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‘शशि थरूर ने स्वीकार किया कांग्रेस महिला विरोधी’, रिजिजू का बड़ा दावा

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महिला आरक्षण को लेकर हाल के दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक सियासी घमासान देखने को मिला। सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया था, लेकिन विपक्ष के तीखे विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। इस पूरे मुद्दे पर अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर हमला बोला है। रिजिजू ने दावा किया था कि संसद सत्र के बाद थरूर ने दावा किया था कि कांग्रेस महिला विरोधी है।

थरूर व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि संसद सत्र के बाद उनकी और थरूर की मुलाकात हुई थी। रिजिजू ने कहा कि फोटो सेशन के दौरान शशि थरूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कांग्रेस भले ही एंटी-वूमन हो सकती है, लेकिन कोई उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं मान सकता। रिजिजू ने आगे कहा कि उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि थरूर की छवि महिला विरोधी नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी पर सवाल उठते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

रिजिजू के दावे पर शशि थरूर ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के इस दावे पर शशि थरूर ने अपना रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, मैंने ऐसी कोई बात नहीं कही है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। थरूर ने कहा, कि फोटो में 7 लोग है, जो असलियत बता सकते हैं। शशि थरूर ने कहा, सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक सशक्त महिला राष्ट्रपति के रूप में हमने महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण के लिए आवाज उठाई है। महिला आरक्षण विधेयक की पहल की, इसे हमारे कार्यकाल में राज्यसभा में पारित कराया और 2023 में भारत सरकार द्वारा लोकसभा में लाए जाने पर इसका समर्थन किया।

थरूर के सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़ा जा रहा विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 18 अप्रैल को शशि थरूर द्वारा साझा की गई एक तस्वीर भी है। इस तस्वीर में उन्होंने किरेन रिजिजू के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा था कि जब रिजिजू ने विपक्ष को महिला विरोधी बताया, तब उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें ऐसा नहीं कह सकता। इस पोस्ट में थरूर ने हल्के-फुल्के अंदाज में रिजिजू को चार्मिंग भी बताया था।

केरल के मलप्पुरम में चुनाव प्रचार के दौरान शशि थरूर के काफिले पर हमला, जानें पूरा मामला

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केरलम की विधानसभा चुनावी की सरगर्मी जोरों पर हैं। इस बीच चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कार पर हमला हुआ है। यह घटना मलप्पुरम जिले के वांडूर में हुई। कुछ लोगों ने शशि थरूर की कार रोक ली और उनके गनमैन के साथ मारपीट की। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और दो लोगों को हिरासत में ले लिया है।

गनमैन के साथ गाली-गलौज और मारपीट

यह हमला शुक्रवार रात को हुआ। शशि थरूर मलप्पुरम के वंडूर में यूडीएफ उम्मीदवार एपी अनिल कुमार के लिए प्रचार करने आए थे। इस मामले में थरूर के गनमैन ने खुद शिकायत दर्ज कराई है। वांडूर पुलिस ने बताया कि सांसद के गनमैन रतीश केपी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।

हमलावर दो गाड़ियों में थे सवार

थरूर की टीम के अनुसार वे दो वाहनों में यात्रा कर रहे थे। थरूर पहली कार में सवार थे। दूसरी कार ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान विवाद शुरू हुआ। अचानक दो कारों में सवार करीब आठ लोगों ने थरूर की गाड़ी रोक दी। उन्होंने आगे बढ़ने नहीं दिया और कार के शीशे पर जोर-जोर से हाथ-पैर मारे। जब थरूर का गनमैन सुरक्षा की वजह से गाड़ी से उतरा तो हमलावरों ने उस पर भी हमला बोल दिया। गनमैन धक्का-मुक्की और मारपीट का शिकार हो गया।

पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को भी हिरासत में लिया है। पुलिस ने इस मामले में दो कारों को भी जब्त किया है। पुलिस का कहना है कि शशि थरूर का काफिला रोकने वाला ग्रुप इन कारों में सफर कर रहा था। इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना वंडूर के चेल्लीथोड में शाम करीब 7 बजे हुई। चुनाव में उतरने उम्मीदावार एपी अनिल कुमार के लिए शशि थरूर चुनाव प्रचार करने वंडूर आए थे।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

शशि थरूर ने फिर किया सरकार का समर्थन, बोले- ईरान-इजरायल युद्ध पर चुप्पी कायरता नहीं रणनीति

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पश्चिम एशिया में जंग को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध पर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार की चुप्पी पर नैतिक कायरता का आरोप लग रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए संकट पर भारत सरकार के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया है। 

कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय

अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत सरकार पर भी देश में “सियासी हमले” हो रहे हैं। सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी के ही सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है।

भारतीय नीति पर सवाल खड़े करने वालों को दिखाया आईना

केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनियक शशि थरूर ने एक लेख लिखकर उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल उठाने वालों को जमीनी हालात और राष्ट्रहित में अपनी गई रणनीति के बारे में समझाने की कोशिश की है। उनका यह लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है। थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है। कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है।

हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं-थरूर

थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है। इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होता है। थरूर के मुताबिक, सरकार की चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, और कई बार बिना बयान दिए भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जा सकते हैं।

सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं

थरूर के मुताबिक उनके जैसे जिन लोगों ने पश्चिम एशिया युद्ध पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं की, लिबरल्स उन्हीं पर निशाना साधने लगे हैं। वे इसे नैतिक कायरता कह रहे हैं। वे हमसे चाहते हैं कि हम यह मांग करें कि भारत नैतिक श्रेष्ठता दिखाते हुए युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन घोषित करे। लेकिन, मैं इस संघर्ष पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं करूंगा।

लाखों भारतीयों के हितों पर होने वाले असर की दिलाई याद

थरूर ने यह भी कहा कि भारत के पश्चिम एशिया में बड़े हित जुड़े हैं करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और लगभग 90 लाख भारतीयों की मौजूदगी, ऐसे में किसी भी कड़े सार्वजनिक बयान से इन हितों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि नैतिक भाषण देकर इन संबंधों को खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी।

राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका-थरूर

जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है। 

सोवियत संघ के समय अपनाए गए रणनीति का उदाहरण

थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है। इसके लिए उन्होंने सोवियत संघ के द्वारा हंगरी (1956), चेकोस्लोवाकिया (1968) और अफगानिस्तान (1979) में किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों का उदाहरण दिया है, जिसकी निंदा करने में हमने बचने की कोशिश की। क्योंकि, मास्को के साथ अपने रिश्तों को हम खतरे में डालने का जोखिम नहीं ले सकते थे।

सोनिया गांधी ने की थी भारत सरकार की तीखी आलोचना

बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के शीर्ष नेता की हत्या जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत का मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती हैं और भारत जैसे देश को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

मणिशंकर अय्यर ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, थरूर-जयराम रमेश-पवन खेड़ा पर बरसे, केरल को लेकर की भविष्यवाणी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर विवादों में आ गए हैं। उन्होंने शशि थरूर, जयराम रमेश और पवन खेड़ा सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं पर तीखी टिप्पणियां की है। साथ ही कहा कि केरल में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि केरल में पिनराई विजयन एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।

केरल में अगले कुछ महीनों के भीतर ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले यहां सियासी सरगर्मी तेज हो चली है। लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस केरल में 10 साल का सूखा खत्म करने की कोशिश कर रही है। इस बीच कांग्रेस के सीनियर लीडर मणिशंकर अय्यर के बड़ा “बम” फोड़ा है।

कांग्रेस नेता आपस में बंटे हुए-अय्यर

एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पवन खेड़ा को कठपुतली बताया साथ ही शशि थरूर, जयराम रमेश पर भी तीखे वार किए। केरल में कांग्रेस की संभावनाओं पर एक सवाल के जवाब में अय्यर ने कहा कि मैं चाहता हूं कि कांग्रेस जीते, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा क्योंकि कांग्रेस नेता आपस में बंटे हुए हैं। वे कम्युनिस्टों से भी ज्यादा एक-दूसरे से नफरत करते हैं।

पवन खेड़ा को बताया ‘पुतला’

अय्यर ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ‘पुतला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि खेड़ा पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं और पिछले दो वर्षों से लगातार उन पर आरोप लगाते रहे हैं। अय्यर ने कहा, ‘अगर कांग्रेस को प्रवक्ता के तौर पर पवन खेड़ा के अलावा कोई नहीं मिल रहा, तो पार्टी की हालत जैसी है, वैसी ही रहे।

थरूर को लेकर भी तीखी टिप्पणी

अय्यर ने चार बार सांसद रह चुके शशि थरूर को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने थरूर को ‘पाकिस्तान विरोधी’ बताते हुए कहा कि वह अगले विदेश मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। इसके अलावा कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश को लेकर अय्यर ने कहा कि वह सिर्फ ‘अपनी नौकरी बचाने’ में लगे हुए हैं।

अय्यर के बयान से कांग्रेस का किनारा

कांग्रेस पार्टी ने भले ही पिनराई विजयन को लेकर दिए अय्यर के बयान से किनारा कर लिया लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री की नाराजगी मानो और बढ़ गई है। अय्यर के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं रहा है। वह पूरी तरह से अपने व्यक्तिगत जानकारी के हिसाब से बोलते और लिखते हैं।

कम हो गई कड़वाहट! राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिले शशि थरूर

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शशि थरूर की पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की खबरें आ रही हैं।

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर राहुल गांधी के ऑफिस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की। यह आधे घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, "सब ठीक है।" उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे- थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हमारी बातचीत हुई। हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई। सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं और क्या कह सकता हूं?... मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?

उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं-थरूर

जब उनसे पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज़ के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी, मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है। मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है।'

शशि थरूर लगातार सुर्खियों में

बता दें कि हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर। कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर। कभी केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर। बीते कुछ समय में शशि थरूर ने कई अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। केरल चुनाव की रणनीति पर होने वाली बैठक में वे नहीं पहुंचे। सोनिया गांधी के आवास पर हुई मीटिंग भी मिस की। वजह यात्रा बताई गई। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी नाराजगी की बात भी सामने आई।

थरूर ने माना-कुछ मुद्दे हैं

वहीं, थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। थरूर ने कहा था, 'मैं बस इतना कह सकता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे अपने पार्टी नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि किसी सार्वजनिक मंच पर। मैं संसद के लिए दिल्ली जाऊंगा, और मुझे मौका मिलेगा, मेरा मानना है, कि मैं अपनी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व के सामने बहुत स्पष्ट रूप से रख सकूं और उनका दृष्टिकोण जान सकूं, एक उचित बातचीत कर सकूं।'

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

पुतिन के डिनर में राहुल–खड़गे को न्योता नहीं, शशि थरूर को बुलाया गया, जानें कांग्रेस ने क्या कहा?

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरा पूरा कर अपने देश वापस लौट गए हैं। दिल्ली दौरे के अंतिन दिन शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति के डिनर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को निमंत्रण नहीं दिया गया। हालांकि, इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर जरूर सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ सहज भाव से मिलते जुलते देखे गए।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस डिनर में शशि थरूर अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर आए। डिनर में थरूर काले रंग के बंद गले का कोट के साथ गले में मरून कलर का मफलर डाल कर पहुंचे थे। वीडियो में थरूर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बात करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल भी नजर आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण से बातचीत के बाद थरूर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल से हाथ मिलाकर आगे बढ़ जाते हैं।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

राष्ट्रपति भवन आयोजित रात्रिभोज को लेकर कांग्रेस ने दावा किया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बुलावा नहीं आया। इस पर कांग्रेस ने सरकार पर फिर निशाना साधा है।

कांग्रेस में उठे सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार रोजाना प्रोटोकॉल तोड़ती है और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं रखती। थरूर के न्योता स्वीकार करने पर रमेश ने कहा, अगर हमारे नेता को बुलाया नहीं गया और हमें बुलाया गया, तो हमें अपनी अंतरात्मा से सवाल करना चाहिए। किसे बुलाया है और किसे नहीं, इसमें राजनीति खेली गई है। इसे स्वीकार करना भी सवाल उठाता है।

क्या कांग्रेस से किनारा कर रहे हैं शशि थरूर? दूसरी बार पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से रहे 'गायब'

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कांग्रेस के सांसद शशि थरूर इन दिनों कांग्रेस से दूरी बनाते दिख रहे हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर रविवार को संसद के शीतकालीन सत्र के बारे में स्ट्रेटेजिक ग्रुप की एक अहम मीटिंग में शामिल नहीं हुए। यह मीटिंग सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई। इससे पहले एसआईआर के मुद्दे पर बुलाई गई कांग्रेस की बैठक से भी वह नदारद थे। ऐसे में शशि थरूर को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

थरूर के बयानों से लग रहे कयास

कांग्रेस की जरूरी मीटिंग्स से शशि थरूर का लगातार गायब रहना पार्टी में चर्चा का विषय बन गया है। ऐसा तब हो रहा है, जब पिछले कुछ महीनों में शशि थरूर कभी अपने पार्टी की ही बुराई करते दिख रहे हैं, तो कभी पीएम मोदी की तारीफ। उनके इन्हीं बदले तेवर की वजह से राजनीतिक गलियारों में उनकी कांग्रेस से दूरी के कयास लगाए जाने लगे हैं।

एसआईआर के मुद्दे पर हुई बैठक में रहे नदारद

हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर बुलाई कांग्रेस की बैठक से भी थरूर नदारद रहे थे, जिसके लिए उनकी तरफ से खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया गया था। लेकिन उस वक्त वह सवालों के घेरे में आ गए थे क्योंकि एक दिन पहले ही वह पीएम मोदी के कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे।

शशि थरूर ने की पीएम मोदी के व्याख्यान की तारीफ

पीएम की तारीफ करते ‘एक्स’ पर उनके कई पोस्ट भी आए थे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीते 18 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की आर्थिक दिशा को रेखांकित करने और देश की विरासत को गौरवशाली बनाने पर जोर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। थरूर ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकास के लिए भारत की रचनात्मक अधीरता’ की बात की और एक औपनिवेशिक काल के बाद की मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ ‘उभरता हुआ बाजार’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ‘उभरता हुआ मॉडल’ है। उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती पर भी ध्यान दिलाया। पीएम मोदी ने कहा कि उन पर हमेशा ‘चुनाव मोड’ में रहने का आरोप लगता है, लेकिन असल में वह लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए ‘भावनात्मक मोड’ में रहते हैं।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने उठाए थे सवाल

पीएम मोदी के बारे में उनके कमेंट्स के बाद, पार्टी के दूसरे नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि शशि थरूर की प्रॉब्लम यह है कि मुझे नहीं लगता कि उन्हें देश के बारे में अधिक पता है... अगर आपके हिसाब से कोई कांग्रेस की पॉलिसी के खिलाफ जाकर देश का भला कर रहा है, तो आपको उन पॉलिसी को फॉलो करना चाहिए... आप कांग्रेस में क्यों हैं? क्या सिर्फ़ इसलिए कि आप एमपी हैं?

वंशवाद' पर ऐसा क्या बोल गए थरूर, कांग्रेस में मचा घमासान, बीजेपी को मिला मौका

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राजनीतिक में वंशवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, राजनीतिक परिदृश्य में वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। नेहरू-गांधी परिवार ने यह सिद्ध किया कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है। थरूर ने कहा कि अब वक्त आ गया कि भारत वंशवाद की जगह योग्यतावाद अपनाए। थरूर के इस बयान पर सियासी बवाल बढ़ गया है।

प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया

वंशवाद पर बयान देकर शशि थरूर ने कांग्रेस के भीतर सियासी पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया है। प्रमोद तिवारी ने शशि थरूर द्वारा गांधी परिवार पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने अपना जीवन बलिदान करके खुद को साबित किया। राजीव गांधी ने भी बलिदान देकर देश सेवा की। ऐसे में अगर कोई गांधी परिवार के वंशवाद की बात करता है तो फिर देश में किस अन्य परिवार ने ऐसा बलिदान, समर्पण और क्षमता दिखाई है। क्या वो भाजपा है?

रशीद अल्वी भी थरूर की राय से असहमत

कांग्रेस नेता रशीद अल्वी ने भी थरूर की राय से असहमति जताई। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में फैसला जनता करती है। आप यह नहीं कह सकते कि किसी को सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं कि उसके पिता सांसद थे। यह हर क्षेत्र में होता है, राजनीति कोई अपवाद नहीं।

बीजेपी ने कसा तंज

वहीं, थरूर के इस बयान से भाजपा को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया है और राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने थरूर के बयान को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि शशि थरूर ने भारत के नेपो किड राहुल गांधी और छोटे नेपो किड तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला है। शहजाद ने लिखा कि डॉ. थरूर खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने नेपो किड या वंशवाद के नवाब पर सीधा हमला बोला है। जब मैंने नेपो नामदार राहुल गांधी के खिलाफ 2017 में बोला तो आप जानते हैं कि मेरे साथ क्या हुआ। सर आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूं। फर्स्ट फैमिली बदला जरूर लेती है।

धर्मेंद्र प्रधान ने किया थरूर का समर्थन

वहीं, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने थरूर के लेख के बाद कांग्रेस और राजद पर तंज कसते हुए कहा, थरूर ने यह लेख अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। मैं शशि थरूर के बयान का स्वागत करता हूं। उनकी टिप्पणी से कांग्रेस और राजद को निश्चित रूप से ठेस पहुंचेगी क्योंकि उनकी राजनीति एक परिवार तक सीमित है। वे अपने परिवार से बाहर सोच ही नहीं सकते।

थरूर ने क्या लिखा कि मच गया घमासान

दरअसल, शशि थरूर ने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि वंशवाद सिर्फ कांग्रेस में नहीं, बल्कि लगभग हर राजनीतिक दल में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक शक्ति वंश के आधार पर तय होती है, न कि योग्यता, प्रतिबद्धता या जनसंपर्क से, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। थरूर ने यह भी लिखा कि नेहरू-गांधी परिवार जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रभाव भारत की आज़ादी और लोकतंत्र के इतिहास से जुड़ा हुआ है। लेकिन इसी ने यह विचार भी मजबूत किया कि नेतृत्व किसी का जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है, और यह सोच आज सभी पार्टियों और राज्यों तक फैल गई है।'

‘शशि थरूर ने स्वीकार किया कांग्रेस महिला विरोधी’, रिजिजू का बड़ा दावा

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महिला आरक्षण को लेकर हाल के दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक सियासी घमासान देखने को मिला। सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया था, लेकिन विपक्ष के तीखे विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। इस पूरे मुद्दे पर अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर हमला बोला है। रिजिजू ने दावा किया था कि संसद सत्र के बाद थरूर ने दावा किया था कि कांग्रेस महिला विरोधी है।

थरूर व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि संसद सत्र के बाद उनकी और थरूर की मुलाकात हुई थी। रिजिजू ने कहा कि फोटो सेशन के दौरान शशि थरूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कांग्रेस भले ही एंटी-वूमन हो सकती है, लेकिन कोई उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं मान सकता। रिजिजू ने आगे कहा कि उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि थरूर की छवि महिला विरोधी नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी पर सवाल उठते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

रिजिजू के दावे पर शशि थरूर ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के इस दावे पर शशि थरूर ने अपना रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, मैंने ऐसी कोई बात नहीं कही है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। थरूर ने कहा, कि फोटो में 7 लोग है, जो असलियत बता सकते हैं। शशि थरूर ने कहा, सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक सशक्त महिला राष्ट्रपति के रूप में हमने महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण के लिए आवाज उठाई है। महिला आरक्षण विधेयक की पहल की, इसे हमारे कार्यकाल में राज्यसभा में पारित कराया और 2023 में भारत सरकार द्वारा लोकसभा में लाए जाने पर इसका समर्थन किया।

थरूर के सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़ा जा रहा विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 18 अप्रैल को शशि थरूर द्वारा साझा की गई एक तस्वीर भी है। इस तस्वीर में उन्होंने किरेन रिजिजू के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा था कि जब रिजिजू ने विपक्ष को महिला विरोधी बताया, तब उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें ऐसा नहीं कह सकता। इस पोस्ट में थरूर ने हल्के-फुल्के अंदाज में रिजिजू को चार्मिंग भी बताया था।

केरल के मलप्पुरम में चुनाव प्रचार के दौरान शशि थरूर के काफिले पर हमला, जानें पूरा मामला

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केरलम की विधानसभा चुनावी की सरगर्मी जोरों पर हैं। इस बीच चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कार पर हमला हुआ है। यह घटना मलप्पुरम जिले के वांडूर में हुई। कुछ लोगों ने शशि थरूर की कार रोक ली और उनके गनमैन के साथ मारपीट की। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और दो लोगों को हिरासत में ले लिया है।

गनमैन के साथ गाली-गलौज और मारपीट

यह हमला शुक्रवार रात को हुआ। शशि थरूर मलप्पुरम के वंडूर में यूडीएफ उम्मीदवार एपी अनिल कुमार के लिए प्रचार करने आए थे। इस मामले में थरूर के गनमैन ने खुद शिकायत दर्ज कराई है। वांडूर पुलिस ने बताया कि सांसद के गनमैन रतीश केपी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।

हमलावर दो गाड़ियों में थे सवार

थरूर की टीम के अनुसार वे दो वाहनों में यात्रा कर रहे थे। थरूर पहली कार में सवार थे। दूसरी कार ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान विवाद शुरू हुआ। अचानक दो कारों में सवार करीब आठ लोगों ने थरूर की गाड़ी रोक दी। उन्होंने आगे बढ़ने नहीं दिया और कार के शीशे पर जोर-जोर से हाथ-पैर मारे। जब थरूर का गनमैन सुरक्षा की वजह से गाड़ी से उतरा तो हमलावरों ने उस पर भी हमला बोल दिया। गनमैन धक्का-मुक्की और मारपीट का शिकार हो गया।

पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को भी हिरासत में लिया है। पुलिस ने इस मामले में दो कारों को भी जब्त किया है। पुलिस का कहना है कि शशि थरूर का काफिला रोकने वाला ग्रुप इन कारों में सफर कर रहा था। इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना वंडूर के चेल्लीथोड में शाम करीब 7 बजे हुई। चुनाव में उतरने उम्मीदावार एपी अनिल कुमार के लिए शशि थरूर चुनाव प्रचार करने वंडूर आए थे।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

शशि थरूर ने फिर किया सरकार का समर्थन, बोले- ईरान-इजरायल युद्ध पर चुप्पी कायरता नहीं रणनीति

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पश्चिम एशिया में जंग को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध पर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार की चुप्पी पर नैतिक कायरता का आरोप लग रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए संकट पर भारत सरकार के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया है। 

कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय

अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत सरकार पर भी देश में “सियासी हमले” हो रहे हैं। सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी के ही सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है।

भारतीय नीति पर सवाल खड़े करने वालों को दिखाया आईना

केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनियक शशि थरूर ने एक लेख लिखकर उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल उठाने वालों को जमीनी हालात और राष्ट्रहित में अपनी गई रणनीति के बारे में समझाने की कोशिश की है। उनका यह लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है। थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है। कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है।

हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं-थरूर

थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है। इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होता है। थरूर के मुताबिक, सरकार की चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, और कई बार बिना बयान दिए भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जा सकते हैं।

सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं

थरूर के मुताबिक उनके जैसे जिन लोगों ने पश्चिम एशिया युद्ध पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं की, लिबरल्स उन्हीं पर निशाना साधने लगे हैं। वे इसे नैतिक कायरता कह रहे हैं। वे हमसे चाहते हैं कि हम यह मांग करें कि भारत नैतिक श्रेष्ठता दिखाते हुए युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन घोषित करे। लेकिन, मैं इस संघर्ष पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं करूंगा।

लाखों भारतीयों के हितों पर होने वाले असर की दिलाई याद

थरूर ने यह भी कहा कि भारत के पश्चिम एशिया में बड़े हित जुड़े हैं करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और लगभग 90 लाख भारतीयों की मौजूदगी, ऐसे में किसी भी कड़े सार्वजनिक बयान से इन हितों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि नैतिक भाषण देकर इन संबंधों को खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी।

राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका-थरूर

जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है। 

सोवियत संघ के समय अपनाए गए रणनीति का उदाहरण

थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है। इसके लिए उन्होंने सोवियत संघ के द्वारा हंगरी (1956), चेकोस्लोवाकिया (1968) और अफगानिस्तान (1979) में किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों का उदाहरण दिया है, जिसकी निंदा करने में हमने बचने की कोशिश की। क्योंकि, मास्को के साथ अपने रिश्तों को हम खतरे में डालने का जोखिम नहीं ले सकते थे।

सोनिया गांधी ने की थी भारत सरकार की तीखी आलोचना

बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के शीर्ष नेता की हत्या जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत का मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती हैं और भारत जैसे देश को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

मणिशंकर अय्यर ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, थरूर-जयराम रमेश-पवन खेड़ा पर बरसे, केरल को लेकर की भविष्यवाणी

#manishankaraiyaronpawankherashashitharoorjairam_ramesh

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर विवादों में आ गए हैं। उन्होंने शशि थरूर, जयराम रमेश और पवन खेड़ा सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं पर तीखी टिप्पणियां की है। साथ ही कहा कि केरल में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि केरल में पिनराई विजयन एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।

केरल में अगले कुछ महीनों के भीतर ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले यहां सियासी सरगर्मी तेज हो चली है। लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस केरल में 10 साल का सूखा खत्म करने की कोशिश कर रही है। इस बीच कांग्रेस के सीनियर लीडर मणिशंकर अय्यर के बड़ा “बम” फोड़ा है।

कांग्रेस नेता आपस में बंटे हुए-अय्यर

एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पवन खेड़ा को कठपुतली बताया साथ ही शशि थरूर, जयराम रमेश पर भी तीखे वार किए। केरल में कांग्रेस की संभावनाओं पर एक सवाल के जवाब में अय्यर ने कहा कि मैं चाहता हूं कि कांग्रेस जीते, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा क्योंकि कांग्रेस नेता आपस में बंटे हुए हैं। वे कम्युनिस्टों से भी ज्यादा एक-दूसरे से नफरत करते हैं।

पवन खेड़ा को बताया ‘पुतला’

अय्यर ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ‘पुतला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि खेड़ा पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं और पिछले दो वर्षों से लगातार उन पर आरोप लगाते रहे हैं। अय्यर ने कहा, ‘अगर कांग्रेस को प्रवक्ता के तौर पर पवन खेड़ा के अलावा कोई नहीं मिल रहा, तो पार्टी की हालत जैसी है, वैसी ही रहे।

थरूर को लेकर भी तीखी टिप्पणी

अय्यर ने चार बार सांसद रह चुके शशि थरूर को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने थरूर को ‘पाकिस्तान विरोधी’ बताते हुए कहा कि वह अगले विदेश मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। इसके अलावा कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश को लेकर अय्यर ने कहा कि वह सिर्फ ‘अपनी नौकरी बचाने’ में लगे हुए हैं।

अय्यर के बयान से कांग्रेस का किनारा

कांग्रेस पार्टी ने भले ही पिनराई विजयन को लेकर दिए अय्यर के बयान से किनारा कर लिया लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री की नाराजगी मानो और बढ़ गई है। अय्यर के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं रहा है। वह पूरी तरह से अपने व्यक्तिगत जानकारी के हिसाब से बोलते और लिखते हैं।

कम हो गई कड़वाहट! राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिले शशि थरूर

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शशि थरूर की पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की खबरें आ रही हैं।

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर राहुल गांधी के ऑफिस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की। यह आधे घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, "सब ठीक है।" उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे- थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हमारी बातचीत हुई। हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई। सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं और क्या कह सकता हूं?... मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?

उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं-थरूर

जब उनसे पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज़ के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी, मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है। मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है।'

शशि थरूर लगातार सुर्खियों में

बता दें कि हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर। कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर। कभी केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर। बीते कुछ समय में शशि थरूर ने कई अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। केरल चुनाव की रणनीति पर होने वाली बैठक में वे नहीं पहुंचे। सोनिया गांधी के आवास पर हुई मीटिंग भी मिस की। वजह यात्रा बताई गई। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी नाराजगी की बात भी सामने आई।

थरूर ने माना-कुछ मुद्दे हैं

वहीं, थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। थरूर ने कहा था, 'मैं बस इतना कह सकता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे अपने पार्टी नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि किसी सार्वजनिक मंच पर। मैं संसद के लिए दिल्ली जाऊंगा, और मुझे मौका मिलेगा, मेरा मानना है, कि मैं अपनी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व के सामने बहुत स्पष्ट रूप से रख सकूं और उनका दृष्टिकोण जान सकूं, एक उचित बातचीत कर सकूं।'

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

पुतिन के डिनर में राहुल–खड़गे को न्योता नहीं, शशि थरूर को बुलाया गया, जानें कांग्रेस ने क्या कहा?

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरा पूरा कर अपने देश वापस लौट गए हैं। दिल्ली दौरे के अंतिन दिन शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति के डिनर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को निमंत्रण नहीं दिया गया। हालांकि, इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर जरूर सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ सहज भाव से मिलते जुलते देखे गए।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस डिनर में शशि थरूर अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर आए। डिनर में थरूर काले रंग के बंद गले का कोट के साथ गले में मरून कलर का मफलर डाल कर पहुंचे थे। वीडियो में थरूर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बात करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल भी नजर आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण से बातचीत के बाद थरूर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल से हाथ मिलाकर आगे बढ़ जाते हैं।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

राष्ट्रपति भवन आयोजित रात्रिभोज को लेकर कांग्रेस ने दावा किया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बुलावा नहीं आया। इस पर कांग्रेस ने सरकार पर फिर निशाना साधा है।

कांग्रेस में उठे सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार रोजाना प्रोटोकॉल तोड़ती है और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं रखती। थरूर के न्योता स्वीकार करने पर रमेश ने कहा, अगर हमारे नेता को बुलाया नहीं गया और हमें बुलाया गया, तो हमें अपनी अंतरात्मा से सवाल करना चाहिए। किसे बुलाया है और किसे नहीं, इसमें राजनीति खेली गई है। इसे स्वीकार करना भी सवाल उठाता है।

क्या कांग्रेस से किनारा कर रहे हैं शशि थरूर? दूसरी बार पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से रहे 'गायब'

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कांग्रेस के सांसद शशि थरूर इन दिनों कांग्रेस से दूरी बनाते दिख रहे हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर रविवार को संसद के शीतकालीन सत्र के बारे में स्ट्रेटेजिक ग्रुप की एक अहम मीटिंग में शामिल नहीं हुए। यह मीटिंग सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई। इससे पहले एसआईआर के मुद्दे पर बुलाई गई कांग्रेस की बैठक से भी वह नदारद थे। ऐसे में शशि थरूर को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

थरूर के बयानों से लग रहे कयास

कांग्रेस की जरूरी मीटिंग्स से शशि थरूर का लगातार गायब रहना पार्टी में चर्चा का विषय बन गया है। ऐसा तब हो रहा है, जब पिछले कुछ महीनों में शशि थरूर कभी अपने पार्टी की ही बुराई करते दिख रहे हैं, तो कभी पीएम मोदी की तारीफ। उनके इन्हीं बदले तेवर की वजह से राजनीतिक गलियारों में उनकी कांग्रेस से दूरी के कयास लगाए जाने लगे हैं।

एसआईआर के मुद्दे पर हुई बैठक में रहे नदारद

हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर बुलाई कांग्रेस की बैठक से भी थरूर नदारद रहे थे, जिसके लिए उनकी तरफ से खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया गया था। लेकिन उस वक्त वह सवालों के घेरे में आ गए थे क्योंकि एक दिन पहले ही वह पीएम मोदी के कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे।

शशि थरूर ने की पीएम मोदी के व्याख्यान की तारीफ

पीएम की तारीफ करते ‘एक्स’ पर उनके कई पोस्ट भी आए थे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीते 18 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की आर्थिक दिशा को रेखांकित करने और देश की विरासत को गौरवशाली बनाने पर जोर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। थरूर ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकास के लिए भारत की रचनात्मक अधीरता’ की बात की और एक औपनिवेशिक काल के बाद की मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ ‘उभरता हुआ बाजार’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ‘उभरता हुआ मॉडल’ है। उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती पर भी ध्यान दिलाया। पीएम मोदी ने कहा कि उन पर हमेशा ‘चुनाव मोड’ में रहने का आरोप लगता है, लेकिन असल में वह लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए ‘भावनात्मक मोड’ में रहते हैं।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने उठाए थे सवाल

पीएम मोदी के बारे में उनके कमेंट्स के बाद, पार्टी के दूसरे नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि शशि थरूर की प्रॉब्लम यह है कि मुझे नहीं लगता कि उन्हें देश के बारे में अधिक पता है... अगर आपके हिसाब से कोई कांग्रेस की पॉलिसी के खिलाफ जाकर देश का भला कर रहा है, तो आपको उन पॉलिसी को फॉलो करना चाहिए... आप कांग्रेस में क्यों हैं? क्या सिर्फ़ इसलिए कि आप एमपी हैं?

वंशवाद' पर ऐसा क्या बोल गए थरूर, कांग्रेस में मचा घमासान, बीजेपी को मिला मौका

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राजनीतिक में वंशवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, राजनीतिक परिदृश्य में वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। नेहरू-गांधी परिवार ने यह सिद्ध किया कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है। थरूर ने कहा कि अब वक्त आ गया कि भारत वंशवाद की जगह योग्यतावाद अपनाए। थरूर के इस बयान पर सियासी बवाल बढ़ गया है।

प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया

वंशवाद पर बयान देकर शशि थरूर ने कांग्रेस के भीतर सियासी पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने थरूर को आड़े हाथों लिया है। प्रमोद तिवारी ने शशि थरूर द्वारा गांधी परिवार पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने अपना जीवन बलिदान करके खुद को साबित किया। राजीव गांधी ने भी बलिदान देकर देश सेवा की। ऐसे में अगर कोई गांधी परिवार के वंशवाद की बात करता है तो फिर देश में किस अन्य परिवार ने ऐसा बलिदान, समर्पण और क्षमता दिखाई है। क्या वो भाजपा है?

रशीद अल्वी भी थरूर की राय से असहमत

कांग्रेस नेता रशीद अल्वी ने भी थरूर की राय से असहमति जताई। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में फैसला जनता करती है। आप यह नहीं कह सकते कि किसी को सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं कि उसके पिता सांसद थे। यह हर क्षेत्र में होता है, राजनीति कोई अपवाद नहीं।

बीजेपी ने कसा तंज

वहीं, थरूर के इस बयान से भाजपा को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया है और राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने थरूर के बयान को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि शशि थरूर ने भारत के नेपो किड राहुल गांधी और छोटे नेपो किड तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला है। शहजाद ने लिखा कि डॉ. थरूर खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने नेपो किड या वंशवाद के नवाब पर सीधा हमला बोला है। जब मैंने नेपो नामदार राहुल गांधी के खिलाफ 2017 में बोला तो आप जानते हैं कि मेरे साथ क्या हुआ। सर आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूं। फर्स्ट फैमिली बदला जरूर लेती है।

धर्मेंद्र प्रधान ने किया थरूर का समर्थन

वहीं, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने थरूर के लेख के बाद कांग्रेस और राजद पर तंज कसते हुए कहा, थरूर ने यह लेख अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। मैं शशि थरूर के बयान का स्वागत करता हूं। उनकी टिप्पणी से कांग्रेस और राजद को निश्चित रूप से ठेस पहुंचेगी क्योंकि उनकी राजनीति एक परिवार तक सीमित है। वे अपने परिवार से बाहर सोच ही नहीं सकते।

थरूर ने क्या लिखा कि मच गया घमासान

दरअसल, शशि थरूर ने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि वंशवाद सिर्फ कांग्रेस में नहीं, बल्कि लगभग हर राजनीतिक दल में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक शक्ति वंश के आधार पर तय होती है, न कि योग्यता, प्रतिबद्धता या जनसंपर्क से, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। थरूर ने यह भी लिखा कि नेहरू-गांधी परिवार जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रभाव भारत की आज़ादी और लोकतंत्र के इतिहास से जुड़ा हुआ है। लेकिन इसी ने यह विचार भी मजबूत किया कि नेतृत्व किसी का जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है, और यह सोच आज सभी पार्टियों और राज्यों तक फैल गई है।'