महिला आरक्षण नहीं, असली मुद्दा परिसीमन”, सोनिया गांधी ने केन्द्र की मंशा पर उठाए सवाल
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कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर एक आर्टिकल लिखा है। जिसमें आरोप लगाया कि सरकार इस अहम मुद्दे पर 'असामान्य जल्दबाज़ी' दिखा रही है, जिसका मकसद आने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ उठाना हो सकता है।
चुनावी माहौल के बीच विशेष सत्र बुलाने पर उठाया सवाल
अंग्रेजी अखबार द हिन्दू में लिखे अपने लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के बड़े संवैधानिक बदलावों को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है, जिसका मकसद राजनीतिक लाभ लेना हो सकता है। सोनिया गांधी ने कहा कि जब देश के कुछ राज्यों, खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी माहौल चरम पर है, उसी समय संसद का विशेष सत्र बुलाना कई सवाल खड़े करता है।
सोनिया गांधी ने बताई जल्दीबाजी की वजह
उनके मुताबिक, इतनी जल्दीबाजी का एकमात्र कारण विपक्ष को घेरना और राजनीतिक बढ़त हासिल करना है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से समर्थन मांग रहे हैं, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार इस सत्र में कौन-कौन से प्रस्ताव लाने जा रही है।
संविधान के लिए खतरनाक-सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बड़ी चर्चा और सहमति जरूरी है, लेकिन सरकार बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के इसे आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विशेष रूप से परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए चेतावनी दी कि इस संबंध में सामने आ रही अनाधिकारिक जानकारी खतरनाक है और यह संविधान की भावना के खिलाफ जा सकती है।
पहले ही पास हो चुका है महिला आरक्षण कानून-सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने साफ कहा कि महिला आरक्षण कानून पहले ही पास हो चुका है, इसलिए यह मुद्दा अब विवाद का विषय नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था, जिसमें महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने का प्रावधान है। लेकिन इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी बताया गया था।
सोनिया ने पूछा- 30 महीने का इंतजार क्यों किया गया
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि अगर सरकार अब 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया। इसके लिए 30 महीने का इंतजार क्यों किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने कई बार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
पूछा-5 राज्यों के चुनाव खत्म होने तक इंतजार क्यों नहीं किया?
सोनिया ने आगे लिखा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि इसे 2024 के चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना। अब अनुच्छेद 334-A में बदलाव कर महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने की तैयारी है। ऐसे में प्रधानमंत्री को यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे? उन्होंने सवाल किया कि 5 राज्यों के चुनाव खत्म होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। इतनी हड़बड़ी की क्या जरूरत है?
1 hour and 22 min ago
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