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बीजेपी और कांग्रेस को पछाड़ने वाली ‘कॉकरोच पार्टी’ क्या है, कौन हैं इसके संस्थापक अभिजीत दीपके?

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इंस्टाग्राम पर इन दिनों कॉकरोच जनता पार्टी नाम का अकाउंट तेजी से सुर्खियों में है। अब इसने एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। पांच दिन से कम में इस अकाउंट को इंस्टाग्राम पर 1.7 करोड़ लोगों ने फॉलो किया है। इस अकाउंट ने पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इंस्टाग्राम हैंडल को पीछे छोड़ने के बाद अब इस अकाउंट ने कांग्रेस के ऑफिशियल हैंडल को भी फॉलोअर्स के मामले में पीछे छोड़ दिया है। यह पूरा घटनाक्रम बेहद तेजी से हुआ है, जिसने सोशल मीडिया की दुनिया में हलचल मचा दी है।

ऐसे अस्तित्व में आया 'कॉकरोच जनता पार्टी'

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त की टिप्पणियों के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अचानक सुर्खियों में आ गया। एक सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं, जो पत्रकारिता और एक्टिविज़्म की ओर बढ़ रहे हैं, की तुलना तिलचट्टों और परजीवियों से की। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा विशेष रूप से 'फर्जी और बेहूदा डिग्री' वाले लोगों की ओर था, न कि व्यापक रूप से भारत के युवाओं की तरफ। लेकिन तब तक यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैल चुकी थी, जिससे गुस्सा, चुटकुले और एक 'मज़ेदार राजनीतिक विचार' के तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जन्म ले चुकी थी।

किसका है ये आइडिया?

सीजेपी कोई औपचारिक राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि राजनीतिक व्यंग्य पर आधारित एक ऑनलाइन आंदोलन है। सुप्रीम कोर्ट की एक हालिया टिप्पणी के बाद शुरू हुए इस पेज ने लोकप्रियता के मामले में बड़े-बड़े दिग्गजों को धूल चटा दी है। इसकी सदस्यता शर्तों में बेरोज़गार होना, आलसी होना, हमेशा ऑनलाइन रहना और 'पेशेवर तरीके से भड़ास निकालने की क्षमता' होना शामिल है। पांच दिन में इंस्टाग्राम पर इसके 1.7 करोड़ से ज़्यादा फ़ॉलोअर हो चुके हैं। इसे अभिजीत दीपके ने बनाया, जो एक राजनीतिक संचार रणनीतिकार और बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र हैं।

सीजेपी का X अकाउंट भारत से ब्लॉक

इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट भारत में ब्लॉक हो चुका है। दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो डाला है। इस वीडियो में वो स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं और बता रहे हैं कि उनकी पार्टी का X हैंडल भारत से सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि दूसरे देशों में ये हैंडल चालू है।

नए अकाउंट पर भी 1.50 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स

संगठन ने कुछ देर बाद नया अकाउंट बनाया। इसका नाम ‘कॉकरोच इज बैक’ रखा गया और बायो में लिखा- कॉकरोच डोंट डाय, यानी कॉकरोच मरते नहीं। नए अकाउंट से पहली पोस्ट कल दोपहर 2:29 बजे की गई थी। शुक्रवार दोपहर 1 बजे तक इसके X पर 1.50 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं। अभिजीत ने पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट हैक करने की कोशिश का आरोप भी लगाया है।

बीजेपी ने निकाला 'सोरोस' कनेक्शन

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को लेकर बीजेपी ने गंभीर आरोप लगाए है। बीजेपी का आरोप है कि अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी यानि अरविंद केजरीवाल के कार्यकर्ता हैं। इसके साथ ही बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विदेश यात्रा के खर्च को लेकर भी सवाल किया है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल ने कहा, 'यह सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपको आम आदमी पार्टी यानि अरविंद केजरीवाल के कार्यकर्ता हैं।' उन्होंने मनीष सिसोदिया के साथ तस्वीर भी शेयर की। निशिकांत दुबे ने सवाल किया कि 'अभिजीत दीपके यह बोस्टन किसके पैसे से गया? क्या इसके रहने और खाने का खर्चा सोरोस फाउंडेशन दे रहा है? यह विपक्ष के लिए एक चेतावनी है,क्या आप देश तोड़ने के लिए विदेशी ताकतों की मदद लेंगे?'

सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क

इधर, 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का सोशल मीडिया मूवमेंट अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गया है। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि यह डिजिटल गुस्सा कहीं जमीन पर उतरकर बड़ा आंदोलन न बन जाए। सबसे बड़ी चिंता इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच और इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क को लेकर है। एजेंसियों का मानना है कि जिस रफ्तार से यह प्लेटफॉर्म बढ़ा, वह सामान्य सोशल मीडिया ट्रेंड जैसा नहीं दिखता। यही वजह है कि अब इसके विदेशी कनेक्शन, टेलीग्राम नेटवर्क और पुराने डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीखों का एलान, खरगे सहित ये दिग्गज हो रहे रिटायर

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चुनाव आयोग ने जून-जुलाई में राज्यसभा में खाली होने वाली 24 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी है। 10 राज्यों में राज्यसभा के 24 सदस्यों का कार्यकाल जून-जुलाई में खत्म होने वाला है। इन सभी सीटों के लिए आयोग ने चुनाव की तारीखें घोषित की हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव की तारीख का भी ऐलान किया है।

18 जून को होगा मतदान

भारतीय चुनाव आयोग ने शुक्रवार को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की घोषणा की। इसके लिए मतदान 18 जून को होगा। अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून है। उम्मीदवारों को 11 जून तक अपना नामांकन वापस लेने की अनुमति होगी। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच होगा, और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती निर्धारित है।

किन राज्यों में खाली हो रही सीटें

जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम शामिल हैं। जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें मल्लिकार्जन खरगे, दिग्जिवजय सिंह और पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा का नाम भी शामिल है। राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, नीरज डांगी और रवनीत सिंह की सीटें भी खाली हो रही हैं।

किस राज्य की कितनी सीटों पर होना है चुनाव?

• आंध्र प्रदेश से चार

• गुजरात से चार

• झारखंड से दो

• मध्य प्रदेश से तीन

• मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश से एक-एक

• कर्नाटक से चार

• राजस्थान से तीन

चुनाव आयोग ने जारी किए विशेष निर्देश

चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंगनी रंग का विशेष स्केच पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।

भारत हमारा बेहतरीन दोस्त, जितना तेल चाहिए देने को तैयार', दिल्ली दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा बयान

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत आ रहे हैं। मार्को रूबियो 23 मई को भारत आएंगे। अपने आगामी भारत दौरे से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा बयान दिया है। अपने दौरे से पहले मार्को रुबियो ने भारत की जमकर तारीफ की है। भारत को अमेरिका का एक बेहतरीन सहयोगी और साझेदार बताते हुए साफ किया है कि वाशिंगटन भारत को उतनी ऊर्जा (एनर्जी) बेचने के लिए तैयार है, जितनी नई दिल्ली खरीदने की इच्छा रखती है।

भारत को अमेरिका का बड़ा ऑफर

मियामी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को एक 'महान सहयोगी और बेहतरीन साझेदार' बताया। ऊर्जा के मुद्दे पर उन्होंने एक बड़ी बात कही कि भारत जितना भी तेल और ऊर्जा खरीदना चाहेगा, अमेरिका उसे उतनी मात्रा में बेचने के लिए तैयार है। अमेरिका इस समय ऐतिहासिक स्तर पर ऊर्जा का उत्पादन और निर्यात कर रहा है।

वेनेजुएला के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार के बड़े मौके

रुबियो ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, ऐसे में अमेरिका भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा बनना चाहता है। वेनेजुएला के तेल के जरिए भी दोनों देशों के बीच व्यापार के बड़े मौके हैं। असल में, मेरी जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति भी अगले हफ्ते भारत की यात्रा पर जा रही हैं। ऐसे में अवसर मौजूद हैं।

मार्को रुबियो का दिल्ली दौरा क्यों है खास?

मार्को रुबियो नई दिल्ली में 26 मई को 'क्वाड' (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु भी शामिल होंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान रुबियो कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे। खास बात यह है कि करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता का दौरा कर रहा है; इससे पहले 2012 में हिलेरी क्लिंटन वहां गई थीं। कोलकाता में अमेरिका का दुनिया का दूसरा सबसे पुराना वाणिज्य दूतावास स्थित है।

दुनिया में इस बार सुपर एल-नीनो बढ़ाएगा मुश्किल, 150 साल का टूटेगा रिकॉर्ड, भारत पर कितना होगा असर?

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देश के अधिकांश हिस्सों में पारा 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। आने वाले दिनों में इस भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मौसम का ये असर भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए 2 बेहद चिंता बढ़ाने वाला है।

शक्तिशाली 'सुपर एल-नीनो' आकार ले रहा

इस साल कहीं रिकॉर्ड गर्मी तो कहीं कमजोर मानसून, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल सकती हैं। दरअसल, वैज्ञानिकों की मानें तो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली 'सुपर एल-नीनो' आकार ले रहा है, जो 1877 के बाद की सबसे विनाशकारी मौसम संबंधी घटना साबित हो सकता है। अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 तक 'सुपर' अलनीनो की सबसे अधिक संभावना है।

हो सकता है अब तक के सबसे शक्तिशाली अलनीनो

अलनीनो प्राकृतिक अलनीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) जलवायु चक्र का गर्म चरण है, जो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के जल में एक से ज्यादा बार होने वाला मौसमी बदलाव है, जो पूरी दुनिया के तापमान को बेहद बढ़ा देता है, जिससे विश्व भर में मौसम के पैटर्न और फसलों पर प्रभाव पड़ता है। यदि सुपर अलनीनो आता है, तो यह अब तक के सबसे शक्तिशाली अलनीनो के बराबर हो सकता है। 1877 का वह विनाशकारी अलनीनो जिसने 1876 से 1878 तक वैश्विक अकाल को जन्म दिया था। इस अकाल में 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जो उस समय विश्व की जनसंख्या का 3% था।

क्या होता है अल नीनो?

'अल नीनो' स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है 'छोटा बच्चा' या 'बालक'। यह नाम मौसम में होने वाले एक बड़े बदलाव को दिया गया है, जो हर कुछ साल में प्रशांत महासागर में दिखाई देता है। अल नीनो का असर दक्षिण अमेरिका के पास प्रशांत महासागर में शुरू होता है, लेकिन इसका प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर भारत तक महसूस किया जाता है. सामान्य परिस्थितियों में दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र का पानी ठंडा रहता है, जबकि इंडोनेशिया और फिलीपींस की ओर पानी ज्यादा गर्म होता है. इस दौरान पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली हवाएं, जिन्हें ट्रेड विंड्स कहा जाता है, गर्म पानी को एशिया की तरफ धकेलती रहती हैं। इससे दक्षिण अमेरिका की ओर ठंडा पानी ऊपर आता रहता है और एशिया की तरफ गर्म पानी जमा रहता है। हर 2 से 7 साल में कभी-कभी ये ट्रेड विंड्स कमजोर पड़ जाती हैं। तब प्रशांत महासागर का गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिका की ओर बहने लगता है। इस दौरान महासागर का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है। इसी स्थिति को अल नीनो कहा जाता है। समुद्र का पानी गर्म होने से वहां बादल ज्यादा बनते हैं और भारी बारिश दक्षिण अमेरिका की तरफ होने लगती है, जबकि एशिया की ओर बादल कम पहुंचते हैं।

भट्टी बन जाएगी धरती

विशेषज्ञों के अनुसार इस साल अल नीनो और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है. इसे 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है। दरअसल, धरती के पानी के नीचे बहुत ज्यादा गर्म पानी का बड़ा भंडार बन गया है। ये ऊपर आ रहा है और हवा के साथ मिलकर हवा को और गर्म कर रहा हैष पूरी पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वॉर्मिंग से गर्म हो रही है। इसलिए जब एल नीन्यो आता है, तो उसका असर और तेज हो जाता है। कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इस साल वाला 150 साल में सबसे मजबूत एल नीन्यो हो सकता है। अगर इस साल का एल नीन्यो, सुपर एल नीन्यो बन गया तो मॉनसून और भी कमजोर हो सकता है यानी बहुत कम बारिश हो सकती है, सूखा पड़ सकता है। गर्मी और हीटवेव की लहरें और लंबी और तेज चलेंगी। और उत्तर भारत पर, मध्य भारत पर और पश्चिम भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा ऐसा हुआ तो। सुपर एल नीन्यो अगर हो गया तो भट्टी बन जाएगी धरती।

पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य, शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा फैसला

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पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब बंगाल के सभी मदरसों में क्लास शुरू होने से पहले प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम गाना अनिवार्य होगा। इसके लिए अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।

शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने की पुष्टि

राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों की तरह अब मान्यता प्राप्त मदरसों में भी ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य होगा। इससे पहले यह नियम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू था।

मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य

तुडू ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई संताली भाषा में होती है। जब उन स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों नहीं किया जा सकता? इस संबंध में पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा निदेशालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर राज्य के सभी सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है।

स्कूलों के बाद अब मदरसों के लिए आदेश

इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार ने 14 मई को स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य किया था। अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्' गाना तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है। अब इसी नीति को बढ़ाते हुए इसे मदरसों में भी लागू कर दिया गया है।

आपका प्रधानमंत्री और गृहमंत्री गद्दार है...', राहुल गांधी का विवादित बयान

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लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को 'गद्दार' कहा है। राहुल के इस बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी ने कहा है कि राहुल पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। उनकी सोच अर्बन नक्सल जैसी है।

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गद्दार हैं-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने रायबरेली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विवादित बयान दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री लोगों से अपील करते हैं कि सोना मत खरीदो, पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करो और दूसरी तरफ खुद महंगी विदेश यात्राओं पर निकल जाते हैं। राहुल गांधी ने आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गद्दार हैं।

नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान के आर्थिक सिस्टम को बेच दिया-राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान के आर्थिक सिस्टम को बेच दिया है। फिर से बोलता हूं, नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान के आर्थिक सिस्टम को बेच दिया है। उसने अडानी को, अंबानी को और अमेरिका को हिंदुस्तान का आर्थिक सिस्टम पकड़ा दिया है। अब आर्थिक तूफान आ रहा है और नरेंद्र मोदी और हिंदुस्तान की सरकार आपको नहीं बचा पाएगी। देखना, दो-तीन महीने में आपको पता लग जाएगा। कैसा जबरदस्त झटका लगने वाला है। और आप याद रखना, नरेंद्र मोदी कहेंगे, आपसे कहेंगे, रोएंगे, जैसे कोविड के समय रोया था। जैसे नोटबंदी के समय रोया था। रोएंगे और कहेंगे मेरी गलती नहीं है। और मैं आपको बता रहा हूं कि गलती सिर्फ नरेंद्र मोदी, अमित शाह और आरएसएस की है। क्योंकि इन्होंने संविधान को खत्म किया है।

बीजेपी ने किया पलटवार

राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा है कि राहुल गांधी ने 140 करोड़ देशवासियों को गद्दार कहा है। राहुल का बयान पाकिस्तान जैसी है। राहुल गांधी का रिमोट कंट्रोल देश विरोधी तत्वों के हाथों में है। कांग्रेस नेता हर वक्त देशविरोधी बातें करते हैं। राहुल गांधी की भाषा माओवादी, मुस्लिम लीग और अर्बन नक्सल जैसी है।

राहुल मानसिक संतुलन खो बैठे हैं- राकेश त्रिपाठी

बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने उन्हें आदतन अपराधी करार दिया। त्रिपाठी ने कहा कि राहुल गांधी आदतन अपराधी हैं। वो कई बार कोर्ट से फटकार पा चुके हैं। राहुल गांधी का अपनी भाषा पर नियंत्रण नहीं है और वो मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। उन्होंने जो बयान दिया है इसका खामियाजा पूरी कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ेगा।

पीएम मोदी को नॉर्वे के अखबार ने बताया 'संपेरा', जानें कैसे एक पत्रकार के एक सवाल से बढ़ा विवाद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली पहुंच चुके हैं। हालांकि, नॉर्वे दौरा लगातार चर्चा में बना हुआ है। ये चर्चा उस वक्त शुरू हुई, जब नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक महिला पत्रकार, हेले लिंग स्वेंडसन, ने अचानक प्रोटोकॉल तोड़कर चिल्लाते हुए एक तीखा सवाल पूछा। वहीं, वहीं अब नॉर्वे के एक अख़बार में पीएम मोदी पर छपा कार्टून सुर्ख़ियां बटोर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा उस वक्त विवादों में आ गया, जब वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे से मीटिंग के बाद जा रहे थे तब वहां की पत्रकार हेला लेंग ने उनसे सवाल पूछा था लेकिन पीएम बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में पत्रकार हेला लिंग को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों को क्यों नहीं लेते?"

हेला लिंग ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया। मुझे इसकी उम्मीद भी नहीं थी। वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे पहले स्थान पर है और भारत 157वें स्थान पर है।"

हेला लेंग के इस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद नॉर्वे में बारतीय दूतावास ने बयान जारी किया और भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में आकर सवाल पूछने को कहा।प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उनकी और भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई तीखी बहस हो गई।

नॉर्वे की पत्रकार के तीखे सवाल

ओस्लो में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हेला लेंग ने सवाल पूछा, "भारत और नॉर्वे एक दूसरे के साथ मज़बूत साझेदारी कर रहे हैं। लेकिन हम आप पर भरोसा क्यों करें? क्या आप वादा करते हैं कि अपने देश में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को रोकेंगे। आपके प्रधानमंत्री मुश्किल सवालों का जवाब देना कब शुरू करेंगे।" जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि उन्होंने सवाल सुन लिया है और इसका जवाब देंगे, तो नॉर्वे की उस पत्रकार ने कहा कि उन्हें इसका जवाब फ़ौरन चाहिए।

भारतीय विदेश मंत्रालय में सचिव ने दिया जवाब

उसी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने इस सवाल के जवाब में कहा, "भारत बेहद प्राचीन सभ्यता है। करीब पाँच हजार साल पुरानी सभ्यता। हमने जीरो का आविष्कार किया। हमने योग का आविष्कार किया।"

भारत ने बताया कैसे दुनिया ने किया विश्वास

जब सीबी जॉर्ज ये कह रहे थे, तब पत्रकार ने उन्हें फिर टोककर कहा कि आप सीधे मेरे सवाल का जवाब दीजिए। इस पर सीबी जॉर्ज ने कहा, "ये मेरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस है। आपने सवाल किया है। अब आपको मेरा जवाब सुनने का धैर्य होना चाहिए।" पत्रकार ने फिर कहा कि आप योग वगैरह की बात ना करके सीधे सवाल का जवाब दें। सीबी जॉर्ज ने तब फिर कहा, "मैं भरोसे की ही बात कर रहा हूँ। जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी। तब हमने दुनिया के 150 से ज़्यादा देशों को वैक्सीन और दवा दी। पूरी दुनिया को हमने संकट से उबारने में मदद की। दुनिया ने हम पर विश्वास जताया। ये होता है भरोसा।"

भारतीय अधिकारी ने बताया भारत पर भरोसे का मतलब

इस दौरान पत्रकार बार-बार टोकती रहीं कि मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में पूछे उनके सवाल का सीधा जवाब दिया जाए। सीबी जॉर्ज ने इसके जवाब में भारत में आयोजित जी20 समिट का ज़िक्र करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुश्किल हालात में भारत की मेज़बानी में सभी देश एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर आए। उन्होंने कहा, "भारत ने सबको एक किया और पहली बार अफ़्रीकन यूनियन को हम जी20 का स्थाई सदस्य बनाने में सफल रहे। अफ़्रीकी देशों की चिंताओं को भारत ने मंच दिया। ये होता है भरोसा।" सीबी जॉर्ज के जवाब देने के दौरान ही वो पत्रकार प्रेस कॉन्फ़्रेंस छोड़कर चली गईं।

अब नॉर्वे के अखबार में पीएम मोदी पर कार्टून छपा

इस विवाद के बीच अब नॉर्वे के एक अख़बार में पीएम मोदी पर छपा कार्टून सुर्ख़ियां बटोर रहा है। नॉर्वे के सबसे बड़े और प्रभावशाली अख़बारों में से एक 'आफ़्टेनपोस्टेन' ने एक कार्टून प्रकाशित किया है। जिसमें उन्हें ‘संपेरे’ के रूप में दिखाया गया है और पेट्रोल पंप के पाइप को सांप की तरह दर्शाया गयाहै। यह कार्टून एक ओपिनियन लेख के साथ प्रकाशित हुआ था, जिसमें पीएम मोदी के लिए हेडलाइन दी गई है, ‘एक चालाक और थोड़ा खीज दिलाने वाला आदमी’।

भारत-नॉर्वे के रिश्ते पर पड़ेगा असर?

पीएम के दौरे और उससे पैदा हुए विवाद के बाद सवाल उठ रहें हैं कि क्या भारतच और नॉर्वे रे रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्वे के अखबार में छपे कार्टून के कारण दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर कोई निगेटिव प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। हालांकि, इतना जरूर है कि इस कार्टून विवाद के कारण भारत की आम जनता के बीच इस मुद्दे ने तूल जरूर पकड़ लिया है। एक बड़ी आबादी इसे देश के अपमान से जोड़कर देख रही हैं।

पीएम मोदी-डोनाल्ड ट्रंप की हो सकती है मुलाकात, जी-7 समिट के दौरान होगी मीटिंग!

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जल्द ही मुलाकात हो सकती है। ये मुलाकात भारत या अमेरिका में नहीं बल्कि फ्रांस में होने की संभावना है। दरअसल, फ्रांस में आगामी जून महीने में G-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। फ्रांस में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है। अगर यह मुलाकात होती है तो करीब डेढ़ साल बाद मोदी और ट्रंप आमने-सामने बैठकर वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

ट्रंप G7 शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

अमेरिकी मीडिया Axios की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी जी7 नेताओं की बैठक में शामिल होंगे। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप जी7 बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक व्यापार, अपराध नियंत्रण और चीन पर निर्भरता कम करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं। अमेरिकी प्रशासन की कोशिश है कि अमेरिकी तकनीक आधारित एआई टूल्स को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जाए और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में चीन की पकड़ कमजोर की जाए।

मैक्रों के विशेष आमंत्रण पर फ्रांस जा सकते हैं पीएम मोदी

फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में 15 से 17 जून तक G7 शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को इस बैठक में शामिल होने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है। हालांकि भारत इस समूह का सदस्य नहीं है, फिर भी एक महत्वपूर्ण भागीदार देश के तौर पर भारत को बुलाया गया है।

करीब 16 महीने बाद ट्रंप-मोदी की मुलाकात

जी-7 की बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह इसलिए क्योंकि पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की यह संभावित मुलाकात करीब 16 महीने बाद होने वाली है। माना जा रहा है कि दोनों नेता व्यापार, तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं। इससे पहले पीएम मोदी और ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात पिछले साल फरवरी में हुई थी, जब ट्रंप के विशेष आमंत्रण पर पीएम मोदी अमेरिका गए थे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी। इस दौरान टैरिफ, संबंध, व्यापार, आतंकवाद, रक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई थी।

पीएम मोदी का रोम में भव्य स्वागत, सेल्फी शेयर कर इटली की प्रधानमंत्री बोलीं- आपका स्वागत मेरे दोस्त

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार को इटली पहुंचें। जहां उनका स्वागत इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक खास अंदाज में सेल्फी लेकर किया। रोम पहुंचने पर इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने एक खास सेल्फी एक्स पर शेयर करते हुए उनका स्वागत किया है।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के विशेष निमंत्रण पर पीएम मोदी इटली पहुंचे हैं। पीएम मोदी के इटली पहुंचते ही मोदी-मेलोनी की बहुचर्चित सेल्फी पूरी दुनिया में छा गई। जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी और नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर 'एक्स' पर शेयर किया और पोस्ट में लिखा, 'मेरे दोस्त रोम में आपका स्वागत है। इस दौरे पर पीएम मोदी की रोम में जॉर्जिया मेलोनी के अलावा इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से बैठक होनी है।

रोम में पीएम का किया भव्य स्वागत

इससे पहले दिन में पीएम मोदी रोम पहुंचे, जहां भारतीय समुदाय ने उनका भव्य स्वागत किया। होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की और वहां आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने लोगों से बातचीत की और एक बच्चे को ऑटोग्राफ भी दिया, जिसने उनका चित्र बनाकर उन्हें भेंट किया था।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर होगा फोकस

वहीं, पीएम मोदी ने इटली पहुंचने पर एक्स पर कहा कि मैं रोम पहुंच गया हूं। मैं राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला और प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से मिलूंगा और उनके साथ चर्चा करूंगा। इस दौरे का मुख्य जोर भारत और इटली के बीच सहयोग को मजबूत करने पर होगा। इसमें भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मैं संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के मुख्यालय का दौरा करूंगा, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मजबूत होगी।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डॉग लवर्स की याचिका की खारिज, नहीं बदला अपना पुराना आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्‍तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि वह जमीनी सच्चाइयों से आंखें बंद नहीं की जा सकती। अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

नसबंदी के बाद पुरानी जगहों पर छोड़ने का निर्देश देने से इनकार

स्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों, अस्पतालों आदि जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व के निर्देशों को बदलने से इनकार कर दिया और कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस पुरानी जगहों पर छोड़ने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

कुत्तों के काटने की घटना लगातार जारी

जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, कुत्तों के काटने की घटना लगातार जारी है और यह दिखाता है कि संबंधित अथॉरिटी की लापरवाही है। डॉग बाइट की समस्या चिंता में डालने वाली है। राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा से हमें चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं। तमिलनाडु समेत दूसरे राज्यों से भी ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट में भी जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट की घटनाएं हुई हैं। विदेशी पर्यटकों को भी कुत्तों ने काटा है। देश भर में रैबीज से मौत की कई घटनाएं हुई हैं।

राइट टू लाइफ को लेकर राज्य सरकारों पर सख्त

शीर्ष अदालत ने कहा, "Animal Birth Control" नियमों को सही तरीके से लागू करने में गंभीर लापरवाही हुई है, जिसकी वजह से समस्या बढ़ी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का यह दायित्व है कि लोगों के जीवन की रक्षा करें। राइट टू लाइफ की रक्षा करना राज्य और यूटी की जिम्मेदारी है।सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को Animal Birth Control (ABC) गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित राज्यों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी, व्यवस्थित और वैज्ञानिक कदम उठाना बेहद जरूरी है। अदालत ने निर्देश दिया कि देश के हर जिले में कम से कम एक ABC सेंटर स्थापित किया जाए, जहां प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो। अदालत ने माना कि मौजूदा व्यवस्था कई स्थानों पर बेहद कमजोर है और इसका सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।