हत्याहरण तीर्थ परिसर में संतों की बैठक हुई आहूत, अधिकार पत्र सौंपा*।
भाद्रपद मेले में दुकानदारों से अनधिकृत वसूली पर रोक, धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की सुविधा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता*
ब्यूरो रितेश
हरदोई* कोथावां पवित्र नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र से जुड़े जनपद हरदोई के हत्याहरण तीर्थ परिसर में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को षड्दर्शन साधु समाज नैमिषारण्य की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुई बैठक में नैमिषारण्य और हरदोई जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संत-महात्मा, महंत एवं साधु समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। संतों ने तीर्थ की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक गरिमा, व्यवस्थाओं और क्षेत्र के विकास को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
बैठक में अखिल भारतीय श्री पंच रामानन्दीय खाकी अखाड़ा, रामबाग-चित्रकूट से जुड़ी परंपराओं और अधिकारों का भी उल्लेख किया गया। प्रस्तुत प्रस्ताव एवं पत्र के अनुसार बनगढ़ आश्रम के महंत संतोष दास 'खाकी' द्वारा योगी सत्येन्द्र नाथ को अधिकार पत्र सौंपे जाने तथा अखाड़े की वर्ष 1920 से चली आ रही परंपरा के अनुरूप दायित्वों एवं अधिकारों के निर्वहन की बात कही गई।दस्तावेज में प्रथम पक्ष के रूप में महंत संतोष दास खाकी, रामजानकी ट्रस्ट, मढ़ीरायपुर आश्रम, बनगढ़ कौरौना, सीतापुर तथा द्वितीय पक्ष के रूप में योगी सत्येन्द्र नाथ, श्री हत्याहरण तीर्थ विकास परिषद, भैंनगांव, हरदोई का उल्लेख किया गया है। इसमें रामजानकी ट्रस्ट दिनांक 3 सितंबर 1920 तथा श्री चौरासी कोसीय षड्दर्शन साधु मंडल नैमिषारण्य से जुड़े न्यासी एवं संस्थापक अधिकारों के साथ तीर्थ क्षेत्र के विकास और व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।
बैठक में हत्याहरण तीर्थ, परिक्रमा मेला, भादो मेला एवं नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक गरिमा और व्यवस्थाओं को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। संत-महात्माओं ने कहा कि नैमिषारण्य केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि सनातन धर्म की प्राचीन तप, साधना और संत परंपरा की पवित्र भूमि है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु आस्था और विश्वास लेकर आता है। ऐसे में तीर्थ क्षेत्र की प्रत्येक व्यवस्था में धार्मिक मर्यादा, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।बैठक में महंत संतोष दास खाकी ने आगामी भादो मेले की व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि हत्याहरण तीर्थ पर प्रतिवर्ष लगने वाले विशाल भादो मेले में दुकानदारों से किसी भी प्रकार की अनधिकृत अथवा अनुचित वसूली पर रोक लगाई जाएगी।उन्होंने कहा कि मेला श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों के लिए आजीविका का माध्यम भी है। इसलिए किसी भी व्यापारी या दुकानदार के साथ अनुचित आर्थिक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। मेले की व्यवस्थाएं सेवा, सहयोग, अनुशासन और पारदर्शिता की भावना से संचालित होनी चाहिए।संत समाज ने कहा कि भादो मेले में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिले और स्थानीय व्यापारियों को भी किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।बैठक में हत्याहरण तीर्थ सहित नैमिषारण्य से जुड़े धार्मिक स्थलों के विकास, स्वच्छता, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, मेले की सुव्यवस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को लेकर संतों ने अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। संतों ने कहा कि तीर्थ की पवित्रता और सनातन परंपराओं की रक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संत समाज, प्रशासन, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं से भी संतों ने अपील की कि वे तीर्थ परिसर की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखें, धार्मिक स्थलों की मर्यादा का सम्मान करें और आयोजनों में अनुशासन एवं श्रद्धा के साथ सहभागिता करें।बैठक में महंत नारायण दास, महंत संतोष दास, महंत बालक राम दास, महंत अनुग्रह दास, महंत प्रीतम दास, महंत अतुल साहेब, महंत अंजनी दास, बाबा सत्येन्द्र नाथ सहित अनेक संत-महात्माओं ने सहभागिता की। उपस्थित संतों एवं महंतों ने प्रस्ताव एवं पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर बैठक में व्यक्त विचारों और निर्णयों के प्रति अपनी सहमति दर्ज कराई।बैठक के दौरान संतों ने कहा कि नैमिषारण्य की आध्यात्मिक पहचान और सदियों पुरानी संत परंपरा को अक्षुण्ण रखते हुए तीर्थ क्षेत्र का विकास करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। संतों ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे नैमिषारण्य की पवित्र भूमि को स्वच्छ, शांत और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप बनाए रखने में अपना योगदान दें।श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत बैठक में संत समाज का संदेश स्पष्ट रहा कि नैमिषारण्य की मर्यादा सर्वोपरि है, श्रद्धालुओं की सुविधा प्राथमिक है और तीर्थ की पवित्रता एवं सनातन परंपराओं की रक्षा सभी का सामूहिक दायित्व है।

भाद्रपद मेले में दुकानदारों से अनधिकृत वसूली पर रोक, धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की सुविधा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता*

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ब्यूरो रितेश मिश्रा
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Aug 13 2026, 19:31
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