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प्रेस वार्ता नहीं, अंतराक्षी खेल रहे थे कांग्रेसी मंत्री": भानु प्रताप शाही का पलटवार

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता पर चुटकी लेते हुए कहा है कि कांग्रेसी मंत्री प्रेस वार्ता नहीं कर रहे थे, उनमें बोलने की इस प्रकार आपाधापी मची थी कि मानो वे अंतराक्षी प्रतियोगिता खेल रहे थे कि कौन सबसे पहले अपने आलाकमान द्वारा रटा रटाया गाना गाएगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कांग्रेस द्वारा छात्र आंदोलन में भाजपा द्वारा दोहरी राजनीति करने, आंदोलन को हाईजैक करने एवं इस मामले में राहुल गांधी को बदनाम करने के आरोप पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि छात्रों पर बर्बरतापूर्ण एक बार नहीं बल्कि चार चार बार लाठीचार्ज करने वाली कांग्रेस समर्थित सरकार के मंत्रियों और नेताओं के मुंह से दोहरी राजनीति, मगरमच्छ के आंसू जैसा शब्द शोभा नहीं देता। राहुल गांधी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी दोहरी नीति की पर्याय है।

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि छात्र आंदोलन को लेकर दोहरी राजनीति तो सत्ता पक्ष कर रहा है। एक तरफ वार्ता के नाम पर छात्रों को गुमराह किया जा रहा है। इनकी कथनी और करनी में अंतर है। सरकार और कांग्रेसी नेताओं को छात्रों की दयनीय हालत क्यों नहीं दिखती ? सरकार चाहती ही नहीं कि छात्रों का आंदोलन खत्म हो, अगर सरकार की मंशा साफ है तो छात्रों की एक ही मांग है सीबीआई जांच, इसे सरकार मान ले आंदोलन चुटकी में खत्म हो जायेगा। यह मांग तो सरकार को पूरी करनी है। भाजपा तो इसे पूरा नहीं कर सकती। फिर मामले को कौन लटका रहा है ? छात्रों को कौन बरगला रहा है ?

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड में छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के लिए राहुल गांधी को जो जिम्मेवार ठहराया है, वह बिल्कुल सही है। राहुल गांधी सिर्फ दिखावे के लिए एक ट्वीट कर अपने दायित्व से भाग रहे हैं। अगर वास्तव में कांग्रेस और राहुल गांधी छात्रों के हितकारी हैं तो हेमंत सरकार से दो टूक बात करें। या तो सीबीआई जांच या फिर समर्थन वापस। नीट मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने वाली कांग्रेस झारखंड के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं मांगती ? अब कांग्रेसी ही बतलाए कि यह दोहरा चरित्र नहीं तो क्या?

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि धैर्य की बात करने वाले, इस पर सरकार और प्रशासन की पीठ थपथपाने वाले कांग्रेस के मंत्री पहले यह बतलाएं कि 11 अगस्त की रात एक बजे रांची उपायुक्त, ssp सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारी कौन सा संयम बरतने के लिए धरना स्थल पर गए हुए थे, क्या वे लोग सेल्फी खींचवाने गए थे। सरकार और प्रशासन छात्रों पर एक और दमनात्मक कार्रवाई की तैयारी करके छात्रों के पास गई थी, वह तो भाजपा और मीडिया वाले पहुंच गए और प्रशासन को उल्टे पांव लौटना पड़ा। इसलिए झूठी बयानबाज़ी से कांग्रेस बाज आए।

श्री शाही ने कहा कि अनुपूरक बजट वाले दिन सदन में भाजपा विधायक कांग्रेस और jmm की वजह से नहीं पहुंच पाई। भाजपा विधायकों को खुद डिटेन करवा कर "उल्टा चोर कोतवाल को डांटे" की कहावत कांग्रेस चरितार्थ कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति रोटी नहीं सेंकती, भाजपा जो भी करती है डंके की चोट पर करती है।

झारखण्ड में मतदाता सूची SIR-2026 के लिए 311 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी नियुक्त

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण–2026 के दावा एवं आपत्ति चरण में नोटिस, सुनवाई तथा संबंधित मामलों का 5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026 तक समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों की नियुक्ति हेतु प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों को भारत निर्वाचन आयोग के अनुमोदन हेतु भेजा गया था, जिसे आयोग द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

श्री के. रवि कुमार ने कहा मतदाताओं को इन पदाधिकारियों की नियुक्ति से दावा एवं आपत्ति अवधि में प्राप्त आवेदनों, नो-मैप मतदाताओं, तार्किक विसंगतियों तथा अन्य संबंधित मामलों में नोटिस निर्गत करने, सुनवाई करने, दस्तावेजों का सत्यापन करने और मामलों के पारदर्शी एवं समयबद्ध निष्पादन में सुविधा एवं तेजी लाई जा सकेगी। मतदाता सूची में विसंगतियों, नो-मैप एवं अन्य त्रुटियों को सुधारने हेतु 24 अगस्त से सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि उक्त नियुक्तियां विशेष गहन पुनरीक्षण–2026 की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेंगी।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि उक्त अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी एसआईआर के क्रम में अपने संबंधित मतदान केंद्र के एक परिवार के मतदाताओं का एक साथ एक मतदान केंद्र पर रखना, घर घर होम टू रोल, एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से छुटे नहीं एवं एक भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में नहीं जुड़े इस हेतु भी कार्य करेंगे।

मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है, मगर विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, हंगामा करना है


केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने आज स्पष्ट कर दिया कि मोदी सरकार संसद में हर प्रकार की चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूँ, मगर विपक्ष चर्चा ही नहीं होने देना चाहता। श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और NDA की मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, विपक्ष बस संसद चलने दे।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने विपक्ष के सामने स्पष्ट प्रस्ताव रखते हुए कहा कि विपक्ष आज दोपहर 2 बजे तक लोकसभा अध्यक्ष महोदय को चर्चा का पत्र लिखकर दे दे, आज 3 बजे से चर्चा शुरू कर दी जाएगी और कल दोपहर 3 बजे तक चर्चा चलेगी। श्री शाह ने कहा कि यदि अध्यक्ष महोदय अनुमति दें तो सरकार प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए भी तैयार है, ताकि आज 3 बजे से देर रात तक और कल 3 बजे तक विस्तृत चर्चा हो सके।

श्री अमित शाह जी ने कहा कि मैं स्वयं सदन में बैठूँगा, सबको सुनूँगा, हर बात लिखूँगा और कल 3 बजे विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दूँगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है। चर्चा होने से देश की जनता के सामने सारी बातें स्पष्ट हो जाएँगी - दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री जी ने विपक्ष की माँग पर कहा कि कोई मुझसे कहता है कि आप एक statement दे दो, मगर इतने गंभीर मसले पर इस तरह चर्चा नहीं हो सकती। संसद में चर्चा करने के नियम और तरीके बने हैं, संसदीय पद्धति में विस्तार से (at length) चर्चा होती है और संसदीय परंपरा के अनुसार ही statement दी जाएगी।

श्री अमित शाह जी ने कहा कि जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, वे लगातार संसद आ रहे हैं, मगर विपक्ष दोनों सदनों में संसद को चलने ही नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू जी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार हर प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है, चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। विपक्ष पहले यही माँग कर रहा था, सरकार ने हाँ बोल दिया है।

अंत में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उसे चर्चा करनी है या हंगामा, और जनता तय करेगी कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है।

पतरातू में “हर घर तिरंगा अभियान” का भव्य आयोजन: PVUNL ने 200 तिरंगे वितरित कर जगाई देशभक्ति


पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL), NTPC पतरातू के तत्वावधान में “हर घर तिरंगा अभियान” का आयोजन 9 अगस्त से 17 अगस्त तक किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव एवं तिरंगे के महत्व के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।

अभियान का औपचारिक शुभारंभ 9 अगस्त को किया गया, जिसमें NTPC के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के साथ-साथ CISF के जवानों ने भी भाग लिया। इस अवसर पर टाउनशिप में प्रभात फेरी का आयोजन किया गया, जिसमें तिरंगे का वितरण किया गया। साथ ही, टाउनशिप में स्थापित LED स्क्रीन के माध्यम से हर घर तिरंगा अभियान से संबंधित संदेश प्रदर्शित कर लोगों को जागरूक किया गया।

12 अगस्त को PVUNL द्वारा अभियान को आसपास के समुदायों एवं विद्यालयों तक पहुंचाया गया। इस क्रम में SS High School, Patratu के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों के बीच 200 राष्ट्रीय ध्वजों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में देशभक्ति गीत, नारे, कविताएं, शायरी एवं भाषण के माध्यम से विद्यार्थियों को हर घर तिरंगा अभियान के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 20 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उनके उत्साहवर्धन हेतु पुरस्कार वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों को उपहार एवं राष्ट्रीय ध्वज प्रदान किए गए। कुल 200 राष्ट्रीय ध्वज विद्यार्थियों के बीच वितरित किए गए, ताकि वे अपने घरों में गर्व के साथ तिरंगा फहराने के संदेश को आगे बढ़ा सकें।

विद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में PVUNL के HR (Human Resources) विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा कार्यक्रम के आयोजन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन सभी गतिविधियों के माध्यम से PVUNL ने देशभक्ति, एकता एवं राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया तथा अपने कर्मचारियों, उनके परिवारों, CISF कर्मियों, विद्यार्थियों एवं आसपास के समुदायों को “हर घर तिरंगा” अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट से भी झटका: रांची के मधुकम जमीन विवाद में महादेव उरांव की SLP खारिज


झारखंड की राजधानी रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के मधुकम स्थित शिव-दुर्गा मंदिर रोड में आदिवासी जमीन पर 50-60 वर्षों से रह रहे गैर-आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़े जाने के मामले में जमीन मालिक महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी करारा झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने मामले में दायर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान अदालत ने जमीन की बिक्री और बाद में उसे खाली कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर कड़ी नाराजगी जतायी. अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता की ओर से एसएलपी वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी.

जमीन बेचने के बाद बेदखली की मांग पर कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल प्रमुखता से उठा कि संबंधित लोगों से जमीन के बदले बड़ी रकम ली गयी और बाद में उन्हीं लोगों को जमीन से हटाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया गया. अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि मामला जालसाजी की श्रेणी में आ सकता है. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत के इस सख्त रुख के बाद महादेव उरांव की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया. अदालत ने आग्रह स्वीकार कर एसएलपी खारिज कर दी. इस तरह मामले में हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी महादेव उरांव को राहत नहीं मिली.

हाईकोर्ट ने 12 परिवारों को दी थी बड़ी राहत

इससे पहले 31 जुलाई 2026 को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. अदालत ने रांची के रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र में करीब 50-60 वर्षों से घर बनाकर रह रहे 12 गैर-आदिवासी परिवारों को राहत देते हुए अतिक्रमण हटाने के पहले जारी आदेश को वापस ले लिया था. अदालत ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. यह राशि मामले से प्रभावित 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपये के रूप में देने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने माना था कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया और शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया.

1 करोड़ के लेनदेन की जानकारी छिपाने का आरोप

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य सामने आया कि जमीन से जुड़े विवाद में संबंधित लोगों के साथ एक करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेनदेन हुआ था. आरोप था कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अदालत के समक्ष पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किया गया. अदालत ने इसे गंभीरता से लिया. मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि जिन 12 परिवारों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का सीधा असर पड़ना था, उन्हें मूल रिट याचिका में प्रतिवादी ही नहीं बनाया गया था. हाईकोर्ट ने माना कि यदि इन तथ्यों की जानकारी पहले अदालत के सामने होती, तो मामले की सुनवाई और आदेश की परिस्थितियां अलग हो सकती थीं.

कोर्ट के आदेश के आधार पर मकान हटाने की कार्रवाई

महादेव उरांव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के उस आदेश का अनुपालन कराने की मांग की थी, जिसमें हेहल के अंचलाधिकारी को मधुकम की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसी आदेश के आधार पर प्रशासन ने शिव-दुर्गा मंदिर रोड के समीप मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी. कार्रवाई को लेकर प्रभावित परिवारों में विरोध और असंतोष की स्थिति बनी थी. उनका कहना था कि वे कई दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं और अचानक उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है.

परिवारों का दावा, जमीन खरीदकर बनाये मकान

मामले से प्रभावित परिवारों का कहना था कि वे मधुकम क्षेत्र में 50-60 वर्षों से रह रहे हैं. उनके अनुसार, उन्होंने संबंधित जमीन मालिक को प्रति डिसमिल 5.25 लाख रुपये की दर से भुगतान कर जमीन खरीदी थी. इसके बाद वहां मकान बनाकर परिवार के साथ रहने लगे. परिवारों का आरोप था कि जमीन के लिए भुगतान करने और लंबे समय से वहां रहने के बावजूद उन्हें अवैध कब्जाधारी बताया गया. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई के दौरान सामने आये वित्तीय लेनदेन और पक्षकारों से जुड़े तथ्यों ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखकर और प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद ही किया जाना चाहिए. अदालत ने तथ्यों को छिपाने और न्यायालय को भ्रामक जानकारी देने के प्रयास को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में माना. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी खारिज किये जाने के बाद महादेव उरांव की ओर से दायर इस चुनौती को भी झटका लगा है. मामले में हाईकोर्ट के आदेश के साथ-साथ सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. जमीन विवाद में लंबे समय से रह रहे परिवारों के अधिकार, जमीन के लेनदेन और न्यायालय के समक्ष तथ्यों के पूर्ण खुलासे का सवाल इस पूरे प्रकरण के केंद्र में बना हुआ है.

भाजपा ने रचा हेमंत सरकार को बदनाम करने का राजनीतिक षड्यंत्र : विनोद कुमार पांडेय

भाजपा ने विवादित रही TDPL के जरिए झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रची

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID की त्वरित कार्रवाई, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC से जुड़ी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने पर यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विवादों और जांच के घेरे में रही टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) जैसी एजेंसी को झारखंड की महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की परिस्थितियां क्या थीं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा नेताओं ने ऐसी विवादित एजेंसी को झारखंड की भर्ती प्रक्रिया तक पहुंचने का रास्ता देकर हेमंत सरकार को बदनाम करने और राज्य के युवाओं को दिगभ्रमित करने का षड़यंत्र रचा है। इसकी परत दर परत आगे की जांच में उभरते जाएगी और भाजपा का घिनौना चेहरा बेनकाब होता जाएगा। सब सामने आएगा इस पूरी साजिश के पीछे कौन लोग थे।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता झारखंड के युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की सेंधमारी, OMR शीट में कथित हेरफेर या डेटा से छेड़छाड़ की कोशिश युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई ने साफ किया सरकार का रुख

झामुमो महासचिव ने कहा कि जैसे ही परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। CID और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, संबंधित ठिकानों की जांच, डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन तथा संदिग्ध लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता पर पर्दा डालने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रभावित परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हेमंत सोरेन सरकार परीक्षा माफिया या किसी भी निजी एजेंसी को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देगी।

यूपी के विवादित रिकॉर्ड की भी हो निष्पक्ष जांच

विनोद पांडेय ने कहा कि TDPL को लेकर उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 से 2021 के बीच आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के संदर्भ में उठे विवादों और जांच का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वहां इस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, तो झारखंड में उसे परीक्षा व्यवस्था से जोड़ने के निर्णय की भी गहन जांच आवश्यक है।

दोषियों के साथ-साथ साजिश के सूत्रधार भी सामने आएं

झामुमो महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्पष्ट निर्देश है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाए। उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों या एजेंसी के लोगों पर कार्रवाई कर पूरे मामले का पटाक्षेप नहीं किया जा सकता। जांच की अंतिम कड़ी उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्होंने भर्ती परीक्षा की व्यवस्था में सेंधमारी की योजना बनाई, उसे संरक्षण दिया या उससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में राजनीतिक साजिश के आरोप सही साबित होते हैं, तो भाजपा को झारखंड के युवाओं से जवाब देना होगा कि उनके भविष्य को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश क्यों की गई।

युवाओं का विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड के युवाओं ने लंबे संघर्ष के बाद अपने राज्य में रोजगार और सम्मान की उम्मीद बनाई है। कोई भी राजनीतिक दल या भर्ती माफिया इस उम्मीद को तोड़ने की कोशिश करेगा तो सरकार और जनता मिलकर उसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार का संकल्प स्पष्ट है—भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा; दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी और परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या आपराधिक सेंधमारी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा।

रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।

राहुल गांधी के इशारे पर की गई झारखंड के छात्रों पर बर्बरतापूर्ण पुलिसिया कार्रवाई : आदित्य साहू


भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने छात्रों के द्वारा विधानसभा घेराव के दौरान की गई बर्बरतापूर्ण पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार और राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर राहुल गांधी को जिम्मेवार ठहराया।

प्रदेश अध्यक्ष श्री साहू ने कहा कि छात्रों के आंदोलन को कुचलने और दबाने के लिए कंटीले तार लगाए गए, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर छात्रों पर अत्याचार किया गया। छात्राओं के कपड़े तक फाड़ दिए गए, मीडिया तक को भी नहीं छोड़ा गया, कैमरे तोड़े गए, उन्हें पीटा गया। यह सारी चीज राज्य सरकार द्वारा राहुल गांधी के इशारे पर किया गया है।

श्री साहू ने कहा कि राहुल गांधी दिल्ली एवं भाजपा शासित दूसरे राज्यों में गला फाड़ फाड़ कर छात्रों के मुद्दे उठाते हैं और लेकिन झारखंड के मामले पर उनके मुंह पर ताला जड़ जाता है। राहुल गांधी को छात्रों के नाम पर देश को गुमराह करने और सुविधा की राजनीति करने के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से हेमंत सरकार चल रही है। राहुल गांधी मोबाइल से छात्रों से बात करके उन पर दबाव डालने का काम करते हैं परंतु उन्होंने छात्रों के सीबीआई जांच की डिमांड को लेकर कभी भी राज्य सरकार पर दबाव डालने का काम नहीं किया। राहुल गांधी में अगर थोड़ी भी नैतिकता है तो राज्य के छात्रों के साथ सीएम के दरवाजे पर धरना देने का काम करें। अगर उनकी बात सरकार नहीं सुनती है तो उन्हें तत्काल सरकार से समर्थन वापस लेकर छात्रों के मुद्दे पर लड़ाई लड़नी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगते हैं वहीं दूसरी ओर झारखंड के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कभी बात नहीं करते। राहुल गांधी को प्रयागराज जाने से पहले झारखंड आकर यहां के छात्रों से वार्ता करनी चाहिए थी। राहुल गांधी का यह दोहरा रवैया नहीं चलेगा। राहुल गांधी को राज्य सरकार पर छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का दबाव बनाना चाहिए। लेकिन राहुल गांधी ऐसा कदापि नहीं करेंगे क्योंकि वह सत्ता की मलाई खा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गोली, लाठी, बंदूक, वाटर कैनन और आंसू गैस से छात्रों की आवाज को बंद नहीं किया जा सकता है। लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार सुलूक किया गया, 10 अगस्त का दिन झारखंड राज्य के लिए काला दिवस के रूप में दर्ज हो गया है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संसद के अंदर बाहर एनडीए के सांसदों ने झारखंड में बच्चों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, मार्च किया, यह बड़ी बात है। छात्रों को पार्टी आश्वस्त करती है पूरे देश भर के एनडीए के सांसद पूरी मजबूती के साथ बच्चों के साथ खड़े हैं। अब यह आंदोलन केवल झारखंड का नहीं बल्कि पूरे देश का आंदोलन बन चुका है।

श्री साहू ने कहा कि राहुल गांधी सदन में चर्चा से भागते हैं। अमित शाह सदन में चर्चा को तैयार हैं लेकिन राहुल गांधी चर्चा से डरते हैं। इनका काम देश को गुमराह करना रह गया है। राहुल गांधी ने संसदीय इतिहास की सारी गरिमा को तार-तार कर दिया है। यह देश में अराजकता और झूठ के पोस्टर बॉय का प्रतीक बनकर रह गए हैं। राहुल गांधी ने झूठ की खेती करके भ्रम फैलाकर संसद को हाईजैक किया हुआ है। इनका मकसद केवल अराजकता फैलाना है। उसी प्रकार की अराजकता राहुल गांधी झारखंड में फैलाने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन छात्रों ने उनके इस मकसद पर पानी फेर दिया है।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड में बच्चों ने अपने पूरे आंदोलन में मर्यादा की मिसाल कायम की है। किसी नेता या दल के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। लेकिन जंतर मंतर में दिल्ली की धरती से पीएम को भद्दी भद्दी गालियां देने का काम किया गया। उनकी दिवंगत मां तक को भी नहीं बख्शा गया।

उन्होंने सीएम के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों के काम की सराहना करते हुए सम्मानित करने की बात कही गई है। आदित्य साहू ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज करना, कपड़े फाड़ना और दमनात्मक कार्रवाई करना आखिर कौन सा अच्छा काम है।

आदित्य साहू ने छात्रों पर हुए अत्याचार के खिलाफ भाजपा द्वारा बुलाए गए झारखंड बंद को पूरी तरह सफल बताया। कहा कि देर रात में घोषणा करने के बावजूद राज्य भर में व्यापक जनसमर्थन देने के लिए जनता का आभार। साथ ही कार्यकर्ताओं और मीडिया का भी उन्होंने आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की न्याय की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।

इस दौरान प्रेस वार्ता में मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाइक, अजय राय और प्रकाश सिंह भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश*

माननीय विधान सभा अध्यक्ष श्री रबींद्र नाथ महतो एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज झारखंड विधान सभा परिसर में आयोजित "77वाँ राज्यव्यापी वन महोत्सव, 2026" कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर माननीय विधान सभा अध्यक्ष एवं माननीय मुख्यमंत्री ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

महोत्सव में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल, पहाड़, नदियां और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों से है। जंगल और प्रकृति यहां के जनजीवन एवं संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण एवं अहसास कराते हैं।

हमें केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार, जल संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए झारखंड की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मौके पर माननीय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी उपस्थित थीं।

पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता लाना अत्यंत आवश्यक

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी लोग योगदान दें। पौधा लगाने के साथ-साथ उसे संरक्षित करने का भी महोत्सव होना चाहिए। पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी समान उत्साह होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वन महोत्सव का परिणाम है कि आज झारखंड विधानसभा परिसर, उसके आसपास एवं संपूर्ण झारखंड में अनेक हरे-भरे वृक्ष दिखाई दे रहे हैं। धरती हरा-भरा हो रहा है। उन्होंने आमलोग से भी अपील किया कि पौधा लगाकर हरा-भरा धरती बनाने में हम सभी को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक है। हम व्यक्तिगत रूप से इस मुहिम से जुड़ेंगे, तो इस विशाल धरा और इसकी जैव-विविधता की रक्षा करना आसान हो जायेगा।

पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत सजगता और सक्रियता के साथ कार्य करने की जरूरत

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रायः यह देखा जाता है कि विकास के नाम पर हम कई कार्य करते हैं। विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण को नुकसान पहुँचते हैं। इससे पर्यावरण में असंतुलन पैदा होता है। इससे संपूर्ण मानव जीवन और समस्त जीव-जंतु प्रभावित होते हैं। मनुष्य से लेकर पशु- पक्षी आदि प्रत्येक प्राणी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमसभी को इस नुकसान की शीघ्र भरपाई करनी चाहिए। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण को लेकर बड़ी-बड़ी गोष्ठी व चर्चाएं होती हैं, परंतु नुकसान की भरपाई मुश्किल होता है। उन्होंने समाचार पत्रों के माध्यम से इटली के एक अति प्राचीन ज्वालामुखी को पुनः सक्रिय होने संबंधी समाचार का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं स्पष्ट संकेत देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण केवल वृक्ष काटने तक सीमित नहीं है, और न ही पौधरोपण से पूर्ण भरपाई संभव है। प्रकृति में जो उथल-पुथल हो रहे हैं, उसकी भरपाई हमें हर स्तर पर करनी होगी अन्यथा आने वाला समय मानव जीवन के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा। हमसभी वृक्षों को कटाते हैं, खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, भू-जल का अत्यधिक निष्कर्षण कर रहे हैं और बाँध बनाकर नदियों के प्रवाह को रोक रहे हैं। प्रकृति के प्रति यह शोषण निरंतर बढ़ रहा है। देश व राज्य की जनसंख्या बढ़ रही है। यह जनसंख्या प्राकृतिक संसाधनों पर टूट पड़ेंगे, तो इससे होने वाले दुष्परिणामों का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। अतः आज हमें अत्यंत सजगता और सक्रियता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

जल का संचयन कर धरती में समाहित करने का कार्य करें

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में संपूर्ण विश्व, विशेषकर हमारा देश भारत जल संकट की एक बड़ी विभीषिका का सामना कर सकता है। यह स्थिति संपूर्ण मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती बन जाएगी। इसलिए यह आवश्यक है कि समय रहते छोटे-बड़े सभी नगरों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जाए और विभिन्न माध्यमों से जन-जन को जागरूक किया जाए। झारखंड जैसे समृद्ध और हरा-भरा प्रदेश, जहाँ वन, पर्वत, नदियाँ और प्रचूर मात्रा में विद्यमान खनिज संपदा हमारे जीवन-यापन का मुख्य आधार है। हमसबों को प्रकृति के साथ ऐसा संतुलित व्यवहार अपनाना होगा कि यह धरा अनंत काल तक आने वाली पीढ़ियों के पोषण का माध्यम बनी रहे। हम आज हैं, कल नहीं रहेंगे, किंतु हमारी आने वाली पीढ़ियाँ इस विनाश का दंश न झेलें,यह सुनिश्चित करना हमसभी का दायित्व है। अधिकाधिक पौधरोपण करें और वर्षा जल का संचयन कर धरती में समाहित करने का कार्य करें। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को केवल पौधरोपण तक सीमित न रहकर पौधों में खाद देने, उनकी सही देखभाल करने और उन्हें पोषण प्रदान करने के लिए भी तिथियाँ निर्धारित कर विशेष अभियान चलानी चाहिए।

माननीय विधायकगणों के आवासीय परिसर में पौधरोपण करें

माननीय मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि माननीय विधायकगणों के आवासीय परिसर में भी फलदार पौधों का रोपण हो। इसके लिए सभी विधायकगणों को फलदार पौधा उपलब्ध कराकर उसका रोपन कराये जाएं, ताकि धरती में हरीयाली लाई जा सके।

कार्यक्रम में माननीय अध्यक्ष, झारखंड विधान सभा श्री रबींद्र नाथ महतो ने अपने संबोधन में राज्यव्यापी वन महोत्सव कार्यक्रम के उद्देश्य एवं प्राकृतिक तथा पर्यावरण संरक्षण की महत्ता को लेकर विस्तृत प्रकाश डाला। मौके पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री संजीव कुमार ने स्वागत संबोधन किया।

कार्यक्रम के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने विधान सभा परिसर में पौधारोपण किया और सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण का उपहार है।

इस अवसर पर माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, माननीय मंत्री श्री हफीजुल हसन, माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, माननीय विधायकगण, वन विभाग के वरीय अधिकारीगण एवं गणमान्य अतिथिगण सहित बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित थे।

आंदोलन के बाद छात्रों को नहीं होगी दिक्कत - रांची प्रशासन ने की फ्री बस व्यवस्था, देखें बस नंबर और ड्राइवर का संपर्क

आंदोलन में शामिल होने के बाद आसपास के विभिन्न जिलों से आए छात्रों की सुरक्षित वापसी को लेकर जिला प्रशासन, रांची द्वारा मानवीय संवेदनशीलता के साथ विशेष पहल की गई है। अपने-अपने जिलों को लौटने वाले छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा आवश्यकतानुसार परिवहन की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन का उद्देश्य है कि बाहर से आए कोई भी छात्र अकेला, असहाय अथवा परेशान होकर अपने घर लौटने के लिए भटकने को मजबूर न हो।रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद एवं गिरिडीह के लिए बस नंबर के साथ ड्राइवर के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं।

जिलावार बस एवं चालक संपर्क विवरण

रामगढ़ एवं हजारीबाग के लिए:-

JH01GJ5480 - 9110913935

JH01BQ9049 - 8709036227

JH01FD1051 - 7632069309

JH01EW9093 - 9798208660

JH01DP8393 - 9771611890

JH01DW5232 - 9546189388

JH01FA5855 - 8862818140

JH01FA5338 - 7479994308

JH01FU7346 - 6204213843

JH01AV5082 - 6204020831

धनबाद के लिए:-

JH01DK4815 - 7209887996

JH01DK7314 - 9771555676

JH01DK8690 - 7091781702

JH01FA6089 - 9006749479

JH01FY9514 - 9708185363

गिरिडीह के लिए:-

JH01AZ8244 - 9905414556

JH01AZ8251- 8084222709

JH01FN6741- 9204563137

JH01EJ3281- 9204449827

JH01FN1057 - 9931427191

रिजर्व लोकल बसें:-

JH01BY5936 - 6200429723

JH01BP4097 - 9798230459

JH01BQ2170 - 6205690592

JH01EZ2519 - 9801235556

JH01EB8578 - 7631140679

जिला प्रशासन ने कहा है कि छात्र हमारे अपने हैं और उनकी सुरक्षा, सुविधा एवं सकुशल घर वापसी प्रशासन की प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर छात्र जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। जिला प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे निर्धारित परिवहन व्यवस्था का लाभ उठाएं और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचें।