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चमोली हादसे में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर सीएम सोरेन ने पुष्कर धामी से की बात, हेल्पलाइन नंबर जारी

#jharkhandcmhemantsorenspoketouttarakhandcmchamolitunnelaccident

उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल के धंसने से कई मजदूरों की मौत हो गई है। उनमें झारखंड के भी मजदूर शामिल हैं। वहीं, इस हादसे में कई श्रमिक अंदर फंसे हुए हैं। झारखंड के खूंटी, गुमला आदि जिलों के कुछ श्रमिकों के फंसे होने की खबर है। इसकी जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से फोन पर बात की।

सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि झारखंड के खूंटी और गुमला जिले के कई मजदूरों के टनल में फंसे रहने की खबर मिलने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया है कि सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

झारखंड सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी

मुख्यमंत्री ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कंट्रोल रूम नंबर 1.हेल्पलाइन नंबर (टोल फ्री): 1800-3456-526 2.हेल्पलाइन व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427 पर संपर्क कर कृपया जानकारी साझा करें। सरकार हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम-हेमंत सोरेन

सीएम सोरेन ने ये भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। हेमंत सोरेने ने लिखा, बार-बार निर्माणाधीन सुरंगों में हादसों और श्रमिकों के फंसे होने की खबरें मन को व्यथित करती हैं। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम हमें बार-बार चेताते हैं।

चमोली में निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन से नौ की मौत, छह लापता, तलाश जारी*

#chamolilandslideinunderconstruction_tunnel

उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में दर्दनाक हादसा हुआ है। चमोली जिले में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) की विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में अचानक मलबे और पानी का सैलाब आ गया। फिर क्या देखते ही देखते 9 मजदूरों की जान चली गई।

टनल में शाम करीब 7 बजे 1600 मीटर के दायरे में अचानक भूस्खलन हो गया। । जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

13 मजदूरों को घायल अवस्था में निकाला गया

सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और अन्य संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रात करीब नौ बजे तक 13 मजदूरों को घायल अवस्था में टनल से बाहर निकालकर जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया। कुछ मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है।

ज्यादातर मजदूर, बिहार-झारखंड और छत्तीसगढ़ के

चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं। चमोली हादसे में मरने वालों में टिहरी के प्रदीप सिंह पवार, चमोली के मुकेश, बिहार के दुर्लभ शर्मा, झारखंड के विजय व जितेंद्र हैं। इसके अलावा लोकेश्वर और भुवनेश्वर हैं। दो अन्य की भी मौत हुई है। टीएचडीसी-एनटीपीसी की ओर से बनाई जा रही 444 मेगावाट इस परियोजना का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो गया है।

धामी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से की बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीपलकोटी टनल हादसे को लेकर झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से दूरभाष पर वार्ता कर श्रमिकों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने प्रभावित श्रमिकों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के उपचार में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी जा रही है। उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवश्यकता के अनुरूप विशेषज्ञ उपचार, दवाइयों, आवास, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक को उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की आवश्यकता होगी तो उसके लिए भी समुचित व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने दोनों मुख्यमंत्रियों को भरोसा दिया कि उनके राज्य के प्रत्येक प्रभावित श्रमिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

चमोली हादसे में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर सीएम सोरेन ने पुष्कर धामी से की बात, हेल्पलाइन नंबर जारी

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उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल के धंसने से कई मजदूरों की मौत हो गई है। उनमें झारखंड के भी मजदूर शामिल हैं। वहीं, इस हादसे में कई श्रमिक अंदर फंसे हुए हैं। झारखंड के खूंटी, गुमला आदि जिलों के कुछ श्रमिकों के फंसे होने की खबर है। इसकी जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से फोन पर बात की।

सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि झारखंड के खूंटी और गुमला जिले के कई मजदूरों के टनल में फंसे रहने की खबर मिलने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया है कि सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

झारखंड सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी

मुख्यमंत्री ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कंट्रोल रूम नंबर 1.हेल्पलाइन नंबर (टोल फ्री): 1800-3456-526 2.हेल्पलाइन व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427 पर संपर्क कर कृपया जानकारी साझा करें। सरकार हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम-हेमंत सोरेन

सीएम सोरेन ने ये भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। हेमंत सोरेने ने लिखा, बार-बार निर्माणाधीन सुरंगों में हादसों और श्रमिकों के फंसे होने की खबरें मन को व्यथित करती हैं। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम हमें बार-बार चेताते हैं।

चमोली में निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन से नौ की मौत, छह लापता, तलाश जारी*

#chamolilandslideinunderconstruction_tunnel

उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में दर्दनाक हादसा हुआ है। चमोली जिले में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) की विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में अचानक मलबे और पानी का सैलाब आ गया। फिर क्या देखते ही देखते 9 मजदूरों की जान चली गई।

टनल में शाम करीब 7 बजे 1600 मीटर के दायरे में अचानक भूस्खलन हो गया। । जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

13 मजदूरों को घायल अवस्था में निकाला गया

सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और अन्य संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रात करीब नौ बजे तक 13 मजदूरों को घायल अवस्था में टनल से बाहर निकालकर जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया। कुछ मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है।

ज्यादातर मजदूर, बिहार-झारखंड और छत्तीसगढ़ के

चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं। चमोली हादसे में मरने वालों में टिहरी के प्रदीप सिंह पवार, चमोली के मुकेश, बिहार के दुर्लभ शर्मा, झारखंड के विजय व जितेंद्र हैं। इसके अलावा लोकेश्वर और भुवनेश्वर हैं। दो अन्य की भी मौत हुई है। टीएचडीसी-एनटीपीसी की ओर से बनाई जा रही 444 मेगावाट इस परियोजना का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो गया है।

धामी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से की बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीपलकोटी टनल हादसे को लेकर झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से दूरभाष पर वार्ता कर श्रमिकों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने प्रभावित श्रमिकों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के उपचार में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी जा रही है। उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवश्यकता के अनुरूप विशेषज्ञ उपचार, दवाइयों, आवास, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक को उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की आवश्यकता होगी तो उसके लिए भी समुचित व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने दोनों मुख्यमंत्रियों को भरोसा दिया कि उनके राज्य के प्रत्येक प्रभावित श्रमिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।