्ती, यूनिवर्सिटी के चांसलर लक्ष्मी नारायण तथा वाइस चांसलर डॉ. निर्मला राव सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
दीक्षांत समारोह के दौरान वाइस चांसलर डॉ. निर्मला राव ने हार्दिक गुप्ता को फेलोशिप डिग्री प्रदान की। हार्दिक, यूपी के हरदोई में लखनऊ रोड निवासी वरिष्ठ पत्रकार पी.के. गुप्ता ‘बबलू’ के पुत्र हैं। अपनी सफलता पर हार्दिक ने इसका श्रेय अपने गुरुजनों, माता-पिता और भाई-बहनों को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग ने इस मुकाम तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कठिन परिश्रम और निरंतर अध्ययन के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है।
गौरतलब है कि कैट (CAT) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद हार्दिक को वर्ष 1971 में स्थापित प्रतिष्ठित आईएफएमआर संस्थान में प्रवेश मिला था। उनकी इस सफलता से परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है। जिले के शिक्षाविदों और सामाजिक लोगों ने भी इसे हरदोई के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए हार्दिक को शुभकामनाएं दी हैं।
इसे इतनी भावुकता से न लें..' कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बोले सीजेआई

#cjisuryakantonpilfiledagainstcockroachjanatapartydonttakeitsosentimentally 

कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इसमें पार्टी की गतिविधियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में आरोप है कि संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल कर उनका व्यावसायिक फायदा उठा रहा है। PIL में फेक वकीलों की सीबीआई जांच की भी अपील की गई। इस जनहित याचिका पर भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा है कि इस मामले पर इतनी ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है।

सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने सीजेआई की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद न्यापालिका को बदनाम करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया जा रहा है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मुद्दे को इतना भावनात्मक तरीके से न लें।

उचित समय पर नियमानुसार होगी सुनवाई-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका की जल्द सुनवाई की मांग पर कहा कि ऐसी कोई गंभीर तात्कालिकता नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय उचित समय पर इसकी नियमानुसार सुनवाई करेगा। जनहित याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि अदालत में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए और फर्जी वकीलों की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की जाए। इसी मामले पर एक अन्य जनहित याचिका में मुख्य न्यायाधीश की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी के बाद उभरे व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। 

सीजेआई की टिप्पणी पर लॉन्च हुई सीजेपी

बता दें कि 15 मई, 2026 को सीजेआई सूर्यकांत की अदालत में वकीलों की फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई हो रही थी। एक वकील ने सीनियर वकील का दर्जा पाने के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने देश के उन कुछ चुनिंदा बेरोजगारों की बात की, जो बिना जिम्मेदारी के बात-बात पर सिस्टम को निशाना बनाते हैं। ऐसे कुछ बेरोजगारों के लिए सीजेआई ने ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल का। सीजेआई की इसी टिप्पणी को अमेरिका के बोस्टन में बैठे पुणे के रहने वाले एक भारतीय अभिजीत दीपके ने हथियार बनाया और अपने इंस्टाग्राम पोर्टल के जरिए व्यंग के इरादे से कॉकरोच जनता पार्टी नाम का मूवमेंट लॉन्च कर दिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर यह मूवमेंट फॉलोअर्स के मामले में बहुत ही सफल अभियान साबित हुआ और आज इसके फॉलोअरों की संख्या 23 मिलियन के करीब पहुंच चुकी है।

कौन से ‘सीजेपी’ बनाने वाले अभिजीत दीपके

30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत आप के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए आप छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। अभिजीत किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर एक्स अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने की यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की वकालत, जानें क्या कहा?

#supreme_court_backs_idea_of_uniform_civil_code

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ प्रावधानों को महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एक तरीका समान नागरिक संहिता यानी कि यूसीसी लागू करना भी हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जो महिलाओं को पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार नहीं देते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण से पूछा कि क्या अदालत पर्सनल लॉ की संवैधानिक वैधता की जांच कर सकती है? जस्टिस बागची ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में माना गया था कि पर्सनल लॉ को संविधान की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता।

बेंच ने यह भी पूछा कि अगर अदालत शरीयत के उत्तराधिकार नियमों को रद्द कर दे, तो क्या इससे कानूनी शून्य पैदा नहीं हो जाएगा, क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई अलग वैधानिक कानून नहीं है। सीजेआई ने चिंता जताते हुए कहा कि सुधार की जल्दबाज़ी में कहीं ऐसा न हो कि हम मुस्लिम महिलाओं को मौजूदा अधिकारों से भी वंचित कर दें।

इस पर वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यदि शरीयत के प्रावधान हटते हैं तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू हो सकता है। अदालत यह घोषित कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि विरासत का अधिकार एक सिविल राइट है, इसे धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के तहत “आवश्यक धार्मिक प्रथा” नहीं माना जा सकता। भूषण ने अपने तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक फैसले का हवाला दिया, जिसमें तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराया गया था।

मुस्लिम महिलाओं के लिए समान उत्तराधिकार अधिकारों की मांग करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि देश में सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करना है। कोर्ट ने आगे कहा, “क्या हम पर्सनल लॉ पर आधारित सभी द्विविवाह संबंधों को अमान्य घोषित कर सकते हैं या नहीं। इसलिए हमें मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा।” CJI सूर्यकांत ने कहा कि जैसा कि सही कहा गया है, इसका उत्तर समान नागरिक संहिता है।

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आज बैंकों में हड़ताल, सरकारी बैंकों का कामकाज रहेगा ठप

रायपुर। अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दो दिन की छुट्टी के बाद आज यानी 27 जनवरी को देशभर में बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी।

CJI सूर्यकांत ने UAPA कानून पर कही बड़ी बात, उमर खालिद जैसे मामलों मे देरी पर दिया ये जवाब

#cjijusticesuryakantonuapadelhiriotscase

दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है।

यूएपीए मामले पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह संस्थान के रजत जयंती समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी। किसी खास मामले या आरोपी का जिक्र किए बिना, सीजेआई ने कहा कि यूएपीए एक ऐसा मामला है जिस पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत है।

मामलों का शीघ्र निपटारा ही विवाद का प्रभावी समाधान-सीजेआई

देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्‍सर ही सवाल उठते रहते हैं। खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं। इन सबके बीच सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है।

विशेष अदालतों से बढ़ी उम्मीदें

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

एसआरआई पर विपक्ष एकजुट, 23 पार्टियों ने सीजेआई सूर्यकांत को लिखी चिट्ठी

#sirprocess23oppositionpartieswrittentocjisurya-kant

चुनाव आयोग की तरफ से कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्ष एकजुट नजर आ रहै है। इस मामले में 23 राजनीतिक दलों और 1 निर्दलीय सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।

सीजेआई को विपक्ष का ज्वाइंट लेटर

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। कांग्रेस सांसद ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, '8 जून, 2026 को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में 21 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने हिस्सा लिया था। बैठक में मुख्य न्यायाधीश को एक जाइंट लेटर भेजने का फैसला किया गया था। इस लेटर को भेजने का मकसद चुनाव आयोग की 'एसआईआर' प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों की तरफ ध्यान आकर्षित करना था।'

23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के हस्ताक्षर

जयराम रमेश ने आगे लिखा, 'इसी फैसले के तहत, आज (30 जून) को मुख्य न्यायाधीश को एक संयुक्त पत्र भेज दिया गया है, जिस पर अब 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष के सभी दल एकजुटता, एकता और प्रतिरोध की भावना के साथ मजबूती से एक साथ खड़े हैं।'

इन नेताओं ने किए हस्ताक्षर

जानकारी के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत को विपक्षी दलों की ओर से भेजी गई चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों में, कांग्रेस से राहुल गांधी, टीएमसी से ममता बनर्जी, आरजेडी से तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत के नाम शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष की चिट्ठी में क्या बातें लिखी गई हैं, यह बात अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

एसआईआर के मुद्दे पर एकजुट हुआ विपक्ष

सीजेआई को चिट्ठी लिखने के मामले में विपक्ष एक बार फिर साथ आ गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाकर 2025 में इंडी गठबंधन से किनारा कर लिया था। वहीं हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस जिस तरह से पाला बदलकर सीएम सी जोसेफ विजय की टीवीके के साथ जाकर सरकार में शामिल हो गई, उसके बाद डीएमके ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलकर इंडी अलायंस से दूरी बना ली थी।

हेमन्त सोरेन ने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी, रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

हरदोई के हार्दिक की उड़ान, चेन्नई में किया हरदोई का नाम रोशन
पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की मौजूदगी में हार्दिक गुप्ता को मिली  डिग्री
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रितेश मिश्रा
हरदोई* । जनपद के लिए गर्व का क्षण तब आया जब हरदोई निवासी हार्दिक गुप्ता को देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आईएफएमआर (IFMR)krea यूनिवर्सिटी द्वारा फाइनेंशियल मैनेजमेंट रिसर्च की डिग्री से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल हार्दिक और उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे हरदोई जनपद के लिए गौरव का विषय बन गई है।
चेन्नई स्थित म्यूजिक एकेडमी, टीटीके रोड में 13 जून को आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में हार्दिक को यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार पद्म भूषण से सम्मानित कौशिक बसु, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ सत्यनारायण आर. चक्रवर्ती, यूनिवर्सिटी के चांसलर लक्ष्मी नारायण तथा वाइस चांसलर डॉ. निर्मला राव सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
दीक्षांत समारोह के दौरान वाइस चांसलर डॉ. निर्मला राव ने हार्दिक गुप्ता को फेलोशिप डिग्री प्रदान की। हार्दिक, यूपी के हरदोई में लखनऊ रोड निवासी वरिष्ठ पत्रकार पी.के. गुप्ता ‘बबलू’ के पुत्र हैं। अपनी सफलता पर हार्दिक ने इसका श्रेय अपने गुरुजनों, माता-पिता और भाई-बहनों को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग ने इस मुकाम तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कठिन परिश्रम और निरंतर अध्ययन के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है।
गौरतलब है कि कैट (CAT) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद हार्दिक को वर्ष 1971 में स्थापित प्रतिष्ठित आईएफएमआर संस्थान में प्रवेश मिला था। उनकी इस सफलता से परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है। जिले के शिक्षाविदों और सामाजिक लोगों ने भी इसे हरदोई के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए हार्दिक को शुभकामनाएं दी हैं।
इसे इतनी भावुकता से न लें..' कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बोले सीजेआई

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कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इसमें पार्टी की गतिविधियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में आरोप है कि संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल कर उनका व्यावसायिक फायदा उठा रहा है। PIL में फेक वकीलों की सीबीआई जांच की भी अपील की गई। इस जनहित याचिका पर भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा है कि इस मामले पर इतनी ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है।

सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने सीजेआई की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद न्यापालिका को बदनाम करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया जा रहा है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मुद्दे को इतना भावनात्मक तरीके से न लें।

उचित समय पर नियमानुसार होगी सुनवाई-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका की जल्द सुनवाई की मांग पर कहा कि ऐसी कोई गंभीर तात्कालिकता नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय उचित समय पर इसकी नियमानुसार सुनवाई करेगा। जनहित याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि अदालत में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए और फर्जी वकीलों की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की जाए। इसी मामले पर एक अन्य जनहित याचिका में मुख्य न्यायाधीश की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी के बाद उभरे व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। 

सीजेआई की टिप्पणी पर लॉन्च हुई सीजेपी

बता दें कि 15 मई, 2026 को सीजेआई सूर्यकांत की अदालत में वकीलों की फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई हो रही थी। एक वकील ने सीनियर वकील का दर्जा पाने के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने देश के उन कुछ चुनिंदा बेरोजगारों की बात की, जो बिना जिम्मेदारी के बात-बात पर सिस्टम को निशाना बनाते हैं। ऐसे कुछ बेरोजगारों के लिए सीजेआई ने ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल का। सीजेआई की इसी टिप्पणी को अमेरिका के बोस्टन में बैठे पुणे के रहने वाले एक भारतीय अभिजीत दीपके ने हथियार बनाया और अपने इंस्टाग्राम पोर्टल के जरिए व्यंग के इरादे से कॉकरोच जनता पार्टी नाम का मूवमेंट लॉन्च कर दिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर यह मूवमेंट फॉलोअर्स के मामले में बहुत ही सफल अभियान साबित हुआ और आज इसके फॉलोअरों की संख्या 23 मिलियन के करीब पहुंच चुकी है।

कौन से ‘सीजेपी’ बनाने वाले अभिजीत दीपके

30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत आप के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए आप छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। अभिजीत किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर एक्स अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने की यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की वकालत, जानें क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ प्रावधानों को महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एक तरीका समान नागरिक संहिता यानी कि यूसीसी लागू करना भी हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जो महिलाओं को पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार नहीं देते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण से पूछा कि क्या अदालत पर्सनल लॉ की संवैधानिक वैधता की जांच कर सकती है? जस्टिस बागची ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में माना गया था कि पर्सनल लॉ को संविधान की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता।

बेंच ने यह भी पूछा कि अगर अदालत शरीयत के उत्तराधिकार नियमों को रद्द कर दे, तो क्या इससे कानूनी शून्य पैदा नहीं हो जाएगा, क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई अलग वैधानिक कानून नहीं है। सीजेआई ने चिंता जताते हुए कहा कि सुधार की जल्दबाज़ी में कहीं ऐसा न हो कि हम मुस्लिम महिलाओं को मौजूदा अधिकारों से भी वंचित कर दें।

इस पर वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यदि शरीयत के प्रावधान हटते हैं तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू हो सकता है। अदालत यह घोषित कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि विरासत का अधिकार एक सिविल राइट है, इसे धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के तहत “आवश्यक धार्मिक प्रथा” नहीं माना जा सकता। भूषण ने अपने तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक फैसले का हवाला दिया, जिसमें तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराया गया था।

मुस्लिम महिलाओं के लिए समान उत्तराधिकार अधिकारों की मांग करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि देश में सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करना है। कोर्ट ने आगे कहा, “क्या हम पर्सनल लॉ पर आधारित सभी द्विविवाह संबंधों को अमान्य घोषित कर सकते हैं या नहीं। इसलिए हमें मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा।” CJI सूर्यकांत ने कहा कि जैसा कि सही कहा गया है, इसका उत्तर समान नागरिक संहिता है।

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आज बैंकों में हड़ताल, सरकारी बैंकों का कामकाज रहेगा ठप

रायपुर। अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दो दिन की छुट्टी के बाद आज यानी 27 जनवरी को देशभर में बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी।