/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png StreetBuzz मुख्यमंत्री आवास के आसपास बैरिकेडिंग से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त, छात्रों की आवाज़ से इतना डर क्यों : शोभा यादव Jharkhand
मुख्यमंत्री आवास के आसपास बैरिकेडिंग से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त, छात्रों की आवाज़ से इतना डर क्यों : शोभा यादव

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास के आसपास जिस तरह से भारी संख्या में बैरिकेडिंग की गई है, उससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पूरे इलाके के आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, अभिभावकों, कर्मचारियों और राहगीरों को परेशानी में डाल देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। सड़कों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग के कारण आवागमन बाधित हो रहा है और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

श्रीमती यादव ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है जिनके बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। सुबह के समय जब बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचना होता है, तब रास्तों पर अवरोध और यातायात की समस्या के कारण अभिभावकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आम जनता ने क्या गलती की है, जिसके कारण उसे इस तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है?

उन्होंने कहा कि आज झारखंड के छात्र अपनी समस्याओं और अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने का पूरा अधिकार है। उनकी बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, न कि उनके रास्ते में लगातार बैरिकेडिंग खड़ी करके उन्हें रोकने का प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री से मेरा सीधा सवाल है कि आखिर छात्रों से इतना भयभीत होने की क्या जरूरत है? यदि सरकार को लगता है कि छात्रों की मांगों में कोई तथ्य नहीं है, तो सरकार उनके साथ बैठकर बातचीत करे, उनकी बात सुने और तथ्यों के आधार पर जवाब दे। लोकतंत्र में संवाद किसी भी समस्या का सबसे बेहतर रास्ता है। बैरिकेडिंग, रास्ते बंद करना और आम जनता को परेशान करना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि छात्र और युवा किसी सरकार के विरोधी नहीं होते। वे राज्य का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है। परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, रोजगार और पारदर्शिता जैसे विषयों पर युवाओं के मन में यदि सवाल हैं, तो उन सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है। युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनके साथ विश्वास का वातावरण बनाया जाना चाहिए।

प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार से मांग किया है कि मुख्यमंत्री आवास के आसपास की अनावश्यक बैरिकेडिंग और उससे आम लोगों को हो रही परेशानियों की तत्काल समीक्षा की जाए। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के आवागमन को सुचारु बनाया जाए। साथ ही छात्रों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ खुले मन से बातचीत की जाए और उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालने की पहल की जाए।

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को ऐसी सरकार चाहिए जो जनता के बीच रहे, युवाओं की बात सुने और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करे। मुख्यमंत्री आवास को किले में बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी, छात्रों के सवालों का जवाब देने से ही समाधान निकलेगा। सरकार को डर और अवरोध की राजनीति छोड़कर संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही का रास्ता अपनाना चाहिए।

रांची में मनाया गया क्यूबा एकजुटता दिवस, अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा

रांची, 13 अगस्त 2026: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] द्वारा गुरुवार को रांची में क्यूबा एकजुटता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर क्यूबा की जनता के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए समाजवादी देश क्यूबा पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दशकों से लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की गई।

सभा को संबोधित करते हुए CPI(M) के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवादी शक्तियां क्यूबा की समाजवादी व्यवस्था से लगातार भयभीत रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1959 की क्यूबा क्रांति, फिदेल कास्त्रो और चे ग्वेरा के नेतृत्व में, अमेरिका के पड़ोस में समाजवादी सरकार की स्थापना का ऐतिहासिक उदाहरण बनी और उसने साम्राज्यवाद को मजबूत चुनौती दी। इस क्रांति ने पूरे लैटिन अमेरिका में क्रांतिकारी आंदोलनों को भी प्रेरित किया।

CITU के जिला सचिव प्रतीक मिश्रा ने कहा कि अमेरिका द्वारा क्यूबा की समाजवादी व्यवस्था को कमजोर करने के लगातार प्रयासों के बावजूद क्यूबा ने अपनी समाजवादी व्यवस्था को कायम रखा है।

CITU के राज्य महासचिव विश्वजीत देव ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों का क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर गंभीर असर पड़ा है। खाद्यान्न और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि क्यूबा वर्तमान में गंभीर बिजली संकट का भी सामना कर रहा है, जिससे वहां की जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

CPI(M) राज्य सचिवमंडल सदस्य समीर दास ने आरोप लगाया कि अमेरिका क्यूबा में प्रति-क्रांति के जरिए अपनी पसंद की सरकार स्थापित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि तमाम आर्थिक कठिनाइयों और बाहरी दबावों के बावजूद क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी और वहां की जनता समाजवाद की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ी है।

कार्यक्रम को अमन कुमार, फ़राज़ अब्बास और सोनाली ने भी संबोधित किया। प्रफुल्ल लिंडा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

वक्ताओं ने कहा कि देशभर में क्यूबा एकजुटता दिवस का आयोजन क्यूबा की जनता के प्रति समर्थन और एकजुटता व्यक्त करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने और क्यूबा की संप्रभुता एवं समाजवादी व्यवस्था के खिलाफ हस्तक्षेप बंद करने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त 2026 से महान क्यूबाई क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो के जन्मशती वर्ष की शुरुआत भी हो रही है। इस अवसर पर वक्ताओं ने क्यूबा की क्रांति, उसके समाजवादी संघर्ष और साम्राज्यवाद-विरोधी भूमिका को याद करते हुए क्यूबा की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की।

राजमाता अहिल्याबाई होल्कर सनातन संस्कृति की ध्वज वाहक : राकेश पाल।

गढ़वा :- गढ़वा जिला मुख्यालय मे गुरुवार को गढवा जिला पाल महासभा के तत्वाधान में राजमाता अहिल्या बाई होल्कर की पुण्यतिथि मनाई गई। वही गढवा जिला मुख्यालय के नीलांबर - पीताम्बर बहुदेशीय नगर भवन के समीप स्थित राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पाल समाज के लोगों ने इस महान पुण्यात्मा को याद किया। कार्यक्रम के पूर्व प्रतिमा स्थल की विशेष साफ़-सफाई की गई एवम परिसर को फ़ूलों से सजाया गया।तत्पश्चात विभिन्न गाँव से सैकड़ों की संख्या में आए हुए पाल बंधुओं के द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। वही इस दौरान अहिल्याबाई होल्कर अमर रहे के नारों से परिसर गूंज उठा।

वही उक्त अवसर पर प्रमुख समाजसेवी राकेश पाल ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय सनातन संस्कृति की ध्वज वाहक थी। वही उन्होंने विश्वविख्यात काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात के सोमनाथ मंदिर, बिहार के गया जी स्थित प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर समेत सैकड़ों मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया। वही कई नए मंदिर बनवाये, धर्मशालाएं बनवाए,गरीबों के लिए निःशुल्क भोजनालय शुरू करवाये, गुलाम भारत मे एक महिला का समाज के प्रति ऐसा समर्पण अद्वितीय उदाहरण है।

कार्यक्रम मे गढवा जिला पाल महासंघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार पाल ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर का सम्पूर्ण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। गडरिया पाल वंश में जन्मी राजमाता अहिल्याबाई होल्कर हम सबों की धरोहर है। हम सभी गड़रिया पाल वंशज़ उनपर गर्व करते है।

इस कार्यक्रम में जोबरईया,

सहिजना, नवादा, तिलदाग, परिहारा, बरवाही,नगदरवा आदि गाँव से पाल समाज के लोगों ने अपनी उपस्थिति सुनिश्चित किया। वही कार्यक्रम के सफल आयोजन में पाल महासंघ के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र पाल, मीडिया प्रभारी जितेन्द्र कुमार पाल,दिलीप पाल,योगेन्द्र पाल, सत्येन्द्र पाल, उदय पाल, अजय पाल की विशेष भागीदारी रही

।उक्त कार्यक्रम में पाल महासंघ के संरक्षक श्री बुधन पाल, रामदास पाल, विश्वनाथ पाल, नागेन्द्र पाल, शिवपूजन पाल, मंजय पाल, मनीष पाल, रामदेव पाल, विजय पाल,सुनीता देवी, प्रभा देवी, अनीता देवी समेत सैकड़ों की संख्या में पाल समाज के लोग उपस्थित थे।

आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया? : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार के मामले में केवल IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कानून के हाथ इनके गिरेबान तक तो पहुँच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं

(IPS अधिकारियों) तक जाँच की आँच क्यों नहीं पहुंच पाई है ? आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?

उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा है कि जब भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट में लिप्त IAS अधिकारी जेल जा सकते हैं, तो खाकी वर्दी वाले IPS अधिकारियों को यह 'अभेद्य सुरक्षा कवच' किसने दे रखा है?

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से हमने देखा कि भ्रष्टाचार के महापाप में कई शीर्ष IAS अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। जाँच एजेंसियों ने कार्रवाई की और यह साबित हुआ कि प्रशासनिक तंत्र का एक हिस्सा राज्य को दीमक की तरह चाट रहा था। लेकिन क्या अपराध और भ्रष्टाचार का इतना बड़ा साम्राज्य पुलिस की मिलीभगत के बिना चल सकता है? जिस राज्य में कोयला, बालू, पत्थर और लौह अयस्क का अरबों रुपयों का अवैध कारोबार दिन-दहाड़े धड़ल्ले से चल रहा है, क्या वह बिना पुलिसिया संरक्षण के संभव है?

उन्होंने कहा कि आए दिन अवैध ज़मीन के काले धंधे, खुलेआम रंगदारी वसूली, कुख्यात सुजीत सिन्हा जैसे आपराधिक गिरोहों के साथ पुलिस की साँठगाँठ और यहाँ तक कि भोले-भाले आदिवासियों की ज़मीनें हड़पने के मामलों में पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आते हैं। एक पूर्व DGP तक के तार अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से जुड़ने के संगीन आरोप लगे। राज्य की अस्मिता लुटती रही, लेकिन आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?

उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या यह संभव है कि राज्य में संगठित अपराध और माफियाओं का इतना बड़ा नेक्सस बिना किसी IPS की संलिप्तता के चल रहा हो? फिर यह कैसा सिस्टम है जहाँ IAS अधिकारियों के गिरेबान तक तो कानून के हाथ पहुँच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं पर जाँच की आँच तक नहीं आती?

उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आज पूरे झारखंड को इस असमानता पर विचार करने की जरूरत है। राज्य के जो गिने-चुने ईमानदार IAS/IPS अधिकारी हैं, उन्हें भी आज गंभीरता से सोचना चाहिए कि आखिर इस सड़े हुए सिस्टम में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को बचाने वाला वह अदृश्य 'कवच' क्या है? जब सजा और बदनामी सिर्फ IAS के हिस्से आ रही है, तो IPS अधिकारियों को 'सात खून माफ' का यह विशेषाधिकार क्यों?

संसद का मानसून सत्र समाप्त, लोकसभा में 12 विधेयक पारित, किरेन रिजिजू ने दिया सत्र का रिपोर्ट कार्ड

#unionparliamentaryaffairsministerkirenrijijupress_conference

संसद का मॉनसून सत्र विपक्ष के हंगामे के बाद गुरुवार को समाप्त हो गया। 25 दिनों तक चले मॉनसून सत्र काफी हंगामेदार रहा। संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोंकझोंक देखने को मिली। हंगामे के बीच पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 12 बिलों को पास करवाने में सफल रही।

संसद के मानसून सत्र के समापन के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को संबोधित किया। किरेन रिजिजू ने कहा, “आज मानसून सत्र का समापन हुआ। हम इसे दो नजरिए से देखते हैं। कामकाज के लिहाज से यह सत्र बहुत सफल रहा। हमने कुल 12 बिल पास किए लेकिन चर्चा और बहस के मामले में यह सत्र उतना सफल नहीं रहा।”

लोकसभा में सिर्फ एक बिल पर हुई चर्चा

पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “लोकसभा में निर्धारित समय की तुलना में केवल 19 प्रतिशत उत्पादकता हासिल हुई। राज्यसभा में 39 प्रतिशत रही। राज्यसभा में कभी-कभी विपक्षी पार्टी हंगामा करके वॉक आउट भी कीं। उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा में सिर्फ एक बिल पर चर्चा हो पाई। नकल रोकने को लेकर जो बिल आया उस पर। लोकसभा में इसके अलावा कोई अच्छी चर्चा नहीं हुई। चर्चा की दृष्टि से हम खुश नहीं।

पहली बार देखा विपक्ष चर्चा से भाग रहा है-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने सदन में विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, “मेरा तीन दशक का अनुभव है संसद का। ये पहली बार देखा विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। पहली बार सरकार कह रही है चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन विपक्ष भाग गया। ये नया चीज देखने को मिला ये कल्पना से बाहर है।”

कांग्रेस सांसदों का काम नारा लगाना-रिजिजू

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस के सांसद सोचते हैं उनका काम नारा लगाना और कार्ड लेकर हंगामा करना यही रह गया है। सुबह सुबह उठते हैं संसद में पहुंचते हैं नारा लगाते हैं।” किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्हें कांग्रेस के नए सांसदों के लिए बुरा लग रहा है। कांग्रेस के सांसदों का दर्द मैं समझ सकता हूं। चर्चा नहीं होगी तो सीखेंगे कैसे।

पंजाब के पूर्व डेप्युटी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला, अस्पताल में भर्ती

#shiromaniakalidalleadersukhbirsinghbadalattackedin_nanded

पंजाब के पूर्व डेप्युटी सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र नांदेड़ में जानलेवा हमला हुआ है। उन पर हमला माता साहिब कौर गुरुद्वार के पास हुआ है। इसमें उनके एक सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया है। साथ ही उनके घायल सुरक्षाकर्मी को भी ले जाया गया गया है।

एक निहंग ने धारदार हथियार से किया हमला

बताया जा रहा है कि सुखबीर बादल पर एक निहंग ने धारदार हथियार से हमला किया, जिससे उनके हाथों में गंभीर चोट आई है। इस हमले में सुखबीर सिंह बादल की सुरक्षा में तैनात पुलिस वाला भी घायल हो गया है। यह हमला सुबह 11:30 बजे हुआ, जब बादल गुरुद्वारे जा रहे थे। हालांकि वह खतरे से बाहर बताए जाए रहे हैं। वह खुद से चलकर अस्पताल गए हैं।

एक आरोपी को किया डिटेन

नांदेड़ पुलिस ने एक आरोपी को डिटेन किया है। साथ ही उससे पूछताछ की जा रही है। अभी वजहों का खुलासा नहीं हुआ है कि उसे ऐसा क्यों किया है। सुखबीर सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के नेता हैं। यह हमला उन पर ऐसे वक्त में हुआ है, जब कुछ दिनों बाद ही पंजाब में चुनाव होने हैं।

पत्नी के साथ तख्त श्री हजूर साहिब गए थे सुखबीर बादल

इससे पहले दिन में सुखबीर बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ के तख्त श्री हजूर साहिब गए थे। हरसिमरत कौर बादल अकाली दल की सांसद हैं।

पहले भी हो चुका सुखबीर बादल पर जानलेवा हमला

बता दें यह दूसरी बार ऐसा हुआ है, जब शिरोमणि अकाली दल नेता पर हमला हुआ है। दिसंबर 2024 में भी गोल्डन टेंपल में सेवा के दौरान जानलेवा हमला हुआ था। तब वह धार्मिक सजा के तहत पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे। उन पर गोली चलाई गई थी। हालांकि, वे बाल-बाल बच गए थे। इसके तुरंत बाद हमला को पकड़ लिया गया था।

स्वतंत्रता दिवस समारोह की सुरक्षा को लेकर संयुक्त ब्रीफिंग, मोरहाबादी में ड्रोन पर पूर्ण प्रतिबंध

स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित होने वाले राजकीय समारोह में माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड श्री हेमंत सोरेन द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। समारोह के सफल, सुरक्षित एवं सुचारू आयोजन को लेकर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित की गई।

संयुक्त ब्रीफिंग में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक यातायात श्री राकेश सिंह एवं अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री धनंजय ने प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों को संयुक्तादेश में निर्धारित दायित्वों एवं आवश्यक दिशा-निर्देशों से अवगत कराया।

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने कार्य, दायित्व एवं प्रतिनियुक्ति स्थल की पूरी जानकारी रखें तथा निर्धारित समय से पूर्व अपने-अपने प्रतिनियुक्ति स्थल पर पहुंचकर दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करें। उन्होंने मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन और निर्गमन की व्यवस्था को समयबद्ध एवं व्यवस्थित तरीके से सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन ने समारोह की सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया कि कार्यक्रम में आने वाले सभी आगंतुकों की निर्धारित मानकों के अनुरूप जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी अवांछित व्यक्ति अथवा आपत्तिजनक सामग्री समारोह स्थल में प्रवेश न कर पाए, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात सभी पदाधिकारी एवं जवान अपने दायित्वों के प्रति पूरी तरह सतर्क एवं सजग रहें।

पुलिस अधीक्षक यातायात श्री राकेश सिंह ने समारोह के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने, निर्धारित रूट एवं पार्किंग व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित कराने तथा आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिये।

सुरक्षा दृष्टिकोण से ड्रोन पर रोक

संयुक्त ब्रीफिंग में बताया गया कि सुरक्षा दृष्टिकोण से समारोह के दौरान ड्रोन से वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। सिर्फ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा अधिकृत ड्रोन के माध्यम से ही वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी की जाएगी।

प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमापूर्ण, सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां एवं सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

पाकिस्तान फिर हुआ बेनकाब, पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद ने हाफिज सईद को बताया अपना ‘आका’

#pakistanformerministersheikhrasheedseensittingwithlet_terrorists

पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है। एक बार फिर ये बात जगजाहिर हो गई है कि पाकिस्तान आतंकियों का सरपरस्त है। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कथित तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के साथ अपने रिश्ते की बात करते नजर आ रहे हैं।

आतंकियों के साथ मंच साझा

पाक के पूर्व मंत्री शेख रशीद अहमद प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में शामिल हुए और आतंकियों के साथ एक मंच पर देखे गए हैं। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर आया है, जिसमें रशीद खालिद मसूद संधू और कारी मोहम्मद याकूब शेख के साथ पर दिख रहे हैं। संधू लश्कर-ए-तैयबा का एक वरिष्ठ कमांडर और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) का अध्यक्ष है और याकूब शेख आतंकी समूह की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य है।

खुद को बताया हाफिज सईद का गुलाम

कार्यक्रम में बोलते हुए राशिद ने हाफिज सईद की तारीफ की और खुद को उसका ‘गुलाम’ तक कह डाला। सभा को संबोधित करते हुए रशीद ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद की प्रशंसा कर कहा, "मैं हाफिज साहब का गुलाम हूं।"

भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान

पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहे शेख राशिद अहमद ने सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को लेकर न सिर्फ आदर भरी बातें कीं बल्कि भारत के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए। उन्होंने भारत को धमकी देते हुए कहा, "अगर भारत पाकिस्तान की ओर देखता है तो अल्लाह उसे नष्ट कर देगा। भारत में न पक्षी चहचहाएंगे, न मंदिरों में घंटियां बजेंगी। हम हाफिज सईद के साथ हैं।"

कौन है शेख रशीद?

शेख रशीद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में 2020 से 2022 तक गृह मंत्री रहा। वह अवामी मुस्लिम लीग पार्टी का संस्थापक नेता भी है। शेख रशीद इससे पहले भी अपने भारत विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। 2019 में भी शेख रशीद ने भारत के खिलाफ बेहद उग्र बयान दिए थे और युद्ध और परमाणु हथियारों की बात की थी।

हाफिज सईद है भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी

बता दें कि शेख रशीद खुद को जिस हाफिज सईद का गुलाम बता कर भारत को धमका रहा है, उसको संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है। हाफिज सईद आंतकी संगठन लश्कर एक तैयबा का प्रमुख है और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल है। वह भारत में हुए कई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। इनमें 2008 का मुंबई आतंकी हमला भी शामिल है, जिसमें 26/11 के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। साथ ही पुलवामा में हुए हमले का मास्टरमाइंड भी उसे ही माना जाता है। हाफिज सईद जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकी समूहों को फंडिंग करता है।

झारखंड विधानसभा घेराव पर बड़ा एक्शन, 600 लोगों पर एफआईआर, 100 को किया गया नामजद

#ranchiprotestjpscexamassemblypoliceactionfirregistered600people

झारखंड में परिक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इसी दौरान हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने झारखंड विधानसभा घेराव किया था। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल करीब 100 लोगों को नामजद करते हुए 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी और हंगामा किया था। पुलिस ने बैरीकेडिंग तोड़ने, हंगामा करने, पुलिस पर हमला करने सहित कई बिंदुओं पर मामला दर्ज किया है। विधानसभा थाना में दर्ज प्राथमिकी में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

आरोपियों की पहचान करने में जुटी पुलिस

पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आगे और लोगों के नाम जोड़े जा सकते हैं। वहीं, छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

बदलती नारी, बदलता झारखंड: अब योजना की लाभार्थी नहीं, पहचान बनाना चाहती हैं महिलाएं

बदलती नारी, बदलता झारखंड’ में 10,351 महिलाओं ने भाग लिया और अपने अधिकार, आकांक्षाएं, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी. सर्वे में 30.7% ग्रामीण और 29.4% शहरी क्षेत्र की महिलाएं शामिल रहीं. सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि झारखंड की महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं.

महासर्वे की प्रमुख बातें

66.8% महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं.

61.3% महिलाएं अगले दो वर्षों में बेहतर करियर या ऊंचे पद पर खुद को देखती हैं.

55.7% महिलाएं दिन में सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन रात में बाहर निकलने से डरती हैं.

44% महिलाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार को सरकार की पहली प्राथमिकता बताया.

28.4% महिलाओं ने कौशल विकास और वोकेशनल ट्रेनिंग की मांग की.

19.3% महिलाओं ने महिला सुरक्षा बल या हेल्पलाइन को प्राथमिकता दी.

युवतियों में करियर को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह

सर्वे में 58% भागीदारी छात्राओं की रही। इनमें 18-24 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी 82% और 25-35 वर्ष की 56.1% रही. यह संकेत है कि नई पीढ़ी की लड़कियां केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि करियर और कौशल विकास के उद्देश्य से पढ़ाई कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह राज्य में बढ़ती उच्च शिक्षा भागीदारी और घटते ड्रॉपआउट का सकारात्मक संकेत है.

मध्य आयु की महिलाएं भी करियर नहीं छोड़ना चाहतीं

16.8% प्रतिभागी वर्किंग प्रोफेशनल्स थीं, जिनमें 36-50 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी 43.4% रही. यह दर्शाता है कि विवाह, मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बाद भी महिलाएं आर्थिक और पेशेवर पहचान बनाए रखना चाहती हैं. सर्वे में 46.4% महिलाओं ने कहा कि वे अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेती हैं.

महिलाओं का सबसे बड़ा सपना

66.8% – आत्मनिर्भर बनकर पहचान बनाना

12.1% – बच्चों को बेहतर भविष्य देना

10.8% – सुरक्षित और खुशहाल जीवन

10.3% – अपने गांव और समुदाय के लिए काम करना

सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता

सर्वे में महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में असुरक्षा को गंभीर मुद्दा बताया.

55.7% – दिन में सुरक्षित, रात में असुरक्षित

21.5% – हमेशा सुरक्षित महसूस करती हैं

18.3% – हमेशा डर बना रहता है

4.5% – सार्वजनिक स्थानों पर ईव-टीजिंग बड़ी समस्या

महिलाओं ने बेहतर स्ट्रीट लाइट, रात्रि परिवहन, सीसीटीवी, पुलिस गश्त और हेल्पलाइन की प्रभावी निगरानी की मांग की.

करियर में सबसे बड़ी बाधा क्या?

36.7% – सामाजिक सोच और रूढ़िवादिता

31.6% – बेहतर अवसर और प्रशिक्षण की कमी

महिलाओं का मानना है कि सामाजिक मानसिकता और सीमित अवसर उनके करियर विकास में सबसे बड़ी बाधाएं हैं.

सरकार से क्या चाहती हैं महिलाएं?

जब पूछा गया कि महिलाओं के विकास के लिए सरकार को सबसे पहले किस क्षेत्र पर काम करना चाहिए, तो जवाब मिले:

44% – शिक्षा और स्वास्थ्य

28.4% – कौशल विकास और वोकेशनल ट्रेनिंग

19.3% – सुरक्षा व्यवस्था और हेल्पलाइन

8.4% – स्टार्टअप और आसान ऋण सुविधा

विशेषज्ञों की राय

आईआईएम रांची के प्रो. कुशाग्र शरण के अनुसार, झारखंड की महिलाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है. वे अब केवल नकद सहायता योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि कौशल, प्रशिक्षण और उद्यमिता के जरिए अपनी आर्थिक पहचान बनाना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि स्किल सेंटर, वित्तीय साक्षरता, मेंटरशिप और बाजार से जुड़ाव पर निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा.

पांच सूत्री रोडमैप

शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश

महिलाओं ने गुणवत्तापूर्ण स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र और नियमित जांच सुविधाओं की मांग की

कौशल विकास और उद्यमिता

जिला स्तर पर स्किल सेंटर, डिजिटल व्यापार प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जाए

महिलाओं की सुरक्षा

ब्लॉक स्तर तक सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन, सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट और पुलिस गश्त बढ़ाई जाए

स्वास्थ्य और मानसिक सहयोग

मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, एनीमिया जांच, कैंसर स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं

योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन

डिजिटल डैशबोर्ड, सोशल ऑडिट और समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की जाए